आदिकाल का विमुक्त क्षेत्र से बलिया बनने की कहानी

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स्वतंत्र प्रभात

आदिशक्ति धमरा के कुल से भी युवा उतावले हो रहे थे नयी धरती पर जाने के लिये। ब्रिटिश इतिहासकार मि0 एफ0 एच0 फिशर 1884 ई0 के शासकीय गजेटियर में प्राचीन किंदवंती के हवाले लिखते भी हैं कि हिमालय के उत्तर सुषानगर (ईरान) के प्रजापति ब्रह्मा जी तक आद्य पत्रकार नारद जी यह समाचार पहुँचाते हैं कि दक्षिण में पृथ्वी पर एक ऐसी नदी और ऐसा स्थान है जहाँ का जल पीकर कौवा हंस बन गया है।बलिया जिले के पौराणिक इतिहास पर दृष्टि डाली जाए तो इस भू- भाग को पूर्वकाल में विमुक्त क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। यह कथानक पुराणों में भी मिलता है।

इस विमुक्त क्षेत्र में भगवान शिव की साधना और उनके द्वारा प्यार के देवता कामदेव को भष्म करने का भी उल्लेख मिलता है।महाभारत के रचनाकार वेद व्यास जी का इसी भू भाग पर जन्म हुआ था। प्रचेता-ब्रह्मा जी अपने मार्गदर्शक मंडल के मुखिया पिता कश्यप से सलाह कर अपने पुत्र महर्षि भृगु को इस भू-भाग पर भेजते हैं।अंगे्रज अंगिरा की खोज पवित्र अग्नि के साथ महर्षि भृगु अपने खगोलीय ज्ञान का उपयोग करते हुए विमुक्त भूमि पर पधारें थे। महर्षि भृगु के इस भू-भाग पर आकर आश्रम बनाने के बाद इसे भृगुक्षेत्र के नाम से जाना जाने लगा ।

कालखण्ड ने करवट बदला। महर्षि भृगु के पुत्र शुक्र – शुक्राचार्य ने मातृकुल परम प्रतापी राजा बलि का त्रयलोक विजयी यज्ञ भृगुक्षेत्र में ठान दिया था। अग्निहोत्र करने वाले प्रत्यक्ष युद्ध में इस दैत्याधिपति से जीत नहीं सकते थे। श्री हरि विष्णु की शरण में गये। राजा बलि को छल से पराजित करने की योजना बनी।

विष्णु जी वामन ब्राह्मण बनकर अग्निहोत्र हेतु मात्र तीन पग भूमि की भिक्षा मांगने आयें। सभी पूर्व संबंधों को बताया, कुलगुरु शुक्राचार्य जी ने सावधान किया था किन्तु दानवीर बनने की अभिलाषा ने राजा बलि को सम्पूर्ण साम्राज्य से च्युत कर बंदी जीवन व्यतीत करने के लिए बाध्य कर दिया।वैसे ऋषि भृगु के शिष्य दर्दर मुनि के नाम से दर्दर क्षेत्र और वहां लगने वाला ददरी मेला के नाम से बलिया विश्व विख्यात हो गया है।

रामायणकाल में महर्षि विश्वामित्र जी के साथ अयोध्या के दोनों राजकुमार श्रीराम-लक्ष्मण इस भू-भाग पर आते हैं। वर्तमान सिद्धागर घाट लखनेश्वरडीह  रामघाट नगहर कामेश्वर धाम कारों  सुजायत और उजियार भरौली को इनकी लीलाभूमि के रुप में श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान दिल्ली ने चिन्हित किया है। बाल्मीकीय रामायण के बालकाण्ड के तेइसवें अध्याय में भी इसका उल्लेख है।

राजा राम की निर्वासित पत्नी माता सीता द्वारा तमसा नदी के तट पर स्थित बाल्मीकी ऋषि के आश्रम निवास करने एवं लव कुश के जन्म, राजा श्री राम के राजसूय यज्ञ के घोड़े को उनके पुत्रों  लवकुश द्वारा रोकने और अयोध्या की सेना से युद्ध की साक्षी भूमि होने के भी साक्ष्य बिखरे पड़े हैं। महाभारतकाल के महामनीषी महाभारत महाकाव्य के रचयिता  कौरव-पाण्डव वंश की वंशावली जिनके तेजस् दान से आगे बढ़ी  गुरुपूर्णिमा पर पूजे जाने वाले वेदव्यास जी की जन्मभूमि होने का गौरव भी इसी भूमि को प्राप्त है।बलिया जिले का ज्यादातर भू-भाग मलद  करुष राजाओं के अधीन रहा है। महर्षि विश्वामित्र के साथ प्रभु श्रीराम की यात्रा मार्ग के अन्वेषक  मलद और करुष राज्य की राजधानी बहुत पूछते हैं।

वास्तव में मलद राज्य मल्ल राजाओं के राज्य का अपभ्रंश शब्द है। जिसकी स्थापना भगवान राम ने किया था। अपने जीवनकाल में ही उन्होंने अपने चारों भाईयों के पुत्रों में राज्य का बंटवारा कर दिया था। श्री लक्ष्मण जी के पुत्र चन्द्रकेतु को अवध का यह सीमान्त प्रान्त मिला। चन्द्रकेतु ने वर्तमान लखनेश्वरडीह को अपनी राजधानी बनाया और स्वयं को मल्ल राजा घोषित किया था। मल्ल का शाब्दिक अर्थ बलवान होता है। मल्ल राज्य के दक्षिण में काशी राज्य की सीमा समाप्त होने के बाद करुष राज्य की सीमा प्रारम्भ होती थी। वर्तमान बलिया जिले के भू-भाग को और स्पष्ट रूप में बताया जाये तो जिले का गड़हा परगना करुष राज्य में था। द्वाबा परगना अंग राज्य के अन्तर्गत आता था। खरीद और बाँसडीह परगना पर वज्जी शासन करते थे। सिकन्दरपुर, कोपाचीट और लखनेश्वरडीह परगना पर मल्लों का राज था।

महाजनपदकाल में भी मल्ल  करूष राज्य के इस भू-भाग पर अनेक महत्वपूर्ण घटनाएँ घटित हुई थी। मुगलकाल में भी यह भू-भाग अनेक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

बलिया जिले के नामकरण के बारे में भी ढेर सारी कहानियाँ हैं। बलिया गजेटियर के अनुसार पौराणिक काल में यहाँ महर्षि भृगु के आश्रम में उनके पुत्र शुक्राचार्य द्वारा दानवराज दानवीर राजा बलि का यज्ञ सम्पन्न कराया गया था। संस्कृत में यज्ञ को याग कहा जाता है। जिससे इसका नाम बलियाग पड़ा था  जिसका अपभ्रंश बलिया है। कुछ विद्वानों का मत है कि यह बुलि राजाओं की राजधानी रहा है। बलिया गजेटियर में कुछ विद्वानों ने बाल्मीकी आश्रम के बारे में लिखा है जिससे इसका नाम बालमिकीया से बलिया पड़ा है। इसी गजेटियर में बालुकामय भू भाग से बलिया नाम पड़ने का उल्लेख मिलता है।

इतिहास की माने तो ईसापूर्व 603 से 551 पूर्वेसा तक काशी, कोसल और मगध साम्राज्य की राजनीति में यह उर्वर  ऊर्जित  मनोहारी भूमि कभी आर कभी पार होती रही है।  मौर्य सम्राट अशोक ने बुद्ध जहाँ बैठकर अपने शिष्यों  को उपदेश दिये थे  वहाँ शिलालेख लगवा दिया है। भोरे भरवली के अमावं गाँव में स्थित इस उपदेश स्थल पर डॉ ओल्डहेम को दिव्य ज्योति के दर्शन होते हैं।ऐसा उन्होंने स्वयं लिखा है।

हम पुनः जन्मभूमि बलिया लौटते हैं। पुष्यमित्र शुंग के शासनकाल के पतन बाद जिले के कोसल राज्य के अधीन रहे  लखनेश्वरडीह  भदाँव और सिकन्दरपुर परगना में चेरों और भाँड़ का आधिपत्य हो गया था। बाँसडीह  द्वाबा  कोपाचीट परगना चेरूओं के अधीन हो गया था। जिसके प्रचुर पुरातात्विक प्रमाण प्राप्त होते हैं।चेरु राजा भरन किताई ने ही मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा पराजित उज्जैन के राजा भोज को और बाँसडीह में आये निकुम्भ राजाओं को शरण दिया था।

मुस्लिम आक्रमणकारियों में सबसे पहले सन् 1194 ई0 में कुतुबुद्दीन ऐबक बलिया जिले की सरहद में कुतुबगंज घाट पर आया। सन् 1202 ई0 में इख्तियार मुहम्मद ने घाघरा नदी के तट पर स्थित कठौड़ा और कुतुबगंज के समृद्ध नगर पर अधिकार कर लिया। यहाँ यह एक उल्लेख करना उचित होगा कि बलिया जिले का एक बहुत छोटा राज्य हल्दी जिसके यशस्वी तिलकधारी राजा श्री रामदेव जी हुए, वह मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा कभी जीते नहीं जा सके।सन् 1302 ई0में बादशाह बख्तियार खिलजी ने सबसे पहले वर्तमान बलिया जिले के नाम पर अंग देश (वर्तमान बिहार) और बंगदेश (वर्तमान बंगाल) के कुछ भू-भाग को लेकर बलिया नाम से राजस्व वसूली की इकाई बलिया महाल बनाया था ।

सन् 1493 ई0 में सिकन्दर लोदी बलिया के घाघरा नदी के तट पर स्थित कठौड़ा आया था। 05 मई 1529 ई0 में बलिया जिले के खरीद घाघरा नदी के किनारे बाबर और महमूद लोदी के बीच एक निर्णायक युद्ध हुआ था । जिसमें बाबर विजयी हुआ था । 05 मई 1529 ई0 को बाबर और महमूद लोदी के बीच मध्ययुगीन इतिहास की पहली जल और थल पर हुई जंग का साक्षी बलिया का खरीद बना।मुगल बादशाह औरंगजेब की मौत के बाद बलिया में राजपूत जमींदार शासन करने लगे। किन्तु सन् 1719 ई0 में जब मुहम्मद शाह दिल्ली की गद्दी पर बैठा,तो उसने इन जमींदारों से लगान वसूल कराने लगा।29 दिसम्बर 1764 ई0 को इस जिले का भू भाग भी ईस्ट इंडिया कंपनी सरकार के अधीन हो गया था।सन् 1798 ई0में जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने गाजीपुर जिले को बनाया, तब बलिया को गाजीपुर जिले की एक तहसील बनाया गया था। 01 नवम्बर 1879 ई0 में ब्रिटिश साम्राज्य के शासकों ने बलिया जिले की स्थापना किया था ।बौद्धकालीन इतिहास में भी इस भू-भाग के बारे में अनेक महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। डॉ भीमराव अम्बेडकर ने अपनी पुस्तक द बुद्धा एण्ड हिज धम्मा में लिखा है कि- राजकुमार सिद्धार्थ ने महर्षि भृगु के आश्रम में कुछ समय रहकर यज्ञ कर्मकांड और साधना की विधियों को सीखा था।

वैसे आज का बलिया उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ मण्डल का बलिया जनपद 25.33 तथा 26.11 उत्तरी अक्षांश एवं 83ः39 तथा 84ः39 पूर्वी देशान्तर पर स्थित है । इस जिले की उत्तरी सीमा सरयू नदी जिसे यहाँ घाघरा देवहा कहा जाता है तय करती है। इस नदी के पार उत्तर दिशा में उत्तर प्रदेश का देवरिया जिले एवं बिहार के सीवान जिले की सीमा है। इसकी दक्षिण सीमा का निर्धारण गंगा नदी करती है। जिसके पार बिहार प्रांत के भोजपुर और बक्सर जिले की सीमा पड़ती है। इस जिले की पूर्वी सीमा पर घाघरा नदी की धारा गंगा में मिलती है । जो इसकी सीमा का निर्धारण करती है । इसके पूर्व में बिहार के छपरा जिले की सीमा है। पश्चिम दिशा में इस जिले की सीमा पर उत्तरप्रदेश के गाजीपुर और मऊ जिले हैं ।बलिया जिले की सम्पूर्ण लम्बाई पूरब से पश्चिम तक 184 किलोमीटर है और चैड़ाई उत्तर से दक्षिण की ओर 60 किलोमीटर है। जिले का कुल क्षेत्रफल 3103 वर्ग किलोमीटर अर्थात 313539 हेक्टेयर है।गंगा और घाघरा नदियों के दोआब में बसे बलिया जिले को धरातलीय संरचना के आधार पर खादर और बांगर दो भागों में विभक्त किया जाता है। नदियों के खादर क्षेत्र की जलोढ़ मिट्टी में रेत मिश्रित होती है। इस भू भाग में साधारणतया प्रतिवर्ष गंगा और घाघरा नदियों के द्वारा लाई गई नयी मिट्टी की परत चढती रहती है।बलिया जिले की कुल जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 3239774 है।

जिसमें 1672902 पुरुष और 1566872 महिला हैं। कुल बच्चे (छः साल तक) 471852 जिसमें बालक 248293 और 223559 बालिका हैं ।जिले की कुल साक्षरता 1963590 (70.94) साक्षर पुरुष 1160960 साक्षर महिलाएं 802630 है। पुरुष-महिला का अनुपात 1000: 937 है। जनसंख्या का घनत्व 1087 प्रति वर्ग किलोमीटर है ।जिले के सांख्यिकीय विभाग द्वारा जारी आकडे के अनुसार वर्ष 2011-12 में तीन लोकसभा क्षेत्र बलिया सलेमपुर और घोसी तथा सात विधानसभा क्षेत्र बैरिया बलिया सदर बाँसडीह फेफना सिकन्दरपुर बेल्थरारोड और रसड़ा है ।वर्तमान बलिया जिले में छः तहसीले बलिया सदर बैरिया बाँसडीह सिकन्दरपुर बेल्थरारोड और रसड़ा है।

बलिया जिले में सत्रह क्षेत्र पंचायतें ( सामुदायिक विकासखंड) सीयर  नगरा रसड़ा चिलकहर नवानगर पन्दह मनियर बेरुवारबारी बाँसडीह रेवती गडवार सोहांव हनुमानगंज दुबहड बेलहरी बैरिया और मुरलीछपरा हैं । बलिया जिले में 163 न्यायपंचायतें और 833 ग्रामपंचायतें हैं ।जिले में आबाद गाँवों की संख्या 1830 है गैर आबाद गाँव 530 है कुल गाँवों की संख्या 2360 है।बलिया जिले में वर्ष 2017 तक कुल दस नगरीय निकाय है। दो नगरपालिका बलिया एवं रसड़ा तथा बाँसडीह सिकन्दरपुर मनियर रेवती सहतवार चितबड़ागाँव बेल्थरारोड और बैरिया नगर पंचायतें हैं।जिले में कुल 23 पुलिस स्टेशन हैं जिसमें 14 ग्रामीण थाने और 09 नगरीय कोतवाली हैं ।जिले में 2220 प्राथमिक विद्यालय 905 उच्च प्राथमिक विद्यालय 454 माध्यमिक स्तर के विद्यालय 65 स्नातकोत्तर महाविद्यालय और एक जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय है ।

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