पंचायत चुनाव ने बदली गांव की तस्वीर, प्रत्याशी कर रहे रहे दवा दारू से लेकर फसल काटने तक का इंतजाम ।

पंचायत चुनाव के प्रति योगगुरु ने दिया एकता और भाईचारे का संदेश

पंचायत चुनाव ने बदली गांव की तस्वीर, प्रत्याशी कर रहे रहे दवा दारू से लेकर फसल काटने तक का इंतजाम ।

पहले ढूंढ़ने से नहीं मिलते थे मजदूर, अब प्रत्याशी ठेके पर कटवा रहे हैं फसल

[चरम पर पहुंचा दावतों का दौर, पुलिस के सारे प्रयास फेल गांवोें में खुलकर बंट रही शराब]

ए .के .फारूखी (रिपोर्टर)

ज्ञानपुर,भदोही ।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव ने गांव का मौहाल बदल दिया है। गांव के सत्ता की चाह ने दावेदारों को मतदाताओं के ड्योढ़ी पर मत्था टेकने के लिए मजबूर तो कर ही दिया है, लेकिन अब ये खेत खलिहान में भी नजर आने लगे है। दावत और शराब पार्टी तो गांवों की शाम को रंगीन बना ही रही है। अब प्रत्याशियों को दबा और फसल भी याद आने लगी है। सुरक्षित सीटों पर प्रत्याशी तो फसल तक कटवाने का जिम्मा ले ले रहे है। जबकि चुनाव से पहले खोजने पर मजदूर नहीं मिल रहे थे। माहौल विल्कुल दिलचस्प हो गया है।

इस बार पंचायत चुनाव ऐसे समय में पड़ा जब पहले होली का पर्व था और अब रबी के फसलों की कटाई हो रही है। चुनावी माहौल है लेकिन सुबह शाम किसान खेत खलिहान में अपनी छह महीने की मेहनत को संजोने में लगा है। जिसके कारण सुबह शाम गांव की गलियों में सन्नाट पसर जा रहा है। चुनाव नजदीक है प्रत्याशियों की बेचैनी चरम है। कारण कि मतदाता खुलने के लिए तैयार नहीं है।

हर दिन दिन ढलने से पहले दावतों का दौर शुरू हो जा रहा है। शराब के साथ नानवेज का चखना शाम को रंगीन बना रहा है। जो गरीब साल भर नमक रोटी खाकर जीवन गुजारते हैं उनके घर भी चुनाव ने रौनक ला दी है। कारण कि प्रत्याशियों को अब उनमें भी अपना भविष्य दिख रहा है। खाने पीने के साथ ही दवा तक का इंतजाम प्रत्याशी करने में जुटे है।

सुबह किसान खेत में फसल काटने पहुंचे इसके पहले ही पगडंगी पर प्रत्याशी दिख रहे हैं। प्रधान जी अभी वोट की मिन्नत मांग हटे नहीं पता चला कि जिला पंचायत प्रत्याशी पहुंच गए। मजेदार बात है कि कल तक मुहंमागी रकम देने पर मजदूर नहीं मिलते थे वहीं चुनावी माहौल में प्रत्याशी फ्री में फसल कटवाने को तैयार हो गए है। खासतौर पर आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार तो तत्काल फसल कटवाने से लेकर मड़ाई तक कराने की जिम्मेदारी संले ले रहे हैं। यानी मतदाताओं को रिझाने की कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

यहीं नहीं मजदूरों के लिए शराब और कबाब की व्यवस्था की जा रही है। मतदाता भी मौके का पूरा फायदा उठा रहे हैं। सबकी हा में हा और सबकी दावत का भरपूर मजा। खासबात है कि इस बार मतदाता खुलकर किसी के साथ खड़ा नहीं हो रहा है। जिससे प्रत्याशी संसय में पड़े हुए है कि इतना खर्च के बाद भी क्या वे चुनाव जीत पाएंगे।

प्रशासन अपनी तरफ से पूरी तरह कोशिश कर रहा है कि शराब और मीट पार्टी पर रोक लगा सके लेकिन नाकाम है। पुलिस ने आधा दर्जन लोेगों को मीट पार्टी करते व शराब बांटते गिरफ्तार जरूर किया है लेकिन प्रत्याशी पुलिस पर भारी पड़ रहे है। कारण कि सभी दावत का मजा ले रहे हैं तो शिकायत कौन करें।

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