दिनदयाल उपायाय की जयंति सुहावल कोठी पर मनायी गयी

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स्वतंत्र प्रभात

भाटपार रानी देवरिया– एकात्म मानववाद दर्शन के प्रणेता व भारतीय जनसंघ के संस्थापक पं दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर सोहावल कोठी में आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुये भाटपार रानी विधानसभा के   भाजपा ‘नेता व मालवीय संस्थान के प्रबंधक श्री राघवेन्द्र वीर विक्रम सिंह ने कहा कि ‘एकात्म मानववाद’ भारतीय संस्कृति का वह मूल विचार है जो संपूर्ण मानवता के लिए सबसे ज़रूरी है।एक राष्ट्र और एक महान संस्कृति के तौर पर भारत की भौतिक और आत्मिक समृद्धि का मूल मंत्र हमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद से ही प्राप्त हो सकता है ! इस अवसर पर बोलते हुये भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष व प्रखर वक्ता डॉ.पवन कुमार राने कहा कि पण्डित दीनदयाल  उपाध्याय महान चिंतक थे.

उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानव दर्शन जैसी प्रगतिशील विचारधारा दी. पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद के दर्शन पर श्रेष्ठ विचार व्यक्त किए हैं. उन्होंने अपनी पुस्तक एकात्म मानववाद (इंटीगरल ह्यूमेनिज्म) में साम्यवाद और पूंजीवाद, दोनों की समालोचना की गई है. एकात्म मानववाद में मानव जाति की मूलभूत आवश्यकताओं और सृजित कानूनों के अनुरुप राजनीतिक कार्रवाई हेतु एक वैकल्पिक सन्दर्भ दिया गया है. दीनदयाल उपाध्याय का मानना है कि हिन्दू कोई धर्म या संप्रदाय नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय संस्कृति हैं। इस अवसर पर कमलेश यादव,प्रवीण शाही,टाईगर यादव,राघवजी यादव,जितेन्द्र यादव,संतोष सिंह,सत्येन्द्र यादव ,श्रीनिवास यादव आदि लोग उपस्थित थे।