स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही

संदिग्ध कोरोना संक्रमित मरीज की जांच रिपोर्ट आने से पहले मौत

जांच रिपोर्ट आने से पहले शव परिजनों को सौंपा

ब्यूरो रिपोर्ट-जयदीप शुक्ला

गोण्डा-

जिला चिकित्सालय आये दिन अपने कार्यो से कम कारनामो से ज्यादा चर्चा में बना रहता है।
यहां आए दिन विभागीय लोगो की लापरवाही से जहां प्रशासन पर उंगली उठनी तय रहती है वहीं इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।
अभी कुछ दिन पहले शहर के एक भाजपा पदाधिकारी की कोरोना संक्रमण की जांच में रिपोर्ट पोजटिव आयी थी।
जिसके बाद संक्रमित युवक को स्वास्थ्य विभाग ने एडमिट करवा दिया लेकिन परिजनों व मरीज से संपर्क में आने वाले किसी व्यक्ति की जांच नही करवाई गई।
इसी बीच संक्रमित युवक के पिता की तबियत खराब होने पर उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया।
सबसे पहले वृद्ध मरीज की कोरोना संक्रमण की जांच के लिए शेम्पल लिया गया।उसके बाद उपचार शुरू किया गया।
इसी दौरान वृद्ध की मौत हो गयी।
मौत के बाद शव को परिजनों को शौंप दिया गया।
लेकिन शव परिजनों को सौंपने के बाद आयी जांच रिपोर्ट में वृद्ध कोरोना पोजटिव निकला।
जिसके बाद नायब तहसीलदार व पुलिस की मौजूदगी में पीपीई किट परिजनों को उपलब्ध कराके प्रोटोकाल के तहत शव का अंतिम संस्कार कराया गया।
कोरोना संक्रमण से जिस व्यक्ति की मौत हुई वह दीवानी न्यायालय में अधिवक्ता भी थे जिसके कारण अधिवक्ताओं में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को लेकर काफी आक्रोश है।
अधिवक्ता विवेकमणि श्रीवास्तव द्वारा प्रशासन द्वारा हुई बड़ी लापरवाही को लेकर काफी नोकझोंक भी हुई।
उंन्होने इसके संबंध में प्रशासन से मांग की है कि उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने का मौका दिया जाए।
विदित हो कि इस समय प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ जनपद के दौरे पर हैं।
वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि संक्रमित मरीज मिलने के बाद उसके संपर्क में आने वालों की कोविड जांच पांच दिनों के बाद की जाती है।
लेकिन फिर भी सवाल उठ रहा है कि मृतक व्यक्ति की कोरोना संक्रमण की जांच रिपोर्ट आने के पहले ही कैसे व क्यों शव को परिजनों को सौंप दिया गया।
क्या जांच रिपोर्ट का इंतजार नही किया जा सकता था।

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