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                <title>National Pride - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>National Pride RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जेपीएस किड्स प्ले पब्लिक स्कूल में मनाया गया 80 वा स्वतंत्रता दिवस</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>रायबरेली l गुरुबक्शगंज </strong>स्थित सीएस सी बाल विद्यालय ( *जेपीएस किड्स प्ले पब्लिक स्कूल*) में आज 80वा स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षौल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय के संरक्षक अशोक शुक्ला , प्रबन्धक मोहित शुक्ला , डायरेक्टर रोहित शुक्ला तथा इस आयोजन में उपस्थित गुरुबक्सगंज थाना अध्यक्ष संजय सिंह जी साथ ही अन्य गणमान्य लोगों द्वारा झंडारोहण किया गया उसके पश्चात माता सरस्वती की पूजा अर्चना व वीर शहीदों को माल्यार्पण करते हुए इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्ले ग्रुप, नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी के बच्चों द्वारा विभिन्न प्रकार के नृत्य, देशभक्ति गीत, प्रस्तुत किए गए। अत्यंत उत्साह से भरकर</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185372/80th-independence-day-celebrated-at-jps-kids-play-public-school"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260815-wa0441.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>रायबरेली l गुरुबक्शगंज </strong>स्थित सीएस सी बाल विद्यालय ( *जेपीएस किड्स प्ले पब्लिक स्कूल*) में आज 80वा स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षौल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय के संरक्षक अशोक शुक्ला , प्रबन्धक मोहित शुक्ला , डायरेक्टर रोहित शुक्ला तथा इस आयोजन में उपस्थित गुरुबक्सगंज थाना अध्यक्ष संजय सिंह जी साथ ही अन्य गणमान्य लोगों द्वारा झंडारोहण किया गया उसके पश्चात माता सरस्वती की पूजा अर्चना व वीर शहीदों को माल्यार्पण करते हुए इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्ले ग्रुप, नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी के बच्चों द्वारा विभिन्न प्रकार के नृत्य, देशभक्ति गीत, प्रस्तुत किए गए। अत्यंत उत्साह से भरकर बच्चों ने इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर को मनाया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विद्यालय के डायरेक्टर रोहित शुक्ला ने बताया कि प्रत्येक वर्ष इस राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों द्वारा अनेकों प्रस्तुतियां दर्शाई जाती हैं जिसका उद्देश्य बच्चों को देश के बलिदानों तथा महापुरुषों के बारे में जानकारी देना है व सभी को 80वे स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कार्यक्रम में उपस्थित विद्यालय की प्रधानाचार्या छवि बाजपेई ने बताया कि यह दिन हमें स्वतंत्रता, समानता और न्याय का महत्व सिखाता है। हमारे संविधान ने हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की भी याद दिलाई है। प्रतियोगिताएं हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो हमें एक दिन ऊंचाइयों तक ले जाती है तथा स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी। साथ ही इस आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित विद्यालय की शिक्षिकाएं अर्चना,आस्था ,आकृति, हर्षिता, रेहा,सिमरन,दामिनी, पूजा शर्मा, भावना, किरन, पूजा दीक्षित,रंजना, नाजिया आदि समस्त स्टॉफ उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 19:54:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसजेएस लालगंज में हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया स्वतंत्रता दिवस </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, रायबरेली।</strong> शहर के बहु चर्चित अंग्रेजी माध्यम के अग्रणी शिक्षण संस्थान एसजेएस पब्लिक स्कूल लालगंज में बड़े ही हर्षोल्लास एवं धूमधाम से 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक अग्रज सिंह ने ध्वजारोहण किया तथा तथा राष्ट्रगान के साथ तिरंगे को सलामी दी। उन्होंने अपने संबोधन में आए हुए सभी अतिथियों, क्षेत्र वासियों व छात्र-छात्राओं को स्वतंत्रता दिवस की शुभ शुभकामनाएं दी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही यह भी बताया कि यह आजादी तभी सार्थक है जब हम सभी अपने कार्यों का दायित्व कर्तव्य निष्ठा व ईमानदारी के साथ पूर्ण करें। उन्होंने यह भी समझाने का प्रयास किया</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185367/independence-day-celebrated-with-enthusiasm-in-sjs-lalganj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/17868885445532.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, रायबरेली।</strong> शहर के बहु चर्चित अंग्रेजी माध्यम के अग्रणी शिक्षण संस्थान एसजेएस पब्लिक स्कूल लालगंज में बड़े ही हर्षोल्लास एवं धूमधाम से 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक अग्रज सिंह ने ध्वजारोहण किया तथा तथा राष्ट्रगान के साथ तिरंगे को सलामी दी। उन्होंने अपने संबोधन में आए हुए सभी अतिथियों, क्षेत्र वासियों व छात्र-छात्राओं को स्वतंत्रता दिवस की शुभ शुभकामनाएं दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही यह भी बताया कि यह आजादी तभी सार्थक है जब हम सभी अपने कार्यों का दायित्व कर्तव्य निष्ठा व ईमानदारी के साथ पूर्ण करें। उन्होंने यह भी समझाने का प्रयास किया कि हम वर्तमान समय में सीमा में जाकर के अपने देश की सेवा तो नहीं कर सकते लेकिन हम जहां पर हैं वहां पर हम शिक्षा के माध्यम से अपने देश के सम्मान को साथ ही अपने जिले के सम्मान को बढ़ा सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हमें अपने जीवन में यह शपथ लेनी चाहिए कि हम वैसे ही सच्चे सिपाही बने जैसे कि मातृभूमि की रक्षा के लिए वीरों ने अपना बलिदान दिया।कार्यक्रम की इसी कड़ी में विद्यालय की प्रधानाचार्या अंजू सिंह ने अपने संदेश में समस्त नगर वासियों, आए हुए अतिथियों व छात्र-छात्राओं को स्वतंत्रता दिवस की शुभ शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर बच्चों ने बढ़-चढ़कर अनेक मनमोहक व देशभक्ति से प्रेरित करने वाले रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। जिससे समूचा विद्यालय प्रांगण देश भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। विद्यालय की अंग्रेजी शिक्षिका आरती सिंह ने विद्यालय में आए हुए सभी अतिथियों व छात्र-छात्राओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त छात्र-छात्राएं तथा शिक्षक उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 19:50:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा नेता नितेश शर्मा के नेतृत्व में भानपुर में उमड़ा जनसैलाब, निकाली भव्य ‘तिरंगा यात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर देश के प्रति प्रेम और एकता का संदेश देने के लिए भानपुर के उकड़ा हनुमान मंदिर से सोनहा बाजार तक भव्य ‘तिरंगा यात्रा’ का आयोजन भाजपा नेता नितेश शर्मा एवं लक्ष्मीकांत पांडेय पप्पू के संयुक्त संयोजन में किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह यात्रा बस्ती डुमरियागंज मार्ग पर उकड़ा से भानपुर कस्बा होते हुए सोनहा बाजार पहुंची, जहाँ जगह-जगह पर नागरिकों ने फूलों की वर्षा कर इसका स्वागत किया।  हाथों में तिरंगा थामे युवाओं और स्थानीय लोगों ने 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के गगनभेदी नारे लगाए, जिससे पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185363/people-gathered-in-bhanpur-under-the-leadership-of-bjp-leader"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260816-wa0042-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर देश के प्रति प्रेम और एकता का संदेश देने के लिए भानपुर के उकड़ा हनुमान मंदिर से सोनहा बाजार तक भव्य ‘तिरंगा यात्रा’ का आयोजन भाजपा नेता नितेश शर्मा एवं लक्ष्मीकांत पांडेय पप्पू के संयुक्त संयोजन में किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह यात्रा बस्ती डुमरियागंज मार्ग पर उकड़ा से भानपुर कस्बा होते हुए सोनहा बाजार पहुंची, जहाँ जगह-जगह पर नागरिकों ने फूलों की वर्षा कर इसका स्वागत किया।  हाथों में तिरंगा थामे युवाओं और स्थानीय लोगों ने 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के गगनभेदी नारे लगाए, जिससे पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आयोजकों ने बताया कि यह तिरंगा यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से हमारे अमर शहीदों के बलिदान को याद करने और देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने का संकल्प लेने के लिए किया गया सोनहा बाजार स्थित लोक निर्माण विभाग के डाकबंगले पर यात्रा के समापन पर आयोजित संक्षिप्त सभा में भाजपा नेता लक्ष्मीकांत पांडेय, नितेश शर्मा, सत्येंद्र शुक्ल जिप्पी, चंद्रभान गुप्ता, राकेश शर्मा, सुजीत सोनी, विजय तिवारी, राकेश उपाध्याय, रामनेवास गिरी, ओमप्रकाश शुक्ल, उमाकांत शुक्ल, मनोज पांडेय, प्रधान संघ अध्यक्ष सोनू मिश्र, इंद्रसेन उपाध्याय, सत्यप्रकाश मिश्र, अन्नू उपाध्याय, मिंडर भट्ट सहित अनेक वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा हमारी शान और देश के गौरव का प्रतीक है। सभी क्षेत्रवासियों से अपील की गई कि वे अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर गर्व के साथ तिरंगा फहराएं तथा राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। कार्यक्रम के अंत में सभी ने देश की एकता और सुरक्षा की शपथ ली।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 19:48:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रद्धापूर्वक मनाया गया कारगिल विजय दिवस </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सरस्वती विद्या मंदिर माधव ज्ञान केंद्र, में शनिवार को कारगिल विजय दिवस  मनाया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">।इस अवसर पर छात्राओं श्रद्धा पांडे, नियति पटेल एवं साक्षी उपाध्याय तथा विद्यालय के शिक्षक अगम पाठक ने कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों के अद्वितीय शौर्य, बलिदान एवं राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण पर प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">।कार्यक्रम में विद्यालय देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित सभी का मन मोह लिया। </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानाचार्य अजय कुमार मिश्र ने  कारगिल के अमर वीरों के त्याग और बलिदान को नमन करते हुए विद्यार्थियों से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने तथा अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184074/kargil-vijay-diwas-celebrated-with-devotion"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260725-wa0102-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरस्वती विद्या मंदिर माधव ज्ञान केंद्र, में शनिवार को कारगिल विजय दिवस  मनाया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">।इस अवसर पर छात्राओं श्रद्धा पांडे, नियति पटेल एवं साक्षी उपाध्याय तथा विद्यालय के शिक्षक अगम पाठक ने कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों के अद्वितीय शौर्य, बलिदान एवं राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण पर प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">।कार्यक्रम में विद्यालय देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित सभी का मन मोह लिया। </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानाचार्य अजय कुमार मिश्र ने  कारगिल के अमर वीरों के त्याग और बलिदान को नमन करते हुए विद्यार्थियों से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने तथा अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने का संदेश दिया।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 20:47:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जब तिरंगा बना भारत की पहचान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस भारतीय इतिहास का एक ऐसा गौरवपूर्ण अवसर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हमें स्वतंत्रता संग्राम की महान विरासत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाता है। प्रत्येक वर्ष </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi">  जुलाई को मनाया जाने वाला यह दिवस उस ऐतिहासिक निर्णय का स्मरण कराता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi">  जुलाई </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi">  को संविधान सभा ने भारत के वर्तमान तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में औपचारिक रूप से स्वीकार किया। यह निर्णय केवल एक ध्वज के चयन तक सीमित नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक ऐसे राष्ट्र की सामूहिक चेतना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मसम्मान और भविष्य की</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183898/when-the-tricolor-became-the-identity-of-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/indian-flag-detail.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस भारतीय इतिहास का एक ऐसा गौरवपूर्ण अवसर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हमें स्वतंत्रता संग्राम की महान विरासत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाता है। प्रत्येक वर्ष </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi"> जुलाई को मनाया जाने वाला यह दिवस उस ऐतिहासिक निर्णय का स्मरण कराता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi"> जुलाई </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> को संविधान सभा ने भारत के वर्तमान तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में औपचारिक रूप से स्वीकार किया। यह निर्णय केवल एक ध्वज के चयन तक सीमित नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक ऐसे राष्ट्र की सामूहिक चेतना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मसम्मान और भविष्य की दिशा का उद्घोष था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सदियों की दासता के बाद स्वतंत्रता की दहलीज पर खड़ा था। इस अवसर पर संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रीय ध्वज संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। इसके साथ ही भारत को ऐसा राष्ट्रीय प्रतीक मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आज भी करोड़ों भारतीयों की आशाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आकांक्षाओं और राष्ट्रीय गौरव का प्रतिनिधित्व करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी राष्ट्र का ध्वज केवल रंगों से बना हुआ वस्त्र नहीं होता। वह उस देश के इतिहास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूल्यों और भविष्य की आकांक्षाओं का जीवंत प्रतीक होता है। जब कोई नागरिक अपने राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक देखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके मन में स्वाभाविक रूप से अपने देश के प्रति प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सम्मान और समर्पण का भाव जागृत होता है। भारत का तिरंगा भी इसी भावना का प्रतीक है। यह हमें बताता है कि हमारी पहचान केवल किसी क्षेत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाषा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जाति या धर्म से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक राष्ट्र के नागरिक होने से है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत का राष्ट्रीय ध्वज तीन समान क्षैतिज पट्टियों से बना है। सबसे ऊपर गहरा केसरिया रंग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो साहस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्याग और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। मध्य में सफेद रंग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सत्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शांति और पारदर्शिता का संदेश देता है। सबसे नीचे हरा रंग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो समृद्धि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और जीवन की निरंतरता का प्रतीक है। सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग का अशोक चक्र अंकित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें चौबीस तीलियां हैं। यह चक्र सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के धर्मचक्र से प्रेरित है। अशोक चक्र निरंतर गति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्याय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्तव्य और प्रगतिशील जीवन का संदेश देता है। इसका अर्थ यह है कि कोई भी राष्ट्र तभी आगे बढ़ सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह निरंतर कर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नैतिकता और विकास के मार्ग पर चलता रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तिरंगे का वर्तमान स्वरूप एक लंबी ऐतिहासिक यात्रा का परिणाम है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अनेक प्रकार के राष्ट्रीय ध्वज प्रस्तावित किए गए। बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में कई क्रांतिकारियों और राष्ट्रवादियों ने ऐसे ध्वज तैयार किए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भारत की स्वतंत्रता की आकांक्षा को व्यक्त करते थे। वर्ष </span>1921<span lang="hi" xml:lang="hi"> में आंध्र प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने महात्मा गांधी के समक्ष एक ध्वज का प्रारूप प्रस्तुत किया। समय के साथ उसमें परिवर्तन हुए। वर्ष </span>1931<span lang="hi" xml:lang="hi"> में कांग्रेस ने एक तिरंगे ध्वज को स्वीकार किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें मध्य में चरखा था। यही ध्वज आगे चलकर स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज का आधार बना। </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi"> जुलाई </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> को संविधान सभा ने निर्णय लिया कि चरखे के स्थान पर अशोक चक्र को स्थान दिया जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ध्वज राष्ट्रीय और सार्वभौमिक मूल्यों का अधिक व्यापक प्रतिनिधित्व कर सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण का निर्णय ऐसे समय लिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब भारत स्वतंत्रता प्राप्ति से कुछ ही सप्ताह दूर था। देश विभाजन की पीड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांप्रदायिक तनाव और अनिश्चित भविष्य जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा था। ऐसे समय में एक ऐसा राष्ट्रीय प्रतीक आवश्यक था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पूरे देश को एक सूत्र में बांध सके। तिरंगा इसी राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। इसने भारतवासियों को यह विश्वास दिलाया कि विविधताओं से भरे इस विशाल देश की आत्मा एक है और उसका भविष्य भी साझा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की सबसे बड़ी विशेषता उसकी विविधता है। यहां सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनेक धर्मों का पालन किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलग</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">अलग परंपराएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहनावे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोजन और जीवन शैली देखने को मिलती हैं। फिर भी जब राष्ट्रीय ध्वज लहराता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह सभी भेदभाव स्वतः गौण हो जाते हैं। तिरंगा हमें याद दिलाता है कि हम सबसे पहले भारतीय हैं। यही भावना भारत की लोकतांत्रिक शक्ति और राष्ट्रीय एकता की सबसे बड़ी आधारशिला है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब भी किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय खिलाड़ी पदक जीतते हैं और तिरंगा ऊंचा उठता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब करोड़ों भारतीयों की आंखें गर्व से भर जाती हैं। चाहे ओलंपिक हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व कप हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष अभियान हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक उपलब्धियां हों या वैश्विक मंचों पर भारत की सफलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर उपलब्धि के साथ तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे राष्ट्र की उपलब्धि का प्रतीक बन जाता है। यही कारण है कि प्रत्येक भारतीय अपने राष्ट्रीय ध्वज के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ महसूस करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय सशस्त्र बलों के लिए तिरंगे का महत्व और भी अधिक है। देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक इसी ध्वज की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। अनेक वीर सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन तिरंगे की शान को कभी झुकने नहीं दिया। जब किसी शहीद का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर अपने घर पहुंचता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब वह दृश्य पूरे राष्ट्र को भावुक कर देता है और प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्य की याद दिलाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान केवल राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका वास्तविक सम्मान तभी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हम अपने दैनिक जीवन में संविधान के आदर्शों का पालन करें। ईमानदारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिश्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक सद्भाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानून का सम्मान और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा जैसे व्यवहार ही तिरंगे के प्रति सच्ची श्रद्धा के प्रतीक हैं। यदि कोई नागरिक राष्ट्रहित को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर रखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वही राष्ट्रीय ध्वज का वास्तविक सम्मान करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और उसके उचित उपयोग के लिए ध्वज संहिता बनाई गई है। समय के साथ इसमें परिवर्तन भी किए गए हैं ताकि नागरिक अधिक सहजता से राष्ट्रीय ध्वज के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकें। हालांकि ध्वज का उपयोग करते समय उसकी गरिमा और सम्मान बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का नैतिक और कानूनी दायित्व है। राष्ट्रीय ध्वज कभी भी किसी प्रकार के अपमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यावसायिक दुरुपयोग या अनुचित प्रदर्शन का माध्यम नहीं बनना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस विशेष रूप से नई पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रेरणादायक अवसर है। आज के युवाओं के सामने विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रौद्योगिकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल और नवाचार जैसे अनेक क्षेत्र खुले हुए हैं। यदि युवा अपने ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिभा और परिश्रम के माध्यम से भारत को विश्व में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यही तिरंगे के प्रति उनकी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। केवल हाथ में तिरंगा लेकर उत्सव मनाना पर्याप्त नहीं है। आवश्यक यह है कि उसके आदर्शों को अपने व्यक्तित्व और कार्यों में भी उतारा जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विद्यालयों और महाविद्यालयों में राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस का आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम और नागरिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का उत्कृष्ट माध्यम बन सकता है। इस अवसर पर ध्वज के इतिहास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता संग्राम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संविधान सभा की भूमिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व और नागरिक कर्तव्यों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। इससे विद्यार्थियों में इतिहास के प्रति सम्मान और भविष्य के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज जब भारत विश्व मंच पर तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब राष्ट्रीय ध्वज का महत्व और भी बढ़ जाता है। चंद्रयान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदित्य मिशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल प्रगति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक कूटनीति और खेलों में उपलब्धियां यह सिद्ध करती हैं कि भारत निरंतर आगे बढ़ रहा है। इन सभी सफलताओं के केंद्र में वही तिरंगा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हमें निरंतर प्रगति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास और राष्ट्रीय एकता की प्रेरणा देता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भविष्य के लिए संकल्प लेने का भी दिन है। यह हमें स्मरण कराता है कि स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उत्तरदायित्व भी है। जिस तिरंगे को लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान की विरासत प्राप्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी गरिमा बनाए रखना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है। जब तक भारत का प्रत्येक नागरिक सत्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईमानदारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिश्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को अपने जीवन का आधार बनाए रखेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक तिरंगा सदैव गर्व के साथ लहराता रहेगा। यही राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस का सबसे बड़ा संदेश है और यही स्वतंत्र भारत की अमर पहचान भी है। जय हिंद।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/183898/when-the-tricolor-became-the-identity-of-india</link>
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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 21:51:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वीर शहीद नरेंद्र कुमार यादव के परिवार के साथ खड़े हुए दिया 50 हजार का सहयोग।मनीष मिश्रा,</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के यशस्वी गरीबों मसीहा समाजसेवी मनीष मिश्रा ने देश के वीर सपूत अमर शहीद स्वर्गीय नरेंद्र कुमार यादव के पैतृक गांव अहरा मुंडेरवा पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर कभी नहीं मरते, बल्कि वे प्रत्येक भारतीय के हृदय में सदैव अमर रहते हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">मनीष भैया ने कहा कि शहीदों का बलिदान शब्दों से कहीं अधिक महान होता है। ऐसे वीर सपूतों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब समाज उनके</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182926/standing-with-the-family-of-brave-martyr-narendra-kumar-yadav"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260708-wa0029.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के यशस्वी गरीबों मसीहा समाजसेवी मनीष मिश्रा ने देश के वीर सपूत अमर शहीद स्वर्गीय नरेंद्र कुमार यादव के पैतृक गांव अहरा मुंडेरवा पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर कभी नहीं मरते, बल्कि वे प्रत्येक भारतीय के हृदय में सदैव अमर रहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मनीष भैया ने कहा कि शहीदों का बलिदान शब्दों से कहीं अधिक महान होता है। ऐसे वीर सपूतों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब समाज उनके परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और सहयोग के लिए आगे आए। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर जवानों के कारण ही हम सभी सुरक्षित हैं और उनका ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शहीद के परिवार से मुलाकात के दौरान मनीष भैया ने ₹50,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी संस्था "पहल" के माध्यम से परिवार के एक सदस्य को नौकरी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, ताकि परिवार को आत्मनिर्भर बनने में सहयोग मिल सके।उन्होंने शहीद परिवार के लिए पक्का मकान बनवाने  का वादा भी किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मनीष भैया ने कहा कि वह ऐसा घर बनवाना चाहते हैं जिसकी हर ईंट देश के वीर सपूत के अमर बलिदान की गाथा सुनाए और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा दे।मनीष भैया ने यह भी कहा कि यह केवल एक औपचारिक सहायता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य निभाने का प्रयास है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि शहीद के परिवार की हर संभव सहायता भविष्य में भी की जाएगी और परिवार को किसी भी आवश्यकता के समय अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "यह कोई एहसान नहीं, बल्कि उस तिरंगे का सम्मान है, जिसके लिए हमारे वीर जवान अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि मुझे इतना सामर्थ्य दें कि मैं अपने सभी संकल्प पूरे कर सकूं। यही उस अमर शहीद के प्रति मेरी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंत में मनीष भैया ने अमर शहीद स्वर्गीय नरेंद्र कुमार यादव को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि देश सदैव अपने वीरों का ऋणी रहेगा और प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह शहीदों के परिवारों के सम्मान और सहयोग के लिए आगे आए।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 18:10:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फिरोजपुर से लेह-लद्दाख के लिए रवाना हो रही 21 सिख रेजिमेंट का MLA लालपुरा ने किया गर्मजोशी से स्वागत*</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>तरनतारन, </strong> फिरोजपुर से अपनी अगली तैनाती के लिए लेह-लद्दाख के लिए रवाना हो रहे 21 सिख रेजिमेंट के ऑफिसर और सैनिक हल्का खडूर साहिब के रसूलपुर नहरों पर कबीला रेस्टोरेंट पहुंचे। इस मौके पर, हल्का खडूर साहिब के MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा, जो 21 सिख रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं, ने सभी मिलिट्री ऑफिसर, सैनिकों और पूर्व सैनिकों का गर्मजोशी से स्वागत किया।</div>
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<div style="text-align:justify;">इस दौरान, पूर्व सैनिकों और अभी सेवा दे रहे सैनिकों ने एक-दूसरे से मिलकर पुरानी यादें ताजा कीं। इस मौके पर, सभी सैनिकों ने एक साथ बैठकर लंच किया। इस मौके पर यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181552/mla-lalpura-warmly-welcomed-the-21-sikh-regiment-leaving-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000910053.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>तरनतारन, </strong> फिरोजपुर से अपनी अगली तैनाती के लिए लेह-लद्दाख के लिए रवाना हो रहे 21 सिख रेजिमेंट के ऑफिसर और सैनिक हल्का खडूर साहिब के रसूलपुर नहरों पर कबीला रेस्टोरेंट पहुंचे। इस मौके पर, हल्का खडूर साहिब के MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा, जो 21 सिख रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं, ने सभी मिलिट्री ऑफिसर, सैनिकों और पूर्व सैनिकों का गर्मजोशी से स्वागत किया।</div>
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<div style="text-align:justify;">इस दौरान, पूर्व सैनिकों और अभी सेवा दे रहे सैनिकों ने एक-दूसरे से मिलकर पुरानी यादें ताजा कीं। इस मौके पर, सभी सैनिकों ने एक साथ बैठकर लंच किया। इस मौके पर यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर (CO) अरज बेनीवाल, कई JCO और दूसरे मिलिट्री ऑफिसर खास तौर पर मौजूद थे।</div>
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<div style="text-align:justify;">इस मौके पर 21 सिख रेजिमेंट के सभी एक्स-सर्विसमैन ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सामने माथा टेका और रुमाला साहिब भेंट किया। MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा और एक्स-सर्विसमैन ने ऑफिसर्स को श्री हरमंदिर साहिब का सुंदर मॉडल देकर सम्मानित किया। इस दौरान यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर (CO) अरज बेनीवाल और दूसरे मिलिट्री ऑफिसर्स ने MLA लालपुरा को खास तौर पर मोमेंटो देकर सम्मानित किया और उनका धन्यवाद किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा ने इस मौके पर कहा कि 21 सिख रेजिमेंट के साथ बिताया गया समय उनकी ज़िंदगी का गर्व भरा चैप्टर है। उन्होंने कहा कि मिलिट्री कम्युनिटी की एकता, डिसिप्लिन और देशभक्ति हर युवा के लिए इंस्पिरेशन का सोर्स है। उन्होंने देश की रक्षा के लिए सभी सर्विंग और रिटायर्ड सैनिकों के योगदान को सलाम किया, लेह-लद्दाख के लिए रवाना हो रही पूरी यूनिट को शुभकामनाएं दीं और उनकी सुरक्षित और सफल सर्विस के लिए प्रार्थना की। इस मौके पर कैप्टन दयाल सिंह, कैप्टन कुलदीप सिंह, निरवाल सिंह रटोके, धीरा सिंह, कुलदीप सिंह फेलके आदि मौजूद थे।</div>
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<div style="text-align:justify;">फोटो कैप्शन:</div>
<div style="text-align:justify;">- MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा 21 सिख रेजिमेंट के अधिकारियों को सम्मानित करते हुए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:18:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>आत्मनिर्भरता स्वाभिमानी राष्ट्र का प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्वावलंबन या आत्मनिर्भरता ही मनुष्य को स्वाधीन बनाने की प्रेरणा देती है। आत्मनिर्भरता की स्थिति में व्यक्ति अपनी इच्छाओं अपनी सुविधा अनुसार पूरा कर सकता है, इसके लिए दूसरों की तरफ मुंह ताकने की जरूरत नहीं पड़ती है। आत्मनिर्भरता केवल मनुष्य के लिए व्यक्तिगत रूप से ही जरूरी नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए भी अति आवश्यक है ।एक स्वतंत्र राष्ट्र अपनी जनता को अपनी क्षमता के अनुसार सारी सुविधाएं तथा अन्य जीवन उपयोगी साधन उपलब्ध करा सकता है। भारत स्वतंत्रता के बाद हरित क्रांति सातवें दशक के प्रारंभ के बाद ही खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन सका, इसके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181459/self-reliance-is-a-symbol-of-a-self-respecting-nation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वावलंबन या आत्मनिर्भरता ही मनुष्य को स्वाधीन बनाने की प्रेरणा देती है। आत्मनिर्भरता की स्थिति में व्यक्ति अपनी इच्छाओं अपनी सुविधा अनुसार पूरा कर सकता है, इसके लिए दूसरों की तरफ मुंह ताकने की जरूरत नहीं पड़ती है। आत्मनिर्भरता केवल मनुष्य के लिए व्यक्तिगत रूप से ही जरूरी नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए भी अति आवश्यक है ।एक स्वतंत्र राष्ट्र अपनी जनता को अपनी क्षमता के अनुसार सारी सुविधाएं तथा अन्य जीवन उपयोगी साधन उपलब्ध करा सकता है। भारत स्वतंत्रता के बाद हरित क्रांति सातवें दशक के प्रारंभ के बाद ही खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन सका, इसके साथ ही भारत में खुशहाली की स्वाभाविक तौर पर वृद्धि हुई, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी कहा था कि "एक राष्ट्र की शक्ति उसकी आत्मनिर्भरता में है दूसरों से उधार लेकर काम चलाने में नहीं",पाकिस्तान की स्थिति बिल्कुल ऐसी ही है वह अभी तक स्वतंत्रता के बाद से 75 वर्ष के बाद भी संपूर्ण रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है, वह कर्जे से डूब गया है और अपने देश में खर्चा चलाने के लिए पूरी दुनिया से उधार मांगते हुए घूम रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान आत्मनिर्भर नहीं होने का एवं उधार की जिंदगी जीने का एक बहुत बड़ा उदाहरण है। जबकि भारत देश विज्ञान, टेक्नोलॉजी, मेडिकल साइंस,इंजीनियरिंग और कृषि सेवा, खनिज,स्पेस रिसर्च में पूर्णता आत्मनिर्भर होकर विकसित देशों के बराबर खड़ा हुआ है। यह देशवासियों और देश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। आत्मनिर्भरता या स्वावलंबन किसी भी देश की प्रगति विकास तथा और उसके नागरिकों की जिंदगी की जिजीविषा है जिससे वह संघर्ष कर आगे बढ़ता है। इतिहास गवाह है कि किसी भी महान लेखक को महान बनने तक निरंतर मेहनत कर किताबें लिखने का का श्रम करना पड़ा एवं आत्मनिर्भरता की स्थिति में विचार कर अपने विचारों को लिपिबद्ध करना पड़ा तब जाकर वह महानता की श्रेणी को प्राप्त कर सका। इसी तरह कोई छात्र अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है तो उसे स्वयं परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा एवं परीक्षा में मनोवांछित सफलता प्राप्त कर उसे स्वयं अध्ययन करना होगा। इसी प्रकार जीवन के हर क्षेत्र में भी मनुष्य को आत्मनिर्भर होकर मेहनत कर दीक्षित सफलता प्राप्त करनी पड़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारा देश भारत भी आजादी के बाद से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रेषित हुआ आज स्थिति यह है कि वह विश्व में विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आ खड़ा हुआ है। तमाम महापुरुषों के जीवन से भी हमें आत्मनिर्भरता तथा स्वावलंबन की शिक्षा मिलती रहती है।महात्मा गांधी अपना कार्य स्वयं किया करते थे। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी "दैव दैव आलसी" पुकारा है, तब जाकर उनकी जिंदगी पटरी पर आई और हमें परिश्रम कर आत्म निर्भर होने की शिक्षा प्रदान की थी। दूसरों पर निर्भरता हमें दूसरों का अनुसरण करने के लिए मजबूर करती है। दूसरों पर निर्भर होने से हमें के अनुरूप ही जीवन जीने के लिए बाध्य होना पड़ता है। पराधीनता हमारा आत्मविश्वास सृजनशीलता सोचने की शक्ति को नष्ट कर देती है। गुलामी एक अभिशाप होती है, आत्मनिर्भरता की कमी हमें किंकर्तव्यविमूढ़ बना देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरों की कृपा पर जीने वाला व्यक्ति जीवन के अक्षय आनंद से वंचित रहता है। खुद के परिश्रम श्रम से आगे बढ़ने वाला देश या व्यक्ति या समाज सदैव प्रफुल्लित आत्म विश्वासी तथा विकास की ओर सदैव अग्रसर रहता है। हमें सदैव अपने अंदर के आत्मविश्वास, छिपी हुई क्षमताओं मनोबल का सहारा लेकर आत्मनिर्भर या स्वावलंबी बनने का प्रयास हमेशा करते रहना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य को मनुष्य होने का अधिकार प्राप्त होता है। पराधीन देश सामान्य व्यक्ति सदैव पशु तुल्य होते हैं। जिनका अपना कोई विचार या व्यक्तित्व नहीं हो सकता है। कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता - राम सहायक उनके होते, जो होते हैं, आप सहायक, हम सबको स्वयं पर भरोसा रखना आत्मबल बढ़ाने तथा आत्मनिर्भर होने की प्रेरणा देती रहती हैं।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:45:45 +0530</pubDate>
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