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                <title>kendra sarkar - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>kendra sarkar RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में अधिवक्ताओं का प्रदर्शन, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के अधिवक्ता संघ एवं बार एसोसिएशनके पदाधिकारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्रस्तावित नए नियमों के समर्थन में शनिवार को आज्ञाराम यादव एडवोकेट, प्रदीप यादव एडवोकेट, संदीप गोयल एडवोकेट, बुद्धि प्रकाश एडवोकेट, सत्येंद्र यादव, रवि यादव एडवोकेट के नेतृत्व में जनपद के अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र होकर यूजीसी बिल 2026 को शीघ्र लागू किए जाने की मांग उठाई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन के उपरांत अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से सौंपा। प्रदर्शन कर रहे महिपाल पटेल, मयंक चौरसिया एडवोकेट, राम प्रसाद चौरसिया एडवोकेट का कहना था कि</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168522/advocates-demonstrate-in-support-of-new-ugc-rules-submit-memorandum"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260207-wa0286.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के अधिवक्ता संघ एवं बार एसोसिएशनके पदाधिकारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्रस्तावित नए नियमों के समर्थन में शनिवार को आज्ञाराम यादव एडवोकेट, प्रदीप यादव एडवोकेट, संदीप गोयल एडवोकेट, बुद्धि प्रकाश एडवोकेट, सत्येंद्र यादव, रवि यादव एडवोकेट के नेतृत्व में जनपद के अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र होकर यूजीसी बिल 2026 को शीघ्र लागू किए जाने की मांग उठाई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन के उपरांत अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से सौंपा। प्रदर्शन कर रहे महिपाल पटेल, मयंक चौरसिया एडवोकेट, राम प्रसाद चौरसिया एडवोकेट का कहना था कि यूजीसी के नए नियम उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम हैं। इन नियमों के लागू होने से शिक्षा में पारदर्शिता आएगी, शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ स्वार्थी तत्व इन सुधारों का विरोध कर रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी बिल 2026 को शीघ्र लागू नहीं किया गया तो वे बृहद आंदोलन करने को बाध्य होंगे। एडवोकेट भालचंद्र यादव, विजय चौधरी एडवोकेट, देवेंद्र कुमार एडवोकेट, आलोक प्रसाद एडवोकेट ने कहा कि यह आंदोलन केवल अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें शिक्षाविदों और समाज के अन्य वर्गों को भी जोड़ा जाएगा।प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने यूजीसी के समर्थन में नारे लगाए और सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा राष्ट्र की रीढ़ है और उसमें सुधार के लिए लाए गए किसी भी सकारात्मक कदम का समर्थन किया जाना चाहिए। प्रदर्शन में मुकेश कुमार प्रजापति, रवि चंद्र यादव, ईश्वर लाल चौधरी वा अन्य अधिवक्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 17:41:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब कर्मचारी को मिलेगा सेवानिवृत्ति पर 50% वेतन, केंद्र सरकार ने पेंशन योजना में बदलाव किया</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="Headlines mb-3">
<div class="Headlines mb-3">
<div class="descriptionC">
<p><strong>नई एकीकृत पेंशन योजना-</strong> केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से अपने कर्मचारियों के लिए एक नई एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को लागू करने की घोषणा की है। यह योजना राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत काम करने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को एक विकल्प के रूप में मिलेगी, जो सेवानिवृत्ति लाभों की गारंटी सुनिश्चित करेगी। यह योजना कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षा कवच बन सकती है, जिससे उन्हें अपनी सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक राहत मिल सकेगी।</p>
<p><strong>10 साल से अधिक वाले सभी कर्मचारियों को पेंशन - </strong>केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी</p></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147980/now-the-employee-will-get-50-salary-on-retirement-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/2025_1image_17_20_010092754100rs-ll.jpg" alt=""></a><br /><div class="Headlines mb-3">
<div class="Headlines mb-3">
<div class="descriptionC">
<p><strong>नई एकीकृत पेंशन योजना-</strong> केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से अपने कर्मचारियों के लिए एक नई एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को लागू करने की घोषणा की है। यह योजना राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत काम करने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को एक विकल्प के रूप में मिलेगी, जो सेवानिवृत्ति लाभों की गारंटी सुनिश्चित करेगी। यह योजना कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षा कवच बन सकती है, जिससे उन्हें अपनी सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक राहत मिल सकेगी।</p>
<p><strong>10 साल से अधिक वाले सभी कर्मचारियों को पेंशन - </strong>केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी 25 साल से कम, लेकिन 10 साल से अधिक सेवा करता है, तो उसे आनुपातिक आधार पर पेंशन मिलेगी। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को उनकी सेवा के हिसाब से पेंशन मिलेगी, जो उन्हें लाभ पहुंचाएगी। इस कदम से कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद एक सुनिश्चित आय प्राप्त करने का विश्वास मिलेगा।</p>
<p><strong> 50% हिस्सा सुनिश्चित- </strong>एकीकृत पेंशन योजना के तहत, केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति से पहले के 12 महीनों में प्राप्त औसत मूल वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलेगा, बशर्ते कि वह कर्मचारी कम से कम 25 साल की सेवा पूरी करता हो। इसका मतलब यह है कि जिन कर्मचारियों ने 25 साल या उससे अधिक की सेवा पूरी की है, उन्हें उनके अंतिम वेतन का 50% हर महीने पेंशन के रूप में मिलेगा, जो उनकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगा।</p>
<p><strong>यूपीएस लागू करने का उद्देश्य- </strong>केंद्र सरकार की यह नई पेंशन नीति कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद की चिंता को कम करने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। इस योजना को लागू करने से केंद्र सरकार के कर्मचारियों को एक स्थिर पेंशन मिलेगा, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर होगा। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों की सुरक्षा और उनके भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।</p>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिज़नेस रिलीज़</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jan 2025 20:34:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आयुष्मान कार्ड धारकों को बड़े निजी अस्पतालों में असुविधा </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>कानपुर।</strong> केन्द्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान कार्ड धारकों को कानपुर के अप्रूव्ड बड़े अस्पतालों में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले तो ये अस्पताल एप्रूवल के नाम पर घंटों लगा देते हैं और उसके बाद तमाम एक्स्ट्रा खर्च भी बता देते हैं।</div>
<div>  </div>
<div>अभी एक ताजा मामला कानपुर के फैमस भार्गव अस्पताल का है जहां पर अस्पताल कर्मचारी मरीज के तीमारदार से कहता है कि आयुष्मान कार्ड को एप्रूवल होने में छै घंटे लगते हैं। जब कि आदेश यह है कि आयुष्मान कार्ड धारकों को पहले स्वस्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए और फिर उस कार्ड को एप्रूवल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143202/ayushman-card-holders-face-inconvenience-in-big-private-hospitals%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/ayush.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कानपुर।</strong> केन्द्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान कार्ड धारकों को कानपुर के अप्रूव्ड बड़े अस्पतालों में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले तो ये अस्पताल एप्रूवल के नाम पर घंटों लगा देते हैं और उसके बाद तमाम एक्स्ट्रा खर्च भी बता देते हैं।</div>
<div> </div>
<div>अभी एक ताजा मामला कानपुर के फैमस भार्गव अस्पताल का है जहां पर अस्पताल कर्मचारी मरीज के तीमारदार से कहता है कि आयुष्मान कार्ड को एप्रूवल होने में छै घंटे लगते हैं। जब कि आदेश यह है कि आयुष्मान कार्ड धारकों को पहले स्वस्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए और फिर उस कार्ड को एप्रूवल कराया जाए। लेकिन यह नामी अस्पताल पहले कैश वाले मरीजों पर ध्यान देते हैं और बाद में। आयुष्मान कार्ड धारकों की सुनते हैं।</div>
<div> </div>
<div>लोगों का कहना है कि आयुष्मान कार्ड धारकों का पैसा सरकार से मिलने में देरी होती है इसलिए यह बड़े अस्पताल पहले इनको टालने की कोशिश करते हैं और बाद में जब मरीज़ के तीमारदार अड़ जाते हैं तब ही यह कार्यवाही करते हैं। आयुष्मान कार्ड केन्द्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है और देश के ग़रीबी रेखा से नीचे वाले लोगों को यह स्वास्थ्य सुविधा फ्री में केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई है। इसका पूरा पैसा केन्द्र व्यय करता है। लेकिन इस प्रक्रिया में कुछ समय लग जाता है।  इसलिए यह अस्पताल आनाकानी करते हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jul 2024 16:55:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार की लचर व्यवस्था की वजह से पूर्वी पाकिस्तान से आये शरणार्थियों को मिली जमीन लगी दांव पर</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong><br /><br /><strong>पीरपैंती (बिहार)</strong> प्रखंड के टुण्डवा उर्फ मुंडवा मौजा स्थित मानिकपुर रिफ्यूजी कलोनी में रह रहे राजवंशी परिवार के समक्ष अब पलायन की स्थिति बनती दिख रही है वही हरधन राजवंशी, शंकर राजवंशी, अनिल राजवंशी आदि शरणार्थियों ने बताया कि तत्कालीन केंद्र सरकार की अनुशंसा पर बिहार सरकार ने उनलोगों को बसने व जीवन यापन के लिए 11.76 एकड़ जमीन स्थानीय जमींदार से खरीद कर आवंटित की थी. जिसके सभी कागजात उनलोगों के पास उपलब्ध हैंl</div>
<div>  </div>
<div>लेकिन अज्ञानता, लापरवाही व अपरिहार्य कारणों से उनलोगों द्वारा आवंटित जमीन का दाखिल खारिज ससमय नहीं करवा सके थे. इस क्रम में शरणार्थीयों</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139087/due-to-the-governments-poor-system-the-land-given-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/img-20240302-wa0127.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong><br /><br /><strong>पीरपैंती (बिहार)</strong> प्रखंड के टुण्डवा उर्फ मुंडवा मौजा स्थित मानिकपुर रिफ्यूजी कलोनी में रह रहे राजवंशी परिवार के समक्ष अब पलायन की स्थिति बनती दिख रही है वही हरधन राजवंशी, शंकर राजवंशी, अनिल राजवंशी आदि शरणार्थियों ने बताया कि तत्कालीन केंद्र सरकार की अनुशंसा पर बिहार सरकार ने उनलोगों को बसने व जीवन यापन के लिए 11.76 एकड़ जमीन स्थानीय जमींदार से खरीद कर आवंटित की थी. जिसके सभी कागजात उनलोगों के पास उपलब्ध हैंl</div>
<div> </div>
<div>लेकिन अज्ञानता, लापरवाही व अपरिहार्य कारणों से उनलोगों द्वारा आवंटित जमीन का दाखिल खारिज ससमय नहीं करवा सके थे. इस क्रम में शरणार्थीयों ने आवंटित जमीन पर आम का बगीचा भी लगाया था. वही अंचल कर्मियों की मांग पूरी नहीं कर पाने से आक्रोशित कर्मियों ने उनलोगों द्वारा लगाये बगीचा की बिक्री कर उसके पैसे सरकारी मद में जमा कर दिया. जिसे अंततः अंचल को कोर्ट के आदेश के बाद उनलोगों को लौटानी पड़ीl</div>
<div> </div>
<div>वही अंचलाधिकारी द्वारा ऑपरेशन बसेरा के तहत बगीचे वाली जगह (खाता संख्या 633 खसरा नंबर 12) को भूमिहीनों के बीच आवंटित कर दिया, अब जमीन का पर्चा पाये गोबिंदपुर रामनगर निवासी विनोद पासवान ने पीरपैंती थाना में राजवंशी परिवार के सात लोगों पर जान से मारने की धमकी देने, मारपीट करने के आरोप सहित एससी/एसटी एक्ट में मामला दर्ज करा दिया है. वही शरणार्थियों ने गुरुवार को डीसीएलआर मो. सरफराज नवाज की स्थलीय जांच के बाद आश्वासन से राहत की सांस ली हैl</div>
<div> </div>
<div>स्थानीय भूतपूर्व सैनिक मनोज कुमार उर्फ मुन्ना गोस्वामी ने कहा* कि यहाँ 1959-60 ई० मे आये शरणार्थीयों में से छह परिवार को साढ़े बारह - साढ़े बारह डिसमिस जमीन दिया गया हैं जो कि खाता संख्या 633, खसरा 348 में स्थित हैं इसके अलावे यहाँ पर किसी भी शरणार्थियों की कोई जमीन नहीं हैं ये लोग क्षेत्र वासियों सहित अधिकारियों एवं माननीय न्यायालय को भी गुमराह करने में लगा हुआ हैं I खाता संख्या 633, खसरा 348 के अलावे शरणार्थी परिवार के द्वारा जो दावा किया जा रहा हैं वो बिलकुल निराधार हैं l<br />वही अंचलाधिकारी मनोहर कुमार ने कहा इस मामले की जाँच विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा हो रही हैं I</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Mar 2024 14:52:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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                <title>जल्द ही गड्ढामुक्त होंगे सभी नेशनल हाइवे केंद्र सरकार का बड़ा फैसला </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्लीः </strong>केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार इस साल के अंत तक राष्ट्रीय राजमार्गों को गड्ढा-मुक्त करने की नीति पर काम कर रही है। इसके साथ ही सड़कों का निर्माण बीओटी माध्यम से करने को भी प्राथमिकता दी जा रही है।</p>
<p>इस साल दिसंबर के अंत तक राष्ट्रीय राजमार्गों को गड्ढों से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय प्रदर्शन-आधारित रखरखाव और अल्पकालिक रखरखाव अनुबंधों को सशक्त बनाने में जुटा हुआ है। आमतौर पर सड़कों का निर्माण तीन तरह से किया जाता है। इनमें ‘बनाओ-चलाओ-सौंप दो' (बीओटी)</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135252/all-national-highways-will-soon-be-pothole-free-a-big"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/17_30_472314181pathhole.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्लीः </strong>केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार इस साल के अंत तक राष्ट्रीय राजमार्गों को गड्ढा-मुक्त करने की नीति पर काम कर रही है। इसके साथ ही सड़कों का निर्माण बीओटी माध्यम से करने को भी प्राथमिकता दी जा रही है।</p>
<p>इस साल दिसंबर के अंत तक राष्ट्रीय राजमार्गों को गड्ढों से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय प्रदर्शन-आधारित रखरखाव और अल्पकालिक रखरखाव अनुबंधों को सशक्त बनाने में जुटा हुआ है। आमतौर पर सड़कों का निर्माण तीन तरह से किया जाता है। इनमें ‘बनाओ-चलाओ-सौंप दो' (बीओटी) के अलावा इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण (ईपीसी) और हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) शामिल हैं।</p>
<p>गडकरी ने कहा, ‘‘ईपीसी माध्यम से बनाई जाने वाली सड़कों के रखरखाव की जरूरत काफी पहले पड़ने लगती है। वहीं बीओटी माध्यम से सड़कें बेहतर बनती हैं क्योंकि ठेकेदार भी जानता है कि उसे अगले 15-20 वर्षों तक रखरखाव की लागत वहन करनी होगी।</p>
<p>इसलिए हमने बड़े पैमाने पर बीओटी माध्यम से ही सड़कें बनाने का फैसला किया है।'' बीओटी परियोजनाओं में निजी साझेदार 20-30 वर्षों की अवधि में परियोजनाओं के वित्तपोषण, निर्माण और संचालन का जिम्मा उठाते हैं। फिर वे राजमार्ग का इस्तेमाल करने वालों से शुल्क या टोल के जरिये अपने निवेश की वसूली करते हैं। उन्होंने कहा कि बारिश की वजह से राजमार्गों को नुकसान होने और गड्ढे बनने की आशंका को देखते हुए मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों का सुरक्षा ऑडिट कर रहा है।</p>
<p>यह सुनिश्चित करने के लिए एक नीति बनाई जा रही है कि राष्ट्रीय राजमार्ग गड्ढों से मुक्त हों। इस परियोजना को सफल बनाने के लिए युवा इंजीनियरों को साथ लिया जाएगा।'' इस मौके पर सड़क परिवहन और राजमार्ग सचिव अनुराग जैन ने कहा कि मंत्रालय ने 1,46,000 किलोमीटर लंबे समूचे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की मैपिंग कर ली है और इस साल दिसंबर तक गड्ढों को हटाने के लिए प्रदर्शन-आधारित रखरखाव और अल्पकालिक रखरखाव अनुबंधों को सशक्त बनाया जा रहा है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Sep 2023 17:48:31 +0530</pubDate>
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