<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/98795/hospital-management" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Hospital Management - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/98795/rss</link>
                <description>Hospital Management RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डीजे स्टेंट विवाद में विद्या अस्पताल के संचालक डॉ.अजय यादव बोले- कोई लापरवाही नहीं हुई, साजिश के तहत फैलाया जा रहा भ्रम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बर्डपुर स्थित विद्या अस्पताल पर मरीज के पेट में ‘डीजे स्टेंट’ छोड़ने के लगे आरोपों पर अस्पताल संचालक अजय यादव की ओर से कड़ा पक्ष सामने आया है। अजय यादव ने आरोपों को एक सिरे से खारिज करते हुए इसे अस्पताल और उनकी छवि को धूमिल करने की सोची-समझी साजिश करार दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">‘चिकित्सीय प्रक्रिया के तहत दूसरा स्टेंट नहीं निकाला गया।मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए अजय यादव ने कहा कि इलाज में किसी तरह की चिकित्सीय लापरवाही नहीं हुई है। मरीज के इलाज के दौरान दो ‘डीजे स्टेंट’ डाले गए थे। इलाज के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186681/in-the-dj-stent-controversy-vidya-hospital-director-dr-jay"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1788013063673.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बर्डपुर स्थित विद्या अस्पताल पर मरीज के पेट में ‘डीजे स्टेंट’ छोड़ने के लगे आरोपों पर अस्पताल संचालक अजय यादव की ओर से कड़ा पक्ष सामने आया है। अजय यादव ने आरोपों को एक सिरे से खारिज करते हुए इसे अस्पताल और उनकी छवि को धूमिल करने की सोची-समझी साजिश करार दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">‘चिकित्सीय प्रक्रिया के तहत दूसरा स्टेंट नहीं निकाला गया।मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए अजय यादव ने कहा कि इलाज में किसी तरह की चिकित्सीय लापरवाही नहीं हुई है। मरीज के इलाज के दौरान दो ‘डीजे स्टेंट’ डाले गए थे। इलाज के बाद प्रक्रिया के तहत एक स्टेंट निकाल दिया गया था, जबकि मरीज के गुर्दे (किडनी) में सूजन होने के कारण चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार दूसरे स्टेंट को उस समय नहीं निकाला गया था। उन्होंने कहा कि कुछ लोग है जो अज्ञानता के कारण चिमटी चिमटा बोलकर भ्रम फैलाया जा रहा है ।जबकि  वह डीजे स्टैंट है (किड़नी) गुर्दे के ऑपरेशन के बाद डीजे स्टैंट डालना अनिवार्य होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ.अजय यादव ने पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि खुद मरीज रमेश पटवा की ओर से कोई तहरीर या शिकायती पत्र नहीं दिया गया है, बल्कि किसी अन्य बाहरी व्यक्ति द्वारा यह शिकायत दर्ज कराई गई है। थाना मोहाना पुलिस को मुकदमा दर्ज करने से पहले स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से जांच करानी चाहिए थी। यदि विभागीय जांच में लापरवाही की बात सामने आती, तब कानूनी कार्रवाई करना उचित होता। लेकिन बिना किसी जांच-पड़ताल के महज दो घंटे के भीतर मुकदमा दर्ज कर दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संचालक डॉ.अजय यादव का कहना है कि उन्हें और उनके अस्पताल को बदनाम करने की नीयत से सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो चलाकर लगातार साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि वे स्वास्थ्य विभाग की किसी भी निष्पक्ष जांच का सामना करने को तैयार हैं, जिससे मामले की सच्चाई पूरी तरह से सामने आ जाएगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186681/in-the-dj-stent-controversy-vidya-hospital-director-dr-jay</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/186681/in-the-dj-stent-controversy-vidya-hospital-director-dr-jay</guid>
                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 19:54:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/1788013063673.jpg"                         length="94716"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रीभूमि जिले के दुल्लभछड़ा मॉडल अस्पताल सिर्फ नाम का</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात:</strong>                श्रीभूमि जिले के दुल्लभछड़ा मॉडल अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को लेकर क्षेत्रवासियों में बढ़ रहा असंतोष जिले के दुल्लभछड़ा मॉडल अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का आरोप लगाया जा रहा है। गंभीर अथवा विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता पड़ने पर आज भी क्षेत्र के मरीजों को श्रीभूमि सिविल अस्पताल अथवा अन्य स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करना पड़ता है। इस स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि अस्पताल में ईएनटी (कान, नाक</div>
</div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186616/dulabhchhada-model-hospital-of-shribhoomi-district-is-in-name-only"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1001742063.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात:</strong>        श्रीभूमि जिले के दुल्लभछड़ा मॉडल अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को लेकर क्षेत्रवासियों में बढ़ रहा असंतोष जिले के दुल्लभछड़ा मॉडल अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का आरोप लगाया जा रहा है। गंभीर अथवा विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता पड़ने पर आज भी क्षेत्र के मरीजों को श्रीभूमि सिविल अस्पताल अथवा अन्य स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करना पड़ता है। इस स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि अस्पताल में ईएनटी (कान, नाक एवं गला), त्वचा रोग, स्त्री रोग, नेत्र रोग और दंत चिकित्सा सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियमित सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा हाथ टूटने अथवा हड्डी में चोट लगने जैसी स्थिति में भी आवश्यक प्लास्टर और संबंधित चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण मरीजों को श्रीभूमि सिविल अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि गंभीर और सामान्य बीमारियों के उपचार के लिए भी मरीजों को बार-बार दूसरे अस्पतालों में भेजना पड़े, तो दुल्लभछड़ा मॉडल अस्पताल को किस हद तक ‘मॉडल’ कहा जा सकता है? उनका कहना है कि अस्पताल कई मामलों में मरीजों को इलाज उपलब्ध कराने के बजाय दूसरे अस्पतालों में रेफर करने का केंद्र बनकर रह गया है। इस स्थिति का सबसे अधिक असर मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ रहा है। इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों तक आने-जाने में अतिरिक्त समय और धन खर्च होता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह परेशानी और गंभीर हो जाती है। कई मरीज मजबूरी में श्रीभूमि के निजी चिकित्सकों से उपचार कराने को विवश होते हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। क्षेत्रवासियों के अनुसार, श्रीभूमि सिविल अस्पताल में भी इलाज के लिए मरीजों को लंबे समय तक कतार में इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में दुल्लभछड़ा से मरीजों को बार-बार बाहर रेफर किए जाने से उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। विशेषकर आपातकालीन परिस्थितियों में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा का अभाव गंभीर चिंता का विषय बन सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल अस्पताल का नाम बदलने, भवन तैयार करने या बुनियादी ढांचा विकसित करने से स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर नहीं हो सकती। अस्पताल को वास्तव में मॉडल बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, आवश्यक जांच सुविधाओं, संबंधित विभागों की नियमित सेवाओं तथा मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। क्षेत्रवासियों ने इस मामले में असम के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों की मांग है कि दुल्लभछड़ा मॉडल अस्पताल में जल्द से जल्द आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए और सभी महत्वपूर्ण विभागों में नियमित चिकित्सा सेवाएं शुरू की जाएं। क्षेत्रवासियों की स्पष्ट मांग है कि दुल्लभछड़ा मॉडल अस्पताल सिर्फ नाम से मॉडल न रहे, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और पूर्ण चिकित्सा सेवाओं के मामले में भी वास्तव में ‘मॉडल’ बने।</div>
</div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186616/dulabhchhada-model-hospital-of-shribhoomi-district-is-in-name-only</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/186616/dulabhchhada-model-hospital-of-shribhoomi-district-is-in-name-only</guid>
                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 18:08:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/1001742063.jpg"                         length="107808"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुफ्त दवा योजना पर संकट नहीं समाधान की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लाखों मरीजों की उम्मीद का सबसे बड़ा केंद्र है। हर दिन हजारों मरीज दूर-दराज के गांवों और कस्बों से यहां इस विश्वास के साथ पहुंचते हैं कि उन्हें बेहतर इलाज के साथ सरकार की निशुल्क दवा योजना का लाभ मिलेगा। लेकिन जब इलाज के बाद डॉक्टर की लिखी दवाएं अस्पताल के काउंटर पर उपलब्ध नहीं होतीं तो मरीज और उसके परिजनों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। हाल के दिनों में जीवनरक्षक दवाओं सहित बड़ी संख्या में दवाओं की अनुपलब्धता की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182978/free-medicine-scheme-is-not-a-crisis-but-a-solution"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/medicines_1534214900_1732846876853.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लाखों मरीजों की उम्मीद का सबसे बड़ा केंद्र है। हर दिन हजारों मरीज दूर-दराज के गांवों और कस्बों से यहां इस विश्वास के साथ पहुंचते हैं कि उन्हें बेहतर इलाज के साथ सरकार की निशुल्क दवा योजना का लाभ मिलेगा। लेकिन जब इलाज के बाद डॉक्टर की लिखी दवाएं अस्पताल के काउंटर पर उपलब्ध नहीं होतीं तो मरीज और उसके परिजनों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। हाल के दिनों में जीवनरक्षक दवाओं सहित बड़ी संख्या में दवाओं की अनुपलब्धता की खबरें सामने आई हैं। यह स्थिति निश्चित रूप से चिंता का विषय है और इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गरीब और मध्यम वर्ग का बड़ा हिस्सा सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहता है। निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदना हर परिवार के लिए आसान नहीं होता। विशेष रूप से कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए नियमित दवाएं जीवन का आधार होती हैं। यदि ऐसी दवाएं समय पर नहीं मिलें तो बीमारी बढ़ सकती है और आर्थिक बोझ भी कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि निशुल्क दवा योजना को राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं में गिना जाता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जयपुर के एसएमएस अस्पताल में जिन मरीजों को एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक भेजा गया, कई दिनों बाद आने के लिए कहा गया या फिर बाहर से दवा खरीदने की सलाह दी गई, उनकी परेशानी को सहज रूप से समझा जा सकता है। जो मरीज सैकड़ों किलोमीटर दूर से किराया खर्च करके अस्पताल पहुंचता है, उसके लिए केवल दवा ही नहीं बल्कि दोबारा आने-जाने का खर्च भी बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे मरीजों के सामने यह प्रश्न खड़ा हो जाता है कि वह इलाज कराए या परिवार का खर्च चलाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह भी सच है कि यह समस्या केवल जयपुर तक सीमित नहीं दिखाई देती। प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में समय-समय पर कुछ दवाओं की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं सप्लाई में देरी होती है तो कहीं खरीद प्रक्रिया पूरी होने तक मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। इससे सरकार की अच्छी योजनाओं की छवि प्रभावित होती है। जनता यह नहीं देखती कि कमी किस स्तर पर हुई है। उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि अस्पताल पहुंचने पर दवा मिलनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हालांकि इस पूरे विषय को केवल आलोचना के दृष्टिकोण से देखना भी उचित नहीं होगा। राजस्थान सरकार ने पिछले कई वर्षों में चिकित्सा सुविधाओं का उल्लेखनीय विस्तार किया है। नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, जिला अस्पतालों का सुदृढ़ीकरण, मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना और निशुल्क जांच योजना जैसी पहल ने लाखों गरीब परिवारों को राहत दी है। यदि ये योजनाएं नहीं होतीं तो गरीब मरीजों का इलाज और भी कठिन हो जाता। इसलिए यह कहना उचित होगा कि योजना में कमी नहीं है बल्कि उसके क्रियान्वयन के कुछ हिस्सों में सुधार की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अस्पताल प्रशासन का यह कहना भी महत्वपूर्ण है कि कुछ दवाएं राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड से उपलब्ध नहीं हो पातीं तो स्थानीय स्तर पर खरीद की जाती है। कई बार आपूर्ति करने वाली कंपनियों की ओर से विलंब होने के कारण अस्थायी समस्या उत्पन्न हो जाती है। यदि वास्तव में ऐसा है तो इसका समाधान भी प्रशासनिक स्तर पर संभव है। दवाओं की उपलब्धता का नियमित आकलन, समय रहते नई खरीद प्रक्रिया और वैकल्पिक व्यवस्था से इस प्रकार की कठिनाइयों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य व्यवस्था जितनी बड़ी होती है, चुनौतियां भी उतनी ही अधिक होती हैं। राजस्थान जैसे विशाल राज्य में करोड़ों लोगों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना आसान कार्य नहीं है। दवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है और कई बार अनुमान से अधिक मरीज आने के कारण स्टॉक जल्दी समाप्त हो जाता है। इसलिए इस समस्या को केवल लापरवाही कह देना भी पूरी तस्वीर नहीं दर्शाता। आवश्यकता इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग, अस्पताल प्रशासन और दवा आपूर्ति एजेंसियां मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करें जिससे आवश्यक दवाओं का भंडार हमेशा सुरक्षित रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तकनीक का बेहतर उपयोग भी इस दिशा में बड़ा समाधान बन सकता है। यदि सभी सरकारी अस्पतालों में दवाओं का ऑनलाइन स्टॉक रियल टाइम अपडेट हो तो यह पहले ही पता चल जाएगा कि कौन सी दवा कितनी मात्रा में बची है और कब नई खेप की आवश्यकता होगी। इससे आपूर्ति में होने वाली देरी को काफी हद तक रोका जा सकता है। मरीजों को भी मोबाइल या हेल्पलाइन के माध्यम से यह जानकारी मिल सके कि संबंधित दवा किस अस्पताल में उपलब्ध है। इससे उन्हें अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">साथ ही अस्पतालों में मरीजों के साथ संवाद की व्यवस्था भी बेहतर होनी चाहिए। यदि किसी दवा की अस्थायी कमी है तो मरीज को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि दवा कब तक उपलब्ध होगी या उसका सुरक्षित विकल्प क्या है। कई बार जानकारी के अभाव में मरीज अधिक परेशान हो जाता है। संवेदनशील व्यवहार और स्पष्ट सूचना भी आधी समस्या का समाधान कर देती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस विषय में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की भी भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्हें केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहने के बजाय स्थानीय स्तर पर समस्याओं की जानकारी सरकार तक पहुंचानी चाहिए। जहां भी दवा की कमी हो, वहां तत्काल समाधान के लिए प्रयास होने चाहिए। स्वास्थ्य सेवा राजनीति का नहीं बल्कि मानवता का विषय है। इसलिए सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सरकार के सामने यह अवसर भी है कि वह इस घटना को एक चेतावनी के रूप में लेकर पूरे प्रदेश में दवा आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करे। जिन अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की कमी है वहां तत्काल अतिरिक्त स्टॉक भेजा जाए। खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा तेज बनाया जाए। जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है, वहां जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए। इससे जनता का विश्वास और मजबूत होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अंततः किसी भी कल्याणकारी सरकार की पहचान केवल योजनाएं बनाने से नहीं बल्कि उन्हें अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने से होती है। राजस्थान की निशुल्क दवा योजना लाखों लोगों के लिए वरदान रही है और इसे और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। यदि दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित हो जाए तो गरीब मरीजों को न तो जेब से खर्च करना पड़ेगा और न ही इलाज अधूरा छोड़ने की मजबूरी होगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अनेक सकारात्मक कदम उठाए हैं और उनका लाभ भी समाज को मिला है। अब आवश्यकता इस बात की है कि दवा आपूर्ति से जुड़ी कमियों को शीघ्र दूर किया जाए ताकि कोई भी मरीज केवल दवा की अनुपलब्धता के कारण पीड़ा न झेले। एक संवेदनशील और उत्तरदायी स्वास्थ्य व्यवस्था ही विकसित राजस्थान की पहचान बनेगी, जहां इलाज के साथ भरोसा भी हर मरीज को समान रूप से प्राप्त हो।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182978/free-medicine-scheme-is-not-a-crisis-but-a-solution</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/182978/free-medicine-scheme-is-not-a-crisis-but-a-solution</guid>
                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 21:22:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/medicines_1534214900_1732846876853.webp"                         length="50944"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाज सरकारी, दवा बाजार से ! विक्रमजोत सीएचसी पर मरीजों के गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>विक्रमजोत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टरों पर मरीजों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में सरकारी दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें नहीं दी जातीं और अधिकांश दवाएं बाहर की मेडिकल दुकानों से खरीदने के लिए लिख दी जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सरोज देवी, अनीता, कमला, राम करन और गोविंद प्रसाद सहित कई मरीजों ने बताया कि वे सरकारी अस्पताल में इस उम्मीद से इलाज कराने आते हैं कि उन्हें बेहतर चिकित्सकीय सुविधा और निःशुल्क दवाएं मिलेंगी। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर अधिकांश दवाएं बाहर से खरीदने के लिए लिख देते हैं, जिससे गरीब और</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181321/serious-allegations-of-patients-on-vikramjot-chc-for-treatment-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0017.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>विक्रमजोत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टरों पर मरीजों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में सरकारी दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें नहीं दी जातीं और अधिकांश दवाएं बाहर की मेडिकल दुकानों से खरीदने के लिए लिख दी जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरोज देवी, अनीता, कमला, राम करन और गोविंद प्रसाद सहित कई मरीजों ने बताया कि वे सरकारी अस्पताल में इस उम्मीद से इलाज कराने आते हैं कि उन्हें बेहतर चिकित्सकीय सुविधा और निःशुल्क दवाएं मिलेंगी। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर अधिकांश दवाएं बाहर से खरीदने के लिए लिख देते हैं, जिससे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मरीजों का कहना है कि सरकार द्वारा अस्पतालों में मुफ्त दवा उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर इसका लाभ आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में दवाएं उपलब्ध हैं तो मरीजों को उनका लाभ मिलना चाहिए। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से सीएचसी विक्रमजोत की व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराकर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181321/serious-allegations-of-patients-on-vikramjot-chc-for-treatment-from</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181321/serious-allegations-of-patients-on-vikramjot-chc-for-treatment-from</guid>
                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:44:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/img-20260616-wa0017.jpg"                         length="92508"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        