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                <title>Sustainable Farming - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Sustainable Farming RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नैनो उर्वरकों के उपयोग आधारित एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ आयोजन।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इफको के नैनो उर्वरक भारतीय कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनके प्रयोग से सस्ती एवं टिकाऊ खेती करने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त बातें , डॉ.विवेक दीक्षित, प्रधानाचार्य, मोतीलाल नेहरू फार्मरस ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट कॉर्डेट इफको फूलपुर ने ग्राम  सेफ खानपुर वि.खं. बहरिया के कृषकों  हेतु दिनांक 20 जुलाई 2026 को आयोजित  एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहीं ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  उन्होंने संबोधित करते हुए बताया कि  इफको के नैनो उर्वरक जो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक क्रांतिकारी  परिवर्तन ला रहे हैं को जरूर प्रयोग करें।  प्रधानाचार्य ने उपस्थित  कृषक प्रतिभागियों को कार्डेट</div>
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<div style="text-align:justify;">दानेदार</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183869/a-one-day-farmer-training-program-based-on-the-use-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260720-wa0173.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इफको के नैनो उर्वरक भारतीय कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनके प्रयोग से सस्ती एवं टिकाऊ खेती करने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त बातें , डॉ.विवेक दीक्षित, प्रधानाचार्य, मोतीलाल नेहरू फार्मरस ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट कॉर्डेट इफको फूलपुर ने ग्राम  सेफ खानपुर वि.खं. बहरिया के कृषकों  हेतु दिनांक 20 जुलाई 2026 को आयोजित  एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहीं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> उन्होंने संबोधित करते हुए बताया कि  इफको के नैनो उर्वरक जो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक क्रांतिकारी  परिवर्तन ला रहे हैं को जरूर प्रयोग करें।  प्रधानाचार्य ने उपस्थित  कृषक प्रतिभागियों को कार्डेट एवं इफको के क्रियाकलाप से परिचित कराया तथा धान की फसल में नैनो यूरिया प्लस, नैनो कॉपर, नैनो जिंक, एवं नैनो डीएपी के प्रयोग की विस्तार से जानकारी दी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> नैनो उर्वरकों के प्रयोग से कृषि लागत में कमी आएगी साथ ही यूरिया एवं डीएपी के अत्यधिक प्रयोग से जल, मृदा एवं पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी अवगत कराया तथा फसलों में  नैनो डीएपी से बीज/जड़/कंद/सेट शोधित कर बुवाई/रोपाई करने की सलाह दी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दानेदार डीएपी की मात्रा आधी प्रयोग करें नैनो डीएपी 500 मिलीलीटर की बोतल से 100 किलोग्राम बीज को शोधित कर सकते हैं एवं मात्र ₹600 की है जो कि दानेदार डीएपी से काफी सस्ता है नैनो डीएपी के प्रयोग से लागत में कमी आएगी साथ ही उत्पादन एवं उत्पाद की गुणवत्ता भी बढ़ती है तथा नैनो यूरिया फसल की पत्तियों पर @4 ml प्रति लीटर पानी से घोल बनाकर स्प्रे करें। </div>
<div style="text-align:justify;">इसी क्रम में संस्थान की वरिष्ठ अधिकारी  सविता शुक्ला ने फल संरक्षण एवं खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि विभिन्न प्रकार के अचार मुरब्बा और जूस बनाकर के हम  अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं । </div>
<div style="text-align:justify;">समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम प्रभारी राजेश कुमार सिंह ने खेती में जैव उर्वरकों एवं जैव अप घटकों के प्रयोग की जानकारी दी।  प्रभारी प्रशिक्षण मुकेश तिवारी ने कार्यक्रम का संचालन किया एवं स्वस्थ व टिकाऊ खेती के लिए मृदा परीक्षण के महत्व को  बताया।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों  को कारडेट की विभिन्न इकाइयों का भ्रमण भी कराया गया। कार्यक्रम में  चंद्रकाली देवी , मीना कुमारी, शकुंतला, मालती , लाखन सिंह, जय सिंह , हरिश्चंद्र, अभय प्रताप सहित कॉर्डेट फूलपुर  के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 21:42:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब कानपुर के खेतों, तालाबों में खिल रहे हैं मोती </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>खेत तालाब अब केवल सिंचाई और वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं रह गए हैं। कानपुर नगर के बिधनू विकासखंड स्थित ग्राम सम्भुआ में एक खेत तालाब में मोती उत्पादन और मत्स्य पालन का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 30 हजार सीपियों पर आधारित इस परियोजना में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। इनमें चयनित सीपियों में विशेष मोल्ड तकनीक के माध्यम से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल विकसित किए जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 18 से 20 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना से तैयार होने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183735/now-pearls-are-blooming-in-the-fields-and-ponds-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1002109825.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>खेत तालाब अब केवल सिंचाई और वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं रह गए हैं। कानपुर नगर के बिधनू विकासखंड स्थित ग्राम सम्भुआ में एक खेत तालाब में मोती उत्पादन और मत्स्य पालन का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 30 हजार सीपियों पर आधारित इस परियोजना में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। इनमें चयनित सीपियों में विशेष मोल्ड तकनीक के माध्यम से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल विकसित किए जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 18 से 20 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना से तैयार होने वाले मोती करीब 50 लाख रुपये में बिकने का अनुमान है, जबकि मत्स्य पालन से प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस परियोजना का निरीक्षण कर अधिकारियों को इसे जनपद के अन्य खेत तालाब लाभार्थियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत भूमि संरक्षण अनुभाग द्वारा ग्राम सम्भुआ निवासी श्रीमती रश्मि वर्मा के खेत में 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा एवं तीन मीटर गहरा खेत तालाब निर्मित कराया गया है। योजना के तहत उन्हें खेत तालाब निर्माण पर 50 प्रतिशत (अधिकतम ₹52,500) का अनुदान डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराया गया। कृषि विभाग एवं मणि एग्रो हब के सहयोग से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने तालाब में मोती की खेती शुरू की। वर्तमान में इस परियोजना को लगभग नौ माह पूरे हो चुके हैं तथा करीब 18 माह में मोती तैयार हो जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस परियोजना की विशेषता यह है कि चयनित सीपियों में विशेष साँचे (मोल्ड) प्रत्यारोपित किए गए हैं, जिन पर सीपी प्राकृतिक रूप से मोती की परतें चढ़ाती है। इसी प्रक्रिया से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल तैयार किए जा रहे हैं। सामान्य गोल मोतियों की तुलना में ऐसे डिजाइनर पर्ल आभूषण एवं सजावटी बाजार में अधिक मांग वाले उत्पाद माने जाते हैं, जिससे बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है। वहीं सामान्य सीपियों में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता भी बढ़ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">परियोजना के साथ मत्स्य पालन को भी जोड़ा गया है। रश्मि वर्मा ने बताया कि उनके दूसरे खेत तालाब में मत्स्य पालन किया जा रहा है और अब तक तीन बार मत्स्य उत्पादन किया जा चुका है। इससे प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है। उन्होंने अन्य किसानों से भी खेत तालाबों का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित न रखकर मत्स्य पालन, मोती की खेती तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ने की अपील की।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 17:37:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों को मिलेगा प्रमाणित कृषि निवेश, गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं गन्ना खेती में पारदर्शिता की नई पहल, परीक्षण के बाद ही मिलेगा कृषि निवेश &quot;</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकर नगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा एवं शासन के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग द्वारा प्रदेश के गन्ना किसानो के हितो की सुरक्षा, गन्ना उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि तथा कृषि निवेशों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गन्ना आयुक्त द्वारा प्रदेश के समस्त चीनी मिलों के लिए व्यापक निर्देश जारी किये है। अब चीनी मिलों द्वारा गन्ना कृषकों को उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व, फसल सुरक्षा रसायन एवं अन्य कृषि निवेश केवल निर्धारित गुणवत्ता मानकों के पालन करने के बाद ही उपलब्ध कराये</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183368/farmers-will-get-certified-agricultural-investment-no-compromise-on-quality"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260714-wa0618.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकर नगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा एवं शासन के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग द्वारा प्रदेश के गन्ना किसानो के हितो की सुरक्षा, गन्ना उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि तथा कृषि निवेशों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गन्ना आयुक्त द्वारा प्रदेश के समस्त चीनी मिलों के लिए व्यापक निर्देश जारी किये है। अब चीनी मिलों द्वारा गन्ना कृषकों को उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व, फसल सुरक्षा रसायन एवं अन्य कृषि निवेश केवल निर्धारित गुणवत्ता मानकों के पालन करने के बाद ही उपलब्ध कराये जा सकेंगे। इन निर्देशों का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तायुक्त कृषि निवेश उपलब्ध कराना, खेती में लागत को नियंत्रित करना, पर्यावरण संरक्षण को बढावा देना, तथा गन्ना उत्पादन को वैज्ञानिक एवं टिकाऊ आधार प्रदान करना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नई व्यवस्था के अतंर्गत प्रत्येक बैच के उर्वरक, सुक्ष्म पोषक तत्व एवं कीटनाशक का NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से गुणवत्ता परीक्षण कराना अनिवार्य होगा। केवल वही कृषि निवेश किसानों को वितरति किए जायेगे। भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित पेस्टीसाइड्स का वितरण किसी भी दशा में नहीं किया जायेगा। चीनी मिलों को इफको, कृभको, यू.पी.एस.आर आई.आई.एस.आर जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से गुणवत्तायुक्त कृषि निवेश क्रय करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है ताकि किसानों को प्रमाणित एवं किफायती दरों पर कृषि निवेश उपलब्ध हो सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बताया गया कि किसी भी किसान को उसकी मांग एवं स्पष्ट सहमति के बिना कोई कृषि निवेश उपलब्ध नहीं कराया जायेगा। व्यवसायिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से लक्ष्य निर्धारित कर कृषि निवेश का वितरण करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। कृषि निवेश केवल किसानों की वास्तविक आवश्यकता, गन्ना क्षेत्रफल तथा वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुरूप निर्धारित मात्रा तक ही उपलब्ध कराया जायेगा, जिससे अनावश्यक रासायनिक उपयोग पर रोक लगे और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। दिशा निर्देश में चीनी मिलों की जबाबदेही सुनिश्चित की गई है चाहे कृषि निवेश का वितरण स्वंय चीनी मिल द्वारा किया जाये अथवा एजेंसी के माध्यम से गुणवत्ता एवं वितरण संबंधी सभी उत्तरदायित्व चीनी मिल के होगें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उप गन्ना आयुक्त एवं जिला गन्ना अधिकारी द्वारा कृषि निवेश वितरण की नियमित निगरानी एवं निरीक्षण किया जायेगा। यदि किसी चीनी मिल द्वारा किसान की सहमति के बिना, जबरन अथवा अधोमानक कृषि निवेशों का वितरण किया जाता है तो उसके विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जायेगी ऐसी स्थिति में गन्ना मूल्य से कृषि निवेश की धनराशि के समायोजन एवं वसूली की सुविधा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जायेगी तथा आवश्कता पड़ने पर सम्बन्धित चीनी मिल द्वारा गन्ना आयुक्त के पक्ष में दी गई बैंक गारन्टी भी जब्त की जायेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गन्ना खेती को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी किसान केंद्रित एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे किसानों को प्रमाणित, सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त कृषि निवेश उचित मूल्य पर उपलब्ध होगें खेती की लागत पर नियंत्रण रहेगा, मृदा एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा गन्ना उत्पादन, उत्पादकता और किसान की आय में वृद्धि के साथ-साथ चीनी उद्योग को भी नई मजबूती प्राप्त होगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 20:10:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। बढ़ती उत्पादन लागत, मिट्टी की घटती उर्वरता, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव तथा जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती ने किसानों को नई राह तलाशने के लिए प्रेरित किया है। यही कारण है कि आज बड़ी संख्या में किसान प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव केवल एक परंपरागत सोच की वापसी नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक शोध और व्यावहारिक अनुभवों से मजबूत हुआ एक नया कृषि आंदोलन बनता जा रहा है। गुजरात के जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय (जेएयू) के हालिया शोध ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183198/steps-towards-natural-farming"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। बढ़ती उत्पादन लागत, मिट्टी की घटती उर्वरता, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव तथा जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती ने किसानों को नई राह तलाशने के लिए प्रेरित किया है। यही कारण है कि आज बड़ी संख्या में किसान प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव केवल एक परंपरागत सोच की वापसी नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक शोध और व्यावहारिक अनुभवों से मजबूत हुआ एक नया कृषि आंदोलन बनता जा रहा है। गुजरात के जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय (जेएयू) के हालिया शोध ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार प्रस्तुत किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती है, बल्कि जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, पर्यावरण संतुलन और जलवायु परिवर्तन से मुकाबले में भी प्रभावी भूमिका निभाती है। जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय ने सौराष्ट्र क्षेत्र के विभिन्न जिलों में मिट्टी के नमूनों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर प्राकृतिक खेती के प्रभावों का अध्ययन किया।  इस शोध में सामने आया कि जिन खेतों में लगातार पांच वर्षों तक प्राकृतिक खेती अपनाई गई, वहां मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा 0.45 प्रतिशत से बढ़कर 0.93 प्रतिशत तक पहुंच गई। किसी भी कृषि भूमि के लिए ऑर्गेनिक कार्बन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यही मिट्टी की उर्वरता, सूक्ष्मजीवों की सक्रियता और पौधों के पोषण का आधार होता है। ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ने का अर्थ है कि मिट्टी अधिक जीवंत, उपजाऊ और दीर्घकाल तक उत्पादन देने में सक्षम हो रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शोध में यह भी पाया गया कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले खेतों में वर्षा और सिंचाई का पानी पहले की तुलना में कहीं अधिक मात्रा में मिट्टी के भीतर समा रहा है। पानी के समाने की दर 6.50 सेंटीमीटर प्रति घंटा से बढ़कर 14.50 सेंटीमीटर प्रति घंटा हो गई। इससे वर्षा जल का बेहतर संरक्षण संभव हुआ और भूजल पुनर्भरण को भी बढ़ावा मिला। इसी प्रकार मिट्टी की नमी संग्रहण क्षमता 12.75 प्रतिशत से बढ़कर 19.84 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसका सीधा लाभ किसानों को सूखे की स्थिति में मिलता है क्योंकि मिट्टी लंबे समय तक नमी बनाए रखती है और फसलों को बार-बार सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ती है।</div>
<div style="text-align:justify;">मिट्टी की संरचना में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। प्राकृतिक खेती वाले खेतों में मिट्टी की छिद्रता 34.63 प्रतिशत से बढ़कर 41.08 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे पौधों की जड़ों को पर्याप्त हवा और पानी मिलना संभव हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं मिट्टी का घनत्व भी कम हुआ, जिससे भूमि अधिक भुरभुरी और खेती के लिए अनुकूल बनी। ऐसी मिट्टी में जड़ों का विकास बेहतर होता है और पौधे अधिक स्वस्थ रहते हैं। सौराष्ट्र के विभिन्न जिलों में किए गए अध्ययन से यह भी सामने आया कि ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा हर जिले में अलग-अलग है। पोरबंदर की मिट्टी में सबसे अधिक 0.82 प्रतिशत ऑर्गेनिक कार्बन दर्ज किया गया, जबकि गिर सोमनाथ में 0.75 प्रतिशत और जूनागढ़ में 0.72 प्रतिशत पाया गया। दूसरी ओर सुरेंद्रनगर, भावनगर और जामनगर में यह मात्रा अपेक्षाकृत कम रही। पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र का औसत ऑर्गेनिक कार्बन 0.57 प्रतिशत दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि जिन क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती का विस्तार होगा, वहां यह स्तर आने वाले वर्षों में और बेहतर हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राकृतिक खेती का सबसे बड़ा लाभ केवल खेत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का सीमित उपयोग, फसल अवशेषों का पुनर्चक्रण, जीवामृत और अन्य प्राकृतिक घोलों का प्रयोग तथा न्यूनतम जुताई जैसी तकनीकों से मिट्टी में कार्बन संग्रहण की क्षमता बढ़ती है। शोध के अनुसार प्राकृतिक खेती के माध्यम से प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष चार से आठ टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य का जलवायु लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है और खेती जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहयोगी बनती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही कारण है कि आज प्राकृतिक खेती को केवल वैकल्पिक कृषि पद्धति नहीं बल्कि "क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर" के रूप में देखा जा रहा है। बदलते मौसम, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जल संकट जैसी परिस्थितियों में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए अधिक सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रही है। कम लागत, स्थानीय संसाधनों का उपयोग और मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता इसे भविष्य की कृषि व्यवस्था का मजबूत आधार बना रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देशभर में प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों की रुचि लगातार बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में हजारों किसान इस पद्धति को अपना चुके हैं। केंद्र और राज्य सरकारें भी प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही हैं। किसानों के सफल अनुभव दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। जो किसान पहले रासायनिक खेती छोड़ने को लेकर आशंकित थे, वे अब प्राकृतिक खेती के सकारात्मक परिणाम देखकर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राकृतिक खेती का आर्थिक पक्ष भी किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है। रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और महंगे कृषि रसायनों पर निर्भरता कम होने से खेती की लागत घटती है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध गोबर, गोमूत्र, जैविक अवशेष और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है। इसके साथ ही प्राकृतिक तरीके से उत्पादित खाद्यान्न, फल और सब्जियों की बाजार में मांग भी बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बन रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी प्राकृतिक खेती का महत्व लगातार बढ़ रहा है। रासायनिक अवशेषों से मुक्त खाद्यान्न उपभोक्ताओं को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराते हैं। बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के कारण लोग प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे किसानों के लिए नए बाजार और अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय का शोध यह स्पष्ट संदेश देता है कि प्राकृतिक खेती केवल भावनात्मक या पारंपरिक विचार नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित एक प्रभावी कृषि प्रणाली है। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जल संरक्षण करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने, खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने जैसे अनेक क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ चुके हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। यदि देश में प्राकृतिक खेती का दायरा लगातार बढ़ता है, तो यह केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के राष्ट्रीय उद्देश्यों को भी नई दिशा देगी। जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय का यह शोध इसी परिवर्तन की मजबूत वैज्ञानिक पुष्टि है और यह विश्वास जगाता है कि भविष्य की समृद्ध खेती प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर ही संभव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत </strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:09:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>पूर्व विधायक राकेश सिंह के प्रयासों से शोभापुर स्केप की खुदाई का कार्य शुरू </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>महराजगंज (रायबरेली)</strong> लंबे अरसे से किसानों के लिए समास्या का सबब बनी शोभापुर स्केप इस बार किसानों के लिए संजीवनी साबित होगी क्योंकि पूर्व विधायक राकेश सिंह के प्रयासों से इसकी खुदाई का रास्ता साफ हो चुका है, जिससे किसानों में खुशी की लहर है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बता दें कि महराजगंज ब्लाक क्षेत्र के बरहुवां ग्राम पंचायत अंतर्गत पूरे अभिमान सिंह गांव के पास से शोभापुर स्केप निकली हुई है, जिसकी लंबाई तकरीबन साढ़े चार किलोमीटर है,जो बजट के अभाव में झाड़ियों से पटी होने के कारण, जल निकासी की समास्या बनी हुई थी और हजारों बीघे फसल डूब जाती थी जिससे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181156/excavation-work-of-shobhapur-scape-started-due-to-the-efforts"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260613-wa0374---2026-06-13t194305.430.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>महराजगंज (रायबरेली)</strong> लंबे अरसे से किसानों के लिए समास्या का सबब बनी शोभापुर स्केप इस बार किसानों के लिए संजीवनी साबित होगी क्योंकि पूर्व विधायक राकेश सिंह के प्रयासों से इसकी खुदाई का रास्ता साफ हो चुका है, जिससे किसानों में खुशी की लहर है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बता दें कि महराजगंज ब्लाक क्षेत्र के बरहुवां ग्राम पंचायत अंतर्गत पूरे अभिमान सिंह गांव के पास से शोभापुर स्केप निकली हुई है, जिसकी लंबाई तकरीबन साढ़े चार किलोमीटर है,जो बजट के अभाव में झाड़ियों से पटी होने के कारण, जल निकासी की समास्या बनी हुई थी और हजारों बीघे फसल डूब जाती थी जिससे किसानों के सामने संकट उत्पन्न हो जाता था।</div><div style="text-align:justify;"> इसकी खुदाई को लेकर क्षेत्रीय किसान कई सालों से परेशान थे और पिछले दिनों पूर्व विधायक राकेश सिंह से मिलकर स्केप की सफाई की मांग की थी जिस पर उन्होंने अधिकारियों से बात कर समास्या के निराकरण के निर्देश दिए थे।</div><div style="text-align:justify;">अब पूर्व विधायक राकेश सिंह के प्रयासों से स्केप की खुदाई का काम शुरू हो गया है जिससे किसानों के चेहरे पर खुशी है, राज्य मंत्री स्वतंत्रत प्रभार दिनेश प्रताप सिंह बड़े भाई गणेश प्रताप सिंह ने अधिशाषी अभियंता सुशील कुमार सिंचाई विभाग की उपस्थिति में नारियल फोड़कर कार्य का शुभारंभ किया।</div><div style="text-align:justify;">स्केप की खुदाई से भीरा, मझिगवां, मलिकपुर बरना,पंचम सिंह गोंदरिहा बरहुआं पखनपुर पूरे श्रध्दा शोभापुर पूरे लाखन सिंह सहित दर्जनों गांवों के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।</div><div style="text-align:justify;">शीतला बक्श सिंह, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दीपू सिंह, पूर्व रंजीत सिंह, राम प्रताप सिंह, सुशील बाजपेई, राजू, चंद्र शेखर श्री राम सिया राम,जय राम लोधी, सहित अन्य मौजूद रहे।<br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 19:59:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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