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                <title>dharmik news - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम: श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में 26वां विशाल भंडारा भव्य रूप से सम्पन्न</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>संवाददाता प्रगति यादव की रिपोर्ट </strong></p>
<p><strong>त्रिवेणी नगर लखनऊ। </strong>नगर क्षेत्र स्थित प्राचीन एवं आस्था के केंद्र श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को 26वें विशाल भंडारे का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्तिमय वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। दोपहर 2 बजे प्रारंभ हुए इस धार्मिक आयोजन में नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु सपरिवार उपस्थित हुए और भगवान शिव का पूजन-अर्चन कर प्रसाद ग्रहण किया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0.jpeg" alt="श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर" width="1200" height="800" /></p>
<p>पूरे आयोजन स्थल पर “हर-हर महादेव” के जयघोष, भक्ति गीतों एवं मंत्रोच्चार से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया। श्रद्धालुओं ने पहले विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना की, तत्पश्चात</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169454/a-wonderful-confluence-of-devotion-and-service-the-26th-huge"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/श्री-सिद्धेश्वर-महादेव-मंदिर.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>संवाददाता प्रगति यादव की रिपोर्ट </strong></p>
<p><strong>त्रिवेणी नगर लखनऊ। </strong>नगर क्षेत्र स्थित प्राचीन एवं आस्था के केंद्र श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को 26वें विशाल भंडारे का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्तिमय वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। दोपहर 2 बजे प्रारंभ हुए इस धार्मिक आयोजन में नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु सपरिवार उपस्थित हुए और भगवान शिव का पूजन-अर्चन कर प्रसाद ग्रहण किया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0.jpeg" alt="श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर" width="1280" height="800"></img></p>
<p>पूरे आयोजन स्थल पर “हर-हर महादेव” के जयघोष, भक्ति गीतों एवं मंत्रोच्चार से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया। श्रद्धालुओं ने पहले विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना की, तत्पश्चात भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। आयोजन में महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे यह कार्यक्रम एक पारिवारिक एवं सामाजिक उत्सव का रूप लेता दिखाई दिया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/26%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AD%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8-%E0%A4%86%E0%A4%9C.jpg" alt="26वें विशाल भंडारे का आयोजन आज" width="1280" height="800"></img></p>
<p>इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में आयोजक आर. पी. शर्मा, ओ. पी. द्विवेदी, अशोक कुमार शुक्ला एवं भक्त प्रह्लाद नारायण नन्द की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी आयोजकों ने पूरे समर्पण भाव से व्यवस्थाओं का संचालन किया। स्वयंसेवकों की टीम ने भी प्रसाद वितरण, बैठने की व्यवस्था, जलपान एवं साफ-सफाई में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।</p>
<p>ज्ञातव्य है कि पिछले 25 वर्षों से यह विशाल भंडारा निरंतर आयोजित किया जा रहा है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष 26वां आयोजन भी पूरी सफलता और अनुशासन के साथ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सेवा और सद्भाव का भी प्रतीक बन गया है।</p>
<p>भंडारे का आयोजन जानकी प्रसाद पेट्रोल पंप के बगल, इंदिरा पब्लिक स्कूल के आगे तथा ज्योति टिम्बर के पीछे निर्धारित स्थल पर किया गया। मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु छायादार पंडाल, पेयजल, बैठने की समुचित व्यवस्था तथा सुव्यवस्थित प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई थी, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/%E0%A4%AD%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3-%E0%A4%A8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6.jpg" alt="भक्त प्रह्लाद नारायण नन्द" width="1280" height="800"></img></p>
<p>कार्यक्रम के अंत में मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगकर्ताओं एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार सहयोग बनाए रखने की अपील की।</p>
<p>नगर में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह एवं आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। भक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता का यह संगम क्षेत्रवासियों के लिए प्रेरणास्रोत बना। हर-हर महादेव के जयघोष के साथ आयोजित इस भव्य धार्मिक आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल रहा। मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।</p>]]>
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                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 00:45:27 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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                <title>रूद्र महायज्ञ के लिए निकाली गई कलश यात्रा</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिले के इटवा तहसील क्षेत्र के ग्राम सकतपुर में  ग्यारह दिवसीय रूद्र महायज्ञ को लेकर गुरुवार को कलश यात्रा निकाली गई, रुद्र महायज्ञ का जलाभिषेक के लिए कलश यात्रा सकतपुर से होकर फारहुवा बूढ़ी राप्ती घाट पर  पहुंची। जिसमें आचार्य लक्ष्मण ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधिवत पूजा अर्चना कर  कलश में पवित्र जल भराया। इसके बाद कलश यात्रा पुनः यज्ञ स्थल पर  पहुंची जहां पर कलशों को यज्ञ मंडप में विधि विधान से स्थापित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">रामचरित्र मानस दिनेश मिश्र, संजय मिश्र, मनोहर पाण्डेय, मन्दिर पुजारी विश्वनाथ गिरी,यज्ञ के आयोजक राम कृपाल चौधरी ने बताया</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168325/kalash-yatra-taken-out-for-rudra-mahayagya"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1770297445921.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले के इटवा तहसील क्षेत्र के ग्राम सकतपुर में  ग्यारह दिवसीय रूद्र महायज्ञ को लेकर गुरुवार को कलश यात्रा निकाली गई, रुद्र महायज्ञ का जलाभिषेक के लिए कलश यात्रा सकतपुर से होकर फारहुवा बूढ़ी राप्ती घाट पर  पहुंची। जिसमें आचार्य लक्ष्मण ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधिवत पूजा अर्चना कर  कलश में पवित्र जल भराया। इसके बाद कलश यात्रा पुनः यज्ञ स्थल पर  पहुंची जहां पर कलशों को यज्ञ मंडप में विधि विधान से स्थापित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रामचरित्र मानस दिनेश मिश्र, संजय मिश्र, मनोहर पाण्डेय, मन्दिर पुजारी विश्वनाथ गिरी,यज्ञ के आयोजक राम कृपाल चौधरी ने बताया कि रूद्र महायज्ञ 15 फरवरी तक चलेगा। जिसमें प्रवचन के बाद रामलीला का कार्यक्रम रात में भी चलेगा।उन्होंने बताया यज्ञ के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर विधायक प्रभात कुमार वर्मा, साधना चौधरी पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष,चेयर मैन भारत भारी धर्म राज चौधरी, चेयर मैन बढ़नी चाफा राम प्रकाश चौधरी, जय वर्धन तिवारी,सुधीर त्रिपाठी, शिव कुमार वर्मा, संजय सिंह, रामनिवास उपाध्याय, कारिया यादव पूर्व प्रधान, हरी यादव, जमींदार अग्रहरि, सुनील कुमार पाण्डेय मंतोष पाठक, भोला चौधरी, राहुल पाण्डेय, विजय कुमार ग्राम सभा प्रधान,पुजारी वर्मा, राम बरन यादव, अमरजीत यादव आदि लोग मौजूद रहे।</div>]]>
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                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 20:40:27 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat]]>
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            <item>
                <title>ककरहवा में श्री बालाजी की भव्य शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>  सिद्धार्थनगर l</strong> जिले के ककरहवा में दो दिवसीय मेहंदीपुर बालाजी का शोभायात्रा व जागरण कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार को कस्बे में भव्य शोभायात्रा के साथ शुरू हुआ। बैंड-बाजों और झांकियों के साथ श्री बालाजी की भव्य शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई। श्रद्धालुओं ने सड़क किनारे खड़े होकर बालाजी के दर्शन  कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नेपाल सीमा से सटे ककरहवा कस्बा में बाला जी का शोभायात्रा पूरे कस्बे का भ्रमण कर श्री राम जानकी मन्दिर पर जाकर सम्पन्न हुई। शोभा यात्रा में बालाजी की झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। पूरे शोभायात्रा के दौरान भक्तगण भक्ति</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164509/a-grand-procession-of-shri-balaji-was-taken-out-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/1766841540789-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> सिद्धार्थनगर l</strong> जिले के ककरहवा में दो दिवसीय मेहंदीपुर बालाजी का शोभायात्रा व जागरण कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार को कस्बे में भव्य शोभायात्रा के साथ शुरू हुआ। बैंड-बाजों और झांकियों के साथ श्री बालाजी की भव्य शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई। श्रद्धालुओं ने सड़क किनारे खड़े होकर बालाजी के दर्शन  कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नेपाल सीमा से सटे ककरहवा कस्बा में बाला जी का शोभायात्रा पूरे कस्बे का भ्रमण कर श्री राम जानकी मन्दिर पर जाकर सम्पन्न हुई। शोभा यात्रा में बालाजी की झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। पूरे शोभायात्रा के दौरान भक्तगण भक्ति गानों पर झूमते  रहे। बालाजी के जयकारों से पूरा कस्बा गुंजायमान बना रहा। कार्यक्रम के दूसरे दिन रविवार को सुबह 10 बजे सुंदर कांड पाठ, 12 बजे से भजन कीर्तन व जागरण तथा शाम 4 बजे से विशाल भंडारा का आयोजन किया जायेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शोभायात्रा में  दिलीप मोदनवाल, रामकुमार मोदनवाल, प्रदीप उर्फ सोनू मोदनवाल, पशुपति जायसवाल, विजय गुप्ता, सुशील मोदनवाल, रमेश अग्रहरी, विजय कसौधन, गोरख कसौधन, विशंभर कसौधन, बिंदू जायसवाल, भोला कौशल, कन्हैया गुप्ता सहित भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।</div>]]>
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                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Dec 2025 19:52:49 +0530</pubDate>
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                <title>वैश्विक संदर्भ में राष्ट्रवाद बनाम धार्मिक कट्टरता</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">वास्तविक राष्ट्रवाद के संदर्भ में धार्मिक कट्टरता राष्ट्रवाद किसी भी राष्ट्र की आत्मा होता है और वैश्विक संदर्भ में राष्ट्रवाद बनाम धार्मिक कट्टरता पर बौद्धिक विमर्श की परम आवश्यकता है l यह केवल राजनीतिक नारा या भीड़ संचालित भाव नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का वह केंद्र है जो देश की एकता, अखंडता और गरिमा को अभिव्यक्त करता है। यह वह सार्वभौमिक सत्य है, जिसने युगों से सभ्यताओं को स्थायित्व दिया और समाजों को अनुशासन एवं उद्देश्य की दिशा में अग्रसर किया। किंतु जब यही राष्ट्रवाद धार्मिक कट्टरता, संकीर्ण विचारधारा अथवा अवसरवादी राजनीति के मोहपाश में बंध जाता है, तब वह</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158678/nationalism-versus-religious-fundamentalism-in-a-global-context"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/kattarta.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वास्तविक राष्ट्रवाद के संदर्भ में धार्मिक कट्टरता राष्ट्रवाद किसी भी राष्ट्र की आत्मा होता है और वैश्विक संदर्भ में राष्ट्रवाद बनाम धार्मिक कट्टरता पर बौद्धिक विमर्श की परम आवश्यकता है l यह केवल राजनीतिक नारा या भीड़ संचालित भाव नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का वह केंद्र है जो देश की एकता, अखंडता और गरिमा को अभिव्यक्त करता है। यह वह सार्वभौमिक सत्य है, जिसने युगों से सभ्यताओं को स्थायित्व दिया और समाजों को अनुशासन एवं उद्देश्य की दिशा में अग्रसर किया। किंतु जब यही राष्ट्रवाद धार्मिक कट्टरता, संकीर्ण विचारधारा अथवा अवसरवादी राजनीति के मोहपाश में बंध जाता है, तब वह अपनी दिव्यता खो बैठता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्र के निर्माण और वैश्विक एकीकरण के संदर्भ में नागरिकों की निष्ठा, समर्पण और संवेदनशीलता अनिवार्य है। परंतु इसका यह तात्पर्य नहीं कि सत्ता-लोलुप राजनीतिक दल राष्ट्रवाद को धर्म, जाति या संप्रदाय से जोड़कर इसे सत्ता प्राप्ति का अस्त्र बना लें। ऐसा करने से न केवल राष्ट्रीय भावना आहत होती है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने में विभाजन और अविश्वास की दीवारें खड़ी हो जाती हैं। इतिहास साक्षी है कि जब-जब सत्ता पर बने रहने की अंधी चाह बढ़ी है, तब-तब साम्राज्यों की जड़ें खोखली हुई हैं। वर्तमान भारतीय राजनीति भी इस प्रपंच से मुक्त नहीं — जहां राष्ट्रवाद कई बार धर्म का पर्याय बनाकर प्रस्तुत किया जाता है, ताकि भावनात्मक उन्माद के सहारे सत्ता की सीढ़ियाँ चढ़ी जा सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">              लोकतंत्र में सत्ता का परिवर्तनशील रहना ही उसकी प्राणवायु है। निरंतर सत्ता एक व्यक्ति या दल को अधिनायकवादी बनाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की जड़ों को कमजोर कर देती है। अवसरवादी राजनीति, जातिगत समीकरणों की गणना, और तुष्टीकरण की नीति ये सब मिलकर जनकल्याण की मूल भावना को धूमिल करते हैं। जनता के दीर्घकालिक हितों के स्थान पर तात्कालिक लाभों की घोषणाएँ लोकतंत्र को सस्ती लोकप्रियता की ओर ढकेल देती हैं। इससे न केवल राष्ट्रीय चरित्र का ह्रास होता है, बल्कि सामाजिक अनुशासन भी दरकने लगता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीति में पदलोलुपता, अवसरवाद और जातिवादी समीकरणों की राजनीति लोकतांत्रिक आदर्शों को विकृत करती जा रही है। संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धांत जब तुष्टीकरण की नीति से प्रभावित होते हैं, तब लोकतंत्र का स्वरूप विकृत होकर सामंतवादी प्रवृत्तियों को जन्म देता है। जातिवादी मतदान, अवतारवाद और निरंकुश सत्ता की चाह,ये सब लोकतंत्र के भीतर अधिनायकवाद के बीज बोने वाले तत्व हैं।भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद संतुलन, समरसता और विचारशीलता पर टिकी है। किंतु जब धर्म को राजनीतिक औज़ार बना दिया जाता है, तब न केवल आस्था का अपमान होता है बल्कि नागरिकता की समानता पर भी गहरी चोट पहुँचती है। पशु व्यापार पर एकतरफा प्रतिबंध, सांप्रदायिक नीतियों के संरक्षण या धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक प्रयोग ये सभी लोकतंत्र के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर प्रश्नचिह्न बन जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">       आज के वैश्विक संदर्भ में देखा जाए तो राष्ट्रवाद और धार्मिक कट्टरता के बीच की रेखा अत्यंत सूक्ष्म हो चली है। बीसवीं सदी के जर्मनी, इटली, म्यांमार या पाकिस्तान के उदाहरण हमें बताते हैं कि जब राष्ट्रवाद सैनिक या संप्रदायिक रूप ले लेता है, तो वह फासीवाद या सैन्य तानाशाही का पूर्वरूप बन जाता है। भारत जैसे प्राचीन सांस्कृतिक राष्ट्र के लिए यह और भी चिंताजनक है, क्योंकि यहाँ लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन का हिस्सा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकतंत्र का मर्म जनता के विचारों की स्वतंत्रता और उनकी विवेकशीलता में निहित है। जब राजनीतिक दल शासकीय संसाधनों का दुरुपयोग कर सस्ती लोकप्रियता के लिए उपहारों, योजनाओं और प्रलोभनों की बाढ़ लाते हैं, तब यह नैतिक पतन का संकेत है। इससे जनता की कर प्रणाली पर बोझ तो बढ़ता ही है, साथ ही वास्तविक जनहितकारी योजनाओं का प्रवाह भी बाधित होता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे संक्रमणकाल में देश के प्रबुद्ध वर्ग विद्वान, चिंतक, शिक्षक, मीडिया कर्मी और सामाजिक संस्थाएँ सभी को सजग होकर आगे आना होगा। लोकतंत्र की असल शक्ति सत्ता में नहीं, बल्कि नागरिक चेतना में निहित है। यदि विचारशीलता, तर्कशीलता और संतुलन नहीं रहेगा, तो राष्ट्रवाद भी कट्टरता में परिवर्तित हो जाएगा और लोकतंत्र अपनी आत्मा खो देगा।</div>
<div style="text-align:justify;">इसलिए आज आवश्यकता है — राष्ट्रवाद को धार्मिक या राजनीतिक संकीर्णता से मुक्त कर बौद्धिक संतुलन के पथ पर ले जाने की। क्योंकि सच्चा राष्ट्रवाद न मंदिर में है, न संसद में, वह उस विचार में है, जो हर नागरिक को समान अधिकार, समान अवसर और समान सम्मान देता है। जब हम इस विचार को जीना सीख लेंगे, तभी राष्ट्र वास्तव में शक्तिशाली, संवेदनशील और आत्मनिर्भर बन सकेगा। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>संजीव ठाकुर, चिंतक</strong></div>]]>
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                                                            <category>विचारधारा</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Nov 2025 20:16:26 +0530</pubDate>
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                <title>घर-घर पधारे गणेश, गणेश चतुर्थी पर विशेष </title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong>    श्री गणेश चतुर्थी के आते ही गणेश पंडाल सज चुके हैं। कोई बड़ा तो कोई छोटा आयोजन कर रहा है। किसी ने बड़े पंडाल में तो किसी ने अपने घर में ही गणेश जी को विराजमान किया है। गणेश चतुर्थी एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जो भगवान गणेश की जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार की अनेक मान्यता और महत्व हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भगवान गणेश का जन्म</strong></div>
<div style="text-align:justify;">गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था, जो बुद्धि, ज्ञान और सुख-समृद्धि के देवता माने जाते हैं। इस दिन लोग अपने घरों में गणेश जी की मूर्ति स्थापित</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154122/special-on-ganesh-ganesh-chaturthi-from-house-to-house"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/1001102833.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong>  श्री गणेश चतुर्थी के आते ही गणेश पंडाल सज चुके हैं। कोई बड़ा तो कोई छोटा आयोजन कर रहा है। किसी ने बड़े पंडाल में तो किसी ने अपने घर में ही गणेश जी को विराजमान किया है। गणेश चतुर्थी एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जो भगवान गणेश की जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार की अनेक मान्यता और महत्व हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भगवान गणेश का जन्म</strong></div>
<div style="text-align:justify;">गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था, जो बुद्धि, ज्ञान और सुख-समृद्धि के देवता माने जाते हैं। इस दिन लोग अपने घरों में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>विघ्नहर्ता की पूजा</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, जो सभी बाधाओं और विघ्नों को दूर करने वाले हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">- इस दिन लोग गणेश जी की पूजा करके अपने जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मूर्ति स्थापना और विसर्जन</strong></div>
<div style="text-align:justify;">गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घरों में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते हैं और 10 दिनों तक उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद, अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है, जो एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सांस्कृतिक महत्व</strong></div>
<div style="text-align:justify;">गणेश चतुर्थी का त्योहार हिंदू संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण है, जो एकता, समृद्धि और ज्ञान का प्रतीक है। इस त्योहार के दौरान लोग अपने घरों में और सार्वजनिक स्थानों पर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश की पूजा और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन लोग अपने जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं और गणेश जी की कृपा से अपने जीवन को सुखमय बनाने की आशा करते हैं।</div>
<div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वैसे तो गणेश चतुर्थी मुख्य रूप से महाराष्ट्र का त्योहार है, जहां यह बहुत उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का त्योहार बहुत महत्वपूर्ण है और इसे पूरे राज्य में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। लेकिन अब उत्तर भारत में भी इसकी महत्ता बढ़ गई है और लोग धूमधाम से इस पर्व को मनाने लगे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी</strong></div>
<div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का त्योहार 10 दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें लोग अपने घरों में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान लोग पारंपरिक वेशभूषा में तैयार होकर गणेश जी की पूजा करते हैं और उन्हें मोदक और अन्य प्रसाद चढ़ाते हैं।महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी के दौरान सार्वजनिक गणेश पंडालों का आयोजन भी किया जाता है, जहां लोग एकत्र होकर गणेश जी की पूजा करते हैं और उत्सव का आनंद लेते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अन्य क्षेत्रों में गणेश चतुर्थी</strong></div>
<div style="text-align:justify;">गणेश चतुर्थी का त्योहार पूरे भारत में मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र में इसका विशेष महत्व है।</div>
<div style="text-align:justify;">अन्य क्षेत्रों में भी लोग गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाते हैं, लेकिन महाराष्ट्र की तरह इतना उत्साह और धूमधाम से नहीं मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी का त्योहार महाराष्ट्र की संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भगवान गणेश की पूजा और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।</div>
</div>]]>
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                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/154122/special-on-ganesh-ganesh-chaturthi-from-house-to-house</link>
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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 17:23:45 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>धर्म की पवित्रता पर संकट: वैष्णो देवी मंदिर के समारोह में शराब परोसने पर उठा विवाद</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>स्वतंत्र प्रभात:-</strong></blockquote>
<p><br />गणेश चतुर्थी का पावन पर्व केवल उत्सव नहीं बल्कि हमारी परंपराओं और आस्था को बचाने का संकल्प है। ऐसे समय में जब देशभर के श्रद्धालु विघ्नहर्ता श्री गणेश से आशीर्वाद लेकर धर्म की पुनर्स्थापना की प्रार्थना कर रहे हैं, माता वैष्णो देवी मंदिर की कार्यकारी समिति का एक निर्णय श्रद्धालुओं की भावनाओं को गहराई से आहत कर रहा है।</p>
<p><br />मंदिर के ध्वज तले आयोजित दिवाली समारोह में मदिरा परोसने की अनुमति दी गई है। धार्मिक धरोहर और सांस्कृतिक मान्यताओं के विपरीत लिया गया यह निर्णय अब बड़े विवाद का रूप ले चुका है। एचसीएफ ( Hindu Canadian Foundation</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154132/the-protection-of-religion-starts-from-us-and-from-our"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/7b4b8d18-b887-4aa5-b947-21889f5265b6.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>स्वतंत्र प्रभात:-</strong></blockquote>
<p><br />गणेश चतुर्थी का पावन पर्व केवल उत्सव नहीं बल्कि हमारी परंपराओं और आस्था को बचाने का संकल्प है। ऐसे समय में जब देशभर के श्रद्धालु विघ्नहर्ता श्री गणेश से आशीर्वाद लेकर धर्म की पुनर्स्थापना की प्रार्थना कर रहे हैं, माता वैष्णो देवी मंदिर की कार्यकारी समिति का एक निर्णय श्रद्धालुओं की भावनाओं को गहराई से आहत कर रहा है।</p>
<p><br />मंदिर के ध्वज तले आयोजित दिवाली समारोह में मदिरा परोसने की अनुमति दी गई है। धार्मिक धरोहर और सांस्कृतिक मान्यताओं के विपरीत लिया गया यह निर्णय अब बड़े विवाद का रूप ले चुका है। एचसीएफ ( Hindu Canadian Foundation ) ने इसे “घोर अधार्मिक और हिंदू-विरोधी” परंपरा बताया है। फोरम का कहना है कि यह निर्णय न केवल युवाओं को गलत दिशा में ले जाने वाला है, बल्कि त्योहारों की पवित्रता और मंदिर की गरिमा को भी गंभीर क्षति पहुँचाता है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-08/0432bc85-47d7-4f1b-bb55-b84fad43a569.jpg" alt="धर्म की पवित्रता पर संकट: वैष्णो देवी मंदिर के समारोह में शराब परोसने पर उठा विवाद" width="854" height="854"></img></p>
<p><br />फोरम ने आरोप लगाया कि मंदिर अध्यक्ष केशव अग्निहोत्री ने इस मुद्दे पर अब तक कोई प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण नहीं दिया है। आस्था से जुड़े मामलों में चुप्पी को भक्त मिलीभगत मान रहे हैं। एचसीएफ के एक सदस्य ने कहा  “हम लगातार तीन वर्षों से इस प्रथा को समाप्त करने की माँग कर रहे हैं। अपीलों के बावजूद समिति की निष्क्रियता आस्था और परंपरा के साथ खिलवाड़ है।”</p>
<p><strong>समुदाय की माँग</strong></p>
<p>श्रद्धालुओं ने कहा कि मंदिर के नाम पर आयोजित किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में शराब परोसना तुरंत बंद होना चाहिए। मंदिर और त्योहारों का स्वरूप हमेशा पारिवारिक, आध्यात्मिक और पवित्र रहना चाहिए।<br />तुरंत कदम उठाएँ:</p>
<p>समुदाय ने भक्तों से अपील की है कि वे कार्यकारी समिति को सम्मानजनक लेकिन दृढ़ ईमेल भेजें और उनसे माँग करें कि इस परंपरा पर तुरंत रोक लगाई जाए।</p>
<p><strong>सुझाव:</strong></p>
<p>“दिवाली की पवित्रता बनाए रखें, वैष्णो देवी मंदिर कार्यक्रम में शराब परोसना बंद करें”</p>]]>
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                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/154132/the-protection-of-religion-starts-from-us-and-from-our</link>
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                <pubDate>Wed, 27 Aug 2025 21:42:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>’धरा पर खुशी छाईं, आ गए कृष्ण कन्हाई’</title>
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                        <![CDATA[-मथुरा में लाखों श्रद्धालु बने कान्हा के प्राकट्योत्व के गवाह]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153963/krishna-kanhai-has-come-to-joy-on-the-earth"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/download-(2).jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>मथुरा।</strong> भाद्रमास कृष्णपक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि, ग्रह नक्षत्रों का अद्भुत संयोग, भक्तों को अजन्मे कान्हा के आगमन का अद्भुत और सुखद अहसास करा रहे थे। हजारों की संख्या में श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर के अंदर थे तो उससे कई गुना ज्यादा भीड जन्मस्थान के बाहर इस बात का इंतजार कर रही थी कि वह किसी तरह मंदिर के अंदर प्रवेश मिल जाए। घडी की छोटी सूई टिकटिक कर 12 के निशान की ओर बढ रही थी। बडी सूई की गति मानो थम सी गई थी। मिनटों का इंतजार घांटों जैसा लग रहा था। इसी गति से श्रद्धालुओं की अधीरता भी अपने चरम पर पहुंच रही थी। हर किसी की इच्छा यही थी कि किसी भी तरह भागवत भवन के अंदर रह कर जन्माभिषेक के दर्शन का अवसर मिल जाए तो जीवन धन्य हो जाए।</p>
<p>इसी लालसा में जो श्रद्धालु भगवत भवन के अंदर थे वह किसी तरह इस क्षण तक भागवत भवन के अंदर ही टिके रहना चाहते थे। जीवन में ऐसा आद्भुत संयोग शायद फिर कभी उन्हें मिले यही उनके विचार चल रहे होंगे। भागवत भवन में भीड का दबाव बढ रहा था। मंदिर के बाहर और सडकों पर लाखों श्रद्धालुओं का जमावडा था। कतारबद्ध होकर हर कोई ठाकुंर जन्माभिषक की बस एक झलक पाने को आया हुआ था। किसी ने कई दिन पहले से मथुरा में डेरा डाल दिया था तो काई सैकडों मील की दूरी तय कर इस क्षण का साक्षी बनने के लिए पहुंचा था।</p>
<p>सेवायत और सुरक्षाकर्मी किसी के भी पैर भागवत भवन के अंदर जमने नहीं दे रहे थे। इसी जद्दोजहद में वह अद्भुत, चमत्कारिक और आलौकिक क्षण आ गया जिसकी प्रतिक्षा पूरा विश्व कर रहा था, धीरे धीरे भागवत भवन में भगवान के श्रीविग्रह और श्रद्धालुओं के बीच दीवर बनी खादी की वह चादर खिसकने लगी, भक्त अब हिलने को तैयार नहीं थी, अचानक शंखनदा शुरू हो गया। पांच मिनट तक पूरा मंदिर परिसर शंखनांद की ध्वनियों से गुजायमान रहा। यह इस बात की घोषणा थी कि अजन्मे भगवान श्रीकृष्ण प्रथ्वी पर अवतरित हो चुके हैं। श्रद्धालुओं के हाथ आसमान की ओर झूल गये थे। भागवत भवन सहित पूरा जन्मस्थान और जन्मस्थान की ओर जानेवाली हर सडक पर मौजूद श्रद्धालुओं की भीड मथुरा में भगवान के अवतरण की साक्षी बन खुद को ध्यन कर रही थी। जन्म महाभिषेक का मुख्य एवं आलौकिक कार्यक्रम रात्र श्रीगणेश नवग्रह आदि पूजन से शुरू हुआ।</p>
<p>12 बजे भगवान के प्राकट्य के साथ ही संपूर्ण मंदिर परिसर में शंख, ढोल, नगाडे, झांझ, मजीरे और मृदंग एवं हरिबोल की करतल ध्वनि के साथ असंख्य भक्त जन, संत नाच उठे। भगवान के जन्म की प्राकट्यआरती रात 12ः10 मिनट तक चली। रजत जडित कामधेन के दूध से भगवान के विग्रह का अभिषेक हुआ। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के संपूर्ण परिसर को अद्भुत कलात्मकता से सजाया गया था। साजसज्जा ऐसी कि श्रद्धालु अभिभूत हो उठे। भगवान की प्राकट्य भूमि एवं कारागार के रूप में प्रसिद्ध गभ्रगृह की सज्जा भी चित्तआकर्षक थी। पत्र, पुष्प, रत्न प्रकृति, वस्त्र आदि के अद्भुत संयोजन से बनाये गये पुष तेजोमहल बंगले में विराजमान हो ठाकुर जी ने श्रद्धालुओं को बडे ही मनोहारी स्वरूप में दर्शन दिये। पत्र, पुष्प, काष्ठ आदि से निर्मित इस बंगले की छठा और कला अनूठी थी। प्रातः दिव्य शहनाई एवं नगाडों के वादन के साथ भगवान की मंगला आरती के दर्शन हुए। तदोपरांत भगवान का पंचामृत अभिषेक किया गया एवं ठाकुर जी के प्रिय स्त्रोतों का पाठ एवं पुष्पार्चन हुआ।</p>]]>
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                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Aug 2025 18:50:56 +0530</pubDate>
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                <title>ईद-उल-फितर पर पुलिस आयुक्त व जिलाधिकारी ने दी मुबारकबाद</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कानपुर नगर में ईद उल फितर का त्योहार हर्षोल्लास पूर्वक व शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया। प्रशासन व पुलिस द्वारा सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए थे। काफी बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। तथा ड्रोन से भी निगरानी रखी जा रही थी। इस बीच बड़ी ईदगाह पहुंच कर पुलिस आयुक्त अखिल कुमार व जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने सभी व्यवस्थाओं को परखा व मुस्लिम अधिकारियों व समुदाय को ईद की मुबारकबाद दी।</div>
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<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/img-20250331-wa0080.jpg" alt="निरीक्षण के दौरान ड्यूटी में लगे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया" width="886" height="660" /></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">                              दिनांक 31 मार्च को ईद_उल_फितर के शुभ अवसर पर पुलिस आयुक्त  अखिल कुमार एवं जिलाधिकारी  जितेन्द्र प्रताप सिंह ने पुलिस बल के</div>
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<div style="text-align:justify;">               </div>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150660/police-commissioner-and-district-magistrate-congratulated-eid-ul-fitr"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250331-wa0078.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानपुर नगर में ईद उल फितर का त्योहार हर्षोल्लास पूर्वक व शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया। प्रशासन व पुलिस द्वारा सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए थे। काफी बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। तथा ड्रोन से भी निगरानी रखी जा रही थी। इस बीच बड़ी ईदगाह पहुंच कर पुलिस आयुक्त अखिल कुमार व जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने सभी व्यवस्थाओं को परखा व मुस्लिम अधिकारियों व समुदाय को ईद की मुबारकबाद दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/img-20250331-wa0080.jpg" alt="निरीक्षण के दौरान ड्यूटी में लगे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया" width="886" height="660"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">               दिनांक 31 मार्च को ईद_उल_फितर के शुभ अवसर पर पुलिस आयुक्त  अखिल कुमार एवं जिलाधिकारी  जितेन्द्र प्रताप सिंह ने पुलिस बल के साथ कानपुर नगर के विभिन्न ईदगाहों, मस्जिदों एवं मुख्य मार्गों का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान ड्यूटी में लगे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि वे शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु सतर्क एवं मुस्तैद रहें तथा आमजन को सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराएं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">               इसके साथ ही सेंट्रल जोन स्थित मरकज़ी ईदगाह पहुंचकर पुलिस आयुक्त एवं जिलाधिकारी ने बच्चों को स्नेह पूर्वक गोद में उठाकर ईद की मुबारकबाद दी तथा मुस्लिम पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नमाजियों को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस अवसर पर अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था)  हरीश चन्दर, पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) श्री एस. एम. कासिम आबिदी, पुलिस उपायुक्त (सेंट्रल)  दिनेश त्रिपाठी तथा स्थानीय पुलिस बल भी उपस्थित रहे।</div>]]>
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                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Mar 2025 21:34:26 +0530</pubDate>
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                <title>निर्मल और स्वच्छ मन वाले को ही मिलता है भगवान का आशीर्वाद</title>
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                        <![CDATA[<div><strong>कौशाम्बी। </strong>नगर पंचायत दारानगर कड़ाधाम के वार्ड नम्बर 09 राधा कृष्ण नगर के  छोटी दरबार में चल रही  संगीतमय श्री राम कथा के तीसरे दिन स्वामी पुंडरीकाक्षाचार्य  वेदांती जी महाराज ने बताया कि धरती पर अधर्म का बोलबाला होता है तब भगवान का किसी न किसी रूप में अवतार होता है। भगवान चारों दिशाओं में विद्यमान है। इन्हें प्राप्त करने का मार्ग मात्र सच्चे मन की भक्ति ही है।वेदान्ती महराज ने कहा कि भगवान सर्वत्र व्याप्त है। प्रेम से पुकारने व सच्चे मन से सुमिरन करने पर भगवान कहीं भी प्रकट हो सकते है।</div>
<div>  </div>
<div>भगवान राम के जन्म की व्याख्या</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149457/only-with-pure-and-clean-mind-gets-gods-blessings"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250305-wa0835.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कौशाम्बी। </strong>नगर पंचायत दारानगर कड़ाधाम के वार्ड नम्बर 09 राधा कृष्ण नगर के  छोटी दरबार में चल रही  संगीतमय श्री राम कथा के तीसरे दिन स्वामी पुंडरीकाक्षाचार्य  वेदांती जी महाराज ने बताया कि धरती पर अधर्म का बोलबाला होता है तब भगवान का किसी न किसी रूप में अवतार होता है। भगवान चारों दिशाओं में विद्यमान है। इन्हें प्राप्त करने का मार्ग मात्र सच्चे मन की भक्ति ही है।वेदान्ती महराज ने कहा कि भगवान सर्वत्र व्याप्त है। प्रेम से पुकारने व सच्चे मन से सुमिरन करने पर भगवान कहीं भी प्रकट हो सकते है।</div>
<div> </div>
<div>भगवान राम के जन्म की व्याख्या करते हुए बताया कि संत कृपा के तप से भगवान ने राजा दशरथ व रानी कौशल्या के घर जन्म लिया। भगवान राम के जन्म की व्याख्या के दौरान जैसे ही कथा व्यास ने भजन गाया वैसे ही श्रोता झूम उठे। उन्होंने धर्म और संप्रदाय में अन्तर को समझाते हुए बताया कि धर्म व्यक्ति को अंदर से एकजुटता का भाव पैदा करता है, वहीं सम्प्रदाय व्यक्ति को बाहरी रूप से एक बनाता है।मनुष्य की चार प्रजाति बताई। प्रथम नर राक्षस जो सदैव दूसरे को नुकसान पहुंचाता है। दूसरा नर पशु ये मनुष्य अपने जीवन को निरीह प्राणी की तरह जीते हैं।</div>
<div> </div>
<div>तीसरा सामान्य नर ये अच्छा जीवन यापन करते हैं एवं अच्छे संस्कार के होते हैं, लेकिन न तो किसी अच्छे का साथ देते है न तो बुरे लोगों को उनके कर्मों में रोकने का प्रयास करते हैं। चौथे प्रकार का मनुष्य सबसे उत्तम प्राणी होता है वह अपने जीवन से परोपकार, धर्म व संस्कार, दूसरों की चिंता करता है। देश की युवा पीढ़ी पर चिंता व्यक्त करते हुए वेदांती जी ने कहा कि आज युवा पाश्चात्य सभ्यता के भंवर में फंसा हुआ है। तीसरे दिन के  राम कथा कार्यक्रम में डीजीसी सोमेश्वर तिवारी, विनोद मिश्रा, शिवप्रसाद त्रिपाठी, उमेश मिश्रा मनीष पाठक ,शशि कमल मिश्रा, आनंद मिश्रा ,प्रभाकर शुक्ला,ओमनीश तिवारी सहित तमाम श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।</div>]]>
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                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 13:01:54 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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                <title>दुःख हरण नाथ मंदिर: आस्था, इतिहास और शिवभक्तों की आस्था का केंद्र</title>
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                        <![CDATA[<div><strong>उतरौला (बलरामपुर)- </strong>ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व से परिपूर्ण दुःख हरण नाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जनपद के उतरौला नगर में स्थित है। इस मंदिर में शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु महाशिवरात्रि, श्रावण मास, हरतालिका तीज और मलमास के अवसर पर बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं। इसके धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे पर्यटन स्थल के रूप में मान्यता प्रदान की है।   </div>
<div>  </div>
<div>मंदिर के महंत मयंक गिरि के अनुसार, यह शिवलिंग मुगलकालीन शासन के दौरान एक चमत्कारी घटना के रूप में प्रकट हुआ था। कहा जाता है कि</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149044/sorrow-haran-nath-temple-center-for-history-history-and-faith"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/24.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>उतरौला (बलरामपुर)- </strong>ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व से परिपूर्ण दुःख हरण नाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जनपद के उतरौला नगर में स्थित है। इस मंदिर में शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु महाशिवरात्रि, श्रावण मास, हरतालिका तीज और मलमास के अवसर पर बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं। इसके धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे पर्यटन स्थल के रूप में मान्यता प्रदान की है।   </div>
<div> </div>
<div>मंदिर के महंत मयंक गिरि के अनुसार, यह शिवलिंग मुगलकालीन शासन के दौरान एक चमत्कारी घटना के रूप में प्रकट हुआ था। कहा जाता है कि नगर के दक्षिण छोर पर एक घुमक्कड़ संत जयकरन गिरि विश्राम कर रहे थे, तभी उन्होंने स्वप्न में आदेश प्राप्त किया कि इस स्थान की खुदाई करें। जब खुदाई शुरू हुई तो मिट्टी के नीचे से एक भूरे रंग का उत्तर दिशा की ओर मुड़ा हुआ शिवलिंग निकला। इसे तत्काल उसी स्थान पर स्थापित कर दिया गया।  </div>
<div> </div>
<div>इस ऐतिहासिक शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि जब मुगल शासक नेवाज खां को इस बात की जानकारी हुई, तो उसने इसे नष्ट करने का प्रयास किया। उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि वे शिवलिंग पर आरी चलाकर इसे खंडित कर दें। जैसे ही सैनिकों ने आरी चलाई, शिवलिंग से रक्त की तेज धार बहने लगी। यह दृश्य देखकर सैनिक भयभीत हो गए और वहां से भाग निकले। स्वयं मुगल शासक भी इस अद्भुत दृश्य को देखकर आतंकित हो गया। बाद में, जब उसे अपनी भूल का एहसास हुआ, तो उसने इस स्थान को पुनः स्थापित करने का आदेश दिया।  </div>
<div> </div>
<div>धीरे-धीरे यह स्थान आस्था और चमत्कारिक शक्तियों का केंद्र बन गया। यह मान्यता बनी कि यहां आने से भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं, इसलिए इसे "दुःख हरण नाथ मंदिर" नाम दिया गया। यह मंदिर शिवभक्तों के लिए एक पवित्र स्थल बन चुका है। महाशिवरात्रि, श्रावण मास, हरतालिका तीज और मलमास के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक किया जाता है। इन अवसरों पर आदर्श नगर पालिका परिषद उतरौला द्वारा मंदिर परिसर और मेले में साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है।  </div>
<div> </div>
<div>महाशिवरात्रि के दिन यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं और मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक, हवन, भजन-कीर्तन और भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से शिवलिंग पर जल अर्पित करता है, उसके सभी दुःख समाप्त हो जाते हैं।   </div>
<div> </div>
<div>योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को देखते हुए इसे पर्यटन स्थल घोषित किया है। इसके तहत यहां श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, सुविधाजनक मार्गों, विश्राम स्थलों और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए सरकार विशेष योजनाएं बना रही है।  </div>
<div> </div>
<div>दुःख हरण नाथ मंदिर, उतरौला की आस्था, इतिहास और चमत्कारिक घटनाओं से जुड़ी यह पवित्र स्थली श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। यहां की मान्यता, पौराणिक कथा और धार्मिक आयोजन इसे उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक बनाते हैं। महाशिवरात्रि एवं अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस मंदिर की अपार आस्था और महिमा का प्रमाण देती है।</div>
<div> </div>]]>
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                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149044/sorrow-haran-nath-temple-center-for-history-history-and-faith</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 18:09:02 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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                <title>जब जब धरती पर अधर्म व अन्याय बढ़ता है, तब तब भगवान स्वयं अवतरित होते हैं - आचार्य अवनीश शुक्ल जी महराज</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात जिला संवाददाता अमेठी - रवि द्विवेदी रिंकू </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुसाफिरखाना,अमेठी।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">हाजीगंज के शिव मंदिर पर चल रही श्रीमद भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास आचार्य अवनीश शुक्ल महाराज ने श्रीकृष्ण लीला के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनते ही वातावरण नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गूंज उठा।<br />महाराज जी ने बताया कि जब-जब धरती पर अधर्म और अन्याय बढ़ता है, तब भगवान स्वयं अवतरित होते हैं. श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ, जहां उनके माता-पिता वसुदेव व देवकी कैद में थे। बाल गोपाल प्रकट</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148975/when-unrighteousness-and-injustice-increases-on-earth-then-god-himself"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/img-20250223-wa0245.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात जिला संवाददाता अमेठी - रवि द्विवेदी रिंकू </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुसाफिरखाना,अमेठी।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">हाजीगंज के शिव मंदिर पर चल रही श्रीमद भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास आचार्य अवनीश शुक्ल महाराज ने श्रीकृष्ण लीला के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनते ही वातावरण नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गूंज उठा।<br />महाराज जी ने बताया कि जब-जब धरती पर अधर्म और अन्याय बढ़ता है, तब भगवान स्वयं अवतरित होते हैं. श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ, जहां उनके माता-पिता वसुदेव व देवकी कैद में थे। बाल गोपाल प्रकट होते ही अंधकारमय पूरा कारागार प्रकाश से जगमगा उठा।<br />अवनीश जी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी लीला केवल एक बाल लीला नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है. जिस प्रकार ग्वालबाल व गोपियां श्रीकृष्ण से प्रेम करती थीं, उसी तरह हमें भी अपने हृदय में भक्ति को स्थान देना चाहिए. बताया कि प्रत्येक मनुष्य को जीवन में चार ऋण (देव ऋण, ऋषि ऋण, पितृ ऋण, मानव ऋण) चुकाने होते हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने सभी ऋण का वर्णन किया. महाराज जी ने कहा मांसाहार मनुष्य के क्रोध और अहंकार को बढ़ाता है जबकि सात्त्विक भोजन से मन और आत्मा शुद्ध होता है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति संभव होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में पत्नी को पति का सम्मान करना सिखाया गया है. पति-पत्नी का संबंध प्रेम, विश्वास और समर्पण पर आधारित होता है. पति को परमेश्वर मानने का अर्थ है कि उसमें ईश्वर का अंश देखना और पारिवारिक जीवन को प्रेममय बनाना है ।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इस मौके पर राम धीरज यादव,जंग बहादुर चौकीदार, राणा प्रताप यादव, प्रदीप यादव, राम बक्श, जोखन निषाद, मुकेश, अर्जुन, दिलीप साहू, रंजीत सहित आदि रहे।</p>]]>
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                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/148975/when-unrighteousness-and-injustice-increases-on-earth-then-god-himself</link>
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                <pubDate>Mon, 24 Feb 2025 18:23:45 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]>
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                <title>भागवत कथा के श्रवण से होता है पापों का नाश: आचार्य पं विपिन पाण्डेय </title>
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                        <![CDATA[<div><strong>गोंडा। </strong>धानेपुर गोण्डा में श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन मुजेहना  ब्लाक धानेपुर बाजार निकट सुकरौलिया गांव में पवन तिवारी जी द्वारा आयोजित किया गया है। यह कथा 20 फरवरी से 27 फरवरी, तक प्रतिदिन सायं 06 बजे से रात्रि 10 बजे तक चलेगी, जिसमें 24 फरवरी को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, 25 को पूतना-कंस वध, 26 को सुदामा चरित्र एवं 27 को समापन महात्म्य होगा। तत्पश्चात दिनांक 28 फरवरी को यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। श्रीमद् भागवत कथा के वक्ता सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य पं बिपिन‌ पाण्डेय जी महराज आपने मधुर वाणी और सरल भाषा में श्रीमद् भागवत के गूढ़ रहस्यों को</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148971/acharya-pt-vipin-pandey-destroys-sins-by-listening-to-bhagwat"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/img-20250223-wa0757.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>गोंडा। </strong>धानेपुर गोण्डा में श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन मुजेहना  ब्लाक धानेपुर बाजार निकट सुकरौलिया गांव में पवन तिवारी जी द्वारा आयोजित किया गया है। यह कथा 20 फरवरी से 27 फरवरी, तक प्रतिदिन सायं 06 बजे से रात्रि 10 बजे तक चलेगी, जिसमें 24 फरवरी को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, 25 को पूतना-कंस वध, 26 को सुदामा चरित्र एवं 27 को समापन महात्म्य होगा। तत्पश्चात दिनांक 28 फरवरी को यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। श्रीमद् भागवत कथा के वक्ता सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य पं बिपिन‌ पाण्डेय जी महराज आपने मधुर वाणी और सरल भाषा में श्रीमद् भागवत के गूढ़ रहस्यों को श्रोताओं तक पहुंचा रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>इस कथा में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों और उनकी लीलाओं का वर्णन किया जाएगा। इसके साथ ही भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का महत्व भी बताया जाएगा। श्री महराज ने कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को प्रवचन करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा के वाचक व श्रवण से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है संसार दुखों का सागर है प्रत्येक प्राणी किसी न किसी तरह दुखी व परेशान है कोई स्वास्थ्य से दुखी है कोई परिवार कोई धन तो कोई संतान को लेकर परेशान है सभी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए ईश्वर की आराधना ही एकमात्र मार्ग है</div>]]>
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                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Feb 2025 20:36:52 +0530</pubDate>
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