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                <title>Public Accountability - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Public Accountability RSS Feed</description>
                
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                <title>पंजाब को ऐसी सरकार चाहिए जो काम करे, सिर्फ़ वादे न करे: PPCC लीडर पवन मानी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा-</strong> पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के सीनियर मेंबर पवन मानी ने आज कांग्रेस हाईकमान से आने वाले पंजाब असेंबली इलेक्शन के लिए एक अहम नज़रिया अपनाने और ऐसे मज़बूत, पॉपुलर और लोगों से जुड़े कैंडिडेट उतारने की अपील की, जो सीधे वोटर्स से जुड़ सकें और पार्टी का एकजुट और मज़बूत चेहरा दिखा सकें। आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला करते हुए मानी ने कहा कि पंजाब के लोगों का मौजूदा सरकार से भरोसा उठ गया है, क्योंकि यह समाज के हर तबके से जुड़े बेसिक मुद्दों को हल करने में नाकाम रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मानी ने कहा,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184273/punjab-needs-a-government-that-works-and-not-just-makes"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1000972092.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा-</strong> पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के सीनियर मेंबर पवन मानी ने आज कांग्रेस हाईकमान से आने वाले पंजाब असेंबली इलेक्शन के लिए एक अहम नज़रिया अपनाने और ऐसे मज़बूत, पॉपुलर और लोगों से जुड़े कैंडिडेट उतारने की अपील की, जो सीधे वोटर्स से जुड़ सकें और पार्टी का एकजुट और मज़बूत चेहरा दिखा सकें। आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला करते हुए मानी ने कहा कि पंजाब के लोगों का मौजूदा सरकार से भरोसा उठ गया है, क्योंकि यह समाज के हर तबके से जुड़े बेसिक मुद्दों को हल करने में नाकाम रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मानी ने कहा, "पंजाब के लोग खोखले वादों और बेअसर गवर्नेंस से तंग आ चुके हैं। वे एक ऐसी मज़बूत सरकार की तलाश में हैं जो भरोसा वापस ला सके, कानून-व्यवस्था बनाए रख सके और लोगों की भलाई के लिए ईमानदारी से काम कर सके। पंजाब ऐसी सरकार नहीं खरीद सकता जो सिर्फ़ ऐलान करे लेकिन ज़मीन पर काम न करे।" उन्होंने कहा कि कर्मचारियों, किसानों, युवाओं, व्यापारियों और आम नागरिकों में बढ़ती नाराज़गी AAP सरकार के कामकाज से फैली निराशा को दिखाती है। उन्होंने आगे कहा, "अनसुलझे मुद्दों और अधूरे वादों को लेकर सरकारी कर्मचारियों में साफ़ तौर पर बेचैनी दिख रही है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">असली चिंताओं को दूर करने के बजाय, सरकार अपने ही कर्मचारियों के बीच भरोसा बनाने में नाकाम रही है। कोई राज्य तभी तरक्की कर सकता है जब उसके कर्मचारी कॉन्फिडेंट और मोटिवेटेड हों।" पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए, मानी ने कहा कि बढ़ते क्राइम और असुरक्षा की घटनाओं ने लोगों में डर पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा, "किसी भी सरकार की पहली ज़िम्मेदारी अपने नागरिकों को सुरक्षा देना है। दुर्भाग्य से, पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो गई है, और लोग सरकार की उनकी सुरक्षा करने की क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> पंजाब को ऐसी सरकार चाहिए जो काम करे, न कि ऐसी जो समस्याएँ बढ़ने के बाद रिएक्ट करे।" मानी ने कांग्रेस हाईकमान से अपील की कि वे असेंबली चुनाव के लिए उम्मीदवारों को फाइनल करते समय जनता की भावनाओं पर ध्यान से विचार करें। उन्होंने कहा, "आने वाले चुनावों में एकजुट कांग्रेस की ज़रूरत है, जिसमें ऐसे कैंडिडेट हों जिनका पब्लिक बेस मज़बूत हो, इमेज साफ़ हो और जो लोगों के मुद्दों के लिए लड़ सकें। वोटरों के बीच भरोसेमंद जीतने वाले चेहरे पार्टी को मज़बूत करेंगे और यह साफ़ मैसेज देंगे कि कांग्रेस एक स्थिर और ज़िम्मेदार सरकार देने के लिए तैयार है।"</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि गुटबाज़ी और निजी फ़ायदों को एक तरफ़ रखना चाहिए, और पार्टी संगठन को मज़बूत करने और पंजाब के लोगों की आवाज़ को हर घर तक पहुँचाने पर फ़ोकस रहना चाहिए।मानी ने आगे कहा, "पंजाब ऐसी लीडरशिप ढूंढ रहा है जो उसकी समस्याओं को समझे और उन्हें हल करने का विज़न रखे। कांग्रेस के पास पंजाब को फिर से बनाने का अनुभव, क्षमता और कमिटमेंट है, लेकिन इसके लिए एकता, अनुशासन और कैंडिडेट का सही चुनाव ज़रूरी है।"</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मानी ने आगे कहा कि पंजाब के लोग ऐसी सरकार चाहते हैं जो युवाओं के लिए रोज़गार के मौकों, आर्थिक सुधार, बेहतर पब्लिक सर्विस, किसानों की भलाई और समाज के हर वर्ग की इज़्ज़त वापस लाने के लिए कमिटेड हो।उन्होंने कहा, "पंजाब को एक ऐसी सरकार चाहिए जो लोगों के लिए 24 घंटे काम करे, एक्शन, अकाउंटेबिलिटी और डेवलपमेंट वाली सरकार। कांग्रेस को यह ज़िम्मेदारी उठानी चाहिए और पंजाब को वह लीडरशिप देनी चाहिए जिसका वह हकदार है।"</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:51:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय बरहटा में तैनात तीन शिक्षिकाएं ड्यूटी से गायब</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के विकास खण्ड कप्तानगंज के अन्तर्गत ग्राम पंचायत बरहटा स्थित कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय बरहटा में तीन शिक्षिकाएं के ड्यूटी से गायब चल रही है । मीडिया टीम के पड़ताल में शिक्षिकाएं मिथिलेश अग्रहरि, इन्द्रावती चौधरी एवं कुसुमलता मिश्रा नियमित रूप से विद्यालय में अनुपस्थित मिली । मीडिया टीम के पड़ताल में पता चला कि शिक्षिका मिथिलेश अग्रहरि लगभग 10 दिनों से विद्यालय से गायब हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">अभिभावकों का कहना है कि शिक्षिकाओं की अनुपस्थिति के कारण विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने मांग की</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184219/three-teachers-posted-in-composite-higher-primary-school-barhata-missing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260729-wa0036.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के विकास खण्ड कप्तानगंज के अन्तर्गत ग्राम पंचायत बरहटा स्थित कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय बरहटा में तीन शिक्षिकाएं के ड्यूटी से गायब चल रही है । मीडिया टीम के पड़ताल में शिक्षिकाएं मिथिलेश अग्रहरि, इन्द्रावती चौधरी एवं कुसुमलता मिश्रा नियमित रूप से विद्यालय में अनुपस्थित मिली । मीडिया टीम के पड़ताल में पता चला कि शिक्षिका मिथिलेश अग्रहरि लगभग 10 दिनों से विद्यालय से गायब हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभिभावकों का कहना है कि शिक्षिकाओं की अनुपस्थिति के कारण विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा विद्यालय की औचक जांच कर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं, खण्ड शिक्षा अधिकारी कप्तानगंज प्रभात कुमार श्रीवास्तव की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि वे नियमित रूप से केवल उन्हीं विद्यालयों का निरीक्षण करते हैं जहां व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित होती है, जबकि जिन विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति अथवा अन्य अनियमितताओं की शिकायतें मिलती हैं, वहां निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचते जिससे डियूटी से गायब रहने में शिक्षक - शिक्षिकाएं सफल है । कुसुमलता मिश्रा सुबह 11 बजे विद्यालय पर पहुंचकर हस्ताक्षर बनाकर बिना किसी स्टाफ को सूचना दिये डियूटी से गायब हो गई है और ऐसे ही प्रतिदिन डियूटी करती है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बिना अध्यापक के बच्चों को शिक्षा कैसे दी जाएं जिसको लेकर जिले में तरह - तरह की चर्चाएं चल रही है प्रभारी प्रधानाध्यापक शंभूनाथ ने बताया कि आप स्वयं विद्यालय में देख लीजिए कि कितने अध्यापक उपस्थित है और कितने अध्यापक अनुपस्थित है एक शिक्षक मीता सोती में प्रशिक्षण में है और दो लोगों के बारे में हम नही जानते हैं मौके पर प्रभारी प्रधानाध्यापक शंभूनाथ व दौलत राम चौधरी विद्यालय में उपस्थित मिले । जब इस प्रकार शिक्षक - शिक्षिकाएं डियूटी से गायब रहेंगी तो परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था कैसे सुचारू रूप से चल पायेगी ? अब देखना यह है कि उक्त प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा क्या कार्यवाही की जाती है ?</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 17:01:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जंतर-मंतर से उठते लोकतांत्रिक प्रश्न</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">लोकतंत्र की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि नागरिक हर पाँच वर्ष में मतदान करते हैं। उसकी वास्तविक शक्ति इस बात में निहित होती है कि नागरिकों को प्रश्न पूछने, सरकार से जवाब मांगने और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी असहमति व्यक्त करने का कितना अवसर मिलता है। जब छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हों, सामाजिक कार्यकर्ता सार्वजनिक नीतियों पर संवाद की मांग करें और नागरिक समूह लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात उठाएँ, तब किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा आरंभ होती है। हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों, सोनम वांगचुक के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183902/democratic-questions-arising-from-jantar-mantar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(1)9.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लोकतंत्र की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि नागरिक हर पाँच वर्ष में मतदान करते हैं। उसकी वास्तविक शक्ति इस बात में निहित होती है कि नागरिकों को प्रश्न पूछने, सरकार से जवाब मांगने और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी असहमति व्यक्त करने का कितना अवसर मिलता है। जब छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हों, सामाजिक कार्यकर्ता सार्वजनिक नीतियों पर संवाद की मांग करें और नागरिक समूह लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात उठाएँ, तब किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा आरंभ होती है। हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों, सोनम वांगचुक के अनशन तथा शिक्षा और शासन से जुड़े मुद्दों ने इसी प्रकार की व्यापक राष्ट्रीय बहस को जन्म दिया है।<br /><br />जंतर-मंतर भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में केवल एक स्थान नहीं, बल्कि जन-अभिव्यक्ति का एक प्रतीक रहा है। अनेक दशकों से विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए नागरिक यहाँ एकत्रित होते रहे हैं। इस परंपरा ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र केवल संसद के भीतर नहीं, बल्कि नागरिक समाज की सक्रिय भागीदारी से भी संचालित होता है। इसलिए जब जंतर-मंतर किसी नए आंदोलन का केंद्र बनता है, तो वह केवल एक प्रदर्शन नहीं बल्कि लोकतांत्रिक विमर्श का संकेत भी होता है।<br /><br />हाल के विरोध प्रदर्शनों में विभिन्न छात्र समूहों, सामाजिक संगठनों और नागरिक कार्यकर्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, संस्थागत जवाबदेही और सार्वजनिक संवाद जैसे मुद्दे उठाए। प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रियाओं, पेपर लीक और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से व्यक्त की जा रही चिंताओं ने इन आंदोलनों को व्यापक सामाजिक समर्थन दिलाया। अनेक छात्रों का कहना है कि वर्षों की तैयारी के बाद यदि परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर प्रश्न उठने लगें तो केवल व्यक्तिगत भविष्य ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक संस्थाओं पर भरोसा भी प्रभावित होता है।<br /><br />इसी संदर्भ में सोनम वांगचुक की भूमिका ने इस विमर्श को और अधिक राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। शिक्षा, पर्यावरण और हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े उनके लंबे सार्वजनिक कार्यों के कारण उनके वक्तव्यों और शांतिपूर्ण विरोध ने व्यापक चर्चा को जन्म दिया। विभिन्न समाचार रिपोर्टों के अनुसार, उनके अनशन, स्वास्थ्य और प्रदर्शन के दौरान हुई प्रशासनिक कार्रवाइयों को लेकर अलग-अलग दावे और आधिकारिक प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। इन घटनाओं ने नागरिक अधिकारों, संवाद और राज्य की भूमिका पर नई बहस को जन्म दिया।<br /><br />लोकतंत्र में किसी भी सरकार का दायित्व केवल कानून लागू करना नहीं होता। शासन की वैधता इस बात से भी तय होती है कि वह आलोचना को किस दृष्टि से देखता है। जब बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता या नागरिक किसी नीति या व्यवस्था पर प्रश्न उठाते हैं, तो पहला उत्तर संवाद होना चाहिए। कानून-व्यवस्था बनाए रखना निस्संदेह प्रशासन की जिम्मेदारी है, किंतु लोकतांत्रिक व्यवस्था में सार्वजनिक असहमति को केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखना पर्याप्त नहीं माना जाता। यदि नागरिकों के मन में यह धारणा बनने लगे कि उनकी आवाज़ सुनी नहीं जा रही, तो यह संस्थागत विश्वास को कमजोर कर सकता है।<br /><br />यह भी उतना ही आवश्यक है कि किसी भी आंदोलन का संचालन शांतिपूर्ण और संवैधानिक सीमाओं के भीतर हो। लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ उत्तरदायित्व भी जुड़ा होता है। विरोध की वैधता उसकी अहिंसक प्रकृति, तथ्यों पर आधारित मांगों और संवाद की इच्छा से मजबूत होती है। यदि आंदोलन हिंसा, उकसावे या सार्वजनिक संपत्ति की क्षति का रूप ले लें, तो उनका नैतिक आधार कमजोर पड़ सकता है। इसलिए लोकतंत्र दोनों पक्षों—राज्य और नागरिक—से संयम, संवाद और संवैधानिक मर्यादा की अपेक्षा करता है।<br /><br />शिक्षा व्यवस्था के संदर्भ में यह आंदोलन केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं है। यह युवाओं के विश्वास, अवसरों की समानता और संस्थागत विश्वसनीयता से जुड़ा प्रश्न भी है। भारत जैसे युवा देश में शिक्षा और रोजगार केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय विकास की आधारशिला हैं। यदि बार-बार होने वाले विवाद छात्रों के मन में असुरक्षा उत्पन्न करें, तो इसका प्रभाव केवल व्यक्तिगत करियर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज की उत्पादकता और भविष्य पर पड़ता है।<br /><br />लोकतांत्रिक शासन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत उत्तरदायित्व है। सार्वजनिक संस्थाओं पर जितना अधिक विश्वास होगा, शासन उतना ही प्रभावी होगा। विश्वास केवल घोषणाओं से नहीं बनता; वह पारदर्शी जांच, समयबद्ध निर्णय, स्पष्ट संवाद और निष्पक्ष प्रक्रियाओं से निर्मित होता है। जब सरकारें कठिन प्रश्नों का उत्तर तथ्यों, सुधारों और संस्थागत उपायों से देती हैं, तब लोकतंत्र मजबूत होता है। इसके विपरीत यदि संवाद की जगह अविश्वास ले ले, तो राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है।<br /><br />मीडिया की भूमिका भी इस पूरे परिदृश्य में अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाचार माध्यम लोकतंत्र के प्रहरी माने जाते हैं। उनकी जिम्मेदारी केवल घटनाओं का प्रसारण करना नहीं, बल्कि तथ्यों का सत्यापन, विभिन्न पक्षों को स्थान देना और सार्वजनिक हित के प्रश्नों को सामने लाना भी है। लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब मीडिया सत्ता से भी प्रश्न पूछे और आंदोलनों के दावों की भी निष्पक्ष जांच करे। तथ्य और संतुलन किसी भी जिम्मेदार पत्रकारिता की आधारशिला हैं।<br /><br />भारतीय संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा का अधिकार प्रदान करता है। साथ ही, कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और अन्य संवैधानिक उद्देश्यों के लिए युक्तिसंगत प्रतिबंधों की भी व्यवस्था करता है। इसलिए हर लोकतांत्रिक परिस्थिति में चुनौती यही रहती है कि इन दोनों उद्देश्यों—स्वतंत्रता और व्यवस्था—के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। किसी भी लोकतंत्र की गुणवत्ता इसी संतुलन की परिपक्वता से आंकी जाती है।<br /><br />इतिहास बताता है कि अनेक महत्वपूर्ण सामाजिक और नीतिगत परिवर्तन शांतिपूर्ण जन-आंदोलनों और सार्वजनिक विमर्श के माध्यम से हुए हैं। इसी प्रकार यह भी सच है कि स्थायी परिवर्तन अंततः संस्थागत प्रक्रियाओं, संवाद और लोकतांत्रिक सहमति से ही आते हैं। इसलिए सरकार और नागरिक समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है कि वे मतभेदों को टकराव में बदलने के बजाय समाधान की दिशा में आगे बढ़ाएँ।<br /><br />आज आवश्यकता राजनीतिक विजय की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विश्वास की पुनर्स्थापना की है। छात्रों की वास्तविक चिंताओं का समाधान, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को मजबूत करना, सार्वजनिक संस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, संवाद की संस्कृति को प्रोत्साहित करना और शांतिपूर्ण विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा करना—ये ऐसे कदम हैं जो किसी भी सरकार की विश्वसनीयता को सुदृढ़ कर सकते हैं। इसी प्रकार आंदोलनों को भी तथ्य, संवैधानिक प्रक्रियाओं और अहिंसक जनभागीदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।<br /><br />लोकतंत्र में असहमति कोई संकट नहीं होती; वह शासन के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत होती है। जब नागरिक प्रश्न पूछते हैं, तब शासन को उत्तर देने का अवसर मिलता है। जब सरकार सुनती है, तब विश्वास बनता है। जब संस्थाएँ निष्पक्ष दिखाई देती हैं, तब लोकतंत्र मजबूत होता है। और जब संवाद जीवित रहता है, तब मतभेद भी लोकतांत्रिक शक्ति में बदल सकते हैं।<br /><br />जंतर-मंतर, छात्र आंदोलन और सोनम वांगचुक से जुड़ी हालिया घटनाएँ अंततः एक बड़े प्रश्न की ओर संकेत करती हैं—क्या भारत अपनी लोकतांत्रिक परंपरा को और अधिक संवादात्मक, उत्तरदायी और पारदर्शी बना सकता है? इस प्रश्न का उत्तर किसी एक आंदोलन, किसी एक सरकार या किसी एक राजनीतिक दल के पास नहीं है। इसका उत्तर उन संस्थाओं, नागरिकों और लोकतांत्रिक मूल्यों में निहित है जो भारत के संवैधानिक ढांचे की आधारशिला हैं। लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति सत्ता का केंद्रीकरण नहीं, बल्कि नागरिकों का विश्वास है। और विश्वास तभी टिकाऊ बनता है जब संवाद, उत्तरदायित्व, संवैधानिक मर्यादा और संस्थागत पारदर्शिता साथ-साथ चलें। यही किसी भी परिपक्व लोकतंत्र की वास्तविक पहचान है।<br /><br /><strong>अवनीश कुमार गुप्ता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 22:02:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्राम पंचायत पखेरी में मनरेगा कार्यों में फर्जीवाड़े का आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के विकास खंड हर्रैया अंतर्गत ग्राम पंचायत पखेरी में मनरेगा कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में तैनात सचिव एवं तकनीकी सहायक की लापरवाही के चलते सरकार की योजनाओं की मंशा पर पानी फिर रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आरोप है कि पानी से भरे तालाब में भी ग्राम प्रधान घनश्याम द्वारा ऑनलाइन मस्टर रोल जारी कर मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत के अधिकांश तालाब और पोखरों में पहले से पानी भरा हुआ है, ऐसे में तालाब खुदाई एवं</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183893/allegations-of-fraud-in-mnrega-works-in-gram-panchayat-pakheri"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260721-wa0099.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के विकास खंड हर्रैया अंतर्गत ग्राम पंचायत पखेरी में मनरेगा कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में तैनात सचिव एवं तकनीकी सहायक की लापरवाही के चलते सरकार की योजनाओं की मंशा पर पानी फिर रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आरोप है कि पानी से भरे तालाब में भी ग्राम प्रधान घनश्याम द्वारा ऑनलाइन मस्टर रोल जारी कर मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत के अधिकांश तालाब और पोखरों में पहले से पानी भरा हुआ है, ऐसे में तालाब खुदाई एवं सफाई का कार्य कागजों पर दिखाकर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मीडिया की पड़ताल में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक की मिलीभगत से मनरेगा कार्यों में अनियमितताएं की जा रही हैं। इसको लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आरोप सही हैं तो सरकारी धन के दुरुपयोग पर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कब तक कार्रवाई की जाएगी? ग्राम पंचायत पखेरी का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। उक्त प्रकरण में खण्ड विकास अधिकारी हरैया विनय कुमार द्विवेदी से जानकारी लेना चाहा तो खण्ड विकास अधिकारी ने मीडिया के फोन को रिसीव नही किया ।</div></div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 18:06:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>03 महीने से लगातार धड़ल्ले से धोबही में जारी है फर्जीवाड़ा, ज़िम्मेदार कुंभकर्णी नींद में मस्त*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के परसरामपुर   03 महीने से लगातार ग्राम पंचायत धोबही पर विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने को लूटने में ग्राम प्रधान रेखा मिश्रा जुटी हुई है अर्थात् ग्राम प्रधान रेखा मिश्रा का जुगाड़ फर्जीवाड़ा करने में सफल दिखाई दे रहा है । ग्राम प्रधान रेखा मिश्रा सचिव , टीए व मनरेगा एपीओ को मुंहमांगा कमीशन देकर धड़ल्ले से विकसित भारत जी राम जी के कार्यों की फर्जी भुगतान कराने में सफल है । रोजगार सेवक / महिला मेट, ग्राम प्रधान, सचिव, टीए व मनरेगा एपीओ की लापरवाही से प्रदेश सरकार की मंशा पर पानी फिर रहा</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183745/for-03-months-fraud-has-been-going-on-continuously-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260719-wa0038.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के परसरामपुर   03 महीने से लगातार ग्राम पंचायत धोबही पर विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने को लूटने में ग्राम प्रधान रेखा मिश्रा जुटी हुई है अर्थात् ग्राम प्रधान रेखा मिश्रा का जुगाड़ फर्जीवाड़ा करने में सफल दिखाई दे रहा है । ग्राम प्रधान रेखा मिश्रा सचिव , टीए व मनरेगा एपीओ को मुंहमांगा कमीशन देकर धड़ल्ले से विकसित भारत जी राम जी के कार्यों की फर्जी भुगतान कराने में सफल है । रोजगार सेवक / महिला मेट, ग्राम प्रधान, सचिव, टीए व मनरेगा एपीओ की लापरवाही से प्रदेश सरकार की मंशा पर पानी फिर रहा है ।</div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि विकासखंड परसरामपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत धोबही में लगातार 03 महीने से बड़े पैमाने पर विकास कार्यों के नाम पर फर्जीवाड़ा का खेल चल रहा है जिसमें रोजगार सेवक / महिला मेट , सचिव , तकनीकी सहायक , एपीओ मनरेगा व बीडीओं अहम भूमिका निभा रहे हैं । ग्राम प्रधान रेखा मिश्रा का मनरेगा फर्जीवाड़ा करने में लगातार सफल होने पर मनोबल दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है और ग्राम पंचायत धोबही में विकास कार्य धीरे - धीरे बन्द हो रहा है । ग्राम प्रधान रेखा मिश्रा ने 03 महीने से लगातार कई बार चार तालाबों की खुदाई व सफाई कार्य के नाम पर फर्जी मस्टर रोल जारी करवाई थी और फर्जी फोटो के सहारे चारों फर्जी मस्टर रोल को पूर्ण कर लिया है और सचिव, तकनीकी सहायक , एपीओ मनरेगा व खंड विकास अधिकारी को मुंहमांगा कमीशन का लालच देकर फर्जी भुगतान भी प्राप्त कर ली है । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बड़ी बात यह है कि ग्राम प्रधान रेखा मिश्रा के मनरेगा भ्रष्टाचार पर क्यों नहीं कार्यवाही हो पा रही है ? तेज तर्रार सीडीओ सार्थक अग्रवाल के कड़े निर्देश के बाद भी ग्राम पंचायत धोबही के मनरेगा भ्रष्टाचार मामले में जांच न हो पाना एवं कार्यवाही न हो पाना जांच का विषय बना हुआ है । जांच एवं कार्यवाही के नाम पर लीपा-पोती किया जा रहा है । ग्राम प्रधान रेखा मिश्रा पंचायत चुनाव नजदीक देखकर सरकारी खजाने को पूरी तरह लूटने में अपार सफलता प्राप्त की है यदि ऐसे ही जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों का ग्राम प्रधान रेखा मिश्रा को सहयोग मिलता रहा तो भविष्य में कभी भी ग्राम पंचायत धोबही का समुचित विकास नहीं होगा और ग्राम पंचायत में विकास कार्यों हेतु आई धनराशि सरकारी खाते में नही बचेगी । अर्थात् ग्राम प्रधान की जेब गर्म होगी और सरकारी खाता खाली होगा ।  उक्त प्रकरण में मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल ने जांच के कार्रवाई करने का निर्देश दिया है ।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 18:30:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीएम के आदेश में BNS 316(5), FIR से गायब: आखिर किसके निर्देश पर हटी गंभीर धारा?</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>राज्य ब्यूरो - विपिन शुक्ला </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">धान खरीद केंद्र बी-पैक्स असाईदपुर कला के केंद्र प्रभारी दुर्गा प्रसाद पाण्डेय के खिलाफ दर्ज एफआईआर ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेश में जहां आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) के तहत भी अभियोग दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे, वहीं थाना भीटी में दर्ज एफआईआर में केवल धारा 3 और 7 आवश्यक वस्तु अधिनियम ही दर्ज की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हैरानी की बात यह है कि एफआईआर के तथ्यात्मक विवरण में स्वयं यह उल्लेख किया गया है</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183667/bns-3165-missing-from-fir-as-per-dms-order-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1001123229-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>राज्य ब्यूरो - विपिन शुक्ला </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धान खरीद केंद्र बी-पैक्स असाईदपुर कला के केंद्र प्रभारी दुर्गा प्रसाद पाण्डेय के खिलाफ दर्ज एफआईआर ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेश में जहां आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) के तहत भी अभियोग दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे, वहीं थाना भीटी में दर्ज एफआईआर में केवल धारा 3 और 7 आवश्यक वस्तु अधिनियम ही दर्ज की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हैरानी की बात यह है कि एफआईआर के तथ्यात्मक विवरण में स्वयं यह उल्लेख किया गया है कि कथित कूटरचित ऑनलाइन समर्पण पत्र BNS की धारा 316(5) के दायरे में आता है, लेकिन यही धारा एफआईआर के सेक्शन कॉलम से गायब है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी कार्यालय के आदेश में अभियोजन कार्यालय की रिपोर्ट के आधार पर कहा गया था कि केंद्र प्रभारी द्वारा धान खरीद से जुड़े ऑनलाइन समर्पण पत्र में कथित अनियमितता और मूल्यवान कूटरचित दस्तावेज तैयार किए जाने के प्रथम दृष्टया तथ्य पाए गए हैं। इसी आधार पर धारा 3/7 आवश्यक वस्तु अधिनियम तथा BNS की धारा 316(5) के तहत मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बावजूद 15 जुलाई 2026 को दर्ज एफआईआर में केवल आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराएं दर्ज की गईं। इससे यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि जब जिलाधिकारी के आदेश और एफआईआर के कथानक दोनों में धारा 316(5) का उल्लेख है, तो फिर इसे एफआईआर की धाराओं में शामिल क्यों नहीं किया गया?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्या यह विवेचना के दौरान हुई तकनीकी चूक है, या फिर किसी स्तर पर गंभीर धारा जोड़ने से परहेज किया गया? यह सवाल अब प्रशासनिक और पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बन गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस सूत्रों के अनुसार, धारा 316(5) को शामिल न किए जाने को लेकर विभाग के भीतर भी चर्चाएं हैं। हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इस संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अब निगाहें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के जवाब पर टिकी हैं कि जिलाधिकारी के निर्देशों के बावजूद गंभीर धारा एफआईआर के सेक्शन से क्यों गायब रही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> उठ रहे हैं ये बड़े सवाल</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डीएम के आदेश में BNS की धारा 316(5) का स्पष्ट उल्लेख।</div>
<div style="text-align:justify;">एफआईआर के तथ्यों में भी धारा 316(5) का जिक्र।</div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन सेक्शन कॉलम में केवल धारा 3/7 आवश्यक वस्तु अधिनियम।</div>
<div style="text-align:justify;">क्या यह तकनीकी त्रुटि है या किसी स्तर पर लिया गया निर्णय?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्या पुलिस इस मामले में पूरक धाराएं जोड़ने की तैयारी कर रही है?</div>
<div style="text-align:justify;">यह संस्करण पत्रकारिता की दृष्टि से अधिक सशक्त है और दस्तावेज़ों पर आधारित सवाल उठाता है, जबकि अप्रमाणित आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 21:10:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार हुआ सोरांव थाने का उपनिरीक्षक।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) प्रयागराज इकाई ने  सोरांव में तैनात एक उपनिरीक्षक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर एक मुकदमे में धाराएं कम करने के नाम पर 75 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। एंटी करप्शन टीम ने उसे 25 हजार रुपये की पहली किश्त लेते समय दबोच लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, उदयराज पटेल, निवासी गहपुर, थाना सोरांव ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन से शिकायत की थी कि थाना सोरांव में तैनात उपनिरीक्षक संजय जायसवाल एक मुकदमे में राहत दिलाने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183665/sub-inspector-of-soraon-police-station-arrested-red-handed-while-taking-bribe"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260718-wa0086.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) प्रयागराज इकाई ने  सोरांव में तैनात एक उपनिरीक्षक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर एक मुकदमे में धाराएं कम करने के नाम पर 75 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। एंटी करप्शन टीम ने उसे 25 हजार रुपये की पहली किश्त लेते समय दबोच लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, उदयराज पटेल, निवासी गहपुर, थाना सोरांव ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन से शिकायत की थी कि थाना सोरांव में तैनात उपनिरीक्षक संजय जायसवाल एक मुकदमे में राहत दिलाने और गंभीर धाराएं कम करने के बदले 75 हजार रुपये की रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने पूरे मामले का सत्यापन कराया, जिसमें शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से शनिवार, 18 जुलाई 2026 को दोपहर लगभग 1:50 बजे थाना सोरांव के बाहर स्थित "अमन गुप्ता चाय पान स्टाल" के पास ट्रैप बिछाया गया। जैसे ही आरोपी उपनिरीक्षक संजय जायसवाल, पुत्र महेंद्र प्रताप जायसवाल, निवासी नरहपुर, थाना लम्भुआ, जनपद सुल्तानपुर ने शिकायतकर्ता से 25 हजार रुपये की पहली किश्त ली, पहले से मौजूद एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गिरफ्तारी के बाद टीम ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एंटी करप्शन अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई के तहत थाना शिवकुटी में मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। इसके बाद उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्यों के बदले रिश्वत मांगने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 21:08:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम मंदिर में सीईओ, क्या रुकेगा भ्रष्टाचार</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या का राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। मंदिर के निर्माण के बाद यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और चढ़ावे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्थाओं तथा प्रशासन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे में मंदिर के सुचारु संचालन के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (</span>CEO) <span lang="hi" xml:lang="hi">की नियुक्ति का निर्णय चर्चा का विषय बन गया है। समर्थक इसे आधुनिक और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं</span>, </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ लोग इसे पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था में प्रशासनिक हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं। सबसे</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183613/will-ceo-stop-corruption-in-ram-temple"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas25.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या का राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। मंदिर के निर्माण के बाद यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और चढ़ावे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्थाओं तथा प्रशासन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे में मंदिर के सुचारु संचालन के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (</span>CEO) <span lang="hi" xml:lang="hi">की नियुक्ति का निर्णय चर्चा का विषय बन गया है। समर्थक इसे आधुनिक और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं</span>, </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ लोग इसे पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था में प्रशासनिक हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केवल सीईओ की नियुक्ति से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकेगा</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिर प्रशासन की बदलती जरूरत- राम मंदिर आज एक विशाल संस्थान का स्वरूप ले चुका है। यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं का आगमन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दान का प्रबंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्माण कार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारियों का संचालन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छता और भविष्य की योजनाएं जैसे अनेक कार्य हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन सबका संचालन केवल पारंपरिक व्यवस्था से करना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में एक पेशेवर प्रशासनिक अधिकारी की आवश्यकता महसूस की गई। सीईओ का दायित्व होगा कि मंदिर की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वित्तीय अनुशासन बनाए रखा जाए और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या केवल सीईओ भ्रष्टाचार रोक सकता है</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रश्न का सीधा उत्तर है—नहीं। किसी भी संस्था में भ्रष्टाचार केवल व्यक्ति बदलने से समाप्त नहीं होता। इसके लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता होती है। यदि वित्तीय लेन-देन पारदर्शी न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑडिट नियमित न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्णय प्रक्रिया स्पष्ट न हो और जवाबदेही तय न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो किसी भी पद पर बैठा अधिकारी भ्रष्टाचार को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता। सीईओ व्यवस्था को बेहतर बना सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन भ्रष्टाचार रोकने के लिए कई अन्य कदम भी जरूरी होंगे। पारदर्शिता सबसे बड़ा हथियार-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी धार्मिक संस्था में श्रद्धालुओं का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण पूंजी होता है। इसलिए यह आवश्यक है कि— दान और चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक हो। नियमित स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। खरीद और ठेकों की प्रक्रिया पारदर्शी हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था हो। यदि ये व्यवस्थाएं लागू होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भ्रष्टाचार की संभावनाएं स्वतः कम होंगी। देश के अन्य मंदिरों से सीख-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के कई बड़े मंदिरों में पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था पहले से लागू है। वहां आईएएस अधिकारियों या अनुभवी प्रशासकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती हैं। इससे व्यवस्था में सुधार हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जहां निगरानी कमजोर रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां विवाद भी सामने आए। इससे स्पष्ट होता है कि केवल प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति पर्याप्त नहीं होती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी प्रणाली को पारदर्शी बनाना आवश्यक है। आधुनिक प्रबंधन और धार्मिक परंपरा का संतुलन राम मंदिर केवल एक प्रशासनिक संस्था नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि धार्मिक आस्था का केंद्र है। इसलिए यह भी जरूरी है कि आधुनिक प्रबंधन लागू करते समय धार्मिक परंपराओं और मंदिर की गरिमा का पूरा सम्मान बना रहे। सीईओ का कार्य धार्मिक निर्णय लेना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना होना चाहिए। धार्मिक विषयों का निर्णय मंदिर ट्रस्ट और संत समाज के मार्गदर्शन में ही होना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोपरि- मंदिर में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु यह विश्वास लेकर आता है कि उसका दान धर्म और समाज के हित में उपयोग होगा। यदि वित्तीय पारदर्शिता मजबूत होगी तो श्रद्धालुओं का विश्वास और बढ़ेगा। इसके विपरीत यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसका असर केवल मंदिर प्रशासन पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज की भावनाओं पर भी पड़ सकता है। जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी- सीईओ की नियुक्ति तभी प्रभावी होगी जब उसके कार्यों की नियमित समीक्षा हो। ट्रस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र ऑडिट एजेंसियां और निर्धारित नियम मिलकर जवाबदेही सुनिश्चित करें। किसी भी बड़े संस्थान में "चेक एंड बैलेंस" की व्यवस्था ही भ्रष्टाचार रोकने का सबसे प्रभावी तरीका मानी जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राम मंदिर में सीईओ की नियुक्ति को आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। इससे कार्यों में पेशेवर दक्षता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर समन्वय और पारदर्शिता आने की संभावना है। लेकिन यह मान लेना कि केवल सीईओ की नियुक्ति से भ्रष्टाचार पूरी तरह समाप्त हो जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यावहारिक नहीं होगा। भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है जब पारदर्शी वित्तीय प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियमित ऑडिट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्पष्ट जवाबदेही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल प्रबंधन और स्वतंत्र निगरानी जैसी व्यवस्थाएं भी समान रूप से मजबूत हों। अंततः किसी भी धार्मिक संस्था की सबसे बड़ी ताकत श्रद्धालुओं का विश्वास होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उस विश्वास की रक्षा केवल एक पद नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि मजबूत और ईमानदार संस्थागत व्यवस्था ही कर सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 20:59:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिम्मेदारों की लीपा-पोती में फर्जी हाजिरी लगाने वाले रोजगार सेवक कथित पत्रकार सुनील राव के हौसले बुलन्द</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती-</strong> विकास खंड कप्तानगंज के ग्राम पंचायत नरहरपुर में मनरेगा कार्यों में फर्जी हाजिरी लगाए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि बिना कार्य कराए श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज की गई। इस मामले में ग्राम पंचायत सचिव पंकज सिंह, प्रशासक (प्रधान) तथा रोजगार सेवक सुनील कुमार राव की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार,फर्जी हाजिरी को लेकर स्थानीय समाचार पत्र में खबर प्रकाशित हुई थी। इसके बाद संबंधित पत्रकार पर दबाव बनाने और खबर का प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने की साजिश रची जा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183111/the-morale-of-the-alleged-journalist-sunil-rao-the-employment"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260709-wa0093.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती-</strong> विकास खंड कप्तानगंज के ग्राम पंचायत नरहरपुर में मनरेगा कार्यों में फर्जी हाजिरी लगाए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि बिना कार्य कराए श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज की गई। इस मामले में ग्राम पंचायत सचिव पंकज सिंह, प्रशासक (प्रधान) तथा रोजगार सेवक सुनील कुमार राव की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार,फर्जी हाजिरी को लेकर स्थानीय समाचार पत्र में खबर प्रकाशित हुई थी। इसके बाद संबंधित पत्रकार पर दबाव बनाने और खबर का प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने की साजिश रची जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाचार के अनुसार,मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई थी,लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विभाग की निष्क्रियता से संबंधित कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा है । विकास खंड कप्तानगंज के ग्राम पंचायत नरहरपुर में बीते दिनों में बीना कार्य कराए पटल पर फर्जी हाजिरी लगाई गई थी। सचिव पंकज सिंह व प्रशासक (प्रधान) की सांठ-गांठ में रोजगार सेवक द्वारा उपस्थिति पंजिका पर कार्ड धारकों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की गयी थी । विभाग द्वारा कार्रवाई न करने पर सचिव व रोजगार सेवक सुनील कुमार राव के हौसले बुलंद हैं ।और एससी-एसटी दर्ज करवाने की धमकी दे रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत नरहरपुर भ्रष्टाचार की खबर पिछले कुछ साल पहले सम्मानित समाचार पत्र के संवाददाता द्वारा प्रमुखता से उजागर किया था । सचिव व रोजगार सेवक भ्रष्टाचार की खबर से क्षुब्द होकर सम्मानित पत्रकार के खिलाफ शिकायती पत्र देकर फर्जी मुकदमे में फसाने की साजिश किया था ।पुलिस जांच मे शिकायत निराधार पाया गया था। सवाल यह है कि नशे में मस्त सचिव पंकज सिंह अपने काले कारनामों को छुपाने हेतु पत्रकार पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने का साजिश करेगा या विभाग नशेड़ी सचिव पंकज सिंह व रोजगार सेवक पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 21:34:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>45.70 करोड़ का बजट पास, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी बोर्ड बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>तिलहर, शाहजहांपुर।</strong> नगर पालिका परिषद की वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट बोर्ड बैठक गुरुवार को विकास योजनाओं से अधिक भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जवाबदेही के सवालों के कारण सुर्खियों में रही। करीब 45.70 करोड़ रुपये का बजट तो सर्वसम्मति से पारित हो गया, लेकिन बैठक के दौरान सभासदों ने पालिका प्रशासन पर एक के बाद एक गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी। सरकारी संपत्तियों पर कब्जे, संदिग्ध टेंडर, सूचना छिपाने और मनमानी कार्यशैली जैसे मुद्दों पर जमकर हंगामा हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">चेयरमैन हाजरा बेगम और अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में बजट प्रस्तुत करते हुए अधिकारियों ने नगर विकास,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183042/budget-of-rs-4570-crore-passed-but-board-meeting-surrounded"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260709-wa0033-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>तिलहर, शाहजहांपुर।</strong> नगर पालिका परिषद की वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट बोर्ड बैठक गुरुवार को विकास योजनाओं से अधिक भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जवाबदेही के सवालों के कारण सुर्खियों में रही। करीब 45.70 करोड़ रुपये का बजट तो सर्वसम्मति से पारित हो गया, लेकिन बैठक के दौरान सभासदों ने पालिका प्रशासन पर एक के बाद एक गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी। सरकारी संपत्तियों पर कब्जे, संदिग्ध टेंडर, सूचना छिपाने और मनमानी कार्यशैली जैसे मुद्दों पर जमकर हंगामा हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चेयरमैन हाजरा बेगम और अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में बजट प्रस्तुत करते हुए अधिकारियों ने नगर विकास, सड़क, नाला निर्माण, सफाई, वेतन और पेंशन को प्राथमिकता देने की बात कही। अधिकारियों के दावों के बीच ही सभासदों ने व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाने शुरू कर दिए। सभासद दिलीप कुमार सक्सेना (अक्कू) ने आरोप लगाया कि नगर पालिका की करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्तियों से जुड़े मुकदमों में पालिका का अधिवक्ता ही नगर हितों के विपरीत काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सभासद सुशील कुमार सिंह ने वर्ष 2024 से लंबित सूचना न दिए जाने को पारदर्शिता पर सवाल बताते हुए कहा कि आखिर ऐसी कौन-सी जानकारी है जिसे दो वर्ष बाद भी छिपाया जा रहा है। उन्होंने 16 लाख रुपये के नाला सफाई टेंडर पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जब मलबा हटाने का काम पालिका कर्मचारियों से कराया गया तो ठेकेदार को लाखों रुपये का भुगतान किस आधार पर किया गया। उन्होंने सरकारी कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच की मांग उठाई। मामला उस समय और गरमा गया जब चेयरमैन आवास पर कार्यरत बताए जा रहे 15 संविदा कर्मचारियों का ब्योरा मांगा गया। आरोप है कि स्पष्ट जवाब देने के बजाय टालमटोल की गई, जिस पर सभासदों और पालिका प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में कई सभासदों ने नगर पालिका की जमीनों पर अवैध कब्जे न हटाने, जनप्रतिनिधियों की लगातार उपेक्षा, फोन तक न उठाने, बदहाल सड़कें, जलभराव और चरमराई सफाई व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन को घेरा। उनका कहना था कि नगर की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में विकास दिखाने में व्यस्त हैं।लगातार बढ़ते विरोध और आरोपों के बीच अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार ने सभी शिकायतों की जांच कराने और दोष पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद हंगामे के बीच ही 45.70 करोड़ रुपये का बजट पारित कर दिया गया।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 22:32:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अयोध्या: राम मंदिर का दान और संपत्ति की खरीदारी - 'श्रद्धा के पैसे' का हिसाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस को बहुत बड़ी सफलता मिली है। रविवार को सात ठिकानों पर छापेमारी के दौरान आरोपियों की संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर उन्हें जब्त कर लिया गया है। अब पुलिस इनकी जांच करेगी और वित्तीय लेनदेन की समीक्षा करेगी। इन सात अभियुक्तों के घरों से पुलिस को सोने चांदी के गहने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्के व नकदी भी मिली है जो यह साबित कर रही है कि कहीं न कहीं मंदिर की दान चोरी में इनका हांथ है। रामलला के दर्शन के लिए रोज लाखों श्रद्धालु आते हैं। दानपात्रों में नकद</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182331/ayodhya-ram-temple-donation-and-purchase-of-property-accounting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas25.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस को बहुत बड़ी सफलता मिली है। रविवार को सात ठिकानों पर छापेमारी के दौरान आरोपियों की संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर उन्हें जब्त कर लिया गया है। अब पुलिस इनकी जांच करेगी और वित्तीय लेनदेन की समीक्षा करेगी। इन सात अभियुक्तों के घरों से पुलिस को सोने चांदी के गहने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्के व नकदी भी मिली है जो यह साबित कर रही है कि कहीं न कहीं मंदिर की दान चोरी में इनका हांथ है। रामलला के दर्शन के लिए रोज लाखों श्रद्धालु आते हैं। दानपात्रों में नकद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गहने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चेक सब गिरता है। लेकिन अब वही </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धा का पैसा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">विवाद में है। एक तरफ ट्रस्ट की करोड़ों की जमीन खरीदारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी तरफ चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों की करोड़ों की संपत्ति। दान कितना आता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेश से लेकर घर तक- विदेशी दान- महाकुंभ के दौरान अकेले जनवरी-फरवरी </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में अमेरिका समेत </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> देशों से </span>57<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये का विदेशी दान मिला।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समर्पण निधि से अब तक देश-विदेश के करोड़ों भक्तों ने आस्था से दान दिया है। भाजपा नेता रजनीश सिंह के मुताबिक ये पैसा "किसी व्यक्ति का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ों भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक है"। शुरुआत </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये से ट्रस्ट को पहला दान मोदी सरकार ने </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये नकद देकर किया था। ट्रस्ट ने क्या खरीदा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">चार महीने में </span>36.61<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ की जमीन। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तेजी से जमीन खरीद रहा है। पिछले </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने अयोध्या के हैबतपुर में </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> जगहों पर </span>4.29<span lang="hi" xml:lang="hi"> एकड़ जमीन खरीदी गई। जिसकी कुल कीमत: </span>36.61<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये है। सबसे बड़ी डील-  </span>11,194<span lang="hi" xml:lang="hi"> स्क्वायर फीट की एक जमीन अकेले।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रानोपाली में भी </span>5,490<span lang="hi" xml:lang="hi"> स्क्वायर फीट की जमीन अलग से ली गई है। ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर विस्तार और सुविधाओं के लिए जमीन ली जा रही है। विवाद का केंद्र: चढ़ावे की </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">चोरी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और करोड़ों की संपत्ति यही सबसे बड़ा मुद्दा है। आरोप है कि दानपात्रों से करोड़ों रुपये गायब हुए। </span>14,500<span lang="hi" xml:lang="hi"> की नौकरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ों की संपत्ति- नोट गिनने वाले </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्राइवेट कर्मचारियों की सैलरी सिर्फ </span>14,500<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये महीना है। लेकिन उनमें से कुछ ने </span>1.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ की जमीन</span>, 40<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख का प्लॉट खरीद लिया। कैसे पकड़े गए- </span>18-20<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार सैलरी वाले दो कर्मचारियों की डेढ़ करोड़ की जमीन खरीद से पूरा मामला खुला।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कौन शामिल-  लवकुश मिश्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुकल्प मिश्रा समेत </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी दान गिनती प्रक्रिया में थे। सीसीटीवी फुटेज में पैसे चुराते पकड़े गए। कितना घोटाला</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आशंका </span>200<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये से अधिक की है। अब तक </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> कर्मचारियों से </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ नकद</span>, 1<span lang="hi" xml:lang="hi"> कार</span>, 3<span lang="hi" xml:lang="hi"> आईफोन बरामद हुए हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> जांच कहां तक पहुंची</span>? SIT <span lang="hi" xml:lang="hi">और राजनीति क्या कहती है - एसआईटी का गठन - योगी सरकार ने मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> सदस्यीय एसआईटी बनाई। </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। एसआईटी ने अपना काम शुरू कर दिया है और आठ में से सात लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की गई है जिनके पास से काफी संपत्ति के सबूत मिले हैं। ट्रस्ट की शिकायत पर </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों के खिलाफ </span>BNS <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा </span>306, 316, 317, 61<span lang="hi" xml:lang="hi"> के तहत केस दर्ज हुआ है। सपा का आरोप- अखिलेश यादव ने कहा कि चंदे के पैसों से मकान खरीदे गए हैं। उन्होंने हाईकोर्ट के रिटायर जज से जांच कराने की मांग की है। ट्रस्ट का बयान-  नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि ये विवाद </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जमीन खरीद विवाद</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से भी ज्यादा गंभीर है। उन्होंने एक अनुभवी </span>CEO <span lang="hi" xml:lang="hi">की नियुक्ति की जरूरत बताई।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता की मांग: हिसाब कौन देगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा नेता रजनीश सिंह ने </span>PM <span lang="hi" xml:lang="hi">को पत्र लिखकर ट्रस्ट के बनने से अब तक का पूरा वित्तीय लेन-देन वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका तर्क है कि "हर भक्त को यह जानने का नैतिक और लोकतांत्रिक अधिकार है कि दान में मिले पैसे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गहनों का इस्तेमाल कैसे हुआ"। आस्था बनाम जवाबदेही- राम मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ों लोगों की आस्था है। ट्रस्ट जमीन खरीदकर विस्तार कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये ठीक है। लेकिन अगर </span>14,500<span lang="hi" xml:lang="hi"> सैलरी वाला कर्मचारी करोड़पति बन रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सवाल उठना लाजमी है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">SIT <span lang="hi" xml:lang="hi">की रिपोर्ट तय करेगी कि ये </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्तिगत गबन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">है या सिस्टम की चूक। फिलहाल </span>8 <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग सलाखों के पीछे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और करोड़ों श्रद्धालु हिसाब मांग रहे हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:28:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भीटी गांव की महिलाओं का थाना समाधान दिवस में प्रदर्शन, ,</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>हंडिया (प्रयागराज)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  हंडिया थाना परिसर में आयोजित थाना समाधान दिवस के दौरान भीटी गांव की दर्जनों महिलाएं सरकारी शराब की दुकान हटाने की मांग को लेकर पहुंचीं और जोरदार प्रदर्शन किया। महिलाओं ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि गांव में संचालित शराब की दुकान के कारण क्षेत्र का सामाजिक माहौल लगातार प्रभावित हो रहा है तथा आए दिन विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">महिलाओं का आरोप था कि शराब की दुकान के आसपास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे गांव की महिलाओं, युवतियों और स्कूली छात्राओं को आने-जाने में परेशानी का</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181173/demonstration-of-women-of-bhiti-village-in-police-station-resolution"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260613-wa0110-(20).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>हंडिया (प्रयागराज)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> हंडिया थाना परिसर में आयोजित थाना समाधान दिवस के दौरान भीटी गांव की दर्जनों महिलाएं सरकारी शराब की दुकान हटाने की मांग को लेकर पहुंचीं और जोरदार प्रदर्शन किया। महिलाओं ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि गांव में संचालित शराब की दुकान के कारण क्षेत्र का सामाजिक माहौल लगातार प्रभावित हो रहा है तथा आए दिन विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिलाओं का आरोप था कि शराब की दुकान के आसपास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे गांव की महिलाओं, युवतियों और स्कूली छात्राओं को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई बार छेड़खानी और अभद्र टिप्पणी की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने कहा कि शराब की दुकान हटाने के लिए पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित नहीं किया गया तो ग्रामीण महिलाएं बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना समाधान दिवस में मौजूद सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) ने महिलाओं की शिकायत को गंभीरता से सुना। छेड़खानी और कानून-व्यवस्था से जुड़े आरोपों पर तत्काल प्रभाव से जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। साथ ही महिलाओं को आश्वस्त किया कि उनकी शिकायतों का नियमानुसार निस्तारण कराया जाएगा।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 20:24:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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