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                <title>Government Accountability - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Government Accountability RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ग्राम पंचायत भवन में नहीं कर्मचारी नहीं बैठ रहे कर्मचारियों के बैठने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीजिले के दुबौलिया ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंचायत भवनों को ग्राम सचिवालय के रूप में विकसित किया गया है। भवनों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बावजूद कई स्थानों पर कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति नहीं होने से ग्रामीणों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसा ही मामला दुबौलिया विकासखंड के डिंगरापुर ग्राम सचिवालय का सामने आया है। डिंगरापुर जनकल्याण समिति ने ग्राम सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185661/employees-are-not-sitting-in-gram-panchayat-building-demand-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260819-wa00791.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीजिले के दुबौलिया ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंचायत भवनों को ग्राम सचिवालय के रूप में विकसित किया गया है। भवनों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बावजूद कई स्थानों पर कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति नहीं होने से ग्रामीणों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसा ही मामला दुबौलिया विकासखंड के डिंगरापुर ग्राम सचिवालय का सामने आया है। डिंगरापुर जनकल्याण समिति ने ग्राम सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समिति का आरोप है कि ग्राम सचिवालय भवन में कर्मचारियों के नियमित रूप से नहीं बैठने के कारण ग्रामीणों में असंतोष है। ग्रामीणों को यह भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है कि सचिवालय में कौन-कौन से कर्मचारी तैनात हैं और उनकी नियमित उपस्थिति हो रही है या नहीं।</div>
<div style="text-align:justify;">जनकल्याण समिति ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम सचिवालय में तैनात कर्मचारियों के नाम, पद, नियुक्ति/पदस्थापन, उपस्थिति तथा किए गए भुगतान की निष्पक्ष जांच कराई जाए। समिति ने कहा कि यदि बिना कार्य किए अथवा वास्तविक उपस्थिति के बिना किसी कर्मचारी को भुगतान किए जाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और सरकारी धन की वसूली भी कराई जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समिति ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति का विरोध करना नहीं, बल्कि ग्राम सचिवालय में पारदर्शिता, जवाबदेही और ग्रामीणों को बेहतर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है। समिति ने प्रशासन से ग्राम सचिवालय में कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने की भी मांग की है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 18:53:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रधान के इस्तीफे से क्या बदलेगा राजनैतिक समीकरण </title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की खबर ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्षी दल इसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं और इसे केंद्र सरकार पर बढ़ते जनदबाव का परिणाम बता रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सरकार की ओर से इस घटनाक्रम को अलग दृष्टि से देखा जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल एक मंत्री के इस्तीफे से देश की राजनीति की दिशा बदल जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या यह केवल तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों का प्रभाव है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> अगर गौर किया जाए तो</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184208/6a68cd874402f"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas15.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की खबर ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्षी दल इसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं और इसे केंद्र सरकार पर बढ़ते जनदबाव का परिणाम बता रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सरकार की ओर से इस घटनाक्रम को अलग दृष्टि से देखा जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल एक मंत्री के इस्तीफे से देश की राजनीति की दिशा बदल जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या यह केवल तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों का प्रभाव है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> अगर गौर किया जाए तो इस इस्तीफे से विपक्ष के ख़ुश होने की कोई बात नहीं है क्योंकि न तो यह आंदोलन विपक्ष का था और न ही भारतीय जनता पार्टी ने यह इस्तीफा विपक्ष के कारण दिलाया। यह आंदोलन छात्रों का था और यह मांग भी छात्रों की थी तो सरकार को छात्रों की मांग के आगे नतमस्तक होना पड़ा। धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी का कहना भी है </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कि वह छात्रों की मांग नहीं ठुकरा सकते। धर्मेन्द्र प्रधान लंबे समय से भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते रहे हैं। संगठन और सरकार दोनों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने नई शिक्षा नीति को लागू करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उच्च शिक्षा में सुधार और कई नई योजनाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। हालांकि उनके कार्यकाल में कई विवाद भी सामने आए। विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक और छात्रों के आंदोलनों ने सरकार पर लगातार दबाव बनाया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था और आरोप लगा रहा था कि शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती अव्यवस्था के लिए राजनीतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए।यदि किसी राजनीतिक दबाव या नैतिक आधार पर इस्तीफा हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो विपक्ष इसे अपनी रणनीति की सफलता के रूप में पेश करेगा। कांग्रेस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाजवादी पार्टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वाम दल और अन्य विपक्षी दल यह कहने का प्रयास करेंगे कि उनकी आवाज और जनता के आंदोलन के कारण सरकार को झुकना पड़ा। यह संदेश विशेष रूप से युवाओं और छात्रों तक पहुंचाने की कोशिश होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे सीधे करोड़ों युवाओं को प्रभावित करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि भारतीय राजनीति का इतिहास बताता है कि किसी एक मंत्री का इस्तीफा हमेशा सरकार की राजनीतिक कमजोरी का संकेत नहीं होता। कई बार सरकारें व्यापक राजनीतिक रणनीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाबदेही तय करने या प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत भी मंत्रिमंडल में बदलाव करती हैं। इसलिए केवल इस्तीफे के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि सरकार की स्थिति कमजोर हो गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> विपक्ष के लिए यह अवसर अवश्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन चुनौती भी कम नहीं है। केवल किसी मंत्री के इस्तीफे को राजनीतिक जीत बताने से चुनावी लाभ स्वतः नहीं मिलता। यदि विपक्ष वास्तव में युवाओं का विश्वास जीतना चाहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा प्रणाली और पारदर्शिता पर ठोस वैकल्पिक नीति भी प्रस्तुत करनी होगी। जनता अब केवल विरोध नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाधान भी देखना चाहती है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा के सामने भी यह मौका है कि वह शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नए कदम उठाए और जनता को यह संदेश दे कि सरकार जवाबदेही तय करने से पीछे नहीं हटती। यदि सरकार नई व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर परीक्षा प्रणाली और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू करने में सफल होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो विपक्ष का यह मुद्दा धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीतिक दृष्टि से देखें तो विपक्ष इस घटनाक्रम का इस्तेमाल आगामी चुनावों में करेगा। संसद से लेकर सड़क तक यह मुद्दा उठाया जाएगा। छात्र संगठनों और युवा वर्ग के बीच भी इसे प्रमुख मुद्दा बनाने की कोशिश होगी। लेकिन अंततः चुनावों में मतदाता केवल एक घटना के आधार पर निर्णय नहीं लेते। वे सरकार के समग्र प्रदर्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक स्थिति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानून-व्यवस्था और विकास जैसे अनेक मुद्दों को ध्यान में रखते हैं। यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि लोकतंत्र में इस्तीफा जवाबदेही का एक माध्यम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन किसी भी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उसके कारणों और परिस्थितियों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन होना चाहिए। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि इस्तीफा वास्तव में किसी नीति विफलता की स्वीकारोक्ति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उससे व्यापक सुधार की अपेक्षा की जाएगी। यदि यह केवल राजनीतिक या संगठनात्मक पुनर्गठन का हिस्सा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसका प्रभाव सीमित भी हो सकता है। धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से विपक्ष को निश्चित रूप से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा मिला है और वह इसे सरकार की नैतिक हार के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश करेगा। वहीं भाजपा इस घटनाक्रम को नुकसान नियंत्रण और नई शुरुआत के रूप में पेश करने का प्रयास कर सकती है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह केवल एक राजनीतिक घटना थी या भारतीय राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत। फिलहाल इतना कहा जा सकता है कि किसी मंत्री का इस्तीफा विपक्ष को उत्साहित अवश्य कर सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन स्थायी राजनीतिक लाभ उसी दल को मिलता है जो जनता के सामने विश्वसनीय विकल्प और प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर सके।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 21:16:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसे काकरोच पार्टी की जीत कहें या मोदी सरकार की संवेदनशीलता</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लेखक: प्रो. (डॉ.) मनमोहन प्रकाश</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लोकतंत्र में किसी आंदोलन की सफलता का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि आंदोलन समाप्त हो गया, सरकार ने कुछ आश्वासन दिए या आंदोलनकारियों की बात सुनते हुए समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए। वास्तविक कसौटी यह होती है कि क्या उस प्रक्रिया से किसी जनसमस्या का समाधान निकला और क्या उससे लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा संवाद की संस्कृति को बल मिला।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही में जंतर-मंतर पर काकरोच पार्टी का आंदोलन समाप्त हुआ। इसके बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने इसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत बताते हुए सार्वजनिक रूप से कहा कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184134/call-it-the-victory-of-the-cockroach-party-or-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/04c5e8c0-60a7-11f1-b682-cf91850925ea.jpg.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लेखक: प्रो. (डॉ.) मनमोहन प्रकाश</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकतंत्र में किसी आंदोलन की सफलता का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि आंदोलन समाप्त हो गया, सरकार ने कुछ आश्वासन दिए या आंदोलनकारियों की बात सुनते हुए समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए। वास्तविक कसौटी यह होती है कि क्या उस प्रक्रिया से किसी जनसमस्या का समाधान निकला और क्या उससे लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा संवाद की संस्कृति को बल मिला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही में जंतर-मंतर पर काकरोच पार्टी का आंदोलन समाप्त हुआ। इसके बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने इसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत बताते हुए सार्वजनिक रूप से कहा कि "सरकार झुकती है, उसे झुकाने वाला चाहिए।" यदि यही आंदोलन की आधिकारिक राजनीतिक व्याख्या है, तो यह केवल विजय-घोषणा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विमर्श का भी विषय है। ऐसी भाषा में राजनीतिक आत्मविश्वास के साथ-साथ आत्ममुग्धता का आभास भी मिलता है, जो लोकतांत्रिक संवाद की मूल भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकतंत्र में सरकार का संवाद के लिए आगे आना या किसी मांग पर पुनर्विचार करना उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि संवैधानिक उत्तरदायित्व और जनभावनाओं के प्रति संवेदनशीलता का परिचायक है। किसी भी लोकतांत्रिक सरकार का दायित्व है कि वह जनता की बात सुने, विरोध के अधिकार का सम्मान करे और आवश्यकता पड़ने पर अपने निर्णयों की समीक्षा भी करे। यदि इस स्वाभाविक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को "सरकार को झुकाना" कहा जाए, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों की अपेक्षा राजनीतिक वर्चस्व की मानसिकता को अधिक प्रतिबिंबित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय लोकतंत्र की परंपरा में संवाद को कभी पराजय नहीं माना गया। यदि सरकार जनता की अपेक्षाओं विशेषकर विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए बातचीत का मार्ग अपनाती है, तो यह उसकी परिपक्वता है। इसी प्रकार यदि विपक्ष या कोई राजनीतिक दल जनहित के किसी मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाता है और उसके परिणामस्वरूप सकारात्मक परिवर्तन होते हैं, तो उसका लोकतांत्रिक योगदान भी स्वीकार किया जाना चाहिए। किंतु लोकतांत्रिक श्रेय और राजनीतिक अहंकार के बीच एक स्पष्ट अंतर होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान राजनीति में लगभग प्रत्येक निर्णय को किसी एक पक्ष की "जीत" और दूसरे की "हार" के रूप में प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। जंतर-मंतर आंदोलन की समाप्ति के बाद भी विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से इसका श्रेय लेने का प्रयास करेंगे। किंतु ऐसी प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र के सहयोगात्मक चरित्र को कमजोर करती है। यदि हर संवाद के बाद कोई पक्ष स्वयं को विजेता और दूसरे को पराजित घोषित करने लगे, तो भविष्य में सार्थक संवाद की संभावनाएँ भी प्रभावित हो सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी स्मरणीय है कि सरकारें किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की होती हैं। इसलिए किसी आंदोलन के बाद सरकार यदि चर्चा या समाधान की दिशा में आगे बढ़ती है, तो वह किसी दल के दबाव में नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक दायित्व के निर्वहन के तहत ऐसा करती है। ऐसी परिस्थितियों में सभी पक्षों से संयम, उत्तरदायित्व और लोकतांत्रिक मर्यादा की अपेक्षा स्वाभाविक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इतिहास इस बात का साक्षी है कि स्थायी समाधान टकराव या अहंकार से नहीं, बल्कि संवाद, सहमति और पारस्परिक सम्मान से प्राप्त हुए हैं। विपक्ष का दायित्व सरकार से कठोर प्रश्न पूछना और जनहित के मुद्दों को उठाना है, जबकि सरकार का दायित्व आलोचना को लोकतांत्रिक भावना से स्वीकार करना और आवश्यक होने पर सुधारात्मक कदम उठाना है। यही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अतः जंतर-मंतर के इस आंदोलन को केवल किसी राजनीतिक दल की जीत अथवा सरकार की हार के रूप में देखना उचित नहीं होगा। यदि इससे किसी जनसमस्या के समाधान की दिशा में सकारात्मक प्रगति हुई है, तो वास्तविक विजय लोकतंत्र की है। इसके विपरीत यदि इस अवसर को राजनीतिक शक्ति-प्रदर्शन, आत्मप्रशंसा या "हमने सरकार को झुका दिया" जैसे नारों तक सीमित कर दिया जाए, तो इससे लोकतांत्रिक संस्कृति सुदृढ़ होने के बजाय कमजोर होने का खतरा रहता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकतंत्र की सबसे बड़ी सफलता तब होती है जब सरकार संवेदनशील हो, विपक्ष उत्तरदायी हो और अंततः लाभ जनता को मिले। सरकार का संवाद करना उसकी पराजय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परिपक्वता का प्रमाण है; वहीं विपक्ष की वास्तविक सफलता समाधान का सहभागी बनने में है, न कि संवाद को केवल राजनीतिक विजय के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करने में।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 22:18:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वांगचुक का अनशन समाप्त</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div class="m_-2093172014009432956WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक और युवाओं के बढ़ते असंतोष को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन ने हाल के दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना दिया है। इस आंदोलन को नई ऊर्जा तब मिली जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। </span>26<span lang="hi" xml:lang="hi">  दिनों तक चले इस अनशन ने सरकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया और आम जनता का ध्यान छात्रों की मांगों की ओर आकर्षित किया। अब जब सोनम वांगचुक ने सरकार से कुछ आश्वासनों के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह</span></p></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184009/wangchuks-fast-ends"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas13.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div class="m_-2093172014009432956WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक और युवाओं के बढ़ते असंतोष को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन ने हाल के दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना दिया है। इस आंदोलन को नई ऊर्जा तब मिली जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। </span>26<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों तक चले इस अनशन ने सरकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया और आम जनता का ध्यान छात्रों की मांगों की ओर आकर्षित किया। अब जब सोनम वांगचुक ने सरकार से कुछ आश्वासनों के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या इससे छात्र आंदोलन कमजोर पड़ जाएगा या फिर आंदोलन किसी नए चरण में प्रवेश करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रश्न का उत्तर सरल नहीं है। किसी भी बड़े जन आंदोलन का भविष्य केवल एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं करता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसकी जड़ें कितनी गहरी हैं और लोगों का समर्थन कितना व्यापक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह अधिक महत्वपूर्ण होता है। सोनम वांगचुक ने अपना अनशन सरकार से बातचीत और कुछ लिखित आश्वासनों के बाद समाप्त किया। बताया गया कि सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसे बिंदुओं पर सहमति जताई। इसके बाद उन्होंने कहा कि यह "भूख का अंत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाबदेही की शुरुआत" है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंदोलन से जुड़े छात्र संगठनों और युवा नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल अनशन समाप्त होने का अर्थ आंदोलन समाप्त होना नहीं है। उनका कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उनकी अन्य प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक विरोध जारी रहेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास भी बताता है कि कई आंदोलनों में किसी प्रमुख नेता का अनशन समाप्त होने के बाद भी आंदोलन जारी रहा है। कई बार अनशन केवल सरकार का ध्यान आकर्षित करने का माध्यम होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि असली संघर्ष उसके बाद शुरू होता है। यदि जनता और आंदोलनकारी संगठित रहें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आंदोलन आगे भी प्रभावी बना रह सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी सच है कि सोनम वांगचुक इस आंदोलन का एक बड़ा नैतिक चेहरा बन चुके थे। उनके अनशन ने पूरे देश में छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उनके अनशन समाप्त होने के बाद कुछ लोगों में यह धारणा बन सकती है कि अब सरकार और आंदोलन के बीच संवाद शुरू हो गया है। इससे कुछ प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम हो सकता है और आंदोलन की तीव्रता अस्थायी रूप से घट सकती है। सरकार के लिए भी यह एक अवसर है। यदि वह अपने आश्वासनों को समयबद्ध तरीके से लागू करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाती है और दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आंदोलन धीरे-धीरे शांत हो सकता है। लेकिन यदि वादे केवल आश्वासन बनकर रह जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आंदोलन पहले से अधिक व्यापक रूप ले सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। विभिन्न विपक्षी दल छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज उठा रहे हैं और सरकार पर दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। इससे आंदोलन का राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ा है। इस पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह केवल एक परीक्षा या एक पेपर लीक का मुद्दा नहीं रह गया है। यह युवाओं के भविष्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और सरकारी जवाबदेही से जुड़ा व्यापक प्रश्न बन चुका है। यही कारण है कि आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ा और इसमें केवल छात्र ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अभिभावक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षाविद और समाज के अन्य वर्ग भी शामिल होने लगे। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने से छात्र आंदोलन खत्म हो जाएगा। अधिक संभावना यही है कि आंदोलन का स्वरूप बदल सकता है। सड़क पर विरोध के साथ-साथ अब वार्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानूनी प्रक्रिया और नीतिगत सुधारों की मांग पर भी अधिक जोर दिया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि सरकार और छात्र संगठनों के बीच सार्थक संवाद आगे बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो समाधान की संभावना मजबूत हो सकती है। लेकिन यदि अपेक्षित सुधार नहीं हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आंदोलन फिर से तेज हो सकता है। सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल समाप्त करना आंदोलन का अंत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक नए चरण की शुरुआत माना जा सकता है। इससे तत्काल आंदोलन की रणनीति में बदलाव संभव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन छात्रों की मूल समस्याएं और उनकी मांगें अभी भी कायम हैं। इसलिए आने वाले दिनों में यह सरकार की कार्रवाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवाद की गंभीरता और सुधारों की गति पर निर्भर करेगा कि यह आंदोलन शांत होता है या फिर और व्यापक रूप लेता है।</span></p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 16:26:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहली बारिश में बह गया विकास</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखीमपुर-खीरी, फूलबेहड़।</strong> सांच को आंच नहीं"और "समय से बड़ा कोई न्यायाधीश नहीं होता" ये कहावतें उस समय चरितार्थ होती दिखीं, जब लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा लाखों रुपये की लागत से निर्मित ग्राम लौकिहा से इब्राहिमपुर संपर्क मार्ग पहली ही बरसात में जगह-जगह धंस गया। जिस सड़क को ग्रामीणों के लिए विकास की नई राह बताया गया था, वही अब खतरे का रास्ता बन चुकी है।ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता की घोर अनदेखी की गई। सड़क की डामर परत उखड़ गई, किनारे धंस गए और नीचे की मिट्टी खुलकर बाहर आ गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">तस्वीरें इस बात की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183977/development-washed-away-in-the-first-rain"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/photo-01.........jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखीमपुर-खीरी, फूलबेहड़।</strong> सांच को आंच नहीं"और "समय से बड़ा कोई न्यायाधीश नहीं होता" ये कहावतें उस समय चरितार्थ होती दिखीं, जब लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा लाखों रुपये की लागत से निर्मित ग्राम लौकिहा से इब्राहिमपुर संपर्क मार्ग पहली ही बरसात में जगह-जगह धंस गया। जिस सड़क को ग्रामीणों के लिए विकास की नई राह बताया गया था, वही अब खतरे का रास्ता बन चुकी है।ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता की घोर अनदेखी की गई। सड़क की डामर परत उखड़ गई, किनारे धंस गए और नीचे की मिट्टी खुलकर बाहर आ गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तस्वीरें इस बात की गवाही देती हैं कि निर्माण कार्य में कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही हुई है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।चोर की दाढ़ी में तिनका","ऊँची दुकान, फीका पकवान", और हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और" जैसी कहावतें ग्रामीणों की जुबान पर हैं। उनका कहना है कि कागजों में सड़क मजबूत दिखाई गई, लेकिन हकीकत पहली बारिश में ही सामने आ गई।  स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग से प्रतिदिन किसान, छात्र, एंबुलेंस, स्कूल वाहन और भारी वाहन गुजरते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सड़क धंसने से लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता की जांच हो, दोषी ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा सड़क का पुनर्निर्माण मानकों के अनुरूप कराया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कहावत है_ झूठ के पांव नहीं होते, और सच्चाई देर से सही लेकिन सामने जरूर आती है।" पहली ही बरसात ने सड़क निर्माण की असलियत उजागर कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जनता के टैक्स के लाखों रुपये की जवाबदेही तय होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? जनता की निगाहें अब लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 22:47:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करोड़ों की पानी टंकी बनी 'सफेद हाथी'</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर।</strong> विकास खंड पचपेड़वा के ग्राम वीरपुर सेमरा में जल निगम द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित पानी की विशाल टंकी आज अपनी बदहाली और निष्क्रियता की कहानी खुद बयां कर रही है। जिस परियोजना का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था, वही आज ग्रामीणों की नजर में सरकारी उदासीनता और योजनाओं की जमीनी हकीकत का प्रतीक बन चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना है कि टंकी का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन आज तक नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। नलों से पानी नहीं निकलता, जबकि लोग आज भी हैंडपंपों और अन्य जल</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183707/water-tank-worth-crores-becomes-white-elephant"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260715-wa0488.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर।</strong> विकास खंड पचपेड़वा के ग्राम वीरपुर सेमरा में जल निगम द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित पानी की विशाल टंकी आज अपनी बदहाली और निष्क्रियता की कहानी खुद बयां कर रही है। जिस परियोजना का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था, वही आज ग्रामीणों की नजर में सरकारी उदासीनता और योजनाओं की जमीनी हकीकत का प्रतीक बन चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना है कि टंकी का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन आज तक नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। नलों से पानी नहीं निकलता, जबकि लोग आज भी हैंडपंपों और अन्य जल स्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि परियोजना समय पर संचालित नहीं होनी थी, तो फिर जनता के पैसे से इतना बड़ा निर्माण आखिर किस उद्देश्य से कराया गया? गांव में खड़ी यह पानी की टंकी अब विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि अधूरी योजनाओं और जवाबदेही की कमी का स्मारक बनती जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल निगम के अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, जलापूर्ति तत्काल शुरू कराई जाए तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार हर घर जल पहुंचाने का दावा कर रही है, तो वीरपुर सेमरा के ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए क्यों भटक रहे हैं? करोड़ों की लागत से बनी यह टंकी आखिर जनता की प्यास कब बुझाएगी, या फिर हमेशा 'सफेद हाथी' बनकर ही खड़ी रहेगी?</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 14:09:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पथ निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को लगाई फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>रांची, झारखंड:-</strong> मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में पथ निर्माण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभागीय अधिकारियों को लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनावश्यक देरी या गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">      यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरे नहीं हुए तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने पिछले पांच वर्षों के दौरान सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज और पुल-पुलियों से संबंधित निर्माणाधीन एवं पूर्ण परियोजनाओं</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>   </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183447/chief-minister-hemant-soren-reprimanded-the-officials-in-the-review"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/news-6-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>रांची, झारखंड:-</strong> मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में पथ निर्माण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभागीय अधिकारियों को लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनावश्यक देरी या गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरे नहीं हुए तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने पिछले पांच वर्षों के दौरान सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज और पुल-पुलियों से संबंधित निर्माणाधीन एवं पूर्ण परियोजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री ने सभी परियोजनाओं की प्रगति का गहन अवलोकन करते हुए कार्यों में हो रही देरी पर नाराजगी जताई और कहा कि सभी योजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>   ■ हर परियोजना का डेटाबेस और जियो-टैगिंग होगी अनिवार्य</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने पथ निर्माण विभाग को राज्य की सभी परियोजनाओं का अद्यतन एवं सुव्यवस्थित डेटाबेस तैयार करने तथा प्रत्येक परियोजना की जियो-टैगिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हर परियोजना की लागत, प्रगति, समय-सीमा और वर्तमान स्थिति का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए, ताकि निगरानी प्रणाली अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सके। उन्होंने कहा कि जियो-टैगिंग से जवाबदेही बढ़ेगी और कार्यों की वास्तविक स्थिति की आसानी से समीक्षा की जा सकेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>   ■ सोशल मीडिया और मीडिया में मिलने वाली शिकायतों पर तुरंत हो कार्रवाई</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से लगातार सड़कों की खराब स्थिति, गड्ढों, जलजमाव और निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसी सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करें और उनके समाधान का अद्यतन रिकॉर्ड भी तैयार रखें।  उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में खराब सड़कें दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। इसलिए गड्ढों की तत्काल मरम्मत, जल निकासी की समुचित व्यवस्था तथा सड़कों की गुणवत्ता में सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। साथ ही संकीर्ण सड़कों के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण पर भी विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>   ■ दो माह में प्रमुख परियोजनाएं पूरी करने का निर्देश</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन सड़क, फ्लाईओवर और पुल-पुलिया परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने राजधानी रांची सहित राज्य के अन्य जिलों में लंबित प्रमुख परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर अगले दो माह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरे नहीं किए गए तो संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>    ■ गुणवत्ता और नियमित मॉनिटरिंग पर विशेष जोर</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने सोलर साइकिल ट्रैक सहित अन्य नई परियोजनाओं की भी समीक्षा की और सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, मजबूती और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुल-पुलियों के किनारों को मजबूत बनाने, जल निकासी की बेहतर व्यवस्था करने तथा प्रत्येक परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग करने पर विशेष बल दिया। बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, पथ निर्माण विभाग के सचिव सुनील कुमार, अभियंता प्रमुख प्रवीण जयंत भेंगरा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 22:13:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेवा के अंतिम दौर में बीडीओ ने 22 जून को तालाब व खेल मैदान पर लगवाया फर्जी हाज़िरी*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>कप्तानगंज बीडीओ चन्द्रभान उपाध्याय रिटायर्ड की रेखा पर खड़े हुए हैं ।और उनके द्वारा किए/कराए गए भ्रष्टाचार की चर्चा जोरों पर बनी हुई है ।पिछले दिनों ग्राम पंचायत नरहरपुर में ललहवा पर तालाब खुदाई कार्य में हुए भ्रष्टाचार को लेकर डीसी मनरेगा बस्ती द्वारा नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया था ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">साहब के आदेशों को पैर की जुती समझ कर 20 दिन बाद भी वीडीओ आख्या प्रेषित करना मुनासिब नहीं समझते। जिसका नतीजा यह है कि सचिव पंकज सिंह का भ्रष्ट्राचार रुक नहीं रहा है कार्यवाही न होने से पुनः एक बार फिर उसी साइड पर मस्टररोल जारी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182458/in-the-last-round-of-service-bdo-imposed-fake-attendance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260624-wa0090.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>कप्तानगंज बीडीओ चन्द्रभान उपाध्याय रिटायर्ड की रेखा पर खड़े हुए हैं ।और उनके द्वारा किए/कराए गए भ्रष्टाचार की चर्चा जोरों पर बनी हुई है ।पिछले दिनों ग्राम पंचायत नरहरपुर में ललहवा पर तालाब खुदाई कार्य में हुए भ्रष्टाचार को लेकर डीसी मनरेगा बस्ती द्वारा नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साहब के आदेशों को पैर की जुती समझ कर 20 दिन बाद भी वीडीओ आख्या प्रेषित करना मुनासिब नहीं समझते। जिसका नतीजा यह है कि सचिव पंकज सिंह का भ्रष्ट्राचार रुक नहीं रहा है कार्यवाही न होने से पुनः एक बार फिर उसी साइड पर मस्टररोल जारी कर रोजगार सेवक सुनील राव ने फर्जी हाजिरी लगाना शुरू कर दिया ।रोजगार सेवक सुनील राव के हौसले इस कदर बुलंद है कि बिना काम फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है यदि यही आलम चलता रहा तो अन्य ग्राम पंचायत के रोजगार सेवक भी सुनील राव की तरह माल समेटने में जुट जाएंगे ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेवानिवृत होने वाले कप्तानगंज वीडीओ चंद्रभान उपाध्याय तो चले जाएंगे लेकिन आने वाले नवागत अधिकारी के ऊपर भ्रष्टाचार के कार्यवाहियों की तमाम चुनौतियां यादगार के लिए दे जा रहे है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त समाचार के अनुसार -खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज चंद्रभान उपाध्याय दिनांक 30 जून 2026 सायं 5 बजे कार्यकाल समाप्त हो रहा है ।विकास खंड कप्तानगंज में  जिस प्रकार से दर्जनों ग्राम पंचायतो में मनरेगा भ्रष्टाचार एवं शिकायत पर फर्जी रिपोर्ट लगना एव परिसर मयखाना में तब्बदील होने की लगातार खबरे प्रकाशित हो चुकी है तो वही स्थानीय मीडिया के साथ राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के जिला अध्यक्ष कृष्णा ननंद ने बीडीओ कार्यालय में व्याप्त भ्रष्ट्राचार को लेकर ऑन कैमरा बीडीओ की पोल खोली गयी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उससे हर कोई वाकिफ हैं। बीडीओ का गैर जिम्मेदाराना बयान मीडिया सहित आम जनता में चर्चा का माहौल दिनो दिन बढ़ता जा रहा है।जब मीडिया टिम ने फोन पर बीडीओ कप्तानगंज से ग्राम पंचायत नरहरपुर में ललहवा तालाब खुदाई के संबंधों में जानकारी लेनी चाहि तो माकूल जवाब नही मिला।22 जून को मनरेगा पटल पर 45 मजदूरों की फर्जी हाजिरी तो लगी है।बड़ा सवाल यह है कि बीडीओ की कार्यवाही एवं मीडिया के सवालो के जबाब जलेबी की तरह होती यदि कार्यवाही हुयी है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता है ।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:50:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तहसील दिवस पर आये आवेदन पत्रो के निस्तारण की डीएम के टेस्टिंग में फेल।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">तहसील फूलपुर, प्रयागराज में सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार वर्मा द्वारा विगत तहसील दिवस के निस्तारित प्रकरणों में से रैण्डम आधार पर 51 निस्तारित प्रकरणों का परीक्षण 17 जिला स्तरीय अधिकारियों से कराया गया, जिसमें 21 ऐसे प्रकरण पाये गये जो जिला स्तरीय अधिकारियों के परीक्षण में शिकायतकर्ताओं से असंतोषजनक फीडबैक प्राप्त हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी के निर्देश क्रम में बगैर स्थलीय निरीक्षण किये कार्मिकों को विभागीय कार्यवाही, सतही आख्या प्रस्तुत करने वाले कार्मिकों को प्रतिकूल प्रविष्टि एवं संतोषजनक आख्या न प्रस्तुत करने वाले कार्मिकों कठोर चेतावनी निर्गत किये जाने के निर्देश दिये गये</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181850/dm-failed-in-testing-for-disposal-of-applications-received-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images6.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तहसील फूलपुर, प्रयागराज में सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार वर्मा द्वारा विगत तहसील दिवस के निस्तारित प्रकरणों में से रैण्डम आधार पर 51 निस्तारित प्रकरणों का परीक्षण 17 जिला स्तरीय अधिकारियों से कराया गया, जिसमें 21 ऐसे प्रकरण पाये गये जो जिला स्तरीय अधिकारियों के परीक्षण में शिकायतकर्ताओं से असंतोषजनक फीडबैक प्राप्त हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी के निर्देश क्रम में बगैर स्थलीय निरीक्षण किये कार्मिकों को विभागीय कार्यवाही, सतही आख्या प्रस्तुत करने वाले कार्मिकों को प्रतिकूल प्रविष्टि एवं संतोषजनक आख्या न प्रस्तुत करने वाले कार्मिकों कठोर चेतावनी निर्गत किये जाने के निर्देश दिये गये है, जिसका विवरण निम्नवत् हैः-</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">1- श्री विमलेश कुमार यादव, उप खण्ड अधिकारी, सिकन्दरा-प्रतिकूल प्रविष्टि</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2-श्रीमती अर्चना यादव, लेखपाल फूलपुर-कारण बताओ नोटिस</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">3-श्री अजीत कुमार, लेखपाल, फूलपुर-विभागीय कार्यवाही</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">4-श्री राजेन्द्र प्रसाद, राजस्व निरीक्षक फूलपुर-कारण बताओ नोटिस</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">5-श्री वीरेन्द्र प्रताप सिंह, राजस्व निरीक्षक फूलपुर-कारण बताओ नोटिस</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">6-श्री राजेश यादव, ग्राम विकास अधिकारी फलपुर-चेतावनी</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">7-श्री राजेन्द्र प्रसाद, राजस्व निरीक्षक फूलपुर-प्रतिकूल प्रविष्टि</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">8-श्री विष्णुकान्त मिश्र, राजस्व लेखपाल, फूलपुर, प्रयागराज-कारण बताओ नोटिस</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">9- श्री महेन्द्र कुमार सरोज, लेखपाल क्षेत्र शेरडीह-कारण बताओ नोटिस</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">10-शिवानी यादव, ग्रा०पं०अ०, फूलपुर-कारण बताओ नोटिस</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">11-स्मिता तृप्ति, ग्रा०पं०अ०-चेतावनी</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">12-श्री प्रेम चन्द्र सिंह, वन दरोगा-कारण बताओ नोटिस</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">13-श्री पंकज कुमार, राजस्व लेखपाल फूलपुर-प्रतिकूल प्रविष्टि</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">14-श्री अमन सिंह, उप खण्ड अधिकारी विद्युत, फूलपुर-प्रतिकूल प्रविष्टि</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">15-श्री अभिषेक कुमार पाल, बो०टे० विकास खण्ड फूलपुर-प्रतिकूल प्रविष्टि</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">16-श्री मनोज कुमार मिश्रा, लेखपाल, फूलपुर-कारण बताओ नोटिस</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">17-श्री अजय कुमार मिश्रा, पूर्ति निरीक्षक-कारण बताओ नोटिस</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">18-श्री रमेश कुमार यादव, लेखपाल, फूलपुर-कारण बताओ नोटिस</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 12:25:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पलामू माओवादी की आतंक में पति की हत्या, 19 वर्षों से दर-दर भटक रही विधवा महिला</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पलामू, झारखंड:-</strong> जिले के पाटन प्रखंड अंतर्गत ग्राम कानोदी टोला सोनपुरवा से एक मार्मिक मामला सामने आया है, जो सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति पर कई सवाल खड़े करता है। गांव की विधवा महिला आशा कुंवर आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2007 में जब झारखंड के कई इलाकों में माओवादी गतिविधियां चरम पर थीं, उस दौरान उनके पति स्वर्गीय मुनी यादव की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बताया जाता है कि गांव में एक नहर निर्माण कार्य चल रहा था, जिसमें मुनी यादव मुंशी के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181515/husband-killed-in-palamu-maoist-terror-widow-woman-wandering-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पलामू, झारखंड:-</strong> जिले के पाटन प्रखंड अंतर्गत ग्राम कानोदी टोला सोनपुरवा से एक मार्मिक मामला सामने आया है, जो सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति पर कई सवाल खड़े करता है। गांव की विधवा महिला आशा कुंवर आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2007 में जब झारखंड के कई इलाकों में माओवादी गतिविधियां चरम पर थीं, उस दौरान उनके पति स्वर्गीय मुनी यादव की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बताया जाता है कि गांव में एक नहर निर्माण कार्य चल रहा था, जिसमें मुनी यादव मुंशी के रूप में कार्यरत थे। आरोप है कि माओवादियों द्वारा लेवी की मांग की गई थी, लेकिन मांग पूरी नहीं होने पर उनकी हत्या कर दी गई। घटना के बाद पलामू न्यायालय में मामला दर्ज हुआ, लेकिन 19 वर्ष बीत जाने के बावजूद परिवार को न्याय और सरकारी सहायता का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">विधवा आशा कुंवर बताती हैं कि पति की मौत के बाद उन्होंने अकेले अपने तीन बेटियों और दो बेटों का पालन-पोषण किया। मजदूरी कर बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और उनकी शादी-विवाह भी कराई। लेकिन संघर्ष का सिलसिला यहीं नहीं रुका। कुछ वर्ष पूर्व उनके बड़े पुत्र की किडनी की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई। लगातार दुखों और आर्थिक संकटों का सामना करने के बावजूद उन्हें आज तक कोई विशेष सरकारी सहायता प्राप्त नहीं हुई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आशा कुंवर का आरोप है कि सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना, अबुआ आवास योजना, अंबेडकर आवास योजना समेत कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिला। जबकि उनके अनुसार गांव के कई अन्य लोगों को इन योजनाओं का लाभ दिया गया है। उनका घर जर्जर अवस्था में है, दरवाजे तक की समुचित व्यवस्था नहीं है और बरसात के दिनों में रहने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पति की माओवादी हत्या के बाद उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासन उनकी स्थिति को समझेगा, लेकिन आज तक कोई अधिकारी उनकी समस्याओं का जायजा लेने उनके घर नहीं पहुंचा। आशा कुंवर ने पलामू उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत से मांग की है कि उनकी स्थिति की जांच कर उन्हें अविलंब प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा किसी अन्य आवासीय योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:50:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा जल जीवन मिशन योजना: पानी भरते ही ‘वॉटरफॉल’ बनी लाखों की टंकी, सवालों के घेरे में पूरी व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में भ्रष्टाचार अंगदकी तरह पांव जमाए बैठे हैं जिसे रोक लगाने जिला प्रशासन फेल नजर आ रहा है बस्ती जिले में कोई ऐसा विभाग नहीं बचा है जहां पर भ्रष्टाचार ना हो रहा हो देखने में सबसे ज्यादा विकास विभाग राजस्व विभाग और पुलिस विभाग द्वारा मनमानी कर भ्रष्टाचार चरम पर है जिम्मेदार अधिकारी को सूचित किया जाता है जांच कर कार्रवाई करने की बात पर फर्जी रिपोर्ट लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है </div>
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<div style="text-align:justify;">केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, लेकिन बस्ती जिले में</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181477/jal-jeevan-mission-scheme-becomes-victim-of-corruption-tank-worth"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260618-wa0107.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में भ्रष्टाचार अंगदकी तरह पांव जमाए बैठे हैं जिसे रोक लगाने जिला प्रशासन फेल नजर आ रहा है बस्ती जिले में कोई ऐसा विभाग नहीं बचा है जहां पर भ्रष्टाचार ना हो रहा हो देखने में सबसे ज्यादा विकास विभाग राजस्व विभाग और पुलिस विभाग द्वारा मनमानी कर भ्रष्टाचार चरम पर है जिम्मेदार अधिकारी को सूचित किया जाता है जांच कर कार्रवाई करने की बात पर फर्जी रिपोर्ट लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है </div>
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<div style="text-align:justify;">केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, लेकिन बस्ती जिले में इस योजना के क्रियान्वयन की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जिले के राजपुर क्षेत्र में बनी एक पानी की टंकी में जैसे ही पानी भरा गया, टंकी की दीवारें जवाब दे गईं और देखते ही देखते पानी तेज धार के साथ बाहर निकलने लगा। कुछ ही मिनटों में पूरी टंकी किसी झरने या वॉटरफॉल का नजारा पेश करने लगी।</div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि लाखों रुपये की लागत से बनी टंकी से पानी कई जगहों से रिसते हुए बाहर निकल रहा है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और लोग निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना है कि जिले में जल जीवन मिशन के तहत कई गांवों में पाइप लाइनें बिछाने का काम वर्षों पहले पूरा दिखा दिया गया, लेकिन आज तक नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। कहीं सड़कें खोदकर छोड़ दी गईं तो कहीं पाइप लाइनें डालने के बाद काम अधूरा पड़ा है। ऐसे में राजपुर की यह घटना पूरे जिले में चल रहे कार्यों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि टंकी में तकनीकी खामी सामने आने के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ऑपरेटर को जिम्मेदार ठहराने का प्रयास किया है। हालांकि संबंधित ऑपरेटर का दावा है कि उसने टंकी में मौजूद कमियों और निर्माण संबंधी खामियों की जानकारी पहले ही ग्राम प्रधान तथा विभागीय अधिकारियों को दी थी। उसके अनुसार कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद कमियों को दूर करने के बजाय मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">यह पहला मामला नहीं है जब जल जीवन मिशन की परियोजनाएं सवालों के घेरे में आई हों। इससे पहले पड़ोसी जनपद सिद्धार्थनगर में भी एक पानी की टंकी तेज हवा के दौरान धराशायी हो गई थी, जिसके बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। अब बस्ती की यह घटना भी यही संकेत दे रही है कि कहीं न कहीं निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी और जवाबदेही की कमी गंभीर समस्या बन चुकी है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाती और शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता, तो करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजनाओं की ऐसी दुर्दशा सामने नहीं आती। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;">राजपुर की फटी हुई पानी की टंकी केवल एक निर्माण की विफलता नहीं, बल्कि उन सवालों का प्रतीक बन गई है जो जल जीवन मिशन के तहत खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर लगातार उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को महज एक तकनीकी खराबी मानता है या फिर इसकी तह तक जाकर जिम्मेदार लोगों को बेनकाब करता है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 19:52:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भ्रष्टाचार छिपाने हेतु जांच अधिकारी अरुण पटेल नही प्रेषित कर रहे जांच रिपोट</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीजिले के कप्तानगंज ब्लॉक के नरहरपुर गांव में तालाब खुदाई कार्य में मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई थी। इस मामले को समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद,जिला ग्राम्य विकास अभिकरण बस्ती ने कड़ा रुख अपनाया था और खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज से स्पष्टीकरण तलब किया था।बीडीओ कप्तानगंज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच अधिकारी को मौके पर भेजकर जांच तो करवा ली, लेकिन एक सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को नहीं सौंपी है।प्राप्त समाचार</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181475/to-hide-corruption-investigating-officer-arun-patel-is-not-sending"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260618-wa0108.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीजिले के कप्तानगंज ब्लॉक के नरहरपुर गांव में तालाब खुदाई कार्य में मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई थी। इस मामले को समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद,जिला ग्राम्य विकास अभिकरण बस्ती ने कड़ा रुख अपनाया था और खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज से स्पष्टीकरण तलब किया था।बीडीओ कप्तानगंज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच अधिकारी को मौके पर भेजकर जांच तो करवा ली, लेकिन एक सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को नहीं सौंपी है।प्राप्त समाचार के अनुसार बीडीओ कप्तानगंज के मातहत क्रमचारी ग्राम पंचायत नरहरपुर के पानी भरे तालाब में लगी फर्जी हाजिरी की जांच तो कर लिया है । किन्तु एक सप्ताह बाद भी आख्या प्रेषित नही किया गया है।उनका यह रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जांच आख्या को दबाने और मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए जानबूझकर हीला-हवाली की जा रही है वही जांच अधिकारी के बोल भी बदले-बदले नजर आ रहे हैं। मीडिया से बातचीत में जांच अधिकारी ने बताया कि "आख्या नहीं दी जाएगी और कार्य शून्य होगा", जिससे पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि सुविधा शुल्क के भारी बोझ तले दबे होने के कारण जिम्मेदार अधिकारी सचिव और रोजगार सेवक पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं ।यह रिपोर्ट साफ तौर पर दर्शाती है कि कैसे धरातल पर भ्रष्टाचार की जांच को दबाने के लिए 'सुविधा शुल्क' और प्रशासनिक सांठगांठ का सहारा लिया जा रहा है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले दोषियों को शह मिल रही है । वहीं बीडीओ का सचिव व रोजगार सेवक पर कानूनी कार्रवाई करने को हाथ कांप रहे हैं।</div></div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181475/to-hide-corruption-investigating-officer-arun-patel-is-not-sending</link>
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 19:50:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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