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                <title>Administrative Reforms - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Administrative Reforms RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुविधाएँ बढ़ीं, बजट बढ़ा, फिर भी व्यवस्था वहीं क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिकायतों की सूची लंबी है—अस्पताल में दवा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल में शिक्षक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क पर रोशनी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय में कर्मचारी नहीं। लेकिन सवाल हो कि जो है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह काम कर रहा है या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आवाज़ धीमी पड़ जाती है। डॉक्टर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरीज के सामने नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा में नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीट पर नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दायित्व पर नहीं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पताल में मशीन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जाँच नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल में प्रयोगशाला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयोग नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">मैदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">टंकी है</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184435/facilities-increased-budget-increased-still-why-is-the-system-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1.-prof.-rkjain.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिकायतों की सूची लंबी है—अस्पताल में दवा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल में शिक्षक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क पर रोशनी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय में कर्मचारी नहीं। लेकिन सवाल हो कि जो है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह काम कर रहा है या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आवाज़ धीमी पड़ जाती है। डॉक्टर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरीज के सामने नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा में नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीट पर नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दायित्व पर नहीं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पताल में मशीन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जाँच नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल में प्रयोगशाला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयोग नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">मैदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">टंकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नल में पानी नहीं। समस्या सिर्फ सुविधाओं की कमी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौजूद साधनों और पदों का अपने उद्देश्य से गायब होना है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संसाधन हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुर्सियाँ भरी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिणाम नहीं। सवाल है—इस दिखाई देती अनुपस्थिति को कब तक अनदेखा करेंगे</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमने सुविधाओं को सेवा का माध्यम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निजी लाभ का साधन बना लिया है। सरकारी अस्पताल का डॉक्टर सरकारी समय में निजी मरीजों में व्यस्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ओ.पी.डी. में गरीब अपनी बारी का इंतजार करता है। शिक्षक कक्षा के लिए नियुक्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर उसकी ऊर्जा निजी कोचिंग में खपती है। सरकारी वाहन जनता के लिए है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर निजी आवागमन में चलता है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी कंप्यूटर काम के लिए है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर निजी कारोबार में इस्तेमाल होता है। सरकारी फोन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमरा और संसाधन—नाम सरकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस्तेमाल निजी। यहीं से सुविधा का चरित्र बदल जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो साधन जनता की सेवा के लिए था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही किसी की निजी सुविधा और कमाई का जरिया बन जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह है कि हर समस्या का हल हम नई सुविधा में खोजते हैं—अस्पताल में भीड़ हो तो नया भवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिणाम कमजोर हों तो नई इमारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मशीन खराब हो तो नई मशीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी कम हों तो नई नियुक्ति। मगर पुरानी सुविधा का हिसाब कौन देगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">लाखों की मशीन खरीदी जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीशियन न मिले तो धूल खाती है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">दवाइयाँ गोदाम भरती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वितरण की लापरवाही से जरूरतमंद तक नहीं पहुँचतीं और एक्सपायरी उन्हें निगल जाती है। स्कूल में स्मार्ट क्लास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोजेक्टर और स्क्रीन आ जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर पढ़ाने का ढर्रा वही रहता है। प्रशिक्षण होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमाणपत्र बंटते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तस्वीरें खिंचती हैं—कक्षा में फिर भी रट्टा चलता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संसाधन बढ़ते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बजट बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खर्च बढ़ता है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बस उपयोगिता वहीं की वहीं रहती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुविधाएँ शायद इसी लिए चुपचाप सवाल करती हैं। अस्पताल का बिस्तर पूछता है—“मैं मरीज के लिए था या सिर्फ औपचारिकता के लिए</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">किताब पूछती है—“बच्चे तक पहुँची क्यों नहीं</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रीट लाइट पूछती है—“मेरी रोशनी किस काम की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब महीनों खराब पड़ी रहूँ</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वजनिक शौचालय बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सफाई के अभाव में बेकार हो जाता है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बस स्टैंड खड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर यात्री सुविधा से वंचित हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्क बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देखरेख न हो तो कूड़े और टूटे सामान में बदल जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इमारतें खड़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मशीनें खड़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योजनाएँ कागज पर चल रही हैं—बस सेवा गायब है। सुविधा का शरीर बचा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्देश्य मर चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ी विडंबना तब सामने आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हम दूसरों से ईमानदारी चाहते हैं और अपनी बारी पर “सिस्टम ऐसा ही है” कहकर बच निकलते हैं। डॉक्टर व्यवस्था को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक विभाग को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी अधिकारी को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी बजट को और नागरिक पूरे सिस्टम को दोष देता है। मगर सिस्टम है किससे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हमसे ही।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर न पहुँचने वाला कर्मचारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना पढ़े फाइल बढ़ाने वाला अधिकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा को औपचारिकता मानने वाला शिक्षक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरीज से ज्यादा निजी काम को तरजीह देने वाला डॉक्टर—ये सभी सिस्टम हैं। हम व्यवस्था बदलना चाहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर शुरुआत खुद से नहीं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम को कोसना आसान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने भीतर के स्वार्थ को देखना कठिन। यही हमारी असली सामूहिक विडंबना है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">असली सवाल सुविधा के होने का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके सही इस्तेमाल का है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सही उपयोग हो तो मरीज को इलाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छात्र को समझ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसान को समय पर जानकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिक को समय पर प्रमाणपत्र और सड़क को रात में रोशनी मिलती है। दुरुपयोग हो तो डॉक्टर की कुर्सी भरी रहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेवा खाली</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक का वेतन आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेहनत नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय खुला रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाधान बंद। कहीं नौकरी जिम्मेदारी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थायी सुविधा बन जाती है—हाजिरी पूरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय पूरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काम अपनी मर्जी का। कहीं सरकारी संसाधन निजी काम में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं सार्वजनिक समय निजी लाभ में।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सिर्फ व्यवस्था की कमजोरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी सामूहिक बेईमानी है—जिसे हम सुविधाजनक ढंग से “सिस्टम की समस्या” कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच जाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब विकास का सवाल भी बदलना होगा। हर बार “नई सुविधा कब मिलेगी</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">से पहले पूछा जाए—</span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">जो मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका परिणाम क्या आया</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">नया अस्पताल बनाने से पहले पुराने की दवा व्यवस्था देखी जाए</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">नई मशीन लाने से पहले पूछा जाए कि पुरानी बंद क्यों है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">नया स्कूल खोलने से पहले देखा जाए कि मौजूदा स्कूल बच्चों को क्या दे रहा है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">नई सड़क से पहले पुरानी सड़क की मरम्मत का हिसाब हो। हर योजना के साथ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देखभाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिम्मेदारी और परिणाम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी तय हों। सुविधा खरीदना आसान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे उपयोगी बनाए रखना कठिन। बजट से भवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मशीन और फर्नीचर खरीदे जा सकते हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">ईमानदार उपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिम्मेदारी और संवेदना किसी निविदा में नहीं मिलती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्था केवल नई सुविधाओं से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सही नीयत से बदलती है। डॉक्टर के लिए मरीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक के लिए कक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी के लिए सरकारी समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी के लिए फाइल के पीछे खड़ा व्यक्ति और नागरिक के लिए सार्वजनिक संसाधन—जब सुविधा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिम्मेदारी बन जाएँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आधी समस्याएँ बिना नए खर्च के खत्म हो सकती हैं। नई सुविधाएँ जरूरी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर पुरानी नीयत के साथ नहीं। असली सुविधा बजट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका ईमानदार उपयोग है। जिस दिन “मुझे क्या मिला</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">से पहले “जो मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे किसका भला हुआ</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">पूछा जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी दिन व्यवस्था का हर साधन अपना असली अर्थ पाएगा। तब सुविधाएँ सिर्फ उपलब्ध नहीं होंगी—सार्थक होंगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 22:34:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बस्ती PWD में 27 साल से जमे अधिकारी पर गंभीर आरोप, पत्नी की फर्म और 65 लाख के लेन-देन की जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भ्रष्टाचार का जिन्न 27साल बाद बाहर निकल कर आया अपना दल एस के प्रदेश सचिव मुख्य संगठन संजय सिंह पगार ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग और तत्कालीन प्रभारी मंत्री प्राविधिक शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले को पत्र देकर  गृह जनपद बस्ती में विगत 26-27 वर्षों से तैनात  अधीक्षण अभियन्ता लोक निर्माण विभाग कार्यालय वृत्त बस्ती में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात  प्रेमचन्द्र पुत्र  राम सेवक पर अनियमितता के  अनेक गंभीर आरोप लगाते हुये उनके स्थानान्तरण और  सतर्कता विभाग से  उच्च स्तरीय जाँच कराये जाने की मांग किया है.भेजे पत्र में  अपना दल एस के प्रदेश</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181126/serious-allegations-against-officer-stuck-in-basti-pwd-for-27"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260613-wa0095.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भ्रष्टाचार का जिन्न 27साल बाद बाहर निकल कर आया अपना दल एस के प्रदेश सचिव मुख्य संगठन संजय सिंह पगार ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग और तत्कालीन प्रभारी मंत्री प्राविधिक शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले को पत्र देकर  गृह जनपद बस्ती में विगत 26-27 वर्षों से तैनात  अधीक्षण अभियन्ता लोक निर्माण विभाग कार्यालय वृत्त बस्ती में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात  प्रेमचन्द्र पुत्र  राम सेवक पर अनियमितता के  अनेक गंभीर आरोप लगाते हुये उनके स्थानान्तरण और  सतर्कता विभाग से  उच्च स्तरीय जाँच कराये जाने की मांग किया है.भेजे पत्र में  अपना दल एस के प्रदेश सचिव मुख्य संगठन संजय सिंह पगार ने कहा है कि  प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात  प्रेमचन्द्र  द्वारा ठेकेदारों व कर्मचारियों का लगातार दोहन किया जा रहा है तथा सरकारी अभिलेखों में भी फेरबदल किये जाने की शिकायत पूर्व में जन प्रतिनिधियों द्वारा की जाती रही है परन्तु  प्रेमचन्द्र की  ऊँची पहुँच के कारण मण्डलीय कार्यालय पर तैनाती लेते रहे हैं, जिससे इनके भ्रष्टाचार एवं कागजी हेरफेर के कारण सरकारी कार्यों में भी गोपनीयता भंग की जाती रही है.</div>
<div style="text-align:justify;">प्रेस को जारी विज्ञप्ति में संजय सिंह पगार ने कहा है कि  प्रेमचन्द्र ने अपनी सेवा अवधि का लगभग 90 प्रतिशत समय बस्ती वृत्त, बस्ती कार्यालय में ही व्यतीत किया है. बाबू पद से लेकर प्रशासनिक अधिकारी पद तक की उनकी अधिकांश सेवा बस्ती मण्डल में ही रही है. इतने लंबे समय तक एक ही मंडलीय कार्यालय में तैनाती से प्रशासनिक निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं विभागीय कार्यप्रणाली की गोपनीयता पर गंभीर प्रश्न उत्पन्न होते हैं.</div>
<div style="text-align:justify;">बिजली बिल में 10% बढ़ोतरी से नाराज व्यापारी, बस्ती में प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन यह भी पढ़ें: बिजली बिल में 10% बढ़ोतरी से नाराज व्यापारी, बस्ती में प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन</div>
<div style="text-align:justify;">पत्नी की फर्म के जरिए आर्थिक लाभ पहुंचाने का आरोप</div>
<div style="text-align:justify;">श्री पगार ने बताया कि  प्रेमचन्द्र द्वारा अपने पद एवं प्रभाव का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए ठेकेदारी व्यवस्था में हस्तक्षेप किया जाता रहा है. आरोप है कि उनके द्वारा कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने, विभागीय गोपनीय सूचनाओं को प्रभावित करने तथा ई-टेण्डरिंग प्रक्रिया में अनुचित प्रभाव डालने जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाई गई है. इसके अतिरिक्त यह भी गंभीर आरोप है कि  प्रेमचन्द्र द्वारा अपनी पत्नी श्रीमती सीमा के नाम से संचालित फर्म मेसर्स बुद्धा इंटरप्राइजेज का उपयोग स्वयं एवं अपने परिवार के सदस्यों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है. उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उक्त फर्म की प्रोपराइटर श्रीमती सीमा है, जिसका पता रौतापार, गांधी नगर, बस्ती दर्शाया गया है. उक्त फर्म का  यूनियन बैंक में है.तीन साल में खाते से 65 लाख का लेन-देन, जांच की उठी मांग</div>
<div style="text-align:justify;">उपलब्ध बैंक विवरण के अनुसार पिछले लगभग तीन वर्षों में उक्त फर्म के खाते में लगभग 65 लाख रुपये की क्रेडिट एवं डेबिट प्रविष्टियां पाई गई हैं, जिससे लेन-देन की प्रकृति, धन के स्रोत तथा संबंधित ठेकेदारों से संभावित संबंधों की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है. आरोप है कि वे अपने पूर्व कार्यकाल से संबंधित अभिलेखों, कथित अनियमितताओं एवं आने वाली निविदा/ई-टेण्डरिंग प्रक्रियाओं हस्तक्षेप बनाए रखने के उद्देश्य से उसी कार्यालय में बने रहना चाहते हैं. प्रेमचन्द्र ने अपना आलीशान मकान लखनऊ में बनवा लिया है.</div>
<div style="text-align:justify;">इस प्रकार की शिकायतें पूर्व में भी जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय स्तर पर उठाई जाती रही हैं. हाल ही में भी कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा  प्रेमचन्द्र के विरुद्ध शासन स्तर पर लिखित शिकायतें प्रेषित की गई, जिसके क्रम में शासन द्वारा धारा 7 के अंतर्गत मुख्य अभियंता, बस्ती से रिपोर्ट मांगी गई. किंतु मुख्य अभियंता, बस्ती  आनन्द कुमार द्वारा एक माह से अधिक समय व्यतीत हो जाने के बावजूद शासन को अपेक्षित रिपोर्ट प्रेषित नहीं की गई. जबकि शासन की प्रक्रिया के अनुसार, किसी भी गंभीर शिकायत के क्रम में संबंधित अधिकारी से रिपोर्ट प्राप्त कर स्थानांतरण अथवा अन्य विभागीय कार्रवाई की जाती है.</div>
<div style="text-align:justify;">स्थानांतरण प्रक्रिया की पूर्व निर्धारित समय-सीमा 31 मई तक थी, परंतु रिपोर्ट समय से न भेजे जाने के कारण आवश्यक कार्रवाई प्रभावित हुई. वर्तमान में शासन द्वारा स्थानांतरण प्रक्रिया की समय-सीमा 30 जून तक बढ़ा दी गई है, इसलिए जनहित एवं प्रशासनिक पारदर्शिता की दृष्टि से यह आवश्यक है कि मुख्य अभियंता स्तर से लंबित रिपोर्ट तत्काल शासन को भेजी जाए तथा प्रेमचन्द्र का स्थानांतरण करते हुए उनके विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए.</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 18:55:47 +0530</pubDate>
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