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                <title>aadhaar - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>अवैध घुसपैठ पर सख्ती जरूरी, लेकिन कार्रवाई कानून के दायरे में</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत की सुरक्षा और नागरिकता से जुड़ा प्रश्न आज पहले से कहीं अधिक गंभीर और संवेदनशील हो गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट की उस टिप्पणी ने इस बहस को नई दिशा दी है, जिसमें फर्जी आधार या फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से देश में पहचान स्थापित करने वाले विदेशी नागरिकों को प्राथमिकता के आधार पर खोजकर निर्वासित करने और केंद्र तथा राज्य की एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई गई है। दूसरी ओर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का यह कहना कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है और देश में रहने का अधिकार केवल वैध नागरिकों को है, सरकार की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186529/strictness-is-necessary-on-illegal-infiltration-but-action-is-within"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas16.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत की सुरक्षा और नागरिकता से जुड़ा प्रश्न आज पहले से कहीं अधिक गंभीर और संवेदनशील हो गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट की उस टिप्पणी ने इस बहस को नई दिशा दी है, जिसमें फर्जी आधार या फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से देश में पहचान स्थापित करने वाले विदेशी नागरिकों को प्राथमिकता के आधार पर खोजकर निर्वासित करने और केंद्र तथा राज्य की एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई गई है। दूसरी ओर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का यह कहना कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है और देश में रहने का अधिकार केवल वैध नागरिकों को है, सरकार की उस नीति को स्पष्ट करता है जिसमें अवैध घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दोनों घटनाओं को अलग-अलग देखने के बजाय व्यापक संदर्भ में देखने की आवश्यकता है। सवाल केवल कुछ विदेशी नागरिकों के फर्जी दस्तावेज हासिल करने का नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है जिसके कारण कोई व्यक्ति भारत में प्रवेश करने के बाद अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर आधार, पैन, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और यहां तक कि भारतीय पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज हासिल करने में सफल हो जाता है। यदि किसी विदेशी नागरिक के लिए व्यवस्था में इतनी बड़ी सेंध संभव है तो यह केवल दस्तावेजों की जालसाजी का मामला नहीं, बल्कि देश की प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष सामने आया मामला इस खतरे की गंभीरता को समझने के लिए पर्याप्त है। अफगानिस्तान के एक नागरिक के बारे में अदालत को बताया गया कि वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी वह भारत में रहा और कथित रूप से अपनी मूल पहचान छिपाकर दूसरी पहचान के नाम पर आधार, पैन और अन्य दस्तावेज हासिल किए। यदि न्यायिक प्रक्रिया में सामने आए तथ्य सही हैं तो यह जांच का विषय जरूर है कि संबंधित विभागों ने दस्तावेज जारी करते समय आवश्यक सत्यापन क्यों नहीं किया। एक व्यक्ति की पहचान अनेक सरकारी दस्तावेजों में अलग-अलग तरीके से स्थापित हो जाए, तो इससे व्यवस्था की कमजोर कड़ियां उजागर होती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां सबसे बड़ा प्रश्न एजेंसियों के बीच तालमेल का है। देश में विदेशी नागरिकों के प्रवेश और प्रवास से संबंधित काम कई विभागों और एजेंसियों के जिम्मे है। सीमा सुरक्षा बल, आव्रजन विभाग, पुलिस, खुफिया एजेंसियां, विदेशी नागरिकों से संबंधित प्रशासनिक तंत्र और पहचान से जुड़े विभागों के बीच सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान होना चाहिए। किसी व्यक्ति का वीजा समाप्त हो गया है, वह निर्धारित अवधि से अधिक समय से भारत में रह रहा है या उसके दस्तावेजों में संदिग्ध जानकारी है, तो यह सूचना संबंधित एजेंसियों तक तुरंत पहुंचनी चाहिए। तकनीक के इस दौर में अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड एक-दूसरे से जुड़े न हों और सूचनाएं अलग-अलग खानों में पड़ी रहें, तो सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसलिए अब केवल जांच बढ़ाने की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की जरूरत है। पहचान संबंधी दस्तावेज जारी करने से पहले विदेशी नागरिकों के मामले में सत्यापन की प्रक्रिया अधिक कठोर होनी चाहिए। आधार पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। इस अंतर को प्रशासनिक स्तर पर पूरी स्पष्टता के साथ समझना आवश्यक है। किसी विदेशी नागरिक को वैध आधार संबंधी सुविधा मिल सकती है या नहीं, यह कानून और निर्धारित नियमों के अनुसार तय होता है, लेकिन आधार को नागरिकता का प्रमाण मानकर आगे अन्य दस्तावेज जारी करने की प्रवृत्ति गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय पासपोर्ट जैसे संवेदनशील दस्तावेज के लिए तो सत्यापन की व्यवस्था और भी मजबूत होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति ने फर्जी पहचान के आधार पर पासपोर्ट हासिल किया है तो केवल उस व्यक्ति पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी पता लगाना जरूरी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले कौन थे, उनका इस्तेमाल किस स्तर पर हुआ और सरकारी तंत्र में किसी व्यक्ति की मिलीभगत या लापरवाही थी या नहीं। जब तक पूरे नेटवर्क पर प्रहार नहीं होगा, तब तक एक व्यक्ति को हटाने के बाद दूसरा व्यक्ति उसी रास्ते से व्यवस्था में प्रवेश कर सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमित शाह का अवैध घुसपैठ को आंतरिक सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकी के लिए खतरा बताना भी इसी व्यापक चिंता की ओर संकेत करता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध प्रवेश केवल सीमा प्रबंधन का विषय नहीं रह जाता। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक बिना वैध दस्तावेजों के देश में रह रहा है और बाद में फर्जी पहचान बना लेता है तो यह कानून व्यवस्था, संसाधनों और सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। इसलिए घुसपैठ रोकना और अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करना राज्य की स्वाभाविक जिम्मेदारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन इस जिम्मेदारी के साथ एक दूसरी जिम्मेदारी भी जुड़ी है। किसी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर विदेशी घोषित नहीं किया जा सकता और न ही किसी भारतीय नागरिक को गलत पहचान या प्रशासनिक त्रुटि के कारण अपने अधिकारों से वंचित किया जाना चाहिए। कठोर कार्रवाई का अर्थ मनमानी कार्रवाई नहीं हो सकता। पहचान, नागरिकता और निर्वासन से संबंधित हर कदम स्पष्ट कानून, उचित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती इसी में है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन कायम रखा जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अवैध घुसपैठ से निपटने की सबसे प्रभावी रणनीति सीमा से लेकर दस्तावेज जारी करने तक पूरी श्रृंखला को मजबूत करना होगी। सीमा पर निगरानी बढ़ाने के साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि सीमा पार से आया कोई व्यक्ति फर्जी पहचान के सहारे देश की वैध नागरिक व्यवस्था में प्रवेश न कर सके। इसके लिए आधुनिक तकनीक, साझा डाटाबेस, दस्तावेजों की डिजिटल जांच और विभिन्न एजेंसियों के बीच वास्तविक समय में सूचना साझा करने की व्यवस्था विकसित करनी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अदालत की टिप्पणी का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि केंद्र और राज्यों की एजेंसियां मिलकर काम करें। भारत जैसे विशाल देश में केवल केंद्र सरकार या केवल राज्य सरकार के प्रयासों से यह चुनौती पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकती। सीमा से लगे राज्यों के साथ-साथ महानगरों में भी संदिग्ध दस्तावेजों और अवैध प्रवास से जुड़े मामलों पर समन्वित निगरानी जरूरी है। पुलिस के पास स्थानीय स्तर की जानकारी होती है, केंद्रीय एजेंसियों के पास व्यापक सुरक्षा संबंधी सूचनाएं होती हैं और आव्रजन व्यवस्था के पास प्रवेश तथा वीजा से संबंधित रिकॉर्ड। इन सभी सूचनाओं को एक साथ जोड़ना समय की मांग है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि फर्जी दस्तावेज बनाने और उन्हें उपलब्ध कराने वाले गिरोहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। अक्सर किसी अवैध पहचान के पीछे एक संगठित नेटवर्क काम करता है। दस्तावेज तैयार करने वाले, फर्जी पते उपलब्ध कराने वाले, पहचान सत्यापन में मदद करने वाले और आर्थिक लाभ लेकर सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कराने वाले लोग यदि कार्रवाई से बच जाते हैं तो समस्या बनी रहेगी। ऐसे मामलों में केवल अंतिम लाभार्थी पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे नेटवर्क की आर्थिक और डिजिटल जांच जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की सुरक्षा नीति का मूल उद्देश्य देश की सीमाओं की रक्षा के साथ उसकी नागरिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखना भी होना चाहिए। नागरिकता और पहचान से जुड़े दस्तावेज जितने विश्वसनीय होंगे, उतना ही देश की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। फर्जी दस्तावेजों के जरिए किसी विदेशी नागरिक का भारतीय पहचान तंत्र में प्रवेश करना केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर हमला है।</div>
<div style="text-align:justify;">इसलिए बॉम्बे हाईकोर्ट की चिंता और केंद्रीय गृह मंत्री का संदेश दोनों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। भारत को अपनी सीमाओं की रक्षा करनी ही होगी और अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई करनी होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस अभियान में निर्दोष भारतीय नागरिक परेशान न हों और किसी समुदाय या समूह को सामूहिक रूप से संदेह की नजर से न देखा जाए। सुरक्षा का मजबूत तंत्र वही है जिसमें कठोरता के साथ निष्पक्षता भी हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता किसी भावनात्मक नारे से अधिक एक ऐसी प्रभावी व्यवस्था की है जिसमें भारत में प्रवेश करने वाले हर विदेशी नागरिक का रिकॉर्ड सुरक्षित हो, उसकी वैध अवधि समाप्त होने पर संबंधित एजेंसियों को स्वतः सूचना मिले, संदिग्ध दस्तावेजों की तत्काल जांच हो और फर्जी पहचान बनाने वाले पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई हो। भारत की सुरक्षा केवल सीमा पर खड़े जवानों से नहीं, बल्कि दस्तावेजों की विश्वसनीयता और सरकारी संस्थाओं के आपसी तालमेल से भी सुनिश्चित होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश किसी के लिए अवैध गतिविधियों का सुरक्षित ठिकाना नहीं हो सकता। लेकिन भारत की ताकत उसके कानून और संविधान में है। इसलिए अवैध घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई जितनी सख्त हो, उतनी ही कानूनसम्मत, पारदर्शी और प्रमाण आधारित भी होनी चाहिए। यही रास्ता राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा और नागरिक व्यवस्था में जनता का विश्वास भी बनाए रखेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>        *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 16:07:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Aadhar Update: अब आधार अपडेट करवाना हुआ महंगा, इतनी बढ़ी फीस </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Aadhar Update: </strong>आधार अपडेट करवाने की सोच रहे लोगों के लिए बड़ी जरूरी खबर आई है। 1 अक्टूबर से UIDAI ने आधार अपडेट करने की फीस 25 रुपए तक बढ़ा दी हैं। यह 30 सितंबर 2028 तक प्रभावी रहेंगी। जानकारी के मुताबिक, इसके बाद फिर से समीक्षा होगी और 1 अक्टूबर 2028 से 30 सितंबर 2031 तक के लिए फीस में बदलाव होगा।</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, नई दरों के मुताबिक, नया आधार बनवाना सभी के लिए फ्री रहेगा, लेकिन नाम, पता और डॉक्यूमेंट्स बदलवाने जैसी सर्विसेज के लिए पहले 50 रुपए लगते थे, अब 75 रुपए लगेंगे। जानकारी के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/157838/aadhar-update-now-getting-aadhar-updated-has-become-so-expensive"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/aadhaar.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Aadhar Update: </strong>आधार अपडेट करवाने की सोच रहे लोगों के लिए बड़ी जरूरी खबर आई है। 1 अक्टूबर से UIDAI ने आधार अपडेट करने की फीस 25 रुपए तक बढ़ा दी हैं। यह 30 सितंबर 2028 तक प्रभावी रहेंगी। जानकारी के मुताबिक, इसके बाद फिर से समीक्षा होगी और 1 अक्टूबर 2028 से 30 सितंबर 2031 तक के लिए फीस में बदलाव होगा।</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, नई दरों के मुताबिक, नया आधार बनवाना सभी के लिए फ्री रहेगा, लेकिन नाम, पता और डॉक्यूमेंट्स बदलवाने जैसी सर्विसेज के लिए पहले 50 रुपए लगते थे, अब 75 रुपए लगेंगे। जानकारी के मुताबिक, इसी तरह बायोमेट्रिक अपडेट जैसी सर्विस के लिए 100 रुपए की जगह अब 125 रुपए लगेंगे। वहीं, बच्चों का आधार अपडेट करवाना फ्री रहेगा। Aadhar Update 2025</p>
<p><strong>बायोमेट्रिक और डेमोग्राफिक</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, 5-7 साल के बच्चों और 15-17 साल के टीनएजर्स के लिए बायोमेट्रिक अपडेट्स फ्री रहेगा। 7-15 साल के बच्चों के लिए भी 30 सितंबर 2026 तक बायोमेट्रिक अपडेट फ्री है। अन्य बायोमेट्रिक अपडेट्स के लिए 125 रुपए देने होंगे। Aadhar Update 2025</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, नाम, जेंडर, जन्मतिथि, पता या कॉन्टैक्ट डिटेल्स जैसे डेमोग्राफिक अपडेट्स अगर बायोमेट्रिक अपडेट के साथ करवाते हैं तो कोई चार्ज नहीं लगेगा, लेकिन सिर्फ डेमोग्राफिक अपडेट करवाने पर 75 रुपए लगेंगे, पहले ये 50 रुपए था।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, myAadhaar पोर्टल से आइडेंटिटी और एड्रेस डॉक्यूमेंट्स का अपडेट 14 जून 2026 तक मुफ्त है, लेकिन एनरोलमेंट सेंटर पर ये अपडेट अब 75 रुपए (पहले 50 रुपये) में होगा। Aadhar Update 2025</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, वहीं, 1 अक्टूबर 2028 से 75 रुपए वाली सर्विस की कीमत बढ़कर 90 रुपए हो जाएंगी। वहीं, 125 रुपए वाली सेवाओं के लिए 150 रुपए लगेंगे।</p>
<p><strong>सर्विस की फीस ₹700</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, होम एनरोलमेंट सर्विस के लिए UIDAI की फीस GST सहित 700 रुपए है। अगर एक ही पते पर और लोग अपडेट करवाएं तो पहले वाले को 700 रुपए और बाकियों को 350 रुपए प्रति व्यक्ति देना होगा। साथ में स्टैंडर्ड अपडेट फीस भी देनी पड़ सकती है, जैसे डेमोग्राफिक अपडेट के लिए 75 रुपए। Aadhar Update 2025</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, होम एनरोलमेंट सर्विस में आधार से जुड़े काम के लिए UIDAI का स्टाफ घर आता है। ये सर्विस खासतौर पर उन लोगों के लिए है जो सेंटर नहीं जा सकते, जैसे बुजुर्ग, बीमार लोग, या जिन्हें आने-जाने में दिक्कत हो।</p>
<p><strong>खुद कर सकते हैं अपडेट</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, आधार अपडेट करने के लिए यूजर्स UIDAI की ऑफिशियल वेबसाइट myAadhaar पर जाकर खुद ही अपनी डिटेल्स अपडेट कर सकते हैं। इसमें डेमोग्राफिक डेटा ही ऑनलाइन अपडेट किया जा सकता है। Aadhar Update 2025</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, UIDAI के पोर्टल पर आप ऑनलाइन अपनी बायोमेट्रिक जानकारी यानी फिंगर प्रिंट या आइरिस स्कैन को अपडेट नहीं कर सकते। इसके लिए आपको नजदीकी आधार नामांकन केंद्र या आधार सेवा केंद्र जाना होगा।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, यहां हर डिटेल्स (डेमोग्राफिक और बायोमेट्रिक डेटा) अपडेट करने के लिए 75 से 125 रुपए फीस देनी होगी। Aadhar Update 2025</p>
<p><strong>सेंटर पर ही अपडेट होगा</strong></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन आधार अपडेट करने के लिए आपका मोबाइल नंबर अपडेट होना जरूरी है, नहीं तो आधार ऑनलाइन अपडेट नहीं होगा। मोबाइल नंबर आधार सेंटर पर ही अपडेट किया जा सकता है। डिटेल्स अपडेट करने के बाद आपको एक सर्विस रिक्वेस्ट नंबर भी मिलेगा। जानकारी के मुताबिक, इसके जरिए आप चेक कर सकते हैं कि आपके आधार में डिटेल्स कब तक अपडेट हो जाएंगी। Aadhar Update 2025</p>
<p><strong>क्यों जरूरी है?</strong></p>
<p>बैंक अकाउंट खोलने या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी रहती है।</p>
<p>पैन कार्ड, पासपोर्ट, वोटर ID कार्ड या राशन कार्ड बनवाने में परेशानी नहीं होती है।</p>
<p>किसी व्यक्ति की पहचान को वेरिफाई करने में आसानी रहती है। Aadhar Update 2025</p>
<p>स्कैम या फ्रॉड होने का खतरा कम रहता है।</p>
<p><strong>अपडेट करने के लिए पूरी प्रोसेस</strong></p>
<p>आधार में पता अपडेट Aadhar Update 2025</p>
<p>सबसे पहले UIDAI की आधिकारिक साइट myaadhaar.uidai.gov.in/ पर जाएं।</p>
<p>यहां लॉगिन करने के लिए आपको अपना 12 अंकों का आधार नंबर डालना होगा। इसके बाद कैप्चा कोड डालकर सेंड OTP पर क्लिक करें।</p>
<p>इसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा। उसे डालकर लॉगिन करें। Aadhar Update 2025</p>
<p>अब आधार अपडेट ऑप्शन पर जाएं। इसके बाद प्रोसीड टू आधार अपडेट के ऑप्शन पर क्लिक करें।</p>
<p>इसके बाद अगले पेज पर एड्रेस पर सिलेक्ट करके प्रोसीड टू आधार अपडेट के ऑप्शन पर क्लिक करें।</p>
<p>ऐसा करने पर आपके सामने आपका मौजूदा एड्रेस आ जाएगा। Aadhar Update 2025</p>
<p>इसके बाद आप जो एड्रेस अपडेट करना चाहते हैं उसका ऑप्शन आएगा।</p>
<p>यहां आपको अपने नए एड्रेस की जानकारी भरनी होगी।</p>
<p>इसके बाद एक डॉक्यूमेंट सब्मिट करना होगा जिस पर आपका नया एड्रेस हो। Aadhar Update 2025</p>
<p>इसके बाद आपको नीचे दिए दोनों चेक बॉक्स पर क्लिक करके नेक्स्ट पर क्लिक करना होगा।</p>
<p>अब आपके सामने पेमेंट का ऑप्शन आएगा। यहां आप UPI नेट बैंकिंग या कार्ड जैसे भी चाहें पेमेंट कर सकते हैं।</p>
<p>पेमेंट पूरा होते ही आपको एक रसीद मिलेगी। इसके बाद करीब 30 दिन में आपका आधार अपडेट हो जाएगा। Aadhar Update 2025</p>
<p><strong>अपडेट कर सकते हैं एड्रेस</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, UIDAI परिवार के मुखिया (Head Of Family) की इजाजत से आधार में ऑनलाइन पता अपडेट करने की सुविधा भी देता है। मिली जानकारी के अनुसार, इसके तहत घर का मुखिया ऑनलाइन आधार एड्रेस अपडेट के लिए अपने बच्चे, पति या पत्नी, माता-पिता के एड्रेस को अप्रूव कर सकता है। 18 साल से ज्यादा आयु का कोई भी व्यक्ति HOF हो सकता है। Aadhar Update 2025</p>
<p><strong>ये है पूरी प्रोसेस</strong></p>
<p>सबसे पहले आपको myaadhaar.uidai.gov.in वेबसाइट पर जाएं।</p>
<p>हां, लॉगिन करने के लिए आपको अपना 12 अंकों का आधार नंबर डालना होगा। इसके बाद कैप्चा कोड डालकर सेंड OTP पर क्लिक करें।</p>
<p>इसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा। उसे डालकर लॉगिन करें। Aadhar Update 2025</p>
<p>इसके बाद आपको ऑनलाइन अपडेट सर्विस का ऑप्शन मिलेगा, इसे चुनें।</p>
<p>इसके बाद आपको Head Of Family (HOF) बेस्ड आधार अपडेट पर क्लिक करें।</p>
<p>इसके बाद Head Of Family का आधार नंबर दर्ज करना होगा। Aadhar Update 2025</p>
<p>इसके बाद आपको 75 रुपए सर्विस चार्ज देना होगा।</p>
<p>इसके बाद HOF के पास एड्रेस अपडेट की रिक्वेस्ट भेजी जाएगी।</p>
<p>इसके बाद HOF को अपनी इजाजत देनी होगी। Aadhar Update 2025</p>
<p>वहीं अगर HOF एड्रेस शेयर करने की रिक्वेस्ट रिजेक्ट कर देता है, तो आपका आधार एड्रेस अपडेट नहीं होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Oct 2025 14:05:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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                <title>क्या आप अपने &quot;आधार&quot; को लेकर संतुष्ट है: मूडीज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दुनिया की जानी-मानी रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत के आधार सिस्टम की सुरक्षा और गोपनीयता की कमजोरियों पर चिन्ता जताई है। भारत में आधार एक केंद्रीय पहचान प्रणाली है। आधार सिस्टम के तहत अक्सर सर्विसेज का पूरा लाभ नहीं मिलता है। कई बार सर्विसेज अस्वीकार हो जाती हैं। </p>
<p>भारत के गरम मौसम में इसका बॉयोमीट्रिक सिस्टम विश्वसनीय ढंग से काम नहीं कर पाता है। रिपोर्ट में इस पर विस्तार से जानकारी दी गई है। भारत में आधार सिस्टम के फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन और ओटीपी जैसे विकल्पों से सर्विसेज देने वाली एजेसियां किसी भी शख्स का सत्यापन कर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135113/are-you-satisfied-with-your-%22base%22-moodys"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/aadhar11686657601837.jpg" alt=""></a><br /><p>दुनिया की जानी-मानी रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत के आधार सिस्टम की सुरक्षा और गोपनीयता की कमजोरियों पर चिन्ता जताई है। भारत में आधार एक केंद्रीय पहचान प्रणाली है। आधार सिस्टम के तहत अक्सर सर्विसेज का पूरा लाभ नहीं मिलता है। कई बार सर्विसेज अस्वीकार हो जाती हैं। </p>
<p>भारत के गरम मौसम में इसका बॉयोमीट्रिक सिस्टम विश्वसनीय ढंग से काम नहीं कर पाता है। रिपोर्ट में इस पर विस्तार से जानकारी दी गई है। भारत में आधार सिस्टम के फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन और ओटीपी जैसे विकल्पों से सर्विसेज देने वाली एजेसियां किसी भी शख्स का सत्यापन कर लेती है।</p>
<p> इनमें सरकारी और प्राइवेट दोनों ही एजेंसियां शामिल हैं। सत्यापन के बाद ही वो शख्स उस सेवा का लाभ उठा सकता है। लेकिन मूडीज का कहना है कि सत्यापन के दौरान तमाम तरह की बाधाएं आती हैं। जिसमें अथराइजेशन और बॉयोमीट्रिक की विश्वसनीयता चिन्ता पैदा करने वाली है।</p>
<p>मूडीज के हवाले से कहा गया है कि आधार सिस्टम के समय-समय पर काम न कर पाने, सेवाएं बाधित होने की वजह से उस गरीब तबके को ज्यादा नुकसान होता है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार और बैंकों ने कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को पैसा सीधे ट्रांसफर करने सहित कई सेवाओं के लिए आधार की पहचान प्रणाली को अपनाया है। </p>
<p>सरकार ने अब कहा है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम (मनरेगा) योजना के तहत मजदूरों को भुगतान भी आधार आधारित सिस्टम से किया जाएगा। मनरेगा के तहत काम करने वालों से कहा गया है कि वे आधार सिस्टम से पेमेंट लेने के लिए 31 दिसंबर तक अपना पेमेंट सिस्टम बदल लें। मनरेगा के तहत मजदूरों को उनके आसपास के इलाकों में दिहाड़ी पर काम मिल जाता है। लेकिन आधार सिस्टम का भारत में जो हाल है, उससे आशंका है कि मनरेगा के मजदूरों को समय पर भुगतान ही नहीं मिल पाएगा। </p>
<p>अब तक पांच बार मनरेगा के मजदूरों को आधार आधारित पेमेंट पर स्विच करने की समय सीमा बढ़ चुकी है। इससे यही संकेत मिलता है कि ज्यादातर मजदूर इस पेमेंट सिस्टम पर जाना ही नहीं चाहते। देश में आधार का ऑपरेशन भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) चलाता है। </p>
<p>आधार यह कह कर लाया गया था कि हाशिए पर रह रहे लोगों को सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ मिल सके, इसलिए एक केंद्रीय पहचान प्रणाली का होना जरूरी है। लेकिन मूडीज का कहना है कि भारत के गर्म मौसम में आधार सिस्टम कई सर्विसेज पर सेवा देने से मना कर देता है। ऐसे में आधार के बॉयोमीट्रिक सिस्टम की विश्वसनीयता कम हो जाती है या संदिग्ध हो जाती है। </p>
<p>मूडीज ने 23 सितंबर को "विकेंद्रीकृत वित्त और डिजिटल संपत्ति" पर एक रिपोर्ट जारी की है। उसमें आधार को "दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल आईडी कार्यक्रम" बताया गया है। उसके मुताबिक बॉयोमीट्रिक और जनसांख्यिकीय डेटा वाला आधार भारत के 1.2 बिलियन से अधिक लोगों को एक यूनीक (अद्वितीय) नंबर प्रदान करता है। यह नंबर ही उस व्यक्ति की पहचान होती है।</p>
<p>रेटिंग एजेंसी ने आधार और एक नए क्रिप्टो-आधारित डिजिटल पहचान टोकन जिसे वर्ल्डलाइन कहा जाता है, को दुनिया के दो बेहतरीन डिजिटल आईडी सिस्टम बताया है। लेकिन मूडीज़ ने यह भी कहा कि इनकी गोपनीयता और सुरक्षा चिन्ता पैदा करने वाली हैं, खासकर प्राइवेसी की चिन्ता ज्यादा है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक मूडीज ने इस बात पर जोर दिया है कि आधार जैसी आईडी प्रणाली खास संस्थाओं के साथ जुड़ी हुई हैं, ऐसे में डेटा चोरी का जोखिम बड़ा है। क्योंकि तमाम एजेंसियों को आधार का डेटा एक्सेस मिल जाता है। खास जानकारी के बजाय उस शख्स की सारी जानकारी उन खास संस्थाओं तक पहुंच जाती है, जबकि उसे सिर्फ कोई एक जानकारी चाहिए थी। </p>
<p>मूडीज ने इसकी जगह ब्लॉकचेन क्षमताओं पर आधारित डिजिटल वॉलेट जैसे विकेंद्रीकृत आईडी (डीआईडी) सिस्टम को बढ़ावा देने की वकालत की है। डीआईडी पर इसका इस्तेमाल करने वालों को अधिक नियंत्रण मिलता है। उनका निजी डेटा सुरक्षित रहता है और ऑनलाइन धोखाधड़ी की आशंका को कम कर देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Sep 2023 14:54:45 +0530</pubDate>
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