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                <title>maharashtra - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>महाराष्ट्र में TET का पेपर लीक: 'भरोसा' कब लीक होना बंद होगा?</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में पेपर लीक की समस्या एक बड़ा रुप ले चुकी है और इस पर राजनीति भी बहुत हो रही है। लेकिन लेकिन अभी तक लीक प्रूफ परीक्षा का हमें ऐहसास नहीं हो पा रहा है। नीट का पेपर जब लीक हुआ तो उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इसी के बाद महाराष्ट्र में टैट का पेपर लीक हो गया और राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को होने वाली महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा </span>MAHA TET <span lang="hi" xml:lang="hi">से ठीक </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi">  घंटे पहले पेपर लीक हो गया। नतीजा: </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi">  लाख </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi">  हजार अभ्यर्थियों का</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182229/tet-paper-leak-in-maharashtra-trust-when-will-the-leaking"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/education.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में पेपर लीक की समस्या एक बड़ा रुप ले चुकी है और इस पर राजनीति भी बहुत हो रही है। लेकिन लेकिन अभी तक लीक प्रूफ परीक्षा का हमें ऐहसास नहीं हो पा रहा है। नीट का पेपर जब लीक हुआ तो उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इसी के बाद महाराष्ट्र में टैट का पेपर लीक हो गया और राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को होने वाली महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा </span>MAHA TET <span lang="hi" xml:lang="hi">से ठीक </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे पहले पेपर लीक हो गया। नतीजा: </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार अभ्यर्थियों का भविष्य फिर से लटका दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये कोई पहली बार नहीं है। सवाल वही है: आखिर पेपर लीक से छुटकारा कब मिलेगा</span>? 27<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की सुबह का </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन लीक</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">भिवंडी में छापा- </span>27<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को सुबह </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे भिवंडी पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">का पेपर बेचा जा रहा है। छापेमारी में संदिग्धों के पास से जो प्रश्नपत्र मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो असली </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर से हूबहू मैच कर रहे थे। परीक्षा रद्द-  महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">ने तुरंत </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की परीक्षा स्थगित कर दी। नई तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गिरफ्तारियां- भिवंडी पुलिस ने कम से कम </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों को हिरासत में लिया है और केस दर्ज कर जांच शुरू की है। ये पहली बार नहीं: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बार-बार लीक</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की कहानी-  महाराष्ट्र में </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक अब आदत बन चुका है। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> कोल्हापुर में  </span>23<span lang="hi" xml:lang="hi"> नवंबर की परीक्षा से पहले </span>18<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोग गिरफ्तार। गिरोह </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये में पेपर बेच रहा था। </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> ठाणे/भिवंडी में </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की परीक्षा से </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन पहले पेपर लीक। </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में कोल्हापुर केस के बाद भी परिषद ने कहा था कि "पेपर छपाई बेहद गोपनीय होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोषागार में </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे निगरानी रहती है"। फिर भी लीक हो गया। कौन फंस रहा है बीच में</span>? 4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख शिक्षक अभ्यर्थी। इस बार करीब </span>4.28<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख उम्मीदवार परीक्षा देने वाले थे। इसमें </span>2.26<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख वो शिक्षक भी शामिल थे जो पहले से नौकरी कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">क्वालिफिकेशन के लिए फिर से परीक्षा दे रहे थे। एक अभ्यर्थी का </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल बर्बाद। फीस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तैयारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग सब गया। और सबसे बड़ा नुकसान: स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती फिर लटकेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लीक होता कैसे है</span>? '<span lang="hi" xml:lang="hi">माफिया का मॉडल</span>'- <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच और पुराने केस देखें तो पैटर्न साफ है। व्हाट्सएप चेन- </span>HSC <span lang="hi" xml:lang="hi">बोर्ड पेपर लीक में भी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">टेक वन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रुप से </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सीलेंट ट्यूशन क्लासेस</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">होते हुए स्टूडेंट्स तक पेपर पहुंचता था। प्राइवेट कोचिंग का रोल- नागपुर बोर्ड केस में एक प्राइवेट कोचिंग से जुड़े व्यक्ति ने पैसे लेकर पेपर साझा किया था। अंदरूनी सांठगांठ- बिना छपाई वाले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या कोषागार/ट्रांसपोर्ट लेवल पर पेपर निकलना। </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में भी पेपर परीक्षा से </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिनट पहले व्हाट्सएप पर भेजा गया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">                  राजनीति शुरू: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक सरकार</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">का आरोप- कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा: "पेपर लीक अब अपवाद नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीजेपी सरकार की पहचान बन गया है। ठाणे में ही टैट का पेपर लीक... किसका राजनीतिक संरक्षण है</span>?" <span lang="hi" xml:lang="hi">आखिर लीक से छुटकारा कब</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">कड़ी सजा का कानून-  </span>NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">की तरह महाराष्ट्र में भी </span>'Public Examination Act' <span lang="hi" xml:lang="hi">को दांत वाला बनाना। गिरफ्तार लोग </span>2 <span lang="hi" xml:lang="hi">महीने में जमानत पर बाहर न आएं। टेक्नोलॉजी से निगरानी- पेपर को ब्लॉकचेन या एन्क्रिप्टेड </span>QR <span lang="hi" xml:lang="hi">कोड से ट्रैक करना। हर हैंडलिंग पर बायोमेट्रिक लॉग। कोचिंग माफिया पर कार्रवाई-  ट्यूशन क्लासेस में छापे और व्हाट्सएप ग्रुप मॉनिटरिंग। पैसे लेकर पेपर बेचने वालों का लाइसेंस रद्द। परिषद की जवाबदेही- हर लीक पर </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">के शीर्ष अधिकारी से स्पष्टीकरण और जिम्मेदारी तय। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस का मामला</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर पल्ला झाड़ना बंद। अभ्यर्थियों को मुआवजा-परीक्षा रद्द होने पर फीस वापस + अगली परीक्षा फ्री + ट्रैवल खर्च। ताकि सिस्टम को दर्द हो। </span>NEET, HSC, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब </span>TET... <span lang="hi" xml:lang="hi">हर बार सरकार कहती है "जांच होगी"। पर अभ्यर्थी हर बार नई तारीख का इंतजार करता है। जब तक पेपर लीक करने वाले को नौकरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जेल और </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का बैन मिलना तय नहीं होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख बच्चों का भविष्य दांव पर लगता रहेगा। क्या महाराष्ट्र को हर परीक्षा के लिए </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">खुद को सुधारेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अब हर परीक्षा से पहले लीक का डर परीक्षार्थियों को सताने लगा है। और जब वह किसी परीक्षा की तैयारियां करते हैं तो एक सवाल जरूर मन में उठता है कि कहीं परीक्षा लीक न हो जाए। सरकार को इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे। कानून को और सख्त बनाना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 21:27:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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                <title>महाराष्ट्र को तमिलनाडु मत बनाओ राज !</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भाषाई विवाद से दक्षिण अभी तक मुक्त नहीं हुआ है और एक बार फिर महाराष्ट्र भाषाई विवाद में उलझता दिखाई दे रहा है।  महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा के रूप में पढ़ाये जाने का फैसला किया तो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे इसके विरोध में आ गए।  अब एकनाथ शिंदे गुट ने उन पर निशाना साधा है।  जाहिर है  कि महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार है सो उसका हिंदी के खिलाफ जाना नामुमकिन है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में भाषा को लेकर विवाद नया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151152/do-not-make-maharashtra-tamil-nadu"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-04/hindi-marathi-row.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भाषाई विवाद से दक्षिण अभी तक मुक्त नहीं हुआ है और एक बार फिर महाराष्ट्र भाषाई विवाद में उलझता दिखाई दे रहा है।  महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा के रूप में पढ़ाये जाने का फैसला किया तो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे इसके विरोध में आ गए।  अब एकनाथ शिंदे गुट ने उन पर निशाना साधा है।  जाहिर है  कि महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार है सो उसका हिंदी के खिलाफ जाना नामुमकिन है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में भाषा को लेकर विवाद नया नहीं है। आजादी के 77  साल बाद भी ये विवाद न सिर्फ ज़िंदा है बल्कि लगातार जारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति  में तीन भाषाओं को पढ़ाने का प्रावधान आने के बाद, दक्षिण में केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार के बीच हिंदी-तमिल विवाद ने और जोर पकड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने हिंदी को मातृभाषाओं का ‘हत्यारा’ तक कह डाला। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार हिंदी थोपकर भाषाई अस्मिता को कमजोर कर रही है। डीएमके नेता कनिमोझी ने भी इस मुद्दे पर कहा कि उनकी आपत्ति हिंदी को थोपे जाने से है, न कि भाषा को लेकर।</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल ये है कि  क्या किसी एक देश की एक भाषा होना चाहिए या नहीं ? सवाल ये भी है की क्या अहिन्दी भाषी राज्य एक स्वतंत्र राष्ट्र हैं जो वे अपनी मातृभाषा को ही अपनी राजभाषा बनाये रखना चाहते हैं। सवाल ये भी है कि  क्या नई शिक्षा नीति में सचमुच हिंदी अहिन्दी भाषियों पर थोपी जा रही है ? हर भाषा- भाषी को अपनी मातृभाषा पर गर्व होता है ,होना भी चाहिए किन्तु क्या केवल क्षेत्रीय भाषाओँ के बूते कोई एक राष्ट्रआगे बढ़ सकता है ? इन सवालों का जबाब खोजने के बजाय दक्षिण के राज्य हिंदी के अंध विरोध में संघर्षरत हैं।  हिंदी के विरोध से किसी को क्या नफ़ा-नुक्सान होता है इसके बारे में कोई कुछ नहीं बोलता।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र  सरकार के इस फैसले का महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने विरोध किया है। ठाकरे ने एक बयान में कहा है कि मैं स्पष्ट शब्दों में कहता हूं कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना इस अनिवार्यता को बर्दाश्त नहीं करेगी। राज ठाकरे ने इसमें लिखा है 'हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदी नहीं! अगर आप महाराष्ट्र को हिंदी के रंग में रंगने की कोशिश करेंगे, तो महाराष्ट्र में संघर्ष होना तय है।'</p>
<p style="text-align:justify;">ठाकरे ने  लिखा है अगर आप यह सब देखेंगे, तो आपको लगेगा कि सरकार जानबूझकर यह संघर्ष पैदा कर रही है। क्या यह सब आने वाले चुनावों में मराठी और गैर-मराठी के बीच संघर्ष पैदा करने और उसका फायदा उठाने की कोशिश है?</p>
<p style="text-align:justify;">राज ठाकरे महाराष्ट्र के स्टालिन नहीं हैं हालाँकि उनका अपना रूतबा है ,अपनी ताकत है। वे स्टालिन की तर्ज पर हिंदी का विरोध कर महाराष्ट्र का और मराठी भाषा का भला शायद नहीं कर पाएंगे। क्योंकि महाराष्ट्र देश की आर्थिक राजधानी है और वहां पूरा देश ही नहीं बल्कि दुनिया एकाकार   होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में रहने वालों को जितनी मराठी की जरूरत है उतनी ही हिंदी की भी।  मैं राज ठाकरे का निजी तौर पर प्रशसंक हूँ किन्तु उन्हें मश्विरा देना चाहूंगा कि  वे हिंदी का विरोध छोड़ दें। हिंदी न तो मुगलों की भाषा है और न अंग्रेजों की ।  हिंदी न तमिल के खिलाफ है और न मराठी के खिलाफ।  भाषाओं का वजूद उनके इस्तेमाल से बनता-बिगड़ता है।  कोई भाषा किसी भाषा का नुक्सान तब तक नहीं कर सकती जब तक की उसके बोलने वाले ऐसा न चाहें।</p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया में भारत की तरह बहुत से देश बहु भाषा भाषी हैं। दुनिया  के बहु भाषाभाषी देश ऐसे हैं जो बहुभाषाभाषी होते हुए भी एक राष्ट्रीय भाषा के पक्षधर हैं ।  हमारे पड़ौस चीन में 306 भाषाएँ हैं और हमारे यहां 453  भाषाएँ लेकिन क्या हम भाषाओं की वजह से दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थ व्यवस्था बन पाए ? बहरहाल भाषा किसी कोहिंदू,मुसलमान,सिख या ईसाई नहीं बनाती। आप हिंदी बोलकर मराठी होने का गौरव नहीं खो देते।</p>
<p style="text-align:justify;">तमिल वाले ऐसा सोचते हैं लेकिन दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा होने के बाद तमिल को कुल 120  मिलियन लोग बोलते हैं जबकि अंग्रेजी को । 268  बिलियन और चीनीदुसरे और  हिंदी इस मामले में तीसरे नंबर पर है ।  हिंदी बोलने वालों की संख्या 637  मिलियन ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज भाई साहब को समझना चाहिए कि  हिंदी सीखकर कोई मुसलमान या  ईसाई नहीं हो सकता वो जो है वो ही रहेगा । मराठी है तो मराठी रहेगा ,इसलिए उन्हें अपना हिंदी विरोध छोड़ देना चाहिए।  मुझे पता है कि  राज ठाकरे की शिवसेना में एक से बढ़कर एक हिंदी भाषी दिग्गज हैं। उन्होंने मराठी भी सीख ली है ,लेकिन किसी के कहने  पर नहीं बल्कि अपनी जरूरत के हिसाब से।  इसी तरह हिंदी सीखकर किसी की मराठी अस्मिता समाप्त हो जाएगी ,ये धारणा बनाना ही गलत है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीति के लिए भाषा के अलावा और दूसरे तमाम मुद्दे है।  भाषायी आधार पर राजनीति करने से न तमिलनाडु की कोई राजनितिक पार्टी आजतक राष्ट्रीय पार्टी बन पायी हौर न महाराष्ट्र की किसी राजनितिक पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल पाया।</p>
<p style="text-align:justify;">राज ठाकरे का तर्क है कि  देश के तमाम राष्ट्रों का गठन भाषायी आधार पार किया गया था,सही है लेकिन भाषायी आधार पर राज्य  के गठन का ये अर्थ ये तो नहींहै कि  वे किसी एक भाषा के जरिये सम्पर्क सूत्र में नहीं बन सकते। अतीत में जब मनसे नहीं थी तब भी भाषायी आधार पर गैर मराठियों के साथ आंदोलन भी हुए और गैर मराठियों कोमहारष्ट्र से खदेड़ने की कोशिशें भी।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन क्या महाराष्ट्र गैर मराठियों  से रिक्त या मुक्त हो गया ? राज भाई साहब को समझना चाहिए कि  वे जिस दौर की दुनिया में है वहां  न रंग के आधार  पर , न जाति के आधार पार और न भाषा के आधार पर किसी से भेद नहीं किया जा सकता।  भाषायी अस्पृश्यता भी उतनी ही खराब है जितनी कि  जातीय अस्पृश्यता। इसलिए हिंदी का विरोध करने से फायदा कम नुकसान जयदा होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मुमकिन है कि  कल को हिंदी के मुद्दे को लेकर राज ठाकरे की नमस्ते एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ हाथ मिला ले लेकिन इससे न राज्य की सरकार अस्थिर होगी और न उसे ब्लैकमेल किया जा सकेगा। हिंदी के विरोध के किसी भी आंदोलन से महाराष्ट्र का महाराष्ट्र की  अर्थव्यवस्था और संस्कृति का नुक्सान होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दक्षिण वाले हिंदी का विरोध कर अपने सूबे की सियासत में तो टिके हैं लेकिन वे राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा नहीं बन पाए   हैं। हम चाहते हैं कि  राज ठाकरे जैसे प्रतिभाशाली युवा राष्ट्रिय राजनीति का हिस्सा बनें ,किन्तु इसके लिए राज ठाकरे को अपनी भाषायी प्रतिबद्धता का त्याग करना पड़ेगा। क्योंकि हिंदी के साथ खड़े होने का अर्थ मराठी या मराठियों का विरोध या उनके हितों का अतिक्रमण नहीं है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:12:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> रेल विकास : एक पहलू यह भी</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारतीय रेल विकास के नित्य नये अध्याय लिख रहा है। अनेक तीव्रगामी ट्रेन संचालित की जा रही हैं। मुंबई-अहमदाबाद के मध्य तो हाई स्पीड रेल/ बुलेट ट्रेन चलने की योजना है। दिसंबर 2023 तक बुलेट ट्रेन संचालन की तैयारी को  पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। परन्तु अभी तक इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। इसकी अधिकतम गति 320-350 किमी प्रति घंटे की बताई जा रही है। इससे भी आगे बढ़कर 1300 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हाइपर लूप चलाने का भी प्रस्ताव है।</div>
<div>  </div>
<div>अनेक वनदे भारत सेमी हाई स्पीड ट्रेन चल चुकी हैं। इसके</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150374/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/a-woman-asking-for-money-from-passengers-in-ac-coach.jpg" alt=""></a><br /><div>भारतीय रेल विकास के नित्य नये अध्याय लिख रहा है। अनेक तीव्रगामी ट्रेन संचालित की जा रही हैं। मुंबई-अहमदाबाद के मध्य तो हाई स्पीड रेल/ बुलेट ट्रेन चलने की योजना है। दिसंबर 2023 तक बुलेट ट्रेन संचालन की तैयारी को  पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। परन्तु अभी तक इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। इसकी अधिकतम गति 320-350 किमी प्रति घंटे की बताई जा रही है। इससे भी आगे बढ़कर 1300 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हाइपर लूप चलाने का भी प्रस्ताव है।</div>
<div> </div>
<div>अनेक वनदे भारत सेमी हाई स्पीड ट्रेन चल चुकी हैं। इसके अतिरिक्त नमो भारत रैपिड रेल जिसे पहले वंदे भारत मेट्रो के नाम से जाना जाता था वह भी अहमदाबाद और भुज के बीच पहले से ही चल रही थी,अब दिल्ली, ग़ाज़ियाबाद व मेरठ के बीच  लगभग 180 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही है। इसी तरह अनेक रेलवे स्टेशन का नवीनीकरण किया जा रहा है। अनेक प्रमुख रेल स्टेशन पर एस्केलेटर / स्वचालित सीढ़ियां लगाई गयी हैं। अनेक रेल स्टेशन पर एक प्लेटफार्म से दूसरे पर जाने के लिये लिफ़्ट लगाई गयी हैं।</div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/vendor-workers-lying-on-the-floor-using-blankets-and-sheets-given-to-passengers,-ac-coach-filled-with-spit-and-dirt1.jpg" alt="Vendor workers lying on the floor using blankets and sheets given to passengers, AC coach filled with spit and dirt1" width="1200" height="1600"></img></div>
<div>भीड़ भाड़ वाले स्टेशन पर नए प्लेटफ़ॉर्म बनाये गए हैं।  उधर रेल परिवहन क्षेत्र में भी बड़ी क्रांति हुई है जिसके तहत भारत के समर्पित मालवाहक गलियारे (डीएफसी) पर विशेष रेलवे ट्रैक निर्मित किये गए हैं। यह ट्रैक केवल माल परिवहन के लिए डिज़ाइन किये गए हैं जिनका मक़सद माल ढुलाई की क्षमता और गति को बढ़ाना,माल परिवहन की दक्षता और गति में सुधार करना, मौजूदा रेल नेटवर्क पर ट्रेन की संख्या को कम करना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।</div>
<div> </div>
<div> परन्तु इन सब के बावजूद रेल यात्रियों की सुविधा,सुरक्षा व स्वास्थ्य आदि से जुड़े अनेक बुनियादी सवाल अभी भी उसी तरह बरक़रार हैं। सरकार भले ही वंदे भारत,राजधानी व शताब्दी जैसी ट्रेनों के संचालन पर इतराती हो परन्तु हक़ीक़त तो यह है कि देश की अधिकांश आम जनता इनके अतिरिक्त चलने वाली दूसरी लगभग तीन हज़ार सामान्य मेल एक्सप्रेस ट्रेन्स से ही यात्रा करती है। और इन ट्रेन्स में यात्रियों को अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</div>
<div> </div>
<div>सबसे बड़ी समस्या तो बर्थ व सीट की उपलब्धता की ही है। लंबी दूरी की गाड़ियों में सामान्य कोच की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। न केवल यात्री लटक कर या दरवाज़ों पर खड़े होकर यात्रा करते हैं बल्कि कभी कभी तो यह यात्री शौचालय में घुसकर उसे भीतर से बंद कर अपनी यात्रा पूरी करते हैं। जिससे ट्रेन के अन्य यात्रियों को भी परेशानी होती है।</div>
<div> </div>
<div>और जब यही भीड़ अनियंत्रित होती ही तो स्लीपर क्लास से लेकर ए सी कोच तक में अनिधकृत रूप से घुस जाती है। ज़्यादा भीड़ देखकर टिकट निरीक्षक भी उन्हें उतारने के बजाये यात्रियों से 'सुविधा शुल्क'  लेकर उनकी अवैध यात्रा की अनदेखी कर देते हैं। परिणामस्वरूप आरक्षित यात्रियों व उनके सामन की सुरक्षा तो ख़तरे में पड़ती ही है साथ ही उन्हें वाशरूम तक पहुँचने व उसे इस्तेमाल करने में भी परेशानी होती है। </div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/vendor-workers-lying-on-the-floor-using-blankets-and-sheets-given-to-passengers,-ac-coach-filled-with-spit-and-dirt.jpg" alt="Vendor workers lying on the floor using blankets and sheets given to passengers, AC coach filled with spit and dirt" width="1200" height="1600"></img></div>
<div>दिल्ली,पंजाब,महाराष्ट्र व दक्षिणी राज्यों से बिहार बंगाल की तरफ़ जाने वाली गाड़ियों में ए सी श्रेणी में उपलब्ध कराये जाने वाले कंबल व चादरों की तो दशा ही मत पूछिए। बहुत सौभाग्यशाली होता होगा वह यात्री जिसे धुली हुई चादर नसीब हो जाती हो। अन्यथा पूर्व के यात्रियों द्वारा प्रयुक्त चादरें ही तह कर और वेंडर के ख़ाकी लिफ़ाफ़े में पैक कर उसपर टेप लगाकर पुनः दूसरे यात्रयों को दे दी जाती हैं । और कंबल का तो हाल ही मत पूछिए। यह बदबूदार गंदे कंबल तो शायद कभी धोये ही नहीं जाते।</div>
<div> </div>
<div>देर रात जब बेडिंग आपूर्ति करने वाले स्टाफ़ को नींद आती है तो यही चादरें और कंबल जो बाद में यात्रियों को भी दिए जाने हैं उन्हें गंदी फ़र्श पर बिछा कर सो जाते हैं। और सोने में सुहागा यह की उन्हीं कोनों में लोगों ने पान खाकर भी थूका होता है जहाँ वे चादर कंबल बिछा कर सो रहे होते हैं। निश्चित रूप से इस तरह के कंबलों व चादरों का यात्रियों को आवंटित किया जाना यात्रियों के आराम व सुविधा देने से अधिक बीमारियों व संक्रमण को न्यौता ज़रूर देता है। रेल मंत्रालय को इस दुर्व्यवस्था से सख़्ती से निपटने की ज़रुरत है। </div>
<div> </div>
<div>मेल एक्सप्रैस ट्रेन्स में प्रायः हिजड़ों व महिलाओं के गैंग यहां तक कि सजी धजी सुन्दर लड़कियों के गिरोह सक्रिय रहते हैं। यह यात्रियों से पैसों की उगाही करते हैं। यदि कोई यात्री पैसे नहीं देता तो यह उन्हें अपमानित करने में भी नहीं हिचकिचाते।</div>
<div> </div>
<div>यदि कोई इज़्ज़तदार व्यक्ति किसी मजबूरीवश निर्धारित टिकट लेकर ट्रेन यात्रा न कर सके या बेटिकट हो अथवा सामान्य टिकट लेकर जल्दबाज़ी में ए सी कोच में सवार हो जाये तो टिकट निरीक्षक उससे तो बड़े अपराधी की तरह पेश आता है। परन्तु यदि इसतरह के भिखारी हिजड़े या औरतें ट्रेन में मांगते फिरें और यात्रियों के सामन की सुरक्षा के लिये चिंता पैदा करें तो यही टिकट निरीक्षक ऐसे पेशेवर लोगों को कुछ नहीं कहता। गोया इन्हें रेल विभाग की तरफ़ से ट्रेन में फ़्री यात्रा करने व यात्रियों से पैसे ऐंठने का लाइसेंस हासिल हो ? </div>
<div> </div>
<div>और दूसरी महत्वपूर्ण समस्या खानपान की स्तरीय आपूर्ति की है। चाहे वह चलती गाड़ी के कोच में यात्रियों को उपलब्ध कराया जाने वाला चाय,नाश्ता खाना हो या फिर रेलवे प्लेटफ़ॉर्म पर बिकने वाली खाने पीने की वस्तुयें किसी का भी कोई स्टैण्डर्ड नहीं है। कभी भी आपको कोई यात्री ऐसा नहीं मिलेगा जो रेल में आपूर्ति की जाने वाली चाय पान खाना आदि की तारीफ़ करता नज़र आ जाये।</div>
<div> </div>
<div>परन्तु लंबे सफ़र में मजबूर भूखा प्यासा यात्री बार बार ऐसी अवांछित वस्तुओं को ख़रीदने के लिये मजबूर रहता है। ऐसे भी कई वीडीओ वायरल हो चुकी हैं जिनमें इसतरह के खाद्य वस्तुओं के तैयार होने की हक़ीक़त दिखाई जा चुकी है। यानी आपूर्तिकर्ता या ठेकेदार को पैसे कमाने के सिवा यात्रियों के स्वास्थ्य या स्वाद की कोई फ़िक्र नहीं रहती।  </div>
<div> </div>
<div>ज़रा सोचिये कि जब मुझ जैसा आम यात्री रेल के इन कुप्रबन्धनों से भली भांति वाक़िफ़ है तो क्या वह रेल विभाग इन बातों को जानता नहीं होगा ? इसलिये यह कहने में कोई हर्ज नहीं कि यह सब रेल विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत का ही परिणाम है। रेल स्टेशन का नवीनीकरण कर या उन्हें भगवा रंग से रंग देने से यात्रियों को बुनियादी परेशानियों से निजात नहीं मिलने वाली।</div>
<div> </div>
<div>रेल यात्रियों को सर्वप्रथम टिकट के बदले सीट,अवांछित लोगों से उसकी सुरक्षा,सफ़ाई,स्वच्छ व स्वस्थ खानपान जैसी चीज़ें चाहिये। रेल विकास का ढोल पीटने वालों को रेल यात्रियों की परेशानियों से जुड़े इन पहलुओं पर भी ग़ौर करना चाहिये तथा इनका यथाशीघ्र समुचित समाधान भी किया जाना चाहिये। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Mar 2025 12:10:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>शिन्देशाही से महाराष्ट्र में नयी रार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>शिन्देशाही का मामला हालाँकि महाराष्ट्र  का है लेकिन ये हमारे शहर ग्वालियर से भी जुड़ा है इसलिए मै इसकी अनदेखी नहीं कर सकता। ग्वालियर में शिंदे यानि सिंधिया शासन की नीव रखने वाले महान योद्धा महादजी सिंधिया के नाम पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ  शिंदे को ' महादजी शिंदे राष्ट्र गौरव पुरस्कार' देने और एनसीपी के सुप्रीमो शरद पंवार द्वारा एकनाथ की तारीफ़ करने से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है।</p>
<p>एकनाथ शिंदे महारष्ट्र के बिभीषण  हैं। उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर सत्ता हासिल करने के लिए शिवसेना से बगावत कर एक  नई शिव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148606/new-rage-in-maharashtra-from-shindeshhi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(1)3.jpg" alt=""></a><br /><p>शिन्देशाही का मामला हालाँकि महाराष्ट्र  का है लेकिन ये हमारे शहर ग्वालियर से भी जुड़ा है इसलिए मै इसकी अनदेखी नहीं कर सकता। ग्वालियर में शिंदे यानि सिंधिया शासन की नीव रखने वाले महान योद्धा महादजी सिंधिया के नाम पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ  शिंदे को ' महादजी शिंदे राष्ट्र गौरव पुरस्कार' देने और एनसीपी के सुप्रीमो शरद पंवार द्वारा एकनाथ की तारीफ़ करने से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है।</p>
<p>एकनाथ शिंदे महारष्ट्र के बिभीषण  हैं। उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर सत्ता हासिल करने के लिए शिवसेना से बगावत कर एक  नई शिव सेना बना ली थी ।  उन्होंने महाराष्ट्र   विकास अगाडी की सरकार का तख्ता पलटने में मुख्य भूमिका निभाई थी, उन्हीं एकनाथ को सम्मानित करने के लिए आयोजित समारोह में शरद पंवार की मौजूदगी ही नहीं बल्कि उनके द्वारा शिंदे के कसीदे काढ़ना महाराष्ट्र विकास अघाड़ी के सहयोगियों को रास नहीं आया और शिवसेना [ उद्धव ठाकरे गुट ] ने पंवार को आड़े हाथ ले लिया।आपको बता दूँ कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को मंगलवार को न्यू महाराष्ट्र सदन में महादजी शिंदे राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार प्रदान क‍िया गया। पुणे स्थित सरहद संस्थान द्वारा आयोजित कार्यक्रम में एनसीपी (एसपी) नेता शरद पवार ने श‍िंदे को पुरस्‍कार प्रदान क‍िया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद रहे ,क्योंकि महादजी शिंदे उनके पूर्वज थे। ।</p>
<p>शिवसेना-यूबीटी सांसद संजय राउत ने कहा कि शरद पवार को ऐसे कार्य़क्रम में शामिल नहीं होना चाहिए क्योंकि शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली एमवीए की सरकार गिरा दी थी। राजनीति में कुछ चीजों से बचना होता है।  जिसे हम महाराष्ट्र का दुश्मन समझते हैं उसे ऐसा सम्मान देना, महाराष्ट्र के गौरव पर आघात है। राउत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपी-एसपी के सांसद अमोल कोल्हे ने कहा कि -राउत अपनी निजी राय जाहिर कर सकते हैं।   यह अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का हिस्सा था।  उन्होंने  कहा, ''पंवार साहब ने स्टेट्समैनशिप को दिखाया है जहां हर चीज में कोई राजनीति को नहीं लाता।  मुझे नहीं लगता कि इसमें कुछ गलत है।  वह कार्य़क्रम में अध्यक्ष थे।</p>
<p>इस विवाद   के पीछे राजनितिक   षड्यंत्र देखा जा रहा है।  समझा जा रहा है कि इस कार्यक्रम के बहाने भाजपा हाईकमान ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंदिया के जरिये शरद पंवार को भाजपा में लाने की कोशिश की जा रही है। सिंधिया  भाजपा के पुराने बिभीषण है।  सिंधिया 2020  में  मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरा चुके हैं। उनके इसी कौशल के चलते उन्हें महाराष्ट्र में मराठी कार्ड खेलकर शरद पंवार को भाजपा में लाने की जिम्मेदार दी गयी है ।</p>
<p> आपको याद होगा कि शरद पंवार की आधी  पार्टी को उनके भतीजे अजित पंवार पहले ही भाजपा के साथ जोड़ चुके हैं।  शरद पंवार अब अकेले पड़ गए हैं और उन्हें अपनी बेटी सुप्रिया के राजनीतिक भविष्य की चिंता सता रही है। माना जाता है की वे अपने जीते जी सुप्रिया का राजनितिक भविष्य सुरक्षित करने के लिए भाजपा से गठजोड़ कर सकते हैं ,अर्थात जिस महाराष्ट्र विकास अघाड़ी को उन्होंने ही बनाया था उसे वे तोड़ सकते हैं। अभी लोकसभा में शरद पंवार गुट के दोनों सदनों में कुल 5  सांसद हैं। महाराष्ट्र विधानसभा में भी अब पंवार गुट के कुल 10  विधायक बचे हैं।</p>
<p>मजे की बात ये है कि भाजपा को महाराष्ट्र की सत्ता में बने रहने के लिए शरद पंवार की जरूरत नहीं है,भाजपा तो महाराष्ट्र में विपक्ष को नेस्तनाबूद करने के लिए पंवार को अपने साथ रखना चाहती है ताकि विपक्षी गठबंधन महाराष्ट्र विकास अघाड़ी पूरी तरह बिखर जाये।हालाँकि लोकसभा और राजयसभा में पंवार के 5  सांसद भाजपा के काम के हैं।  आपको याद होगा कि महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में भाजपा मविअ की कमर पहले ही तोड़ चुकी है।</p>
<p>शरद पंवार ने इस दिशा में पहला कदम तो आगे बढ़ा ही दिया है। उन्होंने उन एकनाथ शिंदे की तारीफ में कसीदे पढ़ दिए जो महाराष्ट्र विकास अघाड़ी के दुश्मन नंबर एक हैं। उद्धव ठाकरे गुट ने तो पंवार की इस हरकत पर फौरन प्रतिक्रिया दे ही दी ,लेकिन कांग्रेस मौन है। कांग्रेस का मौन भी संकेत देता है की पंवार साहब की हरकत कांग्रेस को भी रास नहीं आयी।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया इस बार पहली बार महाराष्ट्र के लम्बे दौरे पर भी गए थे ।  वे जबसे भाजपा में आये हैं मराठी गौरव के रूप में महादजी सिंधिया के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं।  अपने गृहनगर में भी उन्होंने महादजी सिंधिया स्मारक को नयी सजधज देने के लिए स्मार्ट सिटी परियोजना का पैसा खर्च कराया है।  आजाद भारत में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी राजवंश के प्रतीक चिन्हो   को दोबारा से सार्वजनिक स्थलों पर प्रतिष्ठित करने की कोशिश की गयी। अब महादजी का नाम महारष्ट्र की राजनीती में खटास पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।</p>
<p>जानकारों का मानना   है कि यदि महादजी शिंदे के नाम का पुरस्कार देने के लिए एकनाथ को न चुना जाता तो शायद ये विवाद भी न होता ,लेकिन जानबूझकर एकनाथ को ये सम्मान दिया गया। एकनाथ शिंदे महादजी शिंदे के गौत्र से हैं या नहीं ये भगवान जाने ? लेकिन उनके नाम के आगे शिंदे लगा है।दूसरी बात ये है कि ये सम्मान महाराष्ट्र साहित्य सम्मेलन का था। यहां सम्मान  लिए राजनीतिक  व्यक्ति को क्यों चुना गया ?क्या ये पुरस्कार केवल शिंदे लोगों के लिए ही सृजित किया गया था ?</p>
<p>पांच लाख का ये पुरस्कार आजतक ग्वालियर में किसी को नहीं दिया गया। बहरहाल अब देखना है कि क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया के पूर्वज महाराष्ट्र   की सियासत में भाजपा के किसी काम आ सकते हैं  या उनके नाम के इस्तेमाल से मराठा समाज में इसकी गलत प्रतिक्रिया होती है। आने वाले दिनों में पता चल जाएगा कि शरद पंवार भी आखरी वक्त में मुसलमान होने जा रहे हैं या नहीं ?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2025 17:32:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>महाराष्ट्र और झारखंड में बहुत कठिन है डगर पनघट की।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।भाजपा गठबंधन एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला है।लेकिन झारखंड में कार्पोरेट नहीं चाहते सोरेन यानी इंडिया चुनाव जीते और अडानी चाहते हैं महाराष्ट्र में शिंदे सरकार रिपीट हो।मोदी और शाह ने पूरा जोर लगा दिया है पर महाराष्ट्र में भाजपा की रैलियों में भीड़ नदारद है।अब चुनाव परिणाम जो दिख रहा है वैसा होगा या हरियाणा जैसा होगा यह तो मतगणना के दिन 23 नवम्बर को ही पता चलेगा । दरअसल 2014 और 2019 के चुनाव में बीजेपी ने महाराष्ट्र में बड़ी सफलता हासिल की थी। 2024 के लोकसभा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146186/the-path-of-panghat-is-very-difficult-in-maharashtra-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/rajneeti.jpg" alt=""></a><br /><div>महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।भाजपा गठबंधन एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला है।लेकिन झारखंड में कार्पोरेट नहीं चाहते सोरेन यानी इंडिया चुनाव जीते और अडानी चाहते हैं महाराष्ट्र में शिंदे सरकार रिपीट हो।मोदी और शाह ने पूरा जोर लगा दिया है पर महाराष्ट्र में भाजपा की रैलियों में भीड़ नदारद है।अब चुनाव परिणाम जो दिख रहा है वैसा होगा या हरियाणा जैसा होगा यह तो मतगणना के दिन 23 नवम्बर को ही पता चलेगा । दरअसल 2014 और 2019 के चुनाव में बीजेपी ने महाराष्ट्र में बड़ी सफलता हासिल की थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती की उम्मीद थी। इसलिए पीएम मोदी ने खुद महाराष्ट्र में 19 सभाएं और एक रोड शो किया, लेकिन इतनी सभाओं के बाद भी बीजेपी महाराष्ट्र में केवल 9 सीटें ही जीत पाई, जबकि एनडीए केवल 17 सीटें ही हासिल कर सका।</div>
<div>हर चुनाव में कुछ नाटकीय किरदार होते हैं। महाराष्ट्र में इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या विपक्ष के नेता राहुल गांधी नहीं बल्कि राज्य के नेता “महाकथा” की भीड़ में हैं।जब तक कोई विशेष रूप से प्रधानमंत्री या गांधी का मुद्दा न उठाए, शायद ही कोई उनका जिक्र करता है। </div>
<div> </div>
<div>शिवसेना के सीएम एकनाथ शिंदे हैं , जिनकी मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना के कारण प्रशंसा हो रही है। शिंदे भी धीरे-धीरे मराठा नेता के रूप में अपनी जगह बना रहे हैं। फिर बीजेपी के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस हैं , जिनका अधिकार आरएसएस के हस्तक्षेप की बदौलत हाल ही में कुछ हद तक बहाल हुआ है।दूसरे डिप्टी सीएम अजित पवार अपनी पीठ पीछे लड़ रहे हैं। उन्होंने अब संकेत दे दिए हैं कि वे नहीं चाहते कि मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ जैसे वरिष्ठ भाजपा नेता उनकी पार्टी को आवंटित निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार करें क्योंकि वे नहीं चाहते कि ध्रुवीकरण करने के लिए उनकी बयानबाजी मुसलमानों को नाराज़ करे। उन्होंने अपने समर्थकों से यह भी कहा है कि वे शरद पवार की व्यक्तिगत रूप से आलोचना न करें क्योंकि इससे उनके चाचा के लिए सहानुभूति पैदा होती है। दूसरी तरफ़ उद्धव ठाकरे हैं जो असली शिवसेना के रूप में पहचाने जाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके लिए सद्भावना तो है, लेकिन लोकसभा चुनावों के स्तर पर नहीं।कांग्रेस ने स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ने का विकल्प चुना है, जिसमें विभिन्न नेता अपने-अपने क्षेत्रों में ही रहेंगे।</div>
<div> </div>
<div>महा विकास अघाड़ी (एमवीए) खेमे में सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ऑर्केस्ट्रा के उस्ताद शरद पवार क्या नया सुर अलापते हैं। उन्होंने बारामती में सहानुभूति कार्ड खेला, जहां से अजित चुनाव लड़ रहे हैं, जब उन्होंने संकेत दिया कि यह उनका आखिरी चुनाव है और इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने स्वीकार किया कि महायुति की कल्याणकारी योजनाओं के कारण एमवीए ने अपना कुछ लाभ खो दिया है।</div>
<div>महाराष्ट्र में आज 288 अलग-अलग लड़ाइयां लड़ी जा रही हैं , जो जाति, उम्मीदवार, धर्म, फसल की कीमतों को लेकर किसानों की नाराजगी, मुद्रास्फीति और विधानसभा चुनाव के दौरान उठने वाले कई स्थानीय मुद्दों से प्रभावित हैं।चुनाव के केंद्र में पवार और फडणवीस के बीच लंबे समय से चल रही लड़ाई है। यह 2014 से चल रही है जब भाजपा 122 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और फडणवीस सीएम बने। उन्होंने आरक्षण कार्ड खेलकर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के बीच भाजपा के समर्थन को बढ़ाने के लिए मराठा समर्थन जीतने की कोशिश की। फडणवीस ने 2019 में अजित पवार को अपने पक्ष में कर लिया था, लेकिन अजित कुछ ही दिनों में अपने चाचा के पास वापस चले गए - हालांकि उन्होंने अंततः 2023 में एनसीपी को तोड़ दिया - जिससे प्रतिद्वंद्विता में व्यक्तिगत तत्व भी शामिल हो गया।</div>
<div> </div>
<div>पिछले साल मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर फिर से आवाज़ उठाई, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने मांग की कि आरक्षण ओबीसी के हिस्से से दिया जाए। इस प्रक्रिया में, उन्होंने फडणवीस को अपने हमलों का निशाना बनाया और उन्हें समुदाय के हितों के विरोधी के रूप में चित्रित किया। आज, संसद में  बीजेपी के पास सिर्फ 240 सीटें हैं, ऐसे में काम करवाने की मोदी की क्षमता सीमित हो चुकी है, और इसे कई नीतिगत फैसलों को पलटने और यू-टर्न में देखा जा सकता है ।इस बार यदि महाराष्ट्र और झारखण्ड भाजपा के हाथ से निकला तो मोदी शाह के लिए संघ और भाजपा में ही नई चुनौतियाँ उभरेंगी जिससे पार पाना अत्यंत कठिन होगा ।फिर  मोदी के सहयोगी, यानी चंद्रबाबू नायडू जैसे उनकी सरकार को समर्थन देने वाले लोग अपने क्षेत्रीय एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहते हैं और तबतक मोदी के साथ हैं जबतक उनके राजनितिक हित सिद्ध हो रहे हैं । </div>
<div> </div>
<div>आज, बीजेपी के पास सिर्फ 240 सीटें हैं, ऐसे में काम करवाने की मोदी की क्षमता सीमित हो चुकी है, और इसे हमने कई नीतिगत फैसलों को पलटने और यू-टर्न में हमने देखा है। अब यह दावा करने का तुक ही नहीं है कि मोदी विशेष हैं और अद्वितीय हैं। नोटबंदी और कोरोना काल के लॉकडाउन जैसे उनके ऐसे फैसले जिनकी भनक कैबिनेट तक को नहीं होती थी, जिन्हें मास्टरस्ट्रोक कहा जाता था, वह क्षमता खत्म हो चुकी है। सरदेसाई बताते हैं कि सहयोगियों को अपने साथ बनाए रखने में काफी समय और ऊर्जा खर्च की जा रही है और आगे भी की जाती रहेगी ताकि कोई अंदरूनी असंतोष न हो।</div>
<div> </div>
<div>भाजपा ने झारखंड में कथित बंग्लादेशी घुसपैठ  को  चुनावी मुद्दा बनाना चाहा। दिन-रात हिन्दू मुस्लिम जिहाद का राग अलापने वाले असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक से बढ़कर एक विवादित भाषण दिए, लेकिन झारखंड की आदिवासी बेल्ट पर उसका कोई असर नहीं दिख रहा। उल्टा लोग सवाल कर रहे हैं। अब इसी सवाल को लीजिए- चंपई सोरेन छह बार के विधायक हैं, वह झारखंड मुक्ति  मोर्चा सरकार में मंत्री थे। उन्हें तथाकथित घुसपैठ तब क्यों नहीं दिखी? लेकिन जब दिल्ली से उनका चश्मा बनकर आया तो उनको घुसपैठिया नज़र आ गया।</div>
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<div>पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम जिलों को मिलाकर, कोल्हान क्षेत्र की 14 सीटों के लिए मतदान 13 नवंबर को है। ये सभी 14 सीटें आदिवासी बहुल सीटें हैं। बीजेपी को कोल्हान में कभी खास सफलता नहीं मिली और 2019 में उसे 14 में से एक भी सीट नहीं मिली। 20 सीटें एसटी  (अनुसूचित  जनजाति) के लिए रिजर्व हैं। भाजपा ने इस बार रणनीति बदल दी और यहां के आदिवासियों को मुस्लिमों के घुसपैठ का डर दिखाया। पूरा चुनाव कथित बांग्लादेशी घुसपैठ की आड़ में हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण कराने की कोशिश की गई। यहां तक की इस लाइन पर पीएम मोदी और अमित शाह के भाषण भी रहे।</div>
<div> </div>
<div>इंडिया गठबंधन यानी जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन ने 2019 के विधानसभा चुनावों में 17 सीटें जीतीं।  भाजपा को सिर्फ दो सीटें दक्षिणी छोटानागपुर में मिली। उसके सहयोगी झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) (जेवीएम-पी) ने एक सीट जीती। जेवीएम-पी का अब बीजेपी में विलय हो गया है। रघुबर दास के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा 2016 में छोटा नागपुर किरायेदारी अधिनियम और संथाल परगना अधिनियम में बदलाव की कोशिश की वजह से भी भाजपा को इस चुनाव में दिक्कत हो रही है। कानून में बदलाव के प्रयास के कारण बड़े पैमाने पर आंदोलन हुए, जिससे आदिवासियों को विस्थापन और पहचान खोने का डर सताने लगा था। अब उनकी सोच ये है कि अगर भाजपा वापस आई तो वो फिर से उन कानूनों को लागू करेगी, जिसे हेमंत सोरेन सरकार ने खत्म कर दिया है।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Nov 2024 20:25:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>GST है या फिर गरीबों को लूटने की एक मुहिम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को दावा किया कि भारत की 88 प्रतिशत आबादी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), दलित, आदिवासी और पिछड़े समुदायों से है लेकिन प्रशासन, न्यायपालिका और मीडिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनकी भागीदारी बहुत कम है। उन्होंने अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा' के दौरान महाराष्ट्र के पालघर जिले के वाडा तालुका में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश की सत्ता और संपत्ति को वह लोग नियंत्रित कर रहे हैं जिनकी कुल आबादी छह प्रतिशत है।</p>
<p>केरल के वायनाड से लोकसभा सदस्य ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा शुरू की गई फसल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139412/is-it-gst-or-a-campaign-to-rob-the-poor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/ani-20240302334-0_1709455376029_1709830636747.jpg" alt=""></a><br /><p>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को दावा किया कि भारत की 88 प्रतिशत आबादी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), दलित, आदिवासी और पिछड़े समुदायों से है लेकिन प्रशासन, न्यायपालिका और मीडिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनकी भागीदारी बहुत कम है। उन्होंने अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा' के दौरान महाराष्ट्र के पालघर जिले के वाडा तालुका में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश की सत्ता और संपत्ति को वह लोग नियंत्रित कर रहे हैं जिनकी कुल आबादी छह प्रतिशत है।</p>
<p>केरल के वायनाड से लोकसभा सदस्य ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा शुरू की गई फसल बीमा योजना से किसानों को नहीं, बल्कि निजी बीमा कंपनियों को फायदा होता है। उन्होंने कहा कि जब बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान होता है, तो सरकार द्वारा बीमा कंपनियों को भारी-भरकम प्रीमियम का भुगतान करने के बावजूद प्रभावित किसानों को कोई मदद नहीं मिलती है।</p>
<p>पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में असंतुलन दूर करने के लिए देशव्यापी जाति जनगणना पर जोर दिया और कहा कि अगर कांग्रेस केंद्र में सत्ता में आई तो वह इस तरह की कवायद को अंजाम देगी। राहुल गांधी ने कहा कि ओबीसी, दलित, आदिवासी और पिछड़े समुदाय देश की आबादी का 88 प्रतिशत हिस्सा हैं लेकिन प्रशासन, मीडिया और न्यायपालिका सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है।</p>
<p>कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया, ‘‘जीएसटी (माल एवं सेवा कर) के माध्यम से गरीबों को लूटा गया है।'' राहुल गांधी ने कहा कि विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करते समय उद्योगपति नहीं, बल्कि समाज के गरीब वर्ग प्रभावित होते हैं। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने पालघर जिले में मुख्य रूप से आदिवासी इलाकों का दौरा किया, जहां स्थानीय निवासियों ने उनका स्वागत किया।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Mar 2024 18:05:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रदर्शनकारियों को कौन भड़का रहा है हमें सब पता है: फडणवीस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर पिछले कई दिनों से जारी आंदोलन ने सोमवार को हिंसक रूप ले लिया है. आंदोलनकारियों ने सड़क पर उतरकर जमकर उत्पात मचाया और बीड के दो विधायकों के घरों में आग लगा दी. आंदोलनकारियों ने एनसीपी के दफ्तर में भी आग लगाई और कई वाहनों को फूंक डाला. उग्र प्रदर्शन को देखते हुए बीड और धाराशिव जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया है. हालांकि महाराष्ट्र में जारी हिंसा के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठा आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है.</p>
<p>फडवीस ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार मराठा आरक्षण देने के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136486/fadnavis-we-know-everything-who-is-provoking-the-protesters"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/maratha-protest-1280-720-31-2023.webp" alt=""></a><br /><p>महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर पिछले कई दिनों से जारी आंदोलन ने सोमवार को हिंसक रूप ले लिया है. आंदोलनकारियों ने सड़क पर उतरकर जमकर उत्पात मचाया और बीड के दो विधायकों के घरों में आग लगा दी. आंदोलनकारियों ने एनसीपी के दफ्तर में भी आग लगाई और कई वाहनों को फूंक डाला. उग्र प्रदर्शन को देखते हुए बीड और धाराशिव जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया है. हालांकि महाराष्ट्र में जारी हिंसा के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठा आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है.</p>
<p>फडवीस ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार मराठा आरक्षण देने के लिए सकारात्मक है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग मराठा आरक्षण की आड़ में राज्य को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे है. आगजनी कर रहे हैं और लोगों के घरों में ताड़फोड़ कर रहे हैं. यहां तक कि जो वीडियो फुटेज सामने आया है उसमें देखा जा सकता है कि उग्र प्रदर्शनकारियों की भीड़ आम लोगों के घरों में हैं आगजनी की गई है.</p>
<p>ऐसे लोगों से सरकार सख्ती से निपटेगी और उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया जाएगा. वहीं जो लोग शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, उनसे सरकार बातचीत करेगी. कुछ राजनीतिक पार्टी के नेता और कार्यकर्ता भी वीडियो फुटेज में हंगामा करते देखे गए हैं, उनके ऊपर भी कार्रवाई की जाएगी. यही नहीं जिन जगहों पर OBC नेताओ को धमकियां मिल रही हैं, पुलिस उन आरोपियों को नहीं बख्शेगी.</p>
<p>वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मराठा आंदोलन के दौरान हिंसा करने वालों को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि सकल मराठा समाज जानता है कि जिस समय ये मुद्दा आया था उस वक्त सरकार में कौन था और किन लोगों ने मराठा समाज के आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में गंवाया है. हमारी कोशिश है कि राज्य में किसी भी तरह का हिंसक प्रदर्शन न हो. मराठा समाज बहुत ही शांतिप्रिय तरीके से आंदोलन करता है. हमें पता है कि इस आंदोलन को कौन भड़का रहा है और इसके पीछे किन लोगों का हाथ है. सरकार का ध्यान इस पर है.</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Oct 2023 19:48:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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                <title>मराठा रिजर्वेशन प्रदर्शनकारियों ने मचाया आतंक, NCP विधायक के घर में लगाई आग</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="heading1 my-3"><strong>Maratha Reservation: </strong>महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मामला उस समय हिंसक स्थिति में पहुंच गया जब प्रदर्शनकारियों ने बीड जिले के माजलगैन स्थित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विधायक प्रकाश सोलंके के आवास को निशाना बनाया। प्रदर्शनकारियों ने एनसीपी विधायक प्रकाश सोलंके के बंगले समेत उनकी महंगी कारों को आग लगा दी।</p>
<p>उनके घर पर भी हमला हुआ और प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, जिसमें गुस्साए प्रदर्शनकारियों को विधायक के घर पर पथराव करते हुए दिखाया गया है। इसके अलावा, भीड़ ने अपने विरोध के तहत वाहनों को आग लगा दी।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136413/maratha-reservation-protesters-created-terror-and-set-fire-to-ncp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/110.jpg" alt=""></a><br /><p class="heading1 my-3"><strong>Maratha Reservation: </strong>महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मामला उस समय हिंसक स्थिति में पहुंच गया जब प्रदर्शनकारियों ने बीड जिले के माजलगैन स्थित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विधायक प्रकाश सोलंके के आवास को निशाना बनाया। प्रदर्शनकारियों ने एनसीपी विधायक प्रकाश सोलंके के बंगले समेत उनकी महंगी कारों को आग लगा दी।</p>
<p>उनके घर पर भी हमला हुआ और प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, जिसमें गुस्साए प्रदर्शनकारियों को विधायक के घर पर पथराव करते हुए दिखाया गया है। इसके अलावा, भीड़ ने अपने विरोध के तहत वाहनों को आग लगा दी।</p>
<p>घटना पर प्रकाश सोलंके कहा कि जब हमला हुआ तब मैं अपने घर के अंदर था। सौभाग्य से, मेरे परिवार का कोई भी सदस्य या कर्मचारी घायल नहीं हुआ। हम सभी सुरक्षित हैं लेकिन एक आग के कारण संपत्ति का भारी नुकसान हुआ। प्रकाश सोलंके के बीड आवास पर हमले पर सीएम एकनाथ शिंदे का कहा की मनोज जरांगे पाटिल (मराठा आरक्षण कार्यकर्ता) को इस तथ्य पर ध्यान देना चाहिए कि यह विरोध क्या मोड़ ले रहा है।</p>
<p>यह गलत दिशा में जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए बनी जस्टिस शिंदे कमेटी ने अपनी पहली रिपोर्ट हमें सौंप दी है. समिति को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए दो महीने का विस्तार दिया गया है। </p>
<p>शिंदे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट मराठा आरक्षण के मुद्दे पर हमारी सुधारात्मक याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। उन्होंने कहा कि लोगों से मेरी गंभीर अपील है कि वे कोई भी अतिवादी कदम न उठाएं, हम मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि हम आज कैबिनेट बैठक में मराठा आरक्षण प्रदान करने पर न्यायमूर्ति शिंदे समिति की रिपोर्ट को औपचारिक रूप से स्वीकार करेंगे और राजस्व विभाग द्वारा कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश जारी किए जाएंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>महाराष्ट्र/गोवा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 13:44:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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                <title>चौबीस घंटे के अंदर 24 लोगों की मौत, महाराष्ट्र के नांदेड़ सरकारी अस्पताल का हाल </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Dr. Shankarrao Chavan Govt Medical College: </strong>महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित डॉ. शंकरराव चव्हाण सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 30 सितंबर से 1 अक्टूबर (शनिवार और रविवार) के बीच 24 घंटों में 12 नवजात शिशुओं सहित 24 लोगों की मौत की सूचना मिली है. इसी तरह की एक घटना में इस साल अगस्त में ठाणे स्थित सरकारी अस्पताल में 18 लोगों की मौत हो गई थी. ताजा घटनाक्रम के परिणामस्वरूप कड़ी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर आवश्यक दवाओं की आपूर्ति बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है.</p>
<p>चिकित्सा अधिकारियों ने कहा कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135458/24-people-died-within-24-hours-condition-of-nanded-government"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/nanded-hospital-maharashtra-aa.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Dr. Shankarrao Chavan Govt Medical College: </strong>महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित डॉ. शंकरराव चव्हाण सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 30 सितंबर से 1 अक्टूबर (शनिवार और रविवार) के बीच 24 घंटों में 12 नवजात शिशुओं सहित 24 लोगों की मौत की सूचना मिली है. इसी तरह की एक घटना में इस साल अगस्त में ठाणे स्थित सरकारी अस्पताल में 18 लोगों की मौत हो गई थी. ताजा घटनाक्रम के परिणामस्वरूप कड़ी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर आवश्यक दवाओं की आपूर्ति बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है.</p>
<p>चिकित्सा अधिकारियों ने कहा कि अस्पताल में फिलहाल 70 मरीज गंभीर हैं और अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं. घटना के बारे में जानकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, जिला कलेक्टर अभिजीत राउत अस्पताल पहुंचे और स्थिति की समीक्षा की. अस्पताल अधीक्षक डॉ. एसआर वाकोड़े ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया, ‘जिन 12 नवजात शिशुओं की मौत हुई उनमें से छह बच्चियां शामिल हैं. इनमें से आठ बच्चों ने जन्म से तीन दिनों के भीतर दम तोड़ दिया, जबकि चार को गंभीर हालत में पड़ोसी जिलों सहित निजी अस्पतालों से इस अस्पताल में रेफर किया गया था.</p>
<p>अधीक्षक ने कहा कि इस अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने वालों की संख्या औसतन 10 से 12 तक है. उन्होंने कहा कि हाल ही में कर्मचारियों के तबादलों के कारण कुछ समस्या हुई, लेकिन ‘हमने यह सुनिश्चित किया कि मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों.’ अस्पताल में आवश्यक और जीवनरक्षक दवाओं की कमी से जुड़े आरोपों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘कुछ दवाएं हाफकिन इंस्टिट्यूट से खरीदी जानी थीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिसके कारण कुछ समस्या हुई.</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘तेलंगाना की सीमा से लगे इलाकों सहित पड़ोसी जिलों से मरीजों की भारी आमद के कारण दवाओं की भी कमी हो जाती है. हम हमेशा यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे अस्पताल में आवश्यक दवाओं की कमी के कारण किसी मरीज की जान न चली जाए. ऐसी स्थितियों में हम स्थानीय बजट से दवाएं खरीदते हैं हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि कभी-कभी गैर-गंभीर बीमारियों के लिए दवाओं की कमी हो सकती है.’</p>
<p>प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इन 24 घंटों के दौरान दम तोड़ने वाले 12 वयस्कों में से चार की मौत दिल का दौरा पड़ने से, एक की फूड पॉइजनिंग, दो की किडनी फेल होने से, एक महिला की प्रसव के दौरान हुई जटिलताओं के कारण, तीन एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने से और एक की पेट की बीमारी से मौत हो गई.</p>
<p>अस्पताल द्वारा जारी बयान में कहा गया है, ‘हाल के दिनों में अधिक गंभीर मरीज, विशेष रूप से टर्मिनल स्टेज (मौत से पहले की शरीर के कार्य करने की स्थिति में आने वाली गिरावट) वाले, जिला और अन्य क्षेत्रों से आ रहे हैं. समर्पित चिकित्सा टीम और कर्मचारी लगन से उनकी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं. इस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का समुदाय को उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने का एक लंबा इतिहास रहा है और सभी भर्ती मरीजों को आवश्यक देखभाल मिल रही है.’</p>
<p>अस्पताल के एक डॉक्टर ने कहा, ‘हालांकि हमारी क्षमता 600 बिस्तरों की है, वर्तमान में हमारे पास 800 से अधिक मरीज भर्ती हैं. हम जिले में एकमात्र तृतीयक देखभाल अस्पताल हैं और हमारे यहां अक्सर गंभीर हालत वाले मरीज आते हैं.’</p>
<p>इसी बीच, मुंबई में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मौतों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और घटना की गहन जांच की घोषणा की, जबकि विपक्ष ने राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर राज्य सरकार की आलोचना की है.</p>
<p>महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को गहन जांच करने का निर्देश दिया गया है. रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. उन्होंने कहा, ‘मैंने हमारे निदेशक से नांदेड़ का दौरा करने के लिए कहा है. मैं भी वहां जाऊंगा. जांच के आदेश दे दिए गए हैं.’</p>
<p>पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस विधायक अशोक चव्हाण, जिनके पिता के नाम पर यह अस्पताल है ने, अस्पताल का दौरा करने के बाद कहा, ‘अस्पताल में स्थिति चिंताजनक है. जिन नर्सों का स्थानांतरण हुआ था, उनके रिक्त पदों पर कोई नई नियुक्ति नहीं की गई है. डॉक्टरों की भर्ती की जरूरत है. जिला योजना समिति से पैसे को अभी तक तकनीकी मंजूरी नहीं मिली है, जिससे अस्पताल वित्तीय संकट में है. अस्पताल में वर्तमान में 1,200 मरीज हैं, जबकि क्षमता 500 है.’</p>
<p>चव्हाण ने यह भी आरोप लगाया कि सीटी-स्कैन और अन्य उपकरणों के रखरखाव का भुगतान लंबित है, इसलिए ठेकेदार ने सेवाएं बंद कर दी हैं. हालांकि, अस्पताल के बयान में कहा गया है, ‘अस्पताल में महत्वपूर्ण दवाओं की आपूर्ति है और चालू वित्तीय वर्ष के लिए इसे 12 करोड़ रुपये की धनराशि मिली, जिसमें 4 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं.’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>महाराष्ट्र/गोवा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Oct 2023 15:52:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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                <title>महाराष्ट्र के नागपुर में भीषण बारिश, घरों में घुसा पानी </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>महाराष्ट्र</strong> के नागपुर में गुरुवार से हो रही मूसलाधार बारिश शनिवार को भी जारी रही। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार को यहां 4 घंटे में ही 4 इंच यानी 100 मिलीमीटर बारिश हुई है। नागपुर शहर में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। रेलवे स्टेशन तक पर पानी जमा हो चुका है।</p>
<p>सड़कों पर राहत और बचाव के लिए नावें चलाई जा रही हैं। अंबाझरी झील ओवरफ्लो होने हो गई है। इसके कारण नागपुर के निचले इलाकों में पानी घुस गया है।  नीचले इलाके में लोगों के घरों तक में पानी घुस गया है। प्राप्त सूचना के मुताबिक एक बुजुर्ग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135095/heavy-rain-in-nagpur-maharashtra-water-entered-houses"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/whatsapp-image-2023-09-24-at-7.52.47-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>महाराष्ट्र</strong> के नागपुर में गुरुवार से हो रही मूसलाधार बारिश शनिवार को भी जारी रही। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार को यहां 4 घंटे में ही 4 इंच यानी 100 मिलीमीटर बारिश हुई है। नागपुर शहर में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। रेलवे स्टेशन तक पर पानी जमा हो चुका है।</p>
<p>सड़कों पर राहत और बचाव के लिए नावें चलाई जा रही हैं। अंबाझरी झील ओवरफ्लो होने हो गई है। इसके कारण नागपुर के निचले इलाकों में पानी घुस गया है।  नीचले इलाके में लोगों के घरों तक में पानी घुस गया है। प्राप्त सूचना के मुताबिक एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई है।महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने सोशल मीडिया साइट एक्स ट्विट पर बताया कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमें राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। </p>
<p>अब तक करीब 500 लोगों का रेस्क्यू किया गया है। मूक-बधिर बच्चों के स्कूल से 70 बच्चों को इस आपदा से बचाया गया है।  नागपुर के बस स्टैंड में लगी बसों में पानी घुस गया है। कई इलाके में तो पांच फुट तक पानी जमा हो गया है इसके कारण कारे डूब गई हैं। सेना के जवान नावों के जरिये फंसे हुए लोगों तक पहुंच रहे हैं। उन्हें खाने-पीने की चीजें जी जा रही हैं। राहत और बचाव के लिए सेना की दो यूनिट भी पहुंची हैं। निचले इलाके से निकाले गए लोगों को राहत शिवरों में रखा गया है। तीन दिनों से जारी इस मूसलाधार बारिश के कारण पूरा नागपुर शहर ठहर सा गया है।  </p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को नागपुर का दौरा किया है। उन्होंने बचाव कार्यों की स्थिति की समीक्षा की है।  लगातार बारिश के कारण नागपुर के कई इलाकों में पानी भर गया है। नागपुर में शनिवार को कम से कम दो लोगों की डूबकर मौत हो गई। पिछले कुछ घंटों में भारी बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया है।</p>
<p>मूक बधिर स्कूल के 70 छात्रों सहित 400 से अधिक लोगों को बचाया गया। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए जिले में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीश ने ट्वविट कर कहा है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ नागपुर नगर निगम कार्यालय पहुंचे हैं। नागपुर में लगातार बारिश के कारण हुई दुर्भाग्यपूर्ण जल-जमाव की स्थिति के मद्देनजर बचाव कार्यों और राहत के उपायों की स्थिति की समीक्षा की गई है। </p>
<p>वहीं मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नागपुर के सांसद नितिन गडकरी ने शनिवार को इस भारी बारिश के कारण ठप हुए जनजीवन का जायजा लिया। उन्होंने यहां जलभराव और बाढ़ के मुद्दों के समाधान के लिए दीर्घकालिक उपाय करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि नागपुर में  भारी बारिश अप्रत्याशित थी, उन्होंने शहर में पहली बार ऐसी बारिश देखी है। बारिश के कारण जो हालात हैं, वह 15 से 16 साल बाद बन रहे हैं। नीतीन गडकरी ने नागपुर में बारिश और इसके बाद हुई जलजमाव की समस्या को महाराष्ट्र सरकार के समक्ष भी उठाया है। </p>
<p>शनिवार को देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश हुई है। इसके कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक अगले 24 घंटों में करीब 18 राज्यों में बारिश का अलर्ट है।  मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा में तेज बारिश का पूर्वानुमान है।  छत्तीसगढ़ के सात जिलों में और हरियाणा के सभी 22 जिलों में, बरिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।</p>
<p>इससे पहले अगस्त में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण तबाही का नजारा दिखा था। इन दोनों राज्यों में लैंड स्लाईड के कारण बड़ी संख्या में घर गिर गये थे और लोगों की मौतें हुई थी। माना जा रहा है कि गलत तरीके से होने वाले विकास कार्यों और प्रकृति से छेड़छाड़ ने इस तरह की प्राकृतिक आपदा को बढ़ावा दिया है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
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                                            <category>महाराष्ट्र/गोवा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Sep 2023 19:53:30 +0530</pubDate>
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