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                <title>UPI fraud - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>UPI fraud RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यूट्यूब से सीखी साइबर ठगी की तकनीक, तीन शातिर गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">जनपद पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मोबाइल की सिम का दुरुपयोग कर UPI खातों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर अभियुक्त और दो बाल अपचारियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से साइबर अपराध में प्रयुक्त तीन आईफोन, एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन तथा 24 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान Cy-Vajra के तहत पुलिस अधीक्षक विकास कुमार के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक एवं साइबर क्राइम नोडल अधिकारी विशाल पाण्डेय और क्षेत्राधिकारी उतरौला</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184592/three-criminals-who-learned-cyber-fraud-techniques-from-youtube-arrested"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260803-wa0663.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जनपद पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मोबाइल की सिम का दुरुपयोग कर UPI खातों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर अभियुक्त और दो बाल अपचारियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से साइबर अपराध में प्रयुक्त तीन आईफोन, एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन तथा 24 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान Cy-Vajra के तहत पुलिस अधीक्षक विकास कुमार के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक एवं साइबर क्राइम नोडल अधिकारी विशाल पाण्डेय और क्षेत्राधिकारी उतरौला डॉ. जितेंद्र कुमार के पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई। मामले की जांच के दौरान कोतवाली उतरौला पुलिस एवं जनपदीय साइबर सेल की संयुक्त टीम ने मोहल्ला आर्यनगर निवासी सनी चौरसिया तथा दो बाल अपचारियों को गिरफ्तार किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी यूट्यूब से आईफोन आधारित UPI लॉगिन की तकनीक सीखकर परिचित लोगों के मोबाइल की सिम कुछ समय के लिए अपने आईफोन में लगाते थे। इसके बाद पीड़ित के NAVI UPI, Paytm अथवा अन्य UPI ऐप में लॉगिन कर नया पासकोड बना लेते थे। सिम वापस कर देने के बाद भी Apple Cloud के माध्यम से उनके आईफोन में लॉगिन सक्रिय रहता था, जिससे वे पीड़ित के बैंक खाते का संचालन करते थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जांच में यह भी पता चला कि आरोपी नेपाल के चन्द्रौटा स्थित कैसीनो सहित अन्य स्थानों पर जाकर पीड़ितों के खातों से ऑनलाइन भुगतान कर उसके बदले नकद राशि प्राप्त करते थे। ठगी की रकम का कुछ हिस्सा ऑनलाइन गेमिंग ऐप में लगाया जाता था, जबकि शेष राशि विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर आपस में बांट ली जाती थी। घटना के बाद प्रयुक्त आईफोन बेचकर साक्ष्य मिटाने का भी प्रयास किया जाता था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूछताछ में आरोपियों ने अरुण वर्मा एवं अन्य पीड़ितों के साथ लाखों रुपये की साइबर धोखाधड़ी करना स्वीकार किया। पुलिस ने उनके कब्जे से तीन आईफोन, एक एंड्रॉयड मोबाइल तथा 24 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कार्रवाई में कोतवाली उतरौला के निरीक्षक बलजीत राव, उपनिरीक्षक हीरालाल सहित थाना पुलिस एवं जनपदीय साइबर सेल की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने अभियुक्तों को न्यायालय में पेश कर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
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<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 20:16:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 13 साइबर अपराधी गिरफ्तार, लगभग ₹2 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराध के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। अभियुक्त अश्लील वीडियो प्रकरण में फंसाने तथा पुलिस अधिकारी बनकर धमकाने के माध्यम से लोगों से धनराशि की ठगी करते थे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने जानकारी देते हुए बताया कि साइबर बज्र आप्रेशन के तहत कार्रवाई चल रही है इसी के तहत संचेडी गांव के चार गांवों में आप्रेशन चलाया गया है। कार्यवाही के दौरान अभियुक्तों के कब्जे से 29 मोबाइल फोन, 3 कारें तथा अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। जांच में 48 IMEI एवं 68</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183669/big-action-by-kanpur-commissionerate-police-13-cyber-criminals-arrested"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1002100353.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराध के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। अभियुक्त अश्लील वीडियो प्रकरण में फंसाने तथा पुलिस अधिकारी बनकर धमकाने के माध्यम से लोगों से धनराशि की ठगी करते थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने जानकारी देते हुए बताया कि साइबर बज्र आप्रेशन के तहत कार्रवाई चल रही है इसी के तहत संचेडी गांव के चार गांवों में आप्रेशन चलाया गया है। कार्यवाही के दौरान अभियुक्तों के कब्जे से 29 मोबाइल फोन, 3 कारें तथा अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। जांच में 48 IMEI एवं 68 मोबाइल नंबर सक्रिय पाए गए हैं। साथ ही NCRP पोर्टल पर दर्ज 189 साइबर शिकायतों में 60 शिकायतकर्ताओं के मोबाइल नंबर इस गिरोह से जुड़े पाए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस आयुक्त ने बताया कि प्रारंभिक जांच में दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों के नागरिकों को इस गिरोह द्वारा ठगी का शिकार बनाया जाना प्रकाश में आया है। अब तक लगभग ₹2 करोड़ की साइबर ठगी का अनुमान है। अभियुक्त बैंक खातों एवं UPI के माध्यम से धनराशि प्राप्त करते थे। जांच के दौरान व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड एवं अन्य डिजिटल साक्ष्य भी बरामद हुए हैं। अग्रिम विधिक कार्यवाही प्रचलित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने बताया कि अभी इनके 20 साथी फरार हैं जिनकी पुलिस तलाश कर रही है। उन्होंने कहा कि इनके खिलाफ गैंगेस्टर की कार्यवाही करते हुए इन्होंने इस क्राइम से धनराशि बनाकर जो प्रोपर्टी बनाई है उसको सीज करने की कार्यवाही की जाएगी।</div>
</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 21:17:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>करोड़ों की ठगी, करोड़ों का खर्च और फिर भी नाकाफी रिकवरी; डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती बनता साइबर अपराध*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/41.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div class="ii gt">
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<div>
<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में राजस्थान में 77 हजार से अधिक लोग साइबर ठगी का शिकार हुए और ठगों ने लगभग 354 करोड़ रुपए की रकम हड़प ली। चिंताजनक बात यह है कि इस भारी-भरकम ठगी में से केवल 39 करोड़ रुपए ही रिकवर किए जा सके हैं, जबकि साइबर सुरक्षा और साइबर थानों के संचालन पर राज्य सरकार का सालाना खर्च 102 करोड़ रुपए से अधिक है।</div>
<div>यह स्थिति केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। देश के लगभग सभी राज्यों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच जितनी तेजी से बढ़ी है, उससे कहीं अधिक तेजी से साइबर अपराधियों के तौर-तरीके विकसित हुए हैं। आज अपराधी किसी बैंक डकैती या चोरी के बजाय मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे नकली निवेश योजनाओं, फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी, नौकरी, टास्क फ्रॉड और क्यूआर कोड स्कैनिंग जैसे अनेक तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।</div>
<div>राजस्थान के आंकड़े बताते हैं कि हर घंटे लगभग दस लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्होंने वर्षों की मेहनत से अपनी बचत जमा की थी। कई मामलों में लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में उनके खातों से गायब हो गई। पीड़ितों में युवा, व्यापारी, नौकरीपेशा वर्ग, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। विशेष रूप से 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक निशाना बन रहे हैं, क्योंकि यही वर्ग डिजिटल सेवाओं का सबसे ज्यादा उपयोग करता है।</div>
<div>साइबर अपराध का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। जैसे ही पुलिस और बैंकिंग संस्थाएं किसी एक तरीके पर नियंत्रण करने का प्रयास करती हैं, ठग कोई नया तरीका खोज लेते हैं। हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फर्जी शेयर मार्केट निवेश योजनाओं के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी सामने आई है। अपराधी स्वयं को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते हैं और फिर उनसे रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।</div>
<div>सवाल यह भी उठता है कि जब साइबर थानों और साइबर सुरक्षा तंत्र पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तब रिकवरी की दर इतनी कम क्यों है। राजस्थान में 354 करोड़ रुपए की ठगी के मुकाबले केवल 39 करोड़ रुपए की रिकवरी होना व्यवस्था की सीमाओं को दर्शाता है। इसका एक कारण यह है कि ठग रकम को तुरंत कई फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। इन खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। रकम कई राज्यों और कई बार विदेशों तक पहुंच जाती है, जिससे उसे ट्रेस करना और वापस लाना बेहद कठिन हो जाता है। इसके अलावा साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अंतरराज्यीय समन्वय की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी कई बार जांच को प्रभावित करती है।</div>
<div>बैंकों की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित ग्राहकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंक शामिल हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि ग्राहकों को जागरूक बनाने और संदिग्ध लेनदेन पर त्वरित कार्रवाई की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा के अनेक स्तर मौजूद हैं, फिर भी यदि ग्राहक स्वयं सतर्क नहीं रहेगा तो अपराधी किसी न किसी तरीके से उसे भ्रमित कर सकते हैं।</div>
<div>आज साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या बैंक की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी बन चुकी है। अधिकांश मामलों में ठग लोगों की तकनीकी कमजोरी का नहीं बल्कि उनकी भावनाओं, लालच, डर या जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। कोई व्यक्ति यदि अनजान लिंक पर क्लिक करता है, ओटीपी साझा करता है, स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करता है या फर्जी निवेश योजना में अधिक मुनाफे के लालच में पैसा लगाता है, तो वह स्वयं जोखिम बढ़ा देता है। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।</div>
<div>सरकार और पुलिस प्रशासन भी लगातार लोगों को जागरूक करने के प्रयास कर रहे हैं। साइबर हेल्पलाइन 1930 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी होने के बाद पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित तुरंत हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए तो रकम को फ्रीज कराने और रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। दुर्भाग्यवश कई लोग शर्म, घबराहट या जानकारी के अभाव में शिकायत करने में देर कर देते हैं, जिससे अपराधियों को रकम निकालने का पर्याप्त समय मिल जाता है।</div>
<div>देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। सरकार कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दे रही है और करोड़ों लोग रोजाना ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बनाना होगा। केवल नए साइबर थाने खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और बैंकिंग संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।</div>
<div>वर्तमान समय में साइबर अपराध किसी महामारी से कम नहीं है। यह अपराध बिना हथियार, बिना हिंसा और बिना किसी भौतिक उपस्थिति के लोगों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा है। राजस्थान के आंकड़े इस बात की चेतावनी हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, पुलिस, बैंक, तकनीकी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इस चुनौती का सामना करें। डिजिटल क्रांति तभी सफल मानी जाएगी जब लोगों का धन और उनका विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे। अन्यथा साइबर ठगों का यह बढ़ता साम्राज्य आम जनता की मेहनत की कमाई को इसी तरह निगलता रहेगा और सुरक्षा तंत्र पर सवाल लगातार खड़े होते रहेंगे।</div>
<div>          *कांतिलाल मांडोत*</div>
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<div class="adL"> </div>
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</div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:31:08 +0530</pubDate>
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