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                <title>Child Education - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Child Education RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>समाज के प्रति समर्पण खींच लाई जन्मभूमि तक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात विशेष संवाददाता प्रदीप यादव </strong><br />
<div>
<div>  </div>
<div>  </div>
<div>समाज सेवा बहुत बड़ी सेवा है यह गुण किसी किसी में आता है वह भी अगर उसके कुल खानदान की सोच जब सच्ची होती है तब उस कुल में समाज के प्रति चिंतक व्यक्ति का जन्म होता है।</div>
<div>  </div>
<div>आपको बता दें कि दिल्ली के विधान सभा पटेल नगर में अगर किसी समाज सेवक का नाम लिया जाय तो पहला नाम एस के चौबे का आ ही जाता है, यह किसी को प्रोत्साहित या निराश करने के लिए बोला जा रहा है बल्कि यह वास्तविकता है।</div>
<div>  </div>
<div>एस के चौबे अपने टीम के साथ मिलकर दिल्ली</div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186734/devotion-to-society-took-me-to-my-birthplace"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260829-wa00073.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात विशेष संवाददाता प्रदीप यादव </strong><br />
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<div> </div>
<div> </div>
<div>समाज सेवा बहुत बड़ी सेवा है यह गुण किसी किसी में आता है वह भी अगर उसके कुल खानदान की सोच जब सच्ची होती है तब उस कुल में समाज के प्रति चिंतक व्यक्ति का जन्म होता है।</div>
<div> </div>
<div>आपको बता दें कि दिल्ली के विधान सभा पटेल नगर में अगर किसी समाज सेवक का नाम लिया जाय तो पहला नाम एस के चौबे का आ ही जाता है, यह किसी को प्रोत्साहित या निराश करने के लिए बोला जा रहा है बल्कि यह वास्तविकता है।</div>
<div> </div>
<div>एस के चौबे अपने टीम के साथ मिलकर दिल्ली में तो समाज की सेवा बड़े स्तर पर कर ही रहे है जैसे कि शिक्षा के लिए बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना गरीब कन्याओं की शादी करवाना, रेहड़ी, पटरी वालों के लिए संघर्ष करना, झुग्गी झोपड़ी वालों के लिए संघर्ष करना, नशे के खिलाफ संघर्ष करना जैसे तमाम समाजहित का कार्य करते रहते है।अब एस के चौबे द्वारा अपने जन्मस्थली जौनपुर के अपने निज गांव के प्राथमिक विद्यालय को 5 कंप्यूटर भेंट किए।</div>
<div> </div>
<div>पूछने पर बताएं कि आज कल निजी संस्थानों से बच्चों को शिक्षा दिलाना एक चलन सा हो गया है जबकि सरकारी विद्यालयों में शिक्षित शिक्षक होने के बावजूद भी लोग अपने बच्चों का दाखिला सरकारी विद्यालयों में करवाने से कतराते है जबकि गरीबों के लिए आखिरी आश्रय यह सरकारी विद्यालय ही है ये ऐसे बच्चे होते है जिनको कॉपी पेंसिल भी बड़े मुश्किल से उनके मां बाप दिला पाते है।</div>
<div> </div>
<div>ऐसे बच्चों को आज के आधुनिक युग की पढ़ाई नसीब हो पाना मुश्किल है इसलिए इन बच्चों के उज्जवल भविष्य और अच्छे शिक्षा हेतु यह उपहार स्वरूप 5 कंप्यूटर दिया गया है। विद्यालय के अध्यापक भी वचनबद्ध है कि अब हम अपना 100% देकर इन बच्चों को मेहनत करके पढ़ाएंगे और इनको निजी संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों से भी बेहतर बनाएंगे। एस के चौबे का कहना है कि अगर हमारे इस कदम से कुछ बच्चे भी अच्छे से पढ़ने लिखने लगे और आगे निकल गए तो जीवन में समाज सेवा का फल मिल जाएगा।</div>
<div> </div>
<div>बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड विकास अधिकारी से भी एस के चौबे संपर्क में है विद्यालय को जिले में एक स्थान दिलाने के लिए और जल्द ही विद्यालय को स्मार्ट क्लास में बदलने के लिए संकल्पित है। विद्यालय के कुछ खिड़की दरवाजा भी ठीक करवाए और जो छत टपक रहे है उसको मरम्मत कराने के लिए भी बोल दिये है।</div>
<div> </div>
<div>आज के समय में जहां एक कमाने खाने वाला आदमी अपना व अपने बच्चों का पेट पालने और खुद के विकास के लिए परेशान है चोरी बेइमानी सब कर रहा है वही एस के चौबे यह जिम्मेदारी निभाते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए अपनी क्षमतानुसार समाजहित के कार्यों में अपना सहयोग देते रहते है। </div>
<div> </div>
<div>अभी विगत वर्ष दिल्ली के पटेल नगर में भी एस के चौबे ने बच्चों के अच्छी शिक्षा के लिए कंप्यूटर दान किए थे। आखिरी में चौबे ने बताया कि जो मुझसे हो सका मैने किया अब जिम्मेदारी हमारे गांव और समाज के लोगों का है कि अपने बच्चों को इस विद्यालय तक पहुंचाए, संसाधनों की देख रेख करें और अध्यापकों के शिक्षण गतिविधियों पर भी ध्यान दें।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
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</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 23:14:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्ते से छुट्टी, सीखने की नई राह: ‘नो बैग डे’ में खेल, कला और प्रकृति से जुड़ रहे नौनिहाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong>
<div>  </div>
<div><strong>बलरामपुर, </strong></div>
<div>  </div>
<div>जनपद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शनिवार का दिन बच्चों के लिए कुछ अलग अंदाज में सीखने का अवसर लेकर आया। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार के निर्देशन में प्रत्येक शनिवार आयोजित किए जा रहे ‘नो बैग डे’ के तहत विद्यालयों में बच्चों को किताबी पढ़ाई से इतर खेलकूद, कला एवं क्राफ्ट, पर्यावरण संरक्षण तथा विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। बस्ते से छुट्टी के इस दिन बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ गतिविधियों में प्रतिभाग किया और खेल-खेल में कई जीवनोपयोगी गुण सीखे।</div>
<div>  </div>
<div>‘नो बैग डे’ का उद्देश्य शिक्षा को केवल पाठ्य-पुस्तकों</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186667/youngsters-are-connecting-with-sports-art-and-nature-in-no"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260829-wa0295.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong>
<div> </div>
<div><strong>बलरामपुर, </strong></div>
<div> </div>
<div>जनपद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शनिवार का दिन बच्चों के लिए कुछ अलग अंदाज में सीखने का अवसर लेकर आया। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार के निर्देशन में प्रत्येक शनिवार आयोजित किए जा रहे ‘नो बैग डे’ के तहत विद्यालयों में बच्चों को किताबी पढ़ाई से इतर खेलकूद, कला एवं क्राफ्ट, पर्यावरण संरक्षण तथा विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। बस्ते से छुट्टी के इस दिन बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ गतिविधियों में प्रतिभाग किया और खेल-खेल में कई जीवनोपयोगी गुण सीखे।</div>
<div> </div>
<div>‘नो बैग डे’ का उद्देश्य शिक्षा को केवल पाठ्य-पुस्तकों तक सीमित न रखकर बच्चों की कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता, शारीरिक सक्रियता, टीम भावना, सहयोग की भावना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का विकास करना है। गतिविधि आधारित शिक्षा के माध्यम से बच्चों को ‘करके सीखने’ का अवसर मिल रहा है।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div><strong>खेलकूद से सीखा अनुशासन और टीमवर्क</strong></div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>कंपोजिट विद्यालय आदर्श, नगर क्षेत्र बलरामपुर में नो बैग डे के अवसर पर विभिन्न खेलकूद गतिविधियां आयोजित की गईं। छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक खेलों में हिस्सा लिया। खेल के दौरान बच्चों में अनुशासन, आपसी सहयोग, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और टीम भावना विकसित करने पर जोर दिया गया। खेल गतिविधियों से विद्यालय का माहौल भी खुशनुमा नजर आया।</div>
<div>इको क्लब ने बच्चों को सिखाई पौधों की देखभाल</div>
<div>प्राथमिक विद्यालय चवई बुजुर्ग में इको क्लब के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया। छात्र-छात्राओं ने विद्यालय परिसर में लगे पेड़-पौधों की देखभाल और सिंचाई में सहभागिता की। शिक्षकों ने बच्चों को पौधों के महत्व और पर्यावरण संरक्षण की जरूरत के बारे में जानकारी दी। कम उम्र से ही प्रकृति की देखभाल से जोड़ने की इस पहल से बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div><strong>पत्तियों से बनाई मोर और तितली की आकर्षक आकृतियां</strong></div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>नो बैग डे के तहत आयोजित कला एवं क्राफ्ट गतिविधि में बच्चों की रचनात्मकता भी देखने को मिली। छात्र-छात्राओं ने पेड़ों से गिरी पत्तियों का रचनात्मक इस्तेमाल करते हुए मोर और तितली की आकर्षक आकृतियां तैयार कीं। इस गतिविधि के जरिए बच्चों ने प्रकृति के करीब रहते हुए अपनी कल्पनाशक्ति और कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। सामूहिक रूप से कलाकृतियां तैयार करने से उनमें सहयोग, धैर्य और मिलकर काम करने की भावना भी मजबूत हुई।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div><strong>किताबों से आगे अनुभव आधारित शिक्षा पर जोर</strong></div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>जनपद में नो बैग डे के माध्यम से विद्यालयों में ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जहां बच्चे केवल पढ़ें ही नहीं, बल्कि खेलें, सृजन करें और अनुभव के माध्यम से सीखें। खेलकूद से शारीरिक एवं सामाजिक विकास, कला-कौशल से रचनात्मकता तथा इको क्लब की गतिविधियों से पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित किया जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>नो बैग डे अब बच्चों के लिए महज बस्ते से छुट्टी का दिन नहीं रह गया है, बल्कि यह अपनी प्रतिभा पहचानने, प्रकृति से जुड़ने और आनंद के साथ सीखने का अवसर बनता जा रहा है।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186667/youngsters-are-connecting-with-sports-art-and-nature-in-no</link>
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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 19:35:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्कूल चलो अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ, शिक्षा से जोड़ने का दिया गया संदेश।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज, ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए परिषदीय विद्यालयों में अधिकाधिक नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को कम्पोजिट विद्यालय नया कटरा द्वितीय में "स्कूल चलो अभियान" के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुरेंद्र चौधरी तथा विशिष्ट अतिथि मनीष कुमार वर्मा रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">एमएलसी सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि शिक्षा देश की प्रगति और समृद्धि का आधार है तथा आधुनिक सुविधाओं से युक्त परिषदीय विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बेहतर विकल्प बन चुके हैं। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि "स्कूल चलो अभियान" प्रत्येक बच्चे को शिक्षा से</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182490/inauguration-of-the-second-phase-of-the-school-chalo-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260701-wa0104.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज, ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए परिषदीय विद्यालयों में अधिकाधिक नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को कम्पोजिट विद्यालय नया कटरा द्वितीय में "स्कूल चलो अभियान" के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुरेंद्र चौधरी तथा विशिष्ट अतिथि मनीष कुमार वर्मा रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">एमएलसी सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि शिक्षा देश की प्रगति और समृद्धि का आधार है तथा आधुनिक सुविधाओं से युक्त परिषदीय विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बेहतर विकल्प बन चुके हैं। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि "स्कूल चलो अभियान" प्रत्येक बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का जनआंदोलन है और सभी से इसे सफल बनाने में सहयोग की अपील की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर और माला पहनाकर स्वागत किया गया। उन्हें निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकें व स्टेशनरी वितरित की गई। सर्वाधिक उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यार्थियों और प्रथम चरण में सर्वाधिक नामांकन कराने वाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने अभियान रैली एवं प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182490/inauguration-of-the-second-phase-of-the-school-chalo-campaign</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:43:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रात्रि चौपाल में उठी बेटियों की पढ़ाई की बात।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गाँवकी तरक्की तभी संभव है, जब वहाँ की बेटियाँ भी पढ़-लिखकर आगे बढ़ें। इसी सोच को मजबूत करने के लिए बालिका शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही संस्था एजुकेट गर्ल्स ने विकास खंड मिठौरा की ग्राम पंचायत दरहटा में रात्रि चौपाल का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य उन बच्चियों को शिक्षा से जोड़ना था, जो किसी कारण से स्कूल नहीं जा पा रही हैं या बीच में पढ़ाई छोड़ चुकी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शाम के समय आयोजित इस चौपाल में ग्रामीणों, अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181987/the-issue-of-daughters-education-was-raised-in-ratri-chaupal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260622-wa0083.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गाँवकी तरक्की तभी संभव है, जब वहाँ की बेटियाँ भी पढ़-लिखकर आगे बढ़ें। इसी सोच को मजबूत करने के लिए बालिका शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही संस्था एजुकेट गर्ल्स ने विकास खंड मिठौरा की ग्राम पंचायत दरहटा में रात्रि चौपाल का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य उन बच्चियों को शिक्षा से जोड़ना था, जो किसी कारण से स्कूल नहीं जा पा रही हैं या बीच में पढ़ाई छोड़ चुकी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शाम के समय आयोजित इस चौपाल में ग्रामीणों, अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान बेटियों की पढ़ाई के महत्व, नियमित स्कूल जाने की जरूरत और शिक्षा से मिलने वाले अवसरों पर खुलकर चर्चा की गई। लोगों को बताया गया कि एक शिक्षित बेटी न सिर्फ अपना भविष्य बेहतर बनाती है, बल्कि पूरे परिवार और समाज को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रेरणादायक वीडियो और फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया, जिससे बालिका शिक्षा का संदेश लोगों तक आसान और प्रभावी तरीके से पहुँचाया जा सके। ग्रामीणों ने भी अपने विचार साझा किए और गाँव की हर बच्ची को स्कूल भेजने में सहयोग का भरोसा दिलाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्राम प्रधान  प्रतिमा ने कहा, "एक पढ़ी-लिखी बेटी दो परिवारों को आगे बढ़ाने की ताकत रखती है। इसलिए बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देना हम सभी की जिम्मेदारी है।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एजुकेट गर्ल्स के डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर वेद प्रकाश यादव ने बताया कि रात्रि चौपाल के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचकर बालिका शिक्षा का संदेश देना आसान होता है। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि गाँव की कोई भी बेटी शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए सभी मिलकर प्रयास करेंगे।</div>
</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 18:59:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>परमाणु शक्ति संपन्न भारत में कब होगी बालिका शिक्षा शत-प्रतिशत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181062/when-will-girls-education-be-100-in-nuclear-power-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/4.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज में ऐसे कर्मचारियों का वर्ग तैयार करना था जो अंग्रेजी शासन के प्रशासनिक कार्यों को संचालित कर सके। आधुनिक विज्ञान और अंग्रेजी भाषा के प्रसार में इस शिक्षा प्रणाली का योगदान रहा, किंतु इसने भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक शिक्षा और कौशल आधारित शिक्षण को काफी हद तक हाशिए पर पहुंचा दिया। उस समय महिलाओं की शिक्षा लगभग नगण्य थी। समाज में बाल विवाह, पर्दा प्रथा और लैंगिक असमानता जैसी कुरीतियां लड़कियों की शिक्षा में बड़ी बाधा थीं।<br />समाज सुधारकों का योगदान</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">+<br />ऐसे कठिन समय में सावित्रीबाई फुले और महात्मा ज्योतिराव फुले ने बालिका शिक्षा की अलख जगाई। 1848 में उन्होंने लड़कियों के लिए पहला आधुनिक विद्यालय प्रारंभ किया।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने महिला शिक्षा और सामाजिक सुधारों को नई दिशा दी। बाद में महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना।<br />डॉ. अंबेडकर का प्रसिद्ध संदेश</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।"<br />स्वतंत्र भारत में शिक्षा का विकास</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की साक्षरता दर लगभग 18 प्रतिशत थी। महिलाओं की साक्षरता तो 10 प्रतिशत से भी कम थी। संविधान निर्माताओं ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार माना।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />समय-समय पर कोठारी आयोग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968, 1986, सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा नई शिक्षा नीति 2020 जैसे प्रयास किए गए। इन प्रयासों से शिक्षा का दायरा बढ़ा और लड़कियों की विद्यालयों तक पहुंच बेहतर हुई।.आज भारत की साक्षरता दर 77 प्रतिशत के आसपास पहुंच चुकी है, जबकि महिला साक्षरता दर 70 प्रतिशत से अधिक है। यह प्रगति उत्साहजनक है, किंतु अभी भी पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता में अंतर बना हुआ है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व के सर्वाधिक शिक्षित देशों से सीख<br />विश्व में फिनलैंड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जापान और नॉर्वे जैसे देशों की शिक्षा व्यवस्था विश्व में आदर्श मानी जाती है। फिनलैंड की शिक्षा व्यवस्था</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />फिनलैंड में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन कौशल विकसित करना है। वहां बच्चों पर अनावश्यक परीक्षा का दबाव नहीं होता। शिक्षकों को अत्यंत सम्मान और स्वायत्तता प्राप्त है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> बालिका और बालक के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। सिंगापुर ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा साधन बनाया। वहां विज्ञान, गणित, तकनीक और कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता है। शिक्षा को उद्योगों और रोजगार से जोड़ा गया है।<br />जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में अनुशासन, नैतिकता, समयबद्धता और तकनीकी दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। परिणामस्वरूप ये देश सीमित प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद आर्थिक महाशक्ति बन गए।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत में प्रतिभा की कोई कमी कभी भी नहीं रही है, किंतु शिक्षा व्यवस्था अभी भी परीक्षा-केंद्रित बनी हुई है। रटंत प्रणाली, विद्यालयों की असमान गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों का अभाव आज भी चुनौतियां हैं।नई शिक्षा नीति 2020 ने इन समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें मातृभाषा आधारित शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षण और बहुविषयक अध्ययन पर बल दिया गया है। किंतु इसके वास्तविक लाभ तभी मिलेंगे जब इसका प्रभावी क्रियान्वयन हो। बालिका शिक्षा का सत प्रतिशत होना इसलिए भी आवश्यक है कि शिक्षित बेटी, समृद्ध परिवार</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />एक शिक्षित महिला अपने परिवार को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कार प्रदान करती है। वह अगली पीढ़ी की प्रथम शिक्षिका होती है।सामाजिक कुरीतियों का अंत भी।बाल विवाह, दहेज प्रथा, लैंगिक भेदभाव और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं को समाप्त करने में शिक्षा सबसे प्रभावी साधन है</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व बैंक सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का मानना है कि महिलाओं की शिक्षा में निवेश किसी भी देश के आर्थिक विकास को तीव्र गति देता है। यदि भारत की प्रत्येक बेटी शिक्षित होगी तो देश की उत्पादकता और आर्थिक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />शिक्षित महिलाएं स्वास्थ्य, पोषण और परिवार नियोजन के प्रति अधिक जागरूक होती हैं। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आती है।<br />आज महिलाएं विज्ञान, अंतरिक्ष, प्रशासन, राजनीति, सेना और उद्यमिता के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। शिक्षा उन्हें नेतृत्व और नवाचार की शक्ति प्रदान करती है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />महापुरुषों की दृष्टि में नारी शिक्षा<br />स्वामी विवेकानंद ने कहा</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"राष्ट्र की प्रगति का सबसे अच्छा मापदंड वहां की महिलाओं की स्थिति है।"डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का मत था कि<br />"महिलाओं का सशक्तिकरण और शिक्षा किसी राष्ट्र के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है।"पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था<br />"एक महिला को शिक्षित करना एक पीढ़ी को शिक्षित करना है।"</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />इक्कीसवीं सदी ज्ञान, विज्ञान और नवाचार की सदी है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की प्रत्येक बेटी शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगी। शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं है; यह सामाजिक चेतना, आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय विकास का आधार है। मैकाले की शिक्षा प्रणाली से लेकर नई शिक्षा नीति तक भारत ने लंबी यात्रा तय की है, किंतु अभी मंजिल दूर है। यदि सरकार, समाज, परिवार और शैक्षणिक संस्थान मिलकर बालिका शिक्षा को शत-प्रतिशत अनिवार्य बनाने का संकल्प लें, तो भारत न केवल विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति बनेगा, बल्कि सबसे विकसित और ज्ञानवान राष्ट्रों की अग्रिम पंक्ति में भी खड़ा होगा।<br />क्योंकि किसी राष्ट्र का भविष्य उसके विद्यालयों में नहीं, बल्कि उसकी शिक्षित बेटियों की आंखों में स्वप्न बनकर पलता है।<br /><br />संजीव ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिंतक, स्तंभकार, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,<div>कविता,</div><div>संजीव-नी।<br />शिक्षा का कवच।<br /><br />शिक्षा का कवच।<br />कुछ देना ही तो आइये,<br />नन्हीं बालिकाओं को<br />स्वर्ण के गहने नहीं,<br />शिक्षा का कवच दें।<br />उनकी हथेलियों में<br />रोटी के साथ-साथ<br />कुछ अक्षर भी रख दें,<br />जो भूख से जुझतीं<br />उन्हें ज्ञान की कुंजी दें<br />अँधेरे बंद कमरों में<br />रोशन-दान बनती,<br />ज्ञान की रोशनी के लिए<br />बंद रास्तों पर<br />एक नया आकाश फैला देती,<br />उनकी आँखों में<br />सिर्फ़ स्वप्न ना रखें ,<br />उन तक पहुँचने के पंख भी दें।<br />उन्हें ज्ञान दें कि<br />अपने हिस्से की धूप<br />खुद चुन सकें।<br />किताबें जब उनके हांथों में होंगी,<br />तो सदियों के कई बोझ<br />आप उतर जाएँगे।<br />कलम उँगलियों से चलेंगीं<br />तक़दीर की कविता भी<br />लिखी जाएगी।<br />शिक्षित बालिका<br />अपना जीवन ही नहीं संवारती,<br />आने वाली पीढ़ियों के लिए<br />उजला दीप बन जाती।<br />आइये,<br />बेटी को शिक्षा का रक्षा-कवच दें,<br />ताकि वह<br />अपने सपनों, अपने अधिकारों<br />अपने अस्तित्व की रक्षा<br />स्वयं कर सके।<br /><br />संजीव ठाकुर, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:57:59 +0530</pubDate>
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