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                <title>Girl Education - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Girl Education RSS Feed</description>
                
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                <title>जिलाधिकारी ने मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल में मनाया कन्या जन्मोत्सव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा।</strong> जनपद में बेटियों के सम्मान एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के प्रति सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज गोण्डा के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के प्रसव विंग एवं वार्ड में एक भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  ग्राम बेसिया चैन निवासी श्रीमती पूनम देवी, पत्नी श्री दिनेश कुमार, के प्रसव के शुभ अवसर पर जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन स्वयं अस्पताल पहुंचीं और परिवारजनों के साथ मिलकर केक काटकर कन्या जन्मोत्सव मनाया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिलाधिकारी ने नवजात कन्या के जन्म पर परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि बेटियां परिवार, समाज और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183206/district-magistrate-celebrated-girls-birth-anniversary-in-medical-college-district"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1007877399.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा।</strong> जनपद में बेटियों के सम्मान एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के प्रति सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज गोण्डा के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के प्रसव विंग एवं वार्ड में एक भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  ग्राम बेसिया चैन निवासी श्रीमती पूनम देवी, पत्नी श्री दिनेश कुमार, के प्रसव के शुभ अवसर पर जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन स्वयं अस्पताल पहुंचीं और परिवारजनों के साथ मिलकर केक काटकर कन्या जन्मोत्सव मनाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिलाधिकारी ने नवजात कन्या के जन्म पर परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि बेटियां परिवार, समाज और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों को समान अवसर, बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने परिवारजनों से नवजात बच्ची के बेहतर पालन-पोषण एवं शिक्षा के लिए संकल्पित रहने का आह्वान किया।कार्यक्रम के दौरान परिवारजनों के आग्रह पर जिलाधिकारी ने नवजात कन्या का नाम 'अनुग्रहिता' रखा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह नाम सुनकर परिवारजनों ने प्रसन्नता व्यक्त की और जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने नवजात शिशु के लिए शुभकामना स्वरूप चांदी की कटोरी एवं चम्मच भेंट की। साथ ही बच्ची की माता श्रीमती पूनम देवी को सहायता राशि भी प्रदान की, जिससे परिवार के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता एवं सहयोग की भावना का परिचय मिला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कन्या जन्मोत्सव के दौरान अस्पताल परिसर में उत्साह एवं हर्ष का वातावरण रहा। उपस्थित चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों तथा अधिकारियों ने भी परिवार को शुभकामनाएं दीं और नवजात के स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' तथा कन्या सम्मान की भावना को और अधिक सशक्त बनाने का संदेश दिया।सभी ने नवजात कन्या के जन्म पर परिवार को बधाई देते हुए बेटियों के सम्मान और उनके सर्वांगीण विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह आयोजन समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने तथा कन्या जन्म को उत्सव के रूप में मनाने की प्रेरणा देने वाला रहा। इस अवसर पर प्राचार्य मेडिकल कॉलेज, सीएमएस जिला अस्पताल डॉ. अनिल तिवारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी गौरव मिश्र सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:19:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रात्रि चौपाल में उठी बेटियों की पढ़ाई की बात।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गाँवकी तरक्की तभी संभव है, जब वहाँ की बेटियाँ भी पढ़-लिखकर आगे बढ़ें। इसी सोच को मजबूत करने के लिए बालिका शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही संस्था एजुकेट गर्ल्स ने विकास खंड मिठौरा की ग्राम पंचायत दरहटा में रात्रि चौपाल का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य उन बच्चियों को शिक्षा से जोड़ना था, जो किसी कारण से स्कूल नहीं जा पा रही हैं या बीच में पढ़ाई छोड़ चुकी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शाम के समय आयोजित इस चौपाल में ग्रामीणों, अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181987/the-issue-of-daughters-education-was-raised-in-ratri-chaupal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260622-wa0083.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गाँवकी तरक्की तभी संभव है, जब वहाँ की बेटियाँ भी पढ़-लिखकर आगे बढ़ें। इसी सोच को मजबूत करने के लिए बालिका शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही संस्था एजुकेट गर्ल्स ने विकास खंड मिठौरा की ग्राम पंचायत दरहटा में रात्रि चौपाल का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य उन बच्चियों को शिक्षा से जोड़ना था, जो किसी कारण से स्कूल नहीं जा पा रही हैं या बीच में पढ़ाई छोड़ चुकी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शाम के समय आयोजित इस चौपाल में ग्रामीणों, अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान बेटियों की पढ़ाई के महत्व, नियमित स्कूल जाने की जरूरत और शिक्षा से मिलने वाले अवसरों पर खुलकर चर्चा की गई। लोगों को बताया गया कि एक शिक्षित बेटी न सिर्फ अपना भविष्य बेहतर बनाती है, बल्कि पूरे परिवार और समाज को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रेरणादायक वीडियो और फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया, जिससे बालिका शिक्षा का संदेश लोगों तक आसान और प्रभावी तरीके से पहुँचाया जा सके। ग्रामीणों ने भी अपने विचार साझा किए और गाँव की हर बच्ची को स्कूल भेजने में सहयोग का भरोसा दिलाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्राम प्रधान  प्रतिमा ने कहा, "एक पढ़ी-लिखी बेटी दो परिवारों को आगे बढ़ाने की ताकत रखती है। इसलिए बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देना हम सभी की जिम्मेदारी है।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एजुकेट गर्ल्स के डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर वेद प्रकाश यादव ने बताया कि रात्रि चौपाल के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचकर बालिका शिक्षा का संदेश देना आसान होता है। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि गाँव की कोई भी बेटी शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए सभी मिलकर प्रयास करेंगे।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 18:59:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परमाणु शक्ति संपन्न भारत में कब होगी बालिका शिक्षा शत-प्रतिशत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181062/when-will-girls-education-be-100-in-nuclear-power-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/4.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज में ऐसे कर्मचारियों का वर्ग तैयार करना था जो अंग्रेजी शासन के प्रशासनिक कार्यों को संचालित कर सके। आधुनिक विज्ञान और अंग्रेजी भाषा के प्रसार में इस शिक्षा प्रणाली का योगदान रहा, किंतु इसने भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक शिक्षा और कौशल आधारित शिक्षण को काफी हद तक हाशिए पर पहुंचा दिया। उस समय महिलाओं की शिक्षा लगभग नगण्य थी। समाज में बाल विवाह, पर्दा प्रथा और लैंगिक असमानता जैसी कुरीतियां लड़कियों की शिक्षा में बड़ी बाधा थीं।<br />समाज सुधारकों का योगदान</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">+<br />ऐसे कठिन समय में सावित्रीबाई फुले और महात्मा ज्योतिराव फुले ने बालिका शिक्षा की अलख जगाई। 1848 में उन्होंने लड़कियों के लिए पहला आधुनिक विद्यालय प्रारंभ किया।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने महिला शिक्षा और सामाजिक सुधारों को नई दिशा दी। बाद में महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना।<br />डॉ. अंबेडकर का प्रसिद्ध संदेश</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।"<br />स्वतंत्र भारत में शिक्षा का विकास</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की साक्षरता दर लगभग 18 प्रतिशत थी। महिलाओं की साक्षरता तो 10 प्रतिशत से भी कम थी। संविधान निर्माताओं ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार माना।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />समय-समय पर कोठारी आयोग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968, 1986, सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा नई शिक्षा नीति 2020 जैसे प्रयास किए गए। इन प्रयासों से शिक्षा का दायरा बढ़ा और लड़कियों की विद्यालयों तक पहुंच बेहतर हुई।.आज भारत की साक्षरता दर 77 प्रतिशत के आसपास पहुंच चुकी है, जबकि महिला साक्षरता दर 70 प्रतिशत से अधिक है। यह प्रगति उत्साहजनक है, किंतु अभी भी पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता में अंतर बना हुआ है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व के सर्वाधिक शिक्षित देशों से सीख<br />विश्व में फिनलैंड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जापान और नॉर्वे जैसे देशों की शिक्षा व्यवस्था विश्व में आदर्श मानी जाती है। फिनलैंड की शिक्षा व्यवस्था</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />फिनलैंड में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन कौशल विकसित करना है। वहां बच्चों पर अनावश्यक परीक्षा का दबाव नहीं होता। शिक्षकों को अत्यंत सम्मान और स्वायत्तता प्राप्त है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> बालिका और बालक के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। सिंगापुर ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा साधन बनाया। वहां विज्ञान, गणित, तकनीक और कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता है। शिक्षा को उद्योगों और रोजगार से जोड़ा गया है।<br />जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में अनुशासन, नैतिकता, समयबद्धता और तकनीकी दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। परिणामस्वरूप ये देश सीमित प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद आर्थिक महाशक्ति बन गए।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत में प्रतिभा की कोई कमी कभी भी नहीं रही है, किंतु शिक्षा व्यवस्था अभी भी परीक्षा-केंद्रित बनी हुई है। रटंत प्रणाली, विद्यालयों की असमान गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों का अभाव आज भी चुनौतियां हैं।नई शिक्षा नीति 2020 ने इन समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें मातृभाषा आधारित शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षण और बहुविषयक अध्ययन पर बल दिया गया है। किंतु इसके वास्तविक लाभ तभी मिलेंगे जब इसका प्रभावी क्रियान्वयन हो। बालिका शिक्षा का सत प्रतिशत होना इसलिए भी आवश्यक है कि शिक्षित बेटी, समृद्ध परिवार</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />एक शिक्षित महिला अपने परिवार को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कार प्रदान करती है। वह अगली पीढ़ी की प्रथम शिक्षिका होती है।सामाजिक कुरीतियों का अंत भी।बाल विवाह, दहेज प्रथा, लैंगिक भेदभाव और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं को समाप्त करने में शिक्षा सबसे प्रभावी साधन है</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व बैंक सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का मानना है कि महिलाओं की शिक्षा में निवेश किसी भी देश के आर्थिक विकास को तीव्र गति देता है। यदि भारत की प्रत्येक बेटी शिक्षित होगी तो देश की उत्पादकता और आर्थिक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />शिक्षित महिलाएं स्वास्थ्य, पोषण और परिवार नियोजन के प्रति अधिक जागरूक होती हैं। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आती है।<br />आज महिलाएं विज्ञान, अंतरिक्ष, प्रशासन, राजनीति, सेना और उद्यमिता के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। शिक्षा उन्हें नेतृत्व और नवाचार की शक्ति प्रदान करती है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />महापुरुषों की दृष्टि में नारी शिक्षा<br />स्वामी विवेकानंद ने कहा</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"राष्ट्र की प्रगति का सबसे अच्छा मापदंड वहां की महिलाओं की स्थिति है।"डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का मत था कि<br />"महिलाओं का सशक्तिकरण और शिक्षा किसी राष्ट्र के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है।"पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था<br />"एक महिला को शिक्षित करना एक पीढ़ी को शिक्षित करना है।"</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />इक्कीसवीं सदी ज्ञान, विज्ञान और नवाचार की सदी है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की प्रत्येक बेटी शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगी। शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं है; यह सामाजिक चेतना, आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय विकास का आधार है। मैकाले की शिक्षा प्रणाली से लेकर नई शिक्षा नीति तक भारत ने लंबी यात्रा तय की है, किंतु अभी मंजिल दूर है। यदि सरकार, समाज, परिवार और शैक्षणिक संस्थान मिलकर बालिका शिक्षा को शत-प्रतिशत अनिवार्य बनाने का संकल्प लें, तो भारत न केवल विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति बनेगा, बल्कि सबसे विकसित और ज्ञानवान राष्ट्रों की अग्रिम पंक्ति में भी खड़ा होगा।<br />क्योंकि किसी राष्ट्र का भविष्य उसके विद्यालयों में नहीं, बल्कि उसकी शिक्षित बेटियों की आंखों में स्वप्न बनकर पलता है।<br /><br />संजीव ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिंतक, स्तंभकार, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,<div>कविता,</div><div>संजीव-नी।<br />शिक्षा का कवच।<br /><br />शिक्षा का कवच।<br />कुछ देना ही तो आइये,<br />नन्हीं बालिकाओं को<br />स्वर्ण के गहने नहीं,<br />शिक्षा का कवच दें।<br />उनकी हथेलियों में<br />रोटी के साथ-साथ<br />कुछ अक्षर भी रख दें,<br />जो भूख से जुझतीं<br />उन्हें ज्ञान की कुंजी दें<br />अँधेरे बंद कमरों में<br />रोशन-दान बनती,<br />ज्ञान की रोशनी के लिए<br />बंद रास्तों पर<br />एक नया आकाश फैला देती,<br />उनकी आँखों में<br />सिर्फ़ स्वप्न ना रखें ,<br />उन तक पहुँचने के पंख भी दें।<br />उन्हें ज्ञान दें कि<br />अपने हिस्से की धूप<br />खुद चुन सकें।<br />किताबें जब उनके हांथों में होंगी,<br />तो सदियों के कई बोझ<br />आप उतर जाएँगे।<br />कलम उँगलियों से चलेंगीं<br />तक़दीर की कविता भी<br />लिखी जाएगी।<br />शिक्षित बालिका<br />अपना जीवन ही नहीं संवारती,<br />आने वाली पीढ़ियों के लिए<br />उजला दीप बन जाती।<br />आइये,<br />बेटी को शिक्षा का रक्षा-कवच दें,<br />ताकि वह<br />अपने सपनों, अपने अधिकारों<br />अपने अस्तित्व की रक्षा<br />स्वयं कर सके।<br /><br />संजीव ठाकुर, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq 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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:57:59 +0530</pubDate>
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