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                <title>Community Support - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>श्रीभूमि जिले के सोनबील दरगारबंद में डिजिटल क्रिएटर ग्रुप ने कराया सुजय दास का अंतिम संस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि- </strong>कहते हैं कि इंसानियत की असली पहचान कठिन समय में होती है। जब किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देना भी मुश्किल हो जाए, तब मदद के लिए बढ़ा एक हाथ मानवता की सबसे बड़ी मिसाल बन जाता है। श्रीभूमि जिले के सोनबील दरगारबंद में ऐसी ही एक घटना सामने आई, जहां आर्थिक संकट से जूझ रहे एक परिवार की मदद के लिए सनबिल डिजिटल क्रिएटर ग्रुप के सदस्य आगे आए। श्रीभूमि जिले के सोनबील दरगारबंद निवासी सुजय दास लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के बाद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183798/digital-creator-group-performed-the-last-rites-of-sujay-das"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1001635293.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि- </strong>कहते हैं कि इंसानियत की असली पहचान कठिन समय में होती है। जब किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देना भी मुश्किल हो जाए, तब मदद के लिए बढ़ा एक हाथ मानवता की सबसे बड़ी मिसाल बन जाता है। श्रीभूमि जिले के सोनबील दरगारबंद में ऐसी ही एक घटना सामने आई, जहां आर्थिक संकट से जूझ रहे एक परिवार की मदद के लिए सनबिल डिजिटल क्रिएटर ग्रुप के सदस्य आगे आए। श्रीभूमि जिले के सोनबील दरगारबंद निवासी सुजय दास लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के बाद वह काफी समय से बिस्तर पर थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने जीवन के संघर्ष को जारी रखा। लेकिन आखिरकार गत 16 जुलाई की शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। सुजय दास के निधन के बाद परिवार के सामने एक नई परेशानी खड़ी हो गई। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना संभव नहीं हो पा रहा था। परिजनों के अनुसार, सहायता के लिए कई जगहों पर संपर्क किया गया, लेकिन समय पर कोई प्रभावी सहयोग नहीं मिल सका।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कारण उनका पार्थिव शरीर रातभर घर में ही रखा रहा। इसी दौरान सुजय दास की पुत्री की सहायता की अपील सोनबील डिजिटल क्रिएटर ग्रुप के सदस्यों तक पहुंची। सूचना मिलते ही ग्रुप के सदस्य और कुछ स्थानीय संवेदनशील लोग तुरंत परिवार के पास पहुंचे और अंतिम संस्कार की व्यवस्था में जुट गए। ग्रुप के सदस्यों ने आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराते हुए सुजय दास को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि इस घटना ने समाज के सामने एक गंभीर सवाल भी खड़ा किया। जहां कुछ लोगों ने आगे बढ़कर मानवता का परिचय दिया, वहीं दूसरी ओर यह भी देखने को मिला कि इस कठिन समय में गांव के अधिकांश लोग परिवार की सहायता के लिए आगे नहीं आए। केवल कुछ वरिष्ठ नागरिकों और संवेदनशील लोगों ने ही परिवार का साथ दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में जब सामाजिक संवेदनाएं कमजोर होती दिखाई दे रही हैं, ऐसे प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोनबील डिजिटल क्रिएटर ग्रुप की पहल ने यह साबित किया कि सोशल मीडिया केवल सूचना प्रसार का माध्यम नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता का प्रभावी जरिया भी बन सकता है। किसी व्यक्ति को मृत्यु के बाद सम्मानजनक विदाई मिलना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक जिम्मेदारी है। दरगारबंद की यह घटना हमें मानवता, सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व याद दिलाती है।“मानवता की खूबसूरती तब और बढ़ जाती है, जब कोई व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के किसी असहाय के साथ खड़ा होता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 21:46:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>श्रीभूमि की शिक्षिका संगीता नाथ बर्धन कैंसर की चौथी स्टेज में भी नहीं रुका शिक्षण कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि </strong>: कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लंबे समय से संघर्ष करने के बावजूद अपने कर्तव्य से एक पल के लिए भी पीछे नहीं हटीं असम श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर क्षेत्र स्थित 1155 नंबर फनाई-बागान हरिजन एल.पी. स्कूल की शिक्षिका संगीता नाथ बर्धन। कैंसर की चौथी स्टेज से पीड़ित होने के बाद भी नियमित उपचार और कीमोथेरेपी की शारीरिक पीड़ा सहते हुए वह विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य निरंतर जारी रखे हुए हैं। उनकी अदम्य इच्छाशक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और शिक्षा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता की शिक्षक समाज के साथ-साथ आम लोगों ने भी सराहना की है। शारीरिक कष्ट और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183455/sribhoomis-teacher-sangeeta-nath-bardhan-did-not-stop-her-teaching"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1001622263-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि </strong>: कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लंबे समय से संघर्ष करने के बावजूद अपने कर्तव्य से एक पल के लिए भी पीछे नहीं हटीं असम श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर क्षेत्र स्थित 1155 नंबर फनाई-बागान हरिजन एल.पी. स्कूल की शिक्षिका संगीता नाथ बर्धन। कैंसर की चौथी स्टेज से पीड़ित होने के बाद भी नियमित उपचार और कीमोथेरेपी की शारीरिक पीड़ा सहते हुए वह विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य निरंतर जारी रखे हुए हैं। उनकी अदम्य इच्छाशक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और शिक्षा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता की शिक्षक समाज के साथ-साथ आम लोगों ने भी सराहना की है। शारीरिक कष्ट और अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के प्रति उनका समर्पण एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिवार सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से उनका इलाज चल रहा है। लंबे समय तक चले उपचार के कारण परिवार की लगभग पूरी जमा पूंजी समाप्त हो चुकी है। चिकित्सा खर्च वहन करने के लिए बैंक से ऋण भी लेना पड़ा है। वर्तमान में हर महीने लगभग 95 हजार रुपये की ऋण किस्त के साथ-साथ इलाज का भारी खर्च उठाना परिवार के लिए बेहद कठिन हो गया है। हाल ही में यह मामला समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए सामने आने के बाद रामकृष्णनगर क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक विजय मालाकार शिक्षिका के आवास पर पहुंचे और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा आर्थिक सहायता प्रदान की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा उन्होंने असम सरकार के मंत्री कौशिक राय और कृष्णेंदु पाल से भी इस विषय पर चर्चा की। दोनों ने शिक्षिका के बेहतर इलाज के लिए व्यक्तिगत रूप से आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। बताया गया है कि इस मामले को असम के लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के संज्ञान में भी लाया गया है। सरकारी स्तर से भी संभावित सहायता का भरोसा दिया गया है। हालांकि बेहतर और उन्नत उपचार के लिए अभी भी बड़ी आर्थिक आवश्यकता है। ऐसे में शिक्षिका संगीता नाथ बर्धन के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए उनके परिवार, सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने समाज के सभी वर्गों के लोगों से मानवीय सहयोग की अपील की है। एक समर्पित शिक्षिका के जीवन संघर्ष में साथ खड़े होकर अपनी क्षमता के अनुसार सहायता का हाथ बढ़ाने के लिए सभी संवेदनशील लोगों से आगे आने का आह्वान किया गया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 22:22:19 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रायगढ़ हादसे के पीड़ित परिवार को त्रिशक्ति परिवार ने दी 51 हजार की आर्थिक सहायता</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़। </strong>पट्टी तहसील क्षेत्र के रायगढ़ गांव में हाल ही में हुई हृदयविदारक घटना के बाद पीड़ित चतुर्वेदी परिवार को ढांढस बंधाने और मदद करने के लिए सामाजिक संगठन लगातार आगे आ रहे हैं। इसी क्रम में त्रिशक्ति परिवार ने पीड़ित परिवार से भेंटकर उन्हें 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की और भविष्य में भी हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।त्रिशक्ति परिवार के संस्थापक डॉ. राम कल्प उपाध्याय के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल रायगढ़ गांव पहुंचा। पदाधिकारियों ने शोक संतप्त छः असहाय संतानों के परिवार से मिलकर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">माता पिता की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183453/trishakti-family-gave-financial-assistance-of-rs-51-thousand-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260715-wa0111(1)-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़। </strong>पट्टी तहसील क्षेत्र के रायगढ़ गांव में हाल ही में हुई हृदयविदारक घटना के बाद पीड़ित चतुर्वेदी परिवार को ढांढस बंधाने और मदद करने के लिए सामाजिक संगठन लगातार आगे आ रहे हैं। इसी क्रम में त्रिशक्ति परिवार ने पीड़ित परिवार से भेंटकर उन्हें 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की और भविष्य में भी हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।त्रिशक्ति परिवार के संस्थापक डॉ. राम कल्प उपाध्याय के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल रायगढ़ गांव पहुंचा। पदाधिकारियों ने शोक संतप्त छः असहाय संतानों के परिवार से मिलकर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">माता पिता की दर्दनाक मौत होने से इन बच्चों के सर पर से मां बाप की छाया उठ गई है।इस दौरान डॉ. उपाध्याय ने पीड़ित परिवार की बेटी रत्ना चतुर्वेदी को सहायता राशि के रूप में 51 हजार रुपये की चेक प्रदान किया। पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए डॉ. राम कल्प उपाध्याय ने कहा कि संकट की इस घड़ी में त्रिशक्ति परिवार पीड़ित चतुर्वेदी परिवार के साथ पूरी तन्मयता से खड़ा है। संगठन भविष्य में भी इस परिवार की हरसंभव मदद करता रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पट्टी इकाई के अध्यक्ष व अधिवक्ता नंदन चतुर्वेदी ने त्रिशक्ति परिवार के इस मानवीय कदम की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।इस दौरान जिला अध्यक्ष सूर्यमणि पाठक, सुल्तानपुर जिला अध्यक्ष कौशलेंद्र पाठक, वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र पाठक, डॉ. महेश नारायण पाठक, चुन्नी पाठक और राम सजीवन सहित संगठन के कई पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 22:20:18 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वीर शहीद नरेंद्र कुमार यादव के परिवार के साथ खड़े हुए दिया 50 हजार का सहयोग।मनीष मिश्रा,</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के यशस्वी गरीबों मसीहा समाजसेवी मनीष मिश्रा ने देश के वीर सपूत अमर शहीद स्वर्गीय नरेंद्र कुमार यादव के पैतृक गांव अहरा मुंडेरवा पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर कभी नहीं मरते, बल्कि वे प्रत्येक भारतीय के हृदय में सदैव अमर रहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मनीष भैया ने कहा कि शहीदों का बलिदान शब्दों से कहीं अधिक महान होता है। ऐसे वीर सपूतों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब समाज उनके</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182926/standing-with-the-family-of-brave-martyr-narendra-kumar-yadav"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260708-wa0029.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के यशस्वी गरीबों मसीहा समाजसेवी मनीष मिश्रा ने देश के वीर सपूत अमर शहीद स्वर्गीय नरेंद्र कुमार यादव के पैतृक गांव अहरा मुंडेरवा पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर कभी नहीं मरते, बल्कि वे प्रत्येक भारतीय के हृदय में सदैव अमर रहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मनीष भैया ने कहा कि शहीदों का बलिदान शब्दों से कहीं अधिक महान होता है। ऐसे वीर सपूतों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब समाज उनके परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और सहयोग के लिए आगे आए। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर जवानों के कारण ही हम सभी सुरक्षित हैं और उनका ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शहीद के परिवार से मुलाकात के दौरान मनीष भैया ने ₹50,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी संस्था "पहल" के माध्यम से परिवार के एक सदस्य को नौकरी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, ताकि परिवार को आत्मनिर्भर बनने में सहयोग मिल सके।उन्होंने शहीद परिवार के लिए पक्का मकान बनवाने  का वादा भी किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मनीष भैया ने कहा कि वह ऐसा घर बनवाना चाहते हैं जिसकी हर ईंट देश के वीर सपूत के अमर बलिदान की गाथा सुनाए और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा दे।मनीष भैया ने यह भी कहा कि यह केवल एक औपचारिक सहायता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य निभाने का प्रयास है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि शहीद के परिवार की हर संभव सहायता भविष्य में भी की जाएगी और परिवार को किसी भी आवश्यकता के समय अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "यह कोई एहसान नहीं, बल्कि उस तिरंगे का सम्मान है, जिसके लिए हमारे वीर जवान अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि मुझे इतना सामर्थ्य दें कि मैं अपने सभी संकल्प पूरे कर सकूं। यही उस अमर शहीद के प्रति मेरी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंत में मनीष भैया ने अमर शहीद स्वर्गीय नरेंद्र कुमार यादव को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि देश सदैव अपने वीरों का ऋणी रहेगा और प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह शहीदों के परिवारों के सम्मान और सहयोग के लिए आगे आए।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 18:10:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साहू कल्याण समिति परमार्थ सेवा ट्रस्ट ने पीड़ित परिवार को 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात। </strong></div>
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<div><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div>
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<div>  साहू समाज के एक ही परिवार के तीन सदस्यों की निर्मम हत्या की घटना के बाद से साहू कल्याण समिति परमार्थ सेवा ट्रस्ट लगातार पीड़ित परिवार के साथ दुख की इस घड़ी में मजबूती से खड़ा है। इसी क्रम में समिति के पदाधिकारियों, संरक्षकों एवं सम्मानित सदस्यों के सहयोग से पीड़ित परिवार को 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।</div>
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<div>इस अवसर पर समिति की ओर से पीड़ित परिवार को आश्वस्त किया गया कि न्याय मिलने तक समिति हर स्तर पर उनके साथ खड़ी रहेगी और हर प्रकार की लड़ाई लड़ने में सहयोग करती</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182061/6a3bc009c2df7"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260624-wa0115.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात। </strong></div>
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<div><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div>
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<div> साहू समाज के एक ही परिवार के तीन सदस्यों की निर्मम हत्या की घटना के बाद से साहू कल्याण समिति परमार्थ सेवा ट्रस्ट लगातार पीड़ित परिवार के साथ दुख की इस घड़ी में मजबूती से खड़ा है। इसी क्रम में समिति के पदाधिकारियों, संरक्षकों एवं सम्मानित सदस्यों के सहयोग से पीड़ित परिवार को 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।</div>
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<div>इस अवसर पर समिति की ओर से पीड़ित परिवार को आश्वस्त किया गया कि न्याय मिलने तक समिति हर स्तर पर उनके साथ खड़ी रहेगी और हर प्रकार की लड़ाई लड़ने में सहयोग करती रहेगी।समिति के अध्यक्ष रविन्द्र गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में संरक्षक लाल बहादुर साहू, ओम प्रकाश साहू, अमृत लाल साहू, के.पी. गुप्ता, दया शंकर साहू, उमा शंकर साहू, सत्यनारायण साहू, डी.डी. गुप्ता और फूलचंद साहू उपस्थित रहे।इसके अलावा समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य अजीत साहू, सुधीर गुप्ता, श्यामदेव गुप्ता, प्रेमचंद साहू, धीरज साहू, हरिश्चंद्र गुप्ता, दीपचंद साहू, रोहित साहू, अमित साहू, विशाल साहू और नीलाभ गुप्ता भी मौजूद रहे।सभी उपस्थित सदस्यों ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए आगे भी हरसंभव सहायता जारी रखने का संकल्प लिया तथा दोषियों को कड़ी सजा दिलाने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने का भरोसा जताया।</div>
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                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 14:45:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सराहनीय पहल : जिलाधिकारी ने दिव्यांग व्यक्ति को मौके पर ही दिलाई ट्राईसाइकिल</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा।</strong> जनपद के कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनता दर्शन जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान संवेदनशील एवं सराहनीय पहल देखने को मिली। जनसुनवाई के क्रम में दिव्यांग शिकायतकर्ता अनमोल पुत्र अयोध्या प्रसाद, निवासी ग्राम रुदौलिया करनैलगंज, गोण्डा ने अपनी समस्या को लेकर उपस्थित हुए। उनकी स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अपने कार्यालय कक्ष से बाहर आकर उनकी बातों को गंभीरता एवं भावपूर्ण ढंग से सुना।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अनमोल ने अपनी दैनिक जीवन की कठिनाइयों को साझा करते हुए आवागमन में आ रही समस्याओं से अवगत कराया। जिलाधिकारी ने तत्काल मामले की गंभीरता को समझते हुए</div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181557/commendable-initiative-the-district-magistrate-provided-a-tricycle-to-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1007774001.jpg" alt=""></a><br /><div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा।</strong> जनपद के कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनता दर्शन जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान संवेदनशील एवं सराहनीय पहल देखने को मिली। जनसुनवाई के क्रम में दिव्यांग शिकायतकर्ता अनमोल पुत्र अयोध्या प्रसाद, निवासी ग्राम रुदौलिया करनैलगंज, गोण्डा ने अपनी समस्या को लेकर उपस्थित हुए। उनकी स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अपने कार्यालय कक्ष से बाहर आकर उनकी बातों को गंभीरता एवं भावपूर्ण ढंग से सुना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अनमोल ने अपनी दैनिक जीवन की कठिनाइयों को साझा करते हुए आवागमन में आ रही समस्याओं से अवगत कराया। जिलाधिकारी ने तत्काल मामले की गंभीरता को समझते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों से मौके पर ही वार्ता की और आवश्यक निर्देश दिए। उनकी तत्परता और सकारात्मक पहल के परिणामस्वरूप कलेक्ट्रेट परिसर में ही दिव्यांगजन को ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई गई। साथ ही उपरोक्त व्यक्ति को दिव्यांग पेंशन व अन्य योजनाओं का लाभ शीघ्रातिशीघ्र दिलाने के निर्देश दिये हैं ।इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने जिलाधिकारी की इस संवेदनशीलता एवं त्वरित कार्यवाही की सराहना की। यह पहल न केवल प्रशासन की जवाबदेही को दर्शाती है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के प्रति सहानुभूति और सहयोग की भावना को भी मजबूत करती है।जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि हर जरूरतमंद व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि दिव्यांगजन एवं अन्य पात्र लाभार्थियों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित किया जाए।मौके पर अपर उपजिलाधिकारी विशाल कुमार, वसीम अहमद दिव्यांग विभाग उपस्थित रहे।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:38:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनोरमा जनजागृति यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, नदी संरक्षण हेतु प्रदेश की सबसे बड़ी एवं लंबी जनजागरण यात्रा </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में मनोरमा नदी को स्वच्छ, अविरल एवं अतिक्रमण मुक्त बनाने की मांग को लेकर आयोजित "मनोरमा जनजागृति यात्रा" रविवार को जनसमर्थन के अभूतपूर्व उत्साह के बीच संपन्न हुई। यात्रा का नेतृत्व वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’ ने किया। मखौड़ा धाम से प्रारंभ होकर जिलाधिकारी कार्यालय बस्ती तक लगभग 65 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली इस यात्रा में हजारों लोगों ने मोटरसाइकिलों एवं अन्य माध्यमों से सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यात्रा के शुभारंभ अवसर पर मखौड़ा धाम में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए श्री पाण्डेय ने मखौड़ा धाम एवं मनोरमा नदी के ऐतिहासिक, धार्मिक और</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181323/people-gathered-in-manorama-janajagruti-yatra-the-biggest-and-longest"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260615-wa0134.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में मनोरमा नदी को स्वच्छ, अविरल एवं अतिक्रमण मुक्त बनाने की मांग को लेकर आयोजित "मनोरमा जनजागृति यात्रा" रविवार को जनसमर्थन के अभूतपूर्व उत्साह के बीच संपन्न हुई। यात्रा का नेतृत्व वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’ ने किया। मखौड़ा धाम से प्रारंभ होकर जिलाधिकारी कार्यालय बस्ती तक लगभग 65 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली इस यात्रा में हजारों लोगों ने मोटरसाइकिलों एवं अन्य माध्यमों से सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यात्रा के शुभारंभ अवसर पर मखौड़ा धाम में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए श्री पाण्डेय ने मखौड़ा धाम एवं मनोरमा नदी के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल, जीवन का आधार है तथा नदियों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि मनोरमा नदी केवल एक जलधारा नहीं बल्कि क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और पर्यावरणीय संतुलन की पहचान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके उपरांत हजारों समर्थकों के साथ मोटरसाइकिल यात्रा के रूप में जनजागरण अभियान प्रारंभ हुआ। यात्रा मार्ग में अनेक स्थानों पर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं व्यापारियों द्वारा यात्रियों का स्वागत किया गया तथा जलपान की व्यवस्था की गई। प्रत्यक्षदर्शियों एवं उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार छोटी नदियों की सफाई एवं संरक्षण को समर्पित यह प्रदेश की सबसे बड़ी एवं सबसे लंबी जनजागरण यात्राओं में से एक रही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने पर यात्रा से जुड़े प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर मनोरमा नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने, नियमित सफाई कराने तथा नदी पुनर्जीवन के लिए प्रभावी कार्ययोजना लागू करने की मांग रखी। इस दौरान अधिकारियों के साथ लंबी वार्ता एवं बहस हुई। प्रतिनिधिमंडल को विकास भवन में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक का आश्वासन दिया गया, किंतु वहां पहुंचने पर अपेक्षित स्तर पर अधिकारियों की उपलब्धता नहीं होने से समाधान की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी।</div>
<div style="text-align:justify;">श्री पाण्डेय ने आरोप लगाया कि नदी संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर प्रशासनिक उदासीनता चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जनहित के इस मुद्दे पर प्रशासन का सहयोग अपेक्षित था, किंतु न तो पर्याप्त व्यवस्थाएं दिखाई दीं और न ही जनभावनाओं के अनुरूप तत्परता। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं हुआ तो वह शासन स्तर पर विस्तृत शिकायत एवं सुझाव प्रस्तुत करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल समस्याओं को उठाना नहीं बल्कि समाधान के लिए रचनात्मक सहयोग देना भी है। उन्होंने बताया कि बीते डेढ़ दशक में मनोरमा नदी के संरक्षण के लिए अनेक ज्ञापन, पत्र, धरना-प्रदर्शन एवं सुझाव दिए गए हैं। साथ ही स्थानीय युवाओं एवं स्वयंसेवकों के सहयोग से विभिन्न घाटों के आसपास लगभग तीन किलोमीटर क्षेत्र में सफाई अभियान चलाकर 1500 कुंतल से अधिक मलबा निकालने का कार्य भी किया गया, किंतु प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्री पाण्डेय ने कहा कि मनोरमा नदी को पुनर्जीवित करने की लड़ाई किसी व्यक्ति या संगठन की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य, पर्यावरण संरक्षण और जनहित की लड़ाई है। उन्होंने सभी नागरिकों से इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर शिवचरन जायसवाल, शक्तीदीप पाठक, विमलेन्द्र सिंह, अनुज त्रिपाठी, विनोद चौधरी, अवशेष पाठक, अभिषेक शर्मा, हीरालाल वर्मा, अवधेश वर्मा, रत्नेश श्रीवास्तव, देवशरण शुक्ल, उमानाथ द्विवेदी, राहुल शास्त्री, अतुल शास्त्री, विवेक पाण्डेय, चन्द्र प्रकाश त्रिपाठी, पशुपतिनाथ चौबे, नवीन तिवारी सहित हजारों की संख्या में कार्यकर्ता, समर्थक एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रह</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:47:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन मिलाप : बिछड़ों को अपनों से मिलाने का मानवीय अभियान, परिवारों के आंसुओं में लौटी खुशियों की रोशनी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181002/operation-milap-a-humanitarian-campaign-to-reunite-separated-people-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/delhi-police.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों या महीनों से बिछड़ा कोई व्यक्ति अचानक परिवार से मिल जाता है तो वह क्षण किसी चमत्कार से कम नहीं होता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस द्वारा चलाया गया “ऑपरेशन मिलाप” इसी मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इस विशेष अभियान के अंतर्गत मात्र एक महीने में 1470 गुमशुदा व्यक्तियों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया गया। यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि हजारों टूटते हुए परिवारों के जीवन में आशा, विश्वास और खुशियों की वापसी का अभियान है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अभियान में 852 महिलाओं, 342 पुरुषों तथा 276 नाबालिग बच्चों और किशोरियों को खोजकर उनके परिजनों तक पहुंचाया गया। विशेष रूप से यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि बड़ी संख्या में किशोरियां और महिलाएं अपने परिवारों से बिछड़ गई थीं। ऐसे मामलों में समय के साथ परिवारों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। उन्हें हर पल किसी अनहोनी की आशंका सताती रहती है। ऐसे में पुलिस द्वारा इन लोगों को सुरक्षित ढूंढ़ निकालना निश्चित रूप से सराहनीय कार्य है।</div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस ने केवल औपचारिक जांच तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पुराने और लंबित मामलों को दोबारा खोलकर नए सिरे से जांच की। आधुनिक तकनीक, मोबाइल फोन विश्लेषण, सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी, विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और आश्रय गृहों की जांच जैसे अनेक माध्यमों का उपयोग किया गया। शिकायतकर्ताओं और गवाहों से दोबारा संपर्क कर नए सुराग जुटाए गए। यह दर्शाता है कि यदि इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता हो तो वर्षों पुराने मामलों में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।</div><div style="text-align:justify;">सूरत पुलिस द्वारा सर्वाधिक 341 गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाना भी इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर समर्पित प्रयास किस प्रकार बड़े परिणाम दे सकते हैं। पुलिस और प्रशासन की यह सक्रियता उन परिवारों के लिए राहत का कारण बनी है जो वर्षों से अपने प्रियजनों की प्रतीक्षा में दिन गिन रहे थे।</div><div style="text-align:justify;">इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे समाज के सामने गुमशुदगी के वास्तविक कारण भी उजागर हुए हैं। पुलिस के विश्लेषण में सामने आया कि 14 से 17 वर्ष की आयु वर्ग की अनेक किशोरियां प्रेम संबंधों, पारिवारिक विवादों, अभिभावकों की डांट-फटकार अथवा पढ़ाई में असफलता जैसी परिस्थितियों के कारण घर छोड़कर चली गई थीं। कुछ मामले रोजगार की तलाश में पलायन करने वाले परिवारों से भी जुड़े पाए गए।</div><div style="text-align:justify;">यहां एक गंभीर सामाजिक संदेश छिपा हुआ है। जीवन में कठिनाइयां, असफलताएं, पारिवारिक मतभेद या भावनात्मक उलझनें आना स्वाभाविक है। किशोरावस्था में भावनाएं अधिक संवेदनशील होती हैं और कई बार छोटी घटनाएं भी बहुत बड़ी लगने लगती हैं। लेकिन घर छोड़ देना किसी समस्या का समाधान नहीं है। यह निर्णय क्षणिक आवेश में लिया जा सकता है, पर उसके परिणाम बहुत गंभीर होते हैं।</div><div style="text-align:justify;">कई बार बच्चों और किशोरों को लगता है कि उनके जाने से परिवार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा या कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो जाएगा। वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है। जिस दिन कोई बच्चा या किशोर घर से लापता होता है, उसी दिन से उसके माता-पिता का चैन और नींद समाप्त हो जाती है। मां की आंखें दरवाजे पर लगी रहती हैं। पिता बाहर से मजबूत दिखने का प्रयास करता है, लेकिन भीतर से टूट चुका होता है। भाई-बहन चिंता और असुरक्षा के बीच जीते हैं। पूरा परिवार हर संभावित स्थान पर तलाश करता है, पुलिस थानों के चक्कर लगाता है और अनिश्चितता के अंधेरे में जीवन बिताता है।</div><div style="text-align:justify;">गुमशुदगी का दर्द केवल भावनात्मक नहीं होता, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी परिवारों को प्रभावित करता है। अनेक परिवार अपनी बचत तक खर्च कर देते हैं। कई लोग कामकाज छोड़कर अपने प्रियजन की तलाश में जुट जाते हैं। मानसिक तनाव के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए किसी भी परिस्थिति में घर छोड़कर चले जाना न तो समझदारी है और न ही समस्याओं का समाधान।</div><div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि परिवारों और बच्चों के बीच संवाद को मजबूत बनाया जाए। अभिभावक बच्चों की भावनाओं को समझें और बच्चे अपने माता-पिता पर विश्वास करें। यदि पढ़ाई में असफलता मिली है, किसी बात पर डांट पड़ी है या जीवन में कोई परेशानी आई है, तो उसका समाधान बातचीत से निकाला जा सकता है। परिवार ही वह स्थान है जहां व्यक्ति को सबसे अधिक सुरक्षा, प्रेम और सहयोग मिलता है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप की सफलता केवल आंकड़ों में नहीं मापी जा सकती। इसकी वास्तविक सफलता उन हजारों मुस्कानों में दिखाई देती है जो बिछड़ने के बाद फिर से लौट आईं। उन माताओं की आंखों में दिखाई देती है जिन्होंने वर्षों बाद अपने बच्चों को गले लगाया। उन परिवारों की खुशी में दिखाई देती है जिनकी उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी थीं।</div><div style="text-align:justify;">यह अभियान यह भी सिद्ध करता है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था नहीं है, बल्कि समाज के दुख-दर्द में सहभागी बनने वाली संवेदनशील व्यवस्था भी है। जब पुलिस किसी गुमशुदा व्यक्ति को उसके परिवार तक पहुंचाती है, तब वह केवल एक केस बंद नहीं करती बल्कि एक टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ती है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप ने हजारों परिवारों को नई जिंदगी दी है। यह अभियान मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही यह हम सभी को यह संदेश भी देता है कि जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में घर और परिवार से दूर जाना समाधान नहीं है। संवाद, धैर्य और विश्वास ही हर समस्या का सबसे मजबूत उत्तर हैं। यदि यह संदेश समाज के प्रत्येक बच्चे और किशोर तक पहुंच जाए तो शायद भविष्य में अनेक परिवार गुमशुदगी की उस पीड़ा से बच सकेंगे, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है।</div><div style="text-align:justify;">       </div><div style="text-align:justify;"><strong><br /></strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>                                                                           *कांतिलाल मांडोत*</strong></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:35:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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