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                <title>Youth Awareness - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Youth Awareness RSS Feed</description>
                
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                <title>गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित 8 अगस्त को आयोजित की जा रही मैराथन दौड़ अब 11 अगस्त को होगी: डिप्टी कमिश्नर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नवांशहर-</strong> पंजाब सरकार द्वारा शहीद भगत सिंह नगर जिले में 8 अगस्त को गुरु रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित आयोजित की जा रही मैराथन दौड़ अब 11 अगस्त को होगी। यह जानकारी डिप्टी कमिश्नर गुलप्रीत सिंह औलख ने नवांशहर के जिला प्रशासनिक परिसर के मीटिंग हॉल में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान मैराथन के रूट प्लान, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए डिप्टी कमिश्नर गुलप्रीत सिंह औलख ने कहा कि यह मैराथन 11 अगस्त, 2026, मंगलवार को सुबह 6:00</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184779/the-marathon-race-being-organized-on-8th-august-dedicated-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1000985843.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नवांशहर-</strong> पंजाब सरकार द्वारा शहीद भगत सिंह नगर जिले में 8 अगस्त को गुरु रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित आयोजित की जा रही मैराथन दौड़ अब 11 अगस्त को होगी। यह जानकारी डिप्टी कमिश्नर गुलप्रीत सिंह औलख ने नवांशहर के जिला प्रशासनिक परिसर के मीटिंग हॉल में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान मैराथन के रूट प्लान, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए डिप्टी कमिश्नर गुलप्रीत सिंह औलख ने कहा कि यह मैराथन 11 अगस्त, 2026, मंगलवार को सुबह 6:00 बजे ITI ग्राउंड, नवांशहर से शुरू होगी। मैराथन दौड़ का रूट ITI ग्राउंड से, शुगर मिल पर यू-टर्न लेकर ITI पर वापस आएगी। यह ग्राउंड पर ही खत्म होगी। उन्होंने कहा कि मैराथन में पहले 15 स्थान पाने वाले खिलाड़ियों को मेडल देकर सम्मानित किया जाएगा और सभी हिस्सा लेने वालों के लिए रिफ्रेशमेंट का भी इंतज़ाम किया जाएगा। मैराथन खत्म होने के बाद, युवाओं को ड्रग्स और दूसरे नशीले पदार्थों के बुरे असर के बारे में जागरूक करने के लिए खास स्पीच मुकाबले भी करवाए जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिप्टी कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मैराथन दौड़ को लेकर सभी सही इंतज़ाम किए जाएं ताकि खिलाड़ियों और लोगों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने जिले के सभी लोगों और खिलाड़ियों से अपील की कि वे ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में इस मैराथन में हिस्सा लें और गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित इस इवेंट को कामयाब बनाने में अपना योगदान दें। इस मौके पर एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (G) संजीव शर्मा, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (पेन. डेवलपमेंट) अवनीत कौर, SDM नवांशहर अनमजोत कौर, असिस्टेंट कमिश्नर जनरल रमनजीत के अलावा पुलिस, खेल, हेल्थ, एजुकेशन और दूसरे संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 21:54:20 +0530</pubDate>
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                <title>नशा, संवेदना और बचपन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्वामी विवेकानंद ने कहा था हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जो चरित्र का निर्माण करे, मन का बल बढ़ाए और मनुष्य को अपने पैरों पर खड़ा कर दे, नशा  शिक्षा, चरित्र और आत्मबल तीनों का सबसे बड़ा शत्रु है। मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी उसकी संवेदना और बचपन की मासूमियत है। संवेदना मनुष्य को मनुष्य बनाती है और बचपन उसके व्यक्तित्व की नींव रखता है। किंतु आज नशीले पदार्थों का बढ़ता जाल इन दोनों पर सबसे कड़ा प्रहार कर रहा है। नशा केवल शरीर को नहीं, बल्कि विवेक, करुणा, परिवार, शिक्षा, संस्कृति और भविष्य को भी नष्ट कर देता है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184774/drug-addiction-and-childhood"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/s-th1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वामी विवेकानंद ने कहा था हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जो चरित्र का निर्माण करे, मन का बल बढ़ाए और मनुष्य को अपने पैरों पर खड़ा कर दे, नशा  शिक्षा, चरित्र और आत्मबल तीनों का सबसे बड़ा शत्रु है। मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी उसकी संवेदना और बचपन की मासूमियत है। संवेदना मनुष्य को मनुष्य बनाती है और बचपन उसके व्यक्तित्व की नींव रखता है। किंतु आज नशीले पदार्थों का बढ़ता जाल इन दोनों पर सबसे कड़ा प्रहार कर रहा है। नशा केवल शरीर को नहीं, बल्कि विवेक, करुणा, परिवार, शिक्षा, संस्कृति और भविष्य को भी नष्ट कर देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस आयु में बच्चों के हाथों में पुस्तकें और सपने होने चाहिए, वहाँ यदि नशे का जहर पहुँच जाए तो आने वाला पूरा जीवन अंधकारमय हो जाता है। भारत में पिछले कुछ वर्षों में ड्रग्स, सिंथेटिक नशे, हेरोइन, चरस, गांजा, अफीम तथा नशीली गोलियों का प्रसार चिंताजनक रूप से बढ़ा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा विभिन्न सरकारी सर्वेक्षणों के अनुसार देश में करोड़ों लोग किसी न किसी प्रकार के मादक पदार्थों का सेवन करते हैं। 2019 के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 16 करोड़ लोग शराब, 3 करोड़ से अधिक लोग भांग या गांजा तथा लगभग 2.3 करोड़ लोग ओपिओइड (अफीम, हेरोइन आदि) का सेवन करते पाए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">इनमें बड़ी संख्या 10 से 17 वर्ष और 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की है। सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में पंजाब, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र तथा गोवा प्रमुख हैं। पंजाब में हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स का गंभीर संकट लंबे समय से चिंता का विषय है। पूर्वोत्तर के राज्यों में सीमा पार से होने वाली तस्करी ने युवाओं को प्रभावित किया है। राजस्थान और गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी मादक पदार्थों की तस्करी लगातार बढ़ी है। महानगरों में नशीली गोलियां, कोकीन और पार्टी ड्रग्स तेजी से फैल रहे हैं। सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि नशे की शुरुआत अब किशोरावस्था में ही होने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों, पारिवारिक विघटन, बेरोजगारी, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव, गलत संगति तथा मानसिक तनाव के कारण अनेक बच्चे नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। परिणामस्वरूप पढ़ाई छूट जाती है, अपराध बढ़ते हैं, हिंसा और आत्महत्या की प्रवृत्ति विकसित होती है तथा परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूटने लगते हैं। नशा सबसे पहले मनुष्य की संवेदना को समाप्त करता है। जो व्यक्ति कभी माता-पिता के प्रति श्रद्धावान था, वही नशे की लत में उनके साथ दुर्व्यवहार करने लगता है। परिवार की जमा पूंजी नशे में समाप्त हो जाती है। अनेक युवा चोरी, लूट और अन्य अपराधों की ओर बढ़ जाते हैं। धीरे-धीरे रिश्तों की गर्माहट समाप्त होने लगती है और मनुष्य केवल नशे का दास बनकर रह जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने कहा था शराब और नशा मनुष्य की आत्मा का पतन कर देते हैं। डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर का संदेश था शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो। यह संदेश नशामुक्त समाज की स्थापना के लिए भी उतना ही आवश्यक है। नशे के विरुद्ध केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं। परिवार, विद्यालय, समाज, धार्मिक संस्थाएँ, मीडिया तथा शासन सभी को मिलकर कार्य करना होगा। बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना, खेल, साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना, विद्यालयों में नशामुक्ति शिक्षा को अनिवार्य बनाना तथा नशे के शिकार लोगों के पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्था करना समय की आवश्यकता है। सीमाओं पर तस्करी रोकने के साथ-साथ ऑनलाइन अवैध नेटवर्क पर भी कठोर कार्रवाई आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि किसी राष्ट्र का बचपन सुरक्षित है तो उसका भविष्य भी सुरक्षित है। लेकिन यदि बचपन नशे की गिरफ्त में चला गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल आर्थिक ही नहीं, नैतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी कमजोर हो जाएँगी। इसलिए नशे के विरुद्ध संघर्ष केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का अभियान है।आइए संकल्प लें कि हम अपने घर, विद्यालय, समाज और कार्यस्थल पर नशामुक्ति का संदेश फैलाएँगे। हर बच्चे के हाथ में नशा नहीं, पुस्तक होगी; हर युवा की आँखों में धुंध नहीं, सपने होंगे; और हर परिवार में भय नहीं, संवेदना और विश्वास का वातावरण होगा। यही स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत की वास्तविक पहचान बनेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2025–26 तक उपलब्ध सरकारी आँकड़े बताते हैं कि भारत में नशीले पदार्थों की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा और बाल संरक्षण का गंभीर संकट बन चुकी है। गृह मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो के अनुसार नशे की तस्करी पर लगातार कार्रवाई के बावजूद इसकी पहुँच बच्चों और युवाओं तक बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा एम्स के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 10–17 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 20 लाख बच्चे कैनाबिस (गांजा), 40 लाख बच्चे ओपिओइड (अफीम, हेरोइन आदि), 30 लाख बच्चे इनहेलेंट (सूँघने वाले नशीले पदार्थ) तथा लगभग 20 लाख बच्चे नशीली दवाओं (सेडेटिव) के सेवन से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय छोड़ने वाले किशोरों और शहरी मलिन बस्तियों के बच्चों में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दे रही है।मार्च 2025 में संसद में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार 2023–24 में देशभर के ओपन शेल्टरों में रहने वाले 4,158 बच्चों की पहचान नशे से प्रभावित बच्चों के रूप में की गई। म यह आँकड़े केवल सरकारी आश्रय गृहों में चिन्हित बच्चों के हैं; वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय के अनुसार 2020 से मई 2025 तक राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो  ने 116 बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी मामलों का भंडाफोड़ करते हुए लगभग 1,09,318 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए। यह दर्शाता है कि भारत न केवल नशे की खपत बल्कि अंतरराष्ट्रीय तस्करी के नेटवर्क की चुनौती से भी जूझ रहा है। डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का विश्वास था— "यदि देश को विकसित बनाना है तो युवाओं को सही दिशा देनी होगी।" इसलिए नशामुक्त बचपन केवल स्वास्थ्य का प्रश्न नहीं, बल्कि विकसित भारत की आधारशिला है।आवश्यकता केवल कठोर कानूनों की नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय, समाज, मीडिया और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की है। प्रत्येक बच्चे को स्नेह, संस्कार, खेल, साहित्य और रचनात्मक वातावरण मिले यही नशे के विरुद्ध सबसे प्रभावी और स्थायी उपाय है। संवेदनशील बचपन ही संवेदनशील समाज का निर्माण करता है; यदि बचपन बचा रहेगा, तभी भारत का भविष्य सुरक्षित रहेगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 21:41:32 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>फ्लैश फ्लड से पहले फ्लैशबैक – एक गलती, पूरी कहानी खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति जब रौद्र रूप धारण करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब मनुष्य की सारी शक्ति क्षणभर में प्रभावहीन हो जाती है। मानसून इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यही वर्षा भारत के खेतों में जीवन भरती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कभी भीषण बाढ़ और भूस्खलन बनकर गाँव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़कें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुल और अनगिनत जिंदगियों को लील लेती है। उफनती नदियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकराल झरने और शांत पहाड़ियाँ पलभर में मौत का मंजर बन जाती हैं। ऐसे समय सबसे अधिक चिंता उन युवाओं की होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो रोमांच के नाम पर जोखिम को ही साहस समझ बैठते हैं। याद रखिए</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183028/flashback-before-the-flash-flood-%E2%80%93-one-mistake-complete-story"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति जब रौद्र रूप धारण करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब मनुष्य की सारी शक्ति क्षणभर में प्रभावहीन हो जाती है। मानसून इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यही वर्षा भारत के खेतों में जीवन भरती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कभी भीषण बाढ़ और भूस्खलन बनकर गाँव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़कें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुल और अनगिनत जिंदगियों को लील लेती है। उफनती नदियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकराल झरने और शांत पहाड़ियाँ पलभर में मौत का मंजर बन जाती हैं। ऐसे समय सबसे अधिक चिंता उन युवाओं की होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो रोमांच के नाम पर जोखिम को ही साहस समझ बैठते हैं। याद रखिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आप केवल अपने परिवार की उम्मीद नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्र की अमूल्य शक्ति हैं। इसलिए मानसून के इन तीन-चार महीनों में उफनती नदियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झरनों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खतरनाक पहाड़ी क्षेत्रों और जोखिमभरे ट्रेकिंग मार्गों से पूरी तरह दूर रहना ही सच्ची समझदारी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानसून की खूबसूरती जितनी मोहक दिखती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका खतरा उतना ही गंभीर होता है। भारत के हिमालयी क्षेत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिमी घाट और उत्तर-पूर्व के पर्वतीय इलाकों में हर वर्ष भारी वर्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्लैश फ्लड और भूस्खलन तबाही मचाते हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन आपदाओं में हर साल हजारों लोगों की जान चली जाती है। मौसम विभाग (आईएमडी</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">लगातार चेतावनियाँ जारी करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी कई युवा रोमांच के आकर्षण में उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। मनाली-लेह मार्ग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरिशचंद्रगढ़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरिहर किला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केदारनाथ सहित अनेक पर्वतीय क्षेत्र मानसून में बेहद जोखिमभरे हो जाते हैं। गीली चट्टानों पर एक छोटी-सी चूक या ऊपरी पहाड़ों में हुई बारिश से आया अचानक सैलाब संभलने का मौका तक नहीं देता। जो स्थान कुछ देर पहले सुरक्षित दिखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही पलभर में मौत का रास्ता बन सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रोमांच का वास्तविक अर्थ जोखिम मोल लेना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेना है। आज ट्रेकिंग युवाओं के बीच पर्यटन से बढ़कर एक फैशन बन गई है। सोशल मीडिया की आकर्षक तस्वीरें और वीडियो देखकर अनेक लोग यह भूल जाते हैं कि प्रकृति का सुंदर चेहरा पलभर में भयावह रूप भी धारण कर सकता है। फ्लैश फ्लड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिसलन भरी चढ़ाइयाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उफनती नदियाँ और भूस्खलन वाले क्षेत्रों में अनावश्यक साहस दिखाना उपलब्धि नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लापरवाही है। कई बार रेड अलर्ट और मौसम विभाग की चेतावनियों के बावजूद लोग जोखिम उठाते हैं। इसका परिणाम केवल एक हादसा नहीं होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरा परिवार जीवनभर के दुःख और पीड़ा का बोझ उठाता है। इसलिए सच्ची बहादुरी प्रकृति को चुनौती देने में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी चेतावनियों का सम्मान कर सुरक्षित रहने में है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर रोमांचक मंज़िल से पहले अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देना ही सबसे समझदारी भरा निर्णय है। युवाओं को समझना होगा कि जीवन किसी एक ट्रेक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यात्रा या वायरल वीडियो से कहीं अधिक मूल्यवान है। माता-पिता अपने बच्चों में अपने वर्षों के त्याग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष और अनगिनत सपनों का भविष्य देखते हैं। एक क्षण की लापरवाही उन सभी उम्मीदों को हमेशा के लिए तोड़ सकती है। देश को भी ऐसे युवा चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सुरक्षित रहकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कौशल और अपनी ऊर्जा से राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। जोश युवावस्था की पहचान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सही दिशा विवेक ही देता है। इसलिए सितंबर–अक्टूबर तक प्रतीक्षा करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब मौसम और रास्ते दोनों सुरक्षित हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं अधिक बुद्धिमानी है। प्रकृति हमेशा रहेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवसर फिर मिलेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जीवन दोबारा नहीं मिलेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा अपनाना कमजोरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि परिपक्वता और जिम्मेदारी की पहचान है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और भारतीय मौसम विभाग लगातार सलाह देते हैं कि भारी वर्षा के दौरान नदियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झरनों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलप्रपातों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें। किसी भी यात्रा से पहले मौसम का ताज़ा पूर्वानुमान अवश्य देखें तथा पर्याप्त तैयारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आवश्यक उपकरण और अनुभवी साथियों के बिना जोखिमभरे मार्गों पर न जाएँ। केवल उत्साह के भरोसे या अकेले ट्रेकिंग करना गंभीर भूल साबित हो सकता है। मानसून के इन महीनों का बेहतर उपयोग पढ़ाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई तकनीकी व व्यावसायिक दक्षताएँ सीखने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य सुधारने और परिवार के साथ समय बिताने में किया जा सकता है। याद रखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर साहसिक कदम का एक सही समय होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मानसून उसका समय नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति का सौंदर्य तभी आनंद देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसके नियमों का सम्मान किया जाए। शांत मौसम में यही पहाड़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नदियाँ और झरने सुकून का अनुभव कराते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मानसून में उनका बदला हुआ रूप हर कदम पर खतरे का संकेत देता है। हर वर्ष अनेक परिवार केवल इसलिए अपूरणीय क्षति झेलते हैं क्योंकि मौसम की चेतावनियों को हल्के में लिया जाता है और रोमांच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवेक पर भारी पड़ जाता है। सबसे बड़ा भ्रम यही है कि दुर्घटनाएँ केवल दूसरों के साथ होती हैं। वास्तव में सावधानी केवल स्वयं की सुरक्षा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवार और समाज के प्रति भी जिम्मेदारी है। जब एक युवा सुरक्षित रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब उसके साथ माता-पिता की उम्मीदें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवार के सपने और राष्ट्र का भविष्य भी सुरक्षित रहता है। इसलिए मानसून में सतर्क रहना कोई त्याग नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि दूरदर्शिता और समझदारी का प्रमाण है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका जोश विवेक से संचालित हो। आपका जीवन केवल आपका नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि परिवार की उम्मीदों और राष्ट्र के भविष्य की अमूल्य पूँजी है। पर्वतों पर अवश्य जाएँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सुरक्षित मौसम में। नदियों और झरनों की सुंदरता का आनंद लें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर उनके उफान को चुनौती न दें। सच्ची बहादुरी जोखिम उठाने में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सही समय पर सही निर्णय लेने में है। मानसून बीत जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रास्ते फिर सुरक्षित होंगे और प्रकृति फिर खुले मन से आपका स्वागत करेगी। इसलिए युवा साथियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन कुछ महीनों तक धैर्य रखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सतर्क रहें और अपने जीवन की रक्षा करें। आपकी एक सावधानी केवल आपको ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आपके परिवार के सपनों और राष्ट्र की आशाओं को भी सुरक्षित रखेगी। यही सच्ची विजय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही वास्तविक वीरता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/183028/flashback-before-the-flash-flood-%E2%80%93-one-mistake-complete-story</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 21:45:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनसीसी ग्रुप , प्रयागराज के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य, कल्याण एवं समग्र जीवनशैली को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप एनसीसी ग्रुप मुख्यालय, प्रयागराज द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 का आयोजन क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित स्थलों पर अत्यंत उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर निम्नलिखित प्रमुख स्थलों पर एक साथ योग सत्र आयोजित किए गए—</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अरैल घाट, प्रयागराज – 350 कैडेट</div>
<div style="text-align:justify;">गुप्तेश्वर घाट, अयोध्या – 200 कैडेटचन्द्रशेखर आजाद पार्क, प्रयागराज 125 कैडेट।</div>
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<div style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं के बीच योग के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाना</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181985/grand-organization-of-international-yoga-day-under-the-aegis-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260621-wa0153.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य, कल्याण एवं समग्र जीवनशैली को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप एनसीसी ग्रुप मुख्यालय, प्रयागराज द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 का आयोजन क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित स्थलों पर अत्यंत उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर निम्नलिखित प्रमुख स्थलों पर एक साथ योग सत्र आयोजित किए गए—</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अरैल घाट, प्रयागराज – 350 कैडेट</div>
<div style="text-align:justify;">गुप्तेश्वर घाट, अयोध्या – 200 कैडेटचन्द्रशेखर आजाद पार्क, प्रयागराज 125 कैडेट।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं के बीच योग के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पवित्र त्रिवेणी संगम के निकट स्थित अरैल घाट पर 350 एनसीसी कैडेटों ने शांत एवं प्रेरणादायी वातावरण में कॉमन योग प्रोटोकॉल का अभ्यास किया। कैडेटों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान क्रियाओं का प्रदर्शन करते हुए दैनिक जीवन में योग को अपनाने के महत्व को रेखांकित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी प्रकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण गुप्तेश्वर घाट, अयोध्या में 200 एनसीसी कैडेटों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। अनुशासित एवं सामूहिक योगाभ्यास के माध्यम से कैडेटों ने शारीरिक सुदृढ़ता एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रयागराज के ऐतिहासिक चन्द्रशेखर आजाद पार्क में 125 एनसीसी कैडेटों ने योगाभ्यास किया। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े इस गौरवशाली स्थल ने युवाओं को स्वस्थ, अनुशासित एवं उद्देश्यपूर्ण जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन प्रमुख आयोजनों के अतिरिक्त, एनसीसी ग्रुप मुख्यालय, प्रयागराज के अधीन विभिन्न एनसीसी इकाइयों के लगभग 3,600 कैडेटों ने समूह क्षेत्र के विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों में एक साथ सहभागिता की। कैडेटों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल का अभ्यास करने के साथ-साथ विद्यार्थियों एवं स्थानीय समुदाय के बीच स्वास्थ्य, फिटनेस एवं मानसिक कल्याण संबंधी जागरूकता गतिविधियाँ भी संचालित कीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का संचालन एनसीसी अधिकारियों, एसोसिएट एनसीसी अधिकारियों (एएनओ) एवं स्थायी प्रशिक्षक स्टाफ के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में किया गया। इस दौरान मन एवं शरीर के सामंजस्य, पर्यावरणीय चेतना तथा युवाओं में आत्मबल एवं लचीलापन विकसित करने में योग की भूमिका पर विशेष बल दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्षेत्र के ऐतिहासिक धरोहर स्थलों एवं शिक्षण संस्थानों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों का सफल आयोजन एनसीसी ग्रुप मुख्यालय, प्रयागराज की राष्ट्र निर्माण, युवा सशक्तिकरण तथा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं सनातन योग परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 18:57:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संपादकीय पेज के लिए समसामयिक आलेख </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश में इन दिनों मजहबी आतंकवाद ने लवजेहाद का मुखौटा पहन लिया है। लव जिहाद सिर्फ श्रद्धा वालकर, साक्षी, सीमा गौतम, अनामिता, यशोदा, रबिता पहाड़िन, तनिष्का शर्मा, निकिता तोमर, चयनिका और टिक-टॉक स्टार शिवानी जैसी सैकड़ों हिंदू लड़कियों की कहानियां नहीं हैं। वास्तविकता में लव जिहाद आतंकवाद का ही दूसरा चेहरा है। यह हिंदू बेटियों पर अंतहीन अत्याचार, उनके धर्मांतरण और जिहाद की जुगुत्सा का बेहद वीभत्स और जीवंत चित्रण है। लव जिहाद या रोमियो जिहाद एक षड्यंत्र है, जिसके तहत मुस्लिम लड़के, गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ प्यार का ढोंग करके उनका धर्म-परिवर्तन कराते हैं। ये सिर्फ उनकी अस्मत ही</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181582/current-articles-for-editorial-page"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas16.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश में इन दिनों मजहबी आतंकवाद ने लवजेहाद का मुखौटा पहन लिया है। लव जिहाद सिर्फ श्रद्धा वालकर, साक्षी, सीमा गौतम, अनामिता, यशोदा, रबिता पहाड़िन, तनिष्का शर्मा, निकिता तोमर, चयनिका और टिक-टॉक स्टार शिवानी जैसी सैकड़ों हिंदू लड़कियों की कहानियां नहीं हैं। वास्तविकता में लव जिहाद आतंकवाद का ही दूसरा चेहरा है। यह हिंदू बेटियों पर अंतहीन अत्याचार, उनके धर्मांतरण और जिहाद की जुगुत्सा का बेहद वीभत्स और जीवंत चित्रण है। लव जिहाद या रोमियो जिहाद एक षड्यंत्र है, जिसके तहत मुस्लिम लड़के, गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ प्यार का ढोंग करके उनका धर्म-परिवर्तन कराते हैं। ये सिर्फ उनकी अस्मत ही नही लूटते है वरन उनके अश्लील वीडियो एमएमएस बना कर ब्लेक मेल कर उनको दूसरी हिन्दू लड़कियों को चंगुल मे फंसाने के लिए मजबूर करते हैं इतना ही नहीं जाल में फंसी इन लड़कियों को अब सुनियोजित तरीके से नशे की डोज देकर नशे की आदत डालने का धंधा भी चल रहा है इसके साथ ही इनको फुसलाकर और की बार ब्लेक मेल कर और जबरन धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर किया जाता है इसके साथ ही इनका आर्थिक शोषण भी किया जाता है यदि शिकार लड़की अच्छे सम्पन्न परिवार से सम्बद्ध है तो उसे परिवार की बदनामी का भय दिखा कर लाखों रुपए की रकम बार बार वसूली जाती है। </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही में महाराष्ट्र के नागपुर से एक ऐसा खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश को सन्न कर दिया है। यहां भारतीय वायुसेना  के एक अधिकारी की 24 साल की पत्नी को न सिर्फ 'रेप' और ब्लैकमेल का शिकार बनाया गया, बल्कि 'काला जादू' (काला जादू) कर उसका निजी धर्म भी बदल दिया गया। इस खतरनाक वायरस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, आरोप है कि नागपुर में भारतीय वायु सेना के अधिकारी की पत्नी के साथ ये दरिंदगी की गई। पीड़िता का आरोप है कि उसे नशीली दवा देकर रेप किया गया, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया और उससे लाखों रुपये ऐंठे गए. इन सबके बाद धर्म बदलने के लिए दबाव डाला गया। 
<div style="text-align:justify;">पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मदारे और अमीन शेख को गिरफ़्तार कर लिया है, जबकि मध्य प्रदेश के तामिया निवासी तीसरे आरोपी हजरत मौलाना की तलाश जारी है.पुलिस के मुताबिक, पीड़ित महिला का पति एयरफोर्स अधिकारी और अन्य शहर में अधिकारी है। महिला नागपुर में नौकरानी डीलिंग का काम करती है। इसी बात की फ़ायदेमंदी उसके स्कूल के पुराने क्लासमेट अय्याज़ ताज मदारे (26) ने रची है। पुलिस के मुताबिक शिकायत करने वाली 24 साल की महिला के पति इंडियन एयर फ़ोर्स में हैं और अभी दूसरे शहर में तैनात हैं. पीड़िता प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करती है. फरवरी 2025 में अयाज़ ने कथित तौर पर एक प्लॉट खरीदने के बहाने उससे संपर्क किया और उसे वर्धा रोड पर एक होटल में बुलाया. महिला का आरोप है कि उसने उसे नशीला पदार्थ मिला हुआ जूस पिलाया और बेहोशी की हालत में उसके साथ रेप किया, साथ ही इस हरकत का वीडियो और फ़ोटो भी बनाए और कथित तौर पर उससे 3.09 लाख रुपये ऐंठे. पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उस पर इस्लाम अपनाने का दबाव डाला गया और धार्मिक रीति-रिवाजों के नाम पर उससे कई तरह की चीजें कराई गईं.</div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस ने बलात्कार, बार-बार यौन उत्पीड़न, जबरन वसूली, ब्लैकमेल और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों के साथ-साथ काला जादू विरोधी कानून की धाराओं को भी लागू किया है। नागपुर पुलिस की एक टीम उस मौलाना की तलाश कर रही है जिसने कथित तौर पर धर्म परिवर्तन कराया था।</div>
<div style="text-align:justify;">डीसीपी सुरेश रेड्डी ने कहा, "महिला ने अपनी शिकायत में बलात्कार, जबरन वसूली, धर्मांतरण और काला जादू का आरोप लगाया है। जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। यह सबूत बेहद अहम साबित होगा। धर्मांतरण कराने वाले मौलाना की तलाश में पुलिस की एक टीम दूसरे राज्य गई है। गहन जांच जारी है।"  नागपुर पुलिस ने अय्याज मदारे और अमीन शेख को गिरफ्तार कर लिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले अभी अप्रैल माह में महाराष्ट्र के अमरावती जिले के अचलपुर-परतवाड़ा इलाके से एक बेहद गंभीर यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग मामले ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी . पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी मोहम्मद अयान ऊर्फ मोहम्मद तनवीर को गिरफ्तार किया गया . प्राथमिक जांच में पता चला  कि आरोपीएआइएमआइएम का कार्यकर्ता है और लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर उनका अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करता था.</div>
<div style="text-align:justify;">अमरावती में 180 युवतियों को प्रेमजाल में फंसाकर 350 अश्लील वीडियो बनाए गए. आरोपियों ने ब्लैकमेल कर कई बार शोषण किया. पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू की.स्थानीय सांसद डॉ. अनिल बोंडे के अनुसार, यह मामला किसी बड़े संगठित गिरोह से जुड़ा हो सकता है. उन्होंने बताया कि मोहम्मद अयान और मोहम्मद जोयान सहित अन्य आरोपियों ने 180 से अधिक लड़कियों के करीब 350 आपत्तिजनक वीडियो बनाए. इन वीडियो के जरिए उन्हें देह व्यापार में धकेलने के लिए ब्लैकमेल किया गया इससे पहले यूपी के मिर्जापुर में जिम की आड़ में चल रहे एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है. इस गिरोह का संचालन पुलिस का एक सिपाही और उसके साथी मिलकर कर रहे थे. इंस्टाग्राम से दोस्ती, ब्लैकमेलिंग और फिर धर्म परिवर्तन के इस काले खेल में अब तक 6 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई .मिर्जापुर पुलिस ने जिम के जरिए संचालित हो रहे एक सुनियोजित धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा किया है. जीआरपी में तैनात सिपाही इरशाद खां और उसके शागिर्द फरीद अहमद ने 'आयरन फायर' और 'KGN 2.0' जिम की आड़ में 50 से अधिक लड़कियों को जाल में फंसाया.</div>
<div style="text-align:justify;"> ये आरोपी इंस्टाग्राम के जरिए युवतियों से संपर्क बढ़ाते थे और बाद में प्रेम जाल या आपत्तिजनक वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाते थे. पुलिस ने मुख्य सरगना लकी अली के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया , जबकि सिपाही इरशाद और मुठभेड़ के बाद ट्रेनर फरीद को गिरफ्तार किया गया.</div>
<div style="text-align:justify;">इन सभी वारदातों के मद्देनज़र यह साफ  है हिन्दू लड़कियों को फुसलाकर लवजेहाद में फंसा कर अय्याशी नशाखोरी और ब्लैकमेलिंग कर उनके धर्मांतरण का सिलसिला चल रहा है इस के पीछे सुनियोजित साजिश है और मजहबी वित्त व लीगल मदद भी भूमिका निभा रही हैं इस सम्बंध में अधिकाधिक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 40 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) सम्पर्क 9219179431 </div>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 17:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>ऑपरेशन मिलाप : बिछड़ों को अपनों से मिलाने का मानवीय अभियान, परिवारों के आंसुओं में लौटी खुशियों की रोशनी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181002/operation-milap-a-humanitarian-campaign-to-reunite-separated-people-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/delhi-police.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों या महीनों से बिछड़ा कोई व्यक्ति अचानक परिवार से मिल जाता है तो वह क्षण किसी चमत्कार से कम नहीं होता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस द्वारा चलाया गया “ऑपरेशन मिलाप” इसी मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इस विशेष अभियान के अंतर्गत मात्र एक महीने में 1470 गुमशुदा व्यक्तियों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया गया। यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि हजारों टूटते हुए परिवारों के जीवन में आशा, विश्वास और खुशियों की वापसी का अभियान है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अभियान में 852 महिलाओं, 342 पुरुषों तथा 276 नाबालिग बच्चों और किशोरियों को खोजकर उनके परिजनों तक पहुंचाया गया। विशेष रूप से यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि बड़ी संख्या में किशोरियां और महिलाएं अपने परिवारों से बिछड़ गई थीं। ऐसे मामलों में समय के साथ परिवारों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। उन्हें हर पल किसी अनहोनी की आशंका सताती रहती है। ऐसे में पुलिस द्वारा इन लोगों को सुरक्षित ढूंढ़ निकालना निश्चित रूप से सराहनीय कार्य है।</div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस ने केवल औपचारिक जांच तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पुराने और लंबित मामलों को दोबारा खोलकर नए सिरे से जांच की। आधुनिक तकनीक, मोबाइल फोन विश्लेषण, सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी, विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और आश्रय गृहों की जांच जैसे अनेक माध्यमों का उपयोग किया गया। शिकायतकर्ताओं और गवाहों से दोबारा संपर्क कर नए सुराग जुटाए गए। यह दर्शाता है कि यदि इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता हो तो वर्षों पुराने मामलों में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।</div><div style="text-align:justify;">सूरत पुलिस द्वारा सर्वाधिक 341 गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाना भी इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर समर्पित प्रयास किस प्रकार बड़े परिणाम दे सकते हैं। पुलिस और प्रशासन की यह सक्रियता उन परिवारों के लिए राहत का कारण बनी है जो वर्षों से अपने प्रियजनों की प्रतीक्षा में दिन गिन रहे थे।</div><div style="text-align:justify;">इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे समाज के सामने गुमशुदगी के वास्तविक कारण भी उजागर हुए हैं। पुलिस के विश्लेषण में सामने आया कि 14 से 17 वर्ष की आयु वर्ग की अनेक किशोरियां प्रेम संबंधों, पारिवारिक विवादों, अभिभावकों की डांट-फटकार अथवा पढ़ाई में असफलता जैसी परिस्थितियों के कारण घर छोड़कर चली गई थीं। कुछ मामले रोजगार की तलाश में पलायन करने वाले परिवारों से भी जुड़े पाए गए।</div><div style="text-align:justify;">यहां एक गंभीर सामाजिक संदेश छिपा हुआ है। जीवन में कठिनाइयां, असफलताएं, पारिवारिक मतभेद या भावनात्मक उलझनें आना स्वाभाविक है। किशोरावस्था में भावनाएं अधिक संवेदनशील होती हैं और कई बार छोटी घटनाएं भी बहुत बड़ी लगने लगती हैं। लेकिन घर छोड़ देना किसी समस्या का समाधान नहीं है। यह निर्णय क्षणिक आवेश में लिया जा सकता है, पर उसके परिणाम बहुत गंभीर होते हैं।</div><div style="text-align:justify;">कई बार बच्चों और किशोरों को लगता है कि उनके जाने से परिवार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा या कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो जाएगा। वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है। जिस दिन कोई बच्चा या किशोर घर से लापता होता है, उसी दिन से उसके माता-पिता का चैन और नींद समाप्त हो जाती है। मां की आंखें दरवाजे पर लगी रहती हैं। पिता बाहर से मजबूत दिखने का प्रयास करता है, लेकिन भीतर से टूट चुका होता है। भाई-बहन चिंता और असुरक्षा के बीच जीते हैं। पूरा परिवार हर संभावित स्थान पर तलाश करता है, पुलिस थानों के चक्कर लगाता है और अनिश्चितता के अंधेरे में जीवन बिताता है।</div><div style="text-align:justify;">गुमशुदगी का दर्द केवल भावनात्मक नहीं होता, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी परिवारों को प्रभावित करता है। अनेक परिवार अपनी बचत तक खर्च कर देते हैं। कई लोग कामकाज छोड़कर अपने प्रियजन की तलाश में जुट जाते हैं। मानसिक तनाव के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए किसी भी परिस्थिति में घर छोड़कर चले जाना न तो समझदारी है और न ही समस्याओं का समाधान।</div><div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि परिवारों और बच्चों के बीच संवाद को मजबूत बनाया जाए। अभिभावक बच्चों की भावनाओं को समझें और बच्चे अपने माता-पिता पर विश्वास करें। यदि पढ़ाई में असफलता मिली है, किसी बात पर डांट पड़ी है या जीवन में कोई परेशानी आई है, तो उसका समाधान बातचीत से निकाला जा सकता है। परिवार ही वह स्थान है जहां व्यक्ति को सबसे अधिक सुरक्षा, प्रेम और सहयोग मिलता है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप की सफलता केवल आंकड़ों में नहीं मापी जा सकती। इसकी वास्तविक सफलता उन हजारों मुस्कानों में दिखाई देती है जो बिछड़ने के बाद फिर से लौट आईं। उन माताओं की आंखों में दिखाई देती है जिन्होंने वर्षों बाद अपने बच्चों को गले लगाया। उन परिवारों की खुशी में दिखाई देती है जिनकी उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी थीं।</div><div style="text-align:justify;">यह अभियान यह भी सिद्ध करता है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था नहीं है, बल्कि समाज के दुख-दर्द में सहभागी बनने वाली संवेदनशील व्यवस्था भी है। जब पुलिस किसी गुमशुदा व्यक्ति को उसके परिवार तक पहुंचाती है, तब वह केवल एक केस बंद नहीं करती बल्कि एक टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ती है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप ने हजारों परिवारों को नई जिंदगी दी है। यह अभियान मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही यह हम सभी को यह संदेश भी देता है कि जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में घर और परिवार से दूर जाना समाधान नहीं है। संवाद, धैर्य और विश्वास ही हर समस्या का सबसे मजबूत उत्तर हैं। यदि यह संदेश समाज के प्रत्येक बच्चे और किशोर तक पहुंच जाए तो शायद भविष्य में अनेक परिवार गुमशुदगी की उस पीड़ा से बच सकेंगे, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है।</div><div style="text-align:justify;">       </div><div style="text-align:justify;"><strong><br /></strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>                                                                           *कांतिलाल मांडोत*</strong></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:35:40 +0530</pubDate>
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