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                <title>Clean Energy - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Clean Energy RSS Feed</description>
                
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                <title>यूज्ड ईवी: बदलती सोच, बदलता बाजार और बदलता भारत</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर बदलाव नई चीज़ों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई सोच से जन्म लेता है। भारत में यूज्ड इलेक्ट्रिक वाहनों का तेज़ी से बढ़ता बाजार इसका प्रमाण है। यह केवल ऑटोमोबाइल उद्योग की रफ्तार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विकास को उपभोग नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपयोगिता की कसौटी पर परखने का संकेत है। जिस वाहन को कल तक "सेकंड हैंड" कहकर नजरअंदाज किया जाता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही आज स्वच्छ पर्यावरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किफायती परिवहन और टिकाऊ अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद वाहक बन गया है। यूज्ड ईवी </span>(<span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक वाहन</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार की यह उड़ान महज़ आंकड़ों की कहानी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस भारत की पहचान है</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183194/used-ev-changing-thinking-changing-market-and-changing-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/future-mobility.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर बदलाव नई चीज़ों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई सोच से जन्म लेता है। भारत में यूज्ड इलेक्ट्रिक वाहनों का तेज़ी से बढ़ता बाजार इसका प्रमाण है। यह केवल ऑटोमोबाइल उद्योग की रफ्तार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विकास को उपभोग नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपयोगिता की कसौटी पर परखने का संकेत है। जिस वाहन को कल तक "सेकंड हैंड" कहकर नजरअंदाज किया जाता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही आज स्वच्छ पर्यावरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किफायती परिवहन और टिकाऊ अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद वाहक बन गया है। यूज्ड ईवी </span>(<span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक वाहन</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार की यह उड़ान महज़ आंकड़ों की कहानी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस भारत की पहचान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सीमित संसाधनों में भी भविष्य गढ़ना जानता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बदलाव की असली पहचान तब होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह आम आदमी की पहुँच में उतर आए। इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ यही हो रहा है। नई ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कारों और दोपहिया वाहनों की ऊँची कीमत मध्यम वर्ग के लिए अब भी चुनौती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार ने यह बाधा तोड़ दी है। कम कीमत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्याप्त बची हुई बैटरी लाइफ और आसान फाइनेंसिंग ने लाखों लोगों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन सुलभ कर दिए हैं। आर्थिक सीमाओं में बंधे लोग अब पर्यावरण-अनुकूल विकल्प चुन सकते हैं। पहली इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर अब केवल संपन्न वर्ग तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आम नागरिक की पहुँच में है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पूँजी हमेशा वहीं जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ भविष्य दिखाई देता है। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार ने वित्तीय संस्थानों का यही भरोसा जीता है। फाइनेंस कंपनियाँ इसे केवल ऋण का नया क्षेत्र नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि कम जोखिम और बेहतर प्रतिफल वाला निवेश मान रही हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता और निरंतर बढ़ती मांग ने इस बाजार को मजबूत आधार दिया है। जब निवेश विश्वास के साथ बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो स्पष्ट होता है कि बाजार क्षणिक उत्साह नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थायी संभावनाओं पर टिका है। यही भरोसा आने वाले वर्षों में यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार की रफ्तार को और तेज करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ा लाभ बाजार का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांसों का है। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार की असली उपलब्धि यही है कि हर इस्तेमाल किया गया इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल और डीजल आधारित वाहनों पर निर्भरता को थोड़ा और कम करता है। जहरीली हवा और बढ़ते प्रदूषण से जूझते भारतीय शहरों में यह बदलाव किसी शोरगुल वाले अभियान से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक मौन हरित क्रांति के रूप में सामने आया है। इसकी ताकत नारों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवहार में है। हर पुरानी इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर को मिला नया जीवन वातावरण में प्रदूषण घटाने और स्वच्छ भविष्य की ओर बढ़ाया गया एक ठोस कदम है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विकास का भविष्य नए संसाधन जुटाने में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुराने संसाधनों के बेहतर उपयोग में है। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार इसी सोच का विस्तार है। किसी पुराने इलेक्ट्रिक वाहन का पुनः उपयोग केवल वाहन नहीं बचाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके निर्माण में लगी ऊर्जा और खनिज भी बचाता है। नई बैटरियों के उत्पादन में भारी संसाधन लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि मौजूदा बैटरी का उपयोग पर्यावरणीय दबाव घटाता है। यही परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) का आधार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ वस्तुएँ खत्म नहीं होतीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नया उपयोग पाती हैं। इसलिए यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार केवल सस्ता विकल्प नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संसाधन संरक्षण का प्रभावी माध्यम भी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर उड़ान की परीक्षा उसकी ऊँचाई नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थिरता होती है। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार के सामने यही चुनौती है। बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद बैटरी की गुणवत्ता सबसे बड़ा प्रश्न बनी हुई है। हर खरीदार के मन में सवाल है कि बची हुई बैटरी कितने वर्षों तक भरोसेमंद रहेगी। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का सीमित विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षित सर्विस सेंटरों की कमी और बैटरियों के वैज्ञानिक पुनर्चक्रण (री-साइक्लिंग) का कमजोर ढाँचा इसकी रफ्तार रोक सकता है। इन कमियों का समाधान नहीं हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आज का उत्साह कल अविश्वास में बदल सकता है। तकनीकी बदलाव की सफलता केवल बिक्री नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत तंत्र से तय होती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समाधान बिखरे प्रयासों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साझा संकल्प में है। सरकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वाहन निर्माता और वित्तीय संस्थानों को मिलकर आगे बढ़ना होगा। बैटरियों का स्पष्ट स्टैंडर्डाइजेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेकंड लाइफ बैटरियों के सुरक्षित उपयोग की नीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए विशेष इंश्योरेंस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमाणित बैटरी हेल्थ रिपोर्ट और व्यापक चार्जिंग नेटवर्क इस क्षेत्र की बुनियादी जरूरतें हैं। सरकार दूरदर्शी नीति बनाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वाहन कंपनियाँ भरोसेमंद सेवाएँ दें और फाइनेंस कंपनियाँ आसान वित्त दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार केवल कारोबार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की हरित अर्थव्यवस्था का आधार बन सकता है। टिकाऊ विकास तभी संभव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब नीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक और वित्त एक दिशा में बढ़ें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरित विकास तभी सार्थक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह आम आदमी की पहुँच में हो। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार ने यह संभव किया है। जो हरित तकनीक कभी सम्पन्न वर्ग तक सीमित थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अब मध्यम वर्ग का विकल्प बन रही है। सीमित आय वाला परिवार कम कीमत में पहली इलेक्ट्रिक कार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूटर या बाइक खरीदकर केवल ईंधन नहीं बचाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा में अपना योगदान देता है। यही लोकतांत्रिक हरित क्रांति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ पर्यावरण संरक्षण विशेषाधिकार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनभागीदारी बन जाता है। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार ने साबित किया है कि टिकाऊ विकास महँगा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझदारी का विकल्प हो सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य उन देशों का होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो संसाधनों का मूल्य समझते हैं। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार ने दिखाया है कि विकास और पर्यावरण साथ चल सकते हैं। मजबूत नीतियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर आधारभूत ढाँचा और विश्वसनीय तकनीक मिली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भारत ग्रीन मोबिलिटी में विश्व नेतृत्व हासिल कर सकता है। तब दुनिया भारत को केवल बड़े वाहन बाजार के रूप में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि संसाधनों के पुनः उपयोग को विकास का आधार बनाने वाले देश के रूप में पहचानेगी। इस बदलाव का नायक कोई नया वाहन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वही पुराना वाहन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे समाज ने नया उद्देश्य दिया। कल की सेकंड हैंड कार आज पर्यावरण की प्रहरी है। यही सोच कल के भारत की पहचान बन सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:04:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रामीण भारत की शिक्षा और स्वास्थ्य को ऊर्जा दे सकते हैं सोलर प्लांट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> भारत वर्ष </span>2047 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री नरेंद्र मोदी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित ऊर्जा और आधुनिक शिक्षा जैसे अनेक महत्वाकांक्षी अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन इन सभी योजनाओं की सफलता का आधार एक ही है निर्बाध बिजली आपूर्ति।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के महानगरों और बड़े शहरों में बिजली की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए वहां डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुँच रहा है। इसके विपरीत तहसील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेज और अस्पताल आज</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182800/solar-plants-can-provide-energy-to-the-education-and-health"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/image1170x530cropped.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> भारत वर्ष </span>2047 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री नरेंद्र मोदी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित ऊर्जा और आधुनिक शिक्षा जैसे अनेक महत्वाकांक्षी अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन इन सभी योजनाओं की सफलता का आधार एक ही है निर्बाध बिजली आपूर्ति।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के महानगरों और बड़े शहरों में बिजली की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए वहां डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुँच रहा है। इसके विपरीत तहसील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेज और अस्पताल आज भी बिजली की अनियमित आपूर्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम वोल्टेज और बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में स्मार्ट क्लास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल लैब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंप्यूटर शिक्षा और आधुनिक चिकित्सा उपकरण केवल सरकारी योजनाओं की फाइलों तक सीमित होकर रह जाते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह भी है कि एक ओर सरकार सरकारी संस्थानों को हाईटेक बनाने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर इन संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए सबसे आवश्यक संसाधन बिजली की स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। बिना बिजली के डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की कल्पना अधूरी है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी स्थिति में सरकार को एक दूरदर्शी निर्णय लेते हुए देश के सभी शासकीय स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और अस्पतालों में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रूफटॉप सोलर प्लांट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थापित करने की राष्ट्रीय योजना लागू करनी चाहिए। यह केवल वैकल्पिक ऊर्जा का उपाय नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को एक साथ मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम होगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सोलर प्लांट स्थापित होने से इन संस्थानों को दिनभर निर्बाध बिजली मिलेगी। विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना व्यवधान जारी रहेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगी तथा अस्पतालों में जीवन रक्षक उपकरण बिजली संकट से प्रभावित नहीं होंगे। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का हर वर्ष बिजली बिलों पर होने वाला करोड़ों रुपये का व्यय भी काफी हद तक कम हो जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्बन उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता केवल योजनाएं बनाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें धरातल पर टिकाऊ बनाने की है। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि सरकार वास्तव में विकसित भारत का सपना साकार करना चाहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना होगा। शासकीय स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और अस्पतालों में सोलर प्लांट लगाने की पहल इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हो सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विकसित भारत की मजबूत नींव तभी रखी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब गांव का विद्यालय और अस्पताल भी शहरों की तरह रोशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक और ऊर्जा संपन्न होंगे।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 22:24:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनटीपीसी रिहंद पहुंचे क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक दिवाकर कौशिक, एफजीडी परियोजना व सौर ऊर्जा संयंत्र का किया निरीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बीजपुर /सोनभद्र-</strong> एनटीपीसी रिहंद परियोजना में क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (उत्तर) एवं सीईओ एनएसपीसीएल दिवाकर कौशिक का गरिमामयी दौरा संपन्न हुआ। परियोजना परिसर पहुंचने पर कार्यकारी निदेशक एवं परियोजना प्रमुख संजय असाटी ने उनका आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर उत्तरा क्लब की अध्यक्षा सीमा कौशिक भी उपस्थित रहीं।</div><div><br /></div><div>दौरे की शुरुआत में दिवाकर कौशिक ने ‘बालिका सशक्तीकरण अभियान-2026’ के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला का अवलोकन किया और उसमें भाग ले रही ग्रामीण बालिकाओं से संवाद स्थापित किया। उन्होंने बालिकाओं के जन्मदिन समारोह में भी सहभागिता करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।</div><div><br /></div><div>इसके पश्चात प्रशासनिक भवन में आयोजित बैठक में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180984/ntpc-regional-executive-director-diwakar-kaushik-reached-rihand-and-inspected"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001712795.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बीजपुर /सोनभद्र-</strong> एनटीपीसी रिहंद परियोजना में क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (उत्तर) एवं सीईओ एनएसपीसीएल दिवाकर कौशिक का गरिमामयी दौरा संपन्न हुआ। परियोजना परिसर पहुंचने पर कार्यकारी निदेशक एवं परियोजना प्रमुख संजय असाटी ने उनका आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर उत्तरा क्लब की अध्यक्षा सीमा कौशिक भी उपस्थित रहीं।</div><div><br /></div><div>दौरे की शुरुआत में दिवाकर कौशिक ने ‘बालिका सशक्तीकरण अभियान-2026’ के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला का अवलोकन किया और उसमें भाग ले रही ग्रामीण बालिकाओं से संवाद स्थापित किया। उन्होंने बालिकाओं के जन्मदिन समारोह में भी सहभागिता करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।</div><div><br /></div><div>इसके पश्चात प्रशासनिक भवन में आयोजित बैठक में उन्होंने एसएमसी सदस्यों के साथ संयंत्र के प्रदर्शन एवं परिचालन गतिविधियों की समीक्षा की। साथ ही यूनियन एवं एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं एवं सुझावों पर चर्चा की।</div><div><br /></div><div>एफजीडी परियोजना और सौर ऊर्जा संयंत्र का किया निरीक्षण</div><div>दौरे के दौरान दिवाकर कौशिक ने पर्यावरणीय मानकों को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से निर्माणाधीन फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) परियोजना का निरीक्षण किया। उन्होंने एफजीडी स्टेज-1 एवं स्टेज-3 के लाइम स्टोन एवं जिप्सम हैंडलिंग सिस्टम के विद्युत भवन का उद्घाटन भी किया।</div><div><br /></div><div>इसके अलावा उन्होंने निर्माणाधीन 20 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र तथा इनटेक चैनल का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की जानकारी प्राप्त की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।</div><div><br /></div><div>सांस्कृतिक संध्या में प्रतिभाओं का सम्मान</div><div><br /></div><div>शाम को तरंग प्रेक्षागृह में आयोजित सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम में टाउनशिप के विद्यालयों, बाल भवन, ईडब्ल्यूए तथा महिला क्लब वेलफेयर विंग के बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।</div><div><br /></div><div>अपने संबोधन में दिवाकर कौशिक ने रिहंद परियोजना को उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय का गौरवशाली स्तंभ बताते हुए यहां की उत्कृष्ट कार्य संस्कृति, उपलब्धियों एवं कर्मचारियों की प्रतिबद्धता की सराहना की। कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।</div><div>पौधरोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश</div><div><br /></div><div>रिहंद परियोजना से प्रस्थान पूर्व दिवाकर कौशिक, सीमा कौशिक, संजय असाटी एवं वर्तिका महिला मंडल की अध्यक्षा नीलू असाटी ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास का संदेश दिया।</div><div><br /></div><div>इस अवसर पर एनटीपीसी रिहंद के वरिष्ठ अधिकारी, महिला क्लब की पदाधिकारी, कर्मचारी एवं उनके परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180984/ntpc-regional-executive-director-diwakar-kaushik-reached-rihand-and-inspected</link>
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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:38:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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