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                <title>rahul gandhi. congress - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>rahul gandhi. congress RSS Feed</description>
                
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                <title>चुनाव परिणाम के लिए उत्सुकता बढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div>देश के तमाम एक्जिट पोल ने तीसरी बार लगातार एनडीए की सरकार बनने का अनुमान लगाया है। यह अनुमान ही है क्योंकि कि स्वयं चैनलों के संपादक बीच प्रोग्राम में कहते हैं कि यह एक्जिट पोल हैं एग्जेक्ट पोल नहीं। मतलब यह जरूरी नहीं कि जो एक्जिट पोल में दिखाया गया है परिणाम उसी के अनुसार आयें। लेकिन यह अनुमान है आ भी सकते हैं। विपक्ष इन एक्जिट पोल को मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। जब कि एक्जिट पोल जानकर भारतीय जनता पार्टी गदगद है। लेकिन अब जनता और नेता तथा तमाम राजनैतिक विश्लेषक परिणाम जानने को उत्सुक</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141900/curiosity-increased-for-election-results"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/mod-rahul.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>देश के तमाम एक्जिट पोल ने तीसरी बार लगातार एनडीए की सरकार बनने का अनुमान लगाया है। यह अनुमान ही है क्योंकि कि स्वयं चैनलों के संपादक बीच प्रोग्राम में कहते हैं कि यह एक्जिट पोल हैं एग्जेक्ट पोल नहीं। मतलब यह जरूरी नहीं कि जो एक्जिट पोल में दिखाया गया है परिणाम उसी के अनुसार आयें। लेकिन यह अनुमान है आ भी सकते हैं। विपक्ष इन एक्जिट पोल को मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। जब कि एक्जिट पोल जानकर भारतीय जनता पार्टी गदगद है। लेकिन अब जनता और नेता तथा तमाम राजनैतिक विश्लेषक परिणाम जानने को उत्सुक हैं। एक्जिट पोल यदि सही निकले तो ये राजनैतिक विश्लेषक कहेंगे कि देखिए हमने जो कहा था वही हुआ और यदि विपरीत निकले तो यह कहेंगे कि हमने अनुमान लगाया था और हम उसके पास तक पहुंचाने में कामयाब हुए हैं।</div>
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<div>खैर अब लोगों को एक एक मिनट का सब्र नहीं हो रहा है। मार्केट में चाय की दुकानों पर चर्चा शुरू हो चुकी है। चार जून को हमें एक और सरकार मिल जाएगी जो अगले पांच वर्षों तक देश को चलाएगी। जनता को उम्मीद है कि जो भी सरकार आयेगी वह जनता के हित में काम करेगी। दरअसल एक्जिट पोल की विश्वसनीयता जो भी हो लेकिन यह एक तरह का टीवी कार्यक्रम है जो बहुत सारे दर्शकों को आकर्षित करता है। भारती में चुनाव प्रक्रिया बहुत लंबे समय तक चलती है और उसका सीधा कारण देश की आबादी है। ईवीएम के द्वारा अब चुनाव परिणाम जल्दी आने लगे हैं। अन्यथा बैलेट पेपर के द्वारा जब चुनाव होते थे तब वोटों की गिनती में बहुत समय लगता था। आज भी विपक्षी दल ईवीएम से चुनाव न कराकर बैलेट से ही चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। खैर यह तो एक राजनैतिक मुद्दा है। लेकिन ईवीएम से समय की तो बचत होती है। और इसीलिए एक देश एक चुनाव पर भी मंथन हो रहा है ताकि देश का बहुमूल्य समय बच सके।</div>
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<div>लोकसभा चुनाव के सभी चरण पूरे हो चुके हैं अब देश जानता चाहता है कि आखिरकार सरकार किसकी बन रही है और लोगों को इसलिए उत्सुकता होती है कि उनको चुनी हुई सरकार से उम्मीद होती है कोई रोजगार की उम्मीद करता है कोई मंहगाई पर लगाम लगने की उम्मीद करता है तो कोई विकास की उम्मीद करता है। उम्मीद हर व्यक्ति को होती है। उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक लोकसभा सीटों वाला राज्य है और यहां के परिणाम पर लोगों की खास नजर रहती है। और कहा जाता है कि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से ही होकर गुजरता है। मतलब जिसने उत्तर प्रदेश में बढ़त बना ली वही दिल्ली की सरकार बनाता है और यह सच भी है देश 20 प्रतिशत सीटें उत्तर प्रदेश में ही हैं। पिछले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की अच्छी खासी पकड़ उत्तर प्रदेश में रही है। और इस लोकसभा चुनाव में भी एक्जिट पोल लगभग उतनी ही सीटें भारतीय जनता पार्टी को दे रहे हैं। उसमें थोड़ा सा अंतर यह आया है कि जो 10 सीटें बहुजन समाज पार्टी के पास थीं वह समाजवादी पार्टी की तरफ शिफ्ट होती दिखाई दे रही हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सीटें पिछले बार की तरह ही रहने की उम्मीद एक्जिट पोल में दिखाई जा रही है।</div>
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<div>हर एक्जिट पोल का यदि औसत निकाला जाऐ तो भारतीय जनता पार्टी को 350 सीटों के आसपास मिलती दिख रहीं हैं। ऐसे में एक बड़ा प्रश्न यह है कि जो राजनैतिक विश्लेषक पहले यह बोल रहे थे कि इस बार मतदाता बहुत शांत है और इसलिए यहां एनडीए काफी नीचे आ सकता है। उनका यह अनुमान कहां गया। एक टीवी चैनल पर जाने माने राजनैतिक विश्लेषक अभय दुबे का मानना यह है कि जब मतदाता शांत होता है तो परिणाम रिपीट करते हैं यदि परिणाम एक्जिट पोल के हिसाब से आ रहे हैं। केवल प्रशांत किशोर ने यह घोषणा की थी कि एनडीए 350 सीटों के आसपास ही ठहरेगा। और इस पर काफी चर्चा हुई थी। योगेन्द्र यादव का गणित अलग था और उन्होंने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी अकेले 250 से 272 के आसपास तक ठहरेगी। यदि एक्जिट पोल सर्वे सही साबित हुए तो योगेन्द्र यादव का गणित फेल हो जाएगा और प्रशांत किशोर की भविष्यवाणी सही साबित होगी।</div>
<div> </div>
<div>बरहाल आरोप प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो चुकी है। और यह आरोप प्रत्यारोप मतगणना के कुछ दिन बाद तक चलेंगे और फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा। आखिर बाद में सब कुछ जनता को ही करना है। लेकिन यह बात सत्य है कि चुनाव को लेकर अब लोगों में उत्साह धीरे धीरे कम होता जा रहा है। पहले समय यह था कि हर नुक्कड़ पर चाय की दुकानें हुआ करतीं थीं और वहीं पर सारी राजनीतिक चर्चाएं होती थीं। बड़े-बड़े विद्वान,  राजनैतिज्ञ, लेखक, शिक्षक और पत्रकार वहीं पर मिल जाते थे और चुनाव की चर्चा हो जाती थी। लेकिन अब समय में काफी परिवर्तन हुआ है। चाय की दुकानें बंद हो गईं हैं और जो हैं भी वहां दुकानदार बैठने के लिए बैंच तक नहीं डालता है ताकि वहां भीड़ लगे।</div>
<div> </div>
<div>पहले सही जानकारी चौराहों पर ही मिलती थी लेकिन अब हर घर में साधन हैं और टीवी चैनल वाले दिन भर चर्चा किए ही रहते हैं। अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए एक से एक मजेदार समाचार के प्रोग्राम लेकर आते हैं जिससे ज्यादा से ज्यादा जनता को अट्रैक्ट कर सकें। खेमेबाजी पहले भी थी और आज भी है। मीडिया भी दो भागों में बंटा हुआ है। एक भाग टीवी पर है तो दूसरा भाग यूट्यूब पर आ गया है। जनता दोनों संसाधनों से कार्यक्रमों को देखती है। समय के साथ साथ अब प्रतिद्वंदिता और अधिक बढ़ चुकी है। लेकिन यह प्रतिद्वंदिता हकीकत से परे है। हर व्यक्ति आज समझदार है लेकिन वह ज्ञान से परिपूर्ण नहीं है। खैर अब ज्यादा समय नहीं बचा है 4 जून की दोपहर तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि किसकी सरकार बनने जा रही है।</div>
<div> </div>
<div><strong>जितेन्द्र सिंह पत्रकार  </strong></div>
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<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jun 2024 17:06:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>मोदी बनाम मुद्दा बना चुनावी विमर्श</title>
                                    <description><![CDATA[<div>  <strong>देश में 18 वीं लोकसभा निर्वाचित करने का चुनावी दौर जैसे जैसे आगे बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे चुनावी माहौल में भी तल्ख़ी बढ़ती जा रही है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंह से ऐसी तमाम बातें सुनी जा रही हैं जिसकी  देश के प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति से उम्मीद भी नहीं की जा सकती। वैसे तो प्रधानमंत्री पद पर बैठते ही मोदी ने अपने बड़पोलेपन और झूठ से देश और दुनिया को आश्चर्य चकित करना शुरू कर दिया था। परन्तु उससे भी बड़े आश्चर्य की बात तो यह कि उन्होंने अपने इस बड़पोलेपन,झूठ और अवैज्ञानिक</strong></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141166/modi-vs-issue-becomes-election-discussion"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/rahul-modi.jpg" alt=""></a><br /><div> <strong>देश में 18 वीं लोकसभा निर्वाचित करने का चुनावी दौर जैसे जैसे आगे बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे चुनावी माहौल में भी तल्ख़ी बढ़ती जा रही है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंह से ऐसी तमाम बातें सुनी जा रही हैं जिसकी  देश के प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति से उम्मीद भी नहीं की जा सकती। वैसे तो प्रधानमंत्री पद पर बैठते ही मोदी ने अपने बड़पोलेपन और झूठ से देश और दुनिया को आश्चर्य चकित करना शुरू कर दिया था। परन्तु उससे भी बड़े आश्चर्य की बात तो यह कि उन्होंने अपने इस बड़पोलेपन,झूठ और अवैज्ञानिक बातों पर विराम लगाने के बजाये इसे और भी बढ़ाना शुरू कर दिया। शायद उन्होंने देश की जनता को मूर्ख और अनपढ़ समझ रखा था। नाली से गैस निकालकर चाय बनाना,ट्रैक्टर के ट्यूब में गोबर गैस भरकर उससे इंजन चलाकर खेतों की सिंचाई करना, बादल में रडार का काम न करना जैसी अनेक बेतुकी व तथ्यविहीन बातें बोलकर प्रधानमंत्री ने अपने पद की गरिमा को दाग़दार किया।</strong></div>
<div> </div>
<div><strong> इसके अतिरिक्त उनका दूसरा प्रिय मिशन रहा गांधी नेहरू परिवार का निम्न स्तर तक विरोध,कांग्रेस मुक्त भारत की उनकी दिली मनोकामना, मुसलमानों का हद दर्जे तक विरोध और विपक्षी नेताओं विशेषकर कांग्रेस नेता राहुल गाँधी द्वारा बोली गयी बातों को अपनी सुविधा के हिसाब से ट्विस्ट देना और बात का बतंगड़ बना देना। मिसाल के तौर पर राहुल गाँधी ने 21 मार्च को ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के समापन के अवसर पर मुंबई के शिवाजी पार्क में एक रैली को संबोधित करते हुये कहा था, कि ‘‘हिन्दू धर्म में शक्ति शब्द होता है। हम शक्ति से लड़ रहे हैं...एक शक्ति से लड़ रहे हैं। </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>बाद में उन्होंने 'शक्ति ' शब्द की और व्याख्या करते हुये कहा कि - वह शक्ति क्या है? हमारी लड़ाई ‘नफ़रत भरी आसुरी शक्ति’ के ख़िलाफ़ है। ‘हमारी आसुरी शक्ति से लड़ाई हो रही है, नफ़रत भरी आसुरी शक्ति से। ’परन्तु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘शक्ति’ शब्द का प्रयोग अपनी सुविधानुसार करते हुये कहा कि 'उनके लिए हर मां-बेटी ‘शक्ति’ का स्वरूप है और वह उनके लिए अपनी जान की बाज़ी लगा देंगे। इस तरह के अनेक उदाहरण हैं जिससे यह साबित होता है कि मोदी सिर्फ़ फ़ुज़ूल की बातों में लोगों को उलझाकर जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं। </strong></div>
<div><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-05/modi-elligation.jpg" alt="modi elligation"></img></strong></div>
<div><strong>परन्तु  2024 के इस ऐतिहासिक चुनाव में इंडिया गठबंधन के नेता विशेषकर राहुल व प्रियंका गांधी अपने चुनाव प्रचार अभियान को जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर केंद्रित करने में पूरी तरह सफल रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि कांग्रेस नेता, मोदी की घटिया व निम्नस्तरीय बातों से भी लोगों को अवगत कराकर यह बताने में भी सफल रहे हैं कि जनता से मोदी का निरर्थक इकतरफ़ा संवाद दरअसल जनता का ध्यान भटकाने के लिये है।  और यह भी कि प्रधानमंत्री कि इस तरह की संवाद शैली देश के प्रधानमंत्री जैसे पद पर बैठे व्यक्ति के लिए अशोभनीय है तथा देश की बदनामी का सबब भी है। </strong><strong>साथ ही विपक्ष जनता को यह बताने में भी कामयाब हुआ है कि किस तरह मोदी फ़ुज़ूल की बातों में लोगों को उलझाकर और लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ कर जनसरोकार से जुड़ी वास्तविक समस्याओं से लोगों का ध्यान भटकने की कोशिश कर रहे हैं। </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>जब मोदी कहते हैं कि कांग्रेस ने 70 वर्षों में देश के लिये कुछ बनाया ही नहीं तो प्रियंका गाँधी उसके जवाब में मोदी से ही पूछ रही हैं कि जिन दर्जनों सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पी एस यू ) को आप अपने चंद मित्रों के हवाले कर रहे हैं वह कांग्रेस के नहीं तो किसके बनवाये हुये हैं ? विपक्ष मोदी से उन्हीं के वादों को याद दिलाते हुये यह भी पूछ रहा है कि 10 साल पहले आपने लोगों के खाते  में 15 लाख रुपये डालने को कहा था, वह क्यों नहीं आये ? जबकि चंद पूंजीपतियों के 16 लाख करोड़ रुपये क़र्ज़ मुआफ़ कर दिये गये ? कहाँ हैं आपके वादे के 10 वर्ष पूर्व घोषित किये गये 100 स्मार्ट सिटी ? कहाँ हैं आपके वादों के 2 करोड़ रोज़गार ? 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वचन कहां गया ?</strong></div>
<div> </div>
<div><strong>आर जे डी नेता तेजस्वी यादव ने तो अपने चुनाव प्रचार के दौरान एक नये तरीक़े का प्रयोग किया। उन्होंने पूर्व में नरेंद्र मोदी द्वारा जनता से किये गए वादों का एक ऑडियो उन्हीं की आवाज़ में अपनी जनसभा में सुना डाला। अपनी तरह का यह अनूठा प्रयोग था। मोदी को उन्हीं के वादों की याद दिलाकर उन्हें कटघरे में खड़ा करना कितना विपक्ष के लिये कितना कारगर साबित हो रहा है इसका अंदाज़ा चुनाव प्रचार अभियान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के दिनोंदिन बिगड़ते जा रहे लहजों व उनके द्वारा उठाये जा रहे निरर्थक व बचकाना क़िस्म के मुद्दों से लगाया जा सकता है। </strong></div>
<div><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-05/modi-rahul.jpg" alt="modi rahul"></img></strong></div>
<div><strong>कभी कहते हैं कि कांग्रेस के लोग मटन बनाने का मौज ले रहे हैं। कभी बोलते हैं कि अगर आपके पास दो भैंस है तो कांग्रेस उसमें से एक भैंस छीन कर ले जाएगी। कभी कांग्रेस व विपक्षी गठबंधन को हिन्दू विरोधी  बताते हुये कहते हैं कि यह हिन्दू धर्म को ख़त्म करना चाहते हैं। तो कभी यह कि कांग्रेस सत्ता में आयी तो क्रिकेट टीम में मुसलमानों को भर देगी। यहाँ तक कि कांग्रेस सत्ता में आयी तो बहनों का मंगल सूत्र छीन लेगी और आपका सोना ले लेगी। यानी अजीब अजीब सी बदहवासी भरी बातें जिसका राजनीति से कोई वास्ता ही नहीं, इसतरह की बातें कर वह उन सवालों से बचना चाहते हैं जो जनता के वास्तविक सवाल हैं। </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>नरेंद्र मोदी के फ़ुज़ूल,निम्नस्तरीय,ग़ैर राजनैतिक व साम्प्रदायिक विद्वेष से भरे बयान निश्चित रूप से इस बात का सुबूत हैं कि वे विपक्ष द्वारा उठाये जा रहे जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों के सामने बौखला से गए हैं। जब कांग्रेस व इण्डिया गठबंधन सत्ता में आने पर अग्निवीर योजना ख़त्म कर सैनिकों की पूर्ववत भर्ती करने की बात करती है तो देश के युवाओं में उम्मीद जगती है। किसानों के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य का क़ानून बनाने की बात कर विपक्ष किसानों में आस जगाता नज़र आता है। कांग्रेस पार्टी की 5 गारंटी ने तो नरेंद्र मोदी को इतना असहज कर दिया है कि वह बौखला कर कांग्रेस के घोषणा पत्र को मुस्लिम लीग का घोषणा पत्र बताने लगे हैं। बेशक यह हालात इस निष्कर्ष पर पहुँचने के लिये काफ़ी हैं कि विपक्षी इंडिया गठबंधन चुनावी विमर्श को मोदी बनाम मुद्दा बनाने में पूरी तरह कामयाब रहा है। </strong></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:large;"><strong>तनवीर जाफ़री   </strong></span></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 May 2024 16:20:12 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली कांग्रेस में इस्तीफे, अलग पार्टी के रणी शिगूफे</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात। एसडी सेठी।</strong></p>
<p><strong>  दिल्ली। </strong>लोकसभा रण के बीच दिल्ली कांग्रेस में इस्तीफे का सिलसिला जारी है।इसी कडी में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कांग्रेस से पीछा छुडाते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा तो दिया ही साथ ही अपने साथ के कदावार नेताओ ने भी शुक्रवार  को कांग्रेस का हाथ छोडकर भारतीय जनता पार्टी के फूल को थाम लिया है। भाजपा में शामिल होने वालों में अरविंदर सिंह लवली, राज कुमार चौहान, नसीब सिंह, और अनिल बसोया के नाम प्रमुख है।सभी ने कांग्रेस पार्टी को दिशाहीन होना बताया है। जिसके चलते आम आदमी पार्टी से गठबंधन के अलावा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/140910/rani-shigufe-of-different-party-resigns-from-delhi-congress"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/screenshot_20240505_181656_google.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात। एसडी सेठी।</strong></p>
<p><strong> दिल्ली। </strong>लोकसभा रण के बीच दिल्ली कांग्रेस में इस्तीफे का सिलसिला जारी है।इसी कडी में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कांग्रेस से पीछा छुडाते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा तो दिया ही साथ ही अपने साथ के कदावार नेताओ ने भी शुक्रवार  को कांग्रेस का हाथ छोडकर भारतीय जनता पार्टी के फूल को थाम लिया है। भाजपा में शामिल होने वालों में अरविंदर सिंह लवली, राज कुमार चौहान, नसीब सिंह, और अनिल बसोया के नाम प्रमुख है।सभी ने कांग्रेस पार्टी को दिशाहीन होना बताया है। जिसके चलते आम आदमी पार्टी से गठबंधन के अलावा लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय  की जगह बाहरी कैंडीडेट को टिकट देना है। इनमें नोर्थ ईस्ट सीट से कन्हैया कुमार है। जिस पर कांग्रेसियों की टीम ने हाथ खडे कर दिए है। सभी कांग्रेस से पीछा छुडाने वालों का आरोप है कि पार्टी में कोई जन सुनवाई नहीं होती।</p>
<p>कुछ टाॅप लीडरों ने हाई कमान को अंधी गली में डाल दिया है। वह अपनी मनमानी कर रहे हैं। ताजा मामले में नसीब सिंह ने खुलासा किया कि दीपक बाबरिया ने अरविंदर सिंह लवली समेत समेत 21 लोगो को जिनमें  संदीप दीक्षित,राज कुमार चौहान ,नीरज,बसोया जैसे लोगो के नाम थे,इन नेताओ को पार्टी से बाहर निकालने की बात की थी।  पार्टी लाइन के खिलाफ आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोनिया गांधी,शीला दीक्षित के खिलाफ कितना कुफ्र बका ।उन्हें जेल भेजने की बात तक की।आज हालात ये हो गई  कि कांग्रेस पार्टी ने आप के साथ गठबंधन कर समर्पित कार्यकर्ताओ का मनोबल तोड दिया है।ऐसी हालत हो गई कि हम कार्यकर्ताओ को मुंह दिखाने लायक नहीं छोडा है।नसीब सिंह ने तो यहां तक कह डाला कि हाईमान को मिसगाईड किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस तीन नहीं बल्कि सिर्फ एक सीट पर चुनाव लड रहे हैं।</p>
<p>बाकी दोनो बाहरी नेता है। ये दोनो तो केजरीवाल के ही लोग है।गठबंधन की बात करे तो ये आप नेता अपने पोस्टर में हमारे नेता की फोटो तक नहीं लगा रहे हैं।दरअसल हमें अलग अकेले लडना चाहिए था। पंजाब में कांग्रेस अलग लड रही है ऐसे में नव नियुक्त दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र यादव जो पंजाब के भी प्रभारी है ,कैसे समाजस्य बिठाएगें? ये ही सवाल तमाम कार्यकर्ताओ के गले नहीं उतर रहा है। बता दें कि सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस  पार्टी से इस्तीफा दे रहे नेता कांग्रेस में एक और फाड की तैयारी में है। पार्टी का हाथ झटकने वाले नेता दावा कर रहे है कि 35 से 40 नेता आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन से खासे खफा है।</p>
<p>इनमें से कई और नेता आने वाले दिनों में इस्तीफा दे सकते है। जिस तरह से एक स्ट्रेटजी के तहत इस्तीफे हो रहे हैं इससे इस कयास को बल मिल रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में कांग्रेस पार्टी में बगियों की संख्या और बढने वाली है। कांग्रेस पार्टी में बडा टूट हो सकता है।और ये बगावती नेता एक साथ मिलकर अपनी नई पार्टी बना सकते है। नसीब सिंह ने भी खुलासा कर स्थित साफ कर दी है कि नई पार्टी बनाने की पूरी प्लानिंग है। दरअसल अधिकतर स्थानीय  नेताओ  को लगता है कि आप के साथ बेमेल एलाईंस के बाद उनकी राजनीती कमजोर पड रही है।उन्हें अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। बागी नेताओ का मानना है कि अगर आप+कांग्रेस का एलाईस जारी रहा तो अगले दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनके टिकट की दावेदारी ही खत्म हो जाएगी।</p>
<p>ऐसा इसलिए कि अधिकतर इलाके में आप के जीते हुए विधायक है।इससे कांग्रेस के हिस्से में सीटों की संख्या के लाले भी पड सकते है।उल्लेखनीय है कि 15 साल तक लगातार दिल्ली का शासन करने के बाद कांग्रेस पिछले 10 साल से दिल्ली की राजनीतिक हाशिये पर आ गई है। चुनावी जंगी जमीन पर कांग्रेस बहुत पिछड चुकी है। हालत ये है कि राजधानी दिल्ली में एक भी विधायक तक नही है।कांग्रेस दिल्ली में सिर्फ 3-4 प्रतिशत ही रह गई है।ऐसे में एक साथ कांग्रेस के कई नेता पार्टी छोडकर अपनी नई पार्टी बनाते है तो यह सीधा -सीधा संगठन चलाने वालों पर हमला होगा। उनकी कार्यशैली पर भी सवाल खडे होगें।इससे पार्टी ओर कमजोर होगी।  इससे पार्टी का ढांचा जरूर चरमरा जाएगा। पर इन हालात से बेखबर पार्टी के टाॅपररस को क्या परवाह?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 May 2024 17:27:10 +0530</pubDate>
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                <title>पूर्व निर्धारित मुद्दे को छोड़कर चीनी घुसपैठ का मुद्दा ज्यादा अहम: राहुल गाँधी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>रक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति की बैठक में एक बार फिर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सत्ता पक्ष के सांसद आमने-सामने आ गए. सूत्रों के मुताबिक, संसद भवन के एनेक्सी बिल्डिंग में सुबह हुई संसदीय समिति की बैठक में अचानक राहुल गांधी ने चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठा दिया. इस पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने ऐतराज जताया. उनका कहना था कि, इस बैठक के लिए जो पूर्व निर्धारित मुद्दे तय हैं, उसी पर चर्चा हो लेकिन राहुल चीनी घुसपैठ के मुद्दे को अहम बताते हुए उस पर सवाल करते रहे.</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक बमुश्किल से ये मुद्दा शांत हुआ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134959/leaving-aside-the-predetermined-issue-the-issue-of-chinese-intrusion"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/p8jgpg3_rahul-gandhi_625x300_22_september_23.webp" alt=""></a><br /><p>रक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति की बैठक में एक बार फिर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सत्ता पक्ष के सांसद आमने-सामने आ गए. सूत्रों के मुताबिक, संसद भवन के एनेक्सी बिल्डिंग में सुबह हुई संसदीय समिति की बैठक में अचानक राहुल गांधी ने चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठा दिया. इस पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने ऐतराज जताया. उनका कहना था कि, इस बैठक के लिए जो पूर्व निर्धारित मुद्दे तय हैं, उसी पर चर्चा हो लेकिन राहुल चीनी घुसपैठ के मुद्दे को अहम बताते हुए उस पर सवाल करते रहे.</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक बमुश्किल से ये मुद्दा शांत हुआ ही था कि एक अन्य कांग्रेस सांसद ने वन रैंक वन पेंशन का मसला उठा दिया. एक बार फिर सत्ता पक्ष के सांसदों ने इस अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की और बैठक में पहले से तय मुद्दों से अलग मुद्दे उठाने के लिए राहुल के साथ दूसरे सांसदों से कड़ा एतराज जताया. उनका कहना था कि बार-बार सिर्फ राजनीति के लिए ऐसी चीजें दोहराई जा रहीं हैं, जो गलत है.</p>
<p>बता दें कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पहले भी भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. कुछ दिन पहले ही लद्दाख के दौरे पर गए राहुल गांधी ने कहा था कि यहां के लोगों ने मुझे बताया है कि लद्दाख में चीनी सीमा घुसी हुई है. चीन के सैनिकों ने हमारी जमीन छीन ली है. इस सवाल के साथ ही राहुल गांधी ने सरकार को घेरने की कोशिश की थी.</p>
<p>1 मई 2020 को भारत और चीन के सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर झड़प हो गई थी. इस झड़प में कई सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए थे. इस घटना के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था. अभी दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधरे भी नहीं थे कि 15 जून की रात गलवान घाटी पर भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने आ गए.</p>
<p> इस घटना में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए जबकि चीन के 38 से ज्यादा जवानों की मौत हो गई. इस घटना ने दोनों देशों के रिश्ते नाजुक दौर में पहुंचा दिए. इसके बाद से करीब एक साल तक दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति रही. दोनों ओर से बॉर्डर पर भारी संख्या में हथियार और 50,000 से 60,000 सैनिकों की तैनाती की गई.</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Sep 2023 19:45:16 +0530</pubDate>
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