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                <title>देश में एनर्जी की कमी नहीं हैं : पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी</title>
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<div>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </div>
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<div>  सिद्धार्थनगर। भारत सरकार के मंत्री  पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, हरदीप सिंह पुरी द्वारा  सांसद  जगदम्बिका पाल,  विधायक  श्याम धनी राही, जिलाध्यक्ष भाजपा  दीपक मौर्या, कुलपति सिद्धार्थ विश्वविद्यालय प्रो0 कविता शाह, सीडीओ बलराम सिंह के साथ कपिलवस्तु स्तूप पर लाइट एण्ड साउण्ड शो का उद्घाटन किया गया। </div>
<div>  मंत्री, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, भारत सरकार हरदीप सिंह पुरी ने गार्ड ऑफ आनर की सलामी ली। कपिलवस्तु स्तूप पर लाइट एण्ड साउण्ड शो विधिवत पूजन कर शिलापट का अनावरण कर उद्घाटन किया तथा भन्तेगणों से वार्ता किया। इसके साथ ही स्तूप की परिक्रमा किया। </div>
<div>इसके पश्चात  मंत्री, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184484/there-is-no-energy-shortage-in-the-country-petroleum-minister"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1785590286564.jpg" alt=""></a><br /><div>
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<div>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </div>
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<div> सिद्धार्थनगर। भारत सरकार के मंत्री  पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, हरदीप सिंह पुरी द्वारा  सांसद  जगदम्बिका पाल,  विधायक  श्याम धनी राही, जिलाध्यक्ष भाजपा  दीपक मौर्या, कुलपति सिद्धार्थ विश्वविद्यालय प्रो0 कविता शाह, सीडीओ बलराम सिंह के साथ कपिलवस्तु स्तूप पर लाइट एण्ड साउण्ड शो का उद्घाटन किया गया। </div>
<div> मंत्री, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, भारत सरकार हरदीप सिंह पुरी ने गार्ड ऑफ आनर की सलामी ली। कपिलवस्तु स्तूप पर लाइट एण्ड साउण्ड शो विधिवत पूजन कर शिलापट का अनावरण कर उद्घाटन किया तथा भन्तेगणों से वार्ता किया। इसके साथ ही स्तूप की परिक्रमा किया। </div>
<div>इसके पश्चात  मंत्री, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, भारत सरकार  हरदीप सिंह पुरी द्वारा  सांसद  जगदम्बिका पाल,  विधायक श्याम धनी राही, जिलाध्यक्ष भाजपा दीपक मौर्या, कुलपति सिद्धार्थ विश्वविद्यालय प्रो0 कविता शाह, मुख्य विकास अधिकारी  बलराम सिंह के साथ विपश्यना पार्क का उद्घाटन किया। </div>
<div> उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर्यटन सुविधा केन्द्र पर विभिन्न विभागों द्वारा लगायी गयी प्रदर्शनी का अवलोकन किया।</div>
<div> पूर्व माध्यमिक विद्यालय बर्डपुर की छात्राओं द्वारा स्वागत गीत तथा शिवपति इन्टर कालेज की छात्राओं द्वारा कपिलवस्तु गीत प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात काला नमक चावल तथा गौतम बुद्ध पर आधारित लघु फिल्म प्रदर्शित किया गया। </div>
<div>कार्यकम को संबोधित करते हुए मंत्री, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, भारत सरकार  हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मुझे अत्यन्त प्रसन्नता है कि आज सिद्धार्थनगर आने का अवसर मिला है। 2017 में  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे अपने मंत्रीमण्डल में शामिल किया। सीएसआर के अन्तर्गत कम्पनियां अपने लाभ का 02 प्रतिशत देती है जिससे विकास का कार्य कराया जाता है।  प्रधानमंत्री नारी शक्ति का सम्मान कर रहे है। उनके स्वास्थ्य के लिए बहुत सी योजनायें चलायी गयी है। सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन योजनान्तर्गत शौचालय का निर्माण कराकर गांवों को ओडीएफ किया। प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत 04 करोड़ आवास बने है तथा 2024 के बाद 03 करोड़ नये आवास बनाने का संकल्प लिया गया है। केन्द्र सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं में लक्ष्य प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है। 2014 में पूरे देश में सिर्फ 14 करोड़ गैस कनेक्शन थे।  प्रधानमंत्री  ने उज्जवला योजनान्तर्गत 12 करोड़ पात्र परिवारों को निःशुल्क गैस कनेक्शन दिया है। अन्य देशों में गैस और पेट्रोल की समस्या है लेकिन हमारे देश में स्थिति सामान्य है तथा मूल्य में बढ़ोत्तरी नही किया गया है। सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी कम किया गया है।  सांसद  जगदम्बिका पाल  ने जो भी प्रोजेक्ट की मांग किया है उसे शीघ्र ही पूरा किया जायेगा। </div>
<div> इस दौरान सांसद  जगदम्बिका पाल ने  मंत्री, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, भारत सरकार  हरदीप सिंह पुरी एवं अन्य सभी का स्वागत करते हुए कहा कि पूरे विश्व में तेल की समस्या थी लेकिन  पेट्रोलयम मंत्री के नेतृत्व में हमारे देश में स्थिति सामान्य रही।  गौतम बुद्ध ने पूरी दुनिया को शान्ति अंहिसा और करूणा का सन्देश दिया। खुदाई में मिले गौतम बुद्ध के अवशेष को वापन लाने का काम  प्रधानमंत्री  ने किया है।</div>
<div> विधायक श्यामधनी राही  मंत्री, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, भारत सरकार  हरदीप सिंह पुरी एवं अन्य सभी का स्वागत करते हुए कहा कि यह जनपद आंकाक्षी जनपद है। आज कपिलवस्स्तु स्तूप पर लाइट साउण्ड शोे तथा विपश्यना पार्क का उद्घाटन होने  से जनपद के विकास को एक नई दिशा मिलेगी। </div>
<div>इस अवसार पर जिलाध्यक्ष भाजपा दीपक मौैर्या ,प्रबन्ध निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी पेट्रोनेट एल.एन.जी. लिमिटेड  ए0के0 सिंह,  गोविन्द माधव,  विक्रम सिंह,  सांसद  प्रतिनिधि एस0पी0अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष साधना चौधरी, पीडी0 अनिल कुमार, डीसीमनरेगा सन्दीप सिंह सहित भारी संख्या में जनसमूह व अन्य  उपस्थित रहे ।</div>
</div>
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<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 22:16:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मेडिकल असेसमेंट कैम्प में 175 बच्चों की हुई जांच 165 बच्चों का बना प्रमाण-पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">समग्र शिक्षा के अंतर्गत बेसिक शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में कक्षा 1 से 12 तक अध्यनरत दिव्यांग बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मेडिकल एसेसमेंट कैंप का आयोजन ब्लॉक संसाधन केंद्र बर्डपुर, लोटन एवं नौगढ़ में संपन्न हुआ । कैम्प का आयोजन जिला समन्वयक समग्र शिक्षा करुणा पति त्रिपाठी द्वारा किया गया ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कैंप में कुल 175 बच्चे उपस्थित हुए। जिसमें से 165 बच्चे प्रमाण पत्र हेतु चिन्हित किए गए। सेरेब्रलपाल्सी/अस्थि दिव्यांग के 61, बौद्धिक अक्षम के 50, श्रवण बाधित के 33, दृष्टि दिव्यांग के 21, तथा 05 बच्चों को जिला अस्पताल</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184482/175-children-were-examined-in-the-medical-assessment-camp-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1785594849084.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समग्र शिक्षा के अंतर्गत बेसिक शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में कक्षा 1 से 12 तक अध्यनरत दिव्यांग बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मेडिकल एसेसमेंट कैंप का आयोजन ब्लॉक संसाधन केंद्र बर्डपुर, लोटन एवं नौगढ़ में संपन्न हुआ । कैम्प का आयोजन जिला समन्वयक समग्र शिक्षा करुणा पति त्रिपाठी द्वारा किया गया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कैंप में कुल 175 बच्चे उपस्थित हुए। जिसमें से 165 बच्चे प्रमाण पत्र हेतु चिन्हित किए गए। सेरेब्रलपाल्सी/अस्थि दिव्यांग के 61, बौद्धिक अक्षम के 50, श्रवण बाधित के 33, दृष्टि दिव्यांग के 21, तथा 05 बच्चों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया साथ जांच के दौरान 05 बच्चे प्रमाण पत्र हेतु अपात्र पाए गए ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">करुणा पति त्रिपाठी ने बताया कि 05 अगस्त को बीआरसी खेसरहा में मेडिकल असेसमेन्ट कैम्प लगाया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;">     </div>
<div style="text-align:justify;">कैम्प में माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज/संयुक्त जिला चिकित्सालय के आर्थो0 सर्जन डॉ0 विमल द्विवेदी, नेत्र सर्जन डॉ0 आर0के वर्मा, ई0 एनटी सर्जन डॉ0 संजय कुमार शर्मा, साइकेट्रिस्ट डॉ0 विशाल गौतम, ऑडियोलॉजिस्ट, बृजदीप कुमार, ऑप्ट्रोमेट्रिस्ट हरिश्चंद्र </div>
<div style="text-align:justify;">के अलावा शिक्षक राघवेंद्र मिश्र, विनोद मिश्र, सतीश चंद्र, पूर्णिमा पाण्डेय एवं फिजियोथेरेपिस्ट में खुर्शीद आलम आदि उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
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</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 22:13:51 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>समेकित विद्यालय में दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री ने किया वृक्षारोपण।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदेश सरकार के  दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के मंत्री  नरेंद्र कश्यप द्वारा वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय, गेदुराही मेजा मेंएक पेड़ माँ के नाम वृक्षारोपण, निरीक्षण किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं को नवीन शैक्षिक सत्र 2026-27 की पाठ्य पुस्तक, स्टेशनरी, लंच बॉक्स  आदि वितरित किया गया। विभाग के उपनिदेशक, अभय कुमार श्रीवास्तव, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अशोक कुमार गौतम, विद्यालय के प्रधानाचार्य जितेन्द्र कुमार, शिक्षिका अनिता सरन, वरिष्ठ सहायक संजय कुमार यादव अन्य बहुद्देशीय कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने पौधों के संरक्षण एवं नियमित देखभाल का संकल्प लिया तथा अधिक से</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183295/minister-for-empowerment-of-persons-with-disabilities-planted-trees-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260713-wa0069.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदेश सरकार के  दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के मंत्री  नरेंद्र कश्यप द्वारा वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय, गेदुराही मेजा मेंएक पेड़ माँ के नाम वृक्षारोपण, निरीक्षण किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं को नवीन शैक्षिक सत्र 2026-27 की पाठ्य पुस्तक, स्टेशनरी, लंच बॉक्स  आदि वितरित किया गया। विभाग के उपनिदेशक, अभय कुमार श्रीवास्तव, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अशोक कुमार गौतम, विद्यालय के प्रधानाचार्य जितेन्द्र कुमार, शिक्षिका अनिता सरन, वरिष्ठ सहायक संजय कुमार यादव अन्य बहुद्देशीय कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने पौधों के संरक्षण एवं नियमित देखभाल का संकल्प लिया तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का संदेश दिया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 19:41:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिव्यांग विद्यार्थियों हेतु डिजिटल रीडिंग मशीन एवं किलकारी बाल देखभाल केंद्र का लोकार्पण करेंगी कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में आगामी 29 जून, 2026 को आयोजित होने वाले दशम दीक्षांत समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल  आनंदीबेन पटेल द्वारा विश्वविद्यालय में नवस्थापित केंद्रीय डिजिटल लाइब्रेरी में दिव्यांग विद्यार्थियों की सुविधा हेतु स्थापित डिजिटल रीडिंग मशीन तथा किलकारी बाल देखभाल केंद्र का लोकार्पण किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में पुस्तकालय प्रभारी डॉ. आशुतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय का केंद्रीय पुस्तकालय पूर्णतः डिजिटल स्वरूप में विकसित किया गया है। इसमें दिव्यांग विद्यार्थियों के पठन-पाठन को सुगम बनाने के लिए कीबोर्ड सॉफ्टवेयर एवं अत्याधुनिक स्कैनिंग मशीन की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182169/chancellor-anandiben-patel-will-inaugurate-digital-reading-machine-and-kilkari"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1782570686719-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में आगामी 29 जून, 2026 को आयोजित होने वाले दशम दीक्षांत समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल  आनंदीबेन पटेल द्वारा विश्वविद्यालय में नवस्थापित केंद्रीय डिजिटल लाइब्रेरी में दिव्यांग विद्यार्थियों की सुविधा हेतु स्थापित डिजिटल रीडिंग मशीन तथा किलकारी बाल देखभाल केंद्र का लोकार्पण किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में पुस्तकालय प्रभारी डॉ. आशुतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय का केंद्रीय पुस्तकालय पूर्णतः डिजिटल स्वरूप में विकसित किया गया है। इसमें दिव्यांग विद्यार्थियों के पठन-पाठन को सुगम बनाने के लिए कीबोर्ड सॉफ्टवेयर एवं अत्याधुनिक स्कैनिंग मशीन की व्यवस्था की गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मशीन के माध्यम से किसी भी पुस्तक को स्कैन कर उसे 100 से अधिक भाषाओं में अनुवादित किया जा सकता है। अनुवादित सामग्री को वॉइस सुविधा के माध्यम से सुना भी जा सकता है, जो विशेष रूप से दृष्टिबाधित एवं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दशम दीक्षांत समारोह की तैयारियों के क्रम में आज विश्वविद्यालय में कार्यक्रम का पूर्ण एवं व्यवस्थित पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) भी किया गया। इस वर्ष समारोह स्थल में परिवर्तन किए जाने के कारण पूर्वाभ्यास विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। पूर्वाभ्यास के दौरान मंच संचालन, अतिथियों के आगमन, पदक एवं उपाधि वितरण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा समस्त व्यवस्थाओं का क्रमबद्ध अभ्यास किया गया, जिससे समारोह का सफल एवं गरिमामय आयोजन सुनिश्चित किया जा सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 21:45:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परमाणु शक्ति संपन्न भारत में कब होगी बालिका शिक्षा शत-प्रतिशत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181062/when-will-girls-education-be-100-in-nuclear-power-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/4.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज में ऐसे कर्मचारियों का वर्ग तैयार करना था जो अंग्रेजी शासन के प्रशासनिक कार्यों को संचालित कर सके। आधुनिक विज्ञान और अंग्रेजी भाषा के प्रसार में इस शिक्षा प्रणाली का योगदान रहा, किंतु इसने भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक शिक्षा और कौशल आधारित शिक्षण को काफी हद तक हाशिए पर पहुंचा दिया। उस समय महिलाओं की शिक्षा लगभग नगण्य थी। समाज में बाल विवाह, पर्दा प्रथा और लैंगिक असमानता जैसी कुरीतियां लड़कियों की शिक्षा में बड़ी बाधा थीं।<br />समाज सुधारकों का योगदान</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">+<br />ऐसे कठिन समय में सावित्रीबाई फुले और महात्मा ज्योतिराव फुले ने बालिका शिक्षा की अलख जगाई। 1848 में उन्होंने लड़कियों के लिए पहला आधुनिक विद्यालय प्रारंभ किया।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने महिला शिक्षा और सामाजिक सुधारों को नई दिशा दी। बाद में महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना।<br />डॉ. अंबेडकर का प्रसिद्ध संदेश</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।"<br />स्वतंत्र भारत में शिक्षा का विकास</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की साक्षरता दर लगभग 18 प्रतिशत थी। महिलाओं की साक्षरता तो 10 प्रतिशत से भी कम थी। संविधान निर्माताओं ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार माना।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />समय-समय पर कोठारी आयोग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968, 1986, सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा नई शिक्षा नीति 2020 जैसे प्रयास किए गए। इन प्रयासों से शिक्षा का दायरा बढ़ा और लड़कियों की विद्यालयों तक पहुंच बेहतर हुई।.आज भारत की साक्षरता दर 77 प्रतिशत के आसपास पहुंच चुकी है, जबकि महिला साक्षरता दर 70 प्रतिशत से अधिक है। यह प्रगति उत्साहजनक है, किंतु अभी भी पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता में अंतर बना हुआ है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व के सर्वाधिक शिक्षित देशों से सीख<br />विश्व में फिनलैंड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जापान और नॉर्वे जैसे देशों की शिक्षा व्यवस्था विश्व में आदर्श मानी जाती है। फिनलैंड की शिक्षा व्यवस्था</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />फिनलैंड में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन कौशल विकसित करना है। वहां बच्चों पर अनावश्यक परीक्षा का दबाव नहीं होता। शिक्षकों को अत्यंत सम्मान और स्वायत्तता प्राप्त है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> बालिका और बालक के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। सिंगापुर ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा साधन बनाया। वहां विज्ञान, गणित, तकनीक और कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता है। शिक्षा को उद्योगों और रोजगार से जोड़ा गया है।<br />जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में अनुशासन, नैतिकता, समयबद्धता और तकनीकी दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। परिणामस्वरूप ये देश सीमित प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद आर्थिक महाशक्ति बन गए।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत में प्रतिभा की कोई कमी कभी भी नहीं रही है, किंतु शिक्षा व्यवस्था अभी भी परीक्षा-केंद्रित बनी हुई है। रटंत प्रणाली, विद्यालयों की असमान गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों का अभाव आज भी चुनौतियां हैं।नई शिक्षा नीति 2020 ने इन समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें मातृभाषा आधारित शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षण और बहुविषयक अध्ययन पर बल दिया गया है। किंतु इसके वास्तविक लाभ तभी मिलेंगे जब इसका प्रभावी क्रियान्वयन हो। बालिका शिक्षा का सत प्रतिशत होना इसलिए भी आवश्यक है कि शिक्षित बेटी, समृद्ध परिवार</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />एक शिक्षित महिला अपने परिवार को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कार प्रदान करती है। वह अगली पीढ़ी की प्रथम शिक्षिका होती है।सामाजिक कुरीतियों का अंत भी।बाल विवाह, दहेज प्रथा, लैंगिक भेदभाव और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं को समाप्त करने में शिक्षा सबसे प्रभावी साधन है</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व बैंक सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का मानना है कि महिलाओं की शिक्षा में निवेश किसी भी देश के आर्थिक विकास को तीव्र गति देता है। यदि भारत की प्रत्येक बेटी शिक्षित होगी तो देश की उत्पादकता और आर्थिक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />शिक्षित महिलाएं स्वास्थ्य, पोषण और परिवार नियोजन के प्रति अधिक जागरूक होती हैं। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आती है।<br />आज महिलाएं विज्ञान, अंतरिक्ष, प्रशासन, राजनीति, सेना और उद्यमिता के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। शिक्षा उन्हें नेतृत्व और नवाचार की शक्ति प्रदान करती है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />महापुरुषों की दृष्टि में नारी शिक्षा<br />स्वामी विवेकानंद ने कहा</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"राष्ट्र की प्रगति का सबसे अच्छा मापदंड वहां की महिलाओं की स्थिति है।"डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का मत था कि<br />"महिलाओं का सशक्तिकरण और शिक्षा किसी राष्ट्र के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है।"पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था<br />"एक महिला को शिक्षित करना एक पीढ़ी को शिक्षित करना है।"</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />इक्कीसवीं सदी ज्ञान, विज्ञान और नवाचार की सदी है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की प्रत्येक बेटी शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगी। शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं है; यह सामाजिक चेतना, आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय विकास का आधार है। मैकाले की शिक्षा प्रणाली से लेकर नई शिक्षा नीति तक भारत ने लंबी यात्रा तय की है, किंतु अभी मंजिल दूर है। यदि सरकार, समाज, परिवार और शैक्षणिक संस्थान मिलकर बालिका शिक्षा को शत-प्रतिशत अनिवार्य बनाने का संकल्प लें, तो भारत न केवल विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति बनेगा, बल्कि सबसे विकसित और ज्ञानवान राष्ट्रों की अग्रिम पंक्ति में भी खड़ा होगा।<br />क्योंकि किसी राष्ट्र का भविष्य उसके विद्यालयों में नहीं, बल्कि उसकी शिक्षित बेटियों की आंखों में स्वप्न बनकर पलता है।<br /><br />संजीव ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिंतक, स्तंभकार, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,<div>कविता,</div><div>संजीव-नी।<br />शिक्षा का कवच।<br /><br />शिक्षा का कवच।<br />कुछ देना ही तो आइये,<br />नन्हीं बालिकाओं को<br />स्वर्ण के गहने नहीं,<br />शिक्षा का कवच दें।<br />उनकी हथेलियों में<br />रोटी के साथ-साथ<br />कुछ अक्षर भी रख दें,<br />जो भूख से जुझतीं<br />उन्हें ज्ञान की कुंजी दें<br />अँधेरे बंद कमरों में<br />रोशन-दान बनती,<br />ज्ञान की रोशनी के लिए<br />बंद रास्तों पर<br />एक नया आकाश फैला देती,<br />उनकी आँखों में<br />सिर्फ़ स्वप्न ना रखें ,<br />उन तक पहुँचने के पंख भी दें।<br />उन्हें ज्ञान दें कि<br />अपने हिस्से की धूप<br />खुद चुन सकें।<br />किताबें जब उनके हांथों में होंगी,<br />तो सदियों के कई बोझ<br />आप उतर जाएँगे।<br />कलम उँगलियों से चलेंगीं<br />तक़दीर की कविता भी<br />लिखी जाएगी।<br />शिक्षित बालिका<br />अपना जीवन ही नहीं संवारती,<br />आने वाली पीढ़ियों के लिए<br />उजला दीप बन जाती।<br />आइये,<br />बेटी को शिक्षा का रक्षा-कवच दें,<br />ताकि वह<br />अपने सपनों, अपने अधिकारों<br />अपने अस्तित्व की रक्षा<br />स्वयं कर सके।<br /><br />संजीव ठाकुर, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:57:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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                <title>दिव्यांग छात्र की पीड़ा सुन भावुक हुए जिलाधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश - </strong>जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के समक्ष मानवता और संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। जनसुनवाई में प्राथमिक विद्यालय बंजरिया के छात्र रवि पटेल पुत्र कमलेश पटेल ने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर बताया कि वह दोनों पैरों से दिव्यांग है तथा कक्षा-5 की छात्रवृत्ति की धनराशि अभी तक उसे प्राप्त नहीं हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">दिव्यांग छात्र की स्थिति को देखकर जिलाधिकारी श्री गौड़ ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।  दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधिकारियों को छात्र को तुरंत ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिसके क्रम में जिलाधिकारी ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180980/district-magistrate-became-emotional-after-hearing-the-pain-of-disabled"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001717275.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश - </strong>जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के समक्ष मानवता और संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। जनसुनवाई में प्राथमिक विद्यालय बंजरिया के छात्र रवि पटेल पुत्र कमलेश पटेल ने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर बताया कि वह दोनों पैरों से दिव्यांग है तथा कक्षा-5 की छात्रवृत्ति की धनराशि अभी तक उसे प्राप्त नहीं हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिव्यांग छात्र की स्थिति को देखकर जिलाधिकारी श्री गौड़ ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।  दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधिकारियों को छात्र को तुरंत ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिसके क्रम में जिलाधिकारी ने स्वयं अपने हाथों से रवि पटेल को ट्राइसाइकिल प्रदान की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि छात्र की लंबित छात्रवृत्ति की धनराशि का तत्काल सत्यापन कर उसे उसके बैंक खाते में प्रेषित कराना सुनिश्चित करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी की इस संवेदनशील एवं मानवीय पहल से छात्र रवि तथा उसके परिजनों के चेहरे पर खुशी झलक उठी। ट्राइसाइकिल प्राप्त होने पर परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े और उन्होंने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। जनसुनवाई में की गई यह पहल प्रशासन की जनकल्याणकारी एवं संवेदनशील कार्यशैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:33:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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