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                <title>indian navy - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>indian navy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सेशेल्स यात्रा से मजबूत हुआ भारत का समुद्री सामरिक सहयोग और वैश्विक विश्वास का नया अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा केवल एक औपचारिक राजकीय यात्रा नहीं बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका मजबूत कूटनीति और वैश्विक विश्वास का प्रभावशाली उदाहरण है । इस यात्रा ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपने पड़ोसी और मित्र देशों के साथ विश्वास सम्मान और साझेदारी के आधार पर संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है ।सेशेल्स जैसे छोटे लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीपीय देश के साथ भारत के संबंध केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं हैं बल्कि दोनों  के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक और मानवीय जुड़ाव भी उतना</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182370/seychelles-visit-strengthens-indias-maritime-strategic-cooperation-and-new-chapter"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas27.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा केवल एक औपचारिक राजकीय यात्रा नहीं बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका मजबूत कूटनीति और वैश्विक विश्वास का प्रभावशाली उदाहरण है । इस यात्रा ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपने पड़ोसी और मित्र देशों के साथ विश्वास सम्मान और साझेदारी के आधार पर संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है ।सेशेल्स जैसे छोटे लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीपीय देश के साथ भारत के संबंध केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं हैं बल्कि दोनों  के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक और मानवीय जुड़ाव भी उतना ही गहरा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेशेल्स पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया जो किसी भी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख के प्रति सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक शुरू हुई जिसमें समुद्री सुरक्षा रक्षा सहयोग तटीय निगरानी क्षमता बढ़ाने और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता बनाए रखने जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई दोनों देशों के बीच सहयोग के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में कई समझौतों पर भी विचार किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत लंबे समय से हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता रहा है सेशेल्स इस दृष्टि से भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है क्योंकि यह देश उन समुद्री मार्गों के निकट स्थित है जिनसे दुनिया का बड़ा व्यापार संचालित होता है ऐसे में समुद्री डकैती अवैध मछली पकड़ने मानव तस्करी और अन्य समुद्री अपराधों पर नियंत्रण के लिए भारत और सेशेल्स का सहयोग पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर भारत में निर्मित फास्ट पेट्रोल वेसल लेस्पवार सेशेल्स को सौंपा जिससे वहां की कोस्ट गार्ड की क्षमता और अधिक मजबूत होगी यह केवल एक रक्षा सहयोग नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की तकनीकी क्षमता और मित्र देशों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है ।भारत पहले भी सेशेल्स को समुद्री निगरानी विमान और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करा चुका है। जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास लगातार मजबूत हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस यात्रा की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं के प्रति विश्व समुदाय के सम्मान को भी दर्शाती है। किसी दूसरे देश की संसद को संबोधित करना दोनों देशों के बीच गहरे राजनीतिक विश्वास और परस्पर सम्मान का प्रमाण माना जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत और सेशेल्स के बीच संबंधों का इतिहास लगभग ढाई सौ वर्षों से भी अधिक पुराना है। जब वर्ष सत्रह सौ सत्तर में यहां पहली स्थायी बस्ती बसाई गई, तब वहां पहुंचने वाले पहले लोगों में पांच भारतीय भी शामिल थे। बाद के वर्षों में बिहार तमिलनाडु और गुजरात से बड़ी संख्या में भारतीय यहां जाकर बसे और उन्होंने व्यापार कृषि निर्माण तथा सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज भी सेशेल्स की आबादी का एक बड़ा हिस्सा भारतीय मूल का है। जिसने दोनों देशों के संबंधों को पीढ़ी दर पीढ़ी मजबूत बनाए रखा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेशेल्स के पूर्व राष्ट्रपति वेवेल रामकलावन के पूर्वज भी भारत के बिहार राज्य से जुड़े रहे हैं। यह तथ्य दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को दर्शाता है। भारतीय मूल के लोग वहां केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहे बल्कि उन्होंने शिक्षा स्वास्थ्य व्यापार और प्रशासन जैसे अनेक क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के नेशनल बोटैनिकल गार्डन का भी दौरा किया जहां उन्होंने राष्ट्रपति के साथ पौधारोपण किया और प्रसिद्ध एल्डाब्रा विशालकाय कछुओं को पत्तियां खिलाईं। यह प्रतीकात्मक कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण जैव विविधता और प्रकृति के प्रति साझा जिम्मेदारी का संदेश देता है ।सेशेल्स अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता दुर्लभ समुद्री जीवों और विश्व प्रसिद्ध एल्डाब्रा विशालकाय कछुओं के कारण पूरी दुनिया में जाना जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेशेल्स का भौगोलिक क्षेत्रफल भले ही बहुत छोटा हो लेकिन इसका समुद्री आर्थिक क्षेत्र अत्यंत विशाल है ।यही कारण है कि दुनिया की बड़ी शक्तियां इस क्षेत्र को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानती हैं। भारत हमेशा इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और साझेदारी की नीति पर विश्वास करता आया है यही सोच भारत को अन्य देशों से अलग पहचान दिलाती है।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि इस वर्ष भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के पचास वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह केवल एक वर्षगांठ नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास मित्रता और साझा विकास की सफल यात्रा का उत्सव है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह यात्रा आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगी तथा हिंद महासागर क्षेत्र में शांति सुरक्षा और समृद्धि के साझा लक्ष्य को नई गति प्रदान करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जब पूरी दुनिया बदलते वैश्विक समीकरणों और नई चुनौतियों का सामना कर रही है तब भारत की विदेश नीति विश्व बंधुत्व आपसी सम्मान और समान विकास के सिद्धांतों पर आगे बढ़ रही है। भारत छोटे और विकासशील देशों को बराबरी का सम्मान देता है और उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोग प्रदान करता है। यही कारण है कि भारत की विश्वसनीयता लगातार बढ़ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेशेल्स यात्रा ने यह भी सिद्ध कर दिया कि भारत केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि वह पूरे हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाने के लिए अपने मित्र देशों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है आने वाले समय में यह साझेदारी समुद्री सुरक्षा व्यापार पर्यटन पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में नई उपलब्धियां हासिल करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत और सेशेल्स की यह मित्रता केवल सरकारों के बीच संबंध नहीं बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच विश्वास अपनत्व और साझा भविष्य की मजबूत नींव है। यही कारण है कि यह यात्रा आने वाले वर्षों में भारत की सफल कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>        *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182370/seychelles-visit-strengthens-indias-maritime-strategic-cooperation-and-new-chapter</link>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 17:59:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>90 घंटे काम करने की नसीहत देने वाले लार्सन एंड टुब्रो कंपनी के सीईओ को सरकार की तरफ से झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="Headlines mb-3">
<div class="Headlines mb-3">
<div class="descriptionC">
<p><strong>लार्सन एंड टुब्रो-</strong> डिफेंस मिनिस्ट्री ने इंजीनियरिंग सेक्टर की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&amp;T) को बड़ा झटका दिया है। सरकार ने छह पनडुब्बियां खरीदने के लिए 70,000 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया था, जिसमें L&amp;T ने भी बोली लगाई थी। हालांकि, डिफेंस मिनिस्ट्री का कहना है कि कंपनी ने शर्तों का पालन नहीं किया है।</p>
<p>भारतीय नौसेना ने प्रोजेक्ट 75 इंडिया के तहत छह ऐसी पनडुब्बियों की खरीद की योजना बनाई थी, जो तीन सप्ताह तक पानी के नीचे रहने की क्षमता रखती हों। रक्षा सूत्रों के अनुसार, L&amp;T ने स्पेनिश कंपनी Navantia के साथ प्रस्ताव दिया था</p></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147791/the-ceo-of-larsen-toubro-company-who-advised-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/download-(9).jpg" alt=""></a><br /><div class="Headlines mb-3">
<div class="Headlines mb-3">
<div class="descriptionC">
<p><strong>लार्सन एंड टुब्रो-</strong> डिफेंस मिनिस्ट्री ने इंजीनियरिंग सेक्टर की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&amp;T) को बड़ा झटका दिया है। सरकार ने छह पनडुब्बियां खरीदने के लिए 70,000 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया था, जिसमें L&amp;T ने भी बोली लगाई थी। हालांकि, डिफेंस मिनिस्ट्री का कहना है कि कंपनी ने शर्तों का पालन नहीं किया है।</p>
<p>भारतीय नौसेना ने प्रोजेक्ट 75 इंडिया के तहत छह ऐसी पनडुब्बियों की खरीद की योजना बनाई थी, जो तीन सप्ताह तक पानी के नीचे रहने की क्षमता रखती हों। रक्षा सूत्रों के अनुसार, L&amp;T ने स्पेनिश कंपनी Navantia के साथ प्रस्ताव दिया था लेकिन यह नौसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं था, जिसके कारण इसे खारिज कर दिया गया है। L&amp;T इस परियोजना में शामिल एक प्रमुख कंपनी रही है।</p>
<p>एलएंडटी और उसके पार्टनर ने स्पेन में अपनी महत्वपूर्ण एयर इंडिपेंडेंट प्रपल्शन प्रणाली की कार्यप्रणाली को नौसेना की टीम के सामने प्रदर्शित किया था लेकिन नेवी ने निविदा दस्तावेज में अपनी आवश्यकताओं के मुताबिक प्रणाली की मांग की। एलएंडटी की बोली खारिज होने के बाद अब सरकारी कंपनी मझगांव डॉकयार्ड ही इस ठेके को पाने की होड़ में रह गई है।</p>
<p>उसके जर्मनी की कंपनी ThyssenKrupp Marine Systems के साथ मिलकर बोली लगाई है। चीनी नेवी के तेजी से आधुनिकीकरण के बीच भारत ने भी परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह की कई पनडुब्बी परियोजनाओं को मंजूरी दी है।</p>
<p><strong>90 घंटे काम</strong>एलएंडडी हाल में अपने चेयरमैन और एमडी एसएन सुब्रह्मण्यम के एक बयान के कारण सुर्खियों में आई थी। Reddit पर उनका एक वीडियो आया था जिसमें वह कर्मचारियों को हफ्ते में 90 घंटे काम करने की नसीहत दे रहे थे। उनका कहना था कि अगर उनका बस चलता तो वह रविवार को भी कर्मचारियों को ऑफिस बुलाकर उनसे काम करवाते। वीडियो में वह कर्मचारियों से कह रहे हैं, 'घर पर बैठकर आप क्या करते हैं? आप अपनी पत्नी को कितनी देर तक निहार सकते हैं? चलो, ऑफिस जाओ और काम करना शुरू करो।' इस कारण वह सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हुए थे।</p>
<p> </p>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>बिज़नेस रिलीज़</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/147791/the-ceo-of-larsen-toubro-company-who-advised-to</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2025 18:55:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या सच में इंडियन नेवी के पूर्व ऑफिसर्स है गुनेगार, या है किसी की साज़िस </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Qatar: </strong>कतर की एक अदालत के फैसले ने भारत में कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ा दी है. खाड़ी के इस छोटे से देश ने भारत के आठ पूर्व नौसैनिक अधिकारियों को कथित जासूसी के आरोप में मौत की सजा सुनाई है. दिल्ली से 2900 किलोमीटर दूर दोहा से आए इस फैसले ने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाव दिया है. भारत के विदेश मंत्रालय ने इस फैसले पर सधी प्रतिक्रिया दी है और तल्खी वाला रुख अपनाने से परहेज किया है.</p>
<p>भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वो नौसेना के इन आठ अफसरों को हर तरह की मदद मुहैया कराने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136298/are-the-former-officers-of-the-indian-navy-really-guilty"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/pm-modi1-sixteen_nine.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Qatar: </strong>कतर की एक अदालत के फैसले ने भारत में कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ा दी है. खाड़ी के इस छोटे से देश ने भारत के आठ पूर्व नौसैनिक अधिकारियों को कथित जासूसी के आरोप में मौत की सजा सुनाई है. दिल्ली से 2900 किलोमीटर दूर दोहा से आए इस फैसले ने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाव दिया है. भारत के विदेश मंत्रालय ने इस फैसले पर सधी प्रतिक्रिया दी है और तल्खी वाला रुख अपनाने से परहेज किया है.</p>
<p>भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वो नौसेना के इन आठ अफसरों को हर तरह की मदद मुहैया कराने को तैयार है. विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इस मामले को दुखद करार दिया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत इस मामले में सभी कानूनी रास्तों की तलाश करेगी, साथ ही इस केस को कतर की सरकार के सामने उठाएगी. भारत जब इस केस में कानूनी विकल्पों की बात करता है तो भारत के सामने कई रास्ते खुलते हैं..</p>
<p>सबसे पहले भारत तो कतर की न्यायिक प्रक्रिया के अनुरुप इस फैसले के खिलाफ वहां की बड़ी अदालतों में अपील कर सकता है. सनद रहे कि कतर से आया ये फैसला वहां की निचली अदालत (Court of First Instance of Qatar) का है. भारत के पास आवश्यकतानुसार अंतरराष्ट्रीय कोर्ट भी जाने का विकल्प है. </p>
<p>लेकिन एक विकल्प जो भारत और कतर दोनों की मुश्किल आसान कर सकता है, मौत की सजा पाए 8 अफसरों को राहत दे सकता है और जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों पर भी ज्यादा असर नहीं पड़ेगा वो रास्ता है भारत और कतर के बीच साल 2015 में हुआ एक समझौता. इस समझौते के तहत अगर भारत के किसी नागरिक को कतर में अथवा कतर के किसी नागरिक को भारत में सजा सुनाई जाती है तो ऐसे व्यक्तियों को उनके मुल्क प्रत्यर्पित किया जा सकता है,</p>
<p>जहां वो अपनी बाकी सजा पूरी कर सकें. बता दें कि तमीम बिन हमद अल थानी ने भारत का दौरा किया था. फिर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र 2015 में कतर के राष्ट्राध्यक्ष मोदी कतर की यात्रा पर गए थे. इस फैसले का उद्देश्य सजायाफ्ता कैदियों को उनके परिवारों के पास रहने में सक्षम बनाना और उनके सामाजिक पुनर्वास की प्रक्रिया में मदद करना है.</p>
<p>हालांकि भारत अगर इस विकल्प को अपनाता है तो भारत के सामने दो बड़ी चुनौतियां सामने आएंगी. पहली बात तो यह है कि अगर भारत इस विकल्प का इस्तेमाल करता है तो इसका अर्थ यह होगा कि भारत को ये मानना पड़ेगा कि उसकी नौसेना के 8 पूर्व अधिकारी जासूसी के दोषी हैं. क्योंकि इस समझौते के तहत सिर्फ सजायाफ्ता कैदियों की ही अदला-बदली हो सकती है. भारत अगर सार्वजनिक रूप से ये मानता है कि उसकी नौसेना के पूर्व अधिकारी जासूसी के दोषी हैं तो ये देश की साख के लिए काफी नुकसानदेह साबित होगा.<br />ऐसे मौके पर जब कनाडा भारत के राजनयिकों पर जासूसी के आरोप लगा चुका है, भारत इस कथित आरोप को कतई स्वीकार नहीं करना चाहेगा. इसके अलावा पाकिस्तान की जेल में बंद नेवी के पूर्व ऑफिसर कुलभूषण जाधव पर भी पाकिस्तान ने ऐसे ही मिथ्या आरोप लगाए हैं. भारत अगर कतर के मामले में अपने नागरिकों को दोषी मानता है तो पाकिस्तान के आरोपों को बल मिल सकता है. हाल-फिलहाल में ग्लोबल फोरम पर भारत की जो साख बढ़ी है ऐसी स्थिति में भारत कभी नहीं चाहेगा कि वो इस बात को स्वीकार करे कि उसकी नौसेना पूर्व अधिकारी जासूसी के दोषी हैं.</p>
<p>हालांकि यहां ध्यान देने की बात यह भी है कि न तो भारत ने और न ही कतर ने नौसेना के इन पूर्व अधिकारियों पर लगे आरोपों की डिटेल जानकारी दी है, ऐसी स्थिति में संभव है कि अगर इन अधिकारियों को कुछ दूसरे आरोपों के तहत दोषी करार दिया गया हो तो भारत इस विकल्प का इस्तेमाल करना चाहेगा.<br />इस विकल्प के इस्तेमाल करने पर भारत के सामने दूसरी चुनौती यह होगी कि कतर कैदियों की अदला-बदली के इस प्रस्ताव को स्वीकार करे. क्योंकि ऐसा तभी संभव है जब कतर की सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देगी. कतर में भारतीय दूतावस ने इस प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी है.</p>
<p>भारतीय दूतावस की वेबसाइट के मुताबिक जो कैदी स्थानांतरित होना चाहता है उसे भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास को अपनी इच्छा के बारे में सूचित करना चाहिए. फिर उसके आवेदन को विदेश की सरकार (जहां उसे सजा हुई है) और भारत सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए. इसके अलावा ऐसे कैदी के खिलाफ उस देश में कोई और मामला लंबित नहीं होना चाहिए. ऐसी जटिल जिओ-पॉलिटिकल स्थिति में कतर से नौसेना के पूर्व अफसरों को सुरक्षित वापसी भारत की विदेश नीति की परीक्षा साबित होने वाली है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Oct 2023 19:58:23 +0530</pubDate>
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                <title>इंडियन नेवी में शामिल हुई 27 खतरनाक पनडुब्बियां, ख़त्म कर देंगी चीन का रुआब </title>
                                    <description><![CDATA[<p>पूरे विश्व में आज भारतीय सेनाओं का लोहा माना जा रहा है, आने वाले दिनों में इंडियन नेवी दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना में शामिल हो जाएगी. दरअसल जल्द ही भारतीय नौसेना को 27 सबमरीन मिलने जा रही है. जिसमें विश्व की सबसे शक्तिशाली पनडुब्बियां शामिल हैं. ये पनडुब्बियां परमाणु, बैलिस्टिक मिसाइल जैसे घातक हथियारों से लैस होंगी. यही वजह है कि इन्हें स्ट्रैटेजिक स्ट्राइक न्यूक्लियर सबमरीन कहा जाता है.</p><p>IOR में चीन ने हिंद महासागर में जासूसी काफी बढ़ा दी है. चीन का रिसर्च शिप ‘शी यान 6’ कोलंबों पोर्ट पर आया है. जो वैज्ञानिक शोध के साथ ही</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134957/27-dangerous-submarines-joining-indian-navy-will-destroy-chinas-influence"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/submarine-deal-with-france-.webp" alt=""></a><br /><p>पूरे विश्व में आज भारतीय सेनाओं का लोहा माना जा रहा है, आने वाले दिनों में इंडियन नेवी दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना में शामिल हो जाएगी. दरअसल जल्द ही भारतीय नौसेना को 27 सबमरीन मिलने जा रही है. जिसमें विश्व की सबसे शक्तिशाली पनडुब्बियां शामिल हैं. ये पनडुब्बियां परमाणु, बैलिस्टिक मिसाइल जैसे घातक हथियारों से लैस होंगी. यही वजह है कि इन्हें स्ट्रैटेजिक स्ट्राइक न्यूक्लियर सबमरीन कहा जाता है.</p><p>IOR में चीन ने हिंद महासागर में जासूसी काफी बढ़ा दी है. चीन का रिसर्च शिप ‘शी यान 6’ कोलंबों पोर्ट पर आया है. जो वैज्ञानिक शोध के साथ ही दूसरे देशों की जासूसी भी करता है. खबर है कि यह शिप 3 महीने तक कोलंबो में रुकेगा. ऐसे में भारत को भी IOR में अपनी ताकत और ज्यादा बढ़ाने की जरूरत है.</p><p>कौन सी सबमरीन IOR में चीन को देगी मात अरिहंत क्लास बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन भारत की सबसे बेहतरीन पनडुब्बियों में से एक है, इसमें 4 पनडुब्बियां हैं. फिलहाल 2 सर्विस में हैं, 1 हाल ही में लॉन्च हुई है जबकि 1 बन रही है. अरिहंत क्लास की सबमरीन में INS अरिहंत और INS अरिघट शामिल हैं. ये सभी परमाणु ईंधन संचालित पनडुब्बियां हैं. अरिहंत क्लास बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन के अलावा 3 S5 क्लास की बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन भी बनाई जाएंगी.</p><p>6 न्यूक्लियर पावर्ड अटैक सबमरीन भी बनेंगी भारत की 6 न्यूक्लियर पावर्ड अटैक सबमरीन बनाने की भी तैयारी है. इनमें वरुणास्त्र हैवी वेट टॉरपीडो होंगे. निर्भय, ब्रह्मोस और ब्रह्मोस-2 हाइपरसोनिक लैंड अटैक और एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें लगी होंगी. कलवारी क्लास की 6 अटैक सबमरीन प्लान में थीं. 5 सेवा में है. साल के अंत तक छठी पनडुब्बी भी नौसेना में शामिल हो जाएगी.</p><p>प्रोजेक्ट 75I में बनेंगी 6 सबरमीन इसके साथ ही प्रोजेक्ट 75I क्लास में 6 अटैक सबमरीन भी बनाए जाएंगे. जो 3 से 4 हजार टन डिस्प्लेसमेंट की पनडुब्बियां होगी. जिन्हें एंटी-सरफेस वॉरफेयर, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, आईएसआर, स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेस के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. इसके अलावा प्रोजेक्ट 76 क्लास के तहत भी 6 अटैक सबमरीन बनाई जाएंगी.</p><p><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Sep 2023 19:19:46 +0530</pubDate>
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