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                <title>Cyber Crime Prevention - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Cyber Crime Prevention RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पीयूष मोर्डिया बने प्रयागराज के नए पुलिस कमिश्नर, ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पीयूष मोर्डिया को प्रयागराज का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति को प्रशासनिक और पुलिस महकमे में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले वह अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), वाराणसी जोन के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। अब वह प्रयागराज कमिश्नरेट की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस व्यवस्था की कमान संभालेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पीयूष मोर्डिया एक अनुभवी एवं कुशल पुलिस अधिकारी माने जाते हैं। अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव के दौरान उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों और महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए अपराध</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184235/senior-ips-officer-piyush-mordia-becomes-the-new-police-commissioner"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260728-wa0142.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पीयूष मोर्डिया को प्रयागराज का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति को प्रशासनिक और पुलिस महकमे में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले वह अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), वाराणसी जोन के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। अब वह प्रयागराज कमिश्नरेट की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस व्यवस्था की कमान संभालेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीयूष मोर्डिया एक अनुभवी एवं कुशल पुलिस अधिकारी माने जाते हैं। अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव के दौरान उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों और महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा आधुनिक पुलिसिंग को प्रभावी ढंग से लागू करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। वाराणसी जोन में एडीजी के रूप में उन्होंने संवेदनशील धार्मिक आयोजनों, त्योहारों और वीआईपी कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को सफलतापूर्वक संचालित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रयागराज जैसे संवेदनशील एवं धार्मिक महत्व वाले शहर में उनकी नियुक्ति को विशेष महत्व दिया जा रहा है। महाकुंभ के सफल आयोजन के बाद भी शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, संगठित अपराध पर नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध की रोकथाम, यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना तथा जनता और पुलिस के बीच विश्वास को और मजबूत करना उनके सामने प्रमुख चुनौतियां होंगी।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 19:37:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर अपराध पर सख्त हुई सरकार, प्रदेश को साइबर सुरक्षा में नंबर-1 बनाने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री की 'प्रगति (PRAGATI)' समीक्षा के तहत साइबर अपराध से जुड़े नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर प्रदेश की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सुनियोजित एवं समन्वित प्रयास किए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184035/government-becomes-strict-on-cyber-crime-instructions-to-make-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-24-at-20.58.26.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री की 'प्रगति (PRAGATI)' समीक्षा के तहत साइबर अपराध से जुड़े नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर प्रदेश की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सुनियोजित एवं समन्वित प्रयास किए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई करें तथा साइबर अपराधियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी की जाए और पीड़ितों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">साइबर जागरूकता अभियान को व्यापक बनाने पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि प्रत्येक विभाग में एक नोडल अधिकारी नामित किया जाए, जो साइबर अपराध मुख्यालय के साथ समन्वय स्थापित कर जागरूकता सामग्री को विभाग के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य करेगा। उन्होंने सभी विभागों को इस संबंध में आवश्यक पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने उत्तर प्रदेश राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C) की अधिसूचना शीघ्र जारी करने, ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को जल्द क्रियाशील बनाने तथा राज्यव्यापी 'ऑपरेशन साइबर वज्र (CyVajra)' को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के नए तरीकों के प्रति लोगों को लगातार जागरूक किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह ने बताया कि राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C) की स्थापना का प्रस्ताव अंतिम चरण में है और इसकी अधिसूचना का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि एस4सी (S4C) के आठ में से छह घटक पहले ही संचालित हो चुके हैं, जबकि शेष दो पर कार्य तेजी से चल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी जानकारी दी कि साइबर अपराध की त्वरित और स्थान-निरपेक्ष एफआईआर दर्ज करने के लिए विकसित किया जा रहा ई-जीरो एफआईआर तंत्र अंतिम चरण में है। शिकायत निवारण, धनराशि वापसी और समन्वय पोर्टलों के संचालन में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन देश में अग्रणी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में बताया गया कि राज्यव्यापी आसूचना आधारित अभियान 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत प्रारंभिक स्तर पर उल्लेखनीय सफलता मिली है। वहीं, साइबर अपराध की जांच के लिए पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण में साइट्रेन (CyTrain) प्लेटफॉर्म के उपयोग के मामले में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने प्रदेश में साइबर अपराध के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार की गई जागरूकता सामग्री की भी सराहना की और निर्देश दिया कि इसे विभिन्न लक्षित समूहों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में सचिव गृह मोहित गुप्ता, पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह, साइबर अपराध मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 21:14:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलिस ने साइबर  जागरुकता अभियान के तहत लोगों को किया जागरूक*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
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<div><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)। </strong>साइबर जागरूकता अभियान  के तहत तरघौना गांव में लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम ने तरघौना गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम के लिए शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182469/6a4527e1c7508"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260627-wa00051.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
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<div><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)। </strong>साइबर जागरूकता अभियान  के तहत तरघौना गांव में लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम ने तरघौना गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम के लिए शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी  पोर्टल पर रिपोर्टिंग निर्देशों से अवगत कराया गया ।सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें।अज्ञात स्रोतों से आए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचें।अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें।सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:19:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति को वापस मिले 19 हजार रुपये</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केथाना दुबौलिया की साइबर सेल टीम ने साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के खाते में 19 हजार रुपये वापस कराकर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने बस्ती पुलिस का आभार जताया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी कलवारी प्रदीप त्रिपाठी के नेतृत्व में चलाए जा रहे साइबर अपराध रोकथाम अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार थाना क्षेत्र के ऊंजी गांव निवासी दीनानाथ पुत्र परमात्मा साइबर ठगी का शिकार हो गए थे। उनके खाते से 19 हजार रुपये</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181133/victim-of-cyber-fraud-got-back-rs-19-thousand"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260613-wa0090.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केथाना दुबौलिया की साइबर सेल टीम ने साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के खाते में 19 हजार रुपये वापस कराकर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने बस्ती पुलिस का आभार जताया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी कलवारी प्रदीप त्रिपाठी के नेतृत्व में चलाए जा रहे साइबर अपराध रोकथाम अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार थाना क्षेत्र के ऊंजी गांव निवासी दीनानाथ पुत्र परमात्मा साइबर ठगी का शिकार हो गए थे। उनके खाते से 19 हजार रुपये की धनराशि निकाल ली गई थी। पीड़ित ने मामले की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीसीआरपी) पर दर्ज कराई थी।शिकायत मिलने के बाद थाना दुबौलिया के प्रभारी निरीक्षक जीवन त्रिपाठी के निर्देशन में साइबर सेल प्रभारी अजय कुमार पांडेय एवं महिला कांस्टेबल साधना पांडेय ने मामले की जांच शुरू की। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी गई धनराशि को होल्ड कराया। इसके बाद नई एसओपी-2 के तहत एमआरएम (मनी रिस्टोरेशन मैकेनिज्म) पोर्टल की सहायता से पूरी 19 हजार रुपये की रकम पीड़ित के खाते में वापस करा दी</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रकम वापस मिलने पर दीनानाथ ने थाना दुबौलिया पुलिस और साइबर सेल टीम की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने तथा किसी भी प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर तत्काल हेल्पलाइन 1930 या एनसीसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।</div>
</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 19:05:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>करोड़ों की ठगी, करोड़ों का खर्च और फिर भी नाकाफी रिकवरी; डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती बनता साइबर अपराध*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/41.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में राजस्थान में 77 हजार से अधिक लोग साइबर ठगी का शिकार हुए और ठगों ने लगभग 354 करोड़ रुपए की रकम हड़प ली। चिंताजनक बात यह है कि इस भारी-भरकम ठगी में से केवल 39 करोड़ रुपए ही रिकवर किए जा सके हैं, जबकि साइबर सुरक्षा और साइबर थानों के संचालन पर राज्य सरकार का सालाना खर्च 102 करोड़ रुपए से अधिक है।</div>
<div>यह स्थिति केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। देश के लगभग सभी राज्यों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच जितनी तेजी से बढ़ी है, उससे कहीं अधिक तेजी से साइबर अपराधियों के तौर-तरीके विकसित हुए हैं। आज अपराधी किसी बैंक डकैती या चोरी के बजाय मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे नकली निवेश योजनाओं, फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी, नौकरी, टास्क फ्रॉड और क्यूआर कोड स्कैनिंग जैसे अनेक तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।</div>
<div>राजस्थान के आंकड़े बताते हैं कि हर घंटे लगभग दस लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्होंने वर्षों की मेहनत से अपनी बचत जमा की थी। कई मामलों में लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में उनके खातों से गायब हो गई। पीड़ितों में युवा, व्यापारी, नौकरीपेशा वर्ग, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। विशेष रूप से 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक निशाना बन रहे हैं, क्योंकि यही वर्ग डिजिटल सेवाओं का सबसे ज्यादा उपयोग करता है।</div>
<div>साइबर अपराध का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। जैसे ही पुलिस और बैंकिंग संस्थाएं किसी एक तरीके पर नियंत्रण करने का प्रयास करती हैं, ठग कोई नया तरीका खोज लेते हैं। हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फर्जी शेयर मार्केट निवेश योजनाओं के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी सामने आई है। अपराधी स्वयं को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते हैं और फिर उनसे रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।</div>
<div>सवाल यह भी उठता है कि जब साइबर थानों और साइबर सुरक्षा तंत्र पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तब रिकवरी की दर इतनी कम क्यों है। राजस्थान में 354 करोड़ रुपए की ठगी के मुकाबले केवल 39 करोड़ रुपए की रिकवरी होना व्यवस्था की सीमाओं को दर्शाता है। इसका एक कारण यह है कि ठग रकम को तुरंत कई फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। इन खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। रकम कई राज्यों और कई बार विदेशों तक पहुंच जाती है, जिससे उसे ट्रेस करना और वापस लाना बेहद कठिन हो जाता है। इसके अलावा साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अंतरराज्यीय समन्वय की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी कई बार जांच को प्रभावित करती है।</div>
<div>बैंकों की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित ग्राहकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंक शामिल हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि ग्राहकों को जागरूक बनाने और संदिग्ध लेनदेन पर त्वरित कार्रवाई की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा के अनेक स्तर मौजूद हैं, फिर भी यदि ग्राहक स्वयं सतर्क नहीं रहेगा तो अपराधी किसी न किसी तरीके से उसे भ्रमित कर सकते हैं।</div>
<div>आज साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या बैंक की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी बन चुकी है। अधिकांश मामलों में ठग लोगों की तकनीकी कमजोरी का नहीं बल्कि उनकी भावनाओं, लालच, डर या जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। कोई व्यक्ति यदि अनजान लिंक पर क्लिक करता है, ओटीपी साझा करता है, स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करता है या फर्जी निवेश योजना में अधिक मुनाफे के लालच में पैसा लगाता है, तो वह स्वयं जोखिम बढ़ा देता है। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।</div>
<div>सरकार और पुलिस प्रशासन भी लगातार लोगों को जागरूक करने के प्रयास कर रहे हैं। साइबर हेल्पलाइन 1930 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी होने के बाद पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित तुरंत हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए तो रकम को फ्रीज कराने और रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। दुर्भाग्यवश कई लोग शर्म, घबराहट या जानकारी के अभाव में शिकायत करने में देर कर देते हैं, जिससे अपराधियों को रकम निकालने का पर्याप्त समय मिल जाता है।</div>
<div>देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। सरकार कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दे रही है और करोड़ों लोग रोजाना ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बनाना होगा। केवल नए साइबर थाने खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और बैंकिंग संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।</div>
<div>वर्तमान समय में साइबर अपराध किसी महामारी से कम नहीं है। यह अपराध बिना हथियार, बिना हिंसा और बिना किसी भौतिक उपस्थिति के लोगों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा है। राजस्थान के आंकड़े इस बात की चेतावनी हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, पुलिस, बैंक, तकनीकी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इस चुनौती का सामना करें। डिजिटल क्रांति तभी सफल मानी जाएगी जब लोगों का धन और उनका विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे। अन्यथा साइबर ठगों का यह बढ़ता साम्राज्य आम जनता की मेहनत की कमाई को इसी तरह निगलता रहेगा और सुरक्षा तंत्र पर सवाल लगातार खड़े होते रहेंगे।</div>
<div>          *कांतिलाल मांडोत*</div>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:31:08 +0530</pubDate>
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                <title>लोटन पुलिस द्वारा साइबर  जागरुकता अभियान के तहत लोगों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180969/lotan-police-made-people-aware-under-cyber-awareness-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781100453472-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी  पोर्टल पर रिपोर्टिंग निर्देशों से अवगत कराया गया ।सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें।अज्ञात स्रोतों से आए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचें।अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें।सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।ऑनलाइन खरीददारी के लिए केवल सुरक्षित वेबसाइट्स का ही उपयोग करें। इस दौरान महिला कास्टेबल  पूजा वर्मा आदि उपस्थित रहे।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 20:00:55 +0530</pubDate>
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