<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/95976/internet-safety" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Internet Safety - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/95976/rss</link>
                <description>Internet Safety RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डिजिटल भारत और साइबर अपराध</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184896/digital-india-and-cyber-crime"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas3.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या हमारे कानून और जांच एजेंसियां साइबर अपराधियों की गति के साथ कदम मिला पा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या अपराधी कानून से आगे निकल चुके हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल क्रांति ने सुविधाएं बढ़ाई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अपराधियों के लिए भी नए रास्ते खोल दिए हैं। पहले अपराध किसी एक शहर या क्षेत्र तक सीमित होते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब एक व्यक्ति हजारों किलोमीटर दूर बैठकर किसी भी राज्य के नागरिक को कुछ ही मिनटों में अपना शिकार बना सकता है। अपराधी नकली वेबसाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी मोबाइल ऐप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एआई आधारित आवाज की नकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक वीडियो और सोशल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक पता नहीं चलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक उसके खाते से लाखों रुपये गायब नहीं हो जाते। भारत में साइबर अपराधों के लिए कानूनी ढांचा मौजूद है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम</span>, 2000<span lang="hi" xml:lang="hi"> और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधान डिजिटल अपराधों पर कार्रवाई की अनुमति देते हैं। हाल के वर्षों में सरकार ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हेल्पलाइन </span>1930, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर और डिजिटल भुगतान सुरक्षा से जुड़े कई कदम उठाए हैं। इन प्रयासों से हजारों मामलों में धनराशि फ्रीज कर पीड़ितों को राहत भी मिली है। फिर भी वास्तविक चुनौती यह है कि अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कानून से कहीं अधिक तेज़ी से कर रहे हैं। कानून बनने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन में समय लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि साइबर अपराधी कुछ ही दिनों में नए तरीके विकसित कर लेते हैं। एआई ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है। आज किसी की आवाज की हूबहू नकल कर फोन किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी का नकली वीडियो तैयार किया जा सकता है और फर्जी पहचान बनाकर आर्थिक अपराध किए जा सकते हैं। इन परिस्थितियों में पारंपरिक जांच प्रणाली कई बार अपर्याप्त साबित होती है। साइबर अपराध की एक बड़ी समस्या इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रकृति भी है। अनेक गिरोह भारत के बाहर से संचालित होते हैं। उनके सर्वर दूसरे देशों में होते हैं और धन कई देशों के बैंक खातों या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल साक्ष्य और कानूनी प्रक्रियाएं जांच को लंबा और जटिल बना देती हैं। अपराधी इसी देरी का लाभ उठाते हैं। दूसरी ओर नागरिकों में डिजिटल जागरूकता की कमी भी अपराधियों की सफलता का बड़ा कारण है। आज भी अनेक लोग अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओटीपी साझा कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नकली निवेश योजनाओं के झांसे में आ जाते हैं या सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं। तकनीकी सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतनी ही आवश्यक डिजिटल साक्षरता भी है। यदि नागरिक सतर्क हों तो बड़ी संख्या में साइबर अपराधों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है। भारत को अब साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बहुस्तरीय रणनीति अपनानी होगी। सबसे पहले कानूनों को तकनीकी बदलावों के अनुरूप लगातार अद्यतन करना होगा। एआई आधारित अपराध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटा चोरी और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों के लिए स्पष्ट और प्रभावी कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं। दूसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस और जांच एजेंसियों को आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर विशेषज्ञों और अत्याधुनिक उपकरणों से सशक्त बनाना होगा। तीसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के बीच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान को और तेज़ करना होगा। बैंकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरसंचार कंपनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान कंपनियों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। संदिग्ध लेनदेन की तुरंत पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत सत्यापन प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी खातों पर त्वरित कार्रवाई और उपयोगकर्ताओं को समय-समय पर सुरक्षा संबंधी चेतावनी देना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। निजी क्षेत्र और सरकार के बीच समन्वय जितना मजबूत होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध पर नियंत्रण उतना ही प्रभावी होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा व्यवस्था में भी डिजिटल सुरक्षा को शामिल करने का समय आ गया है। स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और कार्यस्थलों पर साइबर सुरक्षा का बुनियादी प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। जिस प्रकार सड़क सुरक्षा के नियम सिखाए जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार डिजिटल सुरक्षा के नियम भी नागरिक जीवन का हिस्सा बनने चाहिए। डिजिटल भारत की सफलता केवल इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने से नहीं मापी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इस बात से तय होगी कि नागरिक डिजिटल दुनिया में कितने सुरक्षित हैं। यदि कानून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और समाज मिलकर साइबर अपराध के विरुद्ध मजबूत व्यवस्था विकसित नहीं करते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो डिजिटल प्रगति का लाभ अपराधियों को अधिक मिलेगा और आम नागरिक असुरक्षित महसूस करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि कानून पूरी तरह अपराधियों से पीछे छूट गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह भी सच है कि साइबर अपराधियों की गति और नवाचार कहीं अधिक तेज़ है। आवश्यकता केवल नए कानून बनाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें समय के अनुरूप अद्यतन करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वरित क्रियान्वयन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी क्षमता बढ़ाने और नागरिकों में डिजिटल जागरूकता विकसित करने की है। डिजिटल भारत तभी सशक्त होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसकी डिजिटल सुरक्षा भी उतनी ही मजबूत होगी। हालांकि भारतीय पुलिस व्यवस्था में अब साईबर फ्राड को लेकर काफी चर्चाएं की जा रही हैं और उनपर क्रियान्वयन भी हो रहा है लेकिन अभी भी हम साईबर अपराधियों की पहुंच से पीछे छूटे जा रहे हैं। हमें इसकी रोकथाम के लिए संसाधन बढ़ाने होंगे ताकि आम आदमी साईबर अपराधियों से निजात पा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184896/digital-india-and-cyber-crime</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/184896/digital-india-and-cyber-crime</guid>
                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 17:27:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/hindi-divas3.jpg"                         length="137237"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलिस ने साइबर  जागरुकता अभियान के तहत लोगों को किया जागरूक*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>
<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div>  </div>
<div><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)। </strong>साइबर जागरूकता अभियान  के तहत तरघौना गांव में लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम ने तरघौना गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम के लिए शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182469/6a4527e1c7508"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260627-wa00051.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>
<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)। </strong>साइबर जागरूकता अभियान  के तहत तरघौना गांव में लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम ने तरघौना गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम के लिए शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी  पोर्टल पर रिपोर्टिंग निर्देशों से अवगत कराया गया ।सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें।अज्ञात स्रोतों से आए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचें।अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें।सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182469/6a4527e1c7508</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/182469/6a4527e1c7508</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:19:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/img-20260627-wa00051.jpg"                         length="1407963"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करोड़ों की ठगी, करोड़ों का खर्च और फिर भी नाकाफी रिकवरी; डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती बनता साइबर अपराध*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/41.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में राजस्थान में 77 हजार से अधिक लोग साइबर ठगी का शिकार हुए और ठगों ने लगभग 354 करोड़ रुपए की रकम हड़प ली। चिंताजनक बात यह है कि इस भारी-भरकम ठगी में से केवल 39 करोड़ रुपए ही रिकवर किए जा सके हैं, जबकि साइबर सुरक्षा और साइबर थानों के संचालन पर राज्य सरकार का सालाना खर्च 102 करोड़ रुपए से अधिक है।</div>
<div>यह स्थिति केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। देश के लगभग सभी राज्यों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच जितनी तेजी से बढ़ी है, उससे कहीं अधिक तेजी से साइबर अपराधियों के तौर-तरीके विकसित हुए हैं। आज अपराधी किसी बैंक डकैती या चोरी के बजाय मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे नकली निवेश योजनाओं, फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी, नौकरी, टास्क फ्रॉड और क्यूआर कोड स्कैनिंग जैसे अनेक तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।</div>
<div>राजस्थान के आंकड़े बताते हैं कि हर घंटे लगभग दस लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्होंने वर्षों की मेहनत से अपनी बचत जमा की थी। कई मामलों में लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में उनके खातों से गायब हो गई। पीड़ितों में युवा, व्यापारी, नौकरीपेशा वर्ग, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। विशेष रूप से 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक निशाना बन रहे हैं, क्योंकि यही वर्ग डिजिटल सेवाओं का सबसे ज्यादा उपयोग करता है।</div>
<div>साइबर अपराध का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। जैसे ही पुलिस और बैंकिंग संस्थाएं किसी एक तरीके पर नियंत्रण करने का प्रयास करती हैं, ठग कोई नया तरीका खोज लेते हैं। हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फर्जी शेयर मार्केट निवेश योजनाओं के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी सामने आई है। अपराधी स्वयं को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते हैं और फिर उनसे रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।</div>
<div>सवाल यह भी उठता है कि जब साइबर थानों और साइबर सुरक्षा तंत्र पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तब रिकवरी की दर इतनी कम क्यों है। राजस्थान में 354 करोड़ रुपए की ठगी के मुकाबले केवल 39 करोड़ रुपए की रिकवरी होना व्यवस्था की सीमाओं को दर्शाता है। इसका एक कारण यह है कि ठग रकम को तुरंत कई फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। इन खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। रकम कई राज्यों और कई बार विदेशों तक पहुंच जाती है, जिससे उसे ट्रेस करना और वापस लाना बेहद कठिन हो जाता है। इसके अलावा साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अंतरराज्यीय समन्वय की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी कई बार जांच को प्रभावित करती है।</div>
<div>बैंकों की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित ग्राहकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंक शामिल हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि ग्राहकों को जागरूक बनाने और संदिग्ध लेनदेन पर त्वरित कार्रवाई की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा के अनेक स्तर मौजूद हैं, फिर भी यदि ग्राहक स्वयं सतर्क नहीं रहेगा तो अपराधी किसी न किसी तरीके से उसे भ्रमित कर सकते हैं।</div>
<div>आज साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या बैंक की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी बन चुकी है। अधिकांश मामलों में ठग लोगों की तकनीकी कमजोरी का नहीं बल्कि उनकी भावनाओं, लालच, डर या जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। कोई व्यक्ति यदि अनजान लिंक पर क्लिक करता है, ओटीपी साझा करता है, स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करता है या फर्जी निवेश योजना में अधिक मुनाफे के लालच में पैसा लगाता है, तो वह स्वयं जोखिम बढ़ा देता है। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।</div>
<div>सरकार और पुलिस प्रशासन भी लगातार लोगों को जागरूक करने के प्रयास कर रहे हैं। साइबर हेल्पलाइन 1930 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी होने के बाद पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित तुरंत हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए तो रकम को फ्रीज कराने और रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। दुर्भाग्यवश कई लोग शर्म, घबराहट या जानकारी के अभाव में शिकायत करने में देर कर देते हैं, जिससे अपराधियों को रकम निकालने का पर्याप्त समय मिल जाता है।</div>
<div>देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। सरकार कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दे रही है और करोड़ों लोग रोजाना ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बनाना होगा। केवल नए साइबर थाने खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और बैंकिंग संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।</div>
<div>वर्तमान समय में साइबर अपराध किसी महामारी से कम नहीं है। यह अपराध बिना हथियार, बिना हिंसा और बिना किसी भौतिक उपस्थिति के लोगों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा है। राजस्थान के आंकड़े इस बात की चेतावनी हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, पुलिस, बैंक, तकनीकी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इस चुनौती का सामना करें। डिजिटल क्रांति तभी सफल मानी जाएगी जब लोगों का धन और उनका विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे। अन्यथा साइबर ठगों का यह बढ़ता साम्राज्य आम जनता की मेहनत की कमाई को इसी तरह निगलता रहेगा और सुरक्षा तंत्र पर सवाल लगातार खड़े होते रहेंगे।</div>
<div>          *कांतिलाल मांडोत*</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery</guid>
                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:31:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/41.jpg"                         length="239353"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अदिति यादव के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्टिंग।। </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव सुनील कुमार सरोज (एडवोकेट) के नेतृत्व में बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रयागराज को सौंपकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों और फोटो प्रसारण के मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में कहा गया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव की तस्वीरों का सोशल मीडिया पर कथित रूप से गलत तरीके से उपयोग कर अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा और सम्मान को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180992/objectionable-posting-against-aditi-yadav-on-social-media"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260610-wa0088.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव सुनील कुमार सरोज (एडवोकेट) के नेतृत्व में बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रयागराज को सौंपकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों और फोटो प्रसारण के मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में कहा गया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव की तस्वीरों का सोशल मीडिया पर कथित रूप से गलत तरीके से उपयोग कर अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंच रही है, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे कृत्य समाज में गलत संदेश देने के साथ-साथ महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न को बढ़ावा देते हैं। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए तथा उनके विरुद्ध साइबर अपराध और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में साइबर क्राइम प्रकोष्ठ को भी प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई। समाजवादी अधिवक्ता सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी महिला के सम्मान के साथ इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है और कानून के दायरे में रहकर दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने एक स्वर में दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180992/objectionable-posting-against-aditi-yadav-on-social-media</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180992/objectionable-posting-against-aditi-yadav-on-social-media</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:00:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/img-20260610-wa0088.jpg"                         length="116699"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोटन पुलिस द्वारा साइबर  जागरुकता अभियान के तहत लोगों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180969/lotan-police-made-people-aware-under-cyber-awareness-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781100453472-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी  पोर्टल पर रिपोर्टिंग निर्देशों से अवगत कराया गया ।सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें।अज्ञात स्रोतों से आए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचें।अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें।सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।ऑनलाइन खरीददारी के लिए केवल सुरक्षित वेबसाइट्स का ही उपयोग करें। इस दौरान महिला कास्टेबल  पूजा वर्मा आदि उपस्थित रहे।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180969/lotan-police-made-people-aware-under-cyber-awareness-campaign</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180969/lotan-police-made-people-aware-under-cyber-awareness-campaign</guid>
                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 20:00:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1781100453472-%281%29.jpg"                         length="526727"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        