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                <title>Preventive Healthcare - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Preventive Healthcare RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डॉक्टर डे: सफेद कोट में भगवान, धड़कनों के रखवाले को हजार सलाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>1 जुलाई को भारत में 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' मनाया जाता है। ये दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। ये उस भरोसे का दिन है जो एक मरीज सबसे ज्यादा दर्द में भी एक अजनबी पर करता है। उस अजनबी का नाम है: डॉक्टर।<br />ये दिन क्यों ? डॉ. बिधान चंद्र रॉय की विरासत</p>
<p><br />डॉक्टर डे भारत में हर साल 1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। डॉ. रॉय MBBS, MRCP और FRCS थे। उन्होंने बिना फीस लिए हजारों मरीजों का इलाज किया।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182495/doctors-day-a-thousand-salutes-to-the-god-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><p>1 जुलाई को भारत में 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' मनाया जाता है। ये दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। ये उस भरोसे का दिन है जो एक मरीज सबसे ज्यादा दर्द में भी एक अजनबी पर करता है। उस अजनबी का नाम है: डॉक्टर।<br />ये दिन क्यों ? डॉ. बिधान चंद्र रॉय की विरासत</p>
<p><br />डॉक्टर डे भारत में हर साल 1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। डॉ. रॉय MBBS, MRCP और FRCS थे। उन्होंने बिना फीस लिए हजारों मरीजों का इलाज किया। राजनीति में आने के बाद भी वो रोज सुबह 4 बजे उठकर मरीज देखते थे। उनके लिए मरीज भगवान था और सेवा धर्म। इसी सोच को सलाम करने के लिए 1991 से 1 जुलाई को डॉक्टर डे घोषित हुआ। सफेद कोट के पीछे छुपी जिंदगी</p>
<p><br />हम डॉक्टर को सिर्फ OPD में 5 मिनट देखते हैं। पर उसके पीछे क्या है? नींद की कुर्बानी: 36 घंटे की ड्यूटी, इमरजेंसी कॉल, रात 2 बजे उठकर ICU दौड़ना। त्योहार, जन्मदिन, शादी सब हॉस्पिटल की ड्यूटी के आगे सेकेंड पर आ जाता है।</p>
<p><br />दिमाग का बोझ: एक गलत दवा, एक छूटा हुआ लक्षण, और किसी की पूरी दुनिया उजड़ सकती है। इसलिए हर केस में 100% दिमाग लगाना पड़ता है। डिप्रेशन और बर्नआउट डॉक्टरों में सबसे ज्यादा है।</p>
<p><br />जोखिम उठाकर सेवा: कोविड-19 में PPE किट पहनकर 12 घंटे काम करना, संक्रामक बीमारियों के बीच खड़े रहना, कभी-कभी मरीजों के परिजनों का गुस्सा झेलना। फिर भी वो भागते नहीं हैं। यही है मानव सेवा। किताबों से नहीं, जिगर से की जाने वाली सेवा। डॉक्टर सिर्फ इलाज नहीं करते, वो उम्मीद देते हैं। गांव का डॉक्टर : जहां MRI-CT नहीं, वहां स्टेथोस्कोप से बीमारी पकड़ लेता है। 50 रुपये फीस में 1 घंटे समझाता है। सर्जन: 8 घंटे टेबल पर झुका रहता है, ताकि किसी और को जिंदगी मिल जाए। बाल रोग विशेषज्ञ : रोते हुए बच्चे को चॉकलेट देकर इंजेक्शन लगाता है, और मां को हिम्मत देता है।</p>
<p><br />ग्रामीण MBBS डॉक्टर: बाढ़, महामारी, एक्सीडेंट में सबसे पहले वही पहुंचता है, एंबुलेंस से पहले। कोविड से लेकर डेंगू, हार्ट अटैक से लेकर डिलीवरी तक, हर संकट में सबसे आगे वो सफेद कोट ही खड़ा मिला। डॉक्टर भगवान नहीं हैं। वो इंसान हैं। उनसे गलती हो सकती है, वो थक सकते हैं। पर इरादा उनका हमेशा सेवा का ही होता है। भरोसा रखिए, सवाल पूछिए : गूगल डॉक्टर से पहले असली डॉक्टर की सुनिए। इज्जत दीजिए: इमरजेंसी में गाली की जगह धन्यवाद दीजिए। वो भी आपके जैसा इंसान है। सेल्फ-केयर : डॉक्टर को भी आराम, सम्मान और सुरक्षित माहौल चाहिए। हिंसा से उनका मनोबल टूटता है, इलाज नहीं सुधरता। निष्कर्ष: हजार सलाम कम हैं। डॉक्टर वो पुल है जो 'बीमारी' और 'जिंदगी' के बीच बना है। वो रात-रात भर जागकर हमारे अपनों की सांसें गिनते हैं। फीस लेते हैं, पर कई बार उम्मीद फ्री में दे देते हैं। इस 1 जुलाई को अपने फैमिली डॉक्टर, अपने शहर के उस सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर, या उस जूनियर रेजिडेंट को एक मैसेज कर दीजिए। कहिए: "डॉक्टर साहब, आपकी मानव सेवा को हजार सलाम।" क्योंकि जब सब थक जाते हैं, तब भी धड़कन चलती रहती है। और उस धड़कन को चलाने वाला सफेद कोट होता है। लेकिन हम इसे भी नजरंदाज नहीं कर सकते कि चिकित्सा सेवा का व्यवसायीकरण हो चुका है और आम जनता का कहीं कहीं शोषण भी हो रहा है। आज इलाज मानव सेवा न रहकर बेहद महंगा व्यापार बन चुका है। अत्यधिक व्यवसायीकरण के समय में आज कई निजी अस्पताल व नर्सिंग होम लाभ कमाने का केंद्र बन गए हैं। मरीजों को अनावश्यक रूप से महंगी जांचें और दवाइयां लिखी जातीं हैं, जिससे आम आदमी बहुत परेशान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:52:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जुलाई माह के विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान का शुभारंभ, जन-जागरूकता रैली को दिखाई गई हरी झंडी।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">संचारी रोगों की रोकथाम एवं आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से जुलाई माह में चलाए जाने वाले विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान (द्वितीय चरण) का शुभारंभ बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर से किया गया। अभियान का उद्घाटन अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. राजेश कुमार, संयुक्त निदेशक डॉ. आशु पाण्डेय तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार तिवारी ने संयुक्त रूप से जन-जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर अधिकारियों ने बताया कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का संचालन 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182473/green-flag-given-to-public-awareness-rally-to-launch-special"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260701-wa0084-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संचारी रोगों की रोकथाम एवं आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से जुलाई माह में चलाए जाने वाले विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान (द्वितीय चरण) का शुभारंभ बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर से किया गया। अभियान का उद्घाटन अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. राजेश कुमार, संयुक्त निदेशक डॉ. आशु पाण्डेय तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार तिवारी ने संयुक्त रूप से जन-जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर अधिकारियों ने बताया कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का संचालन 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक किया जाएगा, जबकि दस्तक अभियान 11 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक चलेगा। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग के साथ अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में संचारी रोगों की रोकथाम, साफ-सफाई, मच्छरजनित रोगों की रोकथाम तथा जन-जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का संचालन जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. अंशु ने किया। इस दौरान अपर निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने संचारी रोगों की रोकथाम के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों एवं विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार तिवारी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि दस्तक अभियान के अंतर्गत स्टॉप डायरिया अभियान भी संचालित किया जाएगा, जिसमें आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां घर-घर जाकर डायरिया से प्रभावित परिवारों को ओआरएस, जिंक की गोलियां तथा क्लोरीन की गोलियों का वितरण करेंगी। साथ ही स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और व्यक्तिगत साफ-सफाई के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. के.के. मिश्रा ने कहा कि जनपद के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के अतिसंवेदनशील इलाकों में सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा, ताकि मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस, डायरिया सहित अन्य संचारी रोगों की प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित की जा सके।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:24:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में 28 जून को 0 से 5 वर्ष के बालक-बालिकाओं को पिलाई गई 'दो बूंद' पोलियो ड्रॉप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-   </strong>       पोलियो उन्मूलन अभियान के तहत उपायुक्त पाकुड़ मेघा भारद्वाज के निर्देशन में प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित प्रखण्ड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में 28 जून को सभी पोलियो केंद्रों पर शून्य से पांच वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को पोलियो की 'दो बूंद' दवा पिलाई गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो ड्रॉप से कोई भी बालक-बालिका वंचित न रहे, इसके लिए 29 व 30 जून को घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाई जाएगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 139 पोलियो बूथ तथा पाकुड़िया अस्थायी बस स्टैंड, तालवा सिदो-कान्हू चौक और ग्रामीण क्षेत्रों के हाट में कुल 3 ट्रांजिट बूथ बनाए गए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182347/on-june-28-two-drops-of-polio-drop-were-administered"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/10009258501.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-   </strong>    पोलियो उन्मूलन अभियान के तहत उपायुक्त पाकुड़ मेघा भारद्वाज के निर्देशन में प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित प्रखण्ड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में 28 जून को सभी पोलियो केंद्रों पर शून्य से पांच वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को पोलियो की 'दो बूंद' दवा पिलाई गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो ड्रॉप से कोई भी बालक-बालिका वंचित न रहे, इसके लिए 29 व 30 जून को घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाई जाएगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 139 पोलियो बूथ तथा पाकुड़िया अस्थायी बस स्टैंड, तालवा सिदो-कान्हू चौक और ग्रामीण क्षेत्रों के हाट में कुल 3 ट्रांजिट बूथ बनाए गए हैं। इनमें आंगनबाड़ी सेविकाओं और मेडिकल स्टाफ सहित कुल 329 कर्मियों की सेवाएं ली जा रही हैं। कार्यक्रम के सघन निरीक्षण के लिए 32 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं, जबकि 13 सब-डिपो भी बनाए गए हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह जानकारी देते हुए प्रभात दास ने बताया कि पाकुड़िया प्रखण्ड में कुल 18,065 बालक-बालिकाओं को पोलियो ड्रॉप पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:11:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अबोहर में दूसरे दिन 6492 बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाई गईं - SMO डॉ. सुमित सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अबोहर</strong>    हेल्थ डिपार्टमेंट और सिविल सर्जन डॉ. कविता सिंह के निर्देशों पर, डिस्ट्रिक्ट इम्यूनाइज़ेशन ऑफिसर डॉ. रिंकू चावला और SMO अबोहर डॉ. सुमित सिंह की लीडरशिप में और नोडल ऑफिसर डॉ. मुकेश कुमार की देखरेख में आज पल्स पोलियो राउंड के दूसरे दिन 6492 बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाई गईं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डॉ. सुमित सिंह ने बताया कि पहले और दूसरे दिन के कवरेज को मिलाकर 14807 बच्चों को ड्रॉप्स पिलाई गई हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि अगर उनका 5 साल तक का बच्चा किसी भी कारण से पोलियो ड्रॉप्स से वंचित रह गया है तो वे 30 जून को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182336/polio-drops-were-administered-to-6492-children-in-abohar-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000925850.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अबोहर</strong>  हेल्थ डिपार्टमेंट और सिविल सर्जन डॉ. कविता सिंह के निर्देशों पर, डिस्ट्रिक्ट इम्यूनाइज़ेशन ऑफिसर डॉ. रिंकू चावला और SMO अबोहर डॉ. सुमित सिंह की लीडरशिप में और नोडल ऑफिसर डॉ. मुकेश कुमार की देखरेख में आज पल्स पोलियो राउंड के दूसरे दिन 6492 बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाई गईं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डॉ. सुमित सिंह ने बताया कि पहले और दूसरे दिन के कवरेज को मिलाकर 14807 बच्चों को ड्रॉप्स पिलाई गई हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि अगर उनका 5 साल तक का बच्चा किसी भी कारण से पोलियो ड्रॉप्स से वंचित रह गया है तो वे 30 जून को घर-घर जाकर टीमों से अपने बच्चे को पोलियो ड्रॉप्स जरूर पिलाएं ताकि इस अभियान में 100 प्रतिशत सफलता मिल सके। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग इलाकों में जाकर टीमों का मनोबल भी बढ़ाया। नोडल अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार और मास मीडिया विंग से मनबीर सिंह ने बताया कि दूसरे दिन हेल्थ वर्करों ने घर-घर जाकर और हाई रिस्क एरिया व झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर 0 से 5 साल तक के बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाईं। स्टाफ ने 72.26 प्रतिशत टारगेट हासिल किया है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए हेल्थ स्टाफ, आशा वर्कर, नर्सिंग स्टूडेंट व वॉलंटियर की करीब 155 टीमें बनाई गई हैं। इस समय मनबीर सिंह डिप्टी मास मीडिया अधिकारी, पीपी यूनिट इंचार्ज दिनेश रानी, भारत सेठी, अंकुश कुमार, लखविंदर कौर, संजय कुमार, डिंपल, रिया, लछमी रानी, सुरिंदर कौर, छिंदर कौर आदि मौजूद थे। मीरा नर्सिंग कॉलेज, सचखंड नर्सिंग कॉलेज, सरस्वती नर्सिंग कॉलेज और सरदार पटेल नर्सिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स, आंगनवाड़ी हेल्पर्स ने इस कैंपेन में पूरा सपोर्ट दिया।<br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:32:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>योग दिवस: सिर्फ इवेंट बनकर न रह जाए</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">  </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181923/yoga-day-should-not-remain-just-an-event"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images.jpeg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी अधिकारी मैट पर बैठे हुए फोटो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल-कॉलेज में अनिवार्य ड्रिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर सेलेब्स के वीडियो</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशों में भारतीय दूतावासों के कार्यक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये सब जरूरी है। इसने योग को ग्लोबल ब्रांड बनाया। </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> से पहले योग को "हिंदू प्रैक्टिस" कहकर खारिज किया जाता था। आज </span>190+ <span lang="hi" xml:lang="hi">देश इसे मनाते हैं। यूएन ने </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। लेकिन प्रतीकवाद की सीमा यही है कि वो एक दिन में ही खत्म हो जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जमीनी हकीकत: आंकड़े क्या कहते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सकारात्मक पक्ष- आयुष मंत्रालय के मुताबिक </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>1.2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से ज्यादा योग इंस्ट्रक्टर ट्रेंड हो चुके हैं। अब योग को भी स्कूलों में शामिल किया जाने लगा है। सीबीएसई ने </span>6-12<span lang="hi" xml:lang="hi"> क्लास में योग को पार्ट बनाया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेडिकल टूरिज्म-</span>,  <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषिकेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैसूर में योग-आयुर्वेद के लिए विदेशी आ रहे हैं। ये </span>8000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ का इंडस्ट्री बन गया है। इसका एक कमजोर पक्ष यह है कि ग्रामीण भारत में इसकी पहुंच बहुत कम या ना के बराबर है। एनसीआरबी का हेल्थ सर्वे कहता है कि </span>70%<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्रामीण लोग रोज योग नहीं करते। उनके लिए योग "शहरियों का शौक" है। क्वालिटी का सवाल- </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन के सर्टिफिकेट कोर्स से बने इंस्ट्रक्टर स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इससे गलत प्रैक्टिस का खतरा है। निरंतरता नहीं-  </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून के बाद ज्यादातर लोग मैट समेट देते हैं। रोजाना योग करने वालों की संख्या </span>15%<span lang="hi" xml:lang="hi"> से ज्यादा नहीं बढ़ी। असर कहां दिखना चाहिए था</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">योग को स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हुआ नहीं। नॉन-कम्यूनिकेबल डिजीज पर रोक-  भारत में डायबिटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाई </span>BP, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेस के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। </span>ICMR <span lang="hi" xml:lang="hi">कहता है कि </span>2030<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>13.4<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ लोग डायबिटिक होंगे। योग प्रिवेंटिव हेल्थ में काम करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आयुष बजट कुल हेल्थ बजट का सिर्फ </span>2.3%<span lang="hi" xml:lang="hi"> है। मानसिक स्वास्थ्य-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">NIMHANS <span lang="hi" xml:lang="hi">के डेटा के मुताबिक भारत में </span>15% <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। योग और प्राणायाम का असर डिप्रेशन-एंग्जाइटी में साबित है। लेकिन मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में योग को मेनस्ट्रीम नहीं किया गया। स्कूलों में योग पीरियड है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन परीक्षा में नहीं पूछा जाता। बच्चे </span>45 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट करके भूल जाते हैं। अगर इसे फिजिकल एजुकेशन का ग्रेड हिस्सा बनाया जाए तो आदत बने। दूसरे देशों ने क्या किया</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका में </span>20,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">से ज्यादा स्कूलों में "</span>Yoga in Schools" <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोग्राम चलता है। इंश्योरेंस कंपनियां योग करने वालों को प्रीमियम में छूट देती हैं। चीन में ताई-ची को नेशनल फिटनेस प्रोग्राम बनाया। हर पार्क में सुबह ग्रुप प्रैक्टिस होती है। भारत में हम इवेंट कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पब्लिक हेल्थ सिस्टम में योग को इंटीग्रेट नहीं किया। सवाल यह उठता है कि अब क्या करना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद से हटकर पॉलिसी बनाओ। योग दिवस को सिर्फ इवेंट न रखो। हर जिला अस्पताल में योग थेरेपी सेंटर हो। आयुष्मान भारत में योग कवर हो। क्वालिटी कंट्रोल ऐसा हो जो भी योग सिखाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन सख्त हो। गलत आसन से स्पाइन इंजरी के केस बढ़ रहे हैं। ग्रामीण फोकस-  हर पंचायत में एक योग मित्र हो। जैसे आशा वर्कर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही योग वर्कर। उन्हें स्टाइपेंड मिले। डेटा पर काम करो- योग से कितने लोगों का शुगर कंट्रोल हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कितनों की दवा कम हुई - ये डेटा इकट्ठा करो। तभी पॉलिसी मेकर मानेंगे। योग दिवस का महत्व कम नहीं हुआ है। इसने भारत की सॉफ्ट पावर बढ़ाई है। लेकिन अगर अगले </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल भी हम सिर्फ </span>21 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून को मैट बिछाते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो योग "इंस्टाग्रामेबल एक्टिविटी" बनकर रह जाएगा। योग का असली मकसद था - "योगः कर्मसु कौशलम्"। काम में कुशलता। वो कुशलता तब आएगी जब योग स्कूल की क्लास से निकलकर अस्पताल की </span>OPD, <span lang="hi" xml:lang="hi">फैक्ट्री के ब्रेक रूम और गांव के चौपाल तक पहुंचे। तस्वीरें अच्छी लगती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बदलाव तब दिखता है जब किसी गांव के डायबिटिक मरीज की दवा आधी हो जाए क्योंकि उसने रोज </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट अनुलोम-विलोम किया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:27:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोविड के बाद 3 वर्षों में 6 करोड़ मधुमेह रोगी बढ़े: भारत कैसे बन रहा 'डायबिटीज कैपिटल'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ल </strong></p>
<p style="text-align:justify;">कोविड-19 खत्म हुए 3 साल हो गए, लेकिन उसकी एक चुप छाप अब भारत की सेहत पर भारी पड़ रही है। ICMR और इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन की रिपोर्ट बताती हैं कि 2021 से 2024 के बीच भारत में मधुमेह के मरीजों की संख्या में 6 करोड़ से ज्यादा का इजाफा हुआ है। 2021मे भारत में डायबिटीज के मरीज करीब 7.7 करोड़ थे। 2024 में ये संख्या बढ़कर 8.98 करोड़ पहुंच गई। यानी 1.28 करोड़ का इजाफा सिर्फ 3 साल में। 2026 तक ICMR के मुताबिक देश में अब 10 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। 13 करोड़ लोग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181550/6-crore-diabetic-patients-increased-in-3-years-after-covid"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas13.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ल </strong></p>
<p style="text-align:justify;">कोविड-19 खत्म हुए 3 साल हो गए, लेकिन उसकी एक चुप छाप अब भारत की सेहत पर भारी पड़ रही है। ICMR और इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन की रिपोर्ट बताती हैं कि 2021 से 2024 के बीच भारत में मधुमेह के मरीजों की संख्या में 6 करोड़ से ज्यादा का इजाफा हुआ है। 2021मे भारत में डायबिटीज के मरीज करीब 7.7 करोड़ थे। 2024 में ये संख्या बढ़कर 8.98 करोड़ पहुंच गई। यानी 1.28 करोड़ का इजाफा सिर्फ 3 साल में। 2026 तक ICMR के मुताबिक देश में अब 10 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। 13 करोड़ लोग ऐसी स्थिति में हैं जहां अगर लाइफस्टाइल न बदली तो अगले 5-10 साल में वो डायबिटीज के मरीज बन जाएंगे। IDF की 'डायबिटीज एटलस 2025' कहती है कि भारत में 2050 तक ये संख्या 15.67 करोड़ तक पहुंच सकती है। कोविड का क्या रोल रहा? डॉक्टरों का मानना है कि महामारी ने डायबिटीज की रफ्तार को 5 साल आगे बढ़ा दिया। लाइफस्टाइल ठप- लॉकडाउन में शारीरिक गतिविधि कम हुई, स्क्रीन टाइम और बैठे रहने का समय बढ़ा। मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन की डॉ. अंजना कहती हैं कि कोविड के बाद फिजिकल इनएक्टिविटी डायबिटीज का बड़ा रिस्क फैक्टर बन गई। स्ट्रेस और अनियमित नींद काम का दबाव, अनिश्चितता और नींद का पैटर्न बिगड़ने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा।<br />डाइट में बदलाव- घर पर बैठे-बैठे प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय और फास्ट फूड की खपत बढ़ी। पोस्ट-कोविड इफेक्ट-  कई स्टडी में दिखा कि कोविड से उबरने वाले लोगों में पहले साल में डायबिटीज का खतरा 40% तक बढ़ गया। वायरस अग्न्याशय पर असर डाल सकता है। कौन सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है? शहर या गांव -  रांची, जमशेदपुर, धनबाद जैसे शहरों में 13-14% लोग डायबिटीज से ग्रसित हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में ये 3-5% है। युवा और बच्चे-  अब ये बीमारी सिर्फ 45+ की नहीं रही। दिल्ली में 14 साल से कम उम्र के बच्चों में भी मौतें दर्ज हुई हैं।<br />           आदिवासी इलाके-  झारखंड जैसे राज्यों में आदिवासी समुदाय में भी डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है। इसकी वजह प्रोसेस्ड फूड, मोबाइल-स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल और बदलती जीवनशैली है। <br />मौतें भी बढ़ीं- दिल्ली सरकार के MCCD डेटा के मुताबिक 2024 में डायबिटीज से 2,459 लोगों की मौत हुई, जबकि 2023 में ये 1,823 थी। अस्पतालों में डायबिटीज से मौतें 544 बढ़ीं। राष्ट्रीय स्तर पर 2024 में हर 9 सेकंड में एक मौत डायबिटीज की वजह से हुई। क्यों नहीं रुक रहा ये सिलसिला?<br />डॉक्टर 4 वजहें बताते हैं-  पश्चिमी डाइट तले-भुने, बेकरी प्रोडक्ट, मीठे ड्रिंक्स और परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट का बढ़ता चलन। मोटापा देश में 60 करोड़ लोग ओवरवेट या ओबेस हैं। मोटापा टाइप-2 डायबिटीज का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है।<br />जागरूकता की कमी- ज्यादातर लोग तब जांच कराते हैं जब बीमारी बढ़ चुकी होती है। अनियंत्रित दवाएं-  दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के ली जा रही हैं, जिससे किडनी और पैंक्रियाज को नुकसान पहुंच रहा है। आगे का रास्ता-  स्क्रीनिंग बढ़ाओ-  30 साल से ऊपर हर व्यक्ति को साल में एक बार शुगर टेस्ट कराना चाहिए। लाइफस्टाइल रिवर्स करो- रोज 30 मिनट चलना, शुगर-प्रोसेस्ड फूड कम करना, नींद 7-8 घंटे। स्कूल लेवल पर बदलाव-  बच्चों में फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक पर रोक जरूरी है। सरकारी स्तर पर- NCD स्क्रीनिंग प्रोग्राम को ग्रामीण इलाकों तक ले जाना होगा। कोविड ने सिर्फ फेफड़े ही नहीं, मेटाबॉलिज्म भी खराब किया। 6 करोड़ नए मरीजों का मतलब है कि हर 2 सेकंड में एक भारतीय डायबिटीज की चपेट में आ रहा है। अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक भारत में हर 7वां व्यक्ति डायबिटिक होगा। ये सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, देश की अर्थव्यवस्था का भी संकट है, क्योंकि डायबिटीज दिल, किडनी और आंखों की बीमारियों का सीधा रास्ता है।  वैज्ञानिक तौर पर भले ही पुष्टि नहीं हुई हो, मगर कोविड काल के बाद लोगों में बीमारियां बढ़ने का रुझान देखा गया है। मधुमेह को लेकर कोविड काल के बाद आए राष्ट्रीय परिवार<br />कल्याण सर्वेक्षण -6 के आंकड़े भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181550/6-crore-diabetic-patients-increased-in-3-years-after-covid</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:16:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पटियाला में तंबाकू कंट्रोल कैंपेन के तहत स्पेशल चेकिंग - डॉ. इंदरप्रीत रंधावा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पटियाला  </strong>नेशनल तंबाकू कंट्रोल प्रोग्राम और नेशनल ब्लाइंडनेस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत सिविल सर्जन ऑफिस, पटियाला की तरफ से स्पेशल चेकिंग और अवेयरनेस कैंपेन चलाया गया। यह कैंपेन डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. इंदरप्रीत रंधावा, परमजीत और खुशवीर की लीडरशिप में चलाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दौरान, टीम ने भादसों रोड, नाभा रोड और फैक्ट्री एरिया, पटियाला में स्पेशल इंस्पेक्शन किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इंस्पेक्शन के दौरान, तंबाकू कंट्रोल एक्ट का उल्लंघन करने पर कुल 8 चालान काटे गए। इस ऑपरेशन से कुल 1100 रुपये का जुर्माना वसूला गया। डिपार्टमेंट ने साफ किया कि तंबाकू प्रोडक्ट्स की बिक्री और इस्तेमाल से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180959/special-checking-under-tobacco-control-campaign-in-patiala-dr"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000899653.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पटियाला  </strong>नेशनल तंबाकू कंट्रोल प्रोग्राम और नेशनल ब्लाइंडनेस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत सिविल सर्जन ऑफिस, पटियाला की तरफ से स्पेशल चेकिंग और अवेयरनेस कैंपेन चलाया गया। यह कैंपेन डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. इंदरप्रीत रंधावा, परमजीत और खुशवीर की लीडरशिप में चलाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दौरान, टीम ने भादसों रोड, नाभा रोड और फैक्ट्री एरिया, पटियाला में स्पेशल इंस्पेक्शन किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इंस्पेक्शन के दौरान, तंबाकू कंट्रोल एक्ट का उल्लंघन करने पर कुल 8 चालान काटे गए। इस ऑपरेशन से कुल 1100 रुपये का जुर्माना वसूला गया। डिपार्टमेंट ने साफ किया कि तंबाकू प्रोडक्ट्स की बिक्री और इस्तेमाल से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आने वाले समय में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।</div><div style="text-align:justify;">इसके अलावा, नेशनल ब्लाइंडनेस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत मोतियाबिंद स्क्रीनिंग कैंप लगाए गए और बुज़ुर्गों की आँखों की जाँच की गई और उन्हें दवाएँ और चश्मे भी दिए गए। ये कैंप पटियाला के भादसों ब्लॉक के गाँव लोट में लगाए गए थे। टीम ने कैंपों के कामकाज, मरीज़ों की जाँच, दवाओं की उपलब्धता और आँखों के इलाज की सेवाओं का विस्तार से जायज़ा लिया। मरीज़ों को आगे के इलाज के लिए सही सलाह, दवाएँ और रेफरल सेवाएँ भी दी गईं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हेल्थ अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे तंबाकू जैसे नशे से दूर रहें और समय-समय पर अपनी आँखों की जाँच करवाएँ। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे ये प्रोग्राम लोगों की सेहत को बेहतर बनाने और जागरूकता बढ़ाने के लिए बहुत ज़रूरी हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डॉ. इंदरप्रीत रंधावा ने कहा कि आने वाले दिनों में भी ऐसी जाँच और कैंप लगातार जारी रहेंगे ताकि तंबाकू-मुक्त समाज और आँखों की बीमारियों से बचाव पक्का किया जा सके।<br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180959/special-checking-under-tobacco-control-campaign-in-patiala-dr</link>
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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 19:08:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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