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                <title>Nari shakti - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Nari shakti RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय  महिला दिवस पर डॉक्टर  और नर्स हुई सम्मानित</title>
                                    <description><![CDATA[<div>  </div>
<div><strong>  स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर। </strong></div>
<div>  </div>
<div>अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर  रविवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र  उसका बाजार पर  उत्कृष्ट कार्य करने पर डॉक्टर सानिया निजाम और स्टाफ नर्स नीतू सिंह को अधीक्षक  डॉ एस के पटेल  द्वारा प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया I</div>
<div>  </div>
<div>इस अवसर पर अधीक्षक डॉ  एस के पटेल ने कहा कि महिलाओ की राष्ट्र निर्माण की सक्रिय भागीदारी हैं। उनका योगदान सुरक्षा, सेवा और समर्पण की त्रिवेणी है।उन्होंने कहा कि  हर साल  8 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि नारी शक्ति के संघर्ष, संकल्प और सफलता का उत्सव है।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172845/doctors-and-nurses-honored-on-international-womens-day"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1772970688094.jpg" alt=""></a><br /><div> </div>
<div><strong> स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर। </strong></div>
<div> </div>
<div>अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर  रविवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र  उसका बाजार पर  उत्कृष्ट कार्य करने पर डॉक्टर सानिया निजाम और स्टाफ नर्स नीतू सिंह को अधीक्षक  डॉ एस के पटेल  द्वारा प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया I</div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर अधीक्षक डॉ  एस के पटेल ने कहा कि महिलाओ की राष्ट्र निर्माण की सक्रिय भागीदारी हैं। उनका योगदान सुरक्षा, सेवा और समर्पण की त्रिवेणी है।उन्होंने कहा कि  हर साल  8 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि नारी शक्ति के संघर्ष, संकल्प और सफलता का उत्सव है। </div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि  महिला को शक्ति का रूप कहा जाता है। उसमें सृजन (जीवन देने), पोषण, सहनशीलता और अदम्य साहस की सर्वोच्च क्षमता होती है। 'यत्र तु नार्यः पूज्यन्ते तत्र देवताः रमन्ते' अर्थात जहां स्त्रियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 18:12:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्त्री शक्ति के महत्त्व से राष्ट्र निर्माण में चौतरफा विकास</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय संस्कृति और इतिहास में स्त्रियों को सदैव उच्च स्थान प्रदान किया गया हैl यह भी मान्यता मानी गई है कि जिस घर में स्त्री का सम्मान होता है, वह घर धन-धान्य से परिपूर्ण हो कर समाज में विशिष्ट स्थान बनाता हैl यही कारण है कि भारत देश को भारत माता कहा जाता हैl नारी तथा समस्त स्त्री जाति ने भारत देश का मान सदैव शीर्षस्थ बना कर रखा है ऐसे अनगिनत उदाहरण इतिहास में और वर्तमान में हमारे समक्ष हैं जिससे हमारा सिर सदैव वैश्विक स्तर पर ऊंचा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">महान शासक नेपोलियन बोनापार्ट ने नारी की महत्ता को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172600/all-round-development-in-nation-building-through-the-importance-of-women"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/women-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय संस्कृति और इतिहास में स्त्रियों को सदैव उच्च स्थान प्रदान किया गया हैl यह भी मान्यता मानी गई है कि जिस घर में स्त्री का सम्मान होता है, वह घर धन-धान्य से परिपूर्ण हो कर समाज में विशिष्ट स्थान बनाता हैl यही कारण है कि भारत देश को भारत माता कहा जाता हैl नारी तथा समस्त स्त्री जाति ने भारत देश का मान सदैव शीर्षस्थ बना कर रखा है ऐसे अनगिनत उदाहरण इतिहास में और वर्तमान में हमारे समक्ष हैं जिससे हमारा सिर सदैव वैश्विक स्तर पर ऊंचा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">महान शासक नेपोलियन बोनापार्ट ने नारी की महत्ता को बताते हुए कहा था कि 'मुझे एक योग्य माता दे दो, मैं तुम्हें एक योग्य राष्ट्र दूंगा'। मानव कल्याण की भावना, कर्तव्य, सृजनशीलता और ममता को सर्वोपरि मानते हुए महिलाओं ने इस जगत में मां के रूप में अपनी सर्वोपरि भूमिका को निभाते हुए राष्ट्र निर्माण और विकास में अपने विशेष दायित्वों का निर्वहन किया है। किसी भी राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं का महत्व इसलिए भी सर्वोपरि है कि महिलाएं बच्चों को जन्म देकर उनका पालन पोषण करते हुए उनमें संस्कार एवं सद्गुणों का उच्चतम विकास करती हैं,और राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी को सुनिश्चित करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिससे राष्ट्र निर्माण और विकास निर्बाध गति से होता रहे। वीर भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, विवेकानंद जैसी विभूतियों का देश हित में अवतार माँ के लालन-पालन की ही देन है। जीजाबाई,जयंताबाई, पन्ना धाय जैसी अनेक माताओं को त्याग समर्पण और त्याग को भी इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों से अंकित किया गया है। माताएं ही हैं जो बहुआयामी व्यक्तित्व का निर्माण और विकास करती है। मूलतः माताएं, स्त्रियां की राष्ट्र निर्माण की सशक्त सूत्रधार होती है। राष्ट्र निर्माण के संदर्भ में नारी विधाता की सर्वोत्तम और उत्कृष्ट कृति है। जो जीवन की बगिया को महकाती है और न केवल व्यक्तिगत बल्कि राष्ट्र निर्माण एवं विकास में अपनी महती भूमिका निभाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">नारी के लिए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उनमें विविधता में एकता होती है। महिलाओं के बाह्य रूप और सौंदर्य तथा पहनावे में विस्तृत विविधता तो होती ही है, लेकिन उनके मानस में एक आकार और केंद्रीय शक्ति ईश्वर की तरह एक ही होती है। नारी का स्वरूप न केवल बाहर अपितु अंतर्मन के ममत्व भाव का वृहद स्वरूप का भी रहस्योद्घाटन करती हैं, नारी प्रकृति एवं ईश्वरिय जगत का अद्भुत पवित्र साध्य है, जिसे अनुभव करने के लिए पवित्र साधन एवं दृष्टि का होना आवश्यक है, नारी का स्वरूप विराट होता है जिसके समक्ष स्वयं विधाता भी नतमस्तक हो जाते हैं, नारी अमृत वरदान होने के साथ-साथ दिव्य औषधि भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">समाज के सांस्कृतिक धार्मिक भौगोलिक ऐतिहासिक और साहित्यिक जगत में नारी यानी स्त्री का दिव्य स्वरूप प्रस्फुटित हुआ है और जिसके फलस्वरूप राष्ट्र ने नई नई ऊंचाइयों को भी शिरोधार्य किया है। सभ्यता, संस्कृति ,संस्कार और परंपराएं महिलाओं के कारण ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होती हैं ।अतः महिलाओं की सामाजिक, शैक्षिक, धार्मिक कार्य शक्ति ही परिवार तथा समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाते हैं। नारियों के संदर्भ में यह भी कहा गया है कि सशक्त महिला सशक्त समाज की आधारशिला होती है। माताएं शिशु की प्रथम शिक्षिका होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">माता के बाद बहन,पत्नी का अवतार राष्ट्र निर्माण और विकास के साथ-साथ पथ प्रदर्शक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, पत्नी चाहे तो पति को गुणवान और सद्गुणी बना सकती है। इतिहास गवाह है कि जब भी कभी देश में संकट आया है तो पत्नियों ने अपने पतियों के माथे पर तिलक लगाकर जोश, जुनून और विश्वास के साथ रणभूमि भेजा है और विजयश्री प्राप्त की है। तुलसीदास जी के जीवन में आध्यात्मिक चेतना प्रदान करने के लिए उनकी पत्नी रत्नावली का ही हाथ था।</p>
<p style="text-align:justify;">विद्योत्मा ने कालिदास को संस्कृत का प्रकांड महाकवि बनाया था, इसके अतिरिक्त यह कहना भी गलत नहीं होगा कि पति को भ्रष्टाचार, बेईमानी, लूट,गबन आदि जो कि राष्ट्र को खोखला बनाते हैं जैसी बुराइयों से पत्नी ही दूर रख सकती है और उन्हें इन विसंगतियों से अपनी सलाह के अनुसार बचाती है। सही मायनों में महिलाएं ही संस्कृति, संस्कार और परंपराओं की संरक्षिका होती है। वे पीढ़ी दर पीढ़ी इसका संचालन आरक्षण करती आ रही है। पूरे विश्व में भारत को विश्व गुरु का दर्जा दिलाने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण एवं महती रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वतंत्रता के आंदोलन की चर्चा ना करना इस आलेख को पूर्ण बनाता है, अतः स्वाधीनता के आंदोलन में महिलाओं ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर भारत के नवनिर्माण में अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया है, कैप्टन लक्ष्मी सहगल, अरूणा आसफ अली, मैडम भीकाजी कामा,सरोजिनी नायडू, एनी बेसेंट, दुर्गा भाभी और न जाने कितनी महिलाओं ने राष्ट्र निर्माण और विकास में अपना अमूल्य योगदान दिया है। राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, विजयलक्ष्मी पंडित विश्व की प्रथम महिला जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष बनी, सरोजनी नायडू, सुचेता कृपलानी, इंदिरा गांधी जैसे महिलाओं ने राजनीतिक प्रतिभा का प्रयोग राष्ट्र निर्माण और विकास में किया है जो अपने समय के महत्वपूर्ण सशक्त हस्ताक्षर थी।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, ममता बनर्जी, मायावती, स्मृति ईरानी, सोनिया गांधी,प्रियंका गांधी, हरसिमरन, कौर वसुंधरा राजे सिंधिया, प्रतिभा पाटिल, मृदुला सिन्हा आदि ने राजनीति मैं अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर अपने कार्यों से महिलाओं का सम्मान बढ़ाया एवं देश की अर्थव्यवस्था सुधारने में अपना योगदान दिया है। यह कहने में कतई गुरेज नहीं है कि महिलाएं राजनीति, सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक, चिकित्सकीय, और विज्ञान में देश के हित के लिए अग्रणी रही हैं। सशक्त राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं की सशक्त भूमिका को नमन करते हुए कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें साधुवाद प्रदान कर उनकी इस भूमिका को प्रणाम करता है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 18:50:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आधी आबादी का पूरा आकाश: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का वैश्विक परिप्रेक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं की उपलब्धियों का उत्सव है और लैंगिक समानता की दिशा में संघर्ष का प्रतीक। यह दिन केवल एक तारीख नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक वैश्विक आंदोलन का प्रतीक है जो सदियों से चली आ रही असमानताओं को चुनौती देता है। 1908 में अमेरिका की 15,000 महिलाओं ने न्यूयॉर्क की सड़कों पर उतरकर बेहतर कामकाजी परिस्थितियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वोट का अधिकार और सम्मानजनक वेतन की मांग की थी। उस आंदोलन ने जन्म लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आज दुनिया भर में लाखों महिलाओं को प्रेरित करता है। संयुक्त</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172598/half-the-population-the-whole-sky-global-perspective-of-international"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1582877879-851.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं की उपलब्धियों का उत्सव है और लैंगिक समानता की दिशा में संघर्ष का प्रतीक। यह दिन केवल एक तारीख नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक वैश्विक आंदोलन का प्रतीक है जो सदियों से चली आ रही असमानताओं को चुनौती देता है। 1908 में अमेरिका की 15,000 महिलाओं ने न्यूयॉर्क की सड़कों पर उतरकर बेहतर कामकाजी परिस्थितियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वोट का अधिकार और सम्मानजनक वेतन की मांग की थी। उस आंदोलन ने जन्म लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आज दुनिया भर में लाखों महिलाओं को प्रेरित करता है। संयुक्त राष्ट्र ने 1975 में इसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और तब से यह दिन महिलाओं के अधिकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी नेतृत्व क्षमता और सामाजिक न्याय की मांग का केंद्र बन गया है। भारत जैसे देश में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां महिलाएं प्राचीन काल से देवी के रूप में पूजित होती आई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी वास्तविकता में उन्हें समान अवसरों से वंचित रखा जाता रहा है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि समानता का स्वप्न अधूरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक हर महिला को शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और सुरक्षा न मिले।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारतीय महिलाओं का प्रतिरोध और नेतृत्व कभी थमा नहीं। प्राचीन काल में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियों ने शास्त्रार्थ में अपनी बौद्धिक श्रेष्ठता सिद्ध की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मध्यकाल में रानी लक्ष्मीबाई ने अठारह सौ सत्तावन के संग्राम में अपनी वीरता से ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी। आधुनिक भारत की नींव रखने में सावित्रीबाई फुले का योगदान अविस्मरणीय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने वर्ष 1848 में पुणे में प्रथम बालिका विद्यालय की स्थापना की। उस समय जब समाज लड़कियों की शिक्षा को अधर्म मानता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सावित्रीबाई पर पत्थर और कीचड़ फेंके जाते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु उन्होंने हार नहीं मानी। इसी संघर्ष की परिणति थी कि आज भारत की बेटियां अंतरिक्ष से लेकर ओलंपिक के मैदान तक अपना परचम लहरा रही हैं। स्वतंत्रता संग्राम में सरोजिनी नायडू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अरुणा आसफ अली और भीखाजी कामा जैसी महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि राष्ट्र की मुक्ति का मार्ग स्त्री की सहभागिता के बिना संभव नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के पश्चात भारतीय संविधान ने अनुच्छेद चौदह और पंद्रह के माध्यम से लैंगिक समानता को मौलिक अधिकार के रूप में प्रतिष्ठित किया। राजनीतिक पटल पर भारत ने विश्व को राह दिखाई जब इंदिरा गांधी देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री बनीं और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से वैश्विक भूगोल को बदल दिया। वर्तमान समय में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सर्वोच्च पद पर आसीन होना इस बात का प्रतीक है कि एक साधारण आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाली महिला भी अपनी योग्यता से शिखर तक पहुँच सकती है। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का एक सशक्त उदाहरण पंचायती राज व्यवस्था है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ तैंतीस से पचास प्रतिशत आरक्षण के कारण आज लगभग चौदह लाख से अधिक महिलाएं सरपंच और पार्षद के रूप में ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रही हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संसद और विधानसभाओं में उनकी हिस्सेदारी अभी भी लगभग चौदह प्रतिशत के आसपास सिमटी हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके लिए निरंतर प्रयास और विधायी समर्थन की आवश्यकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक मोर्चे पर महिलाओं की स्थिति और उनकी भागीदारी विकास के मापदंडों को निर्धारित करती है। वैश्विक आर्थिक मंच की वर्ष 2023 की रिपोर्ट के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत लैंगिक अंतराल सूचकांक में 146 देशों के बीच 127वें स्थान पर खड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो यह दर्शाता है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अभी लंबी दूरी तय करनी है। भारत मं  महिला श्रम बल भागीदारी दर वर्तमान में लगभग सैंतीस प्रतिशत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा छिहत्तर प्रतिशत से अधिक है। इस अंतर का मुख्य कारण घरेलू उत्तरदायित्वों का असंतुलित बोझ और कार्यस्थलों पर सुरक्षा की कमी है। इसके अतिरिक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत अभी भी पूर्णतः धरातल पर नहीं उतरा है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में लगभग बीस प्रतिशत कम पारिश्रमिक प्राप्त होता है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्टार्टअप और उद्यमशीलता के क्षेत्र में बदलाव की लहर देखी जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ दस में से लगभग दो उद्यम महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की प्रगति के आधार स्तंभ होते हैं। राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के पांचवें चरण के आंकड़े बताते हैं कि भारत में महिला साक्षरता दर में सुधार हुआ है और यह सत्तर प्रतिशत के पार पहुँच गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी पैंसठ प्रतिशत महिलाएं साक्षरता से वंचित हैं। लड़कियों के विद्यालय छोड़ने की दर अभी भी चिंता का विषय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका मुख्य कारण सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवहन की कमी और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं का अभाव है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो प्रति लाख जीवित जन्मों पर संतानबे तक पहुँच गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुपोषण और रक्ताल्पता (एनीमिया) अभी भी एक बड़ी चुनौती है। भारत की लगभग संतावन प्रतिशत महिलाएं रक्ताल्पता से पीड़ित हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उनके कार्यबल और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान और खेल जगत में भारतीय महिलाओं ने उन रूढ़ियों को तोड़ा है जो उन्हें केवल घर की चारदीवारी तक सीमित मानती थीं। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मिसाइल वुमन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के नाम से विख्यात टेस्सी थॉमस ने अग्नि मिसाइल परियोजना का नेतृत्व कर यह सिद्ध किया कि तकनीकी कौशल किसी लिंग का मोहताज नहीं है। खेल के मैदान में पीटी उषा की उड़ान से शुरू हुआ सफर आज मैरी कॉम के छह विश्व स्वर्ण पदकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीवी सिंधु के ओलंपिक पदकों और मिताली राज के क्रिकेट कीर्तिमानों तक पहुँच चुका है। ये उपलब्धियां केवल पदक नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन करोड़ों लड़कियों के लिए आशा की किरण हैं जो समाज के बंधनों को तोड़कर अपनी पहचान बनाना चाहती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यद्यपि उपलब्धियां गौरवशाली हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु सामाजिक सुरक्षा और अपराध के आंकड़े एक भयावह तस्वीर भी प्रस्तुत करते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में निरंतर वृद्धि देखी गई है। प्रति घंटे दो से अधिक महिलाओं के साथ होने वाली यौन हिंसा और घरेलू उत्पीड़न के मामले यह बताते हैं कि केवल कानून का निर्माण पर्याप्त नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज की चेतना में परिवर्तन अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में बाल विवाह की दर अभी भी चुनौतीपूर्ण स्तर पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लड़कियों के बचपन और उनके भविष्य को अंधकारमय बना देती है। निर्भया कांड के पश्चात कानून को और अधिक कठोर बनाया गया और त्वरित अदालतों की स्थापना की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु न्याय की धीमी प्रक्रिया और सामाजिक लोकलाज अभी भी पीड़ितों के मार्ग की बाधा बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी योजनाओं ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में उत्प्रेरक का कार्य किया है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">अभियान ने लिंगानुपात में सुधार लाने और कन्या शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी प्रकार </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">उज्ज्वला योजना</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के अंतर्गत दस करोड़ से अधिक महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन प्रदान कर उन्हें धुएं से होने वाली बीमारियों से मुक्ति दिलाई गई है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मुद्रा योजना</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत वितरित ऋणों में लगभग सत्तर प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सूक्ष्म और लघु स्तर पर आर्थिक क्रांति का नेतृत्व कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सुदृढ़ हुई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वे सामाजिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान समय में डिजिटल क्रांति ने महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल इंडिया</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं ई-कॉमर्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑनलाइन बैंकिंग और शिक्षा से जुड़ रही हैं। कोविड महामारी के दौरान जब दुनिया ठहर गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब आशा कार्यकर्ताओं के रूप में नौ लाख से अधिक महिलाओं ने अग्रिम पंक्ति में रहकर टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं का जिम्मा संभाला। यह उनके अदम्य साहस और समर्पण का ही परिणाम था कि भारत इतनी बड़ी आपदा का सामना कर सका। आज तकनीक के युग में महिलाएं कोडिंग से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निष्कर्षतः</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक प्रतिज्ञा है। यह संकल्प है उस समाज के निर्माण का जहाँ किसी व्यक्ति की क्षमता का आकलन उसके लिंग के आधार पर न होकर उसकी योग्यता के आधार पर हो। महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल महिलाओं को अधिकार देना नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें एक ऐसा वातावरण प्रदान करना है जहाँ वे अपनी इच्छाओं और सपनों को बिना किसी भय के जी सकें। जैसा कि मलाला यूसुफजई ने कहा था कि हम तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक हमारी आधी आबादी को पीछे रखा जाएगा। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का स्वप्न तभी साकार होगा जब देश की प्रत्येक महिला शिक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षित और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होगी। यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक समानता का अधिकार केवल कागजों तक सीमित न रहकर हर घर और हर दिल की हकीकत न बन जाए। आज हमें यह प्रण लेना होगा कि हम अपनी बेटियों को केवल पढ़ाएंगे ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें गगन चूमने के लिए पंख भी देंगे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 18:47:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>विशेष सत्र  का तोहफा :नारी शक्ति वंदन कानून</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>नवदुर्गा</strong>  उत्स्व के पहले ही संसद का विशेष सत्र  देश की महिलाओं को 33 फीसदी  आरक्षण  का क़ानून  बनाने के साथ समाप्त हो गया। ये विशेष सत्र  का तोहफा है देश की महिलाओं के लिए। ये सरकारी तोहफा नहीं बल्कि देश कि और से दिया गया तोहफा है ।  अब बारी है राजनीतिक दलों की और से महिलाओं के सामने इस झुनझुने को बजाने की।  जो जितनी जोर से ये झुनझुना बजायेगा ,वो उतना ज्यादा महिलाओं का समर्थन हासिल करेगा। दरअसल इस क़ानून का श्रेय अकेले सत्तारूढ़ दल नहीं ले सकता ,क्योंकि ये क़ानून संसद की आम</p>
<p><br />सत्तारूढ़</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134940/gift-of-special-session-women-power-salutation-law"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/nari-shkti1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>नवदुर्गा</strong> उत्स्व के पहले ही संसद का विशेष सत्र  देश की महिलाओं को 33 फीसदी  आरक्षण  का क़ानून  बनाने के साथ समाप्त हो गया। ये विशेष सत्र  का तोहफा है देश की महिलाओं के लिए। ये सरकारी तोहफा नहीं बल्कि देश कि और से दिया गया तोहफा है ।  अब बारी है राजनीतिक दलों की और से महिलाओं के सामने इस झुनझुने को बजाने की।  जो जितनी जोर से ये झुनझुना बजायेगा ,वो उतना ज्यादा महिलाओं का समर्थन हासिल करेगा। दरअसल इस क़ानून का श्रेय अकेले सत्तारूढ़ दल नहीं ले सकता ,क्योंकि ये क़ानून संसद की आम राय से यानि सर्व सम्मति से बना है। देश में अदावत की राजनीति के इस युग में सर्व्सम्मत्ति निश्चित ही एक बड़ी उपलब्धि है। ये क़ानून उस नारियल को फोड़ने जैसा है जिसे चार महाबली सरकारों ने तोड़ने के लिए 11  वार किये तब कहीं इसमें से मृदुजल निकला।</p>
<p><br />सत्तारूढ़ भाजपा ने अपनी खिसकती जमीन बचने के लिए जितने भी मिसाइल छोड़े वे एक के बाद एक फुस्स होते गए। यहां तक की सनातन पर हमला और जी-२० की कथित सफलता भी काम नहीं आई ,क्योंकि ये दोनों मुद्दे जनता के गले से नीचे उतरे ही नहीं।  ऐसे में हारकर सरकार और सरकारी पार्टी को संसद का विशेष सत्र आहूत कर महिला आरक्षण विधेयक को देश के सामने लाना पड़ा ।  सरकार विधेयक में नया कुछ जोड़ नहीं सकी इसलिए इस विधेयक का नाम ही बदल दिया गय।  लेकिन नाम बदलने से मकसद तो नहीं बदलता। सरकार का दांव था की चुनावी मौसम में विपक्ष  इस विधेयक को लेकर उलझ जाएगा ,किन्तु ऐसा हुआ नही।  ये नारी शक्ति वंदन विधयेक विपक्ष  के गले की फांस नहीं बन पाया। कांग्रेस ने तो विशेष सत्र शुरू होने से पहले ही सरकार को पात्र लिखकर इस विधेयक को लाने कीमांग रख दी थी ।  खुद कांग्रेस  की श्रीमती सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री जी को इस बाब्ड पात्र लिखा था।</p>
<p><br />अब जब एक विकलांग विधेयक संसद में पारित हो गया है तो सरकार और सरकारी पार्टी के हाथ से इसका श्रेय भी जाता रहा ।  अब इस विधेयक को क़ानून बनाने का श्रेय सभी दलों को देना होगा ,यदि नहीं दिया जाएगा तो सरकार की बेईमानी जनता के सामने आ जाएगी। जहाँ तक सवाल सरकारी पार्टी की ईमानदारी  का है तो इस बारे  में मुझे  कुछ कहना  नहीं है ,क्योंकि देश इस बात को लेकर पूरी तरह वाकिफ है। सरकार ने पिछले ९ साल में किस तरह से अपनी ईमानदारी का प्रदर्शन किया है वो किसी से छिपा नहीं है सरकार ने जनता से इस कालखंड में जो कहा सो किया नहीं और जो नहीं कहा वो सब किया। अच्छे दिनों की बात का उल्हाना देना भी अब जनता ने छोड़<br /> दिया है ,क्योंकि सरकार के कान  पर जून  ही नहीं रेंगती ।</p>
<p><br />सरकार और सरकारी   पार्टी के लिए ये मौका   है कि  वो इस कथित  उपलब्धि के लिए नेहरू  -गांधी खानदान  के सदस्यों  की ही तरह बेशर्मी का प्रदर्शन करते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री  नरेंद्र  मोदी  जी के गले में ' भारत - रत्न ' का तमगा  भी डाल  ही दे । पता  नहीं फिर  ये मौक़ा  हाथ में आये  या न  आये । हालाँकि  सरकारी पार्टी भाजपा का ख्वाब  2047 तक देश की सत्ता  में रहने  का है। ख्वाब देखना कोई अपराध नहीं है ।  भाजपा को इस मामले में हमारी हार्दिक शुभकामनाएं है। कांग्रेस ने भी शायद ऐसा ही कोई ख्वाब संजोया होगा ,लेकिन उसका ख्वाब भी एक अरसे बाद टूटा hi।  ख्वाब वैसे भी टूटने के लिए होते है।  बहुत कम ख्वाब ऐसे होते हैं जो साकार हो पाते हैं।</p>
<p><br />नारी शक्ति वंदन विधेयक को तो पारित होना ही था ,लेकिन अब असली अग्निपरीक्षा सभी राजनितिक दलों की है कि वे क़ानून लागू होने की प्रतीक्षा किये बिना पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ ही अगले आम चुनाव में बिना किसी कानूनी प्रावधान के ही 33  फीसदी महिलाओं को अपना उम्मीदवार बनाकर दिखाएँ ।  क़ानून को अमल में आने के लिए परिसीमन और जनगणना का इन्तजार क्या करना ? अब बारी राजनितिक दलों में काम करने वाली महिलाओं की भी है कि वे अपने-अपने दल से अपना-अपना हिस्सा मांगें और जो आनाकानी करे उसकी ' कान-कुच्ची ' कर डालें। अन्यथा थोथा चना घना बजेगा ही।</p>
<p><br />आजादी के अमृतकाल में सियासत यदि  देश जुमलेबाजी से मुक्ति के खिलाफ भी संघर्ष का श्रीगणेश कर ले तो बेहतर है ।  इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की भी जरूरत नहीं ह।  सब जानते  हैं कि जुमलेबाजी ने इस देश का बहुत नुक्सान  किया  है।देश रोज  नए क़ानून बनाता,बिगाड़ता है इसलिए ये मौक़ा है कि एक ऐसा क़ानून भी बनाया जाये जिसमें ' जुमलेबाजी ' को गैर जमानती और जघन्य अपराध घोषित कर इसकी सजा आजन्म चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध और जुर्माना दोनों हों। राजनीति से जिस दिन जुमलेबाजी का खात्मा हो जाएगा आप तय मानिये  देश की राजनीती ही नहीं देश की तस्वीर भी बदल जाएगी।</p>
<p><br />देश का दुर्भाग्य है कि देश के नेता न जनार्दन  से डरते  हैं और न जनता  -जनार्दन  से।  नेताओं  को किसी से डर  लगता  ही नहीं है । इतने निडर  नेता मैंने    दुनिया  भर  में नहीं देखे । लोग  भगवान से न डरें ,जनता से न डरें लेकिन कम से कम अपने जमीर यानि अंतरात्मा से तो भय खाएं,किन्तु इनके भीतर अब आत्मा भी नहीं है जो इन्हें डरा सके। देश को इस तरह के आत्माविहीन ,निर्दयी नेताओं से मुक्ति चाहिए।  देश की नयी  पीढ़ी  और अब आधे  आबादी  यानि देश की महिलाओं का दायित्व  है कि वे ऐसे निर्मम  नेताओं को चिन्हित  करें  और उन्हें  राजनीति से बाहर  का दरवाजा  दिखाएं।</p>
<p><br />नारी शक्ति वंदन विधेयक के संसद में पारित होने से होंसे  -फूले  फिर रहे  नेताओं  से किसी ने ये नहीं पूछा  कि इस क़ानून के बाद भी क्या देश की गरीब  महिलायें देश की बेहद  मंहगी  हो चुकी  चुनाव प्रक्रिया में हिस्सेदारी  कर पाएंगी  ? या ये क़ानून भी खानदानो   की महिलाओं के लिए संसद की सीढ़ी  बनकर  रह  जाएगा ।  नारी शक्ति वंदन क़ानून पर अमल के लिए ये भी आवश्यक है कि चुनावों का खर्च बांधा जाये ताकि एक आम अहिला भी इस प्रक्रिया में भाग ले सकें। अन्यथा वो ही कहावत चरितार्थ हो जाएगी कि -' हाथ न मुठी-खुरखुरा उठी । नारी शक्ति की वंदना  के लिए क़ानून बनाने के साथ ही संसद का आंगन सीधा कीजिये ताकि  लोकतंत्र की राधा वहां जमकर नाच  सके ,झूम सके। देश की महिलाओं को एक बार  फिर से बधाइयाँ और शुभकामनाएं</p>
<h5 style="text-align:center;"><strong>@ राकेश अचल    </strong></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>विचारधारा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Sep 2023 17:23:42 +0530</pubDate>
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