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                <title>Justice System - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Justice System RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>फर्जी मुकदमों की बढ़ती चुनौती: एससी-एसटी और पॉक्सो कानूनों के कथित दुरुपयोग पर उठे गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं रहा तो बहुत बुरी तरह से घिर जाता है। एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के बढ़ते मुकदमे इसकी गवाही दे रहे हैं। कुछ ऐसे संगठित गिरोह भी हैं जो महिलाओं के द्वारा आदमियों को फंसवाते देखे गए हैं। हालांकि उन गिरोहों का पर्दाफाश होता है लेकिन तब तक आरोपी को सज़ा काटनी ही पड़ती है। इसी तरह एससी-एसटी एक्ट के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184359/growing-challenge-of-fake-cases-serious-questions-raised-on-alleged"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/rajeev.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं रहा तो बहुत बुरी तरह से घिर जाता है। एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के बढ़ते मुकदमे इसकी गवाही दे रहे हैं। कुछ ऐसे संगठित गिरोह भी हैं जो महिलाओं के द्वारा आदमियों को फंसवाते देखे गए हैं। हालांकि उन गिरोहों का पर्दाफाश होता है लेकिन तब तक आरोपी को सज़ा काटनी ही पड़ती है। इसी तरह एससी-एसटी एक्ट के कानून का दुरुपयोग वर्षों से हो रहा है लेकिन आज तक कितनी ही सरकारें आईं हों इनमें संसोधन नहीं हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान न्याय का अधिकार देता है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे विशेष कानून बनाए गए जो समाज के कमजोर और संवेदनशील वर्गों को सुरक्षा प्रदान कर सकें। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और पॉक्सो कानून भी इसी सोच का परिणाम हैं। इन कानूनों ने अनेक पीड़ितों को न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है और समाज में अपराधियों के विरुद्ध कठोर संदेश दिया है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक दूसरा पक्ष भी लगातार चर्चा में रहा है। कई लोग आरोप लगाते हैं कि व्यक्तिगत दुश्मनी, संपत्ति विवाद, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या पारिवारिक संघर्ष में इन कानूनों का दुरुपयोग कर झूठे मुक़दमे दर्ज कराए जाते हैं। यह मुद्दा अदालतों, विधि विशेषज्ञों और समाज के बीच लगातार बहस का विषय बना हुआ है। क्या सचमुच फर्जी मुकदमों की बाढ़ है?</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यह कहना कि अधिकांश एससी-एसटी या पॉक्सो के मामले फर्जी हैं, उपलब्ध आधिकारिक आँकड़ों के आधार पर उचित नहीं होगा। कई मामलों में जांच के बाद आरोप सिद्ध नहीं हो पाते, लेकिन इसका कारण हमेशा झूठा मुकदमा नहीं होता। कमजोर जांच, पर्याप्त साक्ष्यों का अभाव, गवाहों का मुकर जाना, समझौते का दबाव या लंबी न्यायिक प्रक्रिया भी इसके कारण हो सकते हैं। हालाँकि, विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने अलग-अलग मामलों में यह भी स्वीकार किया है कि कुछ मामलों में कानूनों का दुरुपयोग होने की शिकायतें सामने आई हैं। इसलिए यह विषय संतुलित दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। निर्दोष व्यक्ति पर मुकदमे का प्रभाव- यदि कोई व्यक्ति वास्तव में झूठे मुकदमे में फँस जाता है, तो उसका प्रभाव केवल अदालत तक सीमित नहीं रहता। उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, नौकरी पर संकट आ सकता है, आर्थिक बोझ बढ़ जाता है और पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजरता है। वर्षों तक मुकदमा चलने के बाद यदि वह निर्दोष साबित भी हो जाए, तब भी खोया हुआ समय और सम्मान आसानी से वापस नहीं आता। दूसरी ओर यह भी नहीं भूलना चाहिए कि एससी-एसटी कानून और पॉक्सो अधिनियम लाखों वास्तविक पीड़ितों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। भारत में जातीय उत्पीड़न और बच्चों के साथ यौन अपराध आज भी गंभीर समस्या हैं। यदि इन कानूनों को कमजोर किया जाए या हर शिकायत को संदेह की दृष्टि से देखा जाए, तो वास्तविक पीड़ित न्याय पाने से वंचित हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसलिए चुनौती यह नहीं है कि कानून समाप्त कर दिए जाएँ, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका सही और निष्पक्ष उपयोग हो। देश की अदालतों में करोड़ों मुकदमे लंबित हैं। विशेष कानूनों के अंतर्गत दर्ज मामलों की संख्या बढ़ने से न्यायिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सुनवाई में देरी के कारण न तो पीड़ित को समय पर न्याय मिल पाता है और न ही निर्दोष व्यक्ति को शीघ्र राहत। तेज और वैज्ञानिक जांच, पर्याप्त न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा समयबद्ध सुनवाई इस समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सरकार की जिम्मेदारी केवल कठोर कानून बनाना नहीं है, बल्कि उनकी निष्पक्ष क्रियान्वयन व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है। यदि कहीं झूठे मुकदमे दर्ज होते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं यदि वास्तविक पीड़ित न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं तो उन्हें भी समय पर न्याय मिलना चाहिए। इस विषय पर कई विधि विशेषज्ञ निम्न सुधारों की आवश्यकता बताते हैं— निष्पक्ष और वैज्ञानिक पुलिस जांच। फॉरेंसिक साक्ष्यों का अधिक उपयोग। विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाना।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण। यदि अदालत यह पाए कि शिकायत जानबूझकर झूठी और दुर्भावनापूर्ण थी, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई। पुलिस और अभियोजन अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण। "सरकार और अदालतें धृतराष्ट्र बनी हुई हैं" जैसी अभिव्यक्ति एक राजनीतिक और भावनात्मक टिप्पणी हो सकती है, लेकिन वास्तविक समाधान तथ्यों और संस्थागत सुधारों में निहित है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में दो सिद्धांत समान रूप से महत्वपूर्ण हैं—दोषी को दंड मिले और निर्दोष को अनावश्यक दंड या उत्पीड़न न झेलना पड़े। इसलिए आवश्यकता न तो कानूनों को कमजोर करने की है और न ही हर शिकायत को झूठा मानने की। आवश्यकता ऐसी न्याय व्यवस्था की है जो वास्तविक पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाए, निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा करे और न्याय प्रणाली पर जनता का विश्वास मजबूत बनाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 22:55:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट की गरिमा और न्याय की संवेदना</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश की सर्वोच्च अदालत केवल एक न्यायिक संस्था नहीं है, बल्कि संविधान की आत्मा और लोकतंत्र की अंतिम आशा का केंद्र है। जब देश का कोई नागरिक हर स्तर पर न्याय की तलाश में असफल होकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है, तो उसके मन में यही विश्वास होता है कि यहां उसकी बात निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ सुनी जाएगी। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा पूरे न्यायिक तंत्र की आधारशिला मानी जाती है। अदालत की गरिमा बनाए रखना जितना न्यायाधीशों और न्यायिक कर्मचारियों का दायित्व है, उतना ही वहां उपस्थित प्रत्येक अधिवक्ता, याचिकाकर्ता और नागरिक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183200/supreme-courts-sense-of-dignity-and-justice"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(3)2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश की सर्वोच्च अदालत केवल एक न्यायिक संस्था नहीं है, बल्कि संविधान की आत्मा और लोकतंत्र की अंतिम आशा का केंद्र है। जब देश का कोई नागरिक हर स्तर पर न्याय की तलाश में असफल होकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है, तो उसके मन में यही विश्वास होता है कि यहां उसकी बात निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ सुनी जाएगी। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा पूरे न्यायिक तंत्र की आधारशिला मानी जाती है। अदालत की गरिमा बनाए रखना जितना न्यायाधीशों और न्यायिक कर्मचारियों का दायित्व है, उतना ही वहां उपस्थित प्रत्येक अधिवक्ता, याचिकाकर्ता और नागरिक का भी कर्तव्य है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता वकील द्वारा न्यायाधीशों के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग करना, कागजात उछालना और मुख्य न्यायाधीश के लिए अपशब्द कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। किसी भी परिस्थिति में न्यायालय के भीतर इस प्रकार का व्यवहार स्वीकार्य नहीं कहा जा सकता। अदालत तर्क और कानून की भाषा समझती है, आक्रोश और अपमान की नहीं। यदि न्याय की लड़ाई लड़ने वाला स्वयं कानून और शिष्टाचार की सीमाएं लांघने लगे, तो न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कमजोर होने का खतरा पैदा हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वकील केवल अपने मुवक्किल का प्रतिनिधि नहीं होता, बल्कि वह न्यायालय का भी अधिकारी माना जाता है। उसकी वाणी, उसका आचरण और उसका व्यवहार न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा होता है। इसलिए अधिवक्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे कठिन से कठिन परिस्थिति में भी संयम बनाए रखें। असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन असहमति और अभद्रता के बीच एक स्पष्ट रेखा होती है। उस रेखा का सम्मान करना ही लोकतांत्रिक संस्कृति और न्यायिक परंपरा की पहचान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अदालत ने वकील की याचिका खारिज कर दी, लेकिन उसके खिलाफ अवमानना की कठोर कार्रवाई नहीं की। न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि वह व्यक्ति संभवतः अत्यधिक तनाव और मानसिक दबाव में है तथा उसकी हताशा स्पष्ट दिखाई दे रही है। यह दृष्टिकोण न्यायपालिका की मानवीय संवेदना को भी सामने लाता है। कानून केवल दंड देने का माध्यम नहीं है, बल्कि परिस्थितियों को समझने और न्याय के व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखने की व्यवस्था भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वास्तविकता यह है कि न्याय की तलाश में अदालत तक पहुंचने वाला प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी पीड़ा, संघर्ष या अन्याय का बोझ लेकर आता है। वर्षों तक मुकदमे लड़ने, आर्थिक बोझ उठाने और बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने के बाद जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिलता, तब कई लोग मानसिक रूप से टूट जाते हैं। यह टूटन कभी-कभी हताशा और असंतुलित व्यवहार के रूप में सामने आती है। इसका अर्थ यह नहीं कि ऐसे व्यवहार को उचित ठहराया जाए, बल्कि यह समझना आवश्यक है कि उसके पीछे पीड़ा और निराशा का एक लंबा इतिहास भी हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न्यायपालिका की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्षता के साथ-साथ उसकी संवेदनशीलता भी है। यदि कोई व्यक्ति अदालत में अत्यधिक तनावग्रस्त दिखाई देता है, तो उसके साथ कानून के अनुसार व्यवहार करते हुए उसकी मानसिक स्थिति को भी समझना चाहिए। न्याय केवल आदेश सुनाने से पूरा नहीं होता, बल्कि यह विश्वास भी पैदा करता है कि अदालत ने व्यक्ति की बात पूरी गंभीरता से सुनी और समझी। यही विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी सच है कि न्याय में विलंब, लंबी कानूनी प्रक्रिया और बढ़ते मुकदमों का बोझ कई लोगों में निराशा पैदा करता है। ऐसे में न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, सरल और समयबद्ध बनाने की दिशा में लगातार प्रयास आवश्यक हैं। जब लोगों को समय पर न्याय मिलेगा, तो निराशा और असंतोष की स्थितियां भी कम होंगी। न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल विवादों का निपटारा नहीं, बल्कि समाज में विश्वास और संतुलन बनाए रखना भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना ने एक और संदेश दिया है कि न्यायालय की गरिमा बनाए रखने में सभी की समान जिम्मेदारी है। यदि अदालत में अनुशासन समाप्त हो जाए, तो न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होगी और इसका नुकसान अंततः आम नागरिक को ही होगा। इसलिए चाहे वह वरिष्ठ अधिवक्ता हों, नए वकील हों या स्वयं पक्षकार, सभी को यह समझना होगा कि अदालत में शब्दों का चयन, व्यवहार की मर्यादा और कानून के प्रति सम्मान सर्वोपरि है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर न्यायपालिका की उदारता भी सराहनीय है। यदि अदालत चाहती तो अवमानना की कार्रवाई कर सकती थी, लेकिन उसने संयम दिखाया और कठोर दंड देने के बजाय मामले को वहीं समाप्त करना उचित समझा। यह निर्णय बताता है कि न्याय केवल शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि विवेक, धैर्य और करुणा का संतुलित स्वरूप है। हालांकि इस उदारता का अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने का साहस करे। कानून का सम्मान हर परिस्थिति में अनिवार्य है।</div>
<div style="text-align:justify;">लोकतंत्र में न्यायपालिका अंतिम आशा होती है। जब प्रशासन, व्यवस्था और अन्य संस्थाओं से निराश व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है, तो उसके मन में उम्मीद की आखिरी किरण बची होती है। इसलिए अदालतों को भी यह ध्यान रखना होगा कि उनके सामने खड़ा हर व्यक्ति केवल एक केस नंबर नहीं, बल्कि अपने जीवन की किसी गहरी समस्या से जूझता हुआ इंसान है। उसकी बात सुनते समय कानून के साथ मानवीय संवेदना भी बनी रहनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना से देश को दो महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं। पहली, अदालत की गरिमा किसी भी कीमत पर भंग नहीं होनी चाहिए। न्यायालय में अपशब्द, आक्रोश और अभद्र व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध हैं। दूसरी, न्याय व्यवस्था को लोगों की पीड़ा, मानसिक तनाव और संघर्ष को भी समझना चाहिए, क्योंकि न्याय केवल निर्णय देने का नाम नहीं, बल्कि समाज में विश्वास बनाए रखने की प्रक्रिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट देश की सबसे बड़ी अदालत है और उसकी प्रतिष्ठा पूरे राष्ट्र की प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई है। वहीं, अदालत की चौखट पर आने वाला हर व्यक्ति न्याय की उम्मीद लेकर आता है। इसलिए आवश्यक है कि एक ओर अधिवक्ता और पक्षकार अपनी मर्यादा और जिम्मेदारी को समझें, तो दूसरी ओर न्याय व्यवस्था भी हर पीड़ित की व्यथा को महसूस करते हुए कानून और संवेदना के बीच संतुलन बनाए रखे। यही संतुलन भारतीय न्यायपालिका की सबसे बड़ी शक्ति है और यही लोकतंत्र की स्थायी पहचान भी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:12:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में वांछित युवक गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना फूलपुर पुलिस ने दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में वांछित चल रहे आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। आरोपी पर नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने घर ले जाकर दुष्कर्म करने तथा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी को उसके गांव के समीप से गिरफ्तार कर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">फूलपुर पुलिस ने बुधवार को मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रवीण पटेल को ग्राम आटा स्थित जौनपुर रोड मोड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182998/youth-wanted-for-raping-a-minor-arrested"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260708-wa0151.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना फूलपुर पुलिस ने दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में वांछित चल रहे आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। आरोपी पर नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने घर ले जाकर दुष्कर्म करने तथा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी को उसके गांव के समीप से गिरफ्तार कर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फूलपुर पुलिस ने बुधवार को मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रवीण पटेल को ग्राम आटा स्थित जौनपुर रोड मोड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान प्रवीण पटेल (19 वर्ष) पुत्र मनोज पटेल, निवासी ग्राम आटा, थाना फूलपुर, कमिश्नरेट प्रयागराज के रूप में हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक, पीड़िता के पिता द्वारा दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने उनकी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर अपने घर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं, घटना की शिकायत करने पर आरोपी ने पीड़िता और उसके परिजनों को जान से मारने की धमकी भी दी। तहरीर के आधार पर थाना फूलपुर में मु0अ0सं0-198/2026 के तहत धारा 64(1), 115(2) एवं 351(3) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में मुकदमा दर्ज किया गया था।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 21:48:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>14 साल पुराने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में वांछित गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong>  थाना बहरिया पुलिस ने वर्ष 2012 से न्यायालय में विचाराधीन एक पुराने मामले में वांछित चल रहे अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या-21, प्रयागराज द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के अनुपालन में की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार बुधवार को थाना बहरिया पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना एवं न्यायालय के निर्देशों के आधार पर कार्रवाई करते हुए मु0नं0-517/12, धारा 306 भारतीय दंड संहिता (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण) से संबंधित वांछित अभियुक्त ललित कुमार सरोज पुत्र दुखीराम, निवासी ग्राम सरायसुल्तान, थाना बहरिया, कमिश्नरेट प्रयागराज, उम्र लगभग 50 वर्ष,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182994/wanted-arrested-for-abetting-suicide-of-14-year-old"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260708-wa0152.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना बहरिया पुलिस ने वर्ष 2012 से न्यायालय में विचाराधीन एक पुराने मामले में वांछित चल रहे अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या-21, प्रयागराज द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के अनुपालन में की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार बुधवार को थाना बहरिया पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना एवं न्यायालय के निर्देशों के आधार पर कार्रवाई करते हुए मु0नं0-517/12, धारा 306 भारतीय दंड संहिता (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण) से संबंधित वांछित अभियुक्त ललित कुमार सरोज पुत्र दुखीराम, निवासी ग्राम सरायसुल्तान, थाना बहरिया, कमिश्नरेट प्रयागराज, उम्र लगभग 50 वर्ष, को उसके घर के पास से गिरफ्तार कर लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उक्त मुकदमा पिछले लगभग 14 वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन है। अभियुक्त के विरुद्ध न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी अधिपत्र (वारंट) जारी किया गया था, जिसके अनुपालन में थाना बहरिया पुलिस ने योजनाबद्ध ढंग से कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक चन्दन कुमार यादव एवं आरक्षी नीरज सिंह, थाना बहरिया शामिल रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 21:45:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>मंसुरपुर चौराहे से युवती को जबरन वाहन में बैठाने वाले दो आरोपी गिरफ्तार।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>बहरिया, प्रयागराज। </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">थाना बहरिया पुलिस ने युवती के अपहरण के प्रयास और जबरन वाहन में बैठाकर ले जाने के मामले में दो वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को सोमवार को थाना क्षेत्र के बाबूगंज स्थित नहर पुलिया के पास से पकड़ कर उनके विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान अरविन्द कुमार पटेल उर्फ सोनू (21 वर्ष) पुत्र रामचरन पटेल तथा मोनू पटेल (22 वर्ष) पुत्र राधेश्याम पटेल, निवासी ग्राम चकिया धमौर, थाना बहरिया, कमिश्नरेट प्रयागराज के रूप में हुई है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181561/two-accused-who-forcibly-made-the-girl-sit-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0125.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>बहरिया, प्रयागराज। </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">थाना बहरिया पुलिस ने युवती के अपहरण के प्रयास और जबरन वाहन में बैठाकर ले जाने के मामले में दो वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को सोमवार को थाना क्षेत्र के बाबूगंज स्थित नहर पुलिया के पास से पकड़ कर उनके विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान अरविन्द कुमार पटेल उर्फ सोनू (21 वर्ष) पुत्र रामचरन पटेल तथा मोनू पटेल (22 वर्ष) पुत्र राधेश्याम पटेल, निवासी ग्राम चकिया धमौर, थाना बहरिया, कमिश्नरेट प्रयागराज के रूप में हुई है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 14 जून 2026 को मंसुरपुर चौराहे के पास आरोपियों ने एक युवती को जबरन अपने वाहन में बैठा लिया था। युवती द्वारा शोर-शराबा करने पर आरोपी उसे कुछ दूरी तक ले गए और बाद में छोड़कर फरार हो गए थे। पीड़िता की तहरीर के आधार पर थाना बहरिया में मुकदमा अपराध संख्या 112/2026, धारा 87 एवं 351(3) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामला दर्ज किया गया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मामला दर्ज होने के बाद पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी थी। मुखबिर की सूचना पर थाना बहरिया पुलिस टीम ने सोमवार को बाबूगंज नहर पुलिया के पास घेराबंदी कर दोनों वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया।</div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:45:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>दुष्कर्म का आरोपी अभियुक्त चढ़ा पुलिस के हत्थे</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के हरैया थाना अध्यक्ष द्वारा तीन दिन रेप पीड़िताको दौड़ा ने के बाद मुकदमा दर्ज करना पड़ा दलित लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में वांछित अभियुक्त प्रेम कुमार सिंह पुत्र शेर बहादुर सिंह, निवासी ग्राम जगदीशपुर सेमरहिया, को बीती रात हर्रैया पुलिस ने मुखबिर की सूचना के आधार पर गोभिया तिराहा के पास से उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह कहीं भागने की फिराक में था।</div>
<div>  </div>
<div>पीड़िता की मां श्रीमती शीला देवी पत्नी दीप नारायण, निवासी ग्राम जगदीशपुर सेमरहिया, थाना हर्रैया द्वारा अपनी पुत्री के साथ दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाते हुए विगत 9</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180943/accused-of-rape-caught-by-police"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260610-wa0074.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के हरैया थाना अध्यक्ष द्वारा तीन दिन रेप पीड़िताको दौड़ा ने के बाद मुकदमा दर्ज करना पड़ा दलित लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में वांछित अभियुक्त प्रेम कुमार सिंह पुत्र शेर बहादुर सिंह, निवासी ग्राम जगदीशपुर सेमरहिया, को बीती रात हर्रैया पुलिस ने मुखबिर की सूचना के आधार पर गोभिया तिराहा के पास से उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह कहीं भागने की फिराक में था।</div>
<div> </div>
<div>पीड़िता की मां श्रीमती शीला देवी पत्नी दीप नारायण, निवासी ग्राम जगदीशपुर सेमरहिया, थाना हर्रैया द्वारा अपनी पुत्री के साथ दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाते हुए विगत 9 जून को पुलिस को तहरीर देकर यह अभियोग पंजीकृत कराया गया था।</div>
<div> </div>
<div>प्रभारी निरीक्षक तहसीलदार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करते हुए उसे जनपद न्यायालय भेजा गया है। अभियोग की विवेचना क्षेत्राधिकारी हर्रैया स्वर्णिमा सिंह द्वारा की जा रही है।</div>
<div> </div>
<div>गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक के अलावा उप निरीक्षक इंद्रेश यादव, कांस्टेबल राजेश कुमार मौर्य तथा रि. कां. नरेंद्र कुमार शामिल रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:54:39 +0530</pubDate>
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