<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/95491/mahua-dabur" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>महुआ डाबर - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/95491/rss</link>
                <description>महुआ डाबर RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>महुआ डाबर महोत्सव में गूंजा शहीदों का स्मरण, मशाल यात्रा से क्रांतिवीरों को दी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की अमर गाथा और गुमनाम शहीदों की स्मृति को समर्पित तीन दिवसीय “महुआ डाबर महोत्सव-2026” के दूसरे दिन ऐतिहासिक क्रांति स्थल पर भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा आयोजित इस महोत्सव में स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कई प्रेरणादायी आयोजन हुए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार द्वारा निर्मित आधे घंटे की ऐतिहासिक एवं मार्मिक ऑडियो डॉक्यूमेंट्री ‘महुआ डाबर: निशां अभी बाक़ी हैं’ का श्रवण कराया गया। डॉक्यूमेंट्री सुनकर उपस्थित लोग भावुक हो उठे। इसमें ‘गैर-चिरागी’ महुआ डाबर के आम लोगों के अनुभवों के</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180938/remembrance-of-martyrs-echoed-in-mahua-dabur-mahotsav-tribute-paid"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260610-wa0028.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की अमर गाथा और गुमनाम शहीदों की स्मृति को समर्पित तीन दिवसीय “महुआ डाबर महोत्सव-2026” के दूसरे दिन ऐतिहासिक क्रांति स्थल पर भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा आयोजित इस महोत्सव में स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कई प्रेरणादायी आयोजन हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार द्वारा निर्मित आधे घंटे की ऐतिहासिक एवं मार्मिक ऑडियो डॉक्यूमेंट्री ‘महुआ डाबर: निशां अभी बाक़ी हैं’ का श्रवण कराया गया। डॉक्यूमेंट्री सुनकर उपस्थित लोग भावुक हो उठे। इसमें ‘गैर-चिरागी’ महुआ डाबर के आम लोगों के अनुभवों के साथ महुआ डाबर का उत्खनन करने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार, महुआ डाबर संग्रहालय के निदेशक डॉ. शाह आलम राना तथा उत्तर प्रदेश पर्यटन की पूर्व विशेष सचिव ईशा प्रिया के विचार शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">‘महुआ डाबर: निशां अभी बाक़ी हैं’ की स्क्रिप्ट एवं प्रस्तुति नवोदिता मिश्रा ने की है। वाचन स्वर रितु राजपूत तथा नाट्यांश स्वर मनोज मयंकर का है। गीत के रचयिता कर्नल तिलकराज और गायक डॉ. ग़ज़ल श्रीनिवास हैं। आकाशवाणी संवाददाता दीपांकर मिश्र, प्रस्तुति सहयोगी शिवाली एवं संयोजन राम अवतार बैरवा का रहा।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के समापन पर महुआ डाबर के क्रांतिवीरों को मशालों के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सैकड़ों युवाओं ने हाथों में जलती मशाल लेकर क्रांति स्थल की परिक्रमा की और शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर क्रांतिकारी वंशज डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि वर्ष 1857 में अंग्रेजों ने महुआ डाबर को ‘गैर-चिरागी’ घोषित कर यहां दीपक और चिराग जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। आज मशाल जलाकर यह संदेश दिया गया है कि शहीदों की स्मृति का चिराग 169 वर्ष बाद भी बुझा नहीं है। उन्होंने कहा कि मशाल क्रांति की वह ज्वाला है जो कभी बुझनी नहीं चाहिए। युवाओं को मशाल सौंपकर यह संकल्प दिलाया गया कि वे महुआ डाबर के गौरवशाली इतिहास को देश-दुनिया तक पहुंचाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">आयोजकों ने बताया कि 10 जून को ‘शौर्य दिवस’ के अवसर पर सुबह शहीद स्थल पर सशस्त्र पुलिस गारद द्वारा सलामी दी जाएगी। इसके बाद ‘विरासत संरक्षण संकल्प सभा’ का आयोजन होगा।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, इतिहास प्रेमियों, युवाओं एवं समाजसेवियों का विशेष सहयोग रहा।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर अतुल सिंह, नासिर खान, केपी राठौर, मोहम्मद कैफ, ऋतिक कुमार, सुनील पंडित, श्रवण कुमार, फ़कीर मोहम्मद, विनोद कुमार यादव, मुमताज़ खान, अनूप कुमार एडवोकेट, रमजान खान, धर्मेन्द्र, प्रणब मुखर्जी, आदिल खान, रामकेश गौतम, प्रभाकर चौधरी, नागेंद्र प्रताप</div>
<div style="text-align:justify;">आदि लोग मौजूद रहे.</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180938/remembrance-of-martyrs-echoed-in-mahua-dabur-mahotsav-tribute-paid</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180938/remembrance-of-martyrs-echoed-in-mahua-dabur-mahotsav-tribute-paid</guid>
                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:49:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/img-20260610-wa0028.jpg"                         length="161291"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        