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                <title>Governance Issues - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Governance Issues RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डीएम के आदेश में BNS 316(5), FIR से गायब: आखिर किसके निर्देश पर हटी गंभीर धारा?</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>राज्य ब्यूरो - विपिन शुक्ला </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">धान खरीद केंद्र बी-पैक्स असाईदपुर कला के केंद्र प्रभारी दुर्गा प्रसाद पाण्डेय के खिलाफ दर्ज एफआईआर ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेश में जहां आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) के तहत भी अभियोग दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे, वहीं थाना भीटी में दर्ज एफआईआर में केवल धारा 3 और 7 आवश्यक वस्तु अधिनियम ही दर्ज की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हैरानी की बात यह है कि एफआईआर के तथ्यात्मक विवरण में स्वयं यह उल्लेख किया गया है</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183667/bns-3165-missing-from-fir-as-per-dms-order-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1001123229-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>राज्य ब्यूरो - विपिन शुक्ला </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धान खरीद केंद्र बी-पैक्स असाईदपुर कला के केंद्र प्रभारी दुर्गा प्रसाद पाण्डेय के खिलाफ दर्ज एफआईआर ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेश में जहां आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) के तहत भी अभियोग दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे, वहीं थाना भीटी में दर्ज एफआईआर में केवल धारा 3 और 7 आवश्यक वस्तु अधिनियम ही दर्ज की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हैरानी की बात यह है कि एफआईआर के तथ्यात्मक विवरण में स्वयं यह उल्लेख किया गया है कि कथित कूटरचित ऑनलाइन समर्पण पत्र BNS की धारा 316(5) के दायरे में आता है, लेकिन यही धारा एफआईआर के सेक्शन कॉलम से गायब है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी कार्यालय के आदेश में अभियोजन कार्यालय की रिपोर्ट के आधार पर कहा गया था कि केंद्र प्रभारी द्वारा धान खरीद से जुड़े ऑनलाइन समर्पण पत्र में कथित अनियमितता और मूल्यवान कूटरचित दस्तावेज तैयार किए जाने के प्रथम दृष्टया तथ्य पाए गए हैं। इसी आधार पर धारा 3/7 आवश्यक वस्तु अधिनियम तथा BNS की धारा 316(5) के तहत मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बावजूद 15 जुलाई 2026 को दर्ज एफआईआर में केवल आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराएं दर्ज की गईं। इससे यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि जब जिलाधिकारी के आदेश और एफआईआर के कथानक दोनों में धारा 316(5) का उल्लेख है, तो फिर इसे एफआईआर की धाराओं में शामिल क्यों नहीं किया गया?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्या यह विवेचना के दौरान हुई तकनीकी चूक है, या फिर किसी स्तर पर गंभीर धारा जोड़ने से परहेज किया गया? यह सवाल अब प्रशासनिक और पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बन गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस सूत्रों के अनुसार, धारा 316(5) को शामिल न किए जाने को लेकर विभाग के भीतर भी चर्चाएं हैं। हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इस संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अब निगाहें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के जवाब पर टिकी हैं कि जिलाधिकारी के निर्देशों के बावजूद गंभीर धारा एफआईआर के सेक्शन से क्यों गायब रही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> उठ रहे हैं ये बड़े सवाल</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डीएम के आदेश में BNS की धारा 316(5) का स्पष्ट उल्लेख।</div>
<div style="text-align:justify;">एफआईआर के तथ्यों में भी धारा 316(5) का जिक्र।</div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन सेक्शन कॉलम में केवल धारा 3/7 आवश्यक वस्तु अधिनियम।</div>
<div style="text-align:justify;">क्या यह तकनीकी त्रुटि है या किसी स्तर पर लिया गया निर्णय?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्या पुलिस इस मामले में पूरक धाराएं जोड़ने की तैयारी कर रही है?</div>
<div style="text-align:justify;">यह संस्करण पत्रकारिता की दृष्टि से अधिक सशक्त है और दस्तावेज़ों पर आधारित सवाल उठाता है, जबकि अप्रमाणित आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 21:10:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परसरामपुर के ग्राम प्रधान का मतदाता सूची से नाम गायब आयोग को शिकायत भेजी </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/जनपद </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">के विकासखंड भदपुरा की ग्राम पंचायत परसरामपुर के मौजूदा ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक अहमद ग्राम प्रधान है मतदाता सूची में जमकर हुआ खेल वर्तमान ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक  का पूर्व मतदाता सूची के अनुसार 1090 क्रम संख्या पर मकान नंबर 92 में दर्ज हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">परंतु अब मतदाता सूची बनाने में ग्राम पंचायत के वर्तमान ग्राम प्रधान मोहम्मद रफी का नाम हटा दिया गया है जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं आखिर ग्राम प्रधान का ही नाम जब मतदाता सूची से हटा दिया गया है इस खेल को करने के लिए किसका हाथ</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181563/parasrampur-village-heads-name-missing-from-voter-list-complaint-sent"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1.--------------_।------अ.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/जनपद </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">के विकासखंड भदपुरा की ग्राम पंचायत परसरामपुर के मौजूदा ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक अहमद ग्राम प्रधान है मतदाता सूची में जमकर हुआ खेल वर्तमान ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक  का पूर्व मतदाता सूची के अनुसार 1090 क्रम संख्या पर मकान नंबर 92 में दर्ज हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परंतु अब मतदाता सूची बनाने में ग्राम पंचायत के वर्तमान ग्राम प्रधान मोहम्मद रफी का नाम हटा दिया गया है जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं आखिर ग्राम प्रधान का ही नाम जब मतदाता सूची से हटा दिया गया है इस खेल को करने के लिए किसका हाथ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक अहमद के अनुसार उनका मतदाता सूची से नाम गायब होने पर उन्होंने निर्वाचन आयोग लखनऊ को शिकायत भेज कर अपना नाम जुड़वाने की मांगती है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना को लेकर तहसीलदार नवाबगंज अभिषेक तिवारी से बात की गई तो उन्होंने स्वतंत्र प्रभात से बात करते हुए कहा यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है यदि ऐसा हुआ है तो ग्राम प्रधान अपना आवेदन भर के जमा कर दें उनका वोट बन जाएगा साथ ही मतदाता सूची से ग्राम प्रधान का नाम हटाया जाना जांच का विषय है शिकायत मिलती है तो जांच करवा रकर दोषी के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:48:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&quot;CCTV बंद करके खोले जाते हैं गुल्लक...&quot;; फलाहारी महाराज ने CM योगी को खून से लिखा खत, मंदिर प्रबंधन कमेटी पर लगाये गंभीर आरोप।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा प्रकरण में जांच के बाद मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर के चढ़ावे को लेकर सीबीआई जांच की मांग उठने लगी है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने बुधवार को खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच की मांग की है. इस दौरान उन्होंने गंभीर आरोप लगाए हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने बुधवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खून से पत्र लिखा है. उन्होंने मंदिर प्रबंधन कमेटी पर गंभीर आरोप लगाये हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181542/gullaks-are-opened-after-closing-cctv-falahari-maharaj-wrote-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas9.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा प्रकरण में जांच के बाद मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर के चढ़ावे को लेकर सीबीआई जांच की मांग उठने लगी है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने बुधवार को खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच की मांग की है. इस दौरान उन्होंने गंभीर आरोप लगाए हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने बुधवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खून से पत्र लिखा है. उन्होंने मंदिर प्रबंधन कमेटी पर गंभीर आरोप लगाये हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दाने के रुपये</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चढ़ावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आभूषणों को सीसीटीवी कैमरे बंद करके प्रबंधन कमेटी वाले लोग बंदरबांट करके करोड़ों की गाड़ियों और कोठियों में प्रस्थान कर गये हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आरोप लगाया कि जो प्रबंधन कमेटी वाले पहले स्कूटर पर आते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज करोड़ों की गाड़ियों में चलते हैं. करोड़ों के बंगला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोठी और फाॅर्म हाउस हैं. उनका आरोप है कि उत्तर प्रदेश ही नहीं उत्तराखंड में भी इन लोगों ने जमीनें खरीदी हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की जांच होनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर ऐसा नहीं किया गया तो वह प्रयागराज हाईकोर्ट में एक प्रार्थना पत्र देकर अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आरोप लगाया कि जिस समय गुल्लक खुलता है वहां के सीसीटीवी कैमरे भी बंद कर दिए जाते हैं. उन्होंने कहा कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ हो रहा है. यह बहुत ही दुखद है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस प्रबंधन को अपने हाथ में ले लें.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जन्मभूमि सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने इस प्रकरण में कुछ भी बोलने से मना कर दिया और कहा मंदिर में जो चढ़ावा आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका लिखित में लेखा-जोखा दर्ज किया जाता है. इन लोगों की बातें निराधार हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:02:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पार्टियों की टूट व टूटता भरोसा: लोकतंत्र में सबसे बड़ा नुकसान यही है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">चुनाव बाद पार्टियों का टूटना या ये कहिए कि दलबदल होना अब आम बात हो चली है। यह दलबदल क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे अधिक होती है। लेकिन यहां नेताओं से लोगों का भरोसा टूट चुका होता है। क्योंकि लोगों ने अपने नेता को दूसरी पार्टी में रहते वोट दिया था जबकि नेताजी चुनाव बाद अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं। पिछले 10 साल में भारत में 25 से ज्यादा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां टूटीं। महाराष्ट्र में शिवसेना दो हिस्सों में बंटी, NCP दो फाड़ हुई, बिहार में JDU ने कई बार पाला बदला। हर बार कारण एक ही बताया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181509/the-biggest-loss-in-democracy-is-the-breakdown-of-parties"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चुनाव बाद पार्टियों का टूटना या ये कहिए कि दलबदल होना अब आम बात हो चली है। यह दलबदल क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे अधिक होती है। लेकिन यहां नेताओं से लोगों का भरोसा टूट चुका होता है। क्योंकि लोगों ने अपने नेता को दूसरी पार्टी में रहते वोट दिया था जबकि नेताजी चुनाव बाद अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं। पिछले 10 साल में भारत में 25 से ज्यादा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां टूटीं। महाराष्ट्र में शिवसेना दो हिस्सों में बंटी, NCP दो फाड़ हुई, बिहार में JDU ने कई बार पाला बदला। हर बार कारण एक ही बताया जाता है - "सिद्धांतों से समझौता", "जनता के हित में फैसला"। लेकिन नतीजा एक ही निकलता है - वोटर का भरोसा टूटना।</p><p style="text-align:justify;"><br />टूट क्यों रही हैं पार्टियां? इस पर हमारी सोच वही है जो लगभग सभी की होती है। सत्ता और पद का गणित- पार्टी टूटने का 80% कारण विधायकों और सांसदों की टिकट और मंत्री पद की भूख है। जब हाईकमान टिकट काटता है या किसी और को आगे बढ़ाता है, तो नाराज नेता दूसरी पार्टी या नई पार्टी बना लेते हैं। परिवारवाद और हाईकमान कल्चर-<br />कई क्षेत्रीय पार्टियां एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। जब दूसरी पीढ़ी तैयार होती है, तो पुराने नेता खुद को साइडलाइन महसूस करते हैं और बगावत करते हैं।</p><p style="text-align:justify;"><br />विचारधारा का कमजोर होना- पहले पार्टियों की पहचान किसी विचारधारा से होती थी। अब ज्यादातर पार्टियां "पावर ब्लॉक" बन गई हैं। विचारधारा बदलते देर नहीं लगती, क्योंकि एजेंडा सत्ता है। वोटर का भरोसा कैसे टूटता है?- जब तुमने 2019 में किसी पार्टी को वोट दिया था, तुमने उसके घोषणापत्र, नेता और विचारधारा पर भरोसा किया था। 2023 में वही विधायक दूसरी पार्टी में चला जाए और 2024 में तीसरी पार्टी में, तो सवाल उठता है। मैंने वोट किसको दिया था? व्यक्ति को, सिंबल को, या पार्टी को?</p><p style="text-align:justify;"><br />क्या मेरा वोट मायने रखता है? अगर चुनाव के बाद गठबंधन बदल जाए तो जनादेश का मतलब क्या रहा? सब एक जैसे हैं- ये सनक नहीं, टूटे भरोसे की उपज है। 2023 के कर्नाटक और महाराष्ट्र चुनाव के बाद CSDS के सर्वे में 47% लोगों ने कहा कि "दलबदल से लोकतंत्र कमजोर होता है"। इसका असर कहां दिखता है? चुनावी राजनीति पर- लोग अब स्थानीय उम्मीदवार देखने लगे हैं, पार्टी नहीं। "पार्टी कोई भी हो, मेरा काम करे" वाला ट्रेंड बढ़ रहा है। नीति निर्माण पर- सरकारें अस्थिर हो जाती हैं। 5 साल का प्लान 2 साल में बदल जाता है क्योंकि गठबंधन बदल गया। युवा राजनीति से दूर हो रहे हैं- कॉलेज चुनावों में भी भागीदारी घट रही है। युवाओं को लगता है कि राजनीति सिर्फ सौदेबाजी है। नोटा का बढ़ना- 2019 के बाद से कई सीटों पर नोटा को मिले वोट 2-3% तक पहुंच गए हैं। ये विरोध का साइलेंट तरीका है।</p><p style="text-align:justify;"><br />               दलबदल कानून कहां फेल हुआ?- 1985 में 52वां संविधान संशोधन लाकर दलबदल विरोधी कानून बनाया गया। मकसद था कि विधायक पार्टी न बदलें। लेकिन कानून में एक खामी छोड़ दी गई - अगर 2/3 विधायक साथ छोड़ दें तो वो "विलय" कहलाता है और अयोग्यता नहीं लगती। इसी खामी का फायदा लेकर महाराष्ट्र, गोवा, मध्य प्रदेश में सरकारें गिरीं। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि स्पीकर का फैसला समय पर नहीं आता, जिससे कानून का मकसद ही खत्म हो जाता है। क्या हो सकता है समाधान?- 2/3 वाली छूट हटाओ- अगर पार्टी टूटती है तो सबको अयोग्य ठहराओ। फिर जनता के पास जाओ और दोबारा चुनाव लड़ो।</p><p style="text-align:justify;"><br />फंडिंग में पारदर्शिता-  चुनाव आयोग को हर लेन-देन का हिसाब मिले ताकि नेताओं को खरीद-फरोख्त न हो सके। आंतरिक लोकतंत्र-  पार्टियों में चुनाव हों, युवा और कार्यकर्ताओं की सुनवाई हो। जब अंदर लोकतंत्र होगा तो बाहर टूट कम होगी। वोटर एजुकेशन-  लोगों को समझाना होगा कि वोट सिंबल को जाता है, व्यक्ति को नहीं। ये बात स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई जाए। स्थानीय मुद्दों पर वोट-  लोग अब पानी, सड़क, स्कूल को देखकर वोट कर रहे हैं, न कि बड़े नेता के नाम पर। सोशल मीडिया पर जवाबदेही- विधायक अगर पाला बदलता है तो अगले 6 महीने तक ट्रोल होता है। ये डर कुछ हद तक काम कर रहा है। नए विकल्प की तलाश AAP जैसे दल इसी भरोसे के संकट से पैदा हुए। पार्टियों का टूटना लोकतंत्र में स्वाभाविक है, लेकिन जब हर 2 साल में गठबंधन और दल बदल जाएं, तो जनता को लगता है कि उसका वोट सिर्फ सत्ता का सीढ़ी है।</p><p style="text-align:justify;"><br />लोकतंत्र सिर्फ चुनाव नहीं है, ये भरोसे का कॉन्ट्रैक्ट है। जब पार्टियां उस कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ती हैं, तो नुकसान वोटर को होता है। और एक बार भरोसा टूट जाए, तो उसे दोबारा जोड़ने में 10 साल लग जाते हैं।<br />अगली बार जब कोई नेता पाला बदले, तो सवाल पूछो: "तुम पार्टी बदले, मेरी समस्या बदली क्या?"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:39:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमोढ़ा पुलिस चौकी बनी शोपीस, ताले में कैद जनता की सुरक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के छावनी थाना क्षेत्र स्थित अमोढ़ा पुलिस चौकी की कार्यशैली को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अमोढ़ा पुलिस चौकी अधिकांश समय बंद रहती है और चौकी पर न तो चौकी प्रभारी धर्मेंद्र प्रजापति मौजूद रहते हैं और न ही अन्य पुलिसकर्मी दिखाई देते हैं।ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी समस्या, विवाद या शिकायत के लिए जब लोग चौकी पहुंचते हैं तो वहां ताला लटका मिलता है। इससे लोगों को मजबूर होकर छावनी थाने का चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181481/amodha-police-post-became-a-showpiece-for-the-safety-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260618-wa0102.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के छावनी थाना क्षेत्र स्थित अमोढ़ा पुलिस चौकी की कार्यशैली को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अमोढ़ा पुलिस चौकी अधिकांश समय बंद रहती है और चौकी पर न तो चौकी प्रभारी धर्मेंद्र प्रजापति मौजूद रहते हैं और न ही अन्य पुलिसकर्मी दिखाई देते हैं।ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी समस्या, विवाद या शिकायत के लिए जब लोग चौकी पहुंचते हैं तो वहां ताला लटका मिलता है। इससे लोगों को मजबूर होकर छावनी थाने का चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी अधिकतर समय थाने पर ही रहते हैं और चौकी केवल नाम मात्र की बनकर रह गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने कहा कि सरकार ने जनता की सुरक्षा और त्वरित सहायता के लिए लाखों रुपये खर्च कर पुलिस चौकी का निर्माण कराया था, लेकिन जब चौकी पर पुलिसकर्मी मौजूद ही नहीं रहते तो इसका उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। लोगों का कहना है कि यदि चौकी हमेशा बंद ही रहनी है तो उसके निर्माण का क्या औचित्य है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्षेत्रवासियों ने पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर चौकी की नियमित कार्यप्रणाली सुनिश्चित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि चौकी पर पुलिसकर्मियों की नियमित उपस्थिति से क्षेत्र में कानून व्यवस्था बेहतर होगी और आम जनता को तत्काल सहायता मिल सकेगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 19:58:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भ्रष्टाचार छिपाने हेतु जांच अधिकारी अरुण पटेल नही प्रेषित कर रहे जांच रिपोट</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीजिले के कप्तानगंज ब्लॉक के नरहरपुर गांव में तालाब खुदाई कार्य में मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई थी। इस मामले को समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद,जिला ग्राम्य विकास अभिकरण बस्ती ने कड़ा रुख अपनाया था और खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज से स्पष्टीकरण तलब किया था।बीडीओ कप्तानगंज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच अधिकारी को मौके पर भेजकर जांच तो करवा ली, लेकिन एक सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को नहीं सौंपी है।प्राप्त समाचार</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181475/to-hide-corruption-investigating-officer-arun-patel-is-not-sending"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260618-wa0108.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीजिले के कप्तानगंज ब्लॉक के नरहरपुर गांव में तालाब खुदाई कार्य में मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई थी। इस मामले को समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद,जिला ग्राम्य विकास अभिकरण बस्ती ने कड़ा रुख अपनाया था और खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज से स्पष्टीकरण तलब किया था।बीडीओ कप्तानगंज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच अधिकारी को मौके पर भेजकर जांच तो करवा ली, लेकिन एक सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को नहीं सौंपी है।प्राप्त समाचार के अनुसार बीडीओ कप्तानगंज के मातहत क्रमचारी ग्राम पंचायत नरहरपुर के पानी भरे तालाब में लगी फर्जी हाजिरी की जांच तो कर लिया है । किन्तु एक सप्ताह बाद भी आख्या प्रेषित नही किया गया है।उनका यह रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जांच आख्या को दबाने और मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए जानबूझकर हीला-हवाली की जा रही है वही जांच अधिकारी के बोल भी बदले-बदले नजर आ रहे हैं। मीडिया से बातचीत में जांच अधिकारी ने बताया कि "आख्या नहीं दी जाएगी और कार्य शून्य होगा", जिससे पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि सुविधा शुल्क के भारी बोझ तले दबे होने के कारण जिम्मेदार अधिकारी सचिव और रोजगार सेवक पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं ।यह रिपोर्ट साफ तौर पर दर्शाती है कि कैसे धरातल पर भ्रष्टाचार की जांच को दबाने के लिए 'सुविधा शुल्क' और प्रशासनिक सांठगांठ का सहारा लिया जा रहा है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले दोषियों को शह मिल रही है । वहीं बीडीओ का सचिव व रोजगार सेवक पर कानूनी कार्रवाई करने को हाथ कांप रहे हैं।</div></div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 19:50:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्ती PWD में 27 साल से जमे अधिकारी पर गंभीर आरोप, पत्नी की फर्म और 65 लाख के लेन-देन की जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भ्रष्टाचार का जिन्न 27साल बाद बाहर निकल कर आया अपना दल एस के प्रदेश सचिव मुख्य संगठन संजय सिंह पगार ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग और तत्कालीन प्रभारी मंत्री प्राविधिक शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले को पत्र देकर  गृह जनपद बस्ती में विगत 26-27 वर्षों से तैनात  अधीक्षण अभियन्ता लोक निर्माण विभाग कार्यालय वृत्त बस्ती में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात  प्रेमचन्द्र पुत्र  राम सेवक पर अनियमितता के  अनेक गंभीर आरोप लगाते हुये उनके स्थानान्तरण और  सतर्कता विभाग से  उच्च स्तरीय जाँच कराये जाने की मांग किया है.भेजे पत्र में  अपना दल एस के प्रदेश</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181126/serious-allegations-against-officer-stuck-in-basti-pwd-for-27"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260613-wa0095.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भ्रष्टाचार का जिन्न 27साल बाद बाहर निकल कर आया अपना दल एस के प्रदेश सचिव मुख्य संगठन संजय सिंह पगार ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग और तत्कालीन प्रभारी मंत्री प्राविधिक शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले को पत्र देकर  गृह जनपद बस्ती में विगत 26-27 वर्षों से तैनात  अधीक्षण अभियन्ता लोक निर्माण विभाग कार्यालय वृत्त बस्ती में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात  प्रेमचन्द्र पुत्र  राम सेवक पर अनियमितता के  अनेक गंभीर आरोप लगाते हुये उनके स्थानान्तरण और  सतर्कता विभाग से  उच्च स्तरीय जाँच कराये जाने की मांग किया है.भेजे पत्र में  अपना दल एस के प्रदेश सचिव मुख्य संगठन संजय सिंह पगार ने कहा है कि  प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात  प्रेमचन्द्र  द्वारा ठेकेदारों व कर्मचारियों का लगातार दोहन किया जा रहा है तथा सरकारी अभिलेखों में भी फेरबदल किये जाने की शिकायत पूर्व में जन प्रतिनिधियों द्वारा की जाती रही है परन्तु  प्रेमचन्द्र की  ऊँची पहुँच के कारण मण्डलीय कार्यालय पर तैनाती लेते रहे हैं, जिससे इनके भ्रष्टाचार एवं कागजी हेरफेर के कारण सरकारी कार्यों में भी गोपनीयता भंग की जाती रही है.</div>
<div style="text-align:justify;">प्रेस को जारी विज्ञप्ति में संजय सिंह पगार ने कहा है कि  प्रेमचन्द्र ने अपनी सेवा अवधि का लगभग 90 प्रतिशत समय बस्ती वृत्त, बस्ती कार्यालय में ही व्यतीत किया है. बाबू पद से लेकर प्रशासनिक अधिकारी पद तक की उनकी अधिकांश सेवा बस्ती मण्डल में ही रही है. इतने लंबे समय तक एक ही मंडलीय कार्यालय में तैनाती से प्रशासनिक निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं विभागीय कार्यप्रणाली की गोपनीयता पर गंभीर प्रश्न उत्पन्न होते हैं.</div>
<div style="text-align:justify;">बिजली बिल में 10% बढ़ोतरी से नाराज व्यापारी, बस्ती में प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन यह भी पढ़ें: बिजली बिल में 10% बढ़ोतरी से नाराज व्यापारी, बस्ती में प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन</div>
<div style="text-align:justify;">पत्नी की फर्म के जरिए आर्थिक लाभ पहुंचाने का आरोप</div>
<div style="text-align:justify;">श्री पगार ने बताया कि  प्रेमचन्द्र द्वारा अपने पद एवं प्रभाव का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए ठेकेदारी व्यवस्था में हस्तक्षेप किया जाता रहा है. आरोप है कि उनके द्वारा कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने, विभागीय गोपनीय सूचनाओं को प्रभावित करने तथा ई-टेण्डरिंग प्रक्रिया में अनुचित प्रभाव डालने जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाई गई है. इसके अतिरिक्त यह भी गंभीर आरोप है कि  प्रेमचन्द्र द्वारा अपनी पत्नी श्रीमती सीमा के नाम से संचालित फर्म मेसर्स बुद्धा इंटरप्राइजेज का उपयोग स्वयं एवं अपने परिवार के सदस्यों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है. उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उक्त फर्म की प्रोपराइटर श्रीमती सीमा है, जिसका पता रौतापार, गांधी नगर, बस्ती दर्शाया गया है. उक्त फर्म का  यूनियन बैंक में है.तीन साल में खाते से 65 लाख का लेन-देन, जांच की उठी मांग</div>
<div style="text-align:justify;">उपलब्ध बैंक विवरण के अनुसार पिछले लगभग तीन वर्षों में उक्त फर्म के खाते में लगभग 65 लाख रुपये की क्रेडिट एवं डेबिट प्रविष्टियां पाई गई हैं, जिससे लेन-देन की प्रकृति, धन के स्रोत तथा संबंधित ठेकेदारों से संभावित संबंधों की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है. आरोप है कि वे अपने पूर्व कार्यकाल से संबंधित अभिलेखों, कथित अनियमितताओं एवं आने वाली निविदा/ई-टेण्डरिंग प्रक्रियाओं हस्तक्षेप बनाए रखने के उद्देश्य से उसी कार्यालय में बने रहना चाहते हैं. प्रेमचन्द्र ने अपना आलीशान मकान लखनऊ में बनवा लिया है.</div>
<div style="text-align:justify;">इस प्रकार की शिकायतें पूर्व में भी जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय स्तर पर उठाई जाती रही हैं. हाल ही में भी कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा  प्रेमचन्द्र के विरुद्ध शासन स्तर पर लिखित शिकायतें प्रेषित की गई, जिसके क्रम में शासन द्वारा धारा 7 के अंतर्गत मुख्य अभियंता, बस्ती से रिपोर्ट मांगी गई. किंतु मुख्य अभियंता, बस्ती  आनन्द कुमार द्वारा एक माह से अधिक समय व्यतीत हो जाने के बावजूद शासन को अपेक्षित रिपोर्ट प्रेषित नहीं की गई. जबकि शासन की प्रक्रिया के अनुसार, किसी भी गंभीर शिकायत के क्रम में संबंधित अधिकारी से रिपोर्ट प्राप्त कर स्थानांतरण अथवा अन्य विभागीय कार्रवाई की जाती है.</div>
<div style="text-align:justify;">स्थानांतरण प्रक्रिया की पूर्व निर्धारित समय-सीमा 31 मई तक थी, परंतु रिपोर्ट समय से न भेजे जाने के कारण आवश्यक कार्रवाई प्रभावित हुई. वर्तमान में शासन द्वारा स्थानांतरण प्रक्रिया की समय-सीमा 30 जून तक बढ़ा दी गई है, इसलिए जनहित एवं प्रशासनिक पारदर्शिता की दृष्टि से यह आवश्यक है कि मुख्य अभियंता स्तर से लंबित रिपोर्ट तत्काल शासन को भेजी जाए तथा प्रेमचन्द्र का स्थानांतरण करते हुए उनके विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए.</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 18:55:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर में 11 दिन में 7 बार 71 लेखपालों के तबादले, नियम में अनदेखी का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर । </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>उत्तर प्रदेश</strong> लेखपाल संघ जनपद शाखा सिद्धार्थनगर की एक आकस्मिक बैठकगुरुवार को जिलाध्यक्ष  अजय कुमार गुप्त की अध्यक्षता में तहसील सभागार नौगढ़ में आहूत की गई। जिसमें जिला कार्यकारिणी के सभी  सदस्य एवं तहसील नौगढ़ के समस्त लेखपाल उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त बैठक में उप जिलाधिकारी नौगढ़ द्वारा शासनादेश/परिषदादेश के विपरीत निर्धारित 10% से अधिक स्थानांतरण करके पिछले मात्र 11 दिनों में कुल 07 बार में पुनरावृति के साथ कुल 71 लेखपालों का हल्का परिवर्तन करने एवं स्थानांतरण में घोर अनियमितता बरते जाने पर उपस्थित सदस्यों द्वारा आक्रोश व्यक्त किया गया तथा उक्त स्थानांतरण आदेश को</div></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181035/in-siddharthnagar-11-accused-7-times-in-one-day-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781188115161.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर । </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>उत्तर प्रदेश</strong> लेखपाल संघ जनपद शाखा सिद्धार्थनगर की एक आकस्मिक बैठकगुरुवार को जिलाध्यक्ष  अजय कुमार गुप्त की अध्यक्षता में तहसील सभागार नौगढ़ में आहूत की गई। जिसमें जिला कार्यकारिणी के सभी  सदस्य एवं तहसील नौगढ़ के समस्त लेखपाल उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त बैठक में उप जिलाधिकारी नौगढ़ द्वारा शासनादेश/परिषदादेश के विपरीत निर्धारित 10% से अधिक स्थानांतरण करके पिछले मात्र 11 दिनों में कुल 07 बार में पुनरावृति के साथ कुल 71 लेखपालों का हल्का परिवर्तन करने एवं स्थानांतरण में घोर अनियमितता बरते जाने पर उपस्थित सदस्यों द्वारा आक्रोश व्यक्त किया गया तथा उक्त स्थानांतरण आदेश को निरस्त करके दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">  बैठक में जिलाध्यक्ष  अजय कुमार गुप्त,जिला मंत्री  आनंद गौतम, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रणधीर यादव, जिला कोषाध्यक्ष रणधीर राणा, तहसील संयोजक महेंद्र कुमार साहनी, शिव शंकर, अमित कुमार, बैजनाथ चौधरी ,ज्योति सिंह, श्वेता कार्तिक आदि सैकड़ों लेखपाल उपस्थित रहे।</div>
</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 21:08:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोनहटी बुजुर्ग में पानी और जलकुंभी के बीच चल रहा मनरेगा कार्य प्रधान सचिन और वीडियो की मिले भगत से</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केखंड विकास अधिकारी साँऊघाट मनोज कुमार श्रीवास्तव की मिली भगत से ग्राम पंचायत सोनहटी बुजुर्ग में धड़ल्ले से मनरेगा फर्जीवाड़ा जारी है । महिला मेट रामावती देवी मनरेगा मजदूरों की उलूल - जुलूल (फर्जी फोटो ) फोटो लगाकर फर्जी मस्टर रोल पूर्ण कर रही है ।</div>
<div>  </div>
<div>आपको बता दें कि ग्राम पंचायत सोनहटी बुजुर्ग में तालाब खुदाई व सफाई के नाम पर दो आनलाइन मस्टर रोल जारी है जिसमें 127 मनरेगा मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाने का कार्य महिला मेट रामावती देवी लगा रही है और ग्राम पंचायत में मनरेगा फर्जीवाड़ा करके वाह - वाही लूट रही</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180883/mnrega-work-going-on-amidst-water-and-hyacinth-in-sonhati"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260608-wa0081.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केखंड विकास अधिकारी साँऊघाट मनोज कुमार श्रीवास्तव की मिली भगत से ग्राम पंचायत सोनहटी बुजुर्ग में धड़ल्ले से मनरेगा फर्जीवाड़ा जारी है । महिला मेट रामावती देवी मनरेगा मजदूरों की उलूल - जुलूल (फर्जी फोटो ) फोटो लगाकर फर्जी मस्टर रोल पूर्ण कर रही है ।</div>
<div> </div>
<div>आपको बता दें कि ग्राम पंचायत सोनहटी बुजुर्ग में तालाब खुदाई व सफाई के नाम पर दो आनलाइन मस्टर रोल जारी है जिसमें 127 मनरेगा मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाने का कार्य महिला मेट रामावती देवी लगा रही है और ग्राम पंचायत में मनरेगा फर्जीवाड़ा करके वाह - वाही लूट रही है । </div>
<div> </div>
<div>मीडिया पड़ताल में पता चला कि ग्राम प्रधान हसीना बानों के द्वारा जिस तालाब की खुदाई व सफाई के नाम पर आनलाइन मस्टर रोल जारी करवाया गया है उस तालाब में पूर्ण रूप से पानी भरा हुआ है और चारों तरफ से जलकुंभी जकड़ा हुआ है । ग्राम प्रधान हसीना बानों व महिला मेट रामावाती देवी उच्च अधिकारियों के आंख में धूल झोंककर मनरेगा फर्जीवाड़ा करने में पूरी मस्त हैं इन लोगों को ग्राम पंचायत सोनहटी बुजुर्ग के विकास कार्यों से कोई मतलब नहीं है ।</div>
<div> </div>
<div>बड़ा सवाल यह है जब तालाब में पूर्ण रूप से पानी भरा हुआ है और चारों तरफ जलकुंभी जकड़ा हुआ है तो कैसे मनरेगा कार्य होता होगा ? आखिर मनरेगा साइड पर अपलोड फोटो की जांच क्यों नहीं हो रही है ? जो जांच का विषय बना हुआ है । सचिव, तकनीकी सहायक व मनरेगा एपीओ अपने-अपने कमीशन बाजी में मस्त हैं और मनरेगा फर्जीवाड़ा में जमकर सहयोग कर रहे हैं । अब देखना यह है कि ग्राम पंचायत सोनहटी बुजुर्ग में पानी से भरे तालाब के नाम पर जारी आनलाइन मस्टर रोल जीरों हो पाता है या नहीं ? अर्थात् बीडीओ मनोज कुमार श्रीवास्तव के लिए ग्राम पंचायत सोनहटी बुजुर्ग के मनरेगा भ्रष्टाचार को खत्म करना किसी चुनौती से कम नहीं है । उक्त प्रकरण में मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल ने जांच कर कार्यवाही करने का निर्देश दिया है ।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 20:56:09 +0530</pubDate>
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