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                <title>Rural Healthcare - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Rural Healthcare RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>गौर स्वास्थ्य केंद्र पर प्रधानमंत्री मातृ वंदना दिवस कैंप में लापरवाही, भटकती रहीं गर्भवती महिलाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गौर में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के कारण शासन की महत्वपूर्ण योजना 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना दिवस' हवा-हवाई साबित हो रही है। शुक्रवार, 24 जुलाई को निर्धारित दिवस होने के बावजूद सुबह 10 बजे तक कैंप का आयोजन शुरू नहीं हो सका, जिससे अस्पताल पहुंचीं गर्भवती महिलाओं और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुबह करीब 8 बजे ही खुल गया था। इसके बावजूद, मौके पर कोई भी नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं मिला। कैंप में जांच,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184078/pregnant-women-kept-wandering-carelessly-in-prime-minister-matru-vandana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260725-wa0146-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गौर में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के कारण शासन की महत्वपूर्ण योजना 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना दिवस' हवा-हवाई साबित हो रही है। शुक्रवार, 24 जुलाई को निर्धारित दिवस होने के बावजूद सुबह 10 बजे तक कैंप का आयोजन शुरू नहीं हो सका, जिससे अस्पताल पहुंचीं गर्भवती महिलाओं और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुबह करीब 8 बजे ही खुल गया था। इसके बावजूद, मौके पर कोई भी नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं मिला। कैंप में जांच, परामर्श और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लेकर दूर-दराज से आईं दर्जनों गर्भवती महिलाएं और तीमारदार सुबह से ही परिसर में इधर-उधर भटकने को मजबूर दिखे। कई घंटों तक इंतजार करने के बाद भी जब डॉक्टर और स्टाफ नहीं पहुंचे, तो मरीजों का सब्र टूट गया और उन्होंने नाराजगी जाहिर की।बता दें कि CHC गौर में प्रत्येक माह की 1, 9, 16 और 24 तारीख को इस विशेष कैंप का आयोजन अनिवार्य रूप से तय है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है। स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से इस मामले की जांच कर लापरवाह स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 20:52:39 +0530</pubDate>
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                <title>गौर स्वास्थ्य केंद्र पर प्रधानमंत्री मातृ वंदना दिवस कैंप में लापरवाही, भटकती रहीं गर्भवती महिलाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गौर में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के कारण शासन की महत्वपूर्ण योजना 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना दिवस' हवा-हवाई साबित हो रही है। शुक्रवार, 24 जुलाई को निर्धारित दिवस होने के बावजूद सुबह 10 बजे तक कैंप का आयोजन शुरू नहीं हो सका, जिससे अस्पताल पहुंचीं गर्भवती महिलाओं और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुबह करीब 8 बजे ही खुल गया था। इसके बावजूद, मौके पर कोई भी नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं मिला। कैंप में जांच,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184076/pregnant-women-kept-wandering-carelessly-in-prime-minister-matru-vandana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260725-wa0146.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गौर में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के कारण शासन की महत्वपूर्ण योजना 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना दिवस' हवा-हवाई साबित हो रही है। शुक्रवार, 24 जुलाई को निर्धारित दिवस होने के बावजूद सुबह 10 बजे तक कैंप का आयोजन शुरू नहीं हो सका, जिससे अस्पताल पहुंचीं गर्भवती महिलाओं और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुबह करीब 8 बजे ही खुल गया था। इसके बावजूद, मौके पर कोई भी नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं मिला। कैंप में जांच, परामर्श और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लेकर दूर-दराज से आईं दर्जनों गर्भवती महिलाएं और तीमारदार सुबह से ही परिसर में इधर-उधर भटकने को मजबूर दिखे। कई घंटों तक इंतजार करने के बाद भी जब डॉक्टर और स्टाफ नहीं पहुंचे, तो मरीजों का सब्र टूट गया और उन्होंने नाराजगी जाहिर की।बता दें कि CHC गौर में प्रत्येक माह की 1, 9, 16 और 24 तारीख को इस विशेष कैंप का आयोजन अनिवार्य रूप से तय है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है। स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से इस मामले की जांच कर लापरवाह स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।</div>
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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 20:49:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बलरामपुर सीएमओ के निरीक्षण में खुली स्वास्थ्य विभाग की पोल:दो सीएचसी से 22 कर्मचारी गायब</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर-</strong> मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी के निरीक्षण में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में कमियां मिली। बुधवार दोपहर करीब दो बजे सीएचसी उतरौला और सीएचसी गैण्डास बुजुर्ग का निरीक्षण करने पहुंचे सीएमओ को दोनों अस्पतालों में कुल 22 अधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित मिले। कई वार्डों में गंदगी, बिना चादरों वाले बेड और बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में भी लापरवाही सामने आई। सीएमओ ने अनुपस्थित कर्मचारियों का वेतन रोकने और स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए।सीएचसी उतरौला में उपस्थिति पंजिका की जांच के दौरान नौ अधिकारी-कर्मचारी गैरहाजिर पाए गए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इनमें चार चिकित्सकों समेत लैब टेक्नीशियन, ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर,</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183981/22-employees-missing-from-poldo-chc-of-health-department-opened"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260722-wa0436.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर-</strong> मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी के निरीक्षण में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में कमियां मिली। बुधवार दोपहर करीब दो बजे सीएचसी उतरौला और सीएचसी गैण्डास बुजुर्ग का निरीक्षण करने पहुंचे सीएमओ को दोनों अस्पतालों में कुल 22 अधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित मिले। कई वार्डों में गंदगी, बिना चादरों वाले बेड और बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में भी लापरवाही सामने आई। सीएमओ ने अनुपस्थित कर्मचारियों का वेतन रोकने और स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए।सीएचसी उतरौला में उपस्थिति पंजिका की जांच के दौरान नौ अधिकारी-कर्मचारी गैरहाजिर पाए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इनमें चार चिकित्सकों समेत लैब टेक्नीशियन, ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर, कंप्यूटर ऑपरेटर और स्वीपर शामिल हैं।निरीक्षण के दौरान इमरजेंसी और हीट वेव वार्ड में गंदी चादरें मिलीं, जबकि बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में भी गंभीर अनियमितताएं मिलीं। सीएमओ ने सभी मरीजों के पर्चे आभा आईडी (ABHA ID) के माध्यम से ऑनलाइन बनाने, वार्डों में प्रतिदिन साफ चादरें बिछाने और मरीजों का नियमित फॉलोअप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।इसके बाद सीएमओ ने सीएचसी गैण्डास बुजुर्ग का निरीक्षण किया, जहां स्थिति और भी खराब मिली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां 13 अधिकारी-कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। कई कर्मचारियों ने उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर तो किए थे, लेकिन अस्पताल में मौजूद नहीं मिले। निरीक्षण के दौरान अस्पताल अधीक्षक भी अनुपस्थित थे। वार्डों में कई बेड बिना चादरों के मिले, कुछ पर गंदी बेडशीट बिछी थी और इमरजेंसी वार्ड की साफ-सफाई भी बेहद खराब मिली। तकियों पर कवर तक नहीं थे। इस पर सीएमओ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया।सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने दोनों अस्पतालों के अधीक्षकों को निर्देश दिए कि निरीक्षण में मिली सभी कमियों को तत्काल दूर किया जाए। साथ ही अनुपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लेकर टिप्पणी सहित अनुपालन रिपोर्ट शीघ्र मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 22:51:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ग्रामीण भारत की शिक्षा और स्वास्थ्य को ऊर्जा दे सकते हैं सोलर प्लांट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> भारत वर्ष </span>2047 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री नरेंद्र मोदी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित ऊर्जा और आधुनिक शिक्षा जैसे अनेक महत्वाकांक्षी अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन इन सभी योजनाओं की सफलता का आधार एक ही है निर्बाध बिजली आपूर्ति।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के महानगरों और बड़े शहरों में बिजली की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए वहां डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुँच रहा है। इसके विपरीत तहसील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेज और अस्पताल आज</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182800/solar-plants-can-provide-energy-to-the-education-and-health"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/image1170x530cropped.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> भारत वर्ष </span>2047 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री नरेंद्र मोदी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित ऊर्जा और आधुनिक शिक्षा जैसे अनेक महत्वाकांक्षी अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन इन सभी योजनाओं की सफलता का आधार एक ही है निर्बाध बिजली आपूर्ति।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के महानगरों और बड़े शहरों में बिजली की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए वहां डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुँच रहा है। इसके विपरीत तहसील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेज और अस्पताल आज भी बिजली की अनियमित आपूर्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम वोल्टेज और बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में स्मार्ट क्लास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल लैब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंप्यूटर शिक्षा और आधुनिक चिकित्सा उपकरण केवल सरकारी योजनाओं की फाइलों तक सीमित होकर रह जाते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह भी है कि एक ओर सरकार सरकारी संस्थानों को हाईटेक बनाने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर इन संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए सबसे आवश्यक संसाधन बिजली की स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। बिना बिजली के डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की कल्पना अधूरी है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी स्थिति में सरकार को एक दूरदर्शी निर्णय लेते हुए देश के सभी शासकीय स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और अस्पतालों में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रूफटॉप सोलर प्लांट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थापित करने की राष्ट्रीय योजना लागू करनी चाहिए। यह केवल वैकल्पिक ऊर्जा का उपाय नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को एक साथ मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम होगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सोलर प्लांट स्थापित होने से इन संस्थानों को दिनभर निर्बाध बिजली मिलेगी। विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना व्यवधान जारी रहेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगी तथा अस्पतालों में जीवन रक्षक उपकरण बिजली संकट से प्रभावित नहीं होंगे। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का हर वर्ष बिजली बिलों पर होने वाला करोड़ों रुपये का व्यय भी काफी हद तक कम हो जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्बन उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता केवल योजनाएं बनाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें धरातल पर टिकाऊ बनाने की है। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि सरकार वास्तव में विकसित भारत का सपना साकार करना चाहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना होगा। शासकीय स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और अस्पतालों में सोलर प्लांट लगाने की पहल इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हो सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विकसित भारत की मजबूत नींव तभी रखी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब गांव का विद्यालय और अस्पताल भी शहरों की तरह रोशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक और ऊर्जा संपन्न होंगे।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 22:24:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉक्टर डे: सफेद कोट में भगवान, धड़कनों के रखवाले को हजार सलाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>1 जुलाई को भारत में 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' मनाया जाता है। ये दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। ये उस भरोसे का दिन है जो एक मरीज सबसे ज्यादा दर्द में भी एक अजनबी पर करता है। उस अजनबी का नाम है: डॉक्टर।<br />ये दिन क्यों ? डॉ. बिधान चंद्र रॉय की विरासत</p>
<p><br />डॉक्टर डे भारत में हर साल 1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। डॉ. रॉय MBBS, MRCP और FRCS थे। उन्होंने बिना फीस लिए हजारों मरीजों का इलाज किया।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182495/doctors-day-a-thousand-salutes-to-the-god-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><p>1 जुलाई को भारत में 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' मनाया जाता है। ये दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। ये उस भरोसे का दिन है जो एक मरीज सबसे ज्यादा दर्द में भी एक अजनबी पर करता है। उस अजनबी का नाम है: डॉक्टर।<br />ये दिन क्यों ? डॉ. बिधान चंद्र रॉय की विरासत</p>
<p><br />डॉक्टर डे भारत में हर साल 1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। डॉ. रॉय MBBS, MRCP और FRCS थे। उन्होंने बिना फीस लिए हजारों मरीजों का इलाज किया। राजनीति में आने के बाद भी वो रोज सुबह 4 बजे उठकर मरीज देखते थे। उनके लिए मरीज भगवान था और सेवा धर्म। इसी सोच को सलाम करने के लिए 1991 से 1 जुलाई को डॉक्टर डे घोषित हुआ। सफेद कोट के पीछे छुपी जिंदगी</p>
<p><br />हम डॉक्टर को सिर्फ OPD में 5 मिनट देखते हैं। पर उसके पीछे क्या है? नींद की कुर्बानी: 36 घंटे की ड्यूटी, इमरजेंसी कॉल, रात 2 बजे उठकर ICU दौड़ना। त्योहार, जन्मदिन, शादी सब हॉस्पिटल की ड्यूटी के आगे सेकेंड पर आ जाता है।</p>
<p><br />दिमाग का बोझ: एक गलत दवा, एक छूटा हुआ लक्षण, और किसी की पूरी दुनिया उजड़ सकती है। इसलिए हर केस में 100% दिमाग लगाना पड़ता है। डिप्रेशन और बर्नआउट डॉक्टरों में सबसे ज्यादा है।</p>
<p><br />जोखिम उठाकर सेवा: कोविड-19 में PPE किट पहनकर 12 घंटे काम करना, संक्रामक बीमारियों के बीच खड़े रहना, कभी-कभी मरीजों के परिजनों का गुस्सा झेलना। फिर भी वो भागते नहीं हैं। यही है मानव सेवा। किताबों से नहीं, जिगर से की जाने वाली सेवा। डॉक्टर सिर्फ इलाज नहीं करते, वो उम्मीद देते हैं। गांव का डॉक्टर : जहां MRI-CT नहीं, वहां स्टेथोस्कोप से बीमारी पकड़ लेता है। 50 रुपये फीस में 1 घंटे समझाता है। सर्जन: 8 घंटे टेबल पर झुका रहता है, ताकि किसी और को जिंदगी मिल जाए। बाल रोग विशेषज्ञ : रोते हुए बच्चे को चॉकलेट देकर इंजेक्शन लगाता है, और मां को हिम्मत देता है।</p>
<p><br />ग्रामीण MBBS डॉक्टर: बाढ़, महामारी, एक्सीडेंट में सबसे पहले वही पहुंचता है, एंबुलेंस से पहले। कोविड से लेकर डेंगू, हार्ट अटैक से लेकर डिलीवरी तक, हर संकट में सबसे आगे वो सफेद कोट ही खड़ा मिला। डॉक्टर भगवान नहीं हैं। वो इंसान हैं। उनसे गलती हो सकती है, वो थक सकते हैं। पर इरादा उनका हमेशा सेवा का ही होता है। भरोसा रखिए, सवाल पूछिए : गूगल डॉक्टर से पहले असली डॉक्टर की सुनिए। इज्जत दीजिए: इमरजेंसी में गाली की जगह धन्यवाद दीजिए। वो भी आपके जैसा इंसान है। सेल्फ-केयर : डॉक्टर को भी आराम, सम्मान और सुरक्षित माहौल चाहिए। हिंसा से उनका मनोबल टूटता है, इलाज नहीं सुधरता। निष्कर्ष: हजार सलाम कम हैं। डॉक्टर वो पुल है जो 'बीमारी' और 'जिंदगी' के बीच बना है। वो रात-रात भर जागकर हमारे अपनों की सांसें गिनते हैं। फीस लेते हैं, पर कई बार उम्मीद फ्री में दे देते हैं। इस 1 जुलाई को अपने फैमिली डॉक्टर, अपने शहर के उस सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर, या उस जूनियर रेजिडेंट को एक मैसेज कर दीजिए। कहिए: "डॉक्टर साहब, आपकी मानव सेवा को हजार सलाम।" क्योंकि जब सब थक जाते हैं, तब भी धड़कन चलती रहती है। और उस धड़कन को चलाने वाला सफेद कोट होता है। लेकिन हम इसे भी नजरंदाज नहीं कर सकते कि चिकित्सा सेवा का व्यवसायीकरण हो चुका है और आम जनता का कहीं कहीं शोषण भी हो रहा है। आज इलाज मानव सेवा न रहकर बेहद महंगा व्यापार बन चुका है। अत्यधिक व्यवसायीकरण के समय में आज कई निजी अस्पताल व नर्सिंग होम लाभ कमाने का केंद्र बन गए हैं। मरीजों को अनावश्यक रूप से महंगी जांचें और दवाइयां लिखी जातीं हैं, जिससे आम आदमी बहुत परेशान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:52:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पल्स पोलियो अभियान के दौरान आंगनबाड़ी सेविका की तबीयत बिगड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>हिरणपुर, पाकुड़, झारखण्ड:- </strong>हिरणपुर प्रखंड अंतर्गत घाघरजानी पंचायत के घाघरजानी गांव में पल्स पोलियो अभियान के दौरान आंगनबाड़ी सेविका ललिता मुर्मू की अचानक तबीयत बिगड़ गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिका टुसू एवं निर्मला दीदी ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तत्काल हिरणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार के साथ सलाइन चढ़ाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कई घंटे के उपचार के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार देखा गया। चिकित्सा प्रभारी डॉ. सुनील कुमार सिंह एवं डॉ. प्रेम मुर्मू ने बताया कि कमजोरी, मानसिक तनाव और चक्कर आने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी थी। फिलहाल उनकी स्थिति में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182350/anganwadi-workers-health-deteriorated-during-pulse-polio-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-21.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>हिरणपुर, पाकुड़, झारखण्ड:- </strong>हिरणपुर प्रखंड अंतर्गत घाघरजानी पंचायत के घाघरजानी गांव में पल्स पोलियो अभियान के दौरान आंगनबाड़ी सेविका ललिता मुर्मू की अचानक तबीयत बिगड़ गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिका टुसू एवं निर्मला दीदी ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तत्काल हिरणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार के साथ सलाइन चढ़ाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई घंटे के उपचार के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार देखा गया। चिकित्सा प्रभारी डॉ. सुनील कुमार सिंह एवं डॉ. प्रेम मुर्मू ने बताया कि कमजोरी, मानसिक तनाव और चक्कर आने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी थी। फिलहाल उनकी स्थिति में सुधार है और वे खतरे से बाहर हैं। चिकित्सकों ने उम्मीद जताई है कि उचित उपचार एवं आराम से वे शीघ्र पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182350/anganwadi-workers-health-deteriorated-during-pulse-polio-campaign</link>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:14:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में 28 जून को 0 से 5 वर्ष के बालक-बालिकाओं को पिलाई गई 'दो बूंद' पोलियो ड्रॉप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-   </strong>       पोलियो उन्मूलन अभियान के तहत उपायुक्त पाकुड़ मेघा भारद्वाज के निर्देशन में प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित प्रखण्ड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में 28 जून को सभी पोलियो केंद्रों पर शून्य से पांच वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को पोलियो की 'दो बूंद' दवा पिलाई गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो ड्रॉप से कोई भी बालक-बालिका वंचित न रहे, इसके लिए 29 व 30 जून को घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाई जाएगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 139 पोलियो बूथ तथा पाकुड़िया अस्थायी बस स्टैंड, तालवा सिदो-कान्हू चौक और ग्रामीण क्षेत्रों के हाट में कुल 3 ट्रांजिट बूथ बनाए गए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182347/on-june-28-two-drops-of-polio-drop-were-administered"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/10009258501.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-   </strong>    पोलियो उन्मूलन अभियान के तहत उपायुक्त पाकुड़ मेघा भारद्वाज के निर्देशन में प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित प्रखण्ड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में 28 जून को सभी पोलियो केंद्रों पर शून्य से पांच वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को पोलियो की 'दो बूंद' दवा पिलाई गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो ड्रॉप से कोई भी बालक-बालिका वंचित न रहे, इसके लिए 29 व 30 जून को घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाई जाएगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 139 पोलियो बूथ तथा पाकुड़िया अस्थायी बस स्टैंड, तालवा सिदो-कान्हू चौक और ग्रामीण क्षेत्रों के हाट में कुल 3 ट्रांजिट बूथ बनाए गए हैं। इनमें आंगनबाड़ी सेविकाओं और मेडिकल स्टाफ सहित कुल 329 कर्मियों की सेवाएं ली जा रही हैं। कार्यक्रम के सघन निरीक्षण के लिए 32 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं, जबकि 13 सब-डिपो भी बनाए गए हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह जानकारी देते हुए प्रभात दास ने बताया कि पाकुड़िया प्रखण्ड में कुल 18,065 बालक-बालिकाओं को पोलियो ड्रॉप पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182347/on-june-28-two-drops-of-polio-drop-were-administered</link>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:11:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाज सरकारी, दवा बाजार से ! विक्रमजोत सीएचसी पर मरीजों के गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>विक्रमजोत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टरों पर मरीजों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में सरकारी दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें नहीं दी जातीं और अधिकांश दवाएं बाहर की मेडिकल दुकानों से खरीदने के लिए लिख दी जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सरोज देवी, अनीता, कमला, राम करन और गोविंद प्रसाद सहित कई मरीजों ने बताया कि वे सरकारी अस्पताल में इस उम्मीद से इलाज कराने आते हैं कि उन्हें बेहतर चिकित्सकीय सुविधा और निःशुल्क दवाएं मिलेंगी। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर अधिकांश दवाएं बाहर से खरीदने के लिए लिख देते हैं, जिससे गरीब और</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181321/serious-allegations-of-patients-on-vikramjot-chc-for-treatment-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0017.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>विक्रमजोत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टरों पर मरीजों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में सरकारी दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें नहीं दी जातीं और अधिकांश दवाएं बाहर की मेडिकल दुकानों से खरीदने के लिए लिख दी जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरोज देवी, अनीता, कमला, राम करन और गोविंद प्रसाद सहित कई मरीजों ने बताया कि वे सरकारी अस्पताल में इस उम्मीद से इलाज कराने आते हैं कि उन्हें बेहतर चिकित्सकीय सुविधा और निःशुल्क दवाएं मिलेंगी। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर अधिकांश दवाएं बाहर से खरीदने के लिए लिख देते हैं, जिससे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मरीजों का कहना है कि सरकार द्वारा अस्पतालों में मुफ्त दवा उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर इसका लाभ आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में दवाएं उपलब्ध हैं तो मरीजों को उनका लाभ मिलना चाहिए। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से सीएचसी विक्रमजोत की व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराकर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
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</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:44:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत ताला गांव में लगा स्वास्थ्य शिविर</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले पूरे देश में केन्द्र सरकार टीबी मुक्त अभियान चला रही है जिसका मुख्य उद्देश्य पूरे देश से टीबी रोग को खत्म करना है । केन्द्र सरकार के निर्देश पर प्रत्येक राज्यों में भी टीबी रोग से सम्बंधित सभी जानकारियां ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाया जा रहा है । </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि बहुत से लोगों को टीबी रोग के बारे में जानकारी ही नहीं रहती है कि टीबी रोग कैसे होता है ? और टीबी रोग से कैसे बचाव किया जाएं । यदि टीबी रोग के बारे में लोगों को समुचित जानकारी हो तो टीबी रोग को</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180879/health-camp-organized-in-tala-village-under-100-day-tb-free-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260608-wa0088.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले पूरे देश में केन्द्र सरकार टीबी मुक्त अभियान चला रही है जिसका मुख्य उद्देश्य पूरे देश से टीबी रोग को खत्म करना है । केन्द्र सरकार के निर्देश पर प्रत्येक राज्यों में भी टीबी रोग से सम्बंधित सभी जानकारियां ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाया जा रहा है । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि बहुत से लोगों को टीबी रोग के बारे में जानकारी ही नहीं रहती है कि टीबी रोग कैसे होता है ? और टीबी रोग से कैसे बचाव किया जाएं । यदि टीबी रोग के बारे में लोगों को समुचित जानकारी हो तो टीबी रोग को जड़ से खत्म किया जा सकता है । टीबी रोग कोई जानलेवा बीमारी नही होती है लेकिन टीबी रोग व इलाज के बारे में समुचित जानकारी न होने के कारण कभी - कभी टीबी रोग जानलेवा साबित हो जाता है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शासन के निर्देश के क्रम में 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विक्रमजोत के ग्राम ताला में आयुष्मान आरोग्य शिविर का आयोजन किया गया जिसमें टीबी रोग से संबंधित जानकारी दी गई एवं निःशुल्क जांच की गई एवं दवाइयां भी वितरित किया गया । स्वास्थ्य शिविर में शुगर , वीपी , तौल समेत अन्य जांच निःशुल्क की गई । इस शिविर में डॉ. अजय शुक्ला, एक्स-रे टेक्नीशियन भूपेन्द्र सिंह, एसटीएलएस संदीप कुमार, एसटीएस संकट मोचन यादव, सीएचओ अर्चना पटेल, अमरेश, साक्षी, अंजली, एएनएम सरिता कुमारी, फार्मासिस्ट कोमल, एक्स-रे टेक्नीशियन के सहयोगी अब्बासी तथा डाटा एंट्री ऑपरेटर फिरोज खान समेत आदि कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद रहे ।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 20:50:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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