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                <title>ताइवान के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर प्रतिबन्ध लगा रहा है चीन </title>
                                    <description><![CDATA[<p>ताइवान के आसपास चीन के सैन्य अभ्यास ने नई अटकलों को जन्म दिया है । माना जारहा है कि चीन ने ताइवान पर पूर्ण आक्रमण के बजाय संभावतः नाकाबंदी शुरू कर दी है। चीनी नाकाबंदी में नौसेना और वायु सेनाएं ताइवान की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों तक पहुंच को प्रतिबंधित कर सकती हैं। ताइवान के नए राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने चीन से आग्रह किया कि वह "ताइवान के खिलाफ अपनी राजनीतिक और सैन्य धमकी बंद करें" और "सुनिश्चित करें कि दुनिया युद्ध के डर से मुक्त हो।"</p>
<p>चीन के इस एक्शन से वैश्विक बाज़ार और अर्थव्यवस्थाएँ संभावित उथल-पुथल के लिए तैयार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141742/china-is-imposing-restrictions-on-taiwans-international-trade-routes%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/11_36_508839973taiwan2.jpg" alt=""></a><br /><p>ताइवान के आसपास चीन के सैन्य अभ्यास ने नई अटकलों को जन्म दिया है । माना जारहा है कि चीन ने ताइवान पर पूर्ण आक्रमण के बजाय संभावतः नाकाबंदी शुरू कर दी है। चीनी नाकाबंदी में नौसेना और वायु सेनाएं ताइवान की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों तक पहुंच को प्रतिबंधित कर सकती हैं। ताइवान के नए राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने चीन से आग्रह किया कि वह "ताइवान के खिलाफ अपनी राजनीतिक और सैन्य धमकी बंद करें" और "सुनिश्चित करें कि दुनिया युद्ध के डर से मुक्त हो।"</p>
<p>चीन के इस एक्शन से वैश्विक बाज़ार और अर्थव्यवस्थाएँ संभावित उथल-पुथल के लिए तैयार हैं। उधर अमेरिका ने ताइवान का समर्थन करने की "कसम खाई" है। बता दें कि   ताइवान में नए राष्ट्रपति के उद्घघाटन भाषण के जवाब में चीन द्वारा आस-पास के क्षेत्र में सैन्य अभ्यास करने के तुरंत बाद अमेरिकी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को नए नेता से मुलाकात कर अपना समर्थन जाहिर किया। अमेरिकी कांग्रेस में ताइवान कॉकस के सह-अध्यक्ष प्रतिनिधि एंडी बार्र ने कहा कि अमेरिका, ताइवान की सेना, कूटनीति और अर्थव्यवस्था का समर्थन करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।</p>
<p>केंटकी के प्रतिनिधि ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते से मुलाकात करने के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, ''अमेरिका, ताइवान में यथास्थिति और शांति बनाए रखना चाहता है और इसको लेकर अमेरिका, ताइवान या फिर दुनिया में कहीं भी किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं होना चाहिए।'' चीन ताइवान को एक विश्वासघाती प्रांत मानता है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर वह बलपूर्वक अपने नियंत्रण में ले सकता है।</p>
<p>अधिकांश देशों की तरह, अमेरिका के ताइवान के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं लेकिन वह द्वीप को उसकी रक्षा के साधन प्रदान करने के लिए अपने खुद के कानूनों का हवाला देता है। चीनी सरकार ने अमेरिकी सांसदों की यात्रा पर कड़ा विरोध व्यक्त किया और कहा कि इस दौरे ने चीन-अमेरिका संबंधों और ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता को कमजोर किया है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में कहा, ''अमेरिकी सांसदों की यात्रा ताइवान के साथ केवल अनौपचारिक संबंध बनाए रखने की अमेरिकी सरकार की राजनीतिक प्रतिबद्धता के खिलाफ है। यह दौरा ताइवान की स्वतंत्रता की अलगाववादी ताकत का गंभीर रूप से गलत संकेत भेजता है।'' ताइवान के नये विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग ने हाल ही में चीन द्वारा किये गये सैन्य अभ्यासों पर गौर करते हुए इस महत्वपूर्ण समय में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से एकजुटता का संकेत दिखाने के लिए मुलाकात करने का आह्नान किया था।</p>
<p>प्रतिनिधिमंडल में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल थे। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष प्रतिनिधि माइकल मैककॉल ने किया। पिछले वर्ष अप्रैल में ताइवान की यात्रा के बाद रिपब्लिकन पार्टी के टेक्सास प्रतिनिधि पर चीन ने प्रतिबंध लगा दिया था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 May 2024 17:02:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गाजा के राफा शहर पर इजराइल के हमले से नाराज़ अमेरिका </title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका ने अपनी इच्छा के विपरीत गाजा के राफा शहर पर बड़े पैमाने पर हमला करने के इजराइल के फैसले को लेकर चिंता व्यक्त करने के लिए पिछले सप्ताह इजराइल को भेजी जाने वाली बम की खेप रोक दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि खेप में 2000 पाउंड वजन के 1800 बम और 500 पाउंड वजनी 1700 बम भेजे जाने थे। अधिकारी ने बताया कि अमेरिका ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटकों का इस्तेमाल घनी आबादी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/140951/america-angry-over-israels-attack-on-gazas-rafah-city"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/2024_2image_11_46_204417868gaza-ll.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिका ने अपनी इच्छा के विपरीत गाजा के राफा शहर पर बड़े पैमाने पर हमला करने के इजराइल के फैसले को लेकर चिंता व्यक्त करने के लिए पिछले सप्ताह इजराइल को भेजी जाने वाली बम की खेप रोक दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि खेप में 2000 पाउंड वजन के 1800 बम और 500 पाउंड वजनी 1700 बम भेजे जाने थे। अधिकारी ने बताया कि अमेरिका ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटकों का इस्तेमाल घनी आबादी वाले क्षेत्र में कैसे किया जा सकता है।</p>
<p>चरमपंथी हमास द्वारा पिछले साल सात अक्टूबर को इजराइल पर घातक हमला किये जाने के जवाब में इजराइल ने गाजा पट्टी पर आक्रमण शुरू कर दिया था, जिसके बाद से 10 लाख से अधिक नागरिकों ने रफह में शरण ली हुई है। व्हाइट हाउस की ओर से कई महीने तक आपत्ति दर्ज कराए जाने के बावजूद इजराइली सरकार रफह पर आक्रमण की तैयार करती रही,</p>
<p>जिसके बाद अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने इजराइल को भविष्य में सैन्य सहायता भेजने की समीक्षा शुरू कर दी। अधिकारी ने बताया कि बम की खेप रोकने का निर्णय पिछले सप्ताह लिया गया और खेप निकट भविष्य में इजराइल को भेजी जाएगी या नहीं, इस पर निर्णय नहीं लिया गया है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 May 2024 14:39:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> जॉर्डन में हमले से तिलमिलाए बाइडेन </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोलंबिया:</strong> जॉर्डन में ईरान समर्थित समूह के ड्रोन हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत और कई सैनिकों के घायल होने से तिलमिलाए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रविवार को कहा कि अमेरिका इसका ‘‘करारा जवाब'' देगा। इजराइल-हमास युद्ध की शुरुआत के बाद से पश्चिम एशिया में अमेरिकी बलों के खिलाफ ऐसे समूहों द्वारा महीनों से जारी हमलों में पहली बार हुई अमेरिकी सैनिकों की मौत के लिए बाइडेन ने ईरान समर्थित मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया। दक्षिण कैरोलाइना की यात्रा के दौरान बाइडन ने बैपटिस्ट चर्च के बैंक्वेट हॉल में एक सभा में क्षणभर का मौन रखा।</p>
<p>बाइडेन ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138445/biden-stunned-by-attack-in-jordan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-01/2023_10image_16_13_547038186biden-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबिया:</strong> जॉर्डन में ईरान समर्थित समूह के ड्रोन हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत और कई सैनिकों के घायल होने से तिलमिलाए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रविवार को कहा कि अमेरिका इसका ‘‘करारा जवाब'' देगा। इजराइल-हमास युद्ध की शुरुआत के बाद से पश्चिम एशिया में अमेरिकी बलों के खिलाफ ऐसे समूहों द्वारा महीनों से जारी हमलों में पहली बार हुई अमेरिकी सैनिकों की मौत के लिए बाइडेन ने ईरान समर्थित मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया। दक्षिण कैरोलाइना की यात्रा के दौरान बाइडन ने बैपटिस्ट चर्च के बैंक्वेट हॉल में एक सभा में क्षणभर का मौन रखा।</p>
<p>बाइडेन ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में हमारे लिए पिछली रात मुश्किल थी। हमने अपने एक सैन्य अड्डे पर हुए हमले में तीन बहादुर सैनिकों को खो दिया। हम जवाब देंगे।' ‘डेर एजोर 24 मीडिया' के प्रमुख और यूरोप के कार्यकर्ता उमर अबू लैला के अनुसार, पूर्वी सीरिया में ईरान समर्थित लड़ाकों ने अमेरिकी हवाई हमलों के डर से अपनी चौकी खाली करनी शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि ये क्षेत्र मयादीन और बौकामल के गढ़ हैं। अमेरिका के मध्य कमान ने कहा कि एकतरफा ड्रोन हमले में से कम से कम 34 सैनिक घायल हो गए, जिनमें से आठ को उपचार के लिए जॉर्डन से बाहर भेजा गया। फिलहाल सभी आठ लोगों की हालत स्थिर है। एक बड़े आकार के ड्रोन ने जॉर्डन में ‘टॉवर 22' के नाम से जाने जाने वाले ‘लॉजिस्टिक सपोर्ट' बेस पर हमला किया।</p>
<p>मध्य कमान ने कहा कि लगभग 350 अमेरिकी सैनिकी और वायु सेना के कर्मियों को इस बेस पर तैनात किया गया था। कई अमेरिकी अधिकारियों ने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर बताया कि तीन सैनिक मारे गए और घायलों में भी अधिकतर सेना के जवान है। इस छोटे प्रतिष्ठान में अमेरिका के इंजीनियरिंग, विमानन एवं रसद विभाग के कर्मियों के अलावा सुरक्षा सैनिक तैनात थे। अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा, ‘‘अमेरिका अपने सैनिकों और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करेगा।''</p>
<p>ऑस्टिन ने कहा कि सैनिकों को आतंकी संगठन आईएसआईएस को स्थायी रूप से हराने के लिए वहां तैनात किया गया था। तीन अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन ने सैनिकों के सोने के कक्ष के पास हमला किया, जिससे हताहतों की संख्या अधिक हो गई। सीरिया के अल-तन्फ में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डा ‘टॉवर 22' के उत्तर में सिर्फ 20 किलोमीटर की दूरी पर है। जॉर्डन का यह प्रतिष्ठान सीरिया में अमेरिकी सेनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण रसद केंद्र (लॉजिस्टिक हब) के रूप में कार्य करता है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jan 2024 13:50:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title> भारत और अमेरिका संबंधों में हो रहे क्रांतिकारी बदलाव- मौजूदा राजदूत Taranjit Singh Sandhu</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अमेरिका</strong> में भारत के निवर्तमान राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि भारत एवं अमेरिका के संबंधों में क्रांतिकारी बदलाव हो रहे हैं जो कि द्विपक्षीय संबंधों की अभी सिर्फ शुरुआत है तथा इस दीर्घकालिक रिश्ते का दायरा अभी और बढ़ेगा। संधू ने यहां गणतंत्र दिवस समारोह में भारतीय अमेरिकियों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि यहां रह रहे भारतीयों की दूसरी पीढ़ी भारत से जुड़ी रहे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपको केवल यह बताना चाहता हूं कि आज भारत में अमेरिका-भारत संबंधों में भी क्रांतिकारी बदलाव हो रहे हैं और इसलिए यह महत्वपूर्ण</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138435/revolutionary-changes-are-taking-place-in-india-us-relations-%E2%80%93-current"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-01/2023_6image_21_22_088333741sandhu-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अमेरिका</strong> में भारत के निवर्तमान राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि भारत एवं अमेरिका के संबंधों में क्रांतिकारी बदलाव हो रहे हैं जो कि द्विपक्षीय संबंधों की अभी सिर्फ शुरुआत है तथा इस दीर्घकालिक रिश्ते का दायरा अभी और बढ़ेगा। संधू ने यहां गणतंत्र दिवस समारोह में भारतीय अमेरिकियों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि यहां रह रहे भारतीयों की दूसरी पीढ़ी भारत से जुड़ी रहे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपको केवल यह बताना चाहता हूं कि आज भारत में अमेरिका-भारत संबंधों में भी क्रांतिकारी बदलाव हो रहे हैं और इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आपके बच्चे और आपके परिवार भारत के बारे में जागरूक हों, भारत से जुड़े रहें।''</p>
<p>संधू 35 से अधिक वर्षों की सेवा के बाद इस महीने के अंत में विदेश सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। संधू ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय पूंजी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भारत में आने से सभी युवा भारतीय अमेरिकियों को नौकरी के अधिकतर अवसर प्राप्त करने का विशिष्ट अवसर मिलेगा। संधू ने कहा, ‘‘इसलिए न केवल भावनात्मक, सांस्कृतिक और कई अन्य कारणों से, बल्कि आर्थिक और व्यावसायिक कारणों से भी भारत से जुड़े रहें।'' ‘नेशनल काउंसिल ऑफ एशियन इंडियन एसोसिएशन' ने वर्जीनिया के मैकलीन में इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। निवर्तमान राजदूत को भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में उनकी भूमिका के लिए समुदाय के नेताओं द्वारा सम्मानित भी किया गया।</p>
<p>संधू ने ‘इंडियन अमेरिकन बिजनेस इम्पैक्ट ग्रुप' द्वारा आयोजित एक अन्य विदाई समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह तो भारत-अमेरिका संबंध की अभी शुरुआत भर है। उन्होंने कहा, ‘‘सच्चाई यह है कि हमने अभी सिर्फ शुरुआत की है। इन सभी क्षेत्रों में यह रिश्ता दूर तक जाने वाला है।'' उन्होंने कहा, ‘‘हम पहले से ही एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के विभिन्न आयामों के बारे में सुन रहे हैं। भारत एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष या विश्व बैंक के किसी भी अनुमान को देखें तो दुनिया की अर्थव्यवस्था को उबारने में भारत बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।'' संधू ने दोहराया कि करियर की संभावनाओं, नौकरियों और अपने बच्चों के विकास के लिए भारतीय अमेरिकियों को भारत से जुड़े रहना चाहिए। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jan 2024 14:56:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका की राजनीति में भारतीयों का जलवा कायम, राज्य और स्थानीय चुनाव में लहराया परचम </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>America: </strong>अमेरिका में कम से कम 10 भारतीय-अमेरिकियों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए स्थानीय व राज्य स्तर के चुनावों में जीत हासिल की है। इनमें से ज्यादातर भारतवंशी डेमोक्रेट पार्टी से संबंधित हैं। यह जीत अमेरिका की राजनीति में भारतीय समुदाय के बढ़ते दबदबे को दर्शाती है।</p>
<p>हैदराबाद में जन्मी गजाला हाशमी लगातार तीसरी बार वर्जिनिया की सीनेट के लिए निर्वाचित हुई हैं। वह वर्जीनिया की सीनेट में जगह बनाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी और मुस्लिम महिला थीं। वहीं, सुहास सुब्रमण्यम भी वर्जीनिया की सीनेट के लिए फिर से चुने गए हैं। वह दो बार 2019 और 2021 में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136959/indians-continue-to-dominate-american-politics-flag-hoisted-in-state"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/2023_11image_10_40_111607975us-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>America: </strong>अमेरिका में कम से कम 10 भारतीय-अमेरिकियों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए स्थानीय व राज्य स्तर के चुनावों में जीत हासिल की है। इनमें से ज्यादातर भारतवंशी डेमोक्रेट पार्टी से संबंधित हैं। यह जीत अमेरिका की राजनीति में भारतीय समुदाय के बढ़ते दबदबे को दर्शाती है।</p>
<p>हैदराबाद में जन्मी गजाला हाशमी लगातार तीसरी बार वर्जिनिया की सीनेट के लिए निर्वाचित हुई हैं। वह वर्जीनिया की सीनेट में जगह बनाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी और मुस्लिम महिला थीं। वहीं, सुहास सुब्रमण्यम भी वर्जीनिया की सीनेट के लिए फिर से चुने गए हैं। वह दो बार 2019 और 2021 में हाउस ऑफ डेलीगेट्स के लिए निर्वाचित हुए थे।</p>
<p>ह्यूस्टन में जन्मे सुब्रमण्यम पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन के दौरान व्हाइट हाउस में प्रौद्योगिकी नीति सलाहकार रहे थे। वह वर्जीनिया हाउस के लिए निर्वाचित होने पहले हिंदू हैं। व्यापार क्षेत्र के दिग्गज कन्नन श्रीनिवासन भारतीय-अमेरिकियों के प्रभुत्व वाले लाउडन काउंटी क्षेत्र से वर्जीनिया हाउस ऑफ डेलीगेट्स के लिए चुने गए हैं। श्रीनिवासन 90 के दशक में भारत से अमेरिका पहुंचे थे।</p>
<p>वर्जीनिया में जीत हासिल करने वाले सभी तीन विजेता डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं। वहीं, न्यू जर्सी से भी तीन भारतीय-अमेरिकियों ने जीत हासिल की है। न्यू जर्सी में भारतीय-अमेरिकी विन गोपाल और राज मुखर्जी राज्य सीनेट के लिए चुने गए हैं। ये दोनों भारतवंशी डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं।</p>
<p>इनके अलावा, बलवीर सिंह न्यू जर्सी के बर्लिंगटन काउंटी बोर्ड ऑफ काउंटी कमिश्नर में फिर से निर्वाचित हुए हैं। वहीं, पेनसिल्वेनिया में नील मुखर्जी (डेमोक्रेट) ने मोंटोगोमेरी काउंटी कमिश्नर, जबकि इंडियाना में भारतीय-अमेरिकी चिकित्सक डॉ. अनिता जोशी ने कार्मेल सिटी काउंसिल सीट की 'वेस्ट डिस्ट्रिक्ट' सीट पर जीत हासिल की है।</p>
<p>गैर-लाभकारी लैंड बैंक के सीईओ अरुणन अरुलमपालम को कनेक्टिकट में हार्टफोर्ड के मेयर के रूप में चुना गया है। अरुणन जिम्बाब्वे से अमेरिकी आए थे। चुनावों में जीत हासिल करने के बाद सभी 10 भारतीय-अमेरिकियों ने अपने क्षेत्र के लोगों के कल्याण के लिए काम करने का संकल्प लिया। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Nov 2023 13:49:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या यूएस और ब्रिटेन है भारत के खिलाफ: कनाडा विवाद </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Bharat: </strong>अमेरिका और ब्रिटेन ने भारत से आग्रह किया कि वो कनाडा पर भारत में अपनी राजनयिक उपस्थिति कम करने पर जोर न दे। दोनों देशों ने सिख अलगाववादी की हत्या पर विवाद के बीच कनाडा द्वारा 41 राजनयिकों को बाहर निकालने पर चिंता जताई। जून में कनाडा के वैंकूवर में कनाडाई नागरिक और खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता का आरोप लगा था। भारत ने आरोप से इनकार किया है। हालांकि भारत ने निज्जर को आतंकवादी घोषित किया था और उस पर इनाम भी था। इधर कई खालिस्तानी नेताओं की मौत विदेश में हुई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136018/is-canada-dispute-against-india-against-us-and-uk"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/65333b2006512.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Bharat: </strong>अमेरिका और ब्रिटेन ने भारत से आग्रह किया कि वो कनाडा पर भारत में अपनी राजनयिक उपस्थिति कम करने पर जोर न दे। दोनों देशों ने सिख अलगाववादी की हत्या पर विवाद के बीच कनाडा द्वारा 41 राजनयिकों को बाहर निकालने पर चिंता जताई। जून में कनाडा के वैंकूवर में कनाडाई नागरिक और खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता का आरोप लगा था। भारत ने आरोप से इनकार किया है। हालांकि भारत ने निज्जर को आतंकवादी घोषित किया था और उस पर इनाम भी था। इधर कई खालिस्तानी नेताओं की मौत विदेश में हुई है।</p>
<blockquote class="format2">
<blockquote class="format2">
<blockquote class="format1">अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने शुक्रवार को कहा, "भारत में कनाडा के राजनयिकों के भारत से जाने से चिंतित हैं।" मिलर ने अपने बयान में कहा- "मतभेदों को सुलझाने के लिए जमीनी स्तर पर राजनयिकों की जरूरत होती है। हमने भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह कनाडा की राजनयिक उपस्थिति में कमी पर जोर न दे और कनाडाई जांच में सहयोग करे। हम उम्मीद करते हैं कि भारत राजनयिक संबंधों पर 1961 वियना कन्वेंशन के तहत अपने दायित्वों को बनाए रखेगा। साथ ही कनाडा के राजनयिक मिशन के मान्यता प्राप्त सदस्यों को प्राप्त विशेषाधिकारों का भी सम्मान करेगा।''</blockquote>
</blockquote>
</blockquote>
<p>वाशिंगटन ने कहा है कि उसने कनाडा के आरोपों को गंभीरता से लिया है। अमेरिका के साथ-साथ ब्रिटेन ने भी भारत से हत्या की जांच में कनाडा के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है। आमतौर पर पश्चिमी देश भारत की खुले तौर पर निंदा करने में अनिच्छुक रहे हैं। लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन अब भारत पर सीधे दबाव बना रहे हैं।</p>
<p>ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने भी साफ शब्दों में कहा, "हम भारत सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से सहमत नहीं हैं, जिसके नतीजे में कई कनाडाई राजनयिकों को भारत छोड़ना पड़ा।" ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने भी वियना कन्वेंशन का हवाला दिया। बयान में कहा गया, "राजनयिकों की सुरक्षा प्रदान करने वाले विशेषाधिकारों और छूट को एकतरफा हटाना वियना कन्वेंशन के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।"</p>
<blockquote class="format2">
<blockquote class="format2">
<p>कनाडा के बाद अमेरिका और ब्रिटेन की भारत पर दबाव बनाने की खास वजह ये भी है कि इन तीनों देशों में सिखों की बहुत लॉबी है। वे तीनों देशों के चुनाव तक प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। जिसमें कनाडा में तो सिख ऐसे रच-बस गए हैं कि वे अब उसे दूसरा पंजाब मानते हैं। इसलिए सिखों के मुद्दे पर भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और ब्रिटेन के बयानों से साफ हो गया है कि वो सिखों के मुद्दे पर कनाडा के साथ खड़े हैं।</p>
</blockquote>
</blockquote>
<p>निज्जर की हत्या पर कनाडा के आरोपों के बाद भारत ने पिछले महीने कनाडा को अपनी राजनयिक उपस्थिति कम करने के लिए कहा था। इसके बाद, जिसके बाद कनाडा ने भारत से अपने 41 राजनयिकों को वापस बुला लिया। कनाडा ने शुक्रवार को कहा कि वह कई भारतीय शहरों में वाणिज्य दूतावासों में व्यक्तिगत संचालन को अस्थायी रूप से निलंबित कर रहा है और वीजा प्रोसेस में देरी की चेतावनी दी है।</p>
<p>कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि राजनयिकों की राजनयिक छूट रद्द करके, भारत ने कूटनीति के एक बहुत ही बुनियादी सिद्धांत का उल्लंघन किया है। शुक्रवार को भारत के खिलाफ अपना हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने वियना कन्वेंशन के नियमों का उल्लंघन किया है और दुनिया के सभी देशों को इस कदम से चिंतित होना चाहिए। उन्होंने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का विषय भी उठाया।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि नई दिल्ली भारत और कनाडा में लाखों लोगों के लिए जीवन को सामान्य रूप से जारी रखने को अविश्वसनीय रूप से कठिन बना रही है। यानी ट्रूडो ने यह कहना चाहा है कि कनाडा में रह रहे भारतीयों के लिए भारत सरकार मुश्किल पैदा कर रही है। यह एक तरह की धमकी है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कनाडा के इन आरोपों को खारिज कर दिया कि उसकी कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/136018/is-canada-dispute-against-india-against-us-and-uk</link>
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                <pubDate>Sat, 21 Oct 2023 15:06:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>  ‘नाटो प्लस’ में  जुड़ने के लिया भारत ने किया साफ इंकार, अमेरिकी सदन को रोकनी पड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>INTERNATIONAL NEWS:</strong></p>
<p>  भारत ने ‘नाटो प्लस’ दर्जे में शमिल होने को लेकर अपनी मंशा साफ जाहिर कर दी है। इसके बाद अमेरिका ने भारत को ‘नाटो प्लस’ में शामिल करने की कवायद रोक दी है। ऐसा भारत के अपने रुख पर अडिग रहने के बाद हुआ है। भारत को हथियार और टेक्नोलॉजी ट्रासंफर करने में तेजी को उद्देश्य बताकर ‘नाटो प्लस’ का दर्जा देने की कवायद शुरू की गई थी। अमेरिकी संसद की सिलेक्ट कमेटी ने हाल ही में भारत को ‘नाटो प्लस’ का दर्जा देने की सिफारिश की थी। लेकिन भारत ने स्पष्ट संकेत दिया कि वह ‘नाटो</p>
<p><strong> </strong><br />इसके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131459/india-categorically-refused-to-join-nato-plus-us-house-had"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/88888.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>INTERNATIONAL NEWS:</strong></p>
<p> भारत ने ‘नाटो प्लस’ दर्जे में शमिल होने को लेकर अपनी मंशा साफ जाहिर कर दी है। इसके बाद अमेरिका ने भारत को ‘नाटो प्लस’ में शामिल करने की कवायद रोक दी है। ऐसा भारत के अपने रुख पर अडिग रहने के बाद हुआ है। भारत को हथियार और टेक्नोलॉजी ट्रासंफर करने में तेजी को उद्देश्य बताकर ‘नाटो प्लस’ का दर्जा देने की कवायद शुरू की गई थी। अमेरिकी संसद की सिलेक्ट कमेटी ने हाल ही में भारत को ‘नाटो प्लस’ का दर्जा देने की सिफारिश की थी। लेकिन भारत ने स्पष्ट संकेत दिया कि वह ‘नाटो प्लस’ में शामिल नहीं होना चाहता है।</p>
<p><strong> चीन  पर लगाम के लिए अमेरिका ने की थी सिफारिश</strong><br />इसके बाद सोमवार को अमेरिकी निचले सदन प्रतिनिधि सभा में संशोधित प्रस्ताव रखा गया, इसमें भारत को ‘नाटो प्लस’ का दर्जा देने का कोई उल्लेख नहीं किया गया। पिछले हफ्ते पेश पूरक प्रस्ताव में भी ‘नाटो प्लस’ शब्द हटाया गया था। दरअसल  ताइवान में चीन की आक्रमकता पर लगाम कसने और उसकी घेराबंदी के लिए अमेरिकी कांग्रेस की सेलेक्ट कमेटी ने भारत को ‘नाटो प्लस’ का दर्जा देने की सिफारिश की थी। कमेटी का मानना था कि चीन ताइवान पर हमला करता है तो सामरिक तौर पर कड़ा जवाब देने के साथ-साथ क्वॉड को भी अपनी भूमिका बढ़ानी होगी। </p>
<p><br /><strong>विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया क्यों नहीं चाहिए ‘नाटो प्लस’ दर्जा</strong><br />विदेश मंत्री जयशंकर ने हाल ही में साफ किया था कि ‘नाटो प्लस’ के दर्जे के प्रति भारत ज्यादा उत्सुक नहीं है। उनका मानना है कि  भारत किसी भी सैन्य चुनौती से निपटने में सक्षम है। ‘नाटो प्लस’ दर्जे से खास फायदा नहीं बल्कि भारत पर अमेरिकी खेमे का ठप्पा लग सकता है जबकि भारत कूटनीति में तटस्थ छवि रखना चाहता है। जयशंकर के अनुसार  ‘नाटो प्लस’ में शामिल हुए बिना भी भारत को अमेरिका से सैन्य उपकरण मिल रहे हैं। बता दें कि यह प्रस्ताव राष्ट्रपति जो बाइडेन के पास मंजूरी के लिए जाएगा। दूसरा विकल्प इसे डिफेंस एक्ट में शामिल करना हो सकता है। दोनों ही स्थितियां भारत के पक्ष में हैं।</p>
<p> <br /><strong>क्या है ‘नाटो प्लस’?</strong><br />मूल नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) में 31 सदस्य देश हैं। अमेरिका ने ‘नाटो प्लस’ संगठन बनाया हुआ है। इसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इजरायल, जापान और दक्षिण कोरिया हैं। इन देशों के साथ अमेरिका के सामरिक संबंध हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/131459/india-categorically-refused-to-join-nato-plus-us-house-had</link>
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                <pubDate>Wed, 28 Jun 2023 14:12:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> राष्ट्रपति बाइडेन  ने कहा- भारत और अमेरिका की दोस्ती सबसे खास, जाने क्यों!</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>INTERNATIONAL NEWS:</strong></p>
<p>  <strong>अमेरिका</strong> के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा के दौरान अमेरिका और भारत ने अपनी रणनीतिक प्रौद्योगिकी साझेदारी को और बढ़ाने के लिए कई प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए तथा दोनों देशों के बीच की दोस्ती दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण संबंधों में से एक है। बाइडेन की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच दोस्ती वैश्विक हित में है तथा यह हमारे ग्रह को न सिर्फ और बेहतर, बल्कि अधिक टिकाऊ भी बनाएगी।</p>
<p>इस दौरान, बाइडेन दंपति ने उनके लिए राजकीय रात्रिभोज की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131321/president-biden-said-why-should-india-and-americas-friendship-be"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/अमेरिका.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>INTERNATIONAL NEWS:</strong></p>
<p> <strong>अमेरिका</strong> के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा के दौरान अमेरिका और भारत ने अपनी रणनीतिक प्रौद्योगिकी साझेदारी को और बढ़ाने के लिए कई प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए तथा दोनों देशों के बीच की दोस्ती दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण संबंधों में से एक है। बाइडेन की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच दोस्ती वैश्विक हित में है तथा यह हमारे ग्रह को न सिर्फ और बेहतर, बल्कि अधिक टिकाऊ भी बनाएगी।</p>
<p>इस दौरान, बाइडेन दंपति ने उनके लिए राजकीय रात्रिभोज की मेजबानी की, जिसमें प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रमुख, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), उद्यमी, अधिकारी सहित करीब 500 लोगों ने शिरकत की थी। अमेरिका की अपनी पहली आधिकारिक राजकीय यात्रा पर मोदी कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के संयुक्त सत्र को दो बार संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी बने थे। वह भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों से भी मुखातिब हुए थे।  </p>
<p><br />बाइडेन ने रविवार को ट्वीट किया, ‘‘अमेरिका और भारत के बीच की दोस्ती दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण संबंधों में से एक है। यह पहले से कहीं अधिक मजबूत, गहरी और जीवंत है।'' प्रधानमंत्री मोदी ने बाइडन के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, ‘‘राष्ट्रपति जो बाइडेन, मैं आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूं। हमारे देशों के बीच दोस्ती वैश्वक हित में है। इससे हमारा ग्रह और बेहतर तथा अधिक टिकाऊ बनेगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘मेरी हाल की यात्रा में जिन मुद्दों पर चर्चा की गई है, उससे हमारे संबंध और मजबूत होंगे।'' प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रथम महिला जिल बाइडेन के निमंत्रण पर 21 से 24 जून तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/131321/president-biden-said-why-should-india-and-americas-friendship-be</link>
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                <pubDate>Mon, 26 Jun 2023 12:46:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ड्रैगन की नई चाल: ताइवान को भयभीत करने के लिए शुरू किया सैन्य अभ्यास, तइपे रक्षा क्षेत्र में भेजे  71 चीनी विमान और 9 जहाज</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International: </strong>दुनिया पर राज करने का सपना पूरा करने के लिए चीन अपनी विस्तारवादी व आक्रमक नीतियों को लगातार बढ़ाता जा रहा है। इसके तहत चीन अपने पड़ोसी देशों उकसाने की कोशिश में लगा रहता है। ताइवान न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को शाम 4 बजे तक 71 चीनी सैन्य विमानों और 9 नौसैनिक जहाजों को ट्रैक किया गया है।</p>
<p>चीन ने यह कदम वेन और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष केविन मैक्कार्थी के बीच हुई मुलाकात से नाराज होकर उठाया है। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन की हालिया अमेरिका यात्रा से बिदके चीन ने शनिवार को ताइवान जलडमरूमध्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/128654/dragons-new-trick-started-military-exercise-to-intimidate-taiwan-sent"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-04/2023_4image_13_22_202184475china1-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International: </strong>दुनिया पर राज करने का सपना पूरा करने के लिए चीन अपनी विस्तारवादी व आक्रमक नीतियों को लगातार बढ़ाता जा रहा है। इसके तहत चीन अपने पड़ोसी देशों उकसाने की कोशिश में लगा रहता है। ताइवान न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को शाम 4 बजे तक 71 चीनी सैन्य विमानों और 9 नौसैनिक जहाजों को ट्रैक किया गया है।</p>
<p>चीन ने यह कदम वेन और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष केविन मैक्कार्थी के बीच हुई मुलाकात से नाराज होकर उठाया है। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन की हालिया अमेरिका यात्रा से बिदके चीन ने शनिवार को ताइवान जलडमरूमध्य की तरफ युद्धपोत और दर्जनों लड़ाकू विमान भेजे।</p>
<p>चीन दावा करता है कि ताइवान उसका हिस्सा है। ताइवान राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय (MND) ने कहा कि इसमें 45 विमान शामिल हैं जो शायद ताइवान स्ट्रेट की मध्य रेखा को पार कर गए या फिर दक्षिण-पश्चिम से ताइवान के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) में प्रवेश कर गए हैं। राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय (MND) की ओर से शनिवार को निगरानी की गई। निगरानी में पाया गया कि चीनी विमानों में J-10, J-11, और J-16 लड़ाकू जेट, शीआन Y-20 परिवहन विमान, H-6K रणनीतिक बमवर्षक और KJ-500 वॉर्निंग विमान शामिल थे।</p>
<p>इससे पहले शुक्रवार को चीन की तरफ से घोषणा की गई थी कि ताइवान की सीमा के आसपास तीन दिन का सैन्य अभ्यास चलेगा है। ये युद्ध अभ्यास 8 अप्रैल से 10 अप्रैल के बीच चलेगा। जानकारी के मुताबिक, इस सैन्य अभ्यास के जरिए चीन ताइवान को अपनी सैन्य ताकत दिखाकर फिर से युद्ध की चेतावनी देने की कोशिश में है। इस सैन्य अभ्यास में चीन के लड़ाकू विमान ताइवान के पानी के क्षेत्रों के आसपास उत्तर, दक्षिण और पूर्व में अभ्यास करेंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Apr 2023 01:52:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी सांसद ने कहा, अमेरिका को चीन से निपटने के लिए भारत के मदद की  जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>अमेरिकी सांसद चक शूमर ने सोमवार को अपने सहकर्मियों से कहा कि भारत यकीनन एक ऐसा साझेदार है जिसकी अमेरिका को चीन से निपटने के लिए जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस तथ्य की सराहना करते हैं कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों को चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के आधिपत्य के खिलाफ मिलकर काम करने की जरूरत है। सीनेटर शूमर हाल ही में भारत, पाकिस्तान, जर्मनी और इज़राइल सहित अन्य देशों की यात्रा से लौटे हैं जहां उन्होंने नौ सीनेटर के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।</p>
<p>शूमर ने सदन में एक भाषण</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127659/us-mp-said-america-needs-indias-help-to-deal-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-02/1550.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>अमेरिकी सांसद चक शूमर ने सोमवार को अपने सहकर्मियों से कहा कि भारत यकीनन एक ऐसा साझेदार है जिसकी अमेरिका को चीन से निपटने के लिए जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस तथ्य की सराहना करते हैं कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों को चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के आधिपत्य के खिलाफ मिलकर काम करने की जरूरत है। सीनेटर शूमर हाल ही में भारत, पाकिस्तान, जर्मनी और इज़राइल सहित अन्य देशों की यात्रा से लौटे हैं जहां उन्होंने नौ सीनेटर के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।</p>
<p>शूमर ने सदन में एक भाषण में अपने सहकर्मियों से कहा, ‘‘ हमने भारत के प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक के दौरान महत्वपूर्ण संदेश दिया। चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) को टक्कर देने के लिए भारत और अमेरिका को एक-दूसरे की जरूरत पड़ने वाली है। भारत यकीनन वह भागीदार है जिसकी अमेरिका को सीसीपी की शत्रुतापूर्ण रणनीति से निपटने के लिए जरूरत है। वे (अमेरिका और भारत) दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, अपने साथियों की तुलना में अब भी युवा हैं और आने वाले दशकों में जबरदस्त विकास के लिए तैयार हैं।''</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने प्रधानमंत्री से कहा कि यदि हमारे लोकतंत्र को इस शताब्दी में समृद्ध होना है, तो हमें न केवल अपनी साझा रक्षा को बढ़ावा देने के लिए बल्कि हमारी पारस्परिक समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए भी मिलकर काम करना होगा। इसका मतलब है कि हमारे आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, व्यापार को बढ़ाने और विदेशों से प्रतिभाशाली लोगों का हमारे देश में काम करने के लिए आना आसान बनाने के वास्ते मिलकर काम करना होगा।'' सीनेटर रॉन वाइडन, जैक रीड, मारिया कैंटवेल, एमी क्लोबुचर, मार्क वार्नर, गैरी पीटर्स, कैथरीन कोर्टेज़-मास्टो और पीटर वेल्च भी इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे।  </p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Feb 2023 10:53:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका के बाद कनाडा ने भी दिया चीन को बड़ा झटका, टिकटॉक पर लगाया प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>व्हाइट हाउस ने संघीय एजेंसियों को सभी सरकारी उपकरणों से ‘टिकटॉक' को पूरी तरह हटाने के लिए 30 दिन का समय दिया है। वहीं कनाडा ने सरकार के सभी मोबाइल उपकरणों में ‘टिकटॉक' पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। चीन की इस वीडियो ऐप को लेकर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच ये फैसले किए गए हैं। अमेरिका में प्रबंधन एवं बजट कार्यालय ने सोमवार को जारी किए गए दिशानिर्देशों को ‘‘संवेदनशील सरकारी डेटा के लिए ऐप द्वारा पेश किए जा रहे जोखिमों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम'' बताया है।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127658/after-america-canada-also-gave-a-big-blow-to-china"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-02/1549.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>व्हाइट हाउस ने संघीय एजेंसियों को सभी सरकारी उपकरणों से ‘टिकटॉक' को पूरी तरह हटाने के लिए 30 दिन का समय दिया है। वहीं कनाडा ने सरकार के सभी मोबाइल उपकरणों में ‘टिकटॉक' पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। चीन की इस वीडियो ऐप को लेकर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच ये फैसले किए गए हैं। अमेरिका में प्रबंधन एवं बजट कार्यालय ने सोमवार को जारी किए गए दिशानिर्देशों को ‘‘संवेदनशील सरकारी डेटा के लिए ऐप द्वारा पेश किए जा रहे जोखिमों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम'' बताया है।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय सहित कुछ एजेंसियां पहले ही इस पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं। दिशा-निर्देशों में संघीय सरकार की बाकी एंजेसियों को 30 दिन के भीतर इसे पूरी तरह हटाने को कहा गया है। व्हाइट हाउस पहले से ही अपने उपकरणों पर ‘टिकटॉक' के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देता है। चीन की इंटरनेट प्रौद्योगिकी कंपनी ‘बाइटडांस लिमिटेड' की ऐप ‘टिकटॉक' बेहद लोकप्रिय है और अमेरिका में करीब दो-तिहाई किशोरों द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाता है।</p>
<p>वहीं, कनाड के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सरकार द्वारा जारी सभी मोबाइल उपकरणों पर टिकटॉक के प्रतिबंध की घोषणा करते हुए कहा कि यह कार्रवाई महज शुरुआत है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि जिस तरह से सरकार ने सभी संघीय कर्मचारियों को यह बताने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है कि वे अब अपने काम के फोन पर टिकटॉक का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, ऐसे कई अन्य कनाडाई अपने स्वयं के डेटा की सुरक्षा पर विचार करेंगे और शायद यही (टिकटॉक इस्तेमाल न करने का) विकल्प चुनें।'' ऐप को मंगलवार को कनाडा सरकार के फोन से हटा दिया जाएगा। इससे पहले यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखा ने पिछले सप्ताह कहा था कि उसने साइबर सुरक्षा उपाय के रूप में कर्मचारियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फोन में टिकटॉक पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/127658/after-america-canada-also-gave-a-big-blow-to-china</link>
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                <pubDate>Tue, 28 Feb 2023 10:48:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तर कोरिया ने अपनी सबसे ताकतवर मिसाइल का किया परीक्षण, जापान-दक्षिण कोरिया ने जताया ऐतराज</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>उत्तर कोरिया ने शनिवार को लंबी दूरी की संदिग्ध मिसाइल अपनी राजधानी से समुद्र में दागी । दक्षिण कोरिया और जापान ने उत्तर कोरिया के इस मिसाइल परीक्षण को लेकर कड़ा एतराज जताया है।  उत्तर कोरिया की यह मिसाइल जापान के नजदीक समुद्र में गिरी । दक्षिण कोरिया द्वारा अमेरिका के साथ सैन्य अभ्यास की घोषणा पर उत्तर कोरिया के रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई धमकी के एक दिन बाद यह संदिग्ध मिसाइल दागी गई है। दक्षिण कोरिया की सेना ने इसकी पुष्टि की है।   ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने  बताया कि बैलिस्टिक मिसाइल स्थानीय समयानुसार अपराह्न पांच</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127470/north-korea-tests-its-most-powerful-missile-japan-south-korea-objected"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-02/1510.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>उत्तर कोरिया ने शनिवार को लंबी दूरी की संदिग्ध मिसाइल अपनी राजधानी से समुद्र में दागी । दक्षिण कोरिया और जापान ने उत्तर कोरिया के इस मिसाइल परीक्षण को लेकर कड़ा एतराज जताया है।  उत्तर कोरिया की यह मिसाइल जापान के नजदीक समुद्र में गिरी । दक्षिण कोरिया द्वारा अमेरिका के साथ सैन्य अभ्यास की घोषणा पर उत्तर कोरिया के रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई धमकी के एक दिन बाद यह संदिग्ध मिसाइल दागी गई है। दक्षिण कोरिया की सेना ने इसकी पुष्टि की है।   ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने  बताया कि बैलिस्टिक मिसाइल स्थानीय समयानुसार अपराह्न पांच बजकर 22 मिनट पर सुनान इलाके से दागी गई जो प्योंगयांग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नजदीक है। </p>
<p>दक्षिण कोरिया द्वारा अमेरिका के साथ प्योंगयांग के खिलाफ अपनी तैयारी को चुस्त दुरस्त करने के लिए सैन्य अभ्यास की श्रृंखला की घोषणा की गई जिसके बाद उत्तर कोरिया ने चेतावनी दी थी की कि वह ‘अभूतपूर्व' कार्रवाई करेगा। जापान के उप रक्षामंत्री तोशिरो इनो ने कहा कि मिसाइल के जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र में ओशिमा द्वीप के पश्चिम तटी से करीब 200 किलोमीटर दूर गिरने की आशंका है।  मिसाइल परीक्षण के बाद जापानी अधिकारियों ने कहा कि यह लॉन्च होने के एक घंटे से अधिक समय बाद जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र के अंदर समुद्र में गिर गया। जापान ने दावा किया है कि यह हथियार उत्तर कोरिया की सबसे बड़ी मिसाइलों में से एक था। यह 1 जनवरी के बाद उत्तर कोरिया का पहला मिसाइल परीक्षण था।</p>
<p> </p>
<p>ओशिमा होक्काइदो मुख्य द्वीप के उत्तर में स्थित है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम सूचना प्राप्त करने और आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और अपने लोगों के जानमाल की रक्षा के लिए सतर्कता व निगरानी उपाय कर रहे हैं।'' गौरतलब है कि एक जनवरी के बाद यह उत्तर कोरिया द्वारा पहला ज्ञात मिसाइल परीक्षण है। एक जनवरी को उसने कम दूरी की मिसाइल दागी थी।  प्योंगयांग ने प्रतद्वंद्वियों को अपराधी करार देते हुए आरोप लगाया था कि वे जानबूझकर क्षेत्र की शांति और स्थिरता भंग कर रहे हैं।  </p>
<p> </p>
<p>उत्तर कोरिया ने रविवार को कहा कि अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के उसके नवीनतम परीक्षण का उद्देश्य प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ “घातक” परमाणु हमले की अपनी क्षमता को और बढ़ाना है। उत्तर कोरिया ने अमेरिका व दक्षिण कोरिया के बीच प्रस्तावित सैन्य अभ्यास के जवाब में अतिरिक्त शक्तिशाली कदम उठाने की धमकी भी दी। इससे संकेत मिलता है कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन अपने प्रतिद्वंद्वियों के सैन्य अभ्यास का उपयोग अपने देश की परमाणु क्षमता का विस्तार करने के अवसर के रूप में कर रहे हैं ताकि अमेरिका के साथ भविष्य में होने वाले समझौतों में इसका लाभ उठाया जा सके।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/127470/north-korea-tests-its-most-powerful-missile-japan-south-korea-objected</link>
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                <pubDate>Sun, 19 Feb 2023 16:01:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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