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                <title>RSS Volunteers - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>विश्व योग दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विशाल योग कार्यक्रम का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /></p><blockquote class="format1"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लखनऊ</span></strong>,  </blockquote><p><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर भाग के महाराजा सुहेलदेव नगर द्वारा श्रीराम शाखा पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्रीराम अकैडमी इंटर कॉलेज परिसर में संपन्न हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें समाज के सैकड़ों नागरिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघ के स्वयंसेवकों एवं पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं श्रीराम अकैडमी इंटर कॉलेज के प्रबंधक</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रवण मिश्रा</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत पुनः विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि भारत की प्राचीन योग परंपरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग चिकित्सा एवं योग</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181921/rashtriya-swayamsevak-sangh-organizes-huge-yoga-program-on-world-yoga"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/whatsapp-image-2026-06-21-at-15.08.50-(1)-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p><br /></p><blockquote class="format1"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लखनऊ</span></strong>,  </blockquote><p><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर भाग के महाराजा सुहेलदेव नगर द्वारा श्रीराम शाखा पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्रीराम अकैडमी इंटर कॉलेज परिसर में संपन्न हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें समाज के सैकड़ों नागरिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघ के स्वयंसेवकों एवं पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं श्रीराम अकैडमी इंटर कॉलेज के प्रबंधक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रवण मिश्रा</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत पुनः विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि भारत की प्राचीन योग परंपरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग चिकित्सा एवं योग पद्धति को आज पूरा विश्व अपना रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वभर के लोग भारतीय सनातन संस्कृति और उसकी परंपराओं को जानने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझने और अपनाने के लिए उत्सुक हैं।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-21-at-15.08.50-(1)-(1).jpeg" alt="विश्व योग दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विशाल योग कार्यक्रम का आयोजन" width="1080" height="810"></img></span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को संगठित रहने की आवश्यकता है और योग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण माध्यम सिद्ध हो रहा है। योग से तन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन और मस्तिष्क स्वस्थ रहते हैं तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक इस कार्य को कुशलतापूर्वक समाज तक पहुंचा रहे हैं।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-21-at-15.08.50.jpeg" alt="विश्व योग दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विशाल योग कार्यक्रम का आयोजन" width="1080" height="810"></img></span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह जिला बौद्धिक प्रमुख</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">त्रियुगी नाथ</span></strong>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नगर संघ चालक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">संतोष</span></strong>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सह नगर संघ चालक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्यामू</span></strong>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाग सद्भाव संयोजक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सुधीर</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तथा नगर समरसता प्रमुख</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विनोद</span></strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यक्रम में नगर समरसता प्रमुख</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विनोद </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ने उपस्थित सभी आगंतुकों को विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया तथा योग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का समापन स्वस्थ एवं जागरूक समाज के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:20:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महती भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत आज दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा है। जब देशवासी अपने देश की तरक्की की बातें सुनते हैं तो बेशक उन्हें बड़ी खुशी और गर्व होता है। भारत की इस विकास यात्रा में केंद्र व राज्यों की सरकारों के साथ-साथ देश के नागरिकों का भी अपना अथाह योगदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी तो आज हम दुनिया की तीसरी बड़ी महाशक्ति बनकर उभर रहे हैं। भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी महती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नकारा नहीं जा सकता है। बेशक कुछ संघ-विरोधी विचारधारा वाले लोगों को देश की विकास यात्रा में</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180815/important-role-of-rashtriya-swayamsevak-sangh-in-indias-development-journey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/rss-shatabdi-varsh-jan-sampark-abhiyaan-history.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत आज दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा है। जब देशवासी अपने देश की तरक्की की बातें सुनते हैं तो बेशक उन्हें बड़ी खुशी और गर्व होता है। भारत की इस विकास यात्रा में केंद्र व राज्यों की सरकारों के साथ-साथ देश के नागरिकों का भी अपना अथाह योगदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी तो आज हम दुनिया की तीसरी बड़ी महाशक्ति बनकर उभर रहे हैं। भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी महती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नकारा नहीं जा सकता है। बेशक कुछ संघ-विरोधी विचारधारा वाले लोगों को देश की विकास यात्रा में संघ का योगदान अचरज भरा भी लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के योगदान को यह देश कभी भुला नहीं पाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के उस वक्त को याद कर कल्पना करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ तथाकथित सत्ता-स्वार्थी राजनेताओं की हुक्मरान बनने की चाहत के चलते जिस देश की आजादी धर्म के नाम पर की गई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ कितना खून-खराबा अपनों का अपनों के ही हाथों हुआ होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान के उदय के साथ ही लाहौर से लेकर कराची तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्वी-पश्चिमी सीमाओं तक बसने वाले हिंदुओं के कत्लेआम की जो दास्तां देश ने देखी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी कल्पना मात्र से आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं और शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी से पहले भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखंड भारत की कल्पना को साकार करने की अलख जगाने के लिए लोगों को जागरूक कर रहा था। कई मौकों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जन्मदाता और तत्कालीन प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ ने भी देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सभी बड़े तत्कालीन नेताओं से अखंड भारत बनाए रखने की लड़ाई लड़ने की बात कही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन संघ विरोधी मानसिकता वाले कुछ लोगों ने हर बार संघ की बातों को नजरअंदाज करते हुए मुस्लिम लीग के जिन्ना की जिद के आगे नतमस्तक होकर आखिरकार अखंड भारत को धर्म के नाम पर टुकड़ों में बांट दिया था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्ना की मुस्लिम लीग के समर्थक गुंडों और पाकिस्तानी फौजी सिपाहियों ने पाकिस्तान के हर हिस्से में रह रहे हिंदुओं को वहाँ से भागने के लिए उन पर रक्तरंजित अत्याचार ही नहीं किए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हिंदू बेटियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहुओं और माताओं की अस्मिता को भी सरेआम लूटकर तार-तार किया था। पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान में हिंदुओं की लाशों के ढेर इस बात के सबूत थे कि हिंदुओं के प्रति जिन्ना और उसके गुंडों ने सत्ता की लालच में लोगों के बीच कितना जहर भरा था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के उस रक्तरंजित दौर में पाकिस्तान में सबसे पहले हिंदू माँ-बहनों और बेटियों की अस्मिता को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता ही आगे आए और जिन्ना के गुंडों तथा उसके सिपाहियों से अपनी जान की बाजी लगाकर जितना हो सकता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतने हिंदुओं को बचाने का भरसक प्रयास भी किया था। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विभाजन की त्रासदी से अपनी ही जमीन से बेदखल किए गए हिंदुओं की मदद हेतु जगह-जगह राहत शिविर खोलकर पाकिस्तान से बेदखल और प्रताड़ित किए गए हिंदुओं तथा उनके परिजनों को न केवल सुरक्षा दी</span>,</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वयंसेवकों ने बिना सरकारी मदद के अपने दम पर महीनों तक उन हिंदुओं के भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी और स्वास्थ्य की भी व्यवस्था की थी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह तो देश जानता है कि विभाजन के उस कठिन दौर में कैसे आरएसएस के स्वयंसेवकों ने पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं को बचाया था। आजादी के दौर के बहुत से लोगों का मानना है कि यदि आजादी के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हिंदुओं को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी नहीं लगाते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जिन्ना के गुंडे और गुंडागर्दी पर उतारू उसकी सेना नफरत की आग में पाकिस्तान से समूची हिंदू कौम का ही सर्वनाश कर देते।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की आजादी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीयों में एकजुटता बनी रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस महान उद्देश्य को लेकर बिना प्रचार-प्रसार के अपने कार्यकर्ताओं के बूते अलख जगाए रखी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी परिणति यह है कि भारत आज दुनिया की महाशक्तियों को अपने आगे झुकाने वाला देश बन गया है। देश में जब-जब भी विपदाएँ आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब-तब सरकार से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता निस्वार्थ भाव से अपनी जान की परवाह किए बिना विपदाओं में उम्मीदों का सहारा बनकर खड़े हुए हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा किए गए कार्यों की विपक्ष के नेता तक खुले मन से प्रशंसा करते रहे हैं। देश में जब भी कहीं भीषण बाढ़ आई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूखा पड़ा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूकंप की त्रासदी हुई हो या फिर कोई गंभीर बीमारी ही क्यों न फैली हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यकर्ता देश में आई हर विपदा में सबसे पहले सहारा बनकर खड़ा हो जाता है और बिना जाति-धर्म पूछे अपनी जान की बाजी लगाकर सेवा कार्यों में जुट जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस देश को जोड़ने और मजबूती प्रदान करने वाला संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बिना जाति-धर्म का भेद किए देश के हर वर्ग और समाज के विकास में सहयोग प्रदान करता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस का दायरा समूचा देश और देश में रहने वाले सभी जाति-धर्मों के लोगों के बीच मानवीय प्रेम और राष्ट्रीय एकता बनी रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी महान उद्देश्य को लेकर दिन-रात उसके स्वयंसेवक कार्य करते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एकमात्र ऐसा संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपने किए गए कार्यों का कभी दिखावा नहीं करता और न कभी अपना बखान करता है। देश की सेहत देखकर ही संघ की सक्रियता समझी जा सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश यदि आज दुनिया में सिरमौर बन रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसमें आरएसएस की भूमिका को भी खुले मन से स्वीकारना होगा। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रहित को समर्पित संगठन आरएसएस के करोड़ों कार्यकर्ता बेहद अनुशासित तरीके से अपने सरसंघचालक के हर शब्द को अपना सर्वस्व त्याग कर निस्वार्थ भाव से पूर्ण करते हैं। यह संघ के सरसंघचालक के तपोबल का ही परिणाम है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्री मोहन भागवत छठे सरसंघचालक हैं। इससे पूर्व डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुकर दत्तात्रेय देवरस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. राजेंद्र सिंह ‘रज्जू भैया’ और के. एस. सुदर्शन जी के त्याग और अनुशासन से संघ दुनिया भर के देशों में अपनी जड़ें मजबूती से जमाए हुए मानवीय सेवा के कार्यों हेतु समर्पित है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय राजनीति के कुछ अवसरवादी सत्ता-स्वार्थी नेताओं ने अपने वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में आरएसएस को देश-विरोधी संगठन बताने से भी गुरेज नहीं किया है। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ राजनीतिक दलों ने सत्ता में आने के बाद जाति-धर्म के वोट बैंक के सहारे सत्ता में बने रहने की चाहत में अपने-अपने राज्यों में आरएसएस पर प्रतिबंध भी लगा दिया था और आरएसएस से संबंध रखने वाले भारतीयों को प्रताड़ित भी किया जाता था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कुछ राज्यों में आज भी आरएसएस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर बंदिशें लगाई गई हैं। वर्तमान में राजनीति से जुड़े कुछ लोगों ने एक विशेष वर्ग के वोट बैंक पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए आरएसएस को केवल हिंदुओं का संगठन बता कर उसके खिलाफ आए दिन जहर उगला है। बेशक आरएसएस एक हिंदुत्ववादी विचारधारा वाला संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका महान उद्देश्य सभी धर्मों और जातियों के लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत कर राष्ट्र को एकजुट और मजबूत बनाना है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस की विचारधारा के विरोधी जो भी लोग आज राजनीति में मौजूद होकर जात-पात की राजनीति करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री जी से सीखना चाहिए कि उन्होंने देशहित के कार्यों में आरएसएस की दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समय-समय पर प्रशंसा भी की है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्तमान सरसंघचालक श्री मोहन भागवत देश के सभी वर्गों और धर्मों के प्रमुखों के साथ मिलकर संघ के प्रति राजनीतिक दलों द्वारा जो दूषित धारणाएँ फैलाई गई थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें बहुत हद तक दूर कर संघ के सच्चे राष्ट्र हित के उद्देश्य से परिचित करवाकर अन्य धर्मों को भी संघ की विचारधारा से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश इस वर्ष विजयादशमी के अवसर पर आरएसएस की स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के मार्गदर्शन में देशभर में संघ के कार्यों से देश की नई पीढ़ी को अवगत कराने के कार्यक्रम जारी हैं। आरएसएस एक ऐसा सामाजिक संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जाति-धर्म के नाम पर टुकड़ों में बंटे और बिखरे लोगों को एकजुट करता है तथा उनमें अपने राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा के लिए व्यक्ति निर्माण से लेकर राष्ट्र निर्माण तक का पाठ सिखाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस की स्थापना भी सन </span>1925 <span lang="hi" xml:lang="hi">में विजयादशमी के दिन डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा इसी महान उद्देश्य को लेकर की गई थी। अपने सौ वर्षों के सफर में आरएसएस अपने कार्यकर्ताओं के समर्पण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्याग और अनुशासन के बल पर आज एक वटवृक्ष बनकर दुनिया के अस्सी से ज्यादा देशों में फैल चुका है।</span>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरसंघचालक श्री मोहन भागवत की अगुवाई में संघ अपना सौवां जन्मोत्सव पिछली विजयादशमी को मनाया गया उस ऐतिहासिक पल का समूचा दे साक्षी बना!  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को पूरे वर्ष देशभर में हर्षोल्लास से मनाएगा और कार्यक्रमों के माध्यम से देश के विकास में संघ की भूमिका से उसके त्याग बलिदान और कर्तव्य निष्ठा से नवपीढ़ी को परिचित भी करवाएगा।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:29:02 +0530</pubDate>
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