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                <title>Independent Foreign Policy - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>क्या पुतिन ने एक वाक्य में बदलती दुनिया का सच कह दिया?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास के कठिन दौर ही रिश्तों की असली परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत को </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक” बताना महज़ कूटनीतिक वाक्य नहीं है। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को सेंट पीटर्सबर्ग में दिया गया उनका बयान ऐसे समय आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया नए राजनीतिक खाँचों में बँटती दिख रही है। प्रतिबंधों से घिरा रूस अपने विश्वसनीय मित्रों को पहचान रहा है और भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति से अलग सम्मान पा रहा है। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180810/did-putin-tell-the-truth-of-the-changing-world-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/_113223674_gettyimages-1223723529.jpg.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास के कठिन दौर ही रिश्तों की असली परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत को </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक” बताना महज़ कूटनीतिक वाक्य नहीं है। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को सेंट पीटर्सबर्ग में दिया गया उनका बयान ऐसे समय आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया नए राजनीतिक खाँचों में बँटती दिख रही है। प्रतिबंधों से घिरा रूस अपने विश्वसनीय मित्रों को पहचान रहा है और भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति से अलग सम्मान पा रहा है। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए भारत पर पश्चिमी दबाव को “निष्फल और प्रतिकूल” बताया। यह केवल मित्रता की प्रशंसा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत के बढ़ते महत्व की स्वीकारोक्ति है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय संबंधों में शब्द अक्सर परिस्थितियों का आईना होते हैं। पुतिन की भारत-प्रशंसा को भी इसी संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए। यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस पश्चिमी प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे समय में भारत उन विरले देशों में रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार रूस से संबंध बनाए रखे। न उसने किसी दबाव के आगे झुकना स्वीकार किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न अपनी विदेश नीति का मार्ग बदला। पुतिन भलीभांति समझते हैं कि भारत जैसा मित्र केवल आर्थिक सहयोगी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि कूटनीतिक संबल भी है। इसलिए उनका यह बयान प्रशंसा से अधिक उस विश्वास की अभिव्यक्ति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर रूस भविष्य की अपनी रणनीति का एक महत्वपूर्ण आधार देखता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पुतिन के बयान का एक संभावित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संकेत चीन की ओर भी है। रूस और चीन भले ही अटूट साझेदारी का दावा करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनके संबंधों में रणनीतिक सतर्कता बनी रहती है। चीन की बढ़ती आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी और सैन्य शक्ति ने एशिया का शक्ति-संतुलन बदल दिया है। मॉस्को समझता है कि बीजिंग पर अत्यधिक निर्भरता उसकी स्वतंत्र भूमिका को सीमित कर सकती है। ऐसे में भारत के साथ मजबूत संबंध उसे संतुलन देते हैं। यही कारण है कि पुतिन ने ब्रह्मोस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा सहयोग और उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी साझेदारी का विशेष उल्लेख किया। इसे मुख्य रूप से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चीन के विरुद्ध संदेश न मानकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एशिया में शक्ति-संतुलन साधने की रूस की दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की विदेश नीति की सबसे बड़ी पहचान उसकी स्वतंत्रता है। यही कारण है कि रूस के राष्ट्रपति</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">व्लादिमीर पुतिन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने भारत पर पड़ रहे अमेरिकी दबाव के बीच उसकी नीति की सराहना की। अमेरिका लंबे समय से रूस से जुड़े ऊर्जा और रक्षा संबंधों को लेकर भारत को अपने अधिक निकट लाने का प्रयास करता रहा है। इसके बावजूद नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि उसके निर्णय राष्ट्रीय हितों से संचालित होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी बाहरी दबाव से नहीं। पुतिन ने इसी आत्मविश्वास की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत जैसे उभरते राष्ट्र पर दबाव डालना उलटा पड़ सकता है। उनका संदेश केवल वाशिंगटन के लिए नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी दुनिया के लिए था कि भारत अब अपनी राह स्वयं तय करने वाली शक्ति है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक शक्ति उसका संतुलित और स्वतंत्र दृष्टिकोण है। भारत एक ओर रूस से ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा उपकरण और सामरिक सहयोग प्राप्त कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर अमेरिका के साथ तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेश और सुरक्षा साझेदारी भी मजबूत कर रहा है। चीन से प्रतिस्पर्धा के बावजूद व्यापारिक संबंध भी बने हुए हैं। यही संतुलन भारत को वैश्विक राजनीति में अलग पहचान देता है। पुतिन ने मोदी सरकार की आर्थिक उपलब्धियों और तेज विकास दर की सराहना करते हुए संकेत दिया कि भारत अब किसी शक्ति-गुट का अनुसरण करने वाला देश नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विश्व राजनीति का एक स्वतंत्र और प्रभावशाली शक्ति केंद्र बन चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत-रूस संबंध अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी नई मजबूती हासिल कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष </span>2024-25 <span lang="hi" xml:lang="hi">में दोनों देशों का व्यापार लगभग </span>68.7 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर तक पहुंच गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें रूसी तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गैस और कोयले की प्रमुख भूमिका रही। पुतिन द्वारा </span>100 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य का उल्लेख इस बात का संकेत है कि रूस भारत को केवल मित्र नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक साझेदार मानता है। ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परमाणु सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा उत्पादन और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच दोनों देश एक-दूसरे की क्षमताओं को अपने विकास का महत्वपूर्ण आधार मान रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रता जितनी गहरी होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी चुनौतियां भी उतनी ही वास्तविक होती हैं। भारत-रूस संबंधों के सामने भी व्यापार असंतुलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भुगतान व्यवस्था की बाधाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा खरीद में भारत की नई प्राथमिकताएं और रूस-चीन की बढ़ती निकटता जैसे प्रश्न मौजूद हैं। इसलिए पुतिन ने भारत-चीन सीमा पर तनाव कम करने के प्रयासों का स्वागत किया। यह केवल एक टिप्पणी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि रूस का यह संदेश था कि वह एशिया में स्थिरता और संतुलन का पक्षधर है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह यह भरोसा भी दिलाना चाहता है कि चीन से उसके संबंध भारत के हितों की कीमत पर नहीं हैं। भारत के लिए यह आश्वासन महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि उसकी विदेश नीति का आधार केवल राष्ट्रीय हित हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व राजनीति में कुछ वक्तव्य तत्कालीन घटनाओं से आगे जाकर भविष्य की दिशा भी बताते हैं। पुतिन का भारत को “भरोसेमंद साझेदार” कहना ऐसा ही संकेत है। यह केवल भारत-रूस संबंधों की निकटता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आकार ले रही नई वैश्विक व्यवस्था की झलक है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एकध्रुवीय प्रभुत्व का दौर पीछे छूट रहा है और नई शक्तियां उभर रही हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रिक्स का विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक दक्षिण का बढ़ता प्रभाव और भारत की भूमिका इसी परिवर्तन के संकेत हैं। रूस का यह सार्वजनिक विश्वास एक स्पष्ट संदेश देता है—भारत अब किसी समीकरण का हिस्सा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वयं एक निर्णायक समीकरण है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए पुतिन का यह बयान केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था की स्पष्ट स्वीकारोक्ति है।</span></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:20:08 +0530</pubDate>
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