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                <title>Rural Economy - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Rural Economy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शहरों की बसाहट के पीछे विलुप्त होती मूल ग्रामीण संस्कृती</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जोसेफ स्टिग्लिट्ज़ ने कहा है कि अनियोजित शहरीकरण आर्थिक अवसर तो देता है,लेकिन यदि ग्रामीण क्षेत्रों का संतुलित विकास नहीं किया जाए तो सामाजिक असंतुलन और सांस्कृतिक क्षरण अपरिहार्य हो जाता है। भारत में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधुनिक सुविधाओं की तलाश में लाखों लोग प्रतिवर्ष गाँवों से शहरों की ओर पलायन करते हैं। यह पलायन केवल जनसंख्या का स्थानांतरण नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों का भी परिवर्तन है। </p><p style="text-align:justify;">शहरों की भागदौड़, प्रतिस्पर्धा और उपभोक्तावादी जीवनशैली में संयुक्त परिवार टूट रहे हैं, पारंपरिक रीति-रिवाज कमजोर पड़ रहे हैं और लोककलाएँ धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रही हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183432/the-original-rural-culture-is-disappearing-behind-the-settlement-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(1)7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जोसेफ स्टिग्लिट्ज़ ने कहा है कि अनियोजित शहरीकरण आर्थिक अवसर तो देता है,लेकिन यदि ग्रामीण क्षेत्रों का संतुलित विकास नहीं किया जाए तो सामाजिक असंतुलन और सांस्कृतिक क्षरण अपरिहार्य हो जाता है। भारत में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधुनिक सुविधाओं की तलाश में लाखों लोग प्रतिवर्ष गाँवों से शहरों की ओर पलायन करते हैं। यह पलायन केवल जनसंख्या का स्थानांतरण नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों का भी परिवर्तन है। </p><p style="text-align:justify;">शहरों की भागदौड़, प्रतिस्पर्धा और उपभोक्तावादी जीवनशैली में संयुक्त परिवार टूट रहे हैं, पारंपरिक रीति-रिवाज कमजोर पड़ रहे हैं और लोककलाएँ धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनेक अवसरों पर कहा है, "भारत का विकास तभी संभव है जब गाँवों का विकास होगा।" उनकी 'आत्मनिर्भर भारत', 'डिजिटल इंडिया', 'स्मार्ट विलेज' और 'वाइब्रेंट विलेज' जैसी अवधारणाएँ इसी सोच को आगे बढ़ाती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाएँ मिलें, लेकिन उनकी सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे।<br /></p><p style="text-align:justify;">पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने अपने "पूरा मॉडल" जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधा उपलब्ध करने की बात कही में स्पष्ट कहा था कि ग्रामीण क्षेत्रों में शहर जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ ताकि लोगों को पलायन के लिए विवश न होना पड़े। उनका विश्वास था कि यदि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक गाँवों तक पहुँचेगी, तो भारत का संतुलित विकास संभव होगा।<br /></p><p style="text-align:justify;">भारत को सदियों से गाँवों का देश कहा जाता रहा है। गाँव केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, परंपरा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता की जीवंत प्रयोगशाला रहे हैं। कभी गाँवों की चौपालें संवाद का केंद्र थीं, खेत-खलिहान जीवन का आधार थे, लोकगीत और लोकनृत्य संस्कृति की पहचान थे, और आपसी सहयोग जीवन की सबसे बड़ी पूँजी था। किंतु पिछले कुछ दशकों में तीव्र शहरीकरण, औद्योगीकरण और आर्थिक अवसरों की तलाश ने ग्रामीण संस्कृति की जड़ों को कमजोर कर दिया है। </p><p style="text-align:justify;">शहरों का लगातार विस्तार गाँवों की जमीन ही नहीं, उनकी आत्मा को भी अपने भीतर समेटता जा रहा है। महात्मा गांधी ने कहा था, "भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है।" यह कथन आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है। यदि गाँव अपनी सांस्कृतिक पहचान खो देंगे, तो भारत की मौलिक पहचान भी धीरे-धीरे धुंधली पड़ जाएगी। प्रख्यात अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का मानना है कि किसी भी राष्ट्र का विकास तभी सार्थक है जब वह आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को भी समान महत्व दे। केवल शहरों में विकास केंद्रित होने से असमानता बढ़ती है और ग्रामीण समाज अपनी मौलिकता खोने लगता है।<br /></p><p style="text-align:justify;">पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे कि "मजबूत गाँव ही मजबूत भारत की नींव हैं।" यह विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है क्योंकि केवल महानगरों का विकास किसी राष्ट्र को समृद्ध नहीं बना सकता।ग्रामीण संस्कृति केवल खेती तक सीमित नहीं है। यह लोकभाषाओं, लोकसंगीत, हस्तशिल्प, पारंपरिक कृषि ज्ञान, सामुदायिक जीवन, प्रकृति के प्रति सम्मान और मानवीय संबंधों की संस्कृति है। जब गाँव शहरों में बदलते हैं, तब खेतों की जगह कंक्रीट के जंगल उग आते हैं। तालाब मिट जाते हैं, चौपालें समाप्त हो जाती हैं और बच्चों के खेल मोबाइल स्क्रीन तक सीमित हो जाते हैं। अर्थशास्त्री ई. एफ. शूमाकर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "स्माल इस ब्यूटीफुल" में लिखा था कि विकास का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि मनुष्य और समाज को अधिक मानवीय बनाना होना चाहिए। यदि विकास मनुष्य को उसकी संस्कृति और प्रकृति से दूर कर दे, तो वह अधूरा विकास है।<br /></p><p style="text-align:justify;">विकास और संस्कृति के बीच संतुलन स्थापित किया जाने की नितांत आवश्यकता है । गाँवों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, इंटरनेट, उद्योग, कृषि प्रसंस्करण, कुटीर उद्योग, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएँ। साथ ही लोककलाओं, लोकभाषाओं, लोकपर्वों और पारंपरिक ज्ञान को विद्यालयों और सामाजिक जीवन में सम्मानपूर्वक स्थान दिया जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020-21 भी भारतीय भाषाओं, स्थानीय ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विशेष बल देती है। यदि शिक्षा अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगी, तो नई पीढ़ी आधुनिक भी बनेगी और अपनी सांस्कृतिक पहचान भी नहीं भूलेगी।<br /></p><p style="text-align:justify;">आज अनेक गाँव शहरों के विस्तार में समाहित होकर अपनी पहचान खो चुके हैं। वहाँ अब खेतों की जगह कॉलोनियाँ हैं, बैलगाड़ियों की जगह वाहनों की भीड़ है, और लोकगीतों की जगह शोरगुल ने ले ली है। आधुनिकता का विरोध नहीं किया जा सकता, लेकिन आधुनिकता का अर्थ अपनी जड़ों से कट जाना भी नहीं होना चाहिए। अंततः यह समझना होगा कि शहर किसी राष्ट्र की आर्थिक शक्ति हो सकते हैं, लेकिन गाँव उसकी सांस्कृतिक चेतना हैं। यदि आर्थिक विकास की दौड़ में ग्रामीण संस्कृति समाप्त हो गई, तो आने वाली पीढ़ियाँ आधुनिक तो होंगी, किंतु अपनी पहचान से अनभिज्ञ रह जाएँगी।<br /></p><p style="text-align:justify;">इसलिए आवश्यक है कि विकास की प्रत्येक योजना में ग्रामीण संस्कृति के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए। शहरों का विस्तार हो, पर गाँवों की आत्मा सुरक्षित रहे। यही संतुलित विकास भारत को आर्थिक रूप से समृद्ध, सांस्कृतिक रूप से सशक्त और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण राष्ट्र बनाएगा। आखिरकार, जिस देश के गाँव जीवित रहते हैं, वही देश अपनी सभ्यता को लंबे समय तक सुरक्षित रख पाता है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 21:56:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वयं सहायता समूहों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती : सांसद प्रवीण पटेल।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगंज प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ग्राम विकास विभाग द्वारा विधानसभा फूलपुर के धरौली, हनुमानगंज स्थित पृथ्वी गार्डेन गेस्ट हाउस में संकुल स्तरीय आम सभा बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में फुलपुर के सांसद प्रवीण पटेल ने सहभागिता करते हुए स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण, महिला आजीविका संवर्धन तथा ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक को संबोधित करते हुए सांसद प्रवीण पटेल ने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। सरकार</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183379/rural-economy-will-get-new-strength-from-self-help-groups-mp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260714-wa0069-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगंज प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ग्राम विकास विभाग द्वारा विधानसभा फूलपुर के धरौली, हनुमानगंज स्थित पृथ्वी गार्डेन गेस्ट हाउस में संकुल स्तरीय आम सभा बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में फुलपुर के सांसद प्रवीण पटेल ने सहभागिता करते हुए स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण, महिला आजीविका संवर्धन तथा ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक को संबोधित करते हुए सांसद प्रवीण पटेल ने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए अनेक योजनाओं का संचालन कर रही है, जिनका लाभ अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि समूहों के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि गांवों के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सांसद ने समूह की महिलाओं से सरकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने, बचत एवं ऋण व्यवस्था को मजबूत करने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित करने का आह्वान किया। ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में ग्राम विकास विभाग एवं उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों ने स्वयं सहायता समूहों के संचालन, वित्तीय प्रबंधन, बैंकिंग सुविधाओं, ऋण वितरण, आजीविका गतिविधियों तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी विस्तार से दी। कार्यक्रम के दौरान समूह की महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और आजीविका से जुड़े सुझाव भी प्रस्तुत किए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं, ग्राम संगठन एवं संकुल संगठन की पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, ग्राम विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 20:25:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है: सांसद जगदंबिका पाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 50वीं वाहिनी बलरामपुर द्वारा सीमावर्ती क्षेत्र के महादेव बुजुर्ग के मानपुर गांव में गुरुवार को निःशुल्क पशु चिकित्सा का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य पशुपालकों को बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना, पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देना रहा।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। समय पर उपचार, टीकाकरण और उचित देखभाल से पशुओं की उत्पादकता बढ़ती है, जिससे पशुपालकों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में एसएसबी द्वारा संचालित जनकल्याणकारी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183054/livestock-is-the-backbone-of-rural-economy-mp-jagdambika-pal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1783607381981.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 50वीं वाहिनी बलरामपुर द्वारा सीमावर्ती क्षेत्र के महादेव बुजुर्ग के मानपुर गांव में गुरुवार को निःशुल्क पशु चिकित्सा का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य पशुपालकों को बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना, पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देना रहा।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। समय पर उपचार, टीकाकरण और उचित देखभाल से पशुओं की उत्पादकता बढ़ती है, जिससे पशुपालकों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में एसएसबी द्वारा संचालित जनकल्याणकारी गतिविधियों की सराहना करते हुए ऐसे शिविरों को बेहद उपयोगी बताया।शिविर के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा आवश्यक परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया। पशुपालकों को टीकाकरण, संतुलित आहार, स्वच्छता, रोगों की रोकथाम और वैज्ञानिक पशुपालन के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी भी दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सीवीओ एसजी एसएचक्यू गोरखपुर चंदन तालुकदार, 50वीं वाहिनी के सहायक कमांडेंट एवं मेडिकल अधिकारी अरुण चौधरी, सहायक कमांडेंट अजय कुमार, संजय के.पी.दीपक चंद,  बढ़नी नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील अग्रहरी,अनिल अग्रहरि, सूर्य प्रकाश पाण्डेय,नीलू चौधरी,बरकत, लक्की,रमेश गुप्ता,रामपाल सिंह, संजय दूबे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और पशुपालकों ने भाग लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 22:43:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विकसित गाँव ही विकसित भारत की सबसे सशक्त नींव : विधायक विनय वर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के मनुहार गांव में गुरुवार को एक पेड़ मां के नाम कार्यक्रम के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लिया। विधायक विनय वर्मा ने विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत घरुआर में आयोजित "विकसित भारत–जी-राम जी" प्रचार-प्रसार एवं जन सम्मेलन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने "विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (VB-G RAMG)" की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के वैधानिक रोजगार एवं 252 से बढ़ाकर 300 रूपए मजदूरी कर दी गई है। साथ ही</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182609/developed-villages-are-the-most-powerful-foundation-of-developed-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1783001299627-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के मनुहार गांव में गुरुवार को एक पेड़ मां के नाम कार्यक्रम के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लिया। विधायक विनय वर्मा ने विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत घरुआर में आयोजित "विकसित भारत–जी-राम जी" प्रचार-प्रसार एवं जन सम्मेलन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने "विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (VB-G RAMG)" की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के वैधानिक रोजगार एवं 252 से बढ़ाकर 300 रूपए मजदूरी कर दी गई है। साथ ही कृषि एवं भूमि सुधार, जल संरक्षण एवं अमृत सरोवर, ग्रामीण संपर्क मार्ग, कौशल विकास एवं स्वरोजगार, आवास एवं आधारभूत संरचना, वृक्षारोपण तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों को नई गति मिलेगी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विधायक ने कहा कि गांव का विकास जरूरी है। विकसित गाँव ही विकसित भारत की सबसे सशक्त नींव हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">इस योजना से ग्रामीणों को स्थायी आजीविका, महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण, पलायन में कमी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उपस्थित क्षेत्रवासियों से इस जनहितकारी योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर बीडीओ बढ़नी अनीषि मणि त्रिपाठी, प्रदीप कमलापुरी, राधेश्याम आदि लोग उपस्थित रहे।
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 19:49:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बकरी पालन व्यवसाय  ग्रामीणोंके आय का सबसे अच्छा साधन साबित हो रहा है।-डॉ. मणि शंकर द्विवेदी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के पारंपरिक साधनों का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। बदलती आर्थिक परिस्थितियों, बढ़ती बेरोजगारी और कृषि पर बढ़ते दबाव के बीच बकरी पालन ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  हाल ही में हुडसा (हयूमन अपलिफ्टमेंट, डेवलपमेंट ऐंड सोशल अवेयरनेस) द्वारा प्रयागराज के गंगापार ग्रामीण क्षेत्र में किए गए एक सर्वेक्षण में यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया कि बकरी पालन आज भी हजारों परिवारों की आर्थिक मजबूती का आधार है।सर्वेक्षण के दौरान विभिन्न गांवों में पशुपालकों, किसानों और</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गंगापार</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182009/goat-rearing-business-is-proving-to-be-the-best-source"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260623-wa0115.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के पारंपरिक साधनों का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। बदलती आर्थिक परिस्थितियों, बढ़ती बेरोजगारी और कृषि पर बढ़ते दबाव के बीच बकरी पालन ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> हाल ही में हुडसा (हयूमन अपलिफ्टमेंट, डेवलपमेंट ऐंड सोशल अवेयरनेस) द्वारा प्रयागराज के गंगापार ग्रामीण क्षेत्र में किए गए एक सर्वेक्षण में यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया कि बकरी पालन आज भी हजारों परिवारों की आर्थिक मजबूती का आधार है।सर्वेक्षण के दौरान विभिन्न गांवों में पशुपालकों, किसानों और युवाओं से बातचीत की गई। अध्ययन में पाया गया कि सीमित भूमि और संसाधनों वाले परिवारों के लिए बकरी पालन एक कम लागत वाला और लाभकारी व्यवसाय है। अनेक परिवारों ने बताया कि बकरियां उनके लिए संकट के समय आर्थिक सुरक्षा कवच का कार्य करती हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह या अन्य आवश्यकताओं के लिए जरूरत पड़ने पर बकरियों की बिक्री से तत्काल नकदी उपलब्ध हो जाती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गंगापार क्षेत्र के ग्रामीण परिवेश में बकरियां स्थानीय वनस्पतियों और प्राकृतिक चरागाहों पर आसानी से पल जाती हैं, जिससे पालन-पोषण की लागत कम रहती है। यही कारण है कि छोटे किसान और भूमिहीन परिवार भी इस व्यवसाय को आसानी से अपना सकते हैं। सर्वेक्षण में यह भी देखा गया कि ग्रामीण किशोर और युवा पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ बकरी पालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।हुडसा के अध्ययन से यह भी ज्ञात हुआ कि महिलाओं की भागीदारी बकरी पालन में लगातार बढ़ रही है। अनेक ग्रामीण परिवारों में महिलाएं बकरियों की देखभाल कर परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। यदि उन्हें प्रशिक्षण, पशु चिकित्सा सेवाएं और बाजार से जुड़ाव उपलब्ध कराया जाए तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।बकरी के मांस और दूध की बढ़ती मांग ने भी इस व्यवसाय को अधिक लाभकारी बना दिया है। स्थानीय बाजारों में बकरियों की अच्छी कीमत मिलने से पशुपालकों को नियमित आय प्राप्त होती है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन को आजीविका के प्रभावी साधन के रूप में देखा जा रहा है।</div><div style="text-align:justify;">हालांकि सर्वेक्षण में कुछ चुनौतियां भी सामने आईं, जिनमें पशुओं में रोगों का प्रकोप, गुणवत्तापूर्ण नस्लों की कमी, चारे की समस्या तथा पशु चिकित्सा सुविधाओं का अभाव प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार, गैर-सरकारी संस्थाएं और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत कार्यरत संस्थान मिलकर इस क्षेत्र में निवेश करें तो बकरी पालन ग्रामीण विकास का एक मजबूत माध्यम बन सकता है।आज जब ग्रामीण भारत रोजगार और आय के नए अवसरों की तलाश में है, तब बकरी पालन एक ऐसा क्षेत्र है जो कम निवेश में अधिक लाभ और आत्मनिर्भरता की संभावना प्रदान करता है। प्रयागराज के गंगापार क्षेत्र में सर्वेक्षण से यह स्पष्ट हुआ है कि बकरी पालन केवल एक परंपरागत व्यवसाय नहीं, बल्कि वर्तमान समय में भी ग्रामीण आजीविका, आर्थिक सशक्तिकरण और सतत विकास का एक प्रभावी साधन है।निष्कर्षतः, यदि बकरी पालन को वैज्ञानिक तकनीकों, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बेहतर बाजार व्यवस्था से जोड़ा जाए तो यह ग्रामीण भारत के लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बकरी पालन आज भी प्रासंगिक है और आने वाले समय में ग्रामीण समृद्धि का एक मजबूत आधार बन सकता है।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 19:53:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मंडरो प्रखंड में आम उत्सव सह बागवानी मेला का भव्य आयोजन, जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने किया उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मंडरो, साहिबगंज, झारखंड:-</strong> मंडरो प्रखंड परिसर में कृषि एवं बागवानी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आम उत्सव सह बागवानी मेला का भव्य आयोजन किया गया। मेले का उद्घाटन मंडरो प्रमुख शिला देवी ने फीता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवशंकर गुप्ता, बीपीओ अभिषेक आनंद, जेई नेहाल आलम सहित कई प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रमुख शिला देवी ने कहा कि क्षेत्र में आम एवं अन्य बागवानी फसलों की अपार संभावनाएं हैं। किसानों को आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के लिए प्रेरित करने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181513/public-representatives-and-officials-inaugurated-the-grand-event-of-mango"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मंडरो, साहिबगंज, झारखंड:-</strong> मंडरो प्रखंड परिसर में कृषि एवं बागवानी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आम उत्सव सह बागवानी मेला का भव्य आयोजन किया गया। मेले का उद्घाटन मंडरो प्रमुख शिला देवी ने फीता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवशंकर गुप्ता, बीपीओ अभिषेक आनंद, जेई नेहाल आलम सहित कई प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रमुख शिला देवी ने कहा कि क्षेत्र में आम एवं अन्य बागवानी फसलों की अपार संभावनाएं हैं। किसानों को आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से इस तरह के आयोजनों का विशेष महत्व है। उन्होंने किसानों से बागवानी के क्षेत्र में आगे बढ़कर अपनी आय बढ़ाने का आह्वान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सामाजिक कार्यकर्ता शिवशंकर गुप्ता ने कहा कि बागवानी किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। ऐसे मेले किसानों को नई जानकारी, तकनीक और बाजार से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने किसानों को सरकार की विभिन्न कृषि एवं बागवानी योजनाओं का लाभ उठाने की सलाह दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीपीओ अभिषेक आनंद एवं जेई नेहाल आलम ने भी किसानों को संबोधित करते हुए बागवानी फसलों की उन्नत खेती, सिंचाई व्यवस्था, पौधों की देखभाल तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। अधिकारियों ने किसानों की समस्याएं भी सुनीं और उनके समाधान का भरोसा दिलाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मेले में विभिन्न प्रकार के आम, एवं बागवानी उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए प्रदर्शित उत्पादों का अवलोकन किया और विशेषज्ञों से खेती संबंधी जानकारी प्राप्त की। आयोजन स्थल पर किसानों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान प्रखंड के विभिन्न विभागों के कर्मी, जनप्रतिनिधि, किसान एवं स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आम उत्सव सह बागवानी मेला किसानों के लिए ज्ञानवर्धक एवं लाभकारी साबित हुआ तथा कृषि एवं बागवानी के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:49:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूर्व विधायक राकेश सिंह के प्रयासों से शोभापुर स्केप की खुदाई का कार्य शुरू </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>महराजगंज (रायबरेली)</strong> लंबे अरसे से किसानों के लिए समास्या का सबब बनी शोभापुर स्केप इस बार किसानों के लिए संजीवनी साबित होगी क्योंकि पूर्व विधायक राकेश सिंह के प्रयासों से इसकी खुदाई का रास्ता साफ हो चुका है, जिससे किसानों में खुशी की लहर है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बता दें कि महराजगंज ब्लाक क्षेत्र के बरहुवां ग्राम पंचायत अंतर्गत पूरे अभिमान सिंह गांव के पास से शोभापुर स्केप निकली हुई है, जिसकी लंबाई तकरीबन साढ़े चार किलोमीटर है,जो बजट के अभाव में झाड़ियों से पटी होने के कारण, जल निकासी की समास्या बनी हुई थी और हजारों बीघे फसल डूब जाती थी जिससे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181156/excavation-work-of-shobhapur-scape-started-due-to-the-efforts"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260613-wa0374---2026-06-13t194305.430.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>महराजगंज (रायबरेली)</strong> लंबे अरसे से किसानों के लिए समास्या का सबब बनी शोभापुर स्केप इस बार किसानों के लिए संजीवनी साबित होगी क्योंकि पूर्व विधायक राकेश सिंह के प्रयासों से इसकी खुदाई का रास्ता साफ हो चुका है, जिससे किसानों में खुशी की लहर है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बता दें कि महराजगंज ब्लाक क्षेत्र के बरहुवां ग्राम पंचायत अंतर्गत पूरे अभिमान सिंह गांव के पास से शोभापुर स्केप निकली हुई है, जिसकी लंबाई तकरीबन साढ़े चार किलोमीटर है,जो बजट के अभाव में झाड़ियों से पटी होने के कारण, जल निकासी की समास्या बनी हुई थी और हजारों बीघे फसल डूब जाती थी जिससे किसानों के सामने संकट उत्पन्न हो जाता था।</div><div style="text-align:justify;"> इसकी खुदाई को लेकर क्षेत्रीय किसान कई सालों से परेशान थे और पिछले दिनों पूर्व विधायक राकेश सिंह से मिलकर स्केप की सफाई की मांग की थी जिस पर उन्होंने अधिकारियों से बात कर समास्या के निराकरण के निर्देश दिए थे।</div><div style="text-align:justify;">अब पूर्व विधायक राकेश सिंह के प्रयासों से स्केप की खुदाई का काम शुरू हो गया है जिससे किसानों के चेहरे पर खुशी है, राज्य मंत्री स्वतंत्रत प्रभार दिनेश प्रताप सिंह बड़े भाई गणेश प्रताप सिंह ने अधिशाषी अभियंता सुशील कुमार सिंचाई विभाग की उपस्थिति में नारियल फोड़कर कार्य का शुभारंभ किया।</div><div style="text-align:justify;">स्केप की खुदाई से भीरा, मझिगवां, मलिकपुर बरना,पंचम सिंह गोंदरिहा बरहुआं पखनपुर पूरे श्रध्दा शोभापुर पूरे लाखन सिंह सहित दर्जनों गांवों के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।</div><div style="text-align:justify;">शीतला बक्श सिंह, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दीपू सिंह, पूर्व रंजीत सिंह, राम प्रताप सिंह, सुशील बाजपेई, राजू, चंद्र शेखर श्री राम सिया राम,जय राम लोधी, सहित अन्य मौजूद रहे।<br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181156/excavation-work-of-shobhapur-scape-started-due-to-the-efforts</link>
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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 19:59:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नहर में पानी न छोड़ें जाने से किसान परेशान-जजलाल राय </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> कांग्रेस कमेटी भदोही के जिला महासचिव जजलाल राय ने कहा कि जनपद भदोही के ज्ञानपुर नहर प्रखंड में समय से पानी न छोड़ें जाने से क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। नहर व शाखा तथा माइनरों में पानी न होने के कारण धान की नर्सरी तैयार करने कि सिंचाई का कार्य काफी प्रभावित हो रहा है। </div><div style="text-align:justify;">श्री राय ने कहा कि जून माह में धान की नर्सरी डालने का समय शुरू हो चुका है, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध न होने से किसान नर्सरी तैयार करने में परेशानी झेल रहे हैं। जिन किसानों के</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181006/farmers-upset-due-to-not-releasing-water-in-the-canal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0052.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> कांग्रेस कमेटी भदोही के जिला महासचिव जजलाल राय ने कहा कि जनपद भदोही के ज्ञानपुर नहर प्रखंड में समय से पानी न छोड़ें जाने से क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। नहर व शाखा तथा माइनरों में पानी न होने के कारण धान की नर्सरी तैयार करने कि सिंचाई का कार्य काफी प्रभावित हो रहा है। </div><div style="text-align:justify;">श्री राय ने कहा कि जून माह में धान की नर्सरी डालने का समय शुरू हो चुका है, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध न होने से किसान नर्सरी तैयार करने में परेशानी झेल रहे हैं। जिन किसानों के पास निजी सिंचाई के साधन नहीं हैं, उनकी चिंता और बढ़ गई है, जिससे परेशान होकर किसान कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायत पत्र दे चुके है। किसानों का कहना है कि समय पर पानी न मिलने से</div><div style="text-align:justify;">धान की नर्सरी प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। </div><div style="text-align:justify;">उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से जल्द से जल्द नहरों में पानी छोड़ने की मांग की पुरजोर मांग की है, ताकि धान की नर्सरी का कार्य समय पर पूरा किया जा सके।</div><div style="text-align:justify;">श्री राय ने कहा कि एक तरफ विकट गर्मी पड़ रही है जनपद में कुआं, हैंडपंप सूखे पड़े हुए हैं और गांव के तालाब भी भरने के बजाय खाली पड़े हैं </div><div style="text-align:justify;">नहर में पानी न आने के कारण किसान विवस बैठे हैं और पानी आने का राह देख रहे है।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="WhmR8e"></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:46:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढ़  रहा है, कृषि वैज्ञानिक - प्रोफेसर प्यारेलाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180800/climate-change-water-shortage-soil-erosion-the-crisis-on-our"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260605-wa0071.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर की समस्या नहीं रही यह सब सीधे हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैंजैसे अत्यधिक मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव और घटती वायु गुणवत्ता।ऐसे परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढता जा रहा है।</p><p style="text-align:justify;">मौसम के बदलते तेवर से  किसानों बागवानो को  जहां बहुत अधिक लाभ  नहीं होने वाला है। वहीं दूसरी तरफ इस साल का मानसून आम जनता को  भी  परेशान करेगा। एक अनुमान के अनुसार इस साल सामान्य से कम वर्षा होगी और साथ में अल नीनो का प्रभाव  बहुत  ख़तरनाक होगा सूखा और गर्मी   बढ़ेगी जिसके कारण खरीफ की फसलों का उत्पादन काम होगा विशेष तौर पर उन क्षेत्रों में जहां फसलों की सिंचाई की सुविधा नही है वहां पर बिजाई देर से होगी।और उत्पादन भी कम होगा।और देश में महंगाई बढ़ेगी । आमदनी पिछले साल की अपेक्षा इस साल कम हहोगी।<br /></p><p style="text-align:justify;">आज विश्व का हर देश ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध से भयंकर महंगाई के मोहाने पर खड़ा हो गया है। परन्तु युद्ध लड़ने वालों को मौसम मानसून  महंगाई और जनता से सरोकार नहीं है।  बस अपने को शक्तिशाली दिखाने की होड़ विश्व पटल पर लगी है कि मैं महान विजेता हूं ।इस युद्ध से भारत भी बहुत बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है।देश में महंगाई बढ़ रही है ऊर्जा का दाम बढ़ रहा है।तो वहीं यह मानसून भारत पर अलग तरह से कहर बरपाने का संकेत देकर भारत की गरीब जनता को और गरीबी में जीने के लिए मजबूर कर रहा है</p><p style="text-align:justify;">भारत को तीन  तरफ से मार पड़ेगा ।खराब मानूसन  खाद  की कमी और ऊर्जा ।भले टी वी डिवेट  पर सरकार के समर्थक  लोग आंकड़ों के जाल में जनता को फंसाते रहे परन्तु सच्चाई इन  आंकड़ों से इतर है। युद्ध कब तक चलेगा यह अगस्त या आगे तक भी चल सकता है फिर देश में नोट बन्दी की तरह हर चीज पर प्रतिबंध जैसे बैंकों से कम रुपया निकालना तेल गैस पर प्रतिबंध हर चीज का सीमित उपयोग।आदि  क ई तरह के उपाय करने पड़ सकते हैं। खाद के संकट को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने एक जुन से तीस जुन तक खेत बचाओ अभियान शुरू करने जा रहा है जिसमे कृषि वैज्ञानिक किसानों को रासायनिक खाद का उपयोग कम करने हरी खाद को बढ़ावा देने याद गोबर की खाद का अधिक उपयोग करने के फायदे बतायेंगे ।</p><p style="text-align:justify;">किसानों को अपने खेत की कम होती उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए कौन-सा सही तरीका लाभ कारी होगा साथ में खेती में लागत कम लगे और उत्पादन बढे यह एक सही कदम है।अब किसानों को आधुनिक खेती के साथ पुरानी खेती को अपनाने की जरुरत है जिसमें हरी खाद कमृपोष्ट खाद का बहुत महत्व है परन्तु बहुत से छोटे मझोले किसानों के पास पशुधन यानि बैल गाय भैंस नहीं के बराबर है जिससे गोबर की खाद बनेऔर खेत बचे साथ में उत्पादन भी बढ़े।सत्तर के दशक में कम्पोस्ट खाद बनाने की सरकार द्वारा योजना चला ई ग ई किसानों ने  गोबर गैस  प्लांट लगवाया खाद का उपयोग किया खेती से मजदुरो का पलायन होना शुरू हुआ पशुधन कम हुए तो गोबर गैस प्लांट बंद होते गये।अब खेती ट्रैक्टर रासायनिक खाद पर निर्भर है।</p><p style="text-align:justify;">हिमाचल के साथ देश भर में पिछले दो महीने से रुक रुक कर बे मौसमी बारिश ओला तेज हवा के कारण किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है । जनहानि भी हुई है।मौसम की यह बेरूखी  ऊपरी हिमाचल में सेव  के किसानों और अन्य फल के किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है  । यह भी  एक अनुमान है कि हिमाचल प्रदेश वर्ष में 5000 से 6000 करोड़ का सेव  का कारोबार  हर साल होता है। जो इस साल  बे मौसम बरसात ओलावृष्टि से सेव का उत्पादन कम होने का अनुमान है। जिसके कारण  किसानों को 1500 से 2000 करोड़ का नुकसान होगा।  कम पैदावार का नुकसान आम जनता को भी उठाना पड़ता है कि फल सब्जियां अनाज दूध तेल सब महगे दामो  पर बिकेंगे गरीब और गरीब होता जाएगा व्यापारी अमीर होता जाएगा।<br /></p><p style="text-align:justify;">आईएमडी के अनुसार बरसात  कम हो सकती है प्रशांत महासागर  में अल नीनो का प्रभाव बढ़ रहा   है। मानसून इस साल जल्दी आयेगा ।उत्तर और मध्य भारत में कम बारिश हो सकती है खेती में फसलों के साथ फल  जैसे सेव  नाशपाती  का उत्पादन के साथ  बिजली उत्पादन कम हो सकता है।  मानसून कमजोर होने पर सीधा असर  फसलो  किसानों की आय और खाद्यान्न की कीमतों पर पड़ता है।   कमजोर मानसून से कम पैदावार होगी खरीफ की फसलों के साथ सब्जी फल  महंगें होगे। सिंचाई की लागत भी बढेगी सरकार का प्रयास रहा है कि जल संचयन को बढ़ावा  जाए।  यह प्रयास बहुत अच्छा नहीं हो पाया गांव-गांव अमृत सरोवर बन रहा है।  परंतु लाभ उतना नहीं मिलता है जितनी उम्मीद सरकार कर रही है अमृतसरोवर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है यदि किसानों को यह जानकारी पहले से हो कि मानसून कमजोर है और कम वर्षा होगी तो  अधिक पानी की फसलों की जगह कम पानी की फसलो जैसे बाजार ज्वार मक्का उड़द मूंग  तिल अन्य मिलट की फसलों की बिजाई करने से बहुत लाभ हो सकता है ।  </p><p style="text-align:justify;">सरकार को इन फसलों की खरीद  को भी सुनिश्चित करना होगा।  अरहर  मूग उड़द बाजरा के साथ मिश्रित खेती अधिक लाभकारी होगी ।जब मानसून कमजोर होता है तब इस तरह की खेती किसानों के लिए लाभदायक होती  है। इस वर्ष   ओलावृष्टि वारिस जो  हिमाचल और भारत के अन्य प्रदेशों में हो रही है।  जिसके परिणामस्वरूप  सबसे ज्यादा सेवव फल   उत्पादक किसान प्रभावित हो रहे हैं ।इस बदले मानसून से हिमाचल  मे सेव  का उत्पादन 50 से 70% कम होगा। बे मौसमी  बारिश से सेव  के पौधों में फूल काम हो गए हैं । मधुमक्खियां  से परगण भी काम हुआ है ।  हिमाचल में ढाई लाख परिवार बागवानी विशेष तौर पर सेव के ऊपर  निर्भर है।<br /></p><p style="text-align:justify;">भारत कृषि प्रधान देश है खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर  है तो दूध उत्पादन में पहले पायदान पर दुनिया में टिका हुआ है । सब्जी फल उत्पादन में भी दुनिया में अपना स्थान बनाया हुआ है।  परंतु अभी तक हमारे वैज्ञानिकों ने मौसम के अनुकूल या कम बारिश होने पर उस तरह के बीजों का ईजाद नहीं कर पाए हैं जो कम पानी में अधिक पैदावार दे सके। कुछ किस्में हैं  परन्तु उतना लाभदायक नहीं है। कमजोर मानसुन होने पर खाघानो के साथ फल सब्जियों का उत्पादन कम न हो । और देश में कम उत्पादन के कारण महंगाई न बढ़े परन्तु ऐसा नहीं हो पा रहा है।</p><p style="text-align:justify;"> किसानों को भी खेती से घाटा न हो वह भी  राहत महसुस करें कि कमजोर मानसून होने पर आय कम नहीं होंगी बस फसल बदल दे तो निश्चित ही आय होगी। यह देखा गया है कि धान लगाने वाला किसान जल्दी फसल नहीं बदलते है । वह धान पर ही टिका रहता है धान में अधिक सिंचाई के कारण लागत बढ़ जाता है।बाजार में सही मूल्य नहीं मिलता  है।तब किसानो  को नुकसान उठाना ही होता है ।अगर मानुसन के अनुरूप किसान सही फसल का चयन कर लेता है तो कभी भी किसान नुकसान में नहीं होगा बस उसके उत्पाद का सही बाजार मूल्य सरकार दे।<br /></p><p style="text-align:justify;">खरीफ के मौसम में  अधिकांश तौर पर पंजाब हरियाणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजस्थान के किसान धान की खेती करते हैं कम बारिश के कारण धान की खेती में अधिक सिंचाई की जरूरत होगी जो महंगे डीजल के कारण पैदावार में लागत  मूल्य को बढ़ाता है।बाजार में मूल्य कम मिलता है। कमजोर मानसून से होने वाले नुकसान से बचने के लिए बस मोटे अनाजों की खेती है  एक मात्र सही उपाय है।जिसमें पानी की बहुत कम जरुरत होती है। मिश्रित खेती जैसे बाजरा उड़द अरहर बाजरा अहरह उड़द की खेती लाभ कारी होगी।। </p><p style="text-align:justify;">इस तरह की खेती से डीजल और  बिजली की बचत भी हो सकती है।  साथ में रसायनिक खाद की जरुरत भी कम पड़ती है।इस वर्ष किसानों पर तीन तरह से   मार पड़ेगी पहली मार कि मानसुन कमजोर है। बारिश कम होंगी। दुसरी मार खाद भी कम मात्रा में मिलेगा।  तीसरा ऊर्जा की कमी ।कारण ईरान अमेरिका इजरायल युद्ध से देश में यूरिया के साथ साथ पोटाश फास्फोरस जैसे खादों का जो आयात होता वह भी कम होगा जिससे किसानों को खरीफ के फसलों के लिए भरपूर रसायनिक खाद नहीं मिलेगा।</p><p style="text-align:justify;">पिछले साल देश ने बड़े शोर के साथ मोटे अनाजों के उत्पादन और उपयोग पर बहुत गोष्ठी और सेमीनार करके किसानों को जागरूक किया और इन मोटे अनाजों के उपयोग से लाभ के बारे में भी खुब चर्चा हुई परन्तु उत्पादन बढ़ा कितना इस पर बात उसके बाद नही हुआ। नहीं यह बताया गया कि देश में क्या यह भोजन की थाली में आया या बस पशुचारा में गया मुफ्त अनाज योजना में मोटे अनाज को वितरित किया गया परन्तु अधिकांश परिवारो  को जो मुफ्त में दिया गया उसे बाजार में बेच दिये।अब देश को मुफ्त अनाज वितरण को बन्द करें।<br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>विचारधारा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 23:16:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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