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                <title>Green Development - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Green Development RSS Feed</description>
                
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                <title>बालोतरा की पचपदरा रिफाइनरी से आत्मनिर्भर भारत को नई ऊर्जा मिली</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में देश की सबसे आधुनिक रिफाइनरी का उद्घाटन केवल एक औद्योगिक परियोजना का लोकार्पण नहीं है, बल्कि यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर जिस दूरदर्शिता, आत्मविश्वास और विकास के संकल्प का परिचय दिया, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि नया भारत केवल योजनाओं की घोषणा नहीं करता, बल्कि उन्हें समय पर पूरा करके राष्ट्र को नई शक्ति प्रदान करता है। पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182706/self-reliant-india-gets-new-energy-from-balotras-pachpadra-refinery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/6a48e6408d54f_file.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में देश की सबसे आधुनिक रिफाइनरी का उद्घाटन केवल एक औद्योगिक परियोजना का लोकार्पण नहीं है, बल्कि यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर जिस दूरदर्शिता, आत्मविश्वास और विकास के संकल्प का परिचय दिया, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि नया भारत केवल योजनाओं की घोषणा नहीं करता, बल्कि उन्हें समय पर पूरा करके राष्ट्र को नई शक्ति प्रदान करता है। पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिमी एशिया में युद्ध के कारण विश्व के सामने 21वीं सदी का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा हो गया था। ऐसी परिस्थितियों में अनेक देशों में ईंधन और गैस की कीमतें आसमान छूने लगीं। उन्होंने बताया कि यदि भारत ने समय रहते सही रणनीति नहीं अपनाई होती तो घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत दो हजार रुपये तक पहुंच सकती थी। लेकिन उनकी सरकार की दूरदर्शी नीति, प्रभावी कूटनीति और बेहतर प्रबंधन के कारण देशवासियों को इस संकट से राहत मिली। भारत ने ऊर्जा आयात के स्रोतों का विस्तार किया और पहले जहां लगभग 25 देशों से ईंधन खरीदा जाता था, वहीं अब 40 देशों से आयात कर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। दुनिया के अनेक देशों के साथ मजबूत संबंध स्थापित कर भारत ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने नागरिकों के हितों की रक्षा की। ऊर्जा संकट के समय भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक क्षमता का प्रभाव पूरी दुनिया ने देखा। यही कारण है कि भारत न केवल संकट से सुरक्षित निकला बल्कि विकास की गति भी बनाए रखने में सफल रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान के औद्योगिक इतिहास का नया अध्याय है। यह देश की अत्याधुनिक रिफाइनरियों में शामिल है, जहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, एविएशन फ्यूल तथा पेट्रोकेमिकल उत्पादों का निर्माण होगा। इससे भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती प्रदान करेगी और भारत को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक सक्षम बनाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस रिफाइनरी का सबसे बड़ा लाभ राजस्थान के लोगों को मिलने वाला है। पश्चिमी राजस्थान लंबे समय तक औद्योगिक विकास से अपेक्षाकृत वंचित रहा, लेकिन अब यह क्षेत्र देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित होगा। उद्योगों के आने से सड़क, रेल, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आधारभूत सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार होगा। इससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय व्यापार को नई गति मिलेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रोजगार की दृष्टि से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। रिफाइनरी के निर्माण के दौरान हजारों इंजीनियरों, तकनीशियनों, श्रमिकों और स्थानीय लोगों को काम मिला। अब इसके संचालन के दौरान भी बड़ी संख्या में स्थायी और अस्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। प्रत्यक्ष रूप से हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा, जबकि परिवहन, होटल, खानपान, सुरक्षा, रखरखाव, निर्माण, गोदाम, पैकेजिंग और अन्य सहायक उद्योगों के माध्यम से लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा। स्थानीय युवाओं के लिए कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण के नए अवसर भी खुलेंगे, जिससे वे आधुनिक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रिफाइनरी के आसपास पेट्रोकेमिकल उद्योगों का बड़ा नेटवर्क विकसित होने की संभावना है। प्लास्टिक, रसायन, सिंथेटिक फाइबर, पैकेजिंग सामग्री, उर्वरक और अनेक अन्य उद्योग यहां स्थापित होंगे। इससे निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग लगेंगे और राजस्थान देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में और अधिक मजबूत स्थान प्राप्त करेगा। छोटे और मध्यम उद्योगों को भी नए बाजार मिलेंगे, जिससे स्थानीय उद्यमियों को व्यापक लाभ होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्व के क्षेत्र में भी यह परियोजना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होगी। शुरुआती चरण में राजस्थान को हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की संभावना है, जबकि केंद्र सरकार को भी बड़ी आय होगी। यह धन सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और अन्य विकास योजनाओं में निवेश किया जा सकेगा। इस प्रकार रिफाइनरी केवल ईंधन उत्पादन का केंद्र नहीं बल्कि आर्थिक समृद्धि का आधार बनेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भाजपा सरकार केवल शिलान्यास करके परियोजनाओं को अधूरा नहीं छोड़ती बल्कि उन्हें पूरा करके जनता को समर्पित करती है। पचपदरा रिफाइनरी इसका सशक्त उदाहरण है। निर्माण के दौरान अनेक चुनौतियां आईं। कुछ समय पहले लगी आग के कारण उद्घाटन कार्यक्रम भी स्थगित करना पड़ा था, लेकिन इंजीनियरों, कर्मचारियों और विशेषज्ञों ने अथक परिश्रम कर बहुत कम समय में सभी कार्य पूरे किए। प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि नया भारत किसी भी चुनौती के सामने झुकता नहीं है और अपने संकल्पों को पूरा करके ही दम लेता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के जल विकास का भी उल्लेख किया और बताया कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने तत्कालीन राजस्थान सरकार के साथ मिलकर बिना किसी विवाद के नर्मदा का पानी राजस्थान तक पहुंचाने का कार्य किया। यह उनकी सहयोग की भावना, विकास की राजनीति और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की सोच का उदाहरण है। आज राजस्थान के अनेक गांवों तक नर्मदा का पानी पहुंच रहा है और लाखों लोगों का जीवन बदल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन और जयपुर मेट्रो फेज दो की आधारशिला भी इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार राजस्थान के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सड़क, रेल, हवाई संपर्क, ऊर्जा, उद्योग और शहरी विकास जैसे सभी क्षेत्रों में बड़े निवेश किए जा रहे हैं। इससे पर्यटन, व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिफाइनरी परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप विकसित यह परियोजना औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का भी उदाहरण बनेगी। इससे स्वच्छ ऊर्जा प्रबंधन और संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। आज भारत जिस गति से विकास की ओर बढ़ रहा है, उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व निर्णायक भूमिका निभा रहा है। उनके नेतृत्व में देश ने ऊर्जा सुरक्षा, आधारभूत ढांचे, वैश्विक प्रतिष्ठा, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पचपदरा रिफाइनरी इस परिवर्तनकारी सोच का सशक्त प्रतीक है। यह परियोजना आने वाले दशकों तक राजस्थान और भारत की आर्थिक प्रगति की आधारशिला बनेगी। इससे लाखों लोगों का जीवन बेहतर होगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा, उद्योगों को नई दिशा मिलेगी और भारत ऊर्जा के क्षेत्र में और अधिक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा। यही विकसित भारत के निर्माण की वह यात्रा है जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दृढ़ संकल्प, दूरदृष्टि और अथक परिश्रम के साथ कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 19:40:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>एनजीटी सदस्य ने की पर्यावरणीय कार्यों की समीक्षा, समधा ताल पुनर्जीवन की सराहना</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सदस्य माननीय न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन एवं हरित विकास से संबंधित कार्यों की समीक्षा की। बैठक में जिलाधिकारी शैलेष कुमार, पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">समीक्षा के दौरान न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने एसटीपी से उपचारित जल का उपयोग पार्कों, उद्यानों एवं कृषि कार्यों में करने तथा भूजल की गुणवत्ता की नियमित जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181004/ngt-member-reviews-environmental-works-and-praises-samadha-tal-revitalization"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0047.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सदस्य माननीय न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन एवं हरित विकास से संबंधित कार्यों की समीक्षा की। बैठक में जिलाधिकारी शैलेष कुमार, पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">समीक्षा के दौरान न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने एसटीपी से उपचारित जल का उपयोग पार्कों, उद्यानों एवं कृषि कार्यों में करने तथा भूजल की गुणवत्ता की नियमित जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने जिलाधिकारी शैलेष कुमार के प्रयासों से संचालित समधा ताल पुनर्जीवन एवं संरक्षण योजना की विशेष सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। साथ ही प्लास्टिक मुक्त अभियान, जल संरक्षण एवं हरित विकास से जुड़े कार्यों की भी प्रशंसा की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बैठक में नगर निकायों एवं संबंधित विभागों को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ विशेष अभियान चलाने तथा लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविंद शुक्ल, अपर जिलाधिकारी शुभांगी शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक, प्रभागीय वनाधिकारी विवेक यादव समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:41:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>विश्व पर्यावरण दिवस पर बिहार का हरित संकल्प एक लाख पौधों से हरियाली की नई इबारत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बिहार ने पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राजधानी पटना के जेपी गंगा पथ पर एक लाख पौधारोपण अभियान की शुरुआत की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस अभियान का शुभारंभ करते हुए राज्य को हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाने के संकल्प को दोहराया। यह पहल केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण सुरक्षित करने की व्यापक सोच का हिस्सा है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण औद्योगीकरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच यह अभियान प्रकृति और विकास के बीच</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180752/bihars-green-resolution-on-world-environment-day-new-lesson-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बिहार ने पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राजधानी पटना के जेपी गंगा पथ पर एक लाख पौधारोपण अभियान की शुरुआत की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस अभियान का शुभारंभ करते हुए राज्य को हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाने के संकल्प को दोहराया। यह पहल केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण सुरक्षित करने की व्यापक सोच का हिस्सा है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण औद्योगीकरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच यह अभियान प्रकृति और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व पर्यावरण दिवस का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। बिहार सरकार ने इस अवसर को जनभागीदारी से जोड़ते हुए इसे एक जन आंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया है। जेपी गंगा पथ पर लगाए जा रहे पौधे भविष्य में न केवल हरियाली बढ़ाएंगे बल्कि वायु प्रदूषण को कम करने और ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी माता के सम्मान में अथवा उनकी स्मृति में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल भी करें। उनका यह संदेश पर्यावरण संरक्षण को भावनात्मक और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास था जिससे अधिक से अधिक लोग इस अभियान का हिस्सा बन सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण श्रम एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के जागरूकता वाहनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। ये वाहन राज्य के विभिन्न जिलों में जाकर लोगों को पौधारोपण जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक करेंगे। पर्यावरण संबंधी चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है बल्कि इसके लिए जनजागरूकता और सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। ऐसे में जागरूकता अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बिहार में हरित विकास की दिशा में पिछले दो दशकों में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2005 से अब तक राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के कार्यकाल में 43 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। यह संख्या बिहार के पर्यावरणीय प्रयासों की गंभीरता और व्यापकता को दर्शाती है। इन पौधारोपण अभियानों का परिणाम यह हुआ है कि राज्य के वन क्षेत्र और हरित आवरण में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। हरित क्षेत्र बढ़ने से जैव विविधता को संरक्षण मिला है और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने में सहायता मिली है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। तापमान में वृद्धि अनियमित वर्षा सूखा बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। बिहार भी इन चुनौतियों से अछूता नहीं है। राज्य को हर वर्ष बाढ़ और कई क्षेत्रों में जल संकट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बड़े पैमाने पर पौधारोपण पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने का प्रभावी उपाय माना जाता है। वृक्ष वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं तथा तापमान नियंत्रण में भी सहायता करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान कृषि और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पांच पर्यावरणविदों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन लोगों के प्रयासों की सराहना है जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण को अपना जीवन लक्ष्य बनाया है। ऐसे व्यक्तियों को सम्मानित करने से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और अन्य लोगों को भी प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरणा मिलती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पर्यावरण संरक्षण के साथ ही बिहार सरकार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए दी जा रही अनुदान योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदने पर 12 हजार रुपए और चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर एक लाख रुपए तक की सहायता प्रदान की जा रही है। इससे न केवल लोगों को आर्थिक लाभ मिलेगा बल्कि पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता भी कम होगी। इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से वायु प्रदूषण में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को नई गति मिलेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बिहार सरकार प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को भी तेजी से लागू कर रही है। पहले चरण में पांच लाख घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार प्रति संयंत्र 33 हजार रुपए की सहायता प्रदान करेगी जबकि शेष राशि राज्य सरकार वहन करेगी। आने वाले दो वर्षों में 50 लाख परिवारों तक सौर ऊर्जा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।</div>
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<div style="text-align:justify;">सौर ऊर्जा का विस्तार जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करेगा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगा। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मदद मिलेगी। सरकार की योजना के अनुसार जिन घरों में आवश्यकता से अधिक बिजली का उत्पादन होगा वहां से राज्य सरकार अतिरिक्त बिजली खरीदेगी और उसकी राशि सीधे उपभोक्ताओं के खाते में जमा करेगी। इससे लोगों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा और स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहन भी मिलेगा।</div>
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<div style="text-align:justify;">आज पर्यावरण संरक्षण केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि मानव अस्तित्व से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। बढ़ता प्रदूषण घटते वन क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन भविष्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहा है। ऐसे समय में बिहार का यह हरित संकल्प अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है। एक लाख पौधों का यह अभियान केवल संख्या का लक्ष्य नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का प्रतीक है।</div>
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<div style="text-align:justify;">यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प ले तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है। वृक्ष केवल हरियाली नहीं देते बल्कि जीवन देते हैं। वे वायु को शुद्ध करते हैं जल संरक्षण में मदद करते हैं और जैव विविधता को सुरक्षित रखते हैं। इसलिए पौधारोपण को केवल एक दिन का कार्यक्रम न मानकर जीवन का स्थायी हिस्सा बनाना होगा।</div>
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<div style="text-align:justify;">विश्व पर्यावरण दिवस पर बिहार द्वारा लिया गया यह हरित संकल्प पर्यावरण संरक्षण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पौधारोपण स्वच्छ ऊर्जा और जनजागरूकता को साथ लेकर चलने वाली यह पहल विकास और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करती है। आने वाले वर्षों में यदि यह अभियान जन आंदोलन का रूप लेता है तो बिहार न केवल हरित राज्य के रूप में अपनी पहचान मजबूत करेगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण के राष्ट्रीय प्रयासों में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।</div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 18:49:45 +0530</pubDate>
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