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                <title>Patriotism - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>जब तिरंगा बना भारत की पहचान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस भारतीय इतिहास का एक ऐसा गौरवपूर्ण अवसर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हमें स्वतंत्रता संग्राम की महान विरासत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाता है। प्रत्येक वर्ष </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi">  जुलाई को मनाया जाने वाला यह दिवस उस ऐतिहासिक निर्णय का स्मरण कराता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi">  जुलाई </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi">  को संविधान सभा ने भारत के वर्तमान तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में औपचारिक रूप से स्वीकार किया। यह निर्णय केवल एक ध्वज के चयन तक सीमित नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक ऐसे राष्ट्र की सामूहिक चेतना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मसम्मान और भविष्य की</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183898/when-the-tricolor-became-the-identity-of-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/indian-flag-detail.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस भारतीय इतिहास का एक ऐसा गौरवपूर्ण अवसर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हमें स्वतंत्रता संग्राम की महान विरासत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाता है। प्रत्येक वर्ष </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi"> जुलाई को मनाया जाने वाला यह दिवस उस ऐतिहासिक निर्णय का स्मरण कराता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi"> जुलाई </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> को संविधान सभा ने भारत के वर्तमान तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में औपचारिक रूप से स्वीकार किया। यह निर्णय केवल एक ध्वज के चयन तक सीमित नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक ऐसे राष्ट्र की सामूहिक चेतना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मसम्मान और भविष्य की दिशा का उद्घोष था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सदियों की दासता के बाद स्वतंत्रता की दहलीज पर खड़ा था। इस अवसर पर संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रीय ध्वज संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। इसके साथ ही भारत को ऐसा राष्ट्रीय प्रतीक मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आज भी करोड़ों भारतीयों की आशाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आकांक्षाओं और राष्ट्रीय गौरव का प्रतिनिधित्व करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी राष्ट्र का ध्वज केवल रंगों से बना हुआ वस्त्र नहीं होता। वह उस देश के इतिहास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूल्यों और भविष्य की आकांक्षाओं का जीवंत प्रतीक होता है। जब कोई नागरिक अपने राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक देखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके मन में स्वाभाविक रूप से अपने देश के प्रति प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सम्मान और समर्पण का भाव जागृत होता है। भारत का तिरंगा भी इसी भावना का प्रतीक है। यह हमें बताता है कि हमारी पहचान केवल किसी क्षेत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाषा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जाति या धर्म से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक राष्ट्र के नागरिक होने से है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत का राष्ट्रीय ध्वज तीन समान क्षैतिज पट्टियों से बना है। सबसे ऊपर गहरा केसरिया रंग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो साहस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्याग और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। मध्य में सफेद रंग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सत्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शांति और पारदर्शिता का संदेश देता है। सबसे नीचे हरा रंग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो समृद्धि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और जीवन की निरंतरता का प्रतीक है। सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग का अशोक चक्र अंकित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें चौबीस तीलियां हैं। यह चक्र सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के धर्मचक्र से प्रेरित है। अशोक चक्र निरंतर गति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्याय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्तव्य और प्रगतिशील जीवन का संदेश देता है। इसका अर्थ यह है कि कोई भी राष्ट्र तभी आगे बढ़ सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह निरंतर कर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नैतिकता और विकास के मार्ग पर चलता रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तिरंगे का वर्तमान स्वरूप एक लंबी ऐतिहासिक यात्रा का परिणाम है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अनेक प्रकार के राष्ट्रीय ध्वज प्रस्तावित किए गए। बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में कई क्रांतिकारियों और राष्ट्रवादियों ने ऐसे ध्वज तैयार किए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भारत की स्वतंत्रता की आकांक्षा को व्यक्त करते थे। वर्ष </span>1921<span lang="hi" xml:lang="hi"> में आंध्र प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने महात्मा गांधी के समक्ष एक ध्वज का प्रारूप प्रस्तुत किया। समय के साथ उसमें परिवर्तन हुए। वर्ष </span>1931<span lang="hi" xml:lang="hi"> में कांग्रेस ने एक तिरंगे ध्वज को स्वीकार किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें मध्य में चरखा था। यही ध्वज आगे चलकर स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज का आधार बना। </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi"> जुलाई </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> को संविधान सभा ने निर्णय लिया कि चरखे के स्थान पर अशोक चक्र को स्थान दिया जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ध्वज राष्ट्रीय और सार्वभौमिक मूल्यों का अधिक व्यापक प्रतिनिधित्व कर सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण का निर्णय ऐसे समय लिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब भारत स्वतंत्रता प्राप्ति से कुछ ही सप्ताह दूर था। देश विभाजन की पीड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांप्रदायिक तनाव और अनिश्चित भविष्य जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा था। ऐसे समय में एक ऐसा राष्ट्रीय प्रतीक आवश्यक था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पूरे देश को एक सूत्र में बांध सके। तिरंगा इसी राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। इसने भारतवासियों को यह विश्वास दिलाया कि विविधताओं से भरे इस विशाल देश की आत्मा एक है और उसका भविष्य भी साझा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की सबसे बड़ी विशेषता उसकी विविधता है। यहां सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनेक धर्मों का पालन किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलग</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">अलग परंपराएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहनावे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोजन और जीवन शैली देखने को मिलती हैं। फिर भी जब राष्ट्रीय ध्वज लहराता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह सभी भेदभाव स्वतः गौण हो जाते हैं। तिरंगा हमें याद दिलाता है कि हम सबसे पहले भारतीय हैं। यही भावना भारत की लोकतांत्रिक शक्ति और राष्ट्रीय एकता की सबसे बड़ी आधारशिला है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब भी किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय खिलाड़ी पदक जीतते हैं और तिरंगा ऊंचा उठता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब करोड़ों भारतीयों की आंखें गर्व से भर जाती हैं। चाहे ओलंपिक हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व कप हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष अभियान हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक उपलब्धियां हों या वैश्विक मंचों पर भारत की सफलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर उपलब्धि के साथ तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे राष्ट्र की उपलब्धि का प्रतीक बन जाता है। यही कारण है कि प्रत्येक भारतीय अपने राष्ट्रीय ध्वज के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ महसूस करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय सशस्त्र बलों के लिए तिरंगे का महत्व और भी अधिक है। देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक इसी ध्वज की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। अनेक वीर सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन तिरंगे की शान को कभी झुकने नहीं दिया। जब किसी शहीद का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर अपने घर पहुंचता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब वह दृश्य पूरे राष्ट्र को भावुक कर देता है और प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्य की याद दिलाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान केवल राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका वास्तविक सम्मान तभी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हम अपने दैनिक जीवन में संविधान के आदर्शों का पालन करें। ईमानदारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिश्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक सद्भाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानून का सम्मान और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा जैसे व्यवहार ही तिरंगे के प्रति सच्ची श्रद्धा के प्रतीक हैं। यदि कोई नागरिक राष्ट्रहित को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर रखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वही राष्ट्रीय ध्वज का वास्तविक सम्मान करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और उसके उचित उपयोग के लिए ध्वज संहिता बनाई गई है। समय के साथ इसमें परिवर्तन भी किए गए हैं ताकि नागरिक अधिक सहजता से राष्ट्रीय ध्वज के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकें। हालांकि ध्वज का उपयोग करते समय उसकी गरिमा और सम्मान बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का नैतिक और कानूनी दायित्व है। राष्ट्रीय ध्वज कभी भी किसी प्रकार के अपमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यावसायिक दुरुपयोग या अनुचित प्रदर्शन का माध्यम नहीं बनना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस विशेष रूप से नई पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रेरणादायक अवसर है। आज के युवाओं के सामने विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रौद्योगिकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल और नवाचार जैसे अनेक क्षेत्र खुले हुए हैं। यदि युवा अपने ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिभा और परिश्रम के माध्यम से भारत को विश्व में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यही तिरंगे के प्रति उनकी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। केवल हाथ में तिरंगा लेकर उत्सव मनाना पर्याप्त नहीं है। आवश्यक यह है कि उसके आदर्शों को अपने व्यक्तित्व और कार्यों में भी उतारा जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विद्यालयों और महाविद्यालयों में राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस का आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम और नागरिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का उत्कृष्ट माध्यम बन सकता है। इस अवसर पर ध्वज के इतिहास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता संग्राम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संविधान सभा की भूमिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व और नागरिक कर्तव्यों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। इससे विद्यार्थियों में इतिहास के प्रति सम्मान और भविष्य के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज जब भारत विश्व मंच पर तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब राष्ट्रीय ध्वज का महत्व और भी बढ़ जाता है। चंद्रयान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदित्य मिशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल प्रगति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक कूटनीति और खेलों में उपलब्धियां यह सिद्ध करती हैं कि भारत निरंतर आगे बढ़ रहा है। इन सभी सफलताओं के केंद्र में वही तिरंगा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हमें निरंतर प्रगति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास और राष्ट्रीय एकता की प्रेरणा देता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भविष्य के लिए संकल्प लेने का भी दिन है। यह हमें स्मरण कराता है कि स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उत्तरदायित्व भी है। जिस तिरंगे को लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान की विरासत प्राप्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी गरिमा बनाए रखना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है। जब तक भारत का प्रत्येक नागरिक सत्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईमानदारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिश्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को अपने जीवन का आधार बनाए रखेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक तिरंगा सदैव गर्व के साथ लहराता रहेगा। यही राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस का सबसे बड़ा संदेश है और यही स्वतंत्र भारत की अमर पहचान भी है। जय हिंद।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 21:51:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वीर शहीद नरेंद्र कुमार यादव के परिवार के साथ खड़े हुए दिया 50 हजार का सहयोग।मनीष मिश्रा,</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के यशस्वी गरीबों मसीहा समाजसेवी मनीष मिश्रा ने देश के वीर सपूत अमर शहीद स्वर्गीय नरेंद्र कुमार यादव के पैतृक गांव अहरा मुंडेरवा पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर कभी नहीं मरते, बल्कि वे प्रत्येक भारतीय के हृदय में सदैव अमर रहते हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">मनीष भैया ने कहा कि शहीदों का बलिदान शब्दों से कहीं अधिक महान होता है। ऐसे वीर सपूतों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब समाज उनके</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182926/standing-with-the-family-of-brave-martyr-narendra-kumar-yadav"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260708-wa0029.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के यशस्वी गरीबों मसीहा समाजसेवी मनीष मिश्रा ने देश के वीर सपूत अमर शहीद स्वर्गीय नरेंद्र कुमार यादव के पैतृक गांव अहरा मुंडेरवा पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर कभी नहीं मरते, बल्कि वे प्रत्येक भारतीय के हृदय में सदैव अमर रहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मनीष भैया ने कहा कि शहीदों का बलिदान शब्दों से कहीं अधिक महान होता है। ऐसे वीर सपूतों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब समाज उनके परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और सहयोग के लिए आगे आए। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर जवानों के कारण ही हम सभी सुरक्षित हैं और उनका ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शहीद के परिवार से मुलाकात के दौरान मनीष भैया ने ₹50,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी संस्था "पहल" के माध्यम से परिवार के एक सदस्य को नौकरी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, ताकि परिवार को आत्मनिर्भर बनने में सहयोग मिल सके।उन्होंने शहीद परिवार के लिए पक्का मकान बनवाने  का वादा भी किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मनीष भैया ने कहा कि वह ऐसा घर बनवाना चाहते हैं जिसकी हर ईंट देश के वीर सपूत के अमर बलिदान की गाथा सुनाए और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा दे।मनीष भैया ने यह भी कहा कि यह केवल एक औपचारिक सहायता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य निभाने का प्रयास है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि शहीद के परिवार की हर संभव सहायता भविष्य में भी की जाएगी और परिवार को किसी भी आवश्यकता के समय अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "यह कोई एहसान नहीं, बल्कि उस तिरंगे का सम्मान है, जिसके लिए हमारे वीर जवान अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि मुझे इतना सामर्थ्य दें कि मैं अपने सभी संकल्प पूरे कर सकूं। यही उस अमर शहीद के प्रति मेरी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंत में मनीष भैया ने अमर शहीद स्वर्गीय नरेंद्र कुमार यादव को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि देश सदैव अपने वीरों का ऋणी रहेगा और प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह शहीदों के परिवारों के सम्मान और सहयोग के लिए आगे आए।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 18:10:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान के बीकानेर आर्मी कैंप में आतंकी हमले में बस्ती का अग्निवीर जवान वीरगति को प्राप्त होने की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">बस्ती।</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के मुंडेरवा नगर पंचायत अंतर्गत उमरी अहरा गांव निवासी 22 वर्षीय अग्निवीर नरेंद्र कुमार यादव के वीरगति को प्राप्त होने की सूचना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।परिजनों के अनुसार शनिवार को ड्यूटी के दौरान हुई घटना के बाद रात करीब 8 बजे छोटे भाई के मोबाइल पर शहादत की सूचना मिली। खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातम छा गया। ग्रामीण बड़ी संख्या में शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र कुमार यादव गरीब किसान रामरक्षा यादव के पुत्र थे और परिवार के</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182763/there-is-a-wave-of-mourning-in-the-area-due"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260705-wa0091.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">बस्ती।</blockquote>
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<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के मुंडेरवा नगर पंचायत अंतर्गत उमरी अहरा गांव निवासी 22 वर्षीय अग्निवीर नरेंद्र कुमार यादव के वीरगति को प्राप्त होने की सूचना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।परिजनों के अनुसार शनिवार को ड्यूटी के दौरान हुई घटना के बाद रात करीब 8 बजे छोटे भाई के मोबाइल पर शहादत की सूचना मिली। खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातम छा गया। ग्रामीण बड़ी संख्या में शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र कुमार यादव गरीब किसान रामरक्षा यादव के पुत्र थे और परिवार के सबसे बड़े सहारा माने जाते थे। वर्ष 2024 में अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती हुए नरेंद्र ने छह माह का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद बीकानेर में अपनी पहली तैनाती संभाली थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांव के लोगों ने नरेंद्र को मेहनती, अनुशासित, सरल स्वभाव और मिलनसार युवा बताते हुए कहा कि उन्होंने कम उम्र में ही देश सेवा का संकल्प लिया था। उनकी वीरगति की सूचना से पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है और हर आंख नम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिजनों को उम्मीद है किराजस्थान के बीकानेर स्थित एक आर्मी कैंप पर कथित आतंकी हमले की सूचना के बीच जनपद बस्ती के मुंडेरवा नगर पंचायत अंतर्गत उमरी अहरा गांव निवासी 22 वर्षीय अग्निवीर नरेंद्र कुमार यादव के वीरगति को प्राप्त होने की सूचना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिजनों के अनुसार शनिवार को ड्यूटी के दौरान हुई घटना के बाद रात करीब 8 बजे छोटे भाई के मोबाइल पर शहादत की सूचना मिली। खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातम छा गया। ग्रामीण बड़ी संख्या में शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र कुमार यादव गरीब किसान रामरक्षा यादव के पुत्र थे और परिवार के सबसे बड़े सहारा माने जाते थे। वर्ष 2024 में अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती हुए नरेंद्र ने छह माह का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद बीकानेर में अपनी पहली तैनाती संभाली थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांव के लोगों ने नरेंद्र को मेहनती, अनुशासित, सरल स्वभाव और मिलनसार युवा बताते हुए कहा कि उन्होंने कम उम्र में ही देश सेवा का संकल्प लिया था। उनकी वीरगति की सूचना से पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है और हर आंख नम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिजनों को उम्मीद है कि शहीद जवान का पार्थिव शरीर सोमवार प्रातः लगभग 6 बजे उनके पैतृक गांव उमरी अहरा पहुंचेगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। क्षेत्रवासियों ने वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी शहादत को राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान बताया।मां भारती के वीर सपूत नरेंद्र कुमार यादव की शहादत को शत-शत नमन। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।"</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:00:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत की एकता और प्रगति के प्रति समर्पित एक जीवन-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182749/a-life-dedicated-to-the-unity-and-progress-of-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-05-at-17.40.45.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से मिल सकता था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की गिनती अपने समय के महान शिक्षाविदों में होती थी। लेकिन तमाम सुविधाओं के बावजूद श्यामा प्रसाद जी ने त्याग और राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। उनका दृढ़ विश्वास था कि चाहे अंग्रेजी शासन का विरोध हो, सांप्रदायिकता से लड़ाई हो या मानवीय संकटों का सामना, वे अपने समय की इन चुनौतियों के सामने मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते। इस सफर में उन्हें कई गहरे व्यक्तिगत दुख भी झेलने पड़े। पहले उन्होंने अपने छोटे बच्चे को खोया और बाद में पत्नी का भी निधन हो गया। लेकिन इन दुखद परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका संकल्प और सशक्त हुआ, राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण और गहरा होता गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना था। देश के विभाजन के समय उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ वर्षों बाद इसी उद्देश्य से उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी संघर्ष किया। जेल और नजरबंदी भी उन्हें रास्ते से डिगा नहीं सकी। जब नजरबंदी के दौरान उनका निधन हुआ, तब वे उन अनगिनत लोगों से बहुत दूर थे, जिनके लिए वे जीवनभर संघर्ष करते रहे। इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं, जब किसी व्यक्ति का सर्वोच्च बलिदान राजनीति से ऊपर उठकर देश की स्मृति का हिस्सा बन जाता है। डॉ. मुखर्जी का बलिदान भी ऐसा ही था। आचार्य विनोबा भावे ने कहा था कि डॉ. मुखर्जी ने उस उद्देश्य के लिए अपना बलिदान दिया, जिस पर उन्हें पूरा विश्वास था। दशकों बाद, साल 2019 में आर्टिकल 370 और 35(A) को हटाया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने मजबूत संस्थानों का निर्माण किया और ऐसी व्यवस्थाएं बनाईं, जो उस समय की सोच से काफी आगे थीं। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए, जो राष्ट्रहित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप थे। शिक्षाविदों के एक सम्मेलन में डॉ. मुखर्जी ने कहा था, ‘’शिक्षण संस्थानों को केवल बाबू या कम वेतन वाले कर्मचारी तैयार करने की फैक्ट्री समझना गलत है। हमें विद्यार्थियों को ऐसे तैयार करना होगा ताकि वे नेतृत्व की भूमिका निभा सकें। हमारी स्वशासी संस्थाओं जैसे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन्स, प्रांतीय और केंद्रीय विधायिकाओं में बड़ी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो सकें। इसके साथ ही वे वित्त, व्यापार और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें।’’</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कलकत्ता विश्वविद्यालय में अपने नेतृत्व में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। इनमें लाइब्रेरी की सुविधाओं में सुधार, विज्ञान में रिसर्च को बढ़ावा देना, ऐतिहासिक वस्तुओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करना और कृषि से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करना शामिल था। उन्होंने खेलकूद, टीचर्स ट्रेनिंग और स्टूडेंट वेलफेयर जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया। विद्यार्थियों में अपनी यूनिवर्सिटी के प्रति गर्व की भावना विकसित हो, इसके लिए उन्होंने 24 जनवरी को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। उन्होंने गुरुदेव टैगोर से विश्वविद्यालय के लिए एक गीत लिखने का अनुरोध भी किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके जीवन के बाद के वर्षों में इस भावना का एक और उदाहरण तब देखने को मिला, जब उन्होंने भारतीय जनसंघ बनाने का निर्णय लिया। उस समय देश में हर तरफ कांग्रेस पार्टी का ही बोलबाला था। ऐसे में उन्होंने महसूस किया कि देश को एक ऐसे नए विकल्प की बहुत जरूरत है, जो भारत की प्रगति की बात भी करे और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी का चुनाव चिह्न 'दीपक' यानि मिट्टी का दीया रखा गया। एक अकेला दीया देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन उसमें अपने आस-पास के गहरे से गहरे अंधकार को मिटाने की अद्भुत शक्ति होती है। जनसंघ ने अपने सक्रिय काल में और उसके बाद भी बिल्कुल यही किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्यकाल बेहद अहम रहा। उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किया जाता है, जिनका विजन बहुत विराट था। वे उद्योग को नए-नए आजाद हुए भारत के लोगों में सम्मान, अवसर और आत्मविश्वास का संचार करने का सशक्त माध्यम मानते थे। वे वेल्थ और वैल्यू क्रिएशन के महत्व को भली-भांति समझते थे। उन्होंने दामोदर वैली कॉरपोरेशन, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और मजबूत औद्योगिक नीति जैसी ऐतिहासिक पहल की। इसके माध्यम से आधुनिक औद्योगिक भारत की नींव रखी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत के पारंपरिक सामर्थ्य की कभी उपेक्षा न हो। वे हथकरघा, कुटीर उद्योग, कारीगरों और कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों के हितों के भी प्रबल समर्थक थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां मैं अपना एक निजी अनुभव भी साझा करना चाहता हूं। आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट विजन के साथ जिस सिंदरी संयंत्र की स्थापना के लिए डॉ. मुखर्जी ने अथक प्रयास किए थे, उसकी कई दशकों तक सत्ता में रहने वाले लोगों ने घोर उपेक्षा की। मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार को उसके पुनरुद्धार का सौभाग्य मिला। उस कार्यक्रम में उपस्थित होना मेरे सार्वजनिक जीवन के सबसे विशेष और अविस्मरणीय क्षणों में से एक बन गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की प्राचीन परंपरा सदियों से संवाद और विचार-विमर्श का सम्मान करती आई है। डॉ. मुखर्जी इस लोकतांत्रिक भावना के सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल होना इसलिए स्वीकार किया, क्योंकि वे मानते थे कि देश की आजादी के शुरुआती वर्षों में राष्ट्र निर्माण का दायित्व राजनीतिक मतभेदों से कहीं ऊपर है। उन्होंने पूरी निष्ठा और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को  निभाया। लेकिन जब उन्हें लगा कि राष्ट्रीय महत्व के कुछ प्रश्नों पर देशहित में अलग मार्ग अपनाना आवश्यक है, तो उन्होंने पूरी गरिमा के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन उस राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए समर्पित कर दिया, जिसे वे राष्ट्र के लिए आवश्यक मानते थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">75 वर्ष पहले पंडित नेहरू पहला संविधान संशोधन लेकर आए। इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार माना गया। तब डॉ. मुखर्जी इसके सबसे मुखर आलोचक रहे थे। वे भली-भांति समझ चुके थे कि कांग्रेस किस हद तक जा सकती है। समय के साथ उनकी यह आशंका सही साबित हुई। जो पार्टी 75 वर्ष पहले पहला संविधान संशोधन लेकर आई थी, उसी ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपा। इतना ही नहीं, 50 वर्ष पहले 42वां संविधान संशोधन अधिनियम लाकर एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद पर कुठाराघात किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी अपनी मानवीय संवेदनाओं और सेवाभाव के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। वर्ष 1943 में जब बंगाल भीषण अकाल की त्रासदी से जूझ रहा था, तब उन्होंने पीड़ितों की सेवा में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि लोगों को भोजन मिल सके, जिसके लिए कई कैंटीन और रिलीफ सेंटर शुरू किए गए। एक ओर वे लोगों की पीड़ा से बहुत व्यथित थे, वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश हुकूमत की असंवेदनशीलता से अत्यंत आक्रोशित भी थे। उन्होंने अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए पंचाशेर मन्वंतर नाम की एक किताब भी लिखी। 1942 में जब मेदिनीपुर में भीषण चक्रवात आया, तब उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का नेतृत्व किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोलकाता के एक कॉलेज में युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. मुखर्जी ने उनसे आग्रह किया था, ‘’आप जो भी कार्य करें, उसे पूरी गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। किसी भी काम को कभी अधूरा न छोड़ें। तब तक स्वयं को संतुष्ट न मानें, जब तक आपने उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान न दे दिया हो।’’ आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम प्रतिदिन उस भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करें, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी। एक ऐसा भारत जो सशक्त हो, एकजुट हो, आत्मविश्वास से भरपूर और संवेदनशील हो। देश के युवाओं पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बढ़-चढ़कर भागीदारी करेंगे और इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुट जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<blockquote class="format1"><strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</strong></blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:49:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसान के बेटे ने बढ़ाया गोंडा का गौरव, अग्निवीर जीडी में चयनित होकर देश सेवा के लिए नागपुर रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो गोण्डा।</strong> विकासखंड रुपईडीह अंतर्गत ग्राम पंचायत भवानीपुर उपाध्याय के मजरा छिछुली निवासी किसान परिवार के होनहार पुत्र शशांक शुक्ला का भारतीय सेना की अग्निवीर (जीडी) भर्ती में चयन होने से पूरे क्षेत्र में हर्ष और गौरव का माहौल है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शशांक 1 जुलाई 2026 से नागपुर प्रशिक्षण केंद्र में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। देश सेवा के लिए रवाना होने से पूर्व गांव में उनका भव्य सम्मान किया गया। माता-पिता ने तिलक लगाकर, आरती उतारकर और आशीर्वाद देकर उन्हें विदा किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान पूरा गांव देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। शशांक शुक्ला ने कहा कि बचपन</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182540/farmers-son-made-gonda-proud-agniveer-got-selected-in-gd"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1007811081.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो गोण्डा।</strong> विकासखंड रुपईडीह अंतर्गत ग्राम पंचायत भवानीपुर उपाध्याय के मजरा छिछुली निवासी किसान परिवार के होनहार पुत्र शशांक शुक्ला का भारतीय सेना की अग्निवीर (जीडी) भर्ती में चयन होने से पूरे क्षेत्र में हर्ष और गौरव का माहौल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शशांक 1 जुलाई 2026 से नागपुर प्रशिक्षण केंद्र में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। देश सेवा के लिए रवाना होने से पूर्व गांव में उनका भव्य सम्मान किया गया। माता-पिता ने तिलक लगाकर, आरती उतारकर और आशीर्वाद देकर उन्हें विदा किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान पूरा गांव देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। शशांक शुक्ला ने कहा कि बचपन से ही उनका एकमात्र सपना भारतीय सेना में भर्ती होकर मातृभूमि की सेवा करना था। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा करना उनके लिए गर्व, सम्मान और सौभाग्य की बात है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों तथा ग्रामीणों के स्नेह और आशीर्वाद को दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शशांक के पिता जग प्रसाद शुक्ला एक मेहनती किसान हैं, जिन्होंने खेती-किसानी करते हुए अपने पुत्र को बेहतर शिक्षा दिलाई और हर कदम पर उसका मनोबल बढ़ाया। उनकी माता मेनका शुक्ला गृहिणी हैं और परिवार का कुशलतापूर्वक संचालन करती हैं। माता-पिता के संस्कार, अनुशासन और त्याग ने ही शशांक के व्यक्तित्व को मजबूत बनाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शशांक ने अपनी हाईस्कूल की शिक्षा बाबू बच्चा सिंह स्मारक इंटर कॉलेज, देवरिया कला भटपुरवा से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने श्री गाँधी आदर्श विद्यालय इंटर कॉलेज, खरगूपुर से इंटरमीडिएट प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ₹1.80 लाख की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। आगे उन्होंने नवीन चंद स्मारक महाविद्यालय, इटियाथोक से स्नातक की शिक्षा पूरी की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शशांक का परिवार लंबे समय से राष्ट्र सेवा की भावना से जुड़ा रहा है। उनके बड़े पिताजी बजरंगी शुक्ला उत्तर प्रदेश होमगार्ड में सेवारत हैं। वहीं उनके चाचा बाबूराम शुक्ला भी उत्तर प्रदेश होमगार्ड में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके छोटे भाई हिमांशु शुक्ला भी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में प्रवेश के लिए तैयारी कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश सेवा के लिए रवाना होने से पहले गांव में भावनात्मक माहौल देखने को मिला। सैकड़ों ग्रामीणों ने शशांक को फूल-मालाएं पहनाकर सम्मानित किया तथा "भारत माता की जय", "वंदे मातरम्" और "जय हिंद" के नारों के बीच उनका उत्साहवर्धन किया। ग्रामीणों ने विश्वास जताया कि शशांक अपने अनुशासन, समर्पण और परिश्रम से गांव, जनपद और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर अमरनाथ तिवारी, प्रबल प्रताप, शशिभूषण, बृजभूषण तिवारी, हिमांशु, शुभांशु, संचित राम तिवारी, दीपक, दीपांशु, प्रयाग दत्त शुक्ला, मुक्तिनाथ शुक्ला, शिवम शुक्ला सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने शशांक को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल सैन्य जीवन की कामना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने कहा कि किसान परिवार से निकलकर सेना में चयनित होना यह संदेश देता है कि कठिन परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति और माता-पिता के संस्कार किसी भी युवा को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। शशांक शुक्ला की यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और उनमें भी देश सेवा का जज्बा मजबूत करेगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:41:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीमा सुरक्षा बल (अग्निवीर) में चयनित महावीर यादव का गांव में भव्य स्वागत, पहली बार घर पहुंचने पर उमड़ा जनसैलाब</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के सोनखर डीह गांव निवासी मिन्कू यादव के पुत्र महावीर यादव के सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अग्निवीर के रूप में चयनित होने से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद महावीर यादव पहली बार अपने गृह जनपद सिद्धार्थनगर पहुंचे, जहां उनका जगह-जगह जोरदार स्वागत किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डुमरियागंज सीमा पर पहुंचते ही क्षेत्र के युवाओं, शुभचिंतकों और ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया। स्वागत जुलूस डुमरियागंज से शुरू होकर शाहपुर, नेबुआ, पेडारी मुस्तहकम और मछिया होते हुए सोनखर डीह गांव पहुंचा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पूरे मार्ग में</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182527/grand-welcome-to-mahavir-yadav-selected-in-border-security-force"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1782920516116.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के सोनखर डीह गांव निवासी मिन्कू यादव के पुत्र महावीर यादव के सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अग्निवीर के रूप में चयनित होने से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद महावीर यादव पहली बार अपने गृह जनपद सिद्धार्थनगर पहुंचे, जहां उनका जगह-जगह जोरदार स्वागत किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डुमरियागंज सीमा पर पहुंचते ही क्षेत्र के युवाओं, शुभचिंतकों और ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया। स्वागत जुलूस डुमरियागंज से शुरू होकर शाहपुर, नेबुआ, पेडारी मुस्तहकम और मछिया होते हुए सोनखर डीह गांव पहुंचा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूरे मार्ग में लोगों ने महावीर का अभिनंदन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। गांव पहुंचने पर ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महावीर यादव की इस उपलब्धि से गांव के युवाओं में भी देश सेवा के प्रति नया उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने कहा कि महावीर ने अपने परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर महावीर यादव के पिता मिंकू यादव ने अपने पुत्र के पहली बार नौकरी लगने के बाद घर आने की खुशी में जलपान का आयोजन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार, मित्र एवं क्षेत्र के गणमान्य लोग शामिल हुए। सभी ने महावीर को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल सेवा जीवन की शुभकामनाएं दीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांव में देर तक बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। ग्रामीणों का कहना था कि महावीर की मेहनत, लगन और अनुशासन का परिणाम है कि उन्होंने सीमा सुरक्षा बल में स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे सोनखर डीह गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:15:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फिरोजपुर से लेह-लद्दाख के लिए रवाना हो रही 21 सिख रेजिमेंट का MLA लालपुरा ने किया गर्मजोशी से स्वागत*</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>तरनतारन, </strong> फिरोजपुर से अपनी अगली तैनाती के लिए लेह-लद्दाख के लिए रवाना हो रहे 21 सिख रेजिमेंट के ऑफिसर और सैनिक हल्का खडूर साहिब के रसूलपुर नहरों पर कबीला रेस्टोरेंट पहुंचे। इस मौके पर, हल्का खडूर साहिब के MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा, जो 21 सिख रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं, ने सभी मिलिट्री ऑफिसर, सैनिकों और पूर्व सैनिकों का गर्मजोशी से स्वागत किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान, पूर्व सैनिकों और अभी सेवा दे रहे सैनिकों ने एक-दूसरे से मिलकर पुरानी यादें ताजा कीं। इस मौके पर, सभी सैनिकों ने एक साथ बैठकर लंच किया। इस मौके पर यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181552/mla-lalpura-warmly-welcomed-the-21-sikh-regiment-leaving-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000910053.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>तरनतारन, </strong> फिरोजपुर से अपनी अगली तैनाती के लिए लेह-लद्दाख के लिए रवाना हो रहे 21 सिख रेजिमेंट के ऑफिसर और सैनिक हल्का खडूर साहिब के रसूलपुर नहरों पर कबीला रेस्टोरेंट पहुंचे। इस मौके पर, हल्का खडूर साहिब के MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा, जो 21 सिख रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं, ने सभी मिलिट्री ऑफिसर, सैनिकों और पूर्व सैनिकों का गर्मजोशी से स्वागत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान, पूर्व सैनिकों और अभी सेवा दे रहे सैनिकों ने एक-दूसरे से मिलकर पुरानी यादें ताजा कीं। इस मौके पर, सभी सैनिकों ने एक साथ बैठकर लंच किया। इस मौके पर यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर (CO) अरज बेनीवाल, कई JCO और दूसरे मिलिट्री ऑफिसर खास तौर पर मौजूद थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर 21 सिख रेजिमेंट के सभी एक्स-सर्विसमैन ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सामने माथा टेका और रुमाला साहिब भेंट किया। MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा और एक्स-सर्विसमैन ने ऑफिसर्स को श्री हरमंदिर साहिब का सुंदर मॉडल देकर सम्मानित किया। इस दौरान यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर (CO) अरज बेनीवाल और दूसरे मिलिट्री ऑफिसर्स ने MLA लालपुरा को खास तौर पर मोमेंटो देकर सम्मानित किया और उनका धन्यवाद किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा ने इस मौके पर कहा कि 21 सिख रेजिमेंट के साथ बिताया गया समय उनकी ज़िंदगी का गर्व भरा चैप्टर है। उन्होंने कहा कि मिलिट्री कम्युनिटी की एकता, डिसिप्लिन और देशभक्ति हर युवा के लिए इंस्पिरेशन का सोर्स है। उन्होंने देश की रक्षा के लिए सभी सर्विंग और रिटायर्ड सैनिकों के योगदान को सलाम किया, लेह-लद्दाख के लिए रवाना हो रही पूरी यूनिट को शुभकामनाएं दीं और उनकी सुरक्षित और सफल सर्विस के लिए प्रार्थना की। इस मौके पर कैप्टन दयाल सिंह, कैप्टन कुलदीप सिंह, निरवाल सिंह रटोके, धीरा सिंह, कुलदीप सिंह फेलके आदि मौजूद थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फोटो कैप्शन:</div>
<div style="text-align:justify;">- MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा 21 सिख रेजिमेंट के अधिकारियों को सम्मानित करते हुए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:18:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>15 यूपी बटालियन एनसीसी के 303 कैडेट्स ने 'बी' प्रमाणपत्र परीक्षा  उत्तीर्ण की।</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">15 यूपी बटालियन एनसीसी के 303 कैडेट्स ने प्रतिष्ठित एनसीसी 'बी' प्रमाणपत्र परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बटालियन से संबद्ध विभिन्न शिक्षण संस्थानों के इन कैडेट्स ने प्रशिक्षण अवधि के दौरान उत्कृष्ट समर्पण, अनुशासन और परिश्रम का परिचय दिया। परीक्षा में ड्रिल, हथियार प्रशिक्षण, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक सेवा, राष्ट्रीय एकता तथा सैन्य जागरूकता सहित विभिन्न विषयों का मूल्यांकन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर 15 यूपी बटालियन एनसीसी की कमांडिंग ऑफिसर, कर्नल ऋतु श्रीवास्तव रावत, ने सभी सफल कैडेट्स को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181373/303-cadets-of-15-up-battalion-ncc-passed-b-certificate"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0157.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">15 यूपी बटालियन एनसीसी के 303 कैडेट्स ने प्रतिष्ठित एनसीसी 'बी' प्रमाणपत्र परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बटालियन से संबद्ध विभिन्न शिक्षण संस्थानों के इन कैडेट्स ने प्रशिक्षण अवधि के दौरान उत्कृष्ट समर्पण, अनुशासन और परिश्रम का परिचय दिया। परीक्षा में ड्रिल, हथियार प्रशिक्षण, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक सेवा, राष्ट्रीय एकता तथा सैन्य जागरूकता सहित विभिन्न विषयों का मूल्यांकन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर 15 यूपी बटालियन एनसीसी की कमांडिंग ऑफिसर, कर्नल ऋतु श्रीवास्तव रावत, ने सभी सफल कैडेट्स को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने एसोसिएट एनसीसी ऑफिसर्स (ए.एन.ओ.), स्थायी प्रशिक्षण स्टाफ (पी. आई. स्टाफ.), केयरटेकर ऑफिसर्स तथा संबंधित शिक्षण संस्थानों के योगदान की भी सराहना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने उद्बोधन में कर्नल ऋतु श्रीवास्तव रावत ने कहा,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">"यह उपलब्धि हमारे कैडेट्स के अनुशासन, समर्पण और कड़ी मेहनत का प्रमाण है। 'बी' प्रमाणपत्र उनके व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्हें जिम्मेदार नागरिक और राष्ट्र के भावी नेतृत्वकर्ता बनने के लिए तैयार करता है।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह सफलता बटालियन की राष्ट्र निर्माण के लिए अनुशासित, जिम्मेदार एवं देशभक्त युवाओं के निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181373/303-cadets-of-15-up-battalion-ncc-passed-b-certificate</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 20:58:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>भारतवर्ष की गुरु-शिष्य सनातनी परंपरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय चरित्र और राष्ट्रवाद शालाओं की बुनियादी शिक्षा कक्षाओं और गुरु और शिष्य परंपरा के साथ देश के प्रति समर्पण के भाव से प्रस्फुटित होता हैl राष्ट्रवाद राष्ट्र की रक्षा ,अखंडता एवं सशक्तिकरण नागरिकों के भाग्य को संरक्षित कर सुदृढ़ बनाता हैl स्वतंत्रता के बाद विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी के स्वप्न दृष्टा प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के भावी भविष्य को पहचानते हुए बुनियादी कक्षाओं की राष्ट्रवाद के निर्माण में भूमिका को सहजता से पहचान लिया और अमेरिका की तर्ज पर भारत को तकनीकी तौर पर एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए अमेरिका के एमआईटी की तर्ज पर भारतीय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180749/indias-guru-disciple-sanatani-tradition"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय चरित्र और राष्ट्रवाद शालाओं की बुनियादी शिक्षा कक्षाओं और गुरु और शिष्य परंपरा के साथ देश के प्रति समर्पण के भाव से प्रस्फुटित होता हैl राष्ट्रवाद राष्ट्र की रक्षा ,अखंडता एवं सशक्तिकरण नागरिकों के भाग्य को संरक्षित कर सुदृढ़ बनाता हैl स्वतंत्रता के बाद विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी के स्वप्न दृष्टा प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के भावी भविष्य को पहचानते हुए बुनियादी कक्षाओं की राष्ट्रवाद के निर्माण में भूमिका को सहजता से पहचान लिया और अमेरिका की तर्ज पर भारत को तकनीकी तौर पर एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए अमेरिका के एमआईटी की तर्ज पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापित करवाया था ।जब खड़कपुर आईआईटी की स्थापना की गई थी तब उन्होंने अतिथि के रूप में अपने भाषण में कहा की भारत को वैज्ञानिक महाशक्ति बनाने का दायित्व इन्हीं आई,आई,टी की कक्षाओं शिक्षकों एवं छात्राओं का होगा, वे राष्ट्र को तकनीकी दिशा में मील का पत्थर बनाने में साबित होंगेl</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में भारत आज अंतरिक्ष की बड़ी शक्तियों की कतार में शामिल हैl इसके पीछे भारत के कई वैज्ञानिक सीवी रमन ,विक्रम साराभाई, सतीश धवन जैसे बड़े वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इसरो संस्थान है जिसकी कक्षाओं में मंगल तक भारतीय तिरंगे को लहराया. भाभा एटॉमिक परमाणु शक्ति बन गया हैl वैश्विक स्तर पर हर बड़े स्पेस रिसर्च सेंटर पर भारत की इंजीनियर और वैज्ञानिक अपनी सेवाएं दे रहे हैंl</p>
<p style="text-align:justify;">आज अमेरिका आर्थिक महाशक्ति बनने के पीछे उसके विश्वविद्यालय ,संस्थाएं हैं। हावर्ड बिजनेस स्कूल विश्व स्तरीय व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में से एक माना जाता हैl आर्थिक सामाजिक तथा वैज्ञानिक शोध संस्थाओं में अधिकाधिक धनराशि खर्च करके अमेरिका, रूस, ब्रिटेन ,चीन, ऑस्ट्रेलिया ,कनाडा ने विश्व में सर्वश्रेष्ठ बुद्धिजीवी दिए हैंl यह तो तय है कि कोई भी देश का भाग्य तभी उन्नत तथा विकसित होगा जब वहां के छात्र शिक्षक एवं आमजन न्याय, समता ,प्रबुद्धता के प्रति अपनी अडिग प्रतिबद्धता रखें। आने वाली पीढ़ी यानी कि वर्तमान के बच्चे और भविष्य के नागरिक ही किसी देश का भविष्य निर्माण करते हैं और यह भी तय रहता है कि बुद्धिमान शिक्षक अपने छात्रों के माध्यम से किसी महान राष्ट्र की नींव रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी महान राष्ट्र का निर्माण रातों-रात नहीं होता है इसके लिए पीढीयो का योगदान और श्रेष्ठ शिक्षक एवं छात्रों की लग्न शीलता और मेहनत की प्रतिबद्धता होती है। 1960 और 70 के दशक में चीन में गठित सांस्कृतिक क्रांति कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेतों ,कारखानों को एकता में बांधकर सक्रिय नीति का प्रयोग कर सभी को एक सूत्र में बांधा गया था। जापान तो प्राथमिक कक्षाओं से उपजे राष्ट्रवाद, अनुशासन तथा कर्तव्य बोध के लिए सर्वश्रेष्ठ उदाहरण रहा है, जापान में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पराजय का कड़वा घूंट पीने के पश्चात कमजोर एवं मृतप्राय जापान को एक शक्तिशाली आर्थिक राष्ट्र बना दिया। इसके विपरीत वर्तमान कक्षाएं प्रेम, अनुशासन ,करुणा जैसे पाठ ना सिखा कर ईर्ष्या, कंपटीशन, हिंसा ,कटुता जैसे अध्याय सिखा कर राष्ट्र के भविष्य को गर्त में ले जा रही है ।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के अनेक विश्वविद्यालय हड़ताल ,हिंसा, जाति भेदभाव, आपत्तिजनक नारों जैसे विसंगतियों का सामना कर रहे हैं। कक्षाओं का नैतिकता, सहिष्णुता ,अनुशासन से कटाव केवल भारत में नहीं पूरे विश्व में इसका फैलाव हो चुका है। अमेरिका तथा यूरोपीय देशों में स्कूलों का कक्षाओं में गोली कांड इसके बड़े विकृत उदाहरण हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने ट्रीस्ट विद डेस्टिनी के भाषण में भूख, भय ,बीमारी, अज्ञान से पूर्णता मुक्ति की बात को भारत की नियति या डेस्टिनी कहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए की कक्षाओं को चरित्र निर्माण ,अनुशासन ,उत्कृष्ट नवाचार ,लोकतांत्रिक विचार संरचना का केंद्र बनाकर इसकी शिक्षा दीक्षा दी जानी चाहिए। कक्षाओं से बच्चे आर्थिक रूप से प्रौद्योगिकी स्थापित कर स्वयं अपने पैरों पर खड़े होकर आने वाले वर्षों में कई युवाओं को रोजगार देकर संपूर्ण मानवता ,पर्यावरण की रक्षा तथा राष्ट्र के उत्कर्ष को सही दिशा देने का काम करेंगे। जिससे राष्ट्रीय चरित्र निर्माण तथा राष्ट्रीयता की भावना को एक मजबूत आधार प्राप्त हो सकेगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 18:47:12 +0530</pubDate>
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