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                <title>Cyber Crime - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Cyber Crime RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>प्रयागराज साइबर थाने के प्रभारी निलंबित </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> पुलिस महकमे से जुड़ी एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। साइबर थाना प्रभारी को विभागीय अनियमितताओं और कार्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और अन्य अधिकारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, साइबर थाने में प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में देरी, मामलों की जांच में शिथिलता और उच्च अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी जैसी शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच कराई, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173660/there-was-a-stir-in-the-suspended-department-in-charge-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260319-wa0319.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> पुलिस महकमे से जुड़ी एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। साइबर थाना प्रभारी को विभागीय अनियमितताओं और कार्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और अन्य अधिकारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, साइबर थाने में प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में देरी, मामलों की जांच में शिथिलता और उच्च अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी जैसी शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच कराई, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्काल प्रभाव से थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया। साथ ही पूरे प्रकरण की विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि लापरवाही किन परिस्थितियों में हुई और इसमें अन्य कोई कर्मचारी भी शामिल है या नहीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आम जनता की शिकायतों का समयबद्ध और पारदर्शी निस्तारण पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कार्रवाई के बाद साइबर थाना समेत अन्य थानों में भी कार्यप्रणाली को लेकर समीक्षा शुरू कर दी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शिकायतों के निस्तारण में तेजी लाएं और आम लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौरतलब है कि साइबर अपराधों में लगातार बढ़ोतरी के बीच साइबर थाने की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में थाना प्रभारी पर की गई यह कार्रवाई पुलिस विभाग के लिए एक सख्त संदेश मानी जा रही है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 20:40:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हुए व्यक्ति को मिली बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना उतरांव पुलिस टीम ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हुए एक व्यक्ति की पूरी धनराशि वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है। इस सफलता से न केवल पीड़ित परिवार को राहत मिली है, बल्कि आम जनता में भी पुलिस के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना उतरांव क्षेत्र के ग्राम सराय इस्माइल (सदरेपुर) निवासी रामचंद्र मिश्र, पुत्र स्वर्गीय रमाकांत मिश्र के बैंक खाते से दिनांक 21 जनवरी 2026 को अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी कर कुल 1,47,000 रुपये की धनराशि निकाल ली गई थी। घटना के बाद पीड़ित ने तुरंत</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173640/big-relief-to-person-who-became-victim-of-online-fraud"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260319-wa0289.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना उतरांव पुलिस टीम ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हुए एक व्यक्ति की पूरी धनराशि वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है। इस सफलता से न केवल पीड़ित परिवार को राहत मिली है, बल्कि आम जनता में भी पुलिस के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना उतरांव क्षेत्र के ग्राम सराय इस्माइल (सदरेपुर) निवासी रामचंद्र मिश्र, पुत्र स्वर्गीय रमाकांत मिश्र के बैंक खाते से दिनांक 21 जनवरी 2026 को अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी कर कुल 1,47,000 रुपये की धनराशि निकाल ली गई थी। घटना के बाद पीड़ित ने तुरंत NCRP (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसकी शिकायत संख्या 23103260049192 है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायत प्राप्त होते ही थाना उतरांव पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस टीम ने संबंधित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से ट्रांजेक्शन को ट्रैक करते हुए धनराशि को समय रहते होल्ड करवा दिया। लगातार प्रयासों और समन्वय के बाद पुलिस ने पूरी धनराशि को सुरक्षित रूप से वापस कराने में सफलता हासिल की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिनांक 19 मार्च 2026 को पूरी 1,47,000 रुपये की रकम पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई। अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने पर रामचंद्र मिश्र और उनके परिजनों ने कमिश्नरेट प्रयागराज पुलिस तथा थाना उतरांव टीम का आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस सराहनीय कार्य में पुलिसकर्मी  उपनिरीक्षक विक्की प्रसाद उपनिरीक्षक मानवेंद्र प्रसाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही वहीं पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के संदिग्ध कॉल, लिंक या ऑनलाइन लेन-देन से सतर्क रहें तथा साइबर ठगी होने पर तुरंत NCRP पोर्टल या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर नुकसान को रोका जा सके।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 20:13:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मऊआइमा पुलिस की तत्परता से साइबर फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को 25 हजार रुपये मिले वापस।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मऊआइमा। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">साइबर अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए थाना मऊआइमा पुलिस टीम ने एक सराहनीय कार्य किया है। साइबर फ्रॉड का शिकार हुए एक व्यक्ति के खाते से कटे 25,000 रुपये को पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वापस करवा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>  थाना मऊआइमा साइबर पुलिस टीम ने प्रभावी कार्रवाई की।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार फरोग महमूद अंसारी पुत्र मंजूर अहमद अंसारी निवासी मोहल्ला आजमपुर थाना मऊआइमा, कमिश्नरेट प्रयागराज के खाते से साइबर ठगों द्वारा 25,000 रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई थी। इस संबंध में पीड़ित द्वारा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173075/due-to-the-promptness-of-mauaima-police-the-victim-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260309-wa0159.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मऊआइमा। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साइबर अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए थाना मऊआइमा पुलिस टीम ने एक सराहनीय कार्य किया है। साइबर फ्रॉड का शिकार हुए एक व्यक्ति के खाते से कटे 25,000 रुपये को पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वापस करवा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong> थाना मऊआइमा साइबर पुलिस टीम ने प्रभावी कार्रवाई की।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार फरोग महमूद अंसारी पुत्र मंजूर अहमद अंसारी निवासी मोहल्ला आजमपुर थाना मऊआइमा, कमिश्नरेट प्रयागराज के खाते से साइबर ठगों द्वारा 25,000 रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई थी। इस संबंध में पीड़ित द्वारा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायत प्राप्त होते ही थाना मऊआइमा की साइबर पुलिस टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्यवाही करते हुए पीड़ित के खाते से कटी पूरी धनराशि 25,000 रुपये वापस करा दी। पैसा वापस मिलने पर आवेदक फरोग महमूद अंसारी ने थाना मऊआइमा पुलिस तथा प्रयागराज पुलिस का आभार व्यक्त किया।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 23:21:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज में फर्जी शिक्षा बोर्ड का भंडाफोड़, मुख्य संचालक गिरफ्तार।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">। साइबर क्राइम थाना कमिश्नरेट प्रयागराज की टीम ने उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद के नाम से अवैध संस्था संचालित कर फर्जी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र व अंकपत्र जारी करने वाले मुख्य संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी वेबसाइट के माध्यम से लोगों को झांसा देकर धोखाधड़ी कर रहा था। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट प्रयागराज के निर्देश पर, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था तथा पुलिस उपायुक्त गंगानगर/नोडल साइबर क्राइम के निर्देशन में और अपर पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने यह कार्रवाई की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">साइबर क्राइम</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173071/fake-education-board-busted-in-prayagraj-chief-director-arrested"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260309-wa0255.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">। साइबर क्राइम थाना कमिश्नरेट प्रयागराज की टीम ने उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद के नाम से अवैध संस्था संचालित कर फर्जी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र व अंकपत्र जारी करने वाले मुख्य संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी वेबसाइट के माध्यम से लोगों को झांसा देकर धोखाधड़ी कर रहा था। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट प्रयागराज के निर्देश पर, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था तथा पुलिस उपायुक्त गंगानगर/नोडल साइबर क्राइम के निर्देशन में और अपर पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने यह कार्रवाई की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">साइबर क्राइम थाना में दर्ज मुकदमा संख्या 38/2024 धारा 318(4), 319(2), 338, 336(3), 340(2), 111(2)(b) भारतीय न्याय संहिता तथा 66, 66(D), 74 आईटी एक्ट के तहत वांछित अभियुक्त राजमन गोंड पुत्र कैलाश नाथ गोंड निवासी ग्राम रवनिया थाना बरदह जनपद आजमगढ़ (हाल पता: क्रिस्टल अपार्टमेंट, A विंग फ्लैट नं-104, थाना चिनहट, लखनऊ) को गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त की उम्र करीब 37 वर्ष बताई गई है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार आरोपी द्वारा अन्य लोगों के सहयोग से उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद के नाम से अवैध संस्था चलाई जा रही थी। यह लोग <a href="http://www.upsosb.ac.in/">www.upsosb.ac.in</a>⁠� और <a href="http://www.upsosb.org.in/">www.upsosb.org.in</a>⁠� सहित अन्य वेबसाइटों के माध्यम से फर्जी अंकपत्र और हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र जारी कर रहे थे। इन वेबसाइटों पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की तस्वीरों का भी अवैध रूप से उपयोग किया गया था ताकि लोगों को संस्था असली लगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह व्यक्तिगत लाभ के लिए इस फर्जी संस्था का संचालन कर रहा था और वेबसाइट के जरिए लोगों को फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराकर उनसे धन उगाही करता था। इस प्रकार वह कई लोगों के साथ धोखाधड़ी कर चुका है। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक एप्पल आईफोन, एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन, तीन सिम कार्ड और 1500 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए आगे की जांच शुरू कर दी है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">निरीक्षक प्रदीप कुमार सिंह, उपनिरीक्षक दीपक कुमार भाटी, कांस्टेबल अतुल कुमार त्रिवेदी, कांस्टेबल रूप सिंह, कांस्टेबल विवेक सिंह यादव तथा सर्विलांस सेल के कांस्टेबल प्रवीण कुमार मिश्रा शामिल रहे।।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"><div class="aQH"><div class="aZK" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div><div class="WhmR8e"></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 23:13:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>स्कूलों में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने एवं साइबर अपराध, नशा तथा लैंगिक शोषण पर अंकुश लगाने के लिए को पुलिस आयुक्त ने की समन्वय बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> आज पुलिस आयुक्त द्वारा पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय स्थित सभागार में कानपुर नगर के विभिन्न सरकारी एवं निजी स्कूलों के संचालकों, प्रबंधकों एवं प्रधानाचार्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य स्कूलों में अध्ययनरत छात्र - छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था एवं स्कूल प्रबंधन से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करना था ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त बैठक में कानपुर नगर के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की, जिनमें प्रमुख रूप से संजय यादव (राजकीय इंटर कॉलेज), हेमंत कुमार (राजकीय इंटर कॉलेज, भौंती), आर. एस. लाम्बा (खालसा कॉलेज, गोविंदनगर), अमर सिंह (बीएनएसडी कॉलेज), शिल्पी यादव (जीजीआईसी, चुन्नीगंज), राजेश</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166031/police-commissioner-held-a-coordination-meeting-to-ensure-safe-environment"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/1001548106.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> आज पुलिस आयुक्त द्वारा पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय स्थित सभागार में कानपुर नगर के विभिन्न सरकारी एवं निजी स्कूलों के संचालकों, प्रबंधकों एवं प्रधानाचार्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य स्कूलों में अध्ययनरत छात्र - छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था एवं स्कूल प्रबंधन से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करना था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त बैठक में कानपुर नगर के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की, जिनमें प्रमुख रूप से संजय यादव (राजकीय इंटर कॉलेज), हेमंत कुमार (राजकीय इंटर कॉलेज, भौंती), आर. एस. लाम्बा (खालसा कॉलेज, गोविंदनगर), अमर सिंह (बीएनएसडी कॉलेज), शिल्पी यादव (जीजीआईसी, चुन्नीगंज), राजेश चौहान (ऐलन हाउस कॉलेज, रूमा) सहित लगभग 200 से अधिक सरकारी एवं निजी स्कूलों के संचालक, प्रबंधक एवं प्रधानाचार्य उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> बैठक के दौरान पुलिस आयुक्त द्वारा वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराध, लैंगिक शोषण, मादक पदार्थों के सेवन एवं सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली क्षति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई तथा सभी स्कूल प्रबंधन से इन विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाने एवं छात्र-छात्राओं के मध्य जागरूकता फैलाने की अपील की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> बैठक में पुलिस आयुक्त ने छात्रों को दोपहिया वाहन से स्कूल आने पर हतोत्साहित करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि अधिकांश छात्र नाबालिग होते हैं और उनपर लाइसेंस भी नहीं होता है। नशे के मुद्दे पर भी बैठक में प्रश्न उठाया गया सभी स्कूलों ने कहा कि विद्यालयों के पास पान, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा की दुकानों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 18:45:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिजिटल अरेस्ट से लाखों परिवारों के जीवन में अंधेरा पसरा </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">लाखों लोगों व परिवारों के जीवन भर की कमाई को डिजिटल अरेस्ट के जरिए लूट कर उनके जीवन में अंधेरा कर दिया गया। यह कैसी विडंबना है कि जब तक देश में कथित डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अनुमानित तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक ठगी की जा चुकी है, कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं, की साल से यह सिलसिला जारी है तब सरकार और जिम्मेदार सिस्टम की नींद खुली है और अपराधियों पर शिकंजा कसने की बड़ी मुहिम शुरू हो पा रही है। वह भी सरकार के बजाय शीर्ष अदालत की पहल पर। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इन दिनों देश में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163204/digital-arrest-brought-darkness-to-the-lives-of-millions-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/download-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">लाखों लोगों व परिवारों के जीवन भर की कमाई को डिजिटल अरेस्ट के जरिए लूट कर उनके जीवन में अंधेरा कर दिया गया। यह कैसी विडंबना है कि जब तक देश में कथित डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अनुमानित तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक ठगी की जा चुकी है, कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं, की साल से यह सिलसिला जारी है तब सरकार और जिम्मेदार सिस्टम की नींद खुली है और अपराधियों पर शिकंजा कसने की बड़ी मुहिम शुरू हो पा रही है। वह भी सरकार के बजाय शीर्ष अदालत की पहल पर। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन दिनों देश में डिजिटल अरेस्ट के कई मामले लगातार सामने आ रहे हैं. सरकार के तमाम प्रयास के बावजूद डिजिटल अरेस्ट के कारण बुजुर्गों बड़ी संख्या में ठगी का शिकार हो रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डिजिटल अरेस्ट मामलों पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख दिखाते हुए कहा कि इस मामले में अदालत जरूरी निर्देश जारी करेगी. न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जयमाला बागची की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि हर हैरानी की बात है कि देश में पीड़ितों से लगभग 3000 करोड़ रुपये डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगे जा चुके हैं. यह सब हमारे देश में ही हो रहा है. अगर हम इस मामले में ठोस और सख्त आदेश नहीं देंगे तो समस्या और गंभीर हो जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट पर गंभीर चिंता जताते हुए सीबीआई को निर्देश दिए हैं कि वह अन्य साइबर अपराधों की जांच बाद में करें, डिजिटल अरेस्ट की जांच को अपनी प्राथमिकता बनाए। कोर्ट ने केंद्रीय बैंक से पूछा है कि क्या एआई की मदद से साइबर ठगों के खाते फ्रीज हो सकते हैं? कोर्ट ने सीबीआई से कहा है कि यदि किसी गंभीर डिजिटल अपराध का दायरा भारत से बाहर को सीमा में हो तो वह इंटरपोल की मदद ले सकती है। दुखद है कि साइबर अरेस्ट के मामलों में सबसे अधिक निशाना बुजुर्गों को ही बनाया जाता है, जिन्हें डिजिटल लेन-देन को गंभीर जानकारी नहीं होती। बुजुर्गों को निशाना बनाने का यह प्रतिशत 78 से 82 फीसदी बताया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई जगह यह प्रतिशत 99 फीसदी तक है। वहीं जनवरी से अप्रैल 2024 में साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट के 46 फीसदी मामलों के तार म्यांमार, कंबोडिया और लाओस जैसे दक्षिण पूर्व एशिया के देशों से जुड़े रहे हैं। निस्संदेह, हाल के वर्षों में डिजिटल गिरफ्तारी साइबर अपराध के सबसे कुटिल रूप में बनकर उभरी है। यह अपराध न केवल देश की वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता के लिये, बल्कि कानून प्रवर्तन तंत्र में जनता के विश्वास के लिये भी बड़ा खतरा है। ऐसे में कहा जा सकता है कि इन घोटालों की देशव्यापी जांच सीबीआई को सौंपने का सर्वोच्य न्यायालय का निर्णय समय के अनुरूप सार्थक हस्तक्षेप है। इसी क्रम में कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में अपराधों की जांच के लिये सीबीआई को सहमति दें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल, न्यायालय ने इस हकीकत को स्वीकार किया है कि साइबर अपराधी राज्यों की सीमाओं का लाभ</div>
<div style="text-align:justify;">उठाते हैं। वहीं दूसरी ओर टुकड़ों-टुकड़ों में जांच सीमा पार के साइबर अपराधियों के नेटवर्क को बढ़ावा देती है दरअसल, साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट के जरिये भोले-भाले लोगों व बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं। वे कानून प्रवर्तन अधिकारी पुलिस और जज बनकर मोटी रकम देने के लिये उन्हें ब्लेकमेल और आतंकित करते हैं।हालांकि अदालत ने कहा कि इस मामले से निपटने के लिए कठोर कदम उठाना जरूरी हो गया है. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गृह मंत्रालय ने एक अलग यूनिट की स्थापना की है और इस मामले से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बनाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही डिजिटल अरेस्ट से निपटने के लिए कई अन्य कदम उठाए गए हैं. डिजिटल अरेस्ट को लेकर हुई सुनवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय और सीबीआई ने सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट सौंपी. केंद्र सरकार की ओर से पेश दलील के सुनने के बाद अदालत ने कहा कि मामला काफी गंभीर है और इस मामले में अदालत उचित आदेश पारित करेगी. मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी. गौरतलब है कि एक वरिष्ठ नागरिक दंपति ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के पत्र लिखकर बताया था कि 1 से 16 सितंबर के बीच उनसे 1.5 करोड़ रुपए की ठगी सीबीआई, इंटेलिजेंस ब्यूरो तो कभी न्यायपालिका के अधिकारी बनकर की गयी. धोखेबाजों ने फोन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संपर्क किया और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे वसूलने का काम किया. इतना ही नहीं उन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश दिखाए.  मामला सामने आने के बाद अंबाला में दो एफआईआर दर्ज की गयी. जांच में पाया गया कि वरिष्ठ नागरिकों को ठगी का शिकार बनाने के लिए संगठित गिरोह काम कर रहा है. अदालत ने 17 अक्टूबर को इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की और केंद्र सरकार और सीबीआई से जवाब देने को कहा. अदालत ने इस मामले में अटार्नी जनरल से भी सुझाव लेने का आदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपति से एक करोड़ रुपये कीठगी के बाद अदालत ने इस व्यापक समस्या का स्वतः संज्ञान लिया। उन्हें  धमकाने के लिये सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेशों का इस्तेमाल किया गया। यह बेहद परेशान करने वाली स्थिति है कि साइबर अपराधी सार्वजनिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को खतरे में डाल रहे हैं।तभी शीर्ष अदालत ने महसूस किया कि अब पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा है, देश की केंद्रीय एजेंसी को इस मामले की तह तक तुरंत पहुंचना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट के मामलों में एफआईआर दर्ज करने और धोखाधड़ी से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज करने की पूरी छूट दी गई है। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत की जांच का अधिकार भी दिया गया। इसके अलावा दूरसंचार विभाग को भी सिम कार्ड के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के लिये कहा गया है। निश्चित रूप से कोर्ट की सार्थक पहल के बाद यदि ये सभी उपाय सिरे चढ़ते हैं तो इस गंभीर अपराध के खिलाफ एक राष्ट्रीय प्रतिक्रिया दे पाना संभव होगा। कोर्ट ने विश्वास जताया है कि केंद्रीय एजेंसी बिना किसी भय या पक्षपात के जिम्मेदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करेगी। इसमें राज्य सरकारों की सक्रियता व सजगता भी सीबीआई को अपराध की तह तक पहुंचने में मददगार साबित हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी जरूरी है कि एजेंसी की कार्रवाई में लालफीताशाही और राजनीतिक हस्तक्षेप न हो। इसके साथ ही नागरिकों को भी ऐसे अपराधों के प्रति सजग रहना होगा। जागरूकता सतर्कता उन्हें अपराधियों के चंगुल में फंसने से बचा सकती है। ऐसी किसी कॉल के आने पर उन्हें रुककर विचार करना चाहिए और हड़‌बड़ी में बैंक से जुड़ी कोई जानकारी देने से बचना चाहिए। ठग खुद को केंद्रीय एजेंसियों या पुलिस विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ितों को फर्जी आरोपों में फंसाने की धमकी देते थे। इसके बाद 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर उनसे बैंक खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर कराई जाती थी। साइबर सेल और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 35 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ये आरोपी गुजरात, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से पकड़े गए हैं। राजनांदगांव की 79 वर्षीय शीला सुवाल को आरोपितों ने सीबीआई अधिकारी और जज बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से डराया। मनी लॉडिंग केस में फांसाने की धमकी दी। निर्दोष साबित करने रकम जज के खाते में ट्रांसफर करने को कहा। महिला ने उगों के बताए गए विभिन्न खातों में 79,69,047 रुपये ट्रांसफर कर दिए। एक अन्य मामले में ठगों ने फारेक्स व ट्रेडिंग विशेषज्ञ बताकर व्यापारी को फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग साइट का लिंक भेजा। पहले 15 हजार का छोटा मुनाफा देकर व्यापारी का विश्वास हासिल किया, फिर बड़े मुनाफे का लालच देकर 1,21,53,590 रुपये निवेश के नाम पर जमा कराए। दोनों मामलों में तीन आरापितों को पकड़ा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस का कहना है कि अधिकांश मामलों में उप विदेशी कॉल सेंटरों की तरह काम करते हुए इंटरनेट कालिंग और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करते थे। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध काल या डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकियों पर विश्वास न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन को देशभर से सामने आए डिजिटल अरेस्ट के मामलों की पैन इंडिया जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। सोमवार को सुनवाई के दौरान सीजेआई ने सभी राज्यों को डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच में सीबीआई की मदद करने के भी निर्देश दिए। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा- डिजिटल अरेस्ट तेजी से बढ़ता साइबर क्राइम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसमें ठग खुद को पुलिस, कोर्ट या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो ऑडियो कॉल के जरिए पीड़ितों, खासकर सीनियर सिटिजन को धमकाते हैं और उनसे पैसे वसूलते हैं। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को नोटिस जारी कर पूछा कि साइबर ठगी में उपयोग हो रहे बैंक खातों को तुरंत ट्रैक और फ्रीज करने के लिए एआई और मशीन लर्निंग तकनीक का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा। इससे पहले 3 नवंबर की सुनवाई में एससी ने कहा था कि डिजिटल अरेस्ट मामलों में लगभग 3  का पता चला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभी तक डिजिटल अरेस्ट कर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है आज भी लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रहीं हैं जिनमे लोगों को मोबाइल काल पर तरह तरह से धमका कर पैसा ठगी किया जा रहा है लोग जीवन भर की खून पसीने की कमाई चंद मिनटों में गंवा कर सुसाइड करने के लिए विवश हो रहे हैं। सरकार को ऐसे अपरोक्ष हत्यारों ठगों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 17:32:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>EOW की बड़ी लापरवाही, ठगे गए लोग, 32 अरब ले भागी कंपनी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads">
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<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong>निवेश के नाम पर 100 फीसदी तक मुनाफा देने का झांसा देकर फर्जी फर्म यॉर्कर एफएक्स और यॉर्कर कैपिटल ने देश भर में 32 अरब रुपए ठगे। मध्यप्रदेश एसटीएफ ने खुलासा किया, लेकिन आर्थिक अपराध ब्यूरो (EOW) ने एक साल पहले एक शिकायत पर संज्ञान लिया होता तो ठगे जाने वालों की संख्या बेहद कम होती। यह खुलासा एसटीएफ के ईओडब्ल्यू को लिखे पत्र से हुआ है, जिसमें लिखा है, 2024 में आई शिकायत की जांच करें।</div>
<div>  </div>
<div>ठगी के अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने उज्जैन में फर्जी फर्म बनाकर 40 निवेशकों से निवेश कराए, बाद में रुपए लेकर फरार हो गए।</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153958/eows-great-negligence-was-cheated-by-32-billion"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/download.jpeg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong>निवेश के नाम पर 100 फीसदी तक मुनाफा देने का झांसा देकर फर्जी फर्म यॉर्कर एफएक्स और यॉर्कर कैपिटल ने देश भर में 32 अरब रुपए ठगे। मध्यप्रदेश एसटीएफ ने खुलासा किया, लेकिन आर्थिक अपराध ब्यूरो (EOW) ने एक साल पहले एक शिकायत पर संज्ञान लिया होता तो ठगे जाने वालों की संख्या बेहद कम होती। यह खुलासा एसटीएफ के ईओडब्ल्यू को लिखे पत्र से हुआ है, जिसमें लिखा है, 2024 में आई शिकायत की जांच करें।</div>
<div> </div>
<div>ठगी के अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने उज्जैन में फर्जी फर्म बनाकर 40 निवेशकों से निवेश कराए, बाद में रुपए लेकर फरार हो गए। एक शिक्षक ने 2024 में ही ईओडब्ल्यू की उज्जैन शाखा में शिकायत की थी। इस पर 40 पीड़ितों के हस्ताक्षर भी थे, पर ईओडब्ल्यू ने ध्यान नहीं दिया। एक साल तक शिकायत धूल खाती रही। अब ईओडब्ल्यू उज्जैन से जांच शुरू करेगी।</div>
<div> </div>
<div>इंदौर से निवेश के नाम पर छल की शिकायत दर्ज हुई तो एसटीएफ ने जांच शुरू की। जांच की कड़ी मप्र और छत्तीसगढ़ के साथ ओडिशा, गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और हरियाणा समेत 10 से ज्यादा राज्यों तक जुड़ गई। एसटीएफ ने 32 अरब की ठगी का खुलासा किया। ईडी भी हरकत में आ गई। इसी बीच उज्जैन के पीड़ितों ने एसटीएफ को मामले की जानकारी दी। तब ईओडब्ल्यू की लापरवाही की पोल खुल गई।</div>
<div>जांच एजेंसियां मामले में मनी ट्रेल की लगातार पड़ताल कर रही है। पता लगाया जा रहा है कि 32 अरब की ठगी करने वाले नेटवर्क का पैसा किन-किन खातों से इधर-उधर किया गया। इसमें साफ हुआ कि ठगी के 90 फीसदी रुपए हवाला के जरिए दुबई समेत अन्य देशों में भेजा गया। अब एसटीएफ इंटरपोल से संपर्क कर आगे की प्रक्रिया शुरू कर रही है।</div>
<div> </div>
<div>ठग कंपनियां यॉर्कर एफएक्स और यॉर्कर कैपिटल के रुपए को इधर से उधर करने के लिए रेनेट और काइनेट एग्रीगेटर फर्म को जिम्मा मिला था। यह बिचौलिए की तरह काम करती थी। ठगी के रुपए पहले इन दोनों फर्मों के खातों में भेजे जाते थे। ये फर्म अपना कमीशन काटकर बाकी रुपए उनके बताए खातों में भेज देते थे। एसटीएफ सूत्रों की मानें तो 500 करोड़ से ज्यादा रुपए इन फर्मों ने इधर से उधर किए। इसके ट्रांजेक्शन की पूरी डिटेल निकाली जा रही है। बताते हैं, इसके सभी प्रोपराइटर फरार हैं।</div>
<div> </div>
<div>यॉर्कर एफएक्स और यॉर्कर कैपिटल टेलीग्राम और सभी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स पर लिंक भेजकर निवेशकों को लुभाते थे। पहले निवेश पर लोगों को १० फीसदी का लालच दिया। निवेश करने पर यह मुनाफा दिया। फिर २०त्न मुनाफे का लालच दे निवेश कराए, इस बार भी रुपए लौटाए। इससे लोगों का भरोसा बढ़ा और उन्होंने ज्यादा मुनाफे के फेर में और राशि लगा दी। इस बार कंपनी रुपए बटोरकर फरार हो गई।</div>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/153958/eows-great-negligence-was-cheated-by-32-billion</link>
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                <pubDate>Sat, 16 Aug 2025 18:53:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कम्प्यूटर साइंस के छात्र ने साइबर क्राइम थाना कानपुर में किया इंटर्नशिप</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>कानपुर </strong>। कानपुर नगर निवासी रोह्नीश श्रीवास्तव, जो वर्तमान में जी. एल. ए. यूनिवर्सिटी, मथुरा में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग द्वितीय वर्ष के छात्र हैं, ने साइबर अपराधों में हो रही निरंतर वृद्धि को देखते हुए इस क्षेत्र में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने साइबर अपराध की प्रकृति और कार्यप्रणाली को समझने हेतु साइबर क्राइम थाना, कानपुर नगर से संपर्क किया। रोह्वीश ने अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) अंजली विश्वकर्मा से मिलकर साइबर क्राइम के क्षेत्र में इंटर्नशिप करने की इच्छा जताई। पुलिस उपायुक्त के निर्देशन एवं अपर</div>
<div>पुलिस उपायुक्त (अपराध) के मार्गदर्शन में, रोह्नीश ने साइबर अपराध से संबंधित विभिन्न पहलुओं</div>
<div>का</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153733/computer-science-student-did-internship-at-cybercrime-police-station-kanpur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/unnamed-(1).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कानपुर </strong>। कानपुर नगर निवासी रोह्नीश श्रीवास्तव, जो वर्तमान में जी. एल. ए. यूनिवर्सिटी, मथुरा में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग द्वितीय वर्ष के छात्र हैं, ने साइबर अपराधों में हो रही निरंतर वृद्धि को देखते हुए इस क्षेत्र में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने साइबर अपराध की प्रकृति और कार्यप्रणाली को समझने हेतु साइबर क्राइम थाना, कानपुर नगर से संपर्क किया। रोह्वीश ने अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) अंजली विश्वकर्मा से मिलकर साइबर क्राइम के क्षेत्र में इंटर्नशिप करने की इच्छा जताई। पुलिस उपायुक्त के निर्देशन एवं अपर</div>
<div>पुलिस उपायुक्त (अपराध) के मार्गदर्शन में, रोह्नीश ने साइबर अपराध से संबंधित विभिन्न पहलुओं</div>
<div>का गंभीर अध्ययन करते हुए एक माह की इंटर्नशिप पूर्ण की।</div>
<div> </div>
<div> इंटर्नशिप के दौरान, रोह्नीश ने साइबर क्राइम से संबंधित अनेक केस स्टडी का विश्लेषण किया तथा कुछ महत्वपूर्ण प्रकरणों को सुलझाने में तकनीकी सहयोग प्रदान किया। उन्होंने साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल फॉरेंसिक जैसे अत्याधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग करते हुए विभाग को केस सुलझाने में सहायता दी। इंटर्नशिप पूर्ण होने पर रोह्नीश श्रीवास्तव को कानपुर पुलिस उपायुक्त अपराध/मुख्यालय द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।</div>
<div> </div>
<div>कानपुर पुलिस ऐसे युवा छात्रों की सराहना करती है जो समाज में बढ़ते साइबर अपराधों को समझते हुए उनके निवारण में तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं। हम रोह्नीश के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं और विश्वास रखते हैं कि वे साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देते</div>
<div>रहेंगे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/153733/computer-science-student-did-internship-at-cybercrime-police-station-kanpur</link>
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                <pubDate>Wed, 06 Aug 2025 16:36:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिजिटल अरेस्‍ट के बाद आ गए डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स, ऑनलाइन धोखाधड़ी के इस तरीके को समझ लें अभी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>डिजिटल अरेस्‍ट के बाद आ गए डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स, ऑनलाइन धोखाधड़ी के इस तरीके को समझ लें अभी</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>खबर: अमित राघव (ब्यूरो चीफ देहरादून)</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>Disposable domains Scam</strong>: लोगों के साथ धोखाधड़ी करने के ल‍िए साइबर अपराधी अब ड‍िज‍िटल डोमेन्‍स का इस्‍तेमाल कर रहे हैं। ये ऐसी वेबसाइटें होती हैं जो कुछ समय के ल‍िए लाइव होती हैं और अपना काम करके गायब हो जाती हैं।   </p>
<p style="text-align:justify;">साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल स्‍कैम ऐसी मुसीबत बन गई हैं, जो लोगों का पीछा नहीं छोड़ रही। साइबर अपराधी अब एक नए तरीके को आजमा रहे हैं। वो इस्‍तेमाल कर रहे हैं डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152852/disposable-domains-have-come-after-digital-arrest-understand-this-method"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-06/img-20250627-wa0017.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>डिजिटल अरेस्‍ट के बाद आ गए डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स, ऑनलाइन धोखाधड़ी के इस तरीके को समझ लें अभी</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>खबर: अमित राघव (ब्यूरो चीफ देहरादून)</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>Disposable domains Scam</strong>: लोगों के साथ धोखाधड़ी करने के ल‍िए साइबर अपराधी अब ड‍िज‍िटल डोमेन्‍स का इस्‍तेमाल कर रहे हैं। ये ऐसी वेबसाइटें होती हैं जो कुछ समय के ल‍िए लाइव होती हैं और अपना काम करके गायब हो जाती हैं।   </p>
<p style="text-align:justify;">साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल स्‍कैम ऐसी मुसीबत बन गई हैं, जो लोगों का पीछा नहीं छोड़ रही। साइबर अपराधी अब एक नए तरीके को आजमा रहे हैं। वो इस्‍तेमाल कर रहे हैं डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स यह साइबर अपराधियों का मायाजाल है जो अपना काम करके फुर्र हो जाता है। आपको इससे बहुत सतर्क रहने की जरूरत है, क्‍योंकि ऐसी धोखाधड़ी अब शुरू हो गई है। सरकार की तरफ से इसे लेकर अलर्ट किया गया है। क्‍या होते हैं डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स। साइबर अपराधी इनका किस तरह से इस्‍तेमाल कर रहे हैं। यह सारी जानकारी हम आपको देने जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>क्‍या हैं डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स (Disposable domains)</strong><br />गृह मंत्रालय के तहत आने वाले एक्‍स अकाउंट साइबर दोस्‍त डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स से होने वाले फ्रॉड को लेकर सचेत किया है। डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स उन वेबसाइटों को कहा जाता है जो कुछ देर के लिए बनाई जाती हैं। यह कुछ घंटों से लेकर सुबह से शाम तक चल सकती हैं। आमतौर पर असली दिखने वाली वेबसाइटों की हूबहू कॉपी होती हैं। लोगों को लगता है कि वो असली वेबसाइट पर हैं। शॉपिंग कर रहे हैं। लेकिन ऐसा होता नहीं। ये वेबसाइटें लोगों की जानकारी चुराकर या उन्‍हें चूना लगाकर गायब हो जाती हैं। यानी गूगल पर ढूंढने से भी नहीं मिलेंगी और आप सोचते रह जाएंगे कि गलती कहां हुई, पैसा कहां निकल गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स काे कैसे पहचानें </strong><br />डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स के जरिए छलने वाली वेबसाइटें भले असली लगें लेकिन उनके यूआरएल यानी डोमेन से आप पहचान कर सकते हैं। अगर किसी वेबसाइट में .click, .buzz .monster जैसा शब्‍द दिख रहा है तो वह फर्जी वेबसाइट हो सकती है। वेबसाइट में स्‍पेलिंग मिस्‍टेक है जैसे गूगल ही सही नहीं लिखा तो वह भी डिस्‍पोजेबल डोमेन हो सकता है। अगर आपको मैसेज में या ईमेल में किसी वेबसाइट का लिंक आ रहा है तो वह भी डिस्‍पोजेबल डोमेन से जुड़ा हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स क्‍या काम करते हैं</strong><br />जैसाकि हमने बताया, डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स मुख्‍य रूप से यूजर की जानकारी चुराते हैं। यह आपके पासवर्डों में सेंध लगा सकते हैं। आपकी डिवाइस जैसे-मोबाइल या कंप्‍यूटर में वायरस लोड कर सकते हैं। फेक शॉपिंग वेबसाइट के रूप में आपके साथ कोई डिस्‍पोजेबल डोमेन आ सकता है। उस वेबसाइट में फर्जी ऑफर दिए जाते हैं और कई बार लोग लालच में फंसकर अपना पैसा गंवा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स का इस्‍तेमाल ही क्‍यों </strong><br />आप सोच रहे होंगे कि कोई भी डोमेन लेने के लिए काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं, खासतौर पर वह अगर पॉपुलर डोमेन हो। हां यह सच है, लेकिन डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स के मामले में ऐसा नहीं होता। यह काफी सस्‍ते में मिल जाते हैं। बताया गया है कि इन वेबसाइटों को सेटअप करना और डिलीट करना भी बहुत आसान होता है। इन्‍हें एकसाथ बल्‍क में तैयार किया जा सकता है यानी एक साथ कई नकली वेबसाइटें बनाई जा सकती हैं। सबसे खतरनाक बात कि ऐसी वेबसाइटों को ट्रेस कर पाना काफी मुश्किल होता है। इसलिए अगर आप भी ऑनलाइन एक्टिव रहते हैं। वेबसाइटों से शॉपिंग करते हैं, तो अलर्ट हो जाएं। डिस्‍पोजेबल डोमेन्‍स की पहचान करके खुद को सेफ रखें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>सोशल मीडिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/152852/disposable-domains-have-come-after-digital-arrest-understand-this-method</link>
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                <pubDate>Sat, 28 Jun 2025 18:27:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Uttrakhand]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइवर क्राइम निवेश और बचत के लिए किया गया जागरूक।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>प्रयागराज।</strong>प्रयागराज के तहसील मेजा के अंतर्गत आनेवाले सिरसा  अटरैलाशिवबंशी का पूरा, पकरी उमापुर महेवा कला सहित विभिन्न गांवों में आईसीआईसीआई फाउंडेशन की तरफ से वित्तीय साक्षरता पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।आईसीआइसी फाउंडेशन से जुड़े अंकित तिवारी ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बताया की वित्तीय साक्षरता का उद्देश्य आप लोगो को निवेश एवम बचत के लिए जागरूक करना है आप लोग छोटी छोटी बचत करके अपना और अपने परिवार का भविष्य बना सकते है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा योजना की भी जानकारी दी गई।</div>
<div>  </div>
<div>अंकित ने बताया की आए दिन ऑनलाइन धोखाधड़ी हो रहा है आप लोग जागरूक बने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144684/awareness-created-for-cyber-crime-investment-and-savings"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/img-20240909-wa0156.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>प्रयागराज।</strong>प्रयागराज के तहसील मेजा के अंतर्गत आनेवाले सिरसा  अटरैलाशिवबंशी का पूरा, पकरी उमापुर महेवा कला सहित विभिन्न गांवों में आईसीआईसीआई फाउंडेशन की तरफ से वित्तीय साक्षरता पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।आईसीआइसी फाउंडेशन से जुड़े अंकित तिवारी ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बताया की वित्तीय साक्षरता का उद्देश्य आप लोगो को निवेश एवम बचत के लिए जागरूक करना है आप लोग छोटी छोटी बचत करके अपना और अपने परिवार का भविष्य बना सकते है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा योजना की भी जानकारी दी गई।</div>
<div> </div>
<div>अंकित ने बताया की आए दिन ऑनलाइन धोखाधड़ी हो रहा है आप लोग जागरूक बने और मोबाइल पे आने वाले गलत मैसेज से सावधान रहे कोई भी बैंक किसी उपभोगता से एटीएम अथवा डेबिट कार्ड की जानकारी नहीं लेती किसी भी तरह घर बैठे कमाने का लालच लाटरी विदेश भेजने नौकरी लगवाने अश्लील वीडियो रिकॉर्ड ब्लैक मेल कर साइबर ढगी कर रहे इससे सावधान रहे और इस तरह की घटना होने में तुरंत 1930 पे शिकायत दर्ज कराए। कार्यक्रम में बनारसी तोता राम वनवासी सुनील पवन अंबिका ज्योति सरिता आदि पुरुष और महिलाएं उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/144684/awareness-created-for-cyber-crime-investment-and-savings</link>
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                <pubDate>Tue, 10 Sep 2024 16:29:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर क्राइम टीम ने साइबर फ्राड से बचने के लिये सुरियांवा थाना क्षेत्र स्थित  जीवन दान हास्पिटल के जनमानस को किया जागरूक । </title>
                                    <description><![CDATA[<div>  डा0 मीनाक्षी कात्यायन, पुलिस अधीक्षक भदोही द्वारा जनपदीय  साइबर थाना को जनपद के समस्त सार्वजनिक स्थानों/संस्थानों/विद्यालयों में साइबर जागरूकता अभियान के माध्यम से नागरिकों को जागरूक करने हेतु निर्देशित किया गया है, जिसके क्रम में आज दिनांक 03.07.2024 को समय 12.00 बजे से जनपद के सुरियांवा थाना क्षेत्र स्थित जीवन दान हास्पिटल में मौजूद लोग व आस-पास के जनमानस  को साइबर जागरूकता अभियान के माध्यम से जागरुक किया गया जिसमें लगभग 100-150 लोग मौजूद रहे एवं साइबर अपराधों से बचाव हेतु जनपदीय साइबर क्राइम टीम के द्वारा आवश्यक जानकारियां दी गयी:-</div>
<div>1-साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की सूचना तत्काल हेल्पलाइन नम्बर-1930/112 पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142782/cyber-%E2%80%8B%E2%80%8Bcrime-team-made-the-public-aware-of-jeevan-daan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/img-20240703-wa0970.jpg" alt=""></a><br /><div> डा0 मीनाक्षी कात्यायन, पुलिस अधीक्षक भदोही द्वारा जनपदीय  साइबर थाना को जनपद के समस्त सार्वजनिक स्थानों/संस्थानों/विद्यालयों में साइबर जागरूकता अभियान के माध्यम से नागरिकों को जागरूक करने हेतु निर्देशित किया गया है, जिसके क्रम में आज दिनांक 03.07.2024 को समय 12.00 बजे से जनपद के सुरियांवा थाना क्षेत्र स्थित जीवन दान हास्पिटल में मौजूद लोग व आस-पास के जनमानस  को साइबर जागरूकता अभियान के माध्यम से जागरुक किया गया जिसमें लगभग 100-150 लोग मौजूद रहे एवं साइबर अपराधों से बचाव हेतु जनपदीय साइबर क्राइम टीम के द्वारा आवश्यक जानकारियां दी गयी:-</div>
<div>1-साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की सूचना तत्काल हेल्पलाइन नम्बर-1930/112 पर दें जिससे धनराशि खाते में होल्ड करायी जा सके ।</div>
<div>2- साइबर अपराध एनसीआरपी पोर्टल की वेबसाइट- <a href="http://www.cybercrime.gov.in/">www.cybercrime.gov.in</a> पर दर्ज करें ।</div>
<div>3-खाते में केवाईसी अपडेट कराने के लिये बैंको द्वारा कभी भी किसी से व्यक्तिगत जानकारी /ओटीपी /सीवीवी/पिन नम्बर नही मांगी जाती है ।</div>
<div>4-किसी अंजान व्यक्ति के कहने पर कोई भी ऐप डाउनलोड न करें ।</div>
<div>5-किसी भी वेबसाइट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले अच्छी तरह से जांच लें ।</div>
<div>6-आनलाइन सेवायें प्रदान करने वाली कम्पनियों व सरकारी विभाग/कम्पनियों के कस्टमर केयर का नम्बर अधिकारिक व्यवसाइट से ही प्राप्त करें ।</div>
<div>7-अज्ञात व्यक्ति/अज्ञात मोबाइल नम्बर द्वारा भेजी गयी लिंक को क्लिक न करें ।</div>
<div>8-किसी से पैसा प्राप्त करते समय अपनी यूपीआई आईडी/पासवर्ड न डालें, पैसा प्राप्त करते समय इसकी कोई आवश्यकता नही होती है ।</div>
<div>9-एटीएम से पैसा निकालते समय सावधानी बरतें, एटीएम कक्ष में किसी अन्य को प्रवेश न करने दें अथवा गार्ड वाले एटीएम को ही प्रयोग में लायें । अपना एटीएम कार्ड किसी अन्जान व्यक्ति के हाथ में न दें ।</div>
<div>10- फेसबुक व अन्य सोशल साइट पर साइबर अपराध का शिकार होने से बचने के लिए किसी भी अन्जान व्यक्ति को जोड़ने या मित्र बनाने से बचें ।</div>
<div>11- प्रायः कुछ फ्राड व्यक्तियों द्वारा आम लोगों को काल करके, पैसा भेजने का फर्जी स्क्रीनशाट भेजकर वापस करने का रिक्वेस्ट कर पैसा अपने खाते में मंगवा ले रहे है और आम जनमानस अपने खाते को चेक किये बिना केवल स्क्रीनशाट देखकर पैसा भेजकर फ्राड का शिकार हो रहे है ।</div>
<div>12- कृपया किसी अनजान व्यक्ति के द्वारा पैसो की मांग किये जाने पर अच्छे से जाँच ले एवं अपने खाते का बैलेंस चेक कर ले, किसी के बहकावे में न आये ।</div>
<div>उक्त साइबर जागरूकता अभियान में हास्पिटल के एम.एस डा0 एम.सी.गुप्ता, डा0 फिरोज खान एवं साइबर क्राइम टीम से निरीक्षक सेतान्शु शेखर पंकज , का0 अंकित त्रिपाठी,  का0 कन्हैया कुमार सिंह, का0 राघवेन्द्र कुशवाहा, म0का0 शालीनी सिहं साइबर क्राइम पुलिस थाना भदोही द्वारा जीवन दान हास्पिट के जनमानस को जागरुक किया जिसमे लगभग 100-150 छात्र मौजूद रहे  ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jul 2024 14:39:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>रुपये पाने के लालच में शिक्षक ने गंवाए लाखोंरुपए;जालसाजों ने शिक्षक के खाते पर हाथ किया साफ</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बस्ती।</strong>    बस्ती जिले में ठग ने एक शिक्षिका को रुपए का लालच देकर लाखों की ठगी की रुपये कमाने के लालच में शिक्षक ने पौने नौ लाख रुपये गंवा दिए। साइबर अपराधियों ने पौने नौ लाख रुपये साइबर अपराधियों ने जवाहर नवोदय विद्यालय रूधौली में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात शिक्षक सच्चिदानंद से ऑनलाइन 8.79 लाख रुपये की ठगी कर लिया है।</div>
<div>  </div>
<div>अपराधियों ने सच्चिदानंद को उनकी पालिसी समय से पहले मेच्योर्ड करके रुपये दोगुने करने का झांसा देकर फंसा लिया। अपराधियों को रुपये देने के लिए शिक्षक ने इधर-उघर से कर्ज लेकर रुपये जालसाजों को दे दिया था।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142610/in-the-greed-of-getting-money-the-teacher-lost-lakhs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/img-20240629-wa0195.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बस्ती।</strong>  बस्ती जिले में ठग ने एक शिक्षिका को रुपए का लालच देकर लाखों की ठगी की रुपये कमाने के लालच में शिक्षक ने पौने नौ लाख रुपये गंवा दिए। साइबर अपराधियों ने पौने नौ लाख रुपये साइबर अपराधियों ने जवाहर नवोदय विद्यालय रूधौली में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात शिक्षक सच्चिदानंद से ऑनलाइन 8.79 लाख रुपये की ठगी कर लिया है।</div>
<div> </div>
<div>अपराधियों ने सच्चिदानंद को उनकी पालिसी समय से पहले मेच्योर्ड करके रुपये दोगुने करने का झांसा देकर फंसा लिया। अपराधियों को रुपये देने के लिए शिक्षक ने इधर-उघर से कर्ज लेकर रुपये जालसाजों को दे दिया था। इस मामले में उन्होंने अज्ञात जालसाजों के मोबाइल नंबर अपनी तहरीर में देकर साइबर थाना बस्ती में प्राथमिकी दर्ज कराई है।</div>
<div> </div>
<div>सच्चिदानंद ने पुलिस से बताया है कि पालिसी के रुपये के बदले दोगुने से कुछ ज्यादा रुपये मिलने की बात कही। शिक्षक को झांसा देकर अपराधियों ने कई बार में आठ लाख 79 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिया। जब उन्हें ठगे जाने का एहसास हुआ तो प्राथमिकी दर्ज कराई। साइबर थाने के निरीक्षक विकास यादव ने बताया कि दर्ज केस के आधार पर साइबर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jun 2024 16:48:15 +0530</pubDate>
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