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                <title>Save Trees - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Save Trees RSS Feed</description>
                
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                <title>पेड़ लगाइए जरूर, मगर पेड़ बचाइए — शिक्षक डॉ. तारकेश्वर मिश्र 'जिज्ञासु'</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अंबेडकर नगर।   </strong> प्रख्यात साहित्यकार, शिक्षक एवं पर्यावरण जागरूकता के प्रेरक डॉ. तारकेश्वर मिश्र 'जिज्ञासु' ने कहा कि केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों को जीवित रखना और उनका नियमित संरक्षण करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि आज पर्यावरण प्रदूषण, बढ़ते तापमान और घटते वन क्षेत्र जैसी चुनौतियों का प्रभाव पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है । ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक को पेड़ लगाने के साथ-साथ उनकी देखभाल का संकल्प लेना चाहिए । डॉ. जिज्ञासु ने कहा कि एक विकसित पेड़ वर्षों तक हमें शुद्ध वायु, छाया, वर्षा संतुलन, जैव</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183258/plant-trees-but-save-trees-%E2%80%93-teacher-dr-tarakeshwar-mishra"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1006297982.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अंबेडकर नगर।   </strong> प्रख्यात साहित्यकार, शिक्षक एवं पर्यावरण जागरूकता के प्रेरक डॉ. तारकेश्वर मिश्र 'जिज्ञासु' ने कहा कि केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों को जीवित रखना और उनका नियमित संरक्षण करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि आज पर्यावरण प्रदूषण, बढ़ते तापमान और घटते वन क्षेत्र जैसी चुनौतियों का प्रभाव पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है । ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक को पेड़ लगाने के साथ-साथ उनकी देखभाल का संकल्प लेना चाहिए । डॉ. जिज्ञासु ने कहा कि एक विकसित पेड़ वर्षों तक हमें शुद्ध वायु, छाया, वर्षा संतुलन, जैव विविधता का संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण प्रदान करता है । यदि लगाए गए पौधे कुछ ही दिनों में सूख जाएं, तो पौधारोपण अभियान का उद्देश्य अधूरा रह जाता है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसलिए प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधे को पेड़ बनने तक संरक्षित करने का संकल्प  लें । उन्होंने विद्यालयों, सामाजिक संगठनों तथा युवाओं से अपील की कि वे केवल औपचारिक पौधारोपण तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित सिंचाई, सुरक्षा, ट्री-गार्ड की व्यवस्था तथा समय-समय पर पौधों की देखरेख सुनिश्चित करें ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवनभर निभाई जाने वाली सामाजिक जिम्मेदारी है । अंत में डॉ. तारकेश्वर मिश्र 'जिज्ञासु' ने समाज से आह्वान किया कि "पेड़ लगाइए जरूर, मगर पेड़ बचाइए" का संदेश जन-जन तक पहुंचाकर धरती को हरित, स्वच्छ और सुरक्षित बनाने में अपना सक्रिय योगदान दें। यही आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी और सच्ची सेवा होगी।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 20:14:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>रस्मअदायगी नहीं, जिम्मेदारी: भीषण गर्मी में पौधारोपण क्यों बन जाता है औपचारिकता?</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>जितेन्द्र सिंह पत्रकार</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पौधारोपण कार्यक्रमों की भरमार दिखाई देती है। सरकारी कार्यालयों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, हर जगह पौधे लगाए जाते हैं और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जाती हैं। लेकिन इस वर्ष कानपुर समेत पूरे उत्तर भारत में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है और लू के थपेड़े लोगों का जीना मुश्किल कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ऐसे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है—क्या इस भीषण गर्मी में लगाए गए नन्हे पौधे जीवित रह पाएंगे?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">वास्तविकता यह है कि बिना नियमित सिंचाई और देखभाल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180684/why-does-tree-planting-become-a-formality-in-the-scorching"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001974815.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>जितेन्द्र सिंह पत्रकार</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पौधारोपण कार्यक्रमों की भरमार दिखाई देती है। सरकारी कार्यालयों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, हर जगह पौधे लगाए जाते हैं और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जाती हैं। लेकिन इस वर्ष कानपुर समेत पूरे उत्तर भारत में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है और लू के थपेड़े लोगों का जीना मुश्किल कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ऐसे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है—क्या इस भीषण गर्मी में लगाए गए नन्हे पौधे जीवित रह पाएंगे?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">वास्तविकता यह है कि बिना नियमित सिंचाई और देखभाल के अधिकांश पौधों का जीवित रहना बेहद कठिन है। केवल फोटो खिंचवाने या औपचारिकता निभाने के लिए पौधे लगाना पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि पौधों के साथ अन्याय है। यदि पौधा लगाने के बाद उसकी देखभाल नहीं की जाती, तो वह कुछ ही दिनों में सूख जाता है और पूरा प्रयास निरर्थक हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी जमीनी सच्चाई को ध्यान में रखते हुए "द कानपुर रिपोर्टर" की टीम ने निर्णय लिया है कि हम दिखावटी पौधारोपण से दूर रहेंगे और मानसून का इंतजार करेंगे। वर्षा ऋतु की पहली फुहार के साथ हमारी टीम शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कम से कम 50 छायादार एवं फलदार पौधे लगाएगी। इतना ही नहीं, हम इन पौधों के बड़े होने तक उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज समाज में अधिकांश लोग अपने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा, बैंक बैलेंस और संपत्ति जुटाने में पूरा जीवन लगा देते हैं। लेकिन शायद ही कोई उनके लिए स्वच्छ पर्यावरण और शुद्ध हवा की व्यवस्था करने के बारे में गंभीरता से सोचता है। यदि आने वाली पीढ़ी को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा ही उपलब्ध नहीं होगी, तो धन-संपत्ति का महत्व भी सीमित रह जाएगा। एक पेड़ केवल छाया ही नहीं देता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ जीवन, स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित भविष्य भी प्रदान करता है। इसलिए इस मानसून केवल पौधा लगाने का संकल्प न लें, बल्कि उसे वृक्ष बनाने की जिम्मेदारी भी स्वीकार करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात कानपुर टीम की अपील</strong></div>
<div style="text-align:justify;">इस मानसून दिखावे से दूर रहें। अपने घर, मोहल्ले, विद्यालय, कार्यालय या आसपास उपलब्ध स्थानों पर ऐसे पौधे लगाएं जो भविष्य में घने छायादार और फलदार वृक्ष बन सकें। आने वाली पीढ़ी को विरासत में केवल कंक्रीट के मकान नहीं, बल्कि एक हरा-भरा और स्वस्थ भविष्य भी दें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 19:12:04 +0530</pubDate>
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