<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/93849/strategic-autonomy" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Strategic Autonomy - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/93849/rss</link>
                <description>Strategic Autonomy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सीमा पर अविश्वास, बाज़ार में विश्वास — कितना उचित?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>  </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास गवाह है कि किसी राष्ट्र की दिशा केवल युद्धक्षेत्रों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नीतिगत निर्णयों से भी तय होती है। भारत सरकार द्वारा</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चार चीनी-लिंक्ड पावर उपकरण कंपनियों</span>  (<span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी भारत में विनिर्माण इकाइयाँ हैं) को</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली क्षेत्र की महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में दो वर्ष के लिए बोली लगाने की अनुमति ऐसा ही एक निर्णय है। इसे महज़ व्यापारिक उदारीकरण मानना भूल होगी। यह उस द्वंद्व का प्रतीक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ एक ओर आर्थिक विकास की आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा का अटल दायित्व। गलवान की रक्तरंजित स्मृतियाँ आज भी राष्ट्रीय चेतना</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182830/distrust-at-the-border-trust-in-the-market-%E2%80%93-how"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong> </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास गवाह है कि किसी राष्ट्र की दिशा केवल युद्धक्षेत्रों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नीतिगत निर्णयों से भी तय होती है। भारत सरकार द्वारा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चार चीनी-लिंक्ड पावर उपकरण कंपनियों</span> (<span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी भारत में विनिर्माण इकाइयाँ हैं) को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली क्षेत्र की महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में दो वर्ष के लिए बोली लगाने की अनुमति ऐसा ही एक निर्णय है। इसे महज़ व्यापारिक उदारीकरण मानना भूल होगी। यह उस द्वंद्व का प्रतीक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ एक ओर आर्थिक विकास की आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा का अटल दायित्व। गलवान की रक्तरंजित स्मृतियाँ आज भी राष्ट्रीय चेतना में अंकित हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पूर्ण डी-एस्केलेशन अभी बाकी है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और दोनों देशों के बीच विश्वास अब भी अधूरा है। फिर भी आर्थिक आवश्यकताओं ने संवाद के द्वार फिर खटखटाए हैं। प्रश्न केवल चीनी कंपनियों की वापसी का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह है कि क्या भारत इसे अपने रणनीतिक हितों के अनुरूप नियंत्रित कर पाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या आर्थिक आवश्यकता धीरे-धीरे रणनीतिक निर्भरता में बदल जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर बड़े राष्ट्रीय निर्णय के पीछे आर्थिक यथार्थ की कठोर परत होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। भारत ऊर्जा संक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उच्च गति रेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्मार्ट सिटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा जैसी महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं के निर्णायक दौर में है। इनके लिए भारी निवेश के साथ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्नत तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीव्र निष्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धी लागत आवश्यक है। वैश्विक स्तर पर कई चीनी कंपनियाँ कम समय और लागत में विशाल परियोजनाएँ पूरी करने में सक्षम हैं। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिमी कंपनियाँ अपेक्षाकृत महँगी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि भारतीय उद्योग अभी सभी क्षेत्रों में आत्मनिर्भर नहीं हैं। ऐसे में सस्ता और सक्षम विकल्प आकर्षित करता है। किंतु इतिहास चेतावनी देता है कि आज का आर्थिक लाभ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि दूरदृष्टि न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कल रणनीतिक स्वतंत्रता पर बोझ बन सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यहीं आर्थिक आवश्यकता और राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे कठिन टकराव सामने आता है। सुरक्षा एजेंसियों की आशंकाएँ पूर्वाग्रह नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक अनुभवों पर आधारित हैं। अनेक चीनी कंपनियों और उनकी सरकार के निकट संबंधों को लेकर कई देश चिंता जता चुके हैं। यदि ऐसी कंपनियों की पहुँच बिजली ग्रिड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरसंचार नेटवर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेलवे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बंदरगाह और डिजिटल अवसंरचना जैसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तक होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो डेटा संग्रह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर निगरानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संभावित बैकडोर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और लॉजिस्टिक नियंत्रण के जोखिम बढ़ जाते हैं। आज युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि डेटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल नेटवर्क और महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं पर भी लड़े जाते हैं। ऐसे में प्रश्न यही है कि क्या औपचारिक सुरक्षा जाँच और कागजी मंजूरियाँ इन अदृश्य खतरों से देश की रक्षा कर पाएँगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या यही ढील भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे महँगी कीमत बन जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह है कि जब विश्व आर्थिक संतुलन की नई दिशा तय कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भारत एक अलग द्वंद्व से गुजर रहा है। आज विश्व </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">चीन प्लस वन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">रणनीति के तहत</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में चीन पर निर्भरता घटाकर भारत जैसे देशों की ओर आशा से देख रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्गठन भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु इसी समय भारत चीनी कंपनियों के लिए नए आर्थिक द्वार खोल रहा है। यह हमारी दोहरी वास्तविकता को उजागर करता है। एक ओर आत्मनिर्भर भारत का संकल्प है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर वैश्विक उत्पादन व्यवस्था की जटिलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ पूर्ण आर्थिक पृथक्करण व्यवहारिक नहीं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि राष्ट्रीय हितों पर आधारित स्पष्ट शर्तों के बिना यह खुलापन तकनीकी निर्भरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाहरी नियंत्रण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक दबाव और ऋण-जाल जैसी चुनौतियाँ बढ़ा सकता है। इसलिए निवेश का स्वागत तभी उचित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह भारत को सशक्त बनाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्भर नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्पष्ट है कि इस चुनौती का उत्तर न अतिवादी विरोध में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न बिना शर्त स्वीकार्यता में। भारत को विवेकपूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियंत्रित और राष्ट्रीय सुरक्षा-आधारित सहयोग की नीति अपनानी होगी। चीनी कंपनियों की भागीदारी केवल गैर-संवेदनशील क्षेत्रों तक सीमित रहे। प्रत्येक परियोजना में डेटा लोकलाइजेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रौद्योगिकी हस्तांतरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थानीय सामग्री और भारतीय साझेदारी सुनिश्चित हो तथा हर चरण में कठोर साइबर सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। साथ ही घरेलू उद्योगों को अनुसंधान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वित्तीय सहयोग और तकनीकी प्रोत्साहन मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि दीर्घकाल में भारत बाहरी तकनीकी निर्भरता से मुक्त हो सके। यदि सस्ती परियोजनाओं के आकर्षण में इन सुरक्षा उपायों की अनदेखी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आज का आर्थिक लाभ कल की रणनीतिक कमजोरी बन सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस निर्णय की कूटनीतिक गूँज भी इसके आर्थिक प्रभावों जितनी दूरगामी है। लद्दाख में सैन्य और राजनयिक वार्ताएँ जारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु विश्वास की पुनर्स्थापना अब भी अधूरी है। ऐसे समय में चीनी कंपनियों की वापसी का संदेश केवल बीजिंग ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरा विश्व देख रहा है। इसे एक ओर संतुलित और नियंत्रित सहयोग की नीति माना जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर यह आशंका भी है कि भारत अनजाने में अपने रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी को आर्थिक अवसर दे रहा है। परिपक्व कूटनीति का अर्थ स्थायी शत्रुता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय हितों के अनुरूप संतुलित संवाद है। किंतु यह तभी सार्थक होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसकी नींव समानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता और पारस्परिक उत्तरदायित्व पर टिकी हो। आर्थिक संबंध किसी भी स्थिति में ऐसी निर्भरता में न बदलें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भविष्य में भारत की निर्णय-स्वतंत्रता को प्रभावित करे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविक कसौटी चीनी कंपनियों की वापसी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की रणनीतिक दूरदृष्टि और नीति-परिपक्वता है। न भावनात्मक चीन-विरोध आर्थिक उन्नति का आधार बन सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न अल्पकालिक आर्थिक लाभ के लिए सुरक्षा संबंधी आशंकाओं की उपेक्षा की जा सकती है। भारत को ऐसा संतुलन स्थापित करना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मनिर्भरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक निवेश और राष्ट्रीय सुरक्षा साथ-साथ आगे बढ़ें। विवेकपूर्ण संतुलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदर्शी नीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अटूट सुरक्षा-सतर्कता और स्वदेशी क्षमता निर्माण ही सशक्त भारत की नींव हैं। यदि भारत यह संतुलन साध लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सीमित छूट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">केवल आर्थिक आवश्यकता का प्रतीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस परिपक्व राष्ट्र की पहचान बनेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वैश्विक अवसरों का स्वागत करते हुए अपनी संप्रभुता की रक्षा भी करता है। अंततः इतिहास सम्मान उन्हीं राष्ट्रों को देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो क्षणिक लाभ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि दूरदृष्टि से अपना भविष्य गढ़ते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182830/distrust-at-the-border-trust-in-the-market-%E2%80%93-how</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/182830/distrust-at-the-border-trust-in-the-market-%E2%80%93-how</guid>
                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 21:53:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/hindi-divas6.jpg"                         length="137237"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गरीब मरीज पूछ रहा है— क्या मेरा जीवन इतना सस्ता है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य व्यवस्था की असली परीक्षा अस्पतालों की इमारतों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरीज को समय पर मिलने वाले उपचार से होती है। दुर्भाग्य से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देश की चिकित्सा व्यवस्था के सर्वोच्च प्रतीकों में गिने जाने वाले</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  एम्स भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अब</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लंबी प्रतीक्षा की समस्या से जूझ रहे हैं। एम्स</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल में गैर-इमरजेंसी (रूटीन) केस में कई मरीजों को सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी जरूरी जांच के लिए तीन-चार माह इंतजार करना पड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह केवल संसाधनों की कमी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता का संकेत है। बीमारी न प्रशासनिक प्रक्रियाओं का इंतजार करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180672/the-poor-patient-is-asking-%E2%80%93-is-my-life-so"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/360_f_334557287_wuhbarg68kugnheiwrgwanrxqtrl8wwv.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य व्यवस्था की असली परीक्षा अस्पतालों की इमारतों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरीज को समय पर मिलने वाले उपचार से होती है। दुर्भाग्य से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देश की चिकित्सा व्यवस्था के सर्वोच्च प्रतीकों में गिने जाने वाले</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> एम्स भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अब</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लंबी प्रतीक्षा की समस्या से जूझ रहे हैं। एम्स</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल में गैर-इमरजेंसी (रूटीन) केस में कई मरीजों को सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी जरूरी जांच के लिए तीन-चार माह इंतजार करना पड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह केवल संसाधनों की कमी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता का संकेत है। बीमारी न प्रशासनिक प्रक्रियाओं का इंतजार करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न सरकारी गति का</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह हर दिन गंभीर होती जाती है। ऐसे में </span>120 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन बाद जांच की तारीख मिलना एक चिंताजनक प्रश्न खड़ा करता है—इसका बोझ आखिर कौन उठाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका परिवार या उसका जीवन</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एम्स भोपाल की लंबी वेटिंग लिस्ट अब केवल एक अस्पताल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की समस्या</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पुरानी चुनौती का प्रतीक बन गई है। कम खर्च में बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों के लिए सस्ता इलाज भी तब बेमानी हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब जरूरी जांच ही महीनों बाद उपलब्ध हो। पेट के असहनीय दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर की आशंका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मस्तिष्क रोग या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज यदि केवल व्यवस्थागत कमी के कारण चार माह प्रतीक्षा करने को विवश हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह स्वास्थ्य सेवा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवेदनहीनता है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बीमारी किसी वेटिंग लिस्ट का इंतजार नहीं करती</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह लगातार बढ़ती जाती है और कई बार उपचार की संभावनाओं को भी सीमित कर देती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह है कि इस व्यवस्था का सबसे बड़ा बोझ उसी वर्ग पर पड़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके नाम पर राजनीति सबसे अधिक होती है। आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति निजी अस्पताल में कुछ घंटों या दिनों में जांच करा लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मजदूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छोटा व्यापारी और निम्न मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह विकल्प अक्सर पहुंच से बाहर होता है। ऐसे में उसके सामने दो ही रास्ते बचते हैं—कर्ज लेकर निजी जांच कराए या दर्द और आशंका के बीच सरकारी अस्पताल की लंबी प्रतीक्षा सहे। यह केवल चिकित्सा व्यवस्था की विफलता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक असमानता का भी दर्पण है। स्वास्थ्य सुविधाएं आय से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आवश्यकता से तय होनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु मौजूदा व्यवस्था में पैसे वालों को समय मिलता है और अभावग्रस्तों को इंतजार।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लंबी वेटिंग लिस्ट वर्षों से बढ़ती मांग और अपर्याप्त संसाधन विस्तार की कीमत है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मरीजों का बोझ बढ़ता रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन डॉक्टरों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञों और तकनीकी कर्मचारियों की संख्या लगभग वहीं ठहरी रही। कई सुपर-स्पेशियलिटी विभाग सीमित मानव संसाधनों पर निर्भर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि रेडियो डायग्नोसिस जैसे अहम विभाग पर्याप्त स्टाफ के अभाव में अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे। परिणाम सामने है—संसाधन मौजूद हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर सेवाएं नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">मशीनें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर समय पर जांच नहीं। प्रश्न यह है कि जब बढ़ती जरूरतें वर्षों से दिखाई दे रही थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब उनकी तैयारी क्यों नहीं की गई</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आखिर किस स्तर की चूक ने देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों को भी प्रतीक्षा के संकट में धकेल दिया</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब राजनीति का केंद्र तात्कालिक लोकप्रियता बन जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब अस्पतालों की जरूरतें अक्सर हाशिये पर चली जाती हैं। यही कारण है कि मुफ्त योजनाओं और लोकलुभावन घोषणाओं पर अरबों रुपये खर्च हो जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन डॉक्टरों की भर्ती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई मशीनों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए संसाधनों का अभाव बताया जाता है। विडंबना यह है कि वोट के लिए खजाना खुल जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर जीवन बचाने के लिए बजट सीमित पड़ जाता है। वास्तविक जनकल्याण मुफ्त सुविधाएं बांटने में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था खड़ी करने में है जहां किसी मरीज को जांच के लिए महीनों प्रतीक्षा न करनी पड़े। स्वास्थ्य और शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर गंभीर निवेश ही देश की तस्वीर बदल सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब जरूरत आश्वासनों नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्रवाई की है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एम्स</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल में अतिरिक्त सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनें लगाई जाएं तथा रेडियो डायग्नोसिस विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीशियनों और कर्मचारियों की भर्ती हो। उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए </span>24 <span lang="hi" xml:lang="hi">घंटे शिफ्ट आधारित संचालन लागू किया जाए। आयुष्मान भारत के दायरे में सभी आवश्यक जांचें लाई जाएं और सार्वजनिक-निजी भागीदारी से सुविधाओं का विस्तार हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना मरीजों पर अतिरिक्त बोझ डाले। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अपॉइंटमेंट प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाए। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एम्स</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल की स्थिति को चेतावनी मानते हुए देशभर के सरकारी अस्पतालों में संसाधन और मानवबल बढ़ाना अनिवार्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि मरीजों को इलाज मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंतजार नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य व्यवस्था का बोझ केवल </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एम्स</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे संस्थानों के भरोसे नहीं उठाया जा सकता। जब जिला अस्पतालों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेडिकल कॉलेजों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बड़े संस्थानों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। इसलिए स्वास्थ्य शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोग-निवारण और प्रारंभिक जांच व्यवस्था को मजबूत करना उतना ही जरूरी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जितना उपचार सुविधाओं का विस्तार। मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार करने और ग्रामीण क्षेत्रों तक आधुनिक जांच सुविधाएं पहुंचाने पर भी समान ध्यान देना होगा। आखिर स्वास्थ्य व्यवस्था केवल भवनों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सक्षम मानव संसाधन और जवाबदेह प्रशासन से मजबूत बनती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य कोई दया या उपकार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नागरिक का मौलिक अधिकार है। यदि किसी मरीज को अपनी बीमारी की सच्चाई जानने के लिए महीनों प्रतीक्षा करनी पड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह व्यक्तिगत दुर्भाग्य नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्था की नाकामी है। एम्स</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल की चार माह लंबी जांच प्रतीक्षा सूची इसी विफलता का प्रतीक है। यह मौन संकट हजारों परिवारों की चिंता बढ़ा रहा है। सरकारों को याद रखना होगा कि अस्पतालों की कतारों में खड़े लोग आंकड़े नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंसान हैं। यदि स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं मिली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जनकल्याण के दावे अर्थहीन रह जाएंगे। आखिर सवाल यही है—</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या एक गरीब मरीज के लिए महीनों का इंतजार सामान्य हो गया है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जांच में हर देरी कई बार जीवन की संभावनाएं भी कम कर देती है। ऐसी व्यवस्था पर गर्व नहीं किया जा सकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां बीमारी की रफ्तार उपचार से तेज हो।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180672/the-poor-patient-is-asking-%E2%80%93-is-my-life-so</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180672/the-poor-patient-is-asking-%E2%80%93-is-my-life-so</guid>
                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 18:44:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/360_f_334557287_wuhbarg68kugnheiwrgwanrxqtrl8wwv.jpg"                         length="86011"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बदलते परिवेश में भी भारत और रूस की मित्रता रहेगी कायम</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक कूटनीति के निरंतर बदलते स्वरूप के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत के संदर्भ में दिया गया हालिया बयान दोनों देशों के बीच की प्रगाढ़ और ऐतिहासिक मित्रता को एक नई ऊर्जा प्रदान करता है। पुतिन ने अत्यंत स्पष्ट शब्दों में भारत को रूस का एक बेहद भरोसेमंद साझेदार करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक मंच पर एक बहुत बड़ा संदेश देते हुए यह भी साफ कर दिया है कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक और कूटनीतिक नजदीकियों का असर मॉस्को और नई दिल्ली के गहरे संबंधों पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा। यह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180668/friendship-between-india-and-russia-will-continue-even-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1200-675-25531568-thumbnail-16x9-modi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक कूटनीति के निरंतर बदलते स्वरूप के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत के संदर्भ में दिया गया हालिया बयान दोनों देशों के बीच की प्रगाढ़ और ऐतिहासिक मित्रता को एक नई ऊर्जा प्रदान करता है। पुतिन ने अत्यंत स्पष्ट शब्दों में भारत को रूस का एक बेहद भरोसेमंद साझेदार करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक मंच पर एक बहुत बड़ा संदेश देते हुए यह भी साफ कर दिया है कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक और कूटनीतिक नजदीकियों का असर मॉस्को और नई दिल्ली के गहरे संबंधों पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा। यह बयान इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि भारत ने अपनी विदेश नीति को किसी एक ध्रुव या गुट तक सीमित नहीं रखा है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज के समय में जब पश्चिमी देश लगातार विकासशील देशों पर अपने एजेंडे थोपने का प्रयास कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब पुतिन का यह कहना कि भारत पर रूस के साथ सहयोग कम करने के लिए डाला जा रहा पश्चिमी दबाव पूरी तरह से व्यर्थ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की सबसे बड़ी वैश्विक स्वीकार्यता है। यह बयान केवल दो नेताओं या दो देशों की सरकारों के बीच का कूटनीतिक संवाद नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह एक बदलते हुए विश्व के शक्ति संतुलन का बहुत ही सजीव चित्रण है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रूस और भारत के कूटनीतिक रिश्तों की बुनियाद कई दशकों के विश्वास और आपसी सहयोग पर टिकी है। वर्ष </span>1971<span lang="hi" xml:lang="hi"> की शांति और मैत्री संधि से लेकर आज </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक के सफर में दोनों देशों ने कई वैश्विक उतार चढ़ाव देखे हैं। जब भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को समर्थन की आवश्यकता पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी वीटो शक्ति का इस्तेमाल कर भारत का साथ दिया है। कश्मीर का मुद्दा हो या फिर आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस हमेशा एक सच्चे मित्र की भांति भारत के साथ खड़ा रहा है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यही कारण है कि आज की सदी में भी यह रिश्ता मात्र कूटनीतिक समझौतों का मोहताज नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह दोनों देशों की जनता के बीच पनपे एक अटूट भावनात्मक जुड़ाव का भी प्रतीक है। पुतिन की बातों में इसी ऐतिहासिक विश्वास की झलक मिलती है। उन्हें इस बात का भलीभांति भान है कि भारत किसी भी बाहरी देश के दबाव में आकर अपने पुराने और सच्चे मित्र के साथ संबंधों में कोई भी कटौती नहीं करेगा। भारत की जनता और भारत के नीति निर्माता दोनों ही इस बात को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं कि संकट के समय में किसने उनका साथ दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी </span>2022<span lang="hi" xml:lang="hi"> में शुरू हुए यूक्रेन संकट के बाद से ही पश्चिमी देशों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूस पर कई तरह के कड़े आर्थिक और कूटनीतिक प्रतिबंध लगाए हैं। इन पश्चिमी देशों ने भारत पर भी यह भारी दबाव बनाया कि वह रूस के साथ अपने व्यापारिक संबंध सीमित करे और वहां से कच्चे तेल की खरीद को रोक दे। लेकिन भारत ने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया कि उसकी नीतियां उसके अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार तय होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि पश्चिमी देशों के फरमानों से। भारत ने न केवल रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए उसे कई गुना बढ़ा भी दिया। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कुछ वर्षों में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार ने </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर लिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि दोनों देशों द्वारा तय किए गए </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> के लक्ष्य से बहुत पहले ही हासिल कर लिया गया। आज रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन चुका है। भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का लगभग </span>40<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत हिस्सा रूस से आयात कर रहा है। यह आंकड़ा इस बात को साबित करता है कि पश्चिमी देशों की धमकियां भारत के इरादों को डिगा नहीं पाईं और भारत ने अपने नागरिकों के हितों को सर्वोपरि रखा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक मोर्चे पर पुतिन द्वारा भारत के तीव्र विकास की जो विशेष रूप से प्रशंसा की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह भी अत्यंत महत्वपूर्ण और ध्यान देने योग्य है। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी विकास दर लगातार </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत के आस पास बनी हुई है। देश में हो रहे भारी बुनियादी ढांचे के निर्माण और तकनीकी विकास ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रूस यह भलीभांति समझता है कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका एक प्रमुख विकास इंजन की तरह होने वाली है। ऐसे में रूस के लिए भारत सिर्फ एक पारंपरिक हथियार खरीदार नहीं रह गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष और विनिर्माण क्षेत्र में एक विशाल बाजार और सहयोगी बन गया है। दोनों देश अपनी मुद्राओं यानी रुपये और रूबल में व्यापार करने की दिशा में भी लगातार काम कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में पश्चिमी मुद्राओं के एकाधिकार को चुनौती दी जा सके और दोनों देशों के व्यापारियों को विदेशी मुद्रा के उतार चढ़ाव से बचाया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा क्षेत्र की बात करें तो भारत और रूस का सहयोग केवल आयात और निर्यात के पुराने मॉडल तक सीमित नहीं है। आज यह दोनों देश ब्रह्मोस मिसाइल जैसे अत्याधुनिक हथियारों का संयुक्त रूप से निर्माण कर रहे हैं जो कि पूरी दुनिया में अपनी तरह की सबसे बेहतरीन मिसाइल मानी जाती है। इसके अलावा एस </span>400<span lang="hi" xml:lang="hi"> वायु रक्षा प्रणाली की आपूर्ति भी दोनों देशों के बीच हुए एक ऐतिहासिक सौदे का हिस्सा है</span>, </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे पूरा करने के लिए भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित खतरे की भी बिल्कुल परवाह नहीं की। भारत में मेक इन इंडिया पहल के तहत कलाश्निकोव राइफल से लेकर अन्य कई रूसी रक्षा उपकरणों के निर्माण को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे भारत की अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। पुतिन का यह अटूट भरोसा इन्हीं ठोस धरातल पर टिके वास्तविक प्रोजेक्ट्स के कारण और भी मजबूत होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां तक अमेरिका और भारत के बढ़ते संबंधों का प्रश्न है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुतिन की बेबाक टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में रूस की परिपक्वता को दर्शाती है। आज भारत क्वाड जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठनों का सक्रिय सदस्य है जिसमें अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। पश्चिमी कूटनीतिक विश्लेषकों का अक्सर यह मानना रहा है कि भारत की अमेरिका से यह बढ़ती नजदीकी रूस को खटकती है और इससे दोनों के रिश्ते खराब हो सकते हैं। परंतु रूसी राष्ट्रपति ने अपने इस स्पष्ट बयान से इस सारे भ्रम को पूरी तरह से तोड़ दिया है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रूस यह गहराई से जानता है कि भारत हिंद प्रशांत क्षेत्र में अपने सामरिक हितों की रक्षा और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए अमेरिका के साथ खड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि भारत रूस के खिलाफ किसी भी पश्चिमी एजेंडे का हिस्सा बन जाएगा। इसके विपरीत भारत शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक्स जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मंचों पर भी रूस के साथ मजबूती से कदमताल कर रहा है। वर्ष </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> में ब्रिक्स का जो ऐतिहासिक विस्तार हुआ उसके बाद आज </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में यह संगठन एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का सबसे बड़ा और मजबूत पैरोकार बन चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें भारत और रूस की धुरी सबसे अहम भूमिका निभा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि पुतिन का भारत को लेकर यह बयान महज एक सामान्य राजनीतिक वक्तव्य नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह एक तेजी से उभरती हुई विश्व शक्ति के रूप में भारत के प्रति गहरे सम्मान का सीधा प्रकटीकरण है। पश्चिमी देशों को यह बहुत ही स्पष्ट संदेश है कि दुनिया अब उनके इशारों या उनकी नीतियों पर नहीं चलती। भारत अपने सभी निर्णयों में पूर्णतः स्वतंत्र है और वह अपने रणनीतिक मित्रों का चुनाव केवल अपनी शर्तों और अपने लाभ के आधार पर करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> रूस और भारत की यह प्रगाढ़ साझेदारी आने वाले समय में न केवल एशिया बल्कि संपूर्ण वैश्विक शक्ति संतुलन को बनाए रखने में एक मील का पत्थर साबित होगी। यह दोनों देश मिलकर जिस न्यायपूर्ण और बहुध्रुवीय दुनिया का निर्माण करना चाहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें आपसी सम्मान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संप्रभुता का आदर और एक दूसरे के विकास में बिना शर्त योगदान ही सबसे प्रमुख स्तंभ होंगे। व्लादिमीर पुतिन के शब्दों ने दोनों देशों के बीच की इसी अत्यंत मजबूत नींव को एक बार फिर से दुनिया के सामने पूरी दृढ़ता और विश्वास के साथ रख दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे भविष्य में दोनों देशों के संबंध और भी अधिक ऊंचाइयों को छुएंगे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180668/friendship-between-india-and-russia-will-continue-even-in-the</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180668/friendship-between-india-and-russia-will-continue-even-in-the</guid>
                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 18:30:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1200-675-25531568-thumbnail-16x9-modi.jpg"                         length="90907"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        