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                <title>India Russia Cooperation - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>India Russia Cooperation RSS Feed</description>
                
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                <title>बदलते परिवेश में भी भारत और रूस की मित्रता रहेगी कायम</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक कूटनीति के निरंतर बदलते स्वरूप के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत के संदर्भ में दिया गया हालिया बयान दोनों देशों के बीच की प्रगाढ़ और ऐतिहासिक मित्रता को एक नई ऊर्जा प्रदान करता है। पुतिन ने अत्यंत स्पष्ट शब्दों में भारत को रूस का एक बेहद भरोसेमंद साझेदार करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक मंच पर एक बहुत बड़ा संदेश देते हुए यह भी साफ कर दिया है कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक और कूटनीतिक नजदीकियों का असर मॉस्को और नई दिल्ली के गहरे संबंधों पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा। यह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180668/friendship-between-india-and-russia-will-continue-even-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1200-675-25531568-thumbnail-16x9-modi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक कूटनीति के निरंतर बदलते स्वरूप के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत के संदर्भ में दिया गया हालिया बयान दोनों देशों के बीच की प्रगाढ़ और ऐतिहासिक मित्रता को एक नई ऊर्जा प्रदान करता है। पुतिन ने अत्यंत स्पष्ट शब्दों में भारत को रूस का एक बेहद भरोसेमंद साझेदार करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक मंच पर एक बहुत बड़ा संदेश देते हुए यह भी साफ कर दिया है कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक और कूटनीतिक नजदीकियों का असर मॉस्को और नई दिल्ली के गहरे संबंधों पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा। यह बयान इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि भारत ने अपनी विदेश नीति को किसी एक ध्रुव या गुट तक सीमित नहीं रखा है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज के समय में जब पश्चिमी देश लगातार विकासशील देशों पर अपने एजेंडे थोपने का प्रयास कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब पुतिन का यह कहना कि भारत पर रूस के साथ सहयोग कम करने के लिए डाला जा रहा पश्चिमी दबाव पूरी तरह से व्यर्थ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की सबसे बड़ी वैश्विक स्वीकार्यता है। यह बयान केवल दो नेताओं या दो देशों की सरकारों के बीच का कूटनीतिक संवाद नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह एक बदलते हुए विश्व के शक्ति संतुलन का बहुत ही सजीव चित्रण है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रूस और भारत के कूटनीतिक रिश्तों की बुनियाद कई दशकों के विश्वास और आपसी सहयोग पर टिकी है। वर्ष </span>1971<span lang="hi" xml:lang="hi"> की शांति और मैत्री संधि से लेकर आज </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक के सफर में दोनों देशों ने कई वैश्विक उतार चढ़ाव देखे हैं। जब भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को समर्थन की आवश्यकता पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी वीटो शक्ति का इस्तेमाल कर भारत का साथ दिया है। कश्मीर का मुद्दा हो या फिर आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस हमेशा एक सच्चे मित्र की भांति भारत के साथ खड़ा रहा है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यही कारण है कि आज की सदी में भी यह रिश्ता मात्र कूटनीतिक समझौतों का मोहताज नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह दोनों देशों की जनता के बीच पनपे एक अटूट भावनात्मक जुड़ाव का भी प्रतीक है। पुतिन की बातों में इसी ऐतिहासिक विश्वास की झलक मिलती है। उन्हें इस बात का भलीभांति भान है कि भारत किसी भी बाहरी देश के दबाव में आकर अपने पुराने और सच्चे मित्र के साथ संबंधों में कोई भी कटौती नहीं करेगा। भारत की जनता और भारत के नीति निर्माता दोनों ही इस बात को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं कि संकट के समय में किसने उनका साथ दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी </span>2022<span lang="hi" xml:lang="hi"> में शुरू हुए यूक्रेन संकट के बाद से ही पश्चिमी देशों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूस पर कई तरह के कड़े आर्थिक और कूटनीतिक प्रतिबंध लगाए हैं। इन पश्चिमी देशों ने भारत पर भी यह भारी दबाव बनाया कि वह रूस के साथ अपने व्यापारिक संबंध सीमित करे और वहां से कच्चे तेल की खरीद को रोक दे। लेकिन भारत ने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया कि उसकी नीतियां उसके अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार तय होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि पश्चिमी देशों के फरमानों से। भारत ने न केवल रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए उसे कई गुना बढ़ा भी दिया। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कुछ वर्षों में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार ने </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर लिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि दोनों देशों द्वारा तय किए गए </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> के लक्ष्य से बहुत पहले ही हासिल कर लिया गया। आज रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन चुका है। भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का लगभग </span>40<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत हिस्सा रूस से आयात कर रहा है। यह आंकड़ा इस बात को साबित करता है कि पश्चिमी देशों की धमकियां भारत के इरादों को डिगा नहीं पाईं और भारत ने अपने नागरिकों के हितों को सर्वोपरि रखा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक मोर्चे पर पुतिन द्वारा भारत के तीव्र विकास की जो विशेष रूप से प्रशंसा की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह भी अत्यंत महत्वपूर्ण और ध्यान देने योग्य है। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी विकास दर लगातार </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत के आस पास बनी हुई है। देश में हो रहे भारी बुनियादी ढांचे के निर्माण और तकनीकी विकास ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रूस यह भलीभांति समझता है कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका एक प्रमुख विकास इंजन की तरह होने वाली है। ऐसे में रूस के लिए भारत सिर्फ एक पारंपरिक हथियार खरीदार नहीं रह गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष और विनिर्माण क्षेत्र में एक विशाल बाजार और सहयोगी बन गया है। दोनों देश अपनी मुद्राओं यानी रुपये और रूबल में व्यापार करने की दिशा में भी लगातार काम कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में पश्चिमी मुद्राओं के एकाधिकार को चुनौती दी जा सके और दोनों देशों के व्यापारियों को विदेशी मुद्रा के उतार चढ़ाव से बचाया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा क्षेत्र की बात करें तो भारत और रूस का सहयोग केवल आयात और निर्यात के पुराने मॉडल तक सीमित नहीं है। आज यह दोनों देश ब्रह्मोस मिसाइल जैसे अत्याधुनिक हथियारों का संयुक्त रूप से निर्माण कर रहे हैं जो कि पूरी दुनिया में अपनी तरह की सबसे बेहतरीन मिसाइल मानी जाती है। इसके अलावा एस </span>400<span lang="hi" xml:lang="hi"> वायु रक्षा प्रणाली की आपूर्ति भी दोनों देशों के बीच हुए एक ऐतिहासिक सौदे का हिस्सा है</span>, </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे पूरा करने के लिए भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित खतरे की भी बिल्कुल परवाह नहीं की। भारत में मेक इन इंडिया पहल के तहत कलाश्निकोव राइफल से लेकर अन्य कई रूसी रक्षा उपकरणों के निर्माण को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे भारत की अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। पुतिन का यह अटूट भरोसा इन्हीं ठोस धरातल पर टिके वास्तविक प्रोजेक्ट्स के कारण और भी मजबूत होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां तक अमेरिका और भारत के बढ़ते संबंधों का प्रश्न है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुतिन की बेबाक टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में रूस की परिपक्वता को दर्शाती है। आज भारत क्वाड जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठनों का सक्रिय सदस्य है जिसमें अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। पश्चिमी कूटनीतिक विश्लेषकों का अक्सर यह मानना रहा है कि भारत की अमेरिका से यह बढ़ती नजदीकी रूस को खटकती है और इससे दोनों के रिश्ते खराब हो सकते हैं। परंतु रूसी राष्ट्रपति ने अपने इस स्पष्ट बयान से इस सारे भ्रम को पूरी तरह से तोड़ दिया है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रूस यह गहराई से जानता है कि भारत हिंद प्रशांत क्षेत्र में अपने सामरिक हितों की रक्षा और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए अमेरिका के साथ खड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि भारत रूस के खिलाफ किसी भी पश्चिमी एजेंडे का हिस्सा बन जाएगा। इसके विपरीत भारत शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक्स जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मंचों पर भी रूस के साथ मजबूती से कदमताल कर रहा है। वर्ष </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> में ब्रिक्स का जो ऐतिहासिक विस्तार हुआ उसके बाद आज </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में यह संगठन एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का सबसे बड़ा और मजबूत पैरोकार बन चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें भारत और रूस की धुरी सबसे अहम भूमिका निभा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि पुतिन का भारत को लेकर यह बयान महज एक सामान्य राजनीतिक वक्तव्य नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह एक तेजी से उभरती हुई विश्व शक्ति के रूप में भारत के प्रति गहरे सम्मान का सीधा प्रकटीकरण है। पश्चिमी देशों को यह बहुत ही स्पष्ट संदेश है कि दुनिया अब उनके इशारों या उनकी नीतियों पर नहीं चलती। भारत अपने सभी निर्णयों में पूर्णतः स्वतंत्र है और वह अपने रणनीतिक मित्रों का चुनाव केवल अपनी शर्तों और अपने लाभ के आधार पर करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> रूस और भारत की यह प्रगाढ़ साझेदारी आने वाले समय में न केवल एशिया बल्कि संपूर्ण वैश्विक शक्ति संतुलन को बनाए रखने में एक मील का पत्थर साबित होगी। यह दोनों देश मिलकर जिस न्यायपूर्ण और बहुध्रुवीय दुनिया का निर्माण करना चाहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें आपसी सम्मान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संप्रभुता का आदर और एक दूसरे के विकास में बिना शर्त योगदान ही सबसे प्रमुख स्तंभ होंगे। व्लादिमीर पुतिन के शब्दों ने दोनों देशों के बीच की इसी अत्यंत मजबूत नींव को एक बार फिर से दुनिया के सामने पूरी दृढ़ता और विश्वास के साथ रख दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे भविष्य में दोनों देशों के संबंध और भी अधिक ऊंचाइयों को छुएंगे।</span></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 18:30:50 +0530</pubDate>
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