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                <title>Fake Video Allegation - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>मधु किश्वर ने पीएम पर भ्रामक वीडियो किया था साझा, हाईकोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा करने के मामले में फंसी प्रसिद्ध लेखिका और शिक्षाविद् मधु पूर्णिमा किश्वर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस अमन चौधरी की अदालत ने माना कि मामले की परिस्थितियां अग्रिम जमानत देने के लिए उपयुक्त नहीं हैं और जांच के हित में हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता से इन्कार नहीं किया जा सकता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> मधु किश्वर ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी। उनके खिलाफ चंडीगढ़</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180383/madhu-kishwar-had-shared-a-misleading-video-on-pm"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/5660-1780059936803_m.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा करने के मामले में फंसी प्रसिद्ध लेखिका और शिक्षाविद् मधु पूर्णिमा किश्वर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस अमन चौधरी की अदालत ने माना कि मामले की परिस्थितियां अग्रिम जमानत देने के लिए उपयुक्त नहीं हैं और जांच के हित में हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता से इन्कार नहीं किया जा सकता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> मधु किश्वर ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी। उनके खिलाफ चंडीगढ़ के सेक्टर-26 थाना में मामला दर्ज है। याचिका में मधु किश्वर की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने केवल 14 सेकंड का एक वीडियो री-ट्वीट किया था। उनका कहना था कि इसमें कोई दुर्भावना नहीं थी और जालसाजी अथवा वीडियो तैयार करने से उनका कोई संबंध नहीं है। वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया कि यह केवल साधारण री-ट्वीट का मामला नहीं है। जांच में सामने आया कि संबंधित वीडियो पहले अन्य सोशल मीडिया मंचों पर डाला गया था लेकिन मधु किश्वर ने उसे डाउनलोड कर अपने एक्स अकाउंट से दोबारा पोस्ट किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">प्रशासन ने अदालत को बताया कि उनके लाखों फॉलोअर्स होने के कारण वीडियो को व्यापक प्रसार मिला और उसे करीब 1.74 लाख व्यूज प्राप्त हुए। इससे भ्रामक सूचना फैलाने और एक सांविधानिक पद की छवि को नुकसान पहुंचाने में मदद मिली। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ है कि जांच एजेंसी की ओर से भेजे गए नोटिसों के बावजूद याचिकाकर्ता जांच में शामिल नहीं हुईं जबकि अन्य सह-आरोपी जांच में शामिल हो चुके हैं। कोर्ट ने इसे उनके आचरण का महत्वपूर्ण पहलू माना।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि रचनात्मक आलोचना और सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति अथवा सांविधानिक पद के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण टिप्पणी के बीच स्पष्ट अंतर है। अदालत के अनुसार, बड़े सोशल मीडिया प्रभाव वाले व्यक्तियों की पोस्ट का व्यापक असर पड़ सकता है और ऐसी सामग्री सामाजिक सौहार्द तथा सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। इन सभी तथ्यों, जांच की आवश्यकता और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों में तय सिद्धांतों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने मधु किश्वर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।l</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 19:00:12 +0530</pubDate>
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