<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/93102/manoj-kumar-aggarwal" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>मनोज कुमार अग्रवाल - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/93102/rss</link>
                <description>मनोज कुमार अग्रवाल RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सिर्फ कठोर कानून बनाना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है! </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">परीक्षा पेपर लीक की समस्या का स्थायी समाधान तकनीकी सुधार, सख्त कानूनी कार्रवाई, प्रशासनिक पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण के समन्वय से ही संभव है। भारत सरकार ने हाल ही में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करके दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल और ₹50 लाख तक के जुर्माने जैसे कड़े प्रावधान किए हैं, लेकिन केवल कानून ही इसका अंतिम इलाज नहीं है।क्या सिर्फ सख्त कानून या सख्त सजा का प्रावधान करने से कोई अपराध रूक सका? बलात्कार हत्या के लिए मृत्यु दंड की सजा का प्रावधान होने के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184327/just-making-strict-laws-is-not-the-solution-to-any"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">परीक्षा पेपर लीक की समस्या का स्थायी समाधान तकनीकी सुधार, सख्त कानूनी कार्रवाई, प्रशासनिक पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण के समन्वय से ही संभव है। भारत सरकार ने हाल ही में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करके दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल और ₹50 लाख तक के जुर्माने जैसे कड़े प्रावधान किए हैं, लेकिन केवल कानून ही इसका अंतिम इलाज नहीं है।क्या सिर्फ सख्त कानून या सख्त सजा का प्रावधान करने से कोई अपराध रूक सका? बलात्कार हत्या के लिए मृत्यु दंड की सजा का प्रावधान होने के बावजूद इन वारदातों पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका! अंधी व्यवस्था ने उस आरोपी धनंजय को फांसी दी जिस के अपराध को अंजाम देने के खिलाफ पचास संदेह मौजूद हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">निर्भया जैसी वारदातों को सख्त कानून बनाने के बावजूद नहीं रोका जा सका। फिर परीक्षा लीक को कानून बना कर रोका जा सकेगा? विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा से मोदी सरकार का महत्वपूर्ण विधेयक जो एंटी पेपरलीक को लेकर कानून को सख्त बनाये जाने से सम्बन्धित है ध्वनिमत से पास हो गया है। अब राज्यसभा में यह विधेयक पेश किया जायेगा। वहां भी पास हो ही जायेगा। सरकार का कहना है कि एंटी पेपर लीक कानून को और सख्त बनाने के उद्देश्य से लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 लाया गया है। जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी और अन्य अनुचित गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> इस संशोधित कानून में दोषियों के खिलाफ पहले से अधिक कठोर दंड, आर्थिक जुर्माना और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। सरकार का दावा है कि यह कानून प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाएगा और लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद करेगा।आपको पता है कि नीट के पेपर लीक को लेकर जिस प्रकार से देश भर में युवाओं छात्रों में माहौल बना  सरकार ने पैदा आक्रोश को दबाने के लिए फौरी उपचार बतौर इस विधेयक को ऐसे समय ड्राफ्ट किया है। तब जबकि जंतर-मंतर पर  छात्र आंदोलित थे और वे केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">छात्रों, युवाओं के प्रदर्शन व मांगों के बीच धर्मेन्द्र प्रधान का शिक्षामंत्री के पद से इस्तीफा तो हो गया। लेकिन पेपरलीक, परीक्षाओं में अनियमितता शिक्षा व्यवस्था सिर्फ न तो इस्तीफे से रूकने वाली है और नही उसको लेकर बनाये गए सख्त कानूनों से ही रूकेगा। देश में कानून तो बहुत से हैं। वह चाहे चोरी, छेड़छाड़ का हो, भ्रष्टाचार, रिश्वत लेने-देने, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा का या हत्या का, खाद्य पदार्थों में मिलावट का हो या नकली दवाएं बेचे जाने का। कानून की कोई कमी इस देश में नहीं हैं। सवाल यह है कि इतने कानूनों के बावजूद व्यवस्था में बदलाव क्यों नहीं हो पा रहा है। क्योंकि यह कतई नहीं माना जा सकता है कि उसी व्यवस्था में शामिल लोगों के बिना पेपरलीक हो सकता है या परीक्षा में अनियमितता हो सकती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जहां तक शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली का प्रश्न है, पेपरलीक और परीक्षा में अनियमितता सिर्फ इन कारणों से नहीं होती है कि इन अपराधों के लिए दंडित करने के लिए कोई कानून नहीं है। यह तो व्यवस्था की विसंगतियों और कुछ लोगों के गठजोड़ से अत्यधिक मुनाफा कमाने और कुछ लोगों को अनुचित लाभ दिलाने से जुड़े प्रश्न हैं। यदि कुछ वर्षों में देश में कोचिंग संस्थानों का व्यापार तेजी से बढ़ा है। क्या इसके बारे में भी सरकार ने कभी सोचा है कि आखिर वे कौन से कारण हैं कि देश में शिक्षा की व्यवस्था दिनों दिन गिरती जा रही है। निजी संस्थानों की बाढ़ आ रही है। सरकारी संस्थान डूब रहे हैं। सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं, उनमें शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था ही नहीं है, संसाधन विहीन है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> क्या कारण है कि कोचिंग संस्थान फल-फूल रहे हैं और स्कूल कालेजों में हो रही पढ़ाई उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुकूल नहीं बना पाती है और छात्र अपनी रेगुलर पढ़ाईछोड़कर कोचिंग संस्थाओं में भारी भरकम फीस जमा करके प्रवेश लेते हैं और तैयारी करते हैं। मां बाप और अभिभावक भी बच्चों के भविष्य के लिए सब कुछ दांव पर लगा देते हैं। इसी प्रकार प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रवेश परीक्षाओं और नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं में भी जब पेपरलीक होता है तो उन छात्रों और युवाओं की पीड़ा देखी जा सकती है जो बड़ी उम्मीदों से तैयारी करते हुए परीक्षाएं देते हैं लेकिन उनका परिणाम नहीं आता है। पेपरलीक होने की वजह से परीक्षा कैसिल हो जाती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> दोबारा जब करायी जाती है तब तक बहुत समय गुजर चुका होता है। धन भी जाता है और बहुत बार आयु भी निकल चुकी होती है। यही कारण है कि जंतर-मंतर पर जो आक्रोश उभर कर सामने आया वह सिर्फ नीट परीक्षा तक सीमित नहीं था और न ही सिर्फ नीट दिए हुए या उससे प्रभावित लोग ही जुटे। यह पूरी व्यवस्था में घुले भ्रष्टाचार का परिणाम था जो वर्षों से धीरे-धीरे सुलग रहा था और जंतर-मंतर पर आकर फूट पड़ा था। सरकार को चाहिए कि शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण और सर्वसुलभ ही न बनाये बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में फैले भ्रष्टाचार पर नकेल डाले जो सिर्फ कानून से नहीं हो सकता है। सवाल तो यह भी है कि आखिर सरकार शिक्षा के लिए बजट में वृद्धि क्यों नहीं करती है कि इसके लिए सरकार के तौर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ करायी जा सके। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन करना होगा। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पेपर लीक को रोकने के लिए  प्रमुख रणनीतियों को लागू किया जाना आवश्यक है इसके तहत सबसे पहला कदम आधुनिक तकनीक का उपयोग डिजिटल प्रश्न पत्र वितरण: पेपर को छापने और गाड़ियों में ले जाने के बजाय, परीक्षा से ठीक आधा घंटा पहले केंद्रों पर एन्क्रिप्टेड डिजिटल फाइल भेजी जाए।ब्लॉकचेन और एडवांस एन्क्रिप्शन: प्रश्न पत्रों को सुरक्षित रखने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग किया जाए जिससे डिजिटल फाइल में किसी भी छेड़छाड़ का तुरंत पता चल सके। दूसरा कदम एआई  निगरानी: परीक्षा केंद्रों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  आधारित कैमरों से रियल-टाइम निगरानी की जाए ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके।डिजिटल ऑडिट ट्रेल: प्रश्न पत्र को कब, किसने और कहाँ से एक्सेस किया, इसका पूरा डिजिटल रिकॉर्ड (लॉग) रखा जाए ताकि जवाबदेही तय हो सके। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तीसरा कदम प्रशासनिक एवं परीक्षा संचालन में सुधार चरणबद्ध ऑनलाइन परीक्षाएं : बड़ी परीक्षाओं (जैसे नीट या बड़ी भर्ती परीक्षाएं) को एक ही दिन कराने के बजाय जेईई मेन्स  की तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट के माध्यम से कई सत्रों  में आयोजित किया जाए।सुरक्षित प्रिंटिंग कमांड: परीक्षा केंद्रों पर ही हाई-स्पीड बायोमेट्रिक प्रिंटर लगे हों और परीक्षा से कुछ मिनट पहले 'ऑन-डिमांड' प्रिंट कमांड देकर पेपर निकाला जाए।विश्वसनीय पेपर सेटर्स (इंटरनल सिक्योरिटी): आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामाकोटी (पीएम टास्क फोर्स एक्सपर्ट) के अनुसार, लीक अक्सर 'सोर्स' (पेपर बनाने वालों) से ही हो जाता है। इसलिए, प्रश्न पत्र बनाने वाले और उसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों की कड़ी पृष्ठभूमि जांच और गोपनीयता अनिवार्य होनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">चौथा कदम सख्त कानूनी और संस्थागत उपाय त्वरित अदालतें और स्पेशल टास्क फोर्स: पेपर लीक मामलों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स  का गठन हो और फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए दोषियों को तुरंत सजा मिले।सर्विस प्रोवाइडर्स पर शिकंजा: परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी कंपनियों और परीक्षा केंद्रों को गड़बड़ी पाए जाने पर हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाए और उनकी संपत्ति जब्त की जाए। योग्यता-आधारित रोजगार व्यवस्था डिग्री के बजाय स्किल टेस्ट: यदि सरकारी और निजी नौकरियों में भर्ती का आधार केवल एक लिखित परीक्षा या डिग्री न होकर व्यावहारिक योग्यता, कौशल परीक्षण  और प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो हो, तो एकल परीक्षा का दबाव और उसमें धोखाधड़ी करने की होड़ अपने आप कम हो जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184327/just-making-strict-laws-is-not-the-solution-to-any</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/184327/just-making-strict-laws-is-not-the-solution-to-any</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 22:19:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/images3.jpg"                         length="59697"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यह बर्बरता भरी जहरीली मानसिकता कहां से जन्म लेती है? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश के कई इलाकों में जिस तरह की सांप्रदायिक नफरत और प्रतिशोध से भरी वारदातें सामने आती हैं उस से लगता है कि इन वारदातों के पीछे कोई ऐसी पूरी सुनियोजित साजिश रहती है जो नफरत और खूनी दरिंदगी भरी मानसिकता का बीजारोपण करती है पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इस से सटे उत्तर प्रदेश के  गाजियाबाद जिले में ऐसी कई बर्बरता भरी वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है जिनसे लगता है कि कानूनी सख्ती के बावजूद दरिंदों में पुलिस और कानून का रंचमात्र भय नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ताज़ा घटनाक्रम में गाजियाबाद से एक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180375/where-does-this-barbaric-poisonous-mentality-originate-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/6a19794db4168-tension-in-the-area-following-the-murder-of-17-year-old-surya-chauhan-photo-itg-293224395-16x9.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के कई इलाकों में जिस तरह की सांप्रदायिक नफरत और प्रतिशोध से भरी वारदातें सामने आती हैं उस से लगता है कि इन वारदातों के पीछे कोई ऐसी पूरी सुनियोजित साजिश रहती है जो नफरत और खूनी दरिंदगी भरी मानसिकता का बीजारोपण करती है पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इस से सटे उत्तर प्रदेश के  गाजियाबाद जिले में ऐसी कई बर्बरता भरी वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है जिनसे लगता है कि कानूनी सख्ती के बावजूद दरिंदों में पुलिस और कानून का रंचमात्र भय नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ताज़ा घटनाक्रम में गाजियाबाद से एक बेहद सनसनीखेज और कलेजा कँपा देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ खोड़ा थाना क्षेत्र में बकरीद के दिन एक 17 वर्षीय हिंदू किशोर, सूर्या चौहान की उसके ही पूर्व परिचित मुस्लिम दोस्तों ने बेरहमी से चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने से ठीक पहले कट्टरपंथी हमलावरों ने पीड़ित से पूछा, “क्या तुमने कभी बकरा हलाल होते देखा है? आज तुझे दिखाते हैं।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आरोप है कि यह कहते ही उन्होंने सूर्या पर ताबड़तोड़ चाकुओं से हमला कर दिया। नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान तड़प-तड़प कर इस हिंदू लड़के ने दम तोड़ दिया। पुलिस की प्राथमिकी इस पूरी खौफनाक साजिश की गवाही दे रही है। पुलिस ने रविवार के तड़के मुख्य आरोपी असद को मुठभेड़ में ढेर कर दिया है इस से पहले 3 नामजद आरोपितों को गिरफ्तार किया और 2 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें मृतक सूर्या चौहान मूल रूप से एटा का रहने वाला था। वह नवनीत विहार, खोड़ा में अपनी माँ, बड़े भाई यश चौहान और छोटी बहन के साथ रहता था। उसके पिता कौशलेंद्र की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। सूर्या 11वीं कक्षा का छात्र था। जानकारी के मुताबिक, करीब 8 महीने पहले सूर्या का पड़ोस में रहने वाले असद नाम के युवक से किसी बात पर मामूली विवाद हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए असद ने बकरीद के पवित्र दिन को चुना। 28 मई की दोपहर को असद ने सूर्या को फोन किया। उसने सूर्या को बकरीद की पार्टी के बहाने मिलने के लिए चौधरी स्कूल के पास वाली गली नंबर 2 में बुलाया। सूर्या अपने दोस्त आयुष और विक्की के साथ असद से मिलने पहुँचा था। विक्की और आयुष ने आँखों देखा हाल बताते हुए बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया। विक्की ने बताया कि जैसे ही वे गली में पहुँचे, वहाँ पहले से ही असद, नवाब, फरहान, आतिफ और सारिक समेत 5 से 6 मुस्लिम युवक हथियारों के साथ घात लगाकर बैठे थे बताया जा रहा है कि आते ही उन्होंने सूर्या को चारों तरफ से दबोच लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद उन्होंने सांप्रदायिक और हिंसक टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या कभी बकरा हलाल होते देखा है? चश्मदीदों के मुताबिक, आरोपितों ने चिल्लाते हुए कहा कि आज बकरीद है और आज कुर्बानी इस हिंदू लड़के की देंगे। यह कहते ही सभी आरोपितों ने सूर्या पर बड़े चाकुओं से हमला बोल दिया। उन्होंने सूर्या के पेट, सीने और शरीर के अन्य हिस्सों पर ताबड़तोड़ कई वार किए। हमला इतना बर्बर था कि चाकुओं की गोदने की वजह से सूर्या की आंतें तक बाहर आ गईं।मौके पर चीख-पुकार और शोर मच गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शोर सुनकर पास ही मौजूद सूर्या का भाई यश चौहान और उसकी माँ दौड़ते हुए घटना स्थल की तरफ भागे। परिजनों को अपनी तरफ आता देख सभी मुस्लिम हमलावर खून से लथपथ सूर्या को तड़पता हुआ छोड़कर मौके से फरार हो गएपरिजन आनन-फानन में गंभीर रूप से घायल सूर्या को नोएडा के सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल लेकर पहुँचे। वहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद अगले दिन यानी 29 मई को दोपहर करीब 12 बजे सूर्या ने दम तोड़ दिया। सूर्या की मौत की खबर जैसे ही खोड़ा इलाके में फैली, वहाँ भारी रोष और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार अपने बेटे को याद कर इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। खोड़ा नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष रीना भाटी और विभिन्न हिंदू संगठनों के लोग तुरंत मौके पर जमा हो गए मृतक के भाई यश चौहान द्वारा दी गई तहरीर जानलेवा हमला कर हत्या करने के प्रयास के संबंध में दर्ज कराई गई थी प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि 28 मई को दोपहर करीब 3:30 बजे शिकायतकर्ता का भाई सूर्या अपने दोस्त आयुष (पुत्र मनोज भारती, निवासी नवनीत विहार, खोड़ा) के साथ जा रहा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तभी खोड़ा की शर्मा डेरी वाली गली में लोकप्रिय विहार का रहने वाला अशद (पुत्र नवाब) मिला।अशद ने अचानक सूर्या के साथ गाली-गलौज करते हुए झगड़ा शुरू कर दिया और फिर जान से मारने की नीयत से उसके पेट में चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस जानलेवा हमले में सूर्या गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए नोएडा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़ित पक्ष ने पुलिस से इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना स्थल पर मौजूद हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं में इस हत्या को लेकर गहरा आक्रोश है। उन्होंने योगी सरकार और स्थानीय प्रशासन से माँग की है कि सभी फरार आरोपितों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। हिंदू समाज का कहना है कि यह केवल दो गुटों की लड़ाई नहीं, बल्कि बहुसंख्यक समाज की सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। विभिन्न संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्य आरोपित असद समेत सभी दोषियों के घरों पर तुरंत बुलडोजर नहीं चलाया गया और उन्हें सख्त सजा नहीं मिली, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल पुलिस स्थिति को नियंत्रण में बता रही है और मुख्य आरोपित की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि यूपी के गाजियाबाद और इस से सटे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के आस-पास के क्षेत्रों में हत्या के कुछ हालिया मामलों में मुस्लिम समुदाय से जुड़े आरोपियों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, पुलिस जांच और आधिकारिक रिपोर्टों में इन घटनाओं को सुनियोजित या समुदाय-विशिष्ट घृणा  के बजाय मुख्य रूप से आकस्मिक विवादों, पुरानी दुश्मनी या आपसी रंजिश का परिणाम बताया गया है।आपको दो माह पहले जेजे कालोनी उत्तम नगर की नृशंसता भरी वारदात याद होगी यहां हिन्दू त्योहार होली के दिन रंग-बिरंगे पानी के छींटे पड़ने और गुब्बारा लगने को लेकर दो समुदाय से जुड़े परिवारों के बीच विवाद हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना में 26 वर्षीय तरुण कुमार की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में हत्या का केस दर्ज कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसी दिन यानि होली के दिन ही सिगरेट के विवाद में सूरज नामक 26 वर्षीय हिंदू युवक की हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में सादिक नामक आरोपी को गिरफ्तार कर कार्रवाई की। और अब दिल्ली से सटे गाजियाबाद में बकरीद के दिन एक 16 वर्षीय छात्र सूर्या चौहान की उसके ही परिचित दोस्त अशद ने साथियों के साथ मिलकर चाकू गोदकर हत्या कर दी गई है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यकीनन मौजूदा वारदात नाबालिग में लड़के सूर्या की बकरीद के दिन जिस तरह आतातायी हमलावरों ने हत्या की है वह अराजक व कम्युनल अपराधियों के बढ़ते हौसले का सबूत है घटना पर दुख जताते हुए और पुलिस की निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए मृतक की मां ने कहा, "मैं घर पर नहीं थी, ड्यूटी पर थी। किसी ने मुझे फोन करके बताया कि मेरे बेटे को चाकू मार दिया गया है। जब मैं आई, तो मैंने शाम 7 बजे के करीब अपने बेटे का चेहरा देखा।  मुझे इंसाफ़ चाहिए। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल पहुंचने के बाद जो कुछ देखा, उसे याद करते हुए मृतक की मौसी सुनीता ने कहा, "मैं सबसे पहले अस्पताल गई थी। मैंने उन्हें वहां देखा। वे यह साबित करना चाहते थे कि पहले बकरे की कुर्बानी दी और अब वे इंसान की कुर्बानी देंगे। बकरीद के दिन मेरे बच्चे को धोखे से घर से बुलाया गया। फिर उससे पूछा गया कि बकरा कैसे काटा जाता है। हिंदू बच्चों को ऐसी बातों के बारे में क्या पता? हमारे बच्चों ने कभी खून-खराबा नहीं देखा। वे क्या कहते? यही कहते कि उन्होंने कभी नहीं देखा। फिर उसके पेट में चाकू घोंप दिया गया और उसकी जिंदगी वहीं खत्म हो गई।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सवाल यह है कि इस तरह की दरिंदगी और बर्बरता की सोच को कौन उकसा रहा है? बकरीद से दो दिन पहले ही गाजियाबाद से सटे हापुड़ जनपद के पिलखुवा में एक शनिदेव प्रतिमा को एक समुदाय विशेष के एक जेहादी ने तोड़ दिया बाद में सीसीटीवी कैमरे के जरिए मिले सबूत से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। इन दिनों सोशल मीडिया पर भी मनमानी घृणा और विद्वेष की बातें बहुलता से वायरल हो रहीं हैं यह एक स्वस्थ समाज की संरचना को तोड़ रहा है और परस्पर जहरीली सोच तैयार कर रहा है सरकार को गंभीरता से सख्त कदम उठाने चाहिए और इस जहर की फसल को बीजनाश करनी चाहिए ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180375/where-does-this-barbaric-poisonous-mentality-originate-from</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180375/where-does-this-barbaric-poisonous-mentality-originate-from</guid>
                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:45:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/6a19794db4168-tension-in-the-area-following-the-murder-of-17-year-old-surya-chauhan-photo-itg-293224395-16x9.webp"                         length="28882"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        