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                <title>Social Cohesion - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Social Cohesion RSS Feed</description>
                
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                <title>बच्चा गांव में कल होगा भव्य जलसा, देश के नामचीन उलेमा करेंगे शिरकत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मंडरो, साहिबगंज, झारखंड:- </strong>   मंडरो प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बच्चा गांव में कल 20 जून को चार मुहर्रम के अवसर पर एक भव्य धार्मिक जलसा का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़े-बड़े औलामा-ए-कराम और इस्लामी विद्वान शिरकत करेंगे तथा दीन-ए-इस्लाम की शिक्षाओं पर रोशनी डालेंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बच्चा गांव के इमाम शाहबाज कमर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह जलसा चार मुहर्रम की बरकत और धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के पहुंचने की उम्मीद है और आयोजन की तैयारियां जोर-शोर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181523/a-grand-jalsa-will-be-held-in-bacha-village-tomorrow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-7.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मंडरो, साहिबगंज, झारखंड:- </strong>  मंडरो प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बच्चा गांव में कल 20 जून को चार मुहर्रम के अवसर पर एक भव्य धार्मिक जलसा का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़े-बड़े औलामा-ए-कराम और इस्लामी विद्वान शिरकत करेंगे तथा दीन-ए-इस्लाम की शिक्षाओं पर रोशनी डालेंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बच्चा गांव के इमाम शाहबाज कमर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह जलसा चार मुहर्रम की बरकत और धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के पहुंचने की उम्मीद है और आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जलसे में उलेमा-ए-कराम अपने बयान के माध्यम से इंसानियत, भाईचारा, अमन-शांति और इस्लामी तालीमात पर चर्चा करेंगे। आयोजन समिति ने क्षेत्र के लोगों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर जलसे को कामयाब बनाने की अपील की है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों में जलसे को लेकर उत्साह का माहौल है और दूर-दराज के इलाकों से भी लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। जलसा की तैयारी में सरदार शमशीर  अंसारी, मास्टर जावेद अंसारी,डॉक्टर रफ़ीक़ अंसारी, एकरामूल अंसारी, इस्लाम अंसारी, दिलदार अंसारी, जुहूरुद्दीन अंसारी, आसमोहम्मद अंसारी, अख्तर अंसारी, शाहबान अंसारी, एहसान अंसारी, महताब अंसारी, मुस्ताक अंसारी,आरिफ अंसारी, अब्दुल हलीम अंसारी, रेज़ाक़ अंसारी, खुर्शीद अंसारी,नसीम अंसारी, इस्माइल अंसारी, जब्बार अंसारी, जमशेद अंसारी, कलाम अंसारी, अब्दुल हाकिम अंसारी, इरसाद अंसारी, तारिक अनवर आदि की अहम भूमिका है।</div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:59:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हिंसा के दुष्चक्र से बाहर निकलने के लिए भरोसे संवाद और न्याय की सबसे बड़ी जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर भारत का सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य मणिपुर पिछले कई वर्षों से अशांति और हिंसा की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक बार फिर कांगपोकपी जिले में हुई दर्दनाक घटना ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि आखिर मणिपुर की आग कब बुझेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हथियारबंद हमलावरों द्वारा एक गांव पर किए गए हमले में चर्च से जुड़े तीन लोगों की हत्या कर दी गई जिनमें सात माह की गर्भवती महिला भी शामिल थी। कई लोग घायल हुए और अनेक घर जलकर राख हो गए। यह घटना केवल तीन व्यक्तियों की मृत्यु भर नहीं है बल्कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180759/the-biggest-need-for-trust-dialogue-and-justice-is-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/shutterstock_2461989209-scaled.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर भारत का सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य मणिपुर पिछले कई वर्षों से अशांति और हिंसा की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक बार फिर कांगपोकपी जिले में हुई दर्दनाक घटना ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि आखिर मणिपुर की आग कब बुझेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हथियारबंद हमलावरों द्वारा एक गांव पर किए गए हमले में चर्च से जुड़े तीन लोगों की हत्या कर दी गई जिनमें सात माह की गर्भवती महिला भी शामिल थी। कई लोग घायल हुए और अनेक घर जलकर राख हो गए। यह घटना केवल तीन व्यक्तियों की मृत्यु भर नहीं है बल्कि उस गहरे सामाजिक विभाजन और अविश्वास का प्रतीक है जिसने मणिपुर को लंबे समय से अपनी गिरफ्त में ले रखा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर की समस्या को केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा मानना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे ऐतिहासिक विवाद जातीय असुरक्षाएं राजनीतिक मतभेद और संसाधनों पर अधिकार को लेकर लंबे समय से चली आ रही प्रतिस्पर्धा भी शामिल है। राज्य में विभिन्न समुदायों के बीच संबंध समय के साथ जटिल होते गए हैं। जब भी कोई हिंसक घटना होती है तो उसका प्रभाव केवल प्रभावित परिवारों तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा हो जाता है। बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है। व्यापार और रोजगार पर असर पड़ता है। सामान्य जनजीवन बाधित हो जाता है और विकास की गति थम जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल की घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि हिंसा का कोई धर्म जाति या समुदाय नहीं होता। गोली और आग केवल जान लेती है। वह यह नहीं देखती कि सामने कौन है और उसकी पहचान क्या है। जब एक गर्भवती महिला हिंसा का शिकार होती है तो उसके साथ एक अजन्मा जीवन भी समाप्त हो जाता है। यह किसी भी सभ्य समाज के लिए गहरी पीड़ा और आत्ममंथन का विषय होना चाहिए। ऐसे समय में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर में लंबे समय से चल रहे संघर्ष ने दोनों प्रमुख समुदायों के बीच अविश्वास की ऐसी खाई पैदा कर दी है जिसे केवल सुरक्षा बलों की तैनाती से नहीं भरा जा सकता। सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है क्योंकि नागरिकों की रक्षा राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है। लेकिन स्थायी शांति केवल हथियारों के बल पर स्थापित नहीं की जा सकती। शांति तब आती है जब लोग एक दूसरे को दुश्मन नहीं बल्कि पड़ोसी और साथी नागरिक के रूप में देखने लगते हैं। इसके लिए संवाद और मेलमिलाप की प्रक्रिया को मजबूत करना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार की भूमिका इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जिसमें सभी समुदाय अपनी बात खुलकर रख सकें और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए। केवल राजनीतिक बयान पर्याप्त नहीं हैं। जमीनी स्तर पर विश्वास बहाली के ठोस प्रयास आवश्यक हैं। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है उन्हें न्याय मिलना चाहिए। दोषियों की पहचान कर निष्पक्ष कार्रवाई की जानी चाहिए। जब लोगों को यह भरोसा होगा कि कानून सभी के लिए समान है तभी व्यवस्था में विश्वास लौटेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि केवल सरकार के प्रयासों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। समाज के विभिन्न वर्गों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। धार्मिक संगठन सामाजिक संस्थाएं बुद्धिजीवी युवा और स्थानीय नेतृत्व शांति की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। चर्च मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल केवल पूजा के केंद्र नहीं बल्कि समाज को जोड़ने वाले मंच भी बन सकते हैं। यदि विभिन्न समुदायों के धार्मिक और सामाजिक नेता मिलकर शांति का संदेश दें तो उसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर की वर्तमान स्थिति यह भी बताती है कि अफवाहें और नफरत फैलाने वाली सूचनाएं कितनी खतरनाक हो सकती हैं। डिजिटल युग में सोशल मीडिया के माध्यम से गलत जानकारी तेजी से फैलती है और लोगों की भावनाओं को भड़का सकती है। इसलिए जिम्मेदार संवाद और तथ्य आधारित जानकारी का प्रसार अत्यंत आवश्यक है। मीडिया को भी अपनी भूमिका संतुलित और संवेदनशील ढंग से निभानी होगी ताकि तनाव कम हो और समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">युवाओं को हिंसा से दूर रखना भी समय की मांग है। संघर्ष और अशांति का सबसे अधिक प्रभाव युवा पीढ़ी पर पड़ता है। यदि उन्हें शिक्षा रोजगार और सकारात्मक अवसर नहीं मिलेंगे तो वे निराशा और कट्टरता की ओर बढ़ सकते हैं। इसलिए विकास और शांति को एक दूसरे का पूरक मानते हुए आगे बढ़ना होगा। स्कूलों कॉलेजों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव और आपसी सम्मान की भावना को बढ़ावा देना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर का इतिहास केवल संघर्ष का इतिहास नहीं है। यह सांस्कृतिक विविधता परंपराओं और सहअस्तित्व की समृद्ध विरासत का भी इतिहास है। सदियों से विभिन्न समुदायों ने यहां साथ रहकर अपनी पहचान को विकसित किया है। आज आवश्यकता इस बात की है कि उस साझा विरासत को याद किया जाए और उसे भविष्य की नींव बनाया जाए। विभाजन की राजनीति और हिंसा का रास्ता अंततः सभी को नुकसान पहुंचाता है जबकि संवाद और सहयोग सभी के लिए बेहतर भविष्य का मार्ग प्रशस्त करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांगपोकपी की घटना ने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया है। निर्दोष लोगों की हत्या और घरों का जलना केवल समाचार नहीं बल्कि उन परिवारों का असहनीय दर्द है जिनकी दुनिया एक पल में बदल गई। इस पीड़ा को समझना और उससे सीख लेना जरूरी है। यदि हर नई घटना के बाद केवल शोक व्यक्त किया जाए और फिर सब कुछ पहले जैसा चलता रहे तो समाधान कभी नहीं निकलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर की आग तब बुझेगी जब भय की जगह विश्वास लेगा। जब प्रतिशोध की जगह संवाद होगा। जब राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ सामाजिक सहभागिता भी जुड़ेगी। जब हर समुदाय यह महसूस करेगा कि उसकी सुरक्षा सम्मान और अधिकार सुरक्षित हैं। और सबसे महत्वपूर्ण तब जब इंसान की पहचान किसी जातीय या सामुदायिक खांचे से पहले एक नागरिक और एक मानव के रूप में की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शांति कोई एक दिन में हासिल होने वाली उपलब्धि नहीं है। यह धैर्य समझदारी और निरंतर प्रयासों का परिणाम होती है। मणिपुर को आज इसी सामूहिक संकल्प की आवश्यकता है। सरकार समाज और दोनों समुदायों को मिलकर आगे बढ़ना होगा। हिंसा का प्रत्येक नया अध्याय राज्य को और पीछे धकेलता है जबकि सुलह और संवाद का हर कदम उसे स्थायी शांति और विकास की दिशा में आगे ले जाता है। अब समय आ गया है कि बंदूक की आवाज को बातचीत की आवाज से बदला जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां एक सुरक्षित शांत और समृद्ध मणिपुर देख सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 19:02:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यह बर्बरता भरी जहरीली मानसिकता कहां से जन्म लेती है? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश के कई इलाकों में जिस तरह की सांप्रदायिक नफरत और प्रतिशोध से भरी वारदातें सामने आती हैं उस से लगता है कि इन वारदातों के पीछे कोई ऐसी पूरी सुनियोजित साजिश रहती है जो नफरत और खूनी दरिंदगी भरी मानसिकता का बीजारोपण करती है पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इस से सटे उत्तर प्रदेश के  गाजियाबाद जिले में ऐसी कई बर्बरता भरी वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है जिनसे लगता है कि कानूनी सख्ती के बावजूद दरिंदों में पुलिस और कानून का रंचमात्र भय नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ताज़ा घटनाक्रम में गाजियाबाद से एक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180375/where-does-this-barbaric-poisonous-mentality-originate-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/6a19794db4168-tension-in-the-area-following-the-murder-of-17-year-old-surya-chauhan-photo-itg-293224395-16x9.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के कई इलाकों में जिस तरह की सांप्रदायिक नफरत और प्रतिशोध से भरी वारदातें सामने आती हैं उस से लगता है कि इन वारदातों के पीछे कोई ऐसी पूरी सुनियोजित साजिश रहती है जो नफरत और खूनी दरिंदगी भरी मानसिकता का बीजारोपण करती है पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इस से सटे उत्तर प्रदेश के  गाजियाबाद जिले में ऐसी कई बर्बरता भरी वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है जिनसे लगता है कि कानूनी सख्ती के बावजूद दरिंदों में पुलिस और कानून का रंचमात्र भय नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ताज़ा घटनाक्रम में गाजियाबाद से एक बेहद सनसनीखेज और कलेजा कँपा देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ खोड़ा थाना क्षेत्र में बकरीद के दिन एक 17 वर्षीय हिंदू किशोर, सूर्या चौहान की उसके ही पूर्व परिचित मुस्लिम दोस्तों ने बेरहमी से चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने से ठीक पहले कट्टरपंथी हमलावरों ने पीड़ित से पूछा, “क्या तुमने कभी बकरा हलाल होते देखा है? आज तुझे दिखाते हैं।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आरोप है कि यह कहते ही उन्होंने सूर्या पर ताबड़तोड़ चाकुओं से हमला कर दिया। नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान तड़प-तड़प कर इस हिंदू लड़के ने दम तोड़ दिया। पुलिस की प्राथमिकी इस पूरी खौफनाक साजिश की गवाही दे रही है। पुलिस ने रविवार के तड़के मुख्य आरोपी असद को मुठभेड़ में ढेर कर दिया है इस से पहले 3 नामजद आरोपितों को गिरफ्तार किया और 2 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें मृतक सूर्या चौहान मूल रूप से एटा का रहने वाला था। वह नवनीत विहार, खोड़ा में अपनी माँ, बड़े भाई यश चौहान और छोटी बहन के साथ रहता था। उसके पिता कौशलेंद्र की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। सूर्या 11वीं कक्षा का छात्र था। जानकारी के मुताबिक, करीब 8 महीने पहले सूर्या का पड़ोस में रहने वाले असद नाम के युवक से किसी बात पर मामूली विवाद हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए असद ने बकरीद के पवित्र दिन को चुना। 28 मई की दोपहर को असद ने सूर्या को फोन किया। उसने सूर्या को बकरीद की पार्टी के बहाने मिलने के लिए चौधरी स्कूल के पास वाली गली नंबर 2 में बुलाया। सूर्या अपने दोस्त आयुष और विक्की के साथ असद से मिलने पहुँचा था। विक्की और आयुष ने आँखों देखा हाल बताते हुए बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया। विक्की ने बताया कि जैसे ही वे गली में पहुँचे, वहाँ पहले से ही असद, नवाब, फरहान, आतिफ और सारिक समेत 5 से 6 मुस्लिम युवक हथियारों के साथ घात लगाकर बैठे थे बताया जा रहा है कि आते ही उन्होंने सूर्या को चारों तरफ से दबोच लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद उन्होंने सांप्रदायिक और हिंसक टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या कभी बकरा हलाल होते देखा है? चश्मदीदों के मुताबिक, आरोपितों ने चिल्लाते हुए कहा कि आज बकरीद है और आज कुर्बानी इस हिंदू लड़के की देंगे। यह कहते ही सभी आरोपितों ने सूर्या पर बड़े चाकुओं से हमला बोल दिया। उन्होंने सूर्या के पेट, सीने और शरीर के अन्य हिस्सों पर ताबड़तोड़ कई वार किए। हमला इतना बर्बर था कि चाकुओं की गोदने की वजह से सूर्या की आंतें तक बाहर आ गईं।मौके पर चीख-पुकार और शोर मच गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शोर सुनकर पास ही मौजूद सूर्या का भाई यश चौहान और उसकी माँ दौड़ते हुए घटना स्थल की तरफ भागे। परिजनों को अपनी तरफ आता देख सभी मुस्लिम हमलावर खून से लथपथ सूर्या को तड़पता हुआ छोड़कर मौके से फरार हो गएपरिजन आनन-फानन में गंभीर रूप से घायल सूर्या को नोएडा के सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल लेकर पहुँचे। वहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद अगले दिन यानी 29 मई को दोपहर करीब 12 बजे सूर्या ने दम तोड़ दिया। सूर्या की मौत की खबर जैसे ही खोड़ा इलाके में फैली, वहाँ भारी रोष और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार अपने बेटे को याद कर इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। खोड़ा नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष रीना भाटी और विभिन्न हिंदू संगठनों के लोग तुरंत मौके पर जमा हो गए मृतक के भाई यश चौहान द्वारा दी गई तहरीर जानलेवा हमला कर हत्या करने के प्रयास के संबंध में दर्ज कराई गई थी प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि 28 मई को दोपहर करीब 3:30 बजे शिकायतकर्ता का भाई सूर्या अपने दोस्त आयुष (पुत्र मनोज भारती, निवासी नवनीत विहार, खोड़ा) के साथ जा रहा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तभी खोड़ा की शर्मा डेरी वाली गली में लोकप्रिय विहार का रहने वाला अशद (पुत्र नवाब) मिला।अशद ने अचानक सूर्या के साथ गाली-गलौज करते हुए झगड़ा शुरू कर दिया और फिर जान से मारने की नीयत से उसके पेट में चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस जानलेवा हमले में सूर्या गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए नोएडा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़ित पक्ष ने पुलिस से इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है।</div>
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<div style="text-align:justify;">घटना स्थल पर मौजूद हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं में इस हत्या को लेकर गहरा आक्रोश है। उन्होंने योगी सरकार और स्थानीय प्रशासन से माँग की है कि सभी फरार आरोपितों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। हिंदू समाज का कहना है कि यह केवल दो गुटों की लड़ाई नहीं, बल्कि बहुसंख्यक समाज की सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। विभिन्न संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्य आरोपित असद समेत सभी दोषियों के घरों पर तुरंत बुलडोजर नहीं चलाया गया और उन्हें सख्त सजा नहीं मिली, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल पुलिस स्थिति को नियंत्रण में बता रही है और मुख्य आरोपित की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। </div>
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<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि यूपी के गाजियाबाद और इस से सटे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के आस-पास के क्षेत्रों में हत्या के कुछ हालिया मामलों में मुस्लिम समुदाय से जुड़े आरोपियों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, पुलिस जांच और आधिकारिक रिपोर्टों में इन घटनाओं को सुनियोजित या समुदाय-विशिष्ट घृणा  के बजाय मुख्य रूप से आकस्मिक विवादों, पुरानी दुश्मनी या आपसी रंजिश का परिणाम बताया गया है।आपको दो माह पहले जेजे कालोनी उत्तम नगर की नृशंसता भरी वारदात याद होगी यहां हिन्दू त्योहार होली के दिन रंग-बिरंगे पानी के छींटे पड़ने और गुब्बारा लगने को लेकर दो समुदाय से जुड़े परिवारों के बीच विवाद हुआ था।</div>
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<div style="text-align:justify;">इस घटना में 26 वर्षीय तरुण कुमार की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में हत्या का केस दर्ज कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसी दिन यानि होली के दिन ही सिगरेट के विवाद में सूरज नामक 26 वर्षीय हिंदू युवक की हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में सादिक नामक आरोपी को गिरफ्तार कर कार्रवाई की। और अब दिल्ली से सटे गाजियाबाद में बकरीद के दिन एक 16 वर्षीय छात्र सूर्या चौहान की उसके ही परिचित दोस्त अशद ने साथियों के साथ मिलकर चाकू गोदकर हत्या कर दी गई है। </div>
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<div style="text-align:justify;">यकीनन मौजूदा वारदात नाबालिग में लड़के सूर्या की बकरीद के दिन जिस तरह आतातायी हमलावरों ने हत्या की है वह अराजक व कम्युनल अपराधियों के बढ़ते हौसले का सबूत है घटना पर दुख जताते हुए और पुलिस की निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए मृतक की मां ने कहा, "मैं घर पर नहीं थी, ड्यूटी पर थी। किसी ने मुझे फोन करके बताया कि मेरे बेटे को चाकू मार दिया गया है। जब मैं आई, तो मैंने शाम 7 बजे के करीब अपने बेटे का चेहरा देखा।  मुझे इंसाफ़ चाहिए। </div>
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<div style="text-align:justify;">एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल पहुंचने के बाद जो कुछ देखा, उसे याद करते हुए मृतक की मौसी सुनीता ने कहा, "मैं सबसे पहले अस्पताल गई थी। मैंने उन्हें वहां देखा। वे यह साबित करना चाहते थे कि पहले बकरे की कुर्बानी दी और अब वे इंसान की कुर्बानी देंगे। बकरीद के दिन मेरे बच्चे को धोखे से घर से बुलाया गया। फिर उससे पूछा गया कि बकरा कैसे काटा जाता है। हिंदू बच्चों को ऐसी बातों के बारे में क्या पता? हमारे बच्चों ने कभी खून-खराबा नहीं देखा। वे क्या कहते? यही कहते कि उन्होंने कभी नहीं देखा। फिर उसके पेट में चाकू घोंप दिया गया और उसकी जिंदगी वहीं खत्म हो गई।"</div>
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<div style="text-align:justify;">सवाल यह है कि इस तरह की दरिंदगी और बर्बरता की सोच को कौन उकसा रहा है? बकरीद से दो दिन पहले ही गाजियाबाद से सटे हापुड़ जनपद के पिलखुवा में एक शनिदेव प्रतिमा को एक समुदाय विशेष के एक जेहादी ने तोड़ दिया बाद में सीसीटीवी कैमरे के जरिए मिले सबूत से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। इन दिनों सोशल मीडिया पर भी मनमानी घृणा और विद्वेष की बातें बहुलता से वायरल हो रहीं हैं यह एक स्वस्थ समाज की संरचना को तोड़ रहा है और परस्पर जहरीली सोच तैयार कर रहा है सरकार को गंभीरता से सख्त कदम उठाने चाहिए और इस जहर की फसल को बीजनाश करनी चाहिए ।</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:45:10 +0530</pubDate>
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