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                <title>Startup India - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>अमेठी में भाजपा कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक सुना पीएम मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> भारतीय जनता पार्टी द्वारा रविवार को जनपद अमेठी के विभिन्न मंडलों एवं बूथों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड का सामूहिक श्रवण उत्साह एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं मातृशक्ति ने सहभागिता कर प्रधानमंत्री के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। भाजपा अमेठी के जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने जगदीशपुर विधानसभा के हलियापुर मंडल के मत्तेपुर स्थित बूथ संख्या-208 पर बूथ समिति एवं कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम का श्रवण किया। वहीं पूर्व जिला अध्यक्ष दयाशंकर यादव एवं दुर्गेश त्रिपाठी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184158/bjp-workers-enthusiastically-listened-to-pm-modis-mann-ki-baat"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/2-3.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> भारतीय जनता पार्टी द्वारा रविवार को जनपद अमेठी के विभिन्न मंडलों एवं बूथों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड का सामूहिक श्रवण उत्साह एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं मातृशक्ति ने सहभागिता कर प्रधानमंत्री के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। भाजपा अमेठी के जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने जगदीशपुर विधानसभा के हलियापुर मंडल के मत्तेपुर स्थित बूथ संख्या-208 पर बूथ समिति एवं कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम का श्रवण किया। वहीं पूर्व जिला अध्यक्ष दयाशंकर यादव एवं दुर्गेश त्रिपाठी ने भी विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री के संबोधन को सुना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला मंत्री आशा वाजपेयी ने मातृशक्ति के साथ कार्यक्रम में भाग लिया, जबकि वरिष्ठ भाजपा नेता गिरीश चंद्र शुक्ला ने शक्ति केंद्र इन्दरिया के बूथ संख्या-61 पर कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम का श्रवण किया। जिला उपाध्यक्ष हिंदेश सिंह, प्रभात शुक्ला तथा जिला प्रवक्ता चंद्रमौली सिंह सहित अनेक पदाधिकारियों ने भी अलग-अलग बूथों पर कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देश के वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके अदम्य साहस, शौर्य और सर्वोच्च बलिदान को स्मरण किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कारगिल के वीर सैनिकों का पराक्रम आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं, स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि भारत का युवा आज वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहा है और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए उत्तर प्रदेश में एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे लगाए जाने के अभियान का विशेष उल्लेख किया और इसे जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने आगामी 'हर घर तिरंगा' अभियान को पूरे उत्साह और सम्मान के साथ सफल बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इस अभियान ने पूरे देश को राष्ट्रभक्ति की अद्भुत भावना से जोड़ा है। इस वर्ष भी प्रत्येक नागरिक अपने घर पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराकर राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करे।कार्यक्रम के उपरांत भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री के 'मन की बात' कार्यक्रम से समाज को सकारात्मक दिशा, प्रेरणा और राष्ट्रहित में कार्य करने की ऊर्जा मिलती है। अमेठी में सभी बूथों पर कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने तथा पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सहभागिता के अभियानों को और अधिक गति देने का संकल्प लिया।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 22:41:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कॉकरोच जनता पार्टी का उभार और युवा आकांक्षाओं की राजनीति में भाजपा की विकासवादी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यहां हर वर्ग को अपनी बात रखने का अधिकार प्राप्त है। समय समय पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों ने देश की नीतियों और जनचर्चाओं को प्रभावित किया है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया के माध्यम से उभरी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) भी इसी लोकतांत्रिक परंपरा का एक नया उदाहरण बनकर सामने आई है। दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित इसके प्रदर्शन ने यह स्पष्ट किया है कि देश का एक वर्ग विशेष रूप से युवा पीढ़ी शिक्षा व्यवस्था रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180817/the-rise-of-the-cockroach-janata-party-and-bjps-evolutionary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/86b5a220-571b-11f1-89a3-d1f559421220.jpg.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यहां हर वर्ग को अपनी बात रखने का अधिकार प्राप्त है। समय समय पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों ने देश की नीतियों और जनचर्चाओं को प्रभावित किया है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया के माध्यम से उभरी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) भी इसी लोकतांत्रिक परंपरा का एक नया उदाहरण बनकर सामने आई है। दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित इसके प्रदर्शन ने यह स्पष्ट किया है कि देश का एक वर्ग विशेष रूप से युवा पीढ़ी शिक्षा व्यवस्था रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करना चाहती है। हालांकि इस आंदोलन को राजनीतिक परिवर्तन की बड़ी लहर मानना जल्दबाजी होगी क्योंकि भारत की राजनीति में जनविश्वास का सबसे मजबूत आधार आज भी विकास सुशासन और स्थिर नेतृत्व है जिसका प्रतिनिधित्व भारतीय जनता पार्टी कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म मूल रूप से सोशल मीडिया पर व्यंग्य और असंतोष की अभिव्यक्ति के रूप में हुआ था। कुछ ही समय में इसने बड़ी संख्या में युवाओं का ध्यान आकर्षित किया। जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्रों और युवा पेशेवरों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता रोजगार के अवसरों और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषय युवाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह मांगें नई नहीं हैं। हर पीढ़ी अपने समय की चुनौतियों को लेकर आवाज उठाती रही है और लोकतंत्र में यह स्वाभाविक भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन किसी भी आंदोलन का मूल्यांकन केवल नारों और भीड़ के आधार पर नहीं किया जा सकता। यह देखना भी आवश्यक है कि देश की वास्तविक परिस्थितियां क्या हैं और सरकार ने उन चुनौतियों के समाधान के लिए क्या प्रयास किए हैं। इस संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का कार्यकाल उल्लेखनीय रहा है। पिछले एक दशक में भारत ने बुनियादी ढांचे आर्थिक सुधारों डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। देश के राजमार्गों रेलवे नेटवर्क हवाई अड्डों बंदरगाहों और डिजिटल सेवाओं में जिस गति से विस्तार हुआ है वह स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">युवाओं की सबसे बड़ी चिंता रोजगार और अवसरों को लेकर होती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने मेक इन इंडिया स्टार्टअप इंडिया स्किल इंडिया डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे व्यापक कार्यक्रम शुरू किए। इन पहलों का उद्देश्य केवल नौकरियां पैदा करना नहीं बल्कि युवाओं को रोजगार देने वाला उद्यमी बनाना भी है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। लाखों युवा तकनीक नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से नए अवसर प्राप्त कर रहे हैं। यह परिवर्तन किसी एक दिन में नहीं आया बल्कि इसके पीछे दीर्घकालिक नीतिगत प्रयास और राजनीतिक इच्छाशक्ति रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीजेपी का आंदोलन युवाओं की कुछ वास्तविक चिंताओं को सामने लाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है। यदि कहीं अनियमितता या प्रशासनिक कमजोरी दिखाई देती है तो उसके समाधान की अपेक्षा स्वाभाविक है। लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि किसी समस्या का अस्तित्व यह सिद्ध नहीं करता कि पूरा तंत्र विफल हो गया है। भारत जैसे विशाल देश में करोड़ों छात्र विभिन्न परीक्षाओं में भाग लेते हैं। ऐसे में चुनौतियां सामने आ सकती हैं लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार उन्हें सुधारने के लिए कितनी प्रतिबद्ध है। हाल के वर्षों में परीक्षा प्रक्रियाओं को अधिक सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो कॉकरोच जनता पार्टी फिलहाल एक संगठित वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के बजाय असंतोष की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति अधिक दिखाई देती है। इसके समर्थकों में बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है जो व्यवस्था में सुधार चाहते हैं। यह भावना लोकतंत्र के लिए सकारात्मक मानी जा सकती है क्योंकि जागरूक नागरिक ही लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाते हैं। हालांकि किसी आंदोलन को स्थायी जनसमर्थन प्राप्त करने के लिए केवल विरोध पर्याप्त नहीं होता। उसे स्पष्ट नीतियां व्यवहारिक समाधान और व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण भी प्रस्तुत करना पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय राजनीति में इसके पहले भी कई आंदोलन उभरे हैं जिन्होंने व्यवस्था परिवर्तन के बड़े दावे किए। कुछ समय के लिए उन्हें व्यापक लोकप्रियता भी मिली लेकिन दीर्घकालिक सफलता केवल उन्हीं को मिली जो शासन और विकास का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत कर सके। भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी शक्ति यही रही है कि उसने चुनावी नारों से आगे बढ़कर विकास को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में स्थापित किया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ने आर्थिक विकास राष्ट्रीय सुरक्षा तकनीकी प्रगति और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। विनिर्माण क्षेत्र को नई गति मिली है। रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ी है। डिजिटल भुगतान प्रणाली ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण तक भारत नए क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है। इन उपलब्धियों का सीधा लाभ युवाओं को मिलने वाले अवसरों के रूप में दिखाई देता है। यही कारण है कि भाजपा का जनाधार केवल राजनीतिक समर्थन तक सीमित नहीं बल्कि विकास के प्रति विश्वास पर आधारित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जंतर मंतर का प्रदर्शन यह संदेश देता है कि देश का युवा अपनी अपेक्षाओं को लेकर मुखर है। यह लोकतंत्र के स्वास्थ्य का संकेत है। लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट है कि भारत जैसे विशाल और तेजी से आगे बढ़ते राष्ट्र में परिवर्तन केवल विरोध से नहीं बल्कि रचनात्मक सहभागिता से संभव होगा। सरकार और युवाओं के बीच संवाद जितना मजबूत होगा उतना ही देश का भविष्य सशक्त बनेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कॉकरोच जनता पार्टी को युवाओं की कुछ मांगों और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है। वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी का विकास मॉडल यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक परिवर्तन के लिए दूरदर्शी नीतियां मजबूत नेतृत्व और सतत विकास आवश्यक हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीजेपी अपने आंदोलन को किस दिशा में ले जाती है लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में भाजपा की विकास यात्रा और जनविश्वास की मजबूत नींव उसके लिए सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बनी हुई है। भारत की जनता विशेष रूप से युवा वर्ग अवसर पारदर्शिता और प्रगति चाहता है और इन्हीं अपेक्षाओं की कसौटी पर भविष्य की राजनीति का मूल्यांकन होता रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:33:03 +0530</pubDate>
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                <title>आ अब लौट चलें</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">कभी भारत से विदेश जाना सफलता का पर्याय माना जाता था। इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञ अपने सपनों को साकार करने के लिए अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप की ओर निकल पड़ते थे। बेहतर वेतन, आधुनिक जीवनशैली, अनुसंधान के अवसर और सामाजिक सुरक्षा ने लाखों भारतीय युवाओं को आकर्षित किया। लेकिन आज विश्व की बदलती परिस्थितियां एक नया प्रश्न खड़ा कर रही हैं,क्या अब वह समय आ गया है जब विदेशों में बसे भारतीय पेशेवर "आ अब लौट चलें की व्यथा तथा कथा की पीड़ा से पीड़ित है? वैश्विक युद्ध के चलते अब भारतीय प्रवासी पैसे वालों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180373/come-lets-go-back-now"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa016315.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कभी भारत से विदेश जाना सफलता का पर्याय माना जाता था। इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञ अपने सपनों को साकार करने के लिए अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप की ओर निकल पड़ते थे। बेहतर वेतन, आधुनिक जीवनशैली, अनुसंधान के अवसर और सामाजिक सुरक्षा ने लाखों भारतीय युवाओं को आकर्षित किया। लेकिन आज विश्व की बदलती परिस्थितियां एक नया प्रश्न खड़ा कर रही हैं,क्या अब वह समय आ गया है जब विदेशों में बसे भारतीय पेशेवर "आ अब लौट चलें की व्यथा तथा कथा की पीड़ा से पीड़ित है? वैश्विक युद्ध के चलते अब भारतीय प्रवासी पैसे वालों की जान को खतरा मंडराने लगा और विदेशी शासको के पराई पान के व्यवहार से परेशान होकर वापस घर लौटने की मानसिकता बन चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व पिछले कुछ वर्षों से युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, बढ़ती महंगाई, सांस्कृतिक तनाव और कठोर होती आव्रजन नीतियों के दौर से गुजर रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व में बढ़ते संघर्ष, अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक प्रतिस्पर्धा तथा पश्चिमी देशों में बढ़ती राष्ट्रवादी राजनीति ने विदेशी नागरिकों के भविष्य को अनिश्चित बना दिया है। विशेष रूप से भारतीय पेशेवरों के सामने वीजा, स्थायी निवास और रोजगार सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। अनेक देशों में स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देने की मांग तेज हुई है, जिसके कारण प्रवासी समुदाय स्वयं को असुरक्षित महसूस करने लगा है। हाल के वर्षों में अमेरिका की एच-1बी वीजा नीतियों में बदलाव और बढ़ती अनिश्चितताओं ने हजारों भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों को भविष्य के प्रति चिंतित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय मूल के लाखों पेशेवर विदेशों में रहते हैं। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार विश्वभर में लगभग 3.5 करोड़ भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं, जो दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय माना जाता है।  इनमें बड़ी संख्या डॉक्टरों, इंजीनियरों, आईटी विशेषज्ञों, वित्तीय सलाहकारों और शोधकर्ताओं की है। केवल भारतीय छात्रों की बात करें तो वर्ष 2024 तक 13 लाख से अधिक भारतीय छात्र विदेशों में अध्ययन कर रहे थे। विदेशों में रहने वाले भारतीयों की चमकदार तस्वीर अक्सर दिखाई जाती है, किंतु उसके पीछे छिपी मानसिक और सामाजिक पीड़ा कम चर्चा में आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक सफलता के बावजूद सांस्कृतिक अकेलापन, परिवार से दूरी, बुजुर्ग माता-पिता की चिंता, बच्चों की पहचान का संकट तथा नस्लीय भेदभाव के अनुभव अनेक प्रवासी भारतीयों को भीतर से विचलित करते हैं। पश्चिमी देशों में जीवन की बढ़ती लागत ने भी स्थिति कठिन बना दी है। ऊंचे किराए, महंगी स्वास्थ्य सेवाएं, बच्चों की शिक्षा का खर्च और नौकरी की असुरक्षा ने उस आकर्षण को कमजोर किया है जो कभी विदेशों को अवसरों की स्वर्णभूमि बनाता था। अनेक भारतीय पेशेवर स्वीकार करते हैं कि आर्थिक समृद्धि के बावजूद भावनात्मक संतोष की कमी उन्हें लगातार परेशान करती रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने भी इस विषय पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं। भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भारतीय प्रवासी समुदाय को "ब्रेन ड्रेन" नहीं बल्कि "ब्रेन बैंक" बताया है। उनका मानना है कि प्रतिभाएं जहां अवसर मिलते हैं वहां जाती हैं, किंतु वे अनुभव, पूंजी, तकनीक और वैश्विक दृष्टि के रूप में अपने देश को भी समृद्ध करती हैं।  यह विचार आज और अधिक प्रासंगिक है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर अब विदेशों से लौटकर भारत में स्टार्टअप, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में भी परिस्थितियां तेजी से बदली हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप संस्कृति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष अनुसंधान और वैश्विक क्षमता केंद्रों के विस्तार ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने के कारण भारत अब केवल प्रतिभा निर्यातक देश नहीं रह गया है, बल्कि प्रतिभाओं को आकर्षित करने वाला देश भी बनने लगा है। कई भर्ती एजेंसियों ने बताया है कि विदेशों में कार्यरत अनुभवी भारतीय पेशेवरों की वापसी की प्रवृत्ति पिछले वर्षों की तुलना में बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह भी सच है कि भारत को अभी बहुत कार्य करना बाकी है। अनुसंधान एवं विकास पर खर्च, शहरी अवसंरचना, प्रशासनिक पारदर्शिता, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भारत वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के लिए विश्वस्तरीय वातावरण नहीं बनाएगा, तब तक प्रतिभा पलायन पूरी तरह नहीं रुकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">परिस्थितियों का संकेत स्पष्ट है कि दुनिया का भू-राजनीतिक वातावरण तेजी से बदल रहा है। विदेशी धरती पर बसे भारतीय पेशेवर अब केवल अधिक वेतन नहीं, बल्कि जीवन की स्थिरता, सामाजिक अपनत्व और भावनात्मक सुरक्षा को भी महत्व देने लगे हैं। वे महसूस कर रहे हैं कि अपने देश में संघर्ष करना पराए देश में असुरक्षा के साथ जीने से कहीं अधिक संतोषजनक हो सकता है। माता-पिता की वृद्ध आंखें, अपनी भाषा की मिठास, अपने त्योहारों की खुशबू और अपनी मिट्टी का अपनापन किसी भी मुद्रा में नहीं खरीदा जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">आज भारत उन लाखों प्रतिभाशाली प्रवासी भारतीयों को पुकार रहा है जिन्होंने अपनी मेहनत से विश्व के बड़े संस्थानों को ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। यदि वही ज्ञान, अनुभव और नवाचार भारत की धरती पर लगे तो विकास की नई इबारत लिखी जा सकती है। यह केवल भावनात्मक आह्वान नहीं बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता भी है। वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में अनेक भारतीय पेशेवरों के मन में एक ही स्वर गूंज रहा है,विदेशों की चमक बहुत देख ली, अब अपने देश की धड़कनों को महसूस करने का समय है। सचमुच, यह समय कह रहा है,"आ अब लौट चलें।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:37:59 +0530</pubDate>
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