<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/93040/sustainable-cities" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Sustainable Cities - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/93040/rss</link>
                <description>Sustainable Cities RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बच्चों की चहकती ज़िंदगी पर पड़ रहा विकास का काला साया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब किसी शहर से बच्चों की खिलखिलाहट गुम होने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझ लेना चाहिए कि वहां विकास ने दिशा खो दी है। किसी समाज की असली समृद्धि उसकी ऊँची इमारतों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बच्चों के हिस्से आए खुले आसमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाली और सुरक्षित खेल-स्थलों में दिखाई देती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दुर्भाग्य से शहर जितनी तेजी से फैल रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वजनिक पार्क और खेल के मैदान उतनी ही तेजी से सिमट रहे हैं। जहां कभी नंगे पांव दौड़ता बचपन सपने संजोता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां आज सूखी जमीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टूटे झूले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंग लगी फिसलपट्टियां और कंक्रीट का</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183099/the-dark-shadow-of-development-is-falling-on-the-vibrant"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(1)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब किसी शहर से बच्चों की खिलखिलाहट गुम होने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझ लेना चाहिए कि वहां विकास ने दिशा खो दी है। किसी समाज की असली समृद्धि उसकी ऊँची इमारतों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बच्चों के हिस्से आए खुले आसमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाली और सुरक्षित खेल-स्थलों में दिखाई देती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दुर्भाग्य से शहर जितनी तेजी से फैल रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वजनिक पार्क और खेल के मैदान उतनी ही तेजी से सिमट रहे हैं। जहां कभी नंगे पांव दौड़ता बचपन सपने संजोता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां आज सूखी जमीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टूटे झूले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंग लगी फिसलपट्टियां और कंक्रीट का फैलता साम्राज्य खड़ा है। यह केवल सौंदर्य का ह्रास नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों पर मौन प्रहार है। यदि बचपन से खेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति और खुलापन छीन लिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसकी कीमत केवल बच्चे नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरा समाज चुकाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कंक्रीट की हर नई दीवार हरियाली की कीमत पर खड़ी होती है। बीते दो दशकों में अनियोजित शहरीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासनिक उदासीनता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भ्रष्टाचार और नागरिक चुप्पी ने सार्वजनिक पार्कों को उपेक्षित कर दिया। कई महानगरों में प्रति बच्चे उपलब्ध खेल क्षेत्र आधे से भी कम रह गया है। नतीजा—बचपन स्क्रीन में कैद है। शारीरिक गतिविधियां घटने से मोटापा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अकेलापन और व्यवहारगत समस्याएं बढ़ रही हैं। प्रकृति से कटता बचपन तकनीक में दक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर शरीर से दुर्बल और मन से असंतुलित होता जा रहा है। यह समाज के भविष्य की गंभीर चेतावनी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बचपन की पहली पाठशाला किसी इमारत में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खुले आकाश के नीचे बसती है। पार्क केवल खेल का मैदान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्तित्व निर्माण की प्रयोगशाला हैं। यहीं बच्चे मित्रता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हार-जीत का संतुलन और प्रकृति से रिश्ता सीखते हैं। मिट्टी की सोंधी गंध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेड़ों की छांव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पक्षियों का कलरव और साथियों का साथ वे संस्कार देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कोई स्क्रीन या बंद कमरा नहीं दे सकता। पार्क खत्म होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बचपन का यह अध्याय अधूरा रह जाता है। सबसे अधिक मार सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनके पास निजी क्लब या महंगे प्ले जोन का विकल्प नहीं होता। उनके बच्चे गलियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छतों और व्यस्त सड़कों पर खेलने को विवश हैं। खेल का अधिकार भी अब आर्थिक असमानता की भेंट चढ़ रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे भयावह स्थिति तब होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब बच्चों के लिए बनी जगहें ही असुरक्षित हो जाएं। जो पार्क बचे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी हालत लगातार बिगड़ रही है। रखरखाव का बजट आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर उसका बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार या अधूरे कार्यों में सिमट जाता है। टूटे झूले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंग लगी फिसलपट्टियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गंदे पानी के गड्ढे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूखी घास और कचरा अब सामान्य दृश्य हैं। अनेक स्थानों पर अतिक्रमण ने पार्कों की जमीन निगल ली है। कहीं राजनीतिक आयोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं अस्थायी निर्माण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो रात होते ही कई पार्क असामाजिक तत्वों और शराबियों के अड्डे बन जाते हैं। नतीजा यह है कि जहां बच्चों को सबसे सुरक्षित होना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं जाने से परिवार कतराने लगे हैं। किसी संवेदनशील समाज के लिए इससे बड़ी विडंबना क्या होगी</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर उजड़ा पार्क योजनाओं नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईमानदार इच्छाशक्ति की मांग करता है। यह संकट असाध्य नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि सरकारें इसे सौंदर्यीकरण नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बच्चों के अधिकार और सार्वजनिक स्वास्थ्य का प्रश्न मानें। प्रत्येक शहर में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">पार्क पुनर्जागरण मिशन"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत पुराने पार्कों का वैज्ञानिक पुनर्विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षित खेल उपकरण और नियमित रखरखाव की जवाबदेही तय हो। हर नए आवासीय प्रकल्प में </span>18 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत क्षेत्र हरित पार्क और खेल क्षेत्र के लिए कानूनी रूप से आरक्षित हो। डिजिटल निगरानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक ऑडिट और वित्तीय पारदर्शिता से सुनिश्चित किया जाए कि पार्कों का बजट कागजों पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धरातल पर दिखे। विकास की हर योजना में बच्चों का खेल क्षेत्र अंतिम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहला अधिकार होना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारें अकेले बचपन नहीं बचा सकतीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज को भी आगे आना होगा। किसी मोहल्ले का पार्क तभी जीवित रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब लोग उसे अपना मानें। स्थानीय निवासी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वयंसेवी संस्थाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरिष्ठ नागरिक और युवा मिलकर पार्कों को गोद लें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वृक्षारोपण और निगरानी की जिम्मेदारी निभाएं। शिक्षा व्यवस्था भी सहभागी बने। विद्यालयों में प्रत्येक सप्ताह</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">पार्क डे"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां बच्चे खेल के साथ प्रकृति को समझें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण संरक्षण सीखें और खुली हवा में सामूहिक गतिविधियों का अनुभव करें। अभिभावकों को भी समझना होगा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास केवल कोचिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंक और डिजिटल उपकरणों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि खुले मैदान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिट्टी की सोंधी खुशबू और प्रकृति के सान्निध्य से भी होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कानून तभी सार्थक होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वे कागज से उतरकर जनजीवन की रक्षा करें। सार्वजनिक पार्कों को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">शून्य सहनशीलता क्षेत्र</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">घोषित किया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां अतिक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यावसायिक उपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीतिक आयोजन और असामाजिक गतिविधियों की कोई जगह न हो। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कठोर दंड और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। नगर निकायों का निरीक्षण औपचारिकता न रहे</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रत्येक पार्क की स्थिति सार्वजनिक पोर्टल पर हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि नागरिक भी निगरानी कर सकें। प्रशासन की दृढ़ता और समाज की सजगता से ही पार्कों की गरिमा लौटेगी। अन्यथा विकास की चकाचौंध में बचपन का उजाला खोता रहेगा और हम आंकड़ों में प्रगति तलाशते रह जाएंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब बच्चों से खुला आकाश छिनने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझ लीजिए समाज का भविष्य सिमट रहा है। जिसने खुले मैदान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेड़ों की छांव और प्रकृति की गोद में जीवन नहीं सीखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे स्वस्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवेदनशील समाज की अपेक्षा कैसे की जा सकती है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्क विलासिता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर बच्चे का मौलिक अधिकार हैं। यदि आज हम उसके हिस्से का आकाश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाली और खेल छीन रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कल उससे रचनात्मकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवेदनशीलता और सामाजिक संतुलन की अपेक्षा का नैतिक अधिकार भी खो देंगे। इसलिए सार्वजनिक पार्कों की रक्षा केवल पर्यावरण नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र निर्माण का संकल्प है। जहां पार्कों में बचपन की हंसी गूंजती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं सशक्त भविष्य जन्म लेता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/183099/the-dark-shadow-of-development-is-falling-on-the-vibrant</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/183099/the-dark-shadow-of-development-is-falling-on-the-vibrant</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 21:19:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/images-%281%295.jpg"                         length="156006"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अतिक्रमण और जाम से कराहते शहर: फुटपाथ गायब, सड़कें सिकुड़ीं, वक्त बर्बाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुम्बई</span>,</strong>  <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु व कोलकाता की तरह अब उत्तर प्रदेश के लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आगरा और इलाहाबाद जैसे शहर जाम से जूझ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथों पर दुकानदारों व स्ट्रीट वैंडर ने कब्जा कर लिया है आखिर अब पैदल चलने वाले लोग कहां चलें और वाहनों को चलाने वाले कहां वाहन चलायें। नतीजा सड़कों पर जाम आधा घंटे का रास्ता दो घंटे में पूरा हो रहा है और हमारे शहरों के नगर निगम व यातायात विभाग कुछ भी कर पाने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। देश के नगर निगमों ने इंदौर नगर निगम से कुछ भी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181534/cities-groaning-due-to-encroachment-and-traffic-jams-footpaths-disappearing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas4.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुम्बई</span>,</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु व कोलकाता की तरह अब उत्तर प्रदेश के लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आगरा और इलाहाबाद जैसे शहर जाम से जूझ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथों पर दुकानदारों व स्ट्रीट वैंडर ने कब्जा कर लिया है आखिर अब पैदल चलने वाले लोग कहां चलें और वाहनों को चलाने वाले कहां वाहन चलायें। नतीजा सड़कों पर जाम आधा घंटे का रास्ता दो घंटे में पूरा हो रहा है और हमारे शहरों के नगर निगम व यातायात विभाग कुछ भी कर पाने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। देश के नगर निगमों ने इंदौर नगर निगम से कुछ भी नहीं सीख पाया। सुबह </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे  लखनऊ का आलमबाग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर का टाटमील चौराहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आगरा की एमजी रोड और इलाहाबाद का चौक व सिविल लाइंस हर जगह एक ही तस्वीर - सड़कें गाड़ियों से पैक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथ पर ठेले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुकानों का सामान बाहर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और लोग सड़क पर चलने को मजबूर। भारत के शहर तेजी से बढ़ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सड़कें उतनी ही रहीं। नतीजा: अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम ने शहरों की सांस रोक दी है। अतिक्रमण: फुटपाथ पर कब्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क पर हक। व्यावसायिक अतिक्रमण- दुकानदार शटर से </span>5-10<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट बाहर सामान रख देते हैं। कपड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैकेनिक का सामान सब सड़क पर। आवासीय अतिक्रमण- कॉलोनियों में लोग घर के आगे पार्किंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाउंड्री वॉल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीढ़ियां निकाल लेते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अस्थायी कब्जा-  ठेले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेहड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेंट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक आयोजन। एक बार लग गया तो हटाना मुश्किल। जगह की कमी- जमीन महंगी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो लोग सार्वजनिक जगह को निजी समझ लेते हैं। राजनीतिक संरक्षण- चुनाव के समय हटाने की हिम्मत कोई नहीं करता। वोट बैंक बन जाते हैं। प्रशासन की निष्क्रियता तोड़फोड़ होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में वही स्थिति। जुर्माना वसूलने का सिस्टम कमजोर है। जाम: सिर्फ देरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक नुकसान- कितना बुरा है हाल</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति आयोग के मुताबिक बेंगलुरु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में लोग औसतन सालाना </span>100-120<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे जाम में फंसते हैं। यानी </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन सिर्फ गाड़ी में बैठे-बैठे। आर्थिक: ईंधन बर्बादी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिलीवरी में देरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोडक्टिविटी गिरना। दिल्ली में हर साल </span>60,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रु का नुकसान सिर्फ ट्रैफिक जाम से होता है। स्वास्थ्य-  गाड़ी में बैठे-बैठे </span>PM 2.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> और </span>CO <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस में जाता है। एम्स की स्टडी कहती है कि ट्रैफिक पुलिस और ऑटो ड्राइवरों में फेफड़े की बीमारी </span>40%<span lang="hi" xml:lang="hi"> ज्यादा है। मानसिक तनाव- रोज </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटा जाम में फंसने वाले लोगों में एंग्जाइटी और रोड रेज के केस </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> गुना ज्यादा हैं। अतिक्रमण और जाम एक-दूसरे को फीड करते हैं। सड़क </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट पर दुकानों का सामान</span>, 10<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट पर पार्किंग। बच गई </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट। </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट पर </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लेन की जगह </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लेन बनती है। एक गाड़ी खराब हुई नहीं कि पूरी सड़क ब्लॉक। लोग फुटपाथ पर नहीं चल सकते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सड़क पर चलते हैं। इससे ट्रैफिक स्लो होता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>10%<span lang="hi" xml:lang="hi"> सड़क पर कब्जा होने से ट्रैफिक की स्पीड </span>40%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक गिर जाती है। कुछ शहरों ने क्या किया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदौर का सिस्टम - बात जब स्मार्ट सिटी की होती है तो सबसे पहले इंदौर का नाम आता है क्योंकि इंदौर नगर निगम ने कई ऐसे प्रावधान किए हैं जिनसे अन्य नगर निगमों को सीख लेनी चाहिए। इंदौर नगर निगम ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत </span>80%<span lang="hi" xml:lang="hi"> फुटपाथ खाली कराए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रीट वेंडर को वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया। अब शहर स्वच्छता में नंबर </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> है और ट्रैफिक फ्लो बेहतर है। भुवनेश्वर </span>ITMS <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम लगाया। कैमरे और </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">से जाम का रियल टाइम एनालिस होता है। सिग्नल खुद एडजस्ट होते हैं। अहमदाबाद </span>BRTS <span lang="hi" xml:lang="hi">और फुटपाथ डेमार्केशन ने पैदल यात्रियों को जगह दी। अतिक्रमण पर जुर्माना सख्त किया। वेंडिंग जोन बनाओ-  हर </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> मीटर पर स्ट्रीट वेंडर के लिए जगह तय करो। दिल्ली में ये कानून </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> में बना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लागू नहीं हुआ। रियल टाइम एक्शन-  शिकायत पर </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे में कार्रवाई। </span>Noida <span lang="hi" xml:lang="hi">का "हटाओ ऐप" इसका उदाहरण है। पार्किंग पॉलिसी-  रेजिडेंशियल एरिया में ऑन-स्ट्रीट पार्किंग को महंगा करो। ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग को सस्ता करो। मास ट्रांजिट- मेट्रो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइकिल लेन बढ़ाओ। जब लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज करेंगे तो गाड़ी कम होगी। मास्टर प्लान में बदलाव-  नई कॉलोनियों में </span>30%<span lang="hi" xml:lang="hi"> जगह सड़क और फुटपाथ के लिए रिजर्व हो। जवाबदेही तय करो-  अतिक्रमण हटाने का टार्गेट म्यूनिसिपल कमिश्नर के दायरे में हो। हर </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने में ऑडिट हो। नागरिक क्या कर सकते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">फोटो खींचो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिपोर्ट करो- </span>MCD, BMC, BBMP <span lang="hi" xml:lang="hi">के पास ऐप हैं। </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> शिकायत पर एक्शन होता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थानीय दुकानदारों से बात करो- </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दुकानदार मिलकर तय करें कि सामान अंदर रखेंगे। एकता काम करती है। पैदल चलो-  </span>1-2 km <span lang="hi" xml:lang="hi">के काम के लिए गाड़ी मत निकालो। साइकिल और मेट्रो यूज करो। शहर सिर्फ सीमेंट और कंक्रीट नहीं होते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो लोगों के चलने-फिरने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस लेने की जगह हैं। जब फुटपाथ गायब हो जाएं और सड़कें पार्किंग बन जाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शहर रहता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ ट्रांजिट पॉइंट रह जाता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिक्रमण हटाना सिर्फ बुलडोजर का काम नहीं है। ये पॉलिसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पॉलिटिक्स और पब्लिक के तीनों के बदलने से होगा। वरना अगले </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल में हमारे शहर सिर्फ गूगल मैप पर लाल रंग के दिखेंगे - जाम का रंग।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181534/cities-groaning-due-to-encroachment-and-traffic-jams-footpaths-disappearing</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181534/cities-groaning-due-to-encroachment-and-traffic-jams-footpaths-disappearing</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:53:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/hindi-divas4.jpg"                         length="173958"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्मी में प्यास, बारिश में सैलाब: विकास के मॉडल पर बड़ा सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>  </strong>21<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं सदी का भारत एक कड़वी विडंबना के दौर से गुजर रहा है। एक ओर देश अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयां छू रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर करोड़ों लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे हैं। वर्ष </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की भीषण गर्मी ने विकास की चमक के पीछे छिपी हकीकत उजागर कर दी है। कई क्षेत्रों में तापमान </span>48 <span lang="hi" xml:lang="hi">डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है। बाड़मेर जैसे इलाकों में गांव एक हैंडपंप के सहारे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाएं मीलों दूर से पानी ला रही हैं और शहरों में दूषित जलापूर्ति को लेकर आक्रोश है। लेकिन</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180368/thirst-in-summer-flood-in-rain-big-question-on-development"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/whatsapp-image-2026-05-31-at-6.28.39-pm-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong> </strong>21<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं सदी का भारत एक कड़वी विडंबना के दौर से गुजर रहा है। एक ओर देश अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयां छू रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर करोड़ों लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे हैं। वर्ष </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की भीषण गर्मी ने विकास की चमक के पीछे छिपी हकीकत उजागर कर दी है। कई क्षेत्रों में तापमान </span>48 <span lang="hi" xml:lang="hi">डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है। बाड़मेर जैसे इलाकों में गांव एक हैंडपंप के सहारे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाएं मीलों दूर से पानी ला रही हैं और शहरों में दूषित जलापूर्ति को लेकर आक्रोश है। लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद मानसून आते ही यही देश जल संकट से निकलकर जल प्रलय में घिर जाता है। सड़कें नदियां बन जाती हैं और जनजीवन थम जाता है। आखिर यह कैसा विकास है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां गर्मी में प्यास और बारिश में सैलाब नियति बन चुके हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संकट प्रकृति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विकास और जल प्रबंधन की उपेक्षा का परिणाम है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार अप्रैल </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में देश के </span>166 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण क्षमता का लगभग </span>39 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत ही बचा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो मई में और घट गया। कई बड़े जलाशय आधी क्षमता से नीचे पहुंच गए। पिछले वर्षों में वर्षा के असमान वितरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बढ़ती गर्मी और कमजोर जल प्रबंधन ने संकट को गहरा किया है। वहीं </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में एल-नीनो के प्रभाव से सामान्य से कम मानसून की आशंका है। दूसरी ओर भूजल का बेलगाम दोहन हालात और बिगाड़ रहा है। दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहर जल संकट के साथ भूमि धंसाव जैसे खतरों का भी सामना कर रहे हैं। स्पष्ट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह केवल आज की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य की भी गंभीर चुनौती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस संकट की जड़ अंधाधुंध शहरीकरण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने प्रकृति और पानी का संतुलन तोड़ दिया है। कभी तालाब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झीलें और आर्द्रभूमियां वर्षा जल संजोती थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आज उनकी जगह कंक्रीट के जंगल उग आए हैं। नतीजा यह है कि बारिश का पानी जमीन में उतरने के बजाय सड़कों और नालों में बह जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि गर्मियों में भूजल खाली पड़ जाता है। मानो हम बरसात में पानी को ठुकराते हैं और फिर गर्मी में उसकी तलाश में भटकते हैं। दुर्भाग्य से विकास की परिभाषा ऊंची इमारतों और चौड़ी सड़कों तक सिमट गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि जल संरक्षण हाशिये पर है। यही सोच आज जल संकट और जलभराव—दोनों की सबसे बड़ी वजह है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में जल संकट का कारण केवल पानी की कमी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके उपयोग और प्रबंधन की खामियां भी हैं। कृषि और शहर मिलकर देश के </span>80 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक भूजल का दोहन कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी जल व्यवस्था चरमराई हुई है। शहरों में लाखों लीटर पानी पाइपलाइन लीकेज में बह जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कई बस्तियां बूंद-बूंद को तरसती हैं। दूसरी ओर सीमित जल वाले क्षेत्रों में भी अत्यधिक पानी मांगने वाली फसलें उगाई जा रही हैं। नतीजा यह है कि गर्मियों में जलाशय सूख जाते हैं और बरसात में वही पानी अनियंत्रित होकर तबाही मचाता है। स्पष्ट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह संकट संसाधनों के अभाव से अधिक गलत प्रबंधन और विकृत प्राथमिकताओं का परिणाम है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गर्मी की प्यास और बारिश की तबाही का सबसे भारी बोझ समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ रहा है। गांवों में पेयजल संकट स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेती और पशुधन—तीनों पर चोट कर रहा है। सूखती फसलें किसानों की आय घटा रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर बना रही हैं। वहीं शहरों में जलभराव और बाढ़ यातायात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कारोबार और जनजीवन को ठप कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। गरीब परिवारों के घर डूबते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोज़गार प्रभावित होता है और जीवन स्तर गिरता है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जल संकट और जल प्रलय की सबसे बड़ी कीमत वही लोग चुका रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी इन समस्याओं को पैदा करने में सबसे कम भूमिका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संकट अब केवल पर्यावरण या समाज तक सीमित नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता की चुनौती बन चुका है। पानी सीधे खाद्य सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनस्वास्थ्य और सामाजिक संतुलन से जुड़ा है। यदि जल स्रोत लगातार कमजोर होते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भविष्य में जल विवाद बढ़ेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि उत्पादन घटेगा और शहरों की जीवन क्षमता पर भी संकट गहराएगा। जो राष्ट्र अपने नागरिकों के लिए पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता सुनिश्चित नहीं कर सकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका विकास भी लंबे समय तक टिक नहीं सकता। इसलिए पानी को महज़ एक संसाधन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्र निर्माण और विकास की आधारशिला मानने का समय आ गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राह मुश्किल जरूर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन समाधान सामने हैं। जरूरत केवल दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी की है। हर शहर और गांव में वर्षा जल संचयन अनिवार्य बनाना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि तालाबों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झीलों और पारंपरिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करना होगा। शहरी विकास ऐसा हो कि वर्षा जल जमीन में समा सके और स्मार्ट ड्रेनेज व्यवस्था भूजल का आधार बने। कृषि में ड्रिप सिंचाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूक्ष्म सिंचाई और क्षेत्रानुकूल फसल चक्र को बढ़ावा देना होगा। साथ ही जल वितरण व्यवस्था दुरुस्त कर पाइपलाइन लीकेज पर अंकुश लगाना होगा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और लोगों को जल संरक्षण का भागीदार बनाना होगा। बदलाव घोषणाओं से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ईमानदार और सख्त क्रियान्वयन से आएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि भारत कितना विकसित हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह है कि क्या वह अपने लोगों के लिए पानी सुरक्षित रख पाया। गर्मी में प्यास और बारिश में सैलाब की यह विडंबना हमारी विकास यात्रा पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। यदि जल संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल साक्षरता और जल के न्यायपूर्ण वितरण को राष्ट्रीय संकल्प नहीं बनाया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाली पीढ़ियां हमारी दूरदर्शिता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी लापरवाही को याद रखेंगी। विकास का वास्तविक पैमाना कंक्रीट के जंगल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हर नागरिक तक स्वच्छ और पर्याप्त पानी की पहुंच है। भारत को अब जल-केंद्रित विकास की दिशा में बढ़ना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि भविष्य की समृद्धि का रास्ता पानी से होकर गुजरता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180368/thirst-in-summer-flood-in-rain-big-question-on-development</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180368/thirst-in-summer-flood-in-rain-big-question-on-development</guid>
                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:30:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/whatsapp-image-2026-05-31-at-6.28.39-pm-%281%29.jpeg"                         length="125421"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        