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                <title>Road Encroachment - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Road Encroachment RSS Feed</description>
                
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                <title>शहरों में अतिक्रमण: कार्रवाई गरीब पर, संरक्षण प्रभावशाली को क्यों</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">शहरों की सड़कें किसी भी महानगर की पहचान होती हैं। सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और नागरिक जीवन की धड़कन होती हैं। लेकिन जब इन्हीं सड़कों और फुटपाथों पर अतिक्रमण बढ़ता जाता है तो सबसे पहले प्रभावित होता है आम आदमी। पैदल चलने की जगह खत्म होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यातायात की रफ्तार थमती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्किंग की समस्या बढ़ती है और छोटी-सी सड़क भी घंटों के जाम में बदल जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाना निश्चित रूप से जरूरी है। सवाल अभियान चलाने पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके तरीके और निष्पक्षता</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186546/encroachment-action-in-cities-why-protection-for-the-poor-but"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/rajeev1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">शहरों की सड़कें किसी भी महानगर की पहचान होती हैं। सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और नागरिक जीवन की धड़कन होती हैं। लेकिन जब इन्हीं सड़कों और फुटपाथों पर अतिक्रमण बढ़ता जाता है तो सबसे पहले प्रभावित होता है आम आदमी। पैदल चलने की जगह खत्म होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यातायात की रफ्तार थमती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्किंग की समस्या बढ़ती है और छोटी-सी सड़क भी घंटों के जाम में बदल जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाना निश्चित रूप से जरूरी है। सवाल अभियान चलाने पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके तरीके और निष्पक्षता पर है। आम धारणा यह बनती जा रही है कि जब कार्रवाई होती है तो सबसे पहले ठेला लगाने वाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथ पर छोटी दुकान चलाने वाला या रोज कमाकर परिवार पालने वाला व्यक्ति इसकी चपेट में आता है। दूसरी तरफ बड़े और प्रभावशाली अतिक्रमणों को लेकर कार्रवाई की गति कई बार उतनी तेज दिखाई नहीं देती।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">यही वह सवाल है जिसे प्रशासन और नगर निकायों को गंभीरता से लेना चाहिए—क्या कानून सबके लिए समान है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अतिक्रमण सिर्फ गरीब की समस्या नहीं</span>,</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिक्रमण को केवल फुटपाथ पर बैठे छोटे दुकानदार की समस्या मानना वास्तविक तस्वीर को छोटा कर देना है। शहरों में अतिक्रमण कई स्तरों पर होता है। कहीं सड़क किनारे दुकानें फैल जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं व्यापारिक प्रतिष्ठान अपनी सीमा से बाहर सामान रख देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं पार्किंग के नाम पर सार्वजनिक स्थान घेर लिया जाता है और कहीं निर्माण सामग्री लंबे समय तक सड़क पर पड़ी रहती है। कुछ स्थानों पर सार्वजनिक भूमि का स्थायी अथवा अस्थायी उपयोग भी विवाद का कारण बनता है। इसलिए अतिक्रमण की कार्रवाई भी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति देखकर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अतिक्रमण की प्रकृति और कानूनी स्थिति देखकर होनी चाहिए। अगर एक गरीब का ठेला सड़क घेरने के कारण हटाया जाता है तो उसी नियम के तहत बड़े प्रतिष्ठान द्वारा घेरा गया सार्वजनिक स्थान भी खाली कराया जाना चाहिए। तभी प्रशासन की कार्रवाई पर जनता का विश्वास कायम होगा। रोजी-रोटी और कानून के बीच संतुलन जरूरी यह भी सच है कि शहरों में हजारों परिवार छोटे व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठेले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खोमचे और फुटपाथी कारोबार पर निर्भर हैं। उनके लिए सड़क किनारे की छोटी-सी जगह ही दुकान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और परिवार की आय का साधन होती है। इसका अर्थ यह नहीं कि उन्हें सार्वजनिक रास्ता रोकने की अनुमति मिलनी चाहिए। लेकिन समाधान केवल सामान जब्त करने या दुकान हटाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। नगर निकायों को चाहिए कि वे व्यवस्थित वेंडिंग जोन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार क्षेत्र और पार्किंग व्यवस्था विकसित करें। छोटे दुकानदारों का नियमन हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनकी रोजी-रोटी भी सुरक्षित रहे। शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाना है तो गरीब को हटाना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रभावशाली अतिक्रमण पर भी वही पैमाना हो</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ा सवाल उस समय खड़ा होता है जब जनता को कार्रवाई में असमानता दिखाई देती है। यदि सड़क किनारे गरीब का अस्थायी ढांचा तुरंत हट जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बड़े प्रतिष्ठान द्वारा वर्षों से घेरा गया सार्वजनिक स्थान कार्रवाई से बचा रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रशासन के लिए इससे बड़ी चुनौती कोई नहीं कि कानून की निष्पक्षता पर ही सवाल उठने लगें। जरूरत इस बात की है कि अतिक्रमण विरोधी अभियान की शुरुआत सर्वेक्षण और पारदर्शी सूची से हो। किस स्थान पर किस प्रकार का अतिक्रमण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी स्थिति क्या है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संबंधित व्यक्ति या संस्था को क्या नोटिस दिया गया और कार्रवाई क्यों की जा रही है—इन सबका रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए। अभियान दिखावे का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्था सुधारने का हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अक्सर देखा जाता है कि अभियान शुरू होते ही कुछ दिनों तक सड़कों पर सख्ती दिखाई देती है। फुटपाथ खाली हो जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़कें खुल जाती हैं और यातायात बेहतर होने लगता है। लेकिन कुछ समय बाद वही स्थिति लौट आती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे साफ है कि समस्या केवल अतिक्रमण हटाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि दोबारा अतिक्रमण रोकने की व्यवस्था बनाने की है। यदि किसी स्थान से अतिक्रमण हटाने के बाद वहां दोबारा कब्जा हो जाता है तो सवाल केवल कब्जा करने वाले पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निगरानी व्यवस्था पर भी होना चाहिए। आखिर नियमित निरीक्षण किसकी जिम्मेदारी है</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">भ्रष्टाचार की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां नियम जटिल हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निरीक्षण कमजोर हो और कार्रवाई में भेदभाव की धारणा पैदा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां भ्रष्टाचार की आशंका भी जन्म लेती है। यदि किसी को हटाया जाता है और किसी दूसरे को उसी स्थान पर बने रहने दिया जाता है तो नागरिक स्वाभाविक रूप से पूछता है कि इसके पीछे कारण क्या है</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी स्थिति प्रशासन के लिए बेहद नुकसानदेह है। इसलिए अतिक्रमण अभियान में डिजिटल रिकॉर्ड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फोटो-वीडियोग्राफी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्पष्ट नोटिस प्रक्रिया और कार्रवाई की सार्वजनिक जानकारी जैसी व्यवस्थाएं अपनाई जानी चाहिए। अधिकारी बदलते रहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन रिकॉर्ड व्यवस्था को स्थायी बनाया जा सकता है। यह प्रश्न केवल सड़क का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शहर की सोच का है। क्या शहर केवल बड़े बाजारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉल और चौड़ी सड़कों के लिए हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">या उस मजदूर के लिए भी हैं जो सुबह ठेला लगाकर अपने बच्चों का पेट पालता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या फुटपाथ केवल पैदल यात्रियों के लिए हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">निश्चित रूप से हां। लेकिन क्या छोटे दुकानदारों के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराना भी नगर प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">एक बेहतर शहर वह नहीं जहां केवल अतिक्रमण हटाने की तस्वीरें दिखाई दें। बेहतर शहर वह है जहां सड़कें भी खुली हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैदल यात्रियों को जगह भी मिले और छोटे व्यापारियों को सम्मानजनक आजीविका का अवसर भी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्रवाई में भेदभाव की धारणा खत्म करनी होगी</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन के पास कानून की ताकत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून की ताकत से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका निष्पक्ष इस्तेमाल है। अगर कार्रवाई गरीब पर हो और बड़े अतिक्रमण पर चुप्पी रहे तो कानून का भय नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अविश्वास पैदा होता है। इसके विपरीत यदि नियम सभी पर समान रूप से लागू हों तो सबसे कठिन कार्रवाई भी जनता स्वीकार कर लेती है। इसलिए अतिक्रमण विरोधी अभियान को तीन सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए—निष्पक्षता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता और पुनर्वास/वैकल्पिक व्यवस्था।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">शहरों को अतिक्रमण से मुक्त करना जरूरी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि इस अभियान में किसी गरीब की रोजी-रोटी अनावश्यक रूप से न छीनी जाए और किसी प्रभावशाली व्यक्ति को उसके रसूख के कारण विशेष सुविधा न मिले। आखिर सड़क जनता की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथ जनता का है और सार्वजनिक भूमि भी जनता की है। उस पर कब्जा करने वाला चाहे कमजोर हो या शक्तिशाली—कानून की नजर में पैमाना एक ही होना चाहिए। अतिक्रमण हटे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इंसानियत के साथ। कार्रवाई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन समान रूप से। तभी शहर साफ भी होगा और व्यवस्था पर जनता का भरोसा भी कायम रहेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 19:16:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नैनी में अतिक्रमण के खिलाफ चला अभियान, दो दिन में कब्जा हटाने की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नैनी थाना प्रभारी निरीक्षक बृज किशोर गौतम के नेतृत्व में गुरुवार दोपहर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान सब्जी मंडी, मलहरा फाटक, शंकर ढाल, चीनी मिल सहित विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस ने अतिक्रमणकारियों को चिन्हित किया। इस दौरान भारी पुलिस बल की मौजूदगी मे ने सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के निर्देश देते हुए संबंधित लोगों को कड़ी चेतावनी दी कि वे दो दिनों के भीतर स्वयं अपना अतिक्रमण हटा लें। निर्धारित समय सीमा के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182626/campaign-against-encroachment-started-in-naini-warning-to-remove-encroachment"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260702-wa0133.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नैनी थाना प्रभारी निरीक्षक बृज किशोर गौतम के नेतृत्व में गुरुवार दोपहर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान सब्जी मंडी, मलहरा फाटक, शंकर ढाल, चीनी मिल सहित विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस ने अतिक्रमणकारियों को चिन्हित किया। इस दौरान भारी पुलिस बल की मौजूदगी मे ने सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के निर्देश देते हुए संबंधित लोगों को कड़ी चेतावनी दी कि वे दो दिनों के भीतर स्वयं अपना अतिक्रमण हटा लें। निर्धारित समय सीमा के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया जाएगा।पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मार्गों को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए आगे भी अभियान लगातार जारी रहेगा।वही नैनी स्टेशन रोड पर ई रिक्शा वालों का कब्जा रहता है।इस पर भी अंकुश लगाने की मांग कर रहे स्थानीय लोग।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 20:27:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अतिक्रमण और जाम से कराहते शहर: फुटपाथ गायब, सड़कें सिकुड़ीं, वक्त बर्बाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुम्बई</span>,</strong>  <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु व कोलकाता की तरह अब उत्तर प्रदेश के लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आगरा और इलाहाबाद जैसे शहर जाम से जूझ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथों पर दुकानदारों व स्ट्रीट वैंडर ने कब्जा कर लिया है आखिर अब पैदल चलने वाले लोग कहां चलें और वाहनों को चलाने वाले कहां वाहन चलायें। नतीजा सड़कों पर जाम आधा घंटे का रास्ता दो घंटे में पूरा हो रहा है और हमारे शहरों के नगर निगम व यातायात विभाग कुछ भी कर पाने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। देश के नगर निगमों ने इंदौर नगर निगम से कुछ भी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181534/cities-groaning-due-to-encroachment-and-traffic-jams-footpaths-disappearing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas4.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुम्बई</span>,</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु व कोलकाता की तरह अब उत्तर प्रदेश के लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आगरा और इलाहाबाद जैसे शहर जाम से जूझ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथों पर दुकानदारों व स्ट्रीट वैंडर ने कब्जा कर लिया है आखिर अब पैदल चलने वाले लोग कहां चलें और वाहनों को चलाने वाले कहां वाहन चलायें। नतीजा सड़कों पर जाम आधा घंटे का रास्ता दो घंटे में पूरा हो रहा है और हमारे शहरों के नगर निगम व यातायात विभाग कुछ भी कर पाने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। देश के नगर निगमों ने इंदौर नगर निगम से कुछ भी नहीं सीख पाया। सुबह </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे  लखनऊ का आलमबाग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर का टाटमील चौराहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आगरा की एमजी रोड और इलाहाबाद का चौक व सिविल लाइंस हर जगह एक ही तस्वीर - सड़कें गाड़ियों से पैक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथ पर ठेले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुकानों का सामान बाहर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और लोग सड़क पर चलने को मजबूर। भारत के शहर तेजी से बढ़ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सड़कें उतनी ही रहीं। नतीजा: अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम ने शहरों की सांस रोक दी है। अतिक्रमण: फुटपाथ पर कब्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क पर हक। व्यावसायिक अतिक्रमण- दुकानदार शटर से </span>5-10<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट बाहर सामान रख देते हैं। कपड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैकेनिक का सामान सब सड़क पर। आवासीय अतिक्रमण- कॉलोनियों में लोग घर के आगे पार्किंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाउंड्री वॉल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीढ़ियां निकाल लेते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अस्थायी कब्जा-  ठेले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेहड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेंट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक आयोजन। एक बार लग गया तो हटाना मुश्किल। जगह की कमी- जमीन महंगी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो लोग सार्वजनिक जगह को निजी समझ लेते हैं। राजनीतिक संरक्षण- चुनाव के समय हटाने की हिम्मत कोई नहीं करता। वोट बैंक बन जाते हैं। प्रशासन की निष्क्रियता तोड़फोड़ होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में वही स्थिति। जुर्माना वसूलने का सिस्टम कमजोर है। जाम: सिर्फ देरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक नुकसान- कितना बुरा है हाल</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति आयोग के मुताबिक बेंगलुरु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में लोग औसतन सालाना </span>100-120<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे जाम में फंसते हैं। यानी </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन सिर्फ गाड़ी में बैठे-बैठे। आर्थिक: ईंधन बर्बादी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिलीवरी में देरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोडक्टिविटी गिरना। दिल्ली में हर साल </span>60,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रु का नुकसान सिर्फ ट्रैफिक जाम से होता है। स्वास्थ्य-  गाड़ी में बैठे-बैठे </span>PM 2.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> और </span>CO <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस में जाता है। एम्स की स्टडी कहती है कि ट्रैफिक पुलिस और ऑटो ड्राइवरों में फेफड़े की बीमारी </span>40%<span lang="hi" xml:lang="hi"> ज्यादा है। मानसिक तनाव- रोज </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटा जाम में फंसने वाले लोगों में एंग्जाइटी और रोड रेज के केस </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> गुना ज्यादा हैं। अतिक्रमण और जाम एक-दूसरे को फीड करते हैं। सड़क </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट पर दुकानों का सामान</span>, 10<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट पर पार्किंग। बच गई </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट। </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट पर </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लेन की जगह </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लेन बनती है। एक गाड़ी खराब हुई नहीं कि पूरी सड़क ब्लॉक। लोग फुटपाथ पर नहीं चल सकते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सड़क पर चलते हैं। इससे ट्रैफिक स्लो होता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>10%<span lang="hi" xml:lang="hi"> सड़क पर कब्जा होने से ट्रैफिक की स्पीड </span>40%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक गिर जाती है। कुछ शहरों ने क्या किया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदौर का सिस्टम - बात जब स्मार्ट सिटी की होती है तो सबसे पहले इंदौर का नाम आता है क्योंकि इंदौर नगर निगम ने कई ऐसे प्रावधान किए हैं जिनसे अन्य नगर निगमों को सीख लेनी चाहिए। इंदौर नगर निगम ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत </span>80%<span lang="hi" xml:lang="hi"> फुटपाथ खाली कराए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रीट वेंडर को वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया। अब शहर स्वच्छता में नंबर </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> है और ट्रैफिक फ्लो बेहतर है। भुवनेश्वर </span>ITMS <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम लगाया। कैमरे और </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">से जाम का रियल टाइम एनालिस होता है। सिग्नल खुद एडजस्ट होते हैं। अहमदाबाद </span>BRTS <span lang="hi" xml:lang="hi">और फुटपाथ डेमार्केशन ने पैदल यात्रियों को जगह दी। अतिक्रमण पर जुर्माना सख्त किया। वेंडिंग जोन बनाओ-  हर </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> मीटर पर स्ट्रीट वेंडर के लिए जगह तय करो। दिल्ली में ये कानून </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> में बना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लागू नहीं हुआ। रियल टाइम एक्शन-  शिकायत पर </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे में कार्रवाई। </span>Noida <span lang="hi" xml:lang="hi">का "हटाओ ऐप" इसका उदाहरण है। पार्किंग पॉलिसी-  रेजिडेंशियल एरिया में ऑन-स्ट्रीट पार्किंग को महंगा करो। ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग को सस्ता करो। मास ट्रांजिट- मेट्रो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइकिल लेन बढ़ाओ। जब लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज करेंगे तो गाड़ी कम होगी। मास्टर प्लान में बदलाव-  नई कॉलोनियों में </span>30%<span lang="hi" xml:lang="hi"> जगह सड़क और फुटपाथ के लिए रिजर्व हो। जवाबदेही तय करो-  अतिक्रमण हटाने का टार्गेट म्यूनिसिपल कमिश्नर के दायरे में हो। हर </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने में ऑडिट हो। नागरिक क्या कर सकते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">फोटो खींचो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिपोर्ट करो- </span>MCD, BMC, BBMP <span lang="hi" xml:lang="hi">के पास ऐप हैं। </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> शिकायत पर एक्शन होता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थानीय दुकानदारों से बात करो- </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दुकानदार मिलकर तय करें कि सामान अंदर रखेंगे। एकता काम करती है। पैदल चलो-  </span>1-2 km <span lang="hi" xml:lang="hi">के काम के लिए गाड़ी मत निकालो। साइकिल और मेट्रो यूज करो। शहर सिर्फ सीमेंट और कंक्रीट नहीं होते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो लोगों के चलने-फिरने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस लेने की जगह हैं। जब फुटपाथ गायब हो जाएं और सड़कें पार्किंग बन जाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शहर रहता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ ट्रांजिट पॉइंट रह जाता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिक्रमण हटाना सिर्फ बुलडोजर का काम नहीं है। ये पॉलिसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पॉलिटिक्स और पब्लिक के तीनों के बदलने से होगा। वरना अगले </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल में हमारे शहर सिर्फ गूगल मैप पर लाल रंग के दिखेंगे - जाम का रंग।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:53:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आटो व ई-रिक्शा चौराहे से सौ मीटर दूर खड़ा करें नहीं तो होगी कार्रवाई - डीसीपी यातायात </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> आज दिनांक 30.05.2026 को पुलिस उपायुक्त यातायात रवीन्द्र कुमार द्वारा सुगम यातायात योजना “Reducing Traffic Congestion (RTC) Scheme ” के अंतर्गत चार्लीश चौराहा , पनचक्की चौराहा , नरौना चौराहा , राकेट तिराहा , फूल बाग चौराहा , चेतना चौराहा ,सरसैया घाट चौराहा, मधुबन तिराहा ,सद्धभावना चौराहा एवं परेड चौराहा  का भौतिक निरीक्षण किया गया। </p>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान डीसीपी रविन्द्र कुमार द्वारा यातायात व्यवस्था , सड़क पर वाहन दबाव , अवैध पार्किंग , ई-रिक्शा एवं ऑटो संचालन , सड़क किनारे अतिक्रमण तथा प्रमुख चौराहों पर यातायात संचालन की स्थिति का गहन अवलोकन किया गया। प्रमुख चौराहा/तिराहा से ई- रिक्शा ,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180355/autos-and-e-rickshaws-should-be-parked-100-meters-away-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001957108.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> आज दिनांक 30.05.2026 को पुलिस उपायुक्त यातायात रवीन्द्र कुमार द्वारा सुगम यातायात योजना “Reducing Traffic Congestion (RTC) Scheme ” के अंतर्गत चार्लीश चौराहा , पनचक्की चौराहा , नरौना चौराहा , राकेट तिराहा , फूल बाग चौराहा , चेतना चौराहा ,सरसैया घाट चौराहा, मधुबन तिराहा ,सद्धभावना चौराहा एवं परेड चौराहा  का भौतिक निरीक्षण किया गया। </p>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान डीसीपी रविन्द्र कुमार द्वारा यातायात व्यवस्था , सड़क पर वाहन दबाव , अवैध पार्किंग , ई-रिक्शा एवं ऑटो संचालन , सड़क किनारे अतिक्रमण तथा प्रमुख चौराहों पर यातायात संचालन की स्थिति का गहन अवलोकन किया गया। प्रमुख चौराहा/तिराहा से ई- रिक्शा , ई-ऑटो , टेम्पो आदि को कम से कम 100 मीटर की दूरी पर सवारी बैठाने एवं उतारने हेतु निर्देशित किया गया तथा सड़क पर अनावश्यक रुकने वाले वाहनों के विरुद्ध अभियान चलाने के निर्देश दिए गए एवं  चौराहा/ तिराहा पर चिन्हित *चोक पॉइंट्स (Choke Points)* की पहचान कर उनके कारकों को दूर किया जाए जिससे यात्रियों के ट्रैवल टाइम को कम किया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डीसीपी यातायात द्वारा संबंधित अधिकारियों एवं यातायात कर्मियों को निर्देशित किया गया कि यातायात को सुगम , सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाए रखने हेतु प्रभावी एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। एम्बुलेंस आवागमन को प्राथमिकता देने हेतु विशेष यातायात प्रबंधन लागू करने पर भी बल दिया गया। महोदय द्वारा बताया गया कि “ Reducing Traffic Congestion (RTC) Scheme ” का उद्देश्य शहरवासियों को सुगम, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:50:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

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