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                <title>Local News Sitapur - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>पुल की टूटी रैलिंग बन सकती है दुर्घटना का शबब</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बिसवां (सीतापुर)।</strong> कांवड़ यात्रा शुरू होने में मात्र दो ही दिन शेष बचे हैं फिर भी जहांगीराबाद स्थित केवानी नदी के पुल की टूटकर गायब हुई लोहे की रैलिंग आज तक सही नहीं कराई जा सकी है जिससे इस मार्ग से होकर निकलने वाले कांवड़ियों के लिए खतरा बना हुआ है।गायब लोहे की रैलिंग की जगह किसी ने नारियल की रस्सी बांध दी है। कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है। बहुत समय पहले से पुल की पूर्वी रैलिंग एक जगह पर काफी दूरी तक टूटकर गायब है फिर भी आजतक किसी जिम्मेदार अधिकारी की नजर इस पर नहीं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184427/broken-railing-of-the-bridge-can-become-the-cause-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260731-wa0007.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बिसवां (सीतापुर)।</strong> कांवड़ यात्रा शुरू होने में मात्र दो ही दिन शेष बचे हैं फिर भी जहांगीराबाद स्थित केवानी नदी के पुल की टूटकर गायब हुई लोहे की रैलिंग आज तक सही नहीं कराई जा सकी है जिससे इस मार्ग से होकर निकलने वाले कांवड़ियों के लिए खतरा बना हुआ है।गायब लोहे की रैलिंग की जगह किसी ने नारियल की रस्सी बांध दी है। कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है। बहुत समय पहले से पुल की पूर्वी रैलिंग एक जगह पर काफी दूरी तक टूटकर गायब है फिर भी आजतक किसी जिम्मेदार अधिकारी की नजर इस पर नहीं पड़ी जबकि प्रतिदिन इस बहुचालित  सीतापुर-बहराइच मार्ग पर दिन-रात हजारों लोगों का आवागमन बना रहता है। इसके अलावा अधिकारी भी इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं।यह टूटी रैलिंग किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौरतलब है कि श्रावण मास शुरू हो चुका है और पूरे माह के प्रत्येक रविवार व सोमवार को लाखों की संख्या में कांवड़िया चहलारी घाट से पवित्र सरयू (घाघरा) नदी से जल भरकर कांवड़ लेकर पैदल एवं वाहनों से बिसवां स्थित पत्थर शिवाला में भगवान शिव का जलाभिषेक करने जाते हैं। इस पवित्र केवानी नदी से भी काफी कांवड़िया जल भरते हैं। श्रावण मास के प्रत्येक रविवार को पूरी रात कांवड़ियों का इसी मार्ग से होकर निकलना होता है। यदि रैलिंग की मरम्मत नहीं कराई गई तो कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।इस सम्बन्ध में ए०ई० पी०डब्ल्यू०डी० जितेन्द्र मिश्र ने बताया कि मुझे जानकारी नहीं है। मैंने नहीं देखा है। मैं अभी किसी को भेजकर दिखवाता हूं और जो भी मरम्मत होनी है उसे शीघ्र करवा दिया जायेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 22:25:17 +0530</pubDate>
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                <title>प्रतिबंधित पेड़ो पर आरा चला रहे है लकड़कट्टे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सकरन:</strong> थाना सकरन क्षेत्र के गांव में लकड़कट्टों ने प्रतिबंधित जामुन के पेड़ों की निर्भीक अवैध कटाई कर दी है। सरे आम हो रही इस कटाई से स्थानीय पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।  बड़े जामुन के पेड़ को हाल ही में आरा चलाकर काट दिया गया है।  जामुन के पेड़ वन विभाग के नियमों के तहत संरक्षित श्रेणी में आते हैं। इनकी कटाई के लिए वन विभाग की लिखित अनुमति अनिवार्य है, लेकिन थाना सकरन क्षेत्र के गांव में लकड़कट्टे बिना किसी डर के खुले आम इन पेड़ों को काट रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180344/woodcutters-are-running-saws-on-banned-trees"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/17209.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सकरन:</strong> थाना सकरन क्षेत्र के गांव में लकड़कट्टों ने प्रतिबंधित जामुन के पेड़ों की निर्भीक अवैध कटाई कर दी है। सरे आम हो रही इस कटाई से स्थानीय पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।  बड़े जामुन के पेड़ को हाल ही में आरा चलाकर काट दिया गया है।  जामुन के पेड़ वन विभाग के नियमों के तहत संरक्षित श्रेणी में आते हैं। इनकी कटाई के लिए वन विभाग की लिखित अनुमति अनिवार्य है, लेकिन थाना सकरन क्षेत्र के गांव में लकड़कट्टे बिना किसी डर के खुले आम इन पेड़ों को काट रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। क्षेत्र में पिछले कई दिनों से ऐसी अवैध कटाई लगातार जारी है।वन विभाग और पुलिस प्रशासन की उदासीनता से अवैध लकड़कट्टों का हौसला बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि समय रहते रोकथाम नहीं की गई तो पूरे क्षेत्र के जंगल साफ हो जाएंगे। जामुन के पेड़ केवल फल देने वाले ही नहीं, बल्कि मिट्टी के कटाव को रोकने, भूमिगत जल स्तर बनाए रखने और जैव विविधता को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बड़े पैमाने पर इनकी कटाई से क्षेत्र में पर्यावरणीय असंतुलन, जल संकट और जैव विविधता के नुकसान की आशंका बढ़ती है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से तुरंत संज्ञान लेने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।अब देखना यह है कि वन विभाग और थाना सकरन पुलिस इस पर्यावरणीय अपराध पर कितनी तेजी से कार्रवाई करती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:34:41 +0530</pubDate>
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