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                <title>पशु व्यवहार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>पशु व्यवहार RSS Feed</description>
                
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                <title>जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने अनुवाद की मूक पशुओं की भाषा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानव सभ्यता के इतिहास में यह इच्छा हमेशा से रही है कि हम अपने आस-पास के मूक पशुओं की भाषा को समझ सकें। पौराणिक कहानियों से लेकर आधुनिक विज्ञान कथाओं तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जानवरों से बातचीत करने की क्षमता को हमेशा एक जादुई शक्ति या वरदान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। परंतु वर्तमान समय में जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को गहराई से प्रभावित कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्राचीन स्वप्न भी अब वास्तविकता का रूप लेने लगा है। चीन के एक नए तकनीकी स्टार्टअप ने इस दिशा में एक अत्यंत क्रांतिकारी और साहसिक</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180341/when-artificial-intelligence-translated-the-language-of-mute-animals"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/world-wildlife-day-creative-banner-planet-animals-ai-generated-concept-309958476.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानव सभ्यता के इतिहास में यह इच्छा हमेशा से रही है कि हम अपने आस-पास के मूक पशुओं की भाषा को समझ सकें। पौराणिक कहानियों से लेकर आधुनिक विज्ञान कथाओं तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जानवरों से बातचीत करने की क्षमता को हमेशा एक जादुई शक्ति या वरदान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। परंतु वर्तमान समय में जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को गहराई से प्रभावित कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्राचीन स्वप्न भी अब वास्तविकता का रूप लेने लगा है। चीन के एक नए तकनीकी स्टार्टअप ने इस दिशा में एक अत्यंत क्रांतिकारी और साहसिक कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पशु प्रेमियों तथा तकनीकी जगत को अचंभित कर दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इस चीनी कंपनी ने एक ऐसा विशेष उपकरण तैयार किया है जो पालतू जानवरों की आवाजों और उनके शारीरिक हाव-भाव का विश्लेषण करके उसे इंसानी भाषा में अनुवाद करने में सक्षम है। इस पूरे आविष्कार में सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाली बात यह है कि इस उपकरण के माध्यम से किए जाने वाले अनुवाद को 95 प्रतिशत तक सटीक बताया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि विज्ञान और तकनीक की दुनिया में एक बहुत बड़ा और अभूतपूर्व दावा माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अनोखी और अत्याधुनिक तकनीक को विकसित करने का पूरा गौरव चीन के हांगझोउ शहर में कार्यरत एक नए स्टार्टअप मेंग श्याओयी को जाता है। इस संस्थान ने वर्षों के व्यापक शोध और जटिल परीक्षणों के उपरांत पेट्टीचैट नाम का एक अनूठा स्मार्ट कॉलर बाजार में पेश किया है। यह गले में पहनाया जाने वाला कोई साधारण पट्टा नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु इसके अंदर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की एक पूरी कार्यप्रणाली समाहित है। इस गैजेट की मूल संरचना को शक्ति प्रदान करने के लिए अलीबाबा क्लाउड के सुप्रसिद्ध क्वेन एआई मॉडल का प्रयोग किया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इस मॉडल को विशेष रूप से पशुओं के व्यवहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी विभिन्न ध्वनियों और मनोदशाओं को समझने के लिए ही तैयार किया गया है। इस पूरी तकनीक को विकसित करने में वैज्ञानिकों और डेवलपर्स को पूरे 2 वर्ष का लंबा समय लगा है। इस लंबी अवधि के दौरान कंपनी ने अनेक अनुभवी पशु चिकित्सकों और पशु व्यवहार विशेषज्ञों का सहयोग लिया ताकि पालतू जीवों के संवाद करने के तौर तरीकों का एक अत्यंत प्रामाणिक और वैज्ञानिक डेटाबेस तैयार किया जा सके जो इस उपकरण को आधार प्रदान कर सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस आधुनिक उपकरण को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से स्टार्टअप ने पालतू पशुओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य रूप से कुत्तों और बिल्लियों के लाखों ऑडियो और वीडियो नमूनों को एकत्रित किया और उनका बारीकी से अध्ययन किया। इन संकलित नमूनों में जानवरों के अलग-अलग परिस्थितियों में भौंकने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">म्याऊं करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घुरघुराने तथा उनके बैठने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उठने और पूंछ हिलाने जैसी विभिन्न शारीरिक मुद्राओं को रिकॉर्ड किया गया था। इस विशाल डेटा का विश्लेषण करने के पश्चात ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल को इस योग्य बनाया जा सका कि वह जानवरों के भीतर छिपी भावनाओं के संकेतों को आसानी से पकड़ सके। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब कोई पालतू पशु इस पट्टे को अपने गले में धारण करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसमें स्थापित किए गए बेहद संवेदनशील माइक्रोफोन उसकी आवाजों को तुरंत पकड़ लेते हैं और साथ ही इसमें लगे मोशन सेंसर उसकी शारीरिक गतिविधियों को मापते हैं। यह संपूर्ण प्रक्रिया इतनी तीव्र गति से पूरी होती है कि कुछ ही सेकंडों में सारा डेटा मालिक के स्मार्टफोन में मौजूद एक विशेष ऐप पर भेज दिया जाता है। यह ऐप उस डेटा का अनुवाद करके मोबाइल स्क्रीन पर सीधे छोटे और स्पष्ट वाक्य प्रदर्शित कर देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मालिक को अपने पालतू पशु की स्थिति तुरंत पता चल जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी मोर्चे पर इस उपकरण की सबसे बड़ी विशेषता इसके द्वारा किया जाने वाला सटीकता का दावा है। मेंग श्याओयी स्टार्टअप का कहना है कि उनका यह एआई मॉडल पालतू जानवरों की 20 से अधिक विभिन्न प्रकार की संवेगात्मक और मानसिक दशाओं को बिल्कुल सटीक रूप से पहचानने में पूरी तरह सक्षम है। इन दशाओं में पशुओं की प्रसन्नता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रोध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अकेलापन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षुधा और खेलने की तीव्र इच्छा जैसी बुनियादी भावनाएं सम्मिलित हैं। स्टार्टअप द्वारा प्रस्तुत किए गए आधिकारिक परीक्षण के परिणामों पर यदि दृष्टि डालें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बिल्लियों के संदर्भ में इस डिवाइस की अनुवाद सटीकता दर 94.6 प्रतिशत दर्ज की गई है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुत्तों के भिन्न व्यवहारों और आवाजों को समझने में यह उपकरण 92.3 प्रतिशत तक पूरी तरह सटीक सिद्ध हुआ है। इन दोनों ही पशुओं की सटीकता दरों के औसत को आधार बनाकर कंपनी बाजार में कुल 95 प्रतिशत सटीकता का भारी दावा प्रस्तुत कर रही है। यह आंकड़ा इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इससे पूर्व जितने भी पशु अनुवादक साधन बाजार में उपलब्ध थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे महज मनोरंजन के लिए थे और उनकी सटीकता का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह डिवाइस केवल एकतरफा संचार व्यवस्था तक ही सीमित नहीं रहता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह दोतरफा संवाद स्थापित करने की एक अद्भुत सुविधा भी प्रदान करता है। इसका तात्पर्य यह है कि यह उपकरण न केवल पशु की मूक भाषा को मनुष्य को समझाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसके शुरुआती परीक्षणों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि यह मनुष्यों द्वारा बोले गए वाक्यों को ऐसी विशेष ध्वनियों और तरंगों में परिवर्तित करने का प्रयास करता है जिन्हें पालतू जानवर अधिक सहजता से समझ सकें। इस प्रकार यह उपकरण इंसानों और उनके वफादार पशु साथियों के मध्य आपसी समझ का एक नया माध्यम निर्मित कर रहा है। यदि हम इस गैजेट की भौतिक बनावट और उसके वजन की बात करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसे पालतू जीवों के शारीरिक आराम को ध्यान में रखकर अत्यंत सूक्ष्म रूप में ढाला गया है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे स्मार्ट कॉलर का कुल वजन मात्र 27 ग्राम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके कारण छोटी बिल्ली अथवा लघु आकार के कुत्ते को भी इसे चौबीस घंटे गले में पहने रखने पर किसी भी प्रकार की असुविधा या भारीपन का किंचित भी आभास नहीं होता। इसके अतिरिक्त इसे आईपी65 की उत्कृष्ट रेटिंग प्रदान की गई है जो इसे पूरी तरह से वाटरप्रूफ और धूल से सुरक्षित बनाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पालतू पशु के जल में जाने या कीचड़ में खेलने पर भी यह यंत्र सुचारू रूप से कार्य करता रहता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक उपभोक्ता बाजार में इस उत्पाद की व्यावसायिक पहुंच और आर्थिक व्यवहार्यता को देखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसे आम जनता के बजट के भीतर रखने का सराहनीय प्रयास किया गया है। चीनी उत्पाद बाजार में इस एआई संचालित कॉलर की कीमत लगभग 118 से 120 अमेरिकी डॉलर के मध्य निर्धारित की गई है। यदि हम इस धनराशि को भारतीय मुद्रा के समकक्ष देखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह मूल्य लगभग 10,000 रुपये के आसपास आता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई तकनीकों के प्रति उत्सुक लोगों और पशु प्रेमियों के बीच इस उपकरण को लेकर किस सीमा तक आकर्षण व्याप्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका अनुमान इस सत्य से लगाया जा सकता है कि इसकी आधिकारिक बिक्री आरंभ होने के प्रारंभिक चरण में ही चीन के भीतर इसके 10,000 से अधिक अग्रिम आदेश यानी प्री-ऑर्डर बुक किए जा चुके थे। लोग अपने इन प्रिय और मूक साथियों के अंतर्मन के विचारों को जानने और उनके स्वास्थ्य की सही निगरानी करने हेतु इस राशि को व्यय करने में अत्यधिक रुचि प्रदर्शित कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे इस विशिष्ट क्षेत्र में एक विशाल नए बाजार की नींव पड़ती दिखाई दे रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यद्यपि इस अभूतपूर्व एआई कॉलर को लेकर संपूर्ण विश्व के तकनीक प्रेमियों में एक व्यापक उत्साह का वातावरण दिखाई दे रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु इसके समानांतर ही वैज्ञानिक समुदाय और विश्वप्रसिद्ध पशु व्यवहार विशेषज्ञों का एक बहुत बड़ा वर्ग इस 95 प्रतिशत सटीकता के भारी भरकम दावे को पूर्णतः स्वीकार करने में संकोच कर रहा है और इसे गहरे संदेह के दृष्टिकोण से देख रहा है। अनेक वरिष्ठ जीव विज्ञानियों और शोधकर्ताओं का यह सुदृढ़ तर्क है कि पशुओं का आपसी या इंसानों के साथ संवाद केवल उनकी ध्वनियों अथवा कुछ सीमित शारीरिक हलचलों तक ही सीमित नहीं होता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जानवर अपनी आंतरिक अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने के लिए अपने तात्कालिक परिवेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर से निकलने वाली विशेष गंध जिसे फेरोमोन्स कहा जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंखों के संपर्क और अत्यंत सूक्ष्म शारीरिक मुद्राओं का सहारा लेते हैं। इन सभी जटिल कारकों को केवल गले में बंधे एक छोटे पट्टे के सेंसरों द्वारा पूर्ण रूप से ग्रहण करना अत्यंत कठिन है। आलोचकों का यह भी मत है कि किसी भी स्वतंत्र वैश्विक प्रयोगशाला या अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक शोध पत्रिका द्वारा अभी तक इन दावों की निष्पक्ष जांच नहीं की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसे अंतिम रूप से अचूक मान लेना तर्कसंगत नहीं होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन समस्त वैज्ञानिक मतभेदों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शंकाओं और वैचारिक बहसों के होने के बाद भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस अकाट्य सत्य से तनिक भी पीछे नहीं हटा जा सकता कि यह चीनी स्टार्टअप तकनीकी विकास के इतिहास में एक अत्यंत नवीन और स्वर्णिम अध्याय जोड़ने का प्रयास कर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अदभुत क्षमता का उपयोग करके भिन्न प्रजातियों के बीच की सदियों पुरानी भाषाई दूरी को समाप्त करने का यह उद्यम भविष्य की अनंत और कल्याणकारी संभावनाओं के मार्ग प्रशस्त करता है। यदि यह तकनीक आगामी समय में और अधिक परिष्कृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्नत और त्रुटिहीन होती है</span>,</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसका अनुप्रयोग केवल घरों में पाले जाने वाले कुत्तों और बिल्लियों तक ही सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरन इसका उपयोग बड़े चिड़ियाघरों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय वन्यजीव अभ्यारण्यों और ग्रामीण पशु चिकित्सालयों में गंभीर रूप से बीमार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूक और पीड़ित वन्य जीवों के सटीक उपचार तथा उनकी कुशल देखभाल के लिए बहुत बड़े पैमाने पर किया जा सकेगा। पेट्टीचैट जैसे संवेदनशील डिवाइस यह भली-भांति सिद्ध करते हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का मुख्य ध्येय केवल मानव उत्पादकता बढ़ाना या मशीनी कोडिंग करना ही नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह संपूर्ण प्रकृति के अछूते रहस्यों को उजागर करने और धरती के समस्त सहजीवी प्राणियों के साथ हमारे आत्मीय संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने का एक अनुपम माध्यम बन सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:32:27 +0530</pubDate>
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