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                <title>Legal Education - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Legal Education RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>लखनऊ राज्य कर भवन में अत्याधुनिक लाइब्रेरी का उद्घाटन, अधिवक्ताओं को मिला ज्ञान का नया केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राजधानी के मीराबाई मार्ग स्थित राज्य कर भवन के चौथे तल पर सेल्स टैक्स बार एसोसिएशन द्वारा नवनिर्मित अत्याधुनिक लाइब्रेरी का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। वरिष्ठ एवं सम्मानित अधिवक्ता बनवारी लाल दीक्षित ने फीता काटकर पुस्तकालय का शुभारंभ किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कर अधिवक्ता, बार पदाधिकारी एवं वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि एक अधिवक्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसका ज्ञान और अध्ययन होता है। कानून में होने वाले निरंतर बदलावों, नवीनतम न्यायिक निर्णयों तथा कर संबंधी प्रावधानों की जानकारी के लिए समृद्ध पुस्तकालय की महत्वपूर्ण</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183699/inauguration-of-state-of-the-art-library-in-lucknow-rajya-kar-bhavan-advocates"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260715-wa00051.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजधानी के मीराबाई मार्ग स्थित राज्य कर भवन के चौथे तल पर सेल्स टैक्स बार एसोसिएशन द्वारा नवनिर्मित अत्याधुनिक लाइब्रेरी का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। वरिष्ठ एवं सम्मानित अधिवक्ता बनवारी लाल दीक्षित ने फीता काटकर पुस्तकालय का शुभारंभ किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कर अधिवक्ता, बार पदाधिकारी एवं वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि एक अधिवक्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसका ज्ञान और अध्ययन होता है। कानून में होने वाले निरंतर बदलावों, नवीनतम न्यायिक निर्णयों तथा कर संबंधी प्रावधानों की जानकारी के लिए समृद्ध पुस्तकालय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि यह लाइब्रेरी अधिवक्ताओं के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ शोध एवं प्रभावी पैरवी में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेल्स टैक्स बार एसोसिएशन के महामंत्री रमेश श्रीवास्तव ने कहा कि अत्यल्प समय में इस आधुनिक लाइब्रेरी को तैयार कर संचालन योग्य बनाने का पूरा श्रेय लाइब्रेरी समिति के चेयरमैन एडवोकेट अरविंदर सिंह आनंद को जाता है। उन्होंने बताया कि उनके अथक परिश्रम और समर्पण के कारण अधिवक्ताओं को यह महत्वपूर्ण सुविधा उपलब्ध हो सकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि पुस्तकें किसी भी अधिवक्ता की सच्ची मार्गदर्शक होती हैं। बदलते कानूनी प्रावधानों और कर व्यवस्था की अद्यतन जानकारी के लिए यह लाइब्रेरी युवा एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए समान रूप से लाभदायक सिद्ध होगी। उन्होंने इस अवसर पर सभी अतिथियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं एवं सदस्यों का आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के समापन पर मीडिया कमेटी के सदस्य एडवोकेट मोहम्मद सलीम ने बताया कि लाइब्रेरी में टैक्स, जीएसटी एवं विधि से संबंधित नवीनतम पुस्तकें, बेयर एक्ट्स तथा महत्वपूर्ण विधिक जर्नल्स का समृद्ध संग्रह उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को बेहतर पेशेवर सुविधाएं उपलब्ध कराना बार एसोसिएशन की प्राथमिकता है और यह लाइब्रेरी उसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक कदम है। इससे कर अधिवक्ताओं की शोध क्षमता, विधिक ज्ञान और कार्यकुशलता को नई मजबूती मिलेगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 14:00:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मूल्यांकन में गड़बड़ी के विरोध में रज्जू भैया विश्वविद्यालय में छात्रों का प्रदर्शन।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) राज्य विश्वविद्यालय, प्रयागराज के नैनी परिसर में गुरुवार को विधि (एलएलबी) छठे सेमेस्टर के छात्रों ने मूल्यांकन में कथित गड़बड़ी को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए परीक्षा परिणामों की निष्पक्ष जांच और पुनर्मूल्यांकन की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि हाल ही में घोषित किए गए छठे सेमेस्टर के परीक्षा परिणामों में अनेक विद्यार्थियों को अपेक्षा से बेहद कम अंक दिए गए हैं। कई ऐसे छात्र, जिनका शैक्षणिक प्रदर्शन पूर्व में बेहतर रहा है, उन्हें भी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182481/demonstration-of-students-in-rajju-bhaiya-university-against-irregularities-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260625-wa0084.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) राज्य विश्वविद्यालय, प्रयागराज के नैनी परिसर में गुरुवार को विधि (एलएलबी) छठे सेमेस्टर के छात्रों ने मूल्यांकन में कथित गड़बड़ी को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए परीक्षा परिणामों की निष्पक्ष जांच और पुनर्मूल्यांकन की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि हाल ही में घोषित किए गए छठे सेमेस्टर के परीक्षा परिणामों में अनेक विद्यार्थियों को अपेक्षा से बेहद कम अंक दिए गए हैं। कई ऐसे छात्र, जिनका शैक्षणिक प्रदर्शन पूर्व में बेहतर रहा है, उन्हें भी असामान्य रूप से कम अंक प्राप्त हुए हैं। इससे छात्रों में असंतोष और चिंता का माहौल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में एकत्र होकर नारेबाजी की और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना था कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है, जिससे विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराने तथा संपूर्ण मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा करने की मांग उठाई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की भी मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं की समीक्षा की जाएगी और यदि कहीं कोई त्रुटि पाई जाती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन के दौरान स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही। प्रशासनिक अधिकारियों और विश्वविद्यालय कर्मियों ने छात्रों से वार्ता कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा उचित समाधान का भरोसा दिलाया।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:31:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अधिवक्ता मंच, इलाहाबाद की ओर से बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्र के नाम खुला पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज  </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मान्यवर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपका यह बयान कि “देश में </span>35<span lang="hi" xml:lang="hi">  से </span>40<span lang="hi" xml:lang="hi">  प्रतिशत वकील फर्जी हैं” केवल एक असंवेदनशील टिप्पणी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे अधिवक्ता समुदाय के आत्मसम्मान पर हमला है। यह बयान किसी टीवी बहस के प्रवक्ता ने नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस संस्था के अध्यक्ष ने दिया है जिसे देश के अधिवक्ताओं की गरिमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता और पेशेवर मानकों की रक्षा करनी चाहिए। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सच यह है कि आपका यह बयान अधिवक्ताओं पर आरोप कम और आपकी अपनी विफलताओं का सार्वजनिक इकबाल ज्यादा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि वास्तव में देश में इतनी बड़ी संख्या में फर्जी वकील मौजूद हैं</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180339/open-letter-from-advocates-forum-allahabad-to-bar-council-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/750x450_360885-mannan-kumar-mishra.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज  </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मान्यवर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपका यह बयान कि “देश में </span>35<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>40<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत वकील फर्जी हैं” केवल एक असंवेदनशील टिप्पणी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे अधिवक्ता समुदाय के आत्मसम्मान पर हमला है। यह बयान किसी टीवी बहस के प्रवक्ता ने नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस संस्था के अध्यक्ष ने दिया है जिसे देश के अधिवक्ताओं की गरिमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता और पेशेवर मानकों की रक्षा करनी चाहिए। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सच यह है कि आपका यह बयान अधिवक्ताओं पर आरोप कम और आपकी अपनी विफलताओं का सार्वजनिक इकबाल ज्यादा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि वास्तव में देश में इतनी बड़ी संख्या में फर्जी वकील मौजूद हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सबसे पहले कठघरे में आप स्वयं खड़े हैं। क्योंकि वर्षों से बार काउंसिल ऑफ इंडिया का नेतृत्व आपके हाथों में रहा है। डिग्री सत्यापन से लेकर नामांकन व्यवस्था तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लॉ कॉलेजों की मान्यता से लेकर विधि शिक्षा की निगरानी तक — हर महत्वपूर्ण तंत्र आपकी अध्यक्षता और प्रभाव के अधीन संचालित होता रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर यह बताइए कि—</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिना भवनों वाले लॉ कॉलेजों को मान्यता किसने दी</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिना योग्य शिक्षकों और पुस्तकालयों के संस्थानों को “लीगल एजुकेशन” का लाइसेंस किसने दिया</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विधि शिक्षा को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त निजी दुकानों में बदलने दिया किसने</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निरीक्षणों को औपचारिक भ्रष्टाचार और कागजी खानापूर्ति में बदलने दिया किसने</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज अदालतों में जो गुणवत्ता-विहीन विधि स्नातकों की भीड़ दिखाई देती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह किसी संयोग का परिणाम नहीं है। यह आपकी अध्यक्षता में वर्षों तक चलाए गए उस विनाशकारी मॉडल का परिणाम है जिसमें शिक्षा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मान्यता का कारोबार फलता-फूलता रहा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह है कि इस पूरे पतन की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय आपने पूरे अधिवक्ता समाज को ही “फर्जी” घोषित कर दिया। यह वही मानसिकता है जिसमें नेतृत्व अपनी असफलता छिपाने के लिए जनता को दोषी ठहराने लगता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश का अधिवक्ता समाज यह भी देख रहा है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया धीरे-धीरे अधिवक्ताओं की स्वतंत्र संस्था कम और सत्ता प्रतिष्ठान के अनौपचारिक सहयोगी मंच में अधिक बदलती गई। अदालतों में संघर्षरत युवा अधिवक्ताओं की समस्याओं पर आपकी आवाज़ कभी उतनी मुखर नहीं रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जितनी सत्ता के प्रति आपकी विनम्रता रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आपके सार्वजनिक आचरण से यह धारणा गहरी हुई है कि बार काउंसिल का नेतृत्व अब अधिवक्ताओं की लड़ाई लड़ने के बजाय सत्ता की कृपा प्राप्त करने में अधिक रुचि रखता है। राज्यसभा की राजनीति और सत्ता के गलियारों में स्वीकार्यता की आकांक्षा ने बार काउंसिल की संस्थागत गरिमा को गंभीर क्षति पहुँचाई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के तीन नए आपराधिक कानूनों—</span>Bharatiya Nyaya Sanhita,Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita<span lang="hi" xml:lang="hi">और</span>Bharatiya Sakshya Adhiniyam <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर जब देशभर के अधिवक्ताओं में व्यापक असंतोष था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब जिला बारों से लेकर उच्च न्यायालयों तक गंभीर आपत्तियाँ उठ रही थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वकील समुदाय लोकतांत्रिक विमर्श और प्रतिरोध चाहता था — तब आपने उस असंतोष को संगठित करने के बजाय उसे ठंडा करने की भूमिका निभाई। आपने अधिवक्ताओं की आवाज़ बनने के बजाय सत्ता को असुविधा से बचाने का काम किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बार काउंसिल ऑफ इंडिया को एक स्वतंत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्भीक और लोकतांत्रिक संस्था होना चाहिए था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आपके कार्यकाल में यह संस्था लगातार केंद्रीकृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपारदर्शी और सत्ता-अनुकूल होती गई। अधिवक्ताओं का विश्वास कमजोर हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विधि शिक्षा का स्तर गिरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवा वकीलों का भविष्य असुरक्षित हुआ और संस्था की नैतिक विश्वसनीयता लगातार क्षीण होती गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज जब आप पूरे पेशे को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब देश का अधिवक्ता समाज आपसे पूछ रहा है —यदि सब कुछ इतना ही सड़ा हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वर्षों से शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति की जवाबदेही कहाँ तय होगी</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में नैतिकता का न्यूनतम सिद्धांत यह कहता है कि जो व्यक्ति अपने ही कार्यकाल को इतनी भयावह विफलता के रूप में प्रस्तुत कर रहा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं रह जाता।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतः अब समय आ गया है कि आप अधिवक्ता समुदाय को अपमानित करने के बजाय अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करें और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन पद से तत्काल त्यागपत्र दें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि वकालत अभी भी लोकतंत्र का स्वतंत्र स्तंभ है —और इसे किसी व्यक्ति की राजनीतिक महत्वाकांक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्ता-निकटता और प्रशासनिक विफलताओं की ढाल नहीं बनने दिया जा सकता।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">— <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिवक्ता मंच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:27:57 +0530</pubDate>
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